वाराणसी की मिट्टी से महका आनंद विहार का शिव मंदिर, संत रविदास जयंती पर कलश स्थापित

नई दिल्ली। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर आनंद विहार में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। शाहदरा जिला भाजपा की ओर से संत रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी की पावन मिट्टी से भरा कलश आनंद विहार मंडल के डी-ब्लॉक स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया गया। कलश स्थापना के दौरान मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी और भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए।इससे पहले कार्यकर्ता और समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिक विवेक विहार स्थित अग्रसेन भवन में एकत्रित हुए। यहां संत रविदास जी के जीवन और उनके सामाजिक समरसता के संदेश को याद किया गया। इसके बाद वाराणसी से लाई गई पावन मिट्टी के कलश को श्रद्धापूर्वक शिव मंदिर लाया गया, जहां विधि-विधान से पूजन के बाद उसे स्थापित किया गया। भाजपा शाहदरा जिलाध्यक्ष दीपक गाबा और भाजपा आनंद विहार वार्ड अध्यक्ष सचिन शर्मा ने कहा कि संत रविदास जी ने अपना पूरा जीवन समानता, भाईचारे और मानवता के लिए समर्पित किया। उनकी जन्मस्थली की मिट्टी का कलश आनंद विहार में स्थापित होना क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी के विचार आज भी समाज को जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम, उपमहापौर मोनिका पंत, महेश माखीजा, कुलदीप, प्रकाश, मंदिर प्रधान अशोक गुप्ता, प्रेम गंभीर सहित मंडल के पदाधिकारी, मंदिर समिति के सदस्य, पंडितगण और डी-ब्लॉक के बड़ी संख्या में निवासी मौजूद रहे। भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालुओं ने संत रविदास जी के भजनों का गायन कर उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।

आईपी यूनिवर्सिटी में दिल्ली में अर्बन ग्रीनिंग और एयर क्वालिटी पर विमर्श सत्र का आयोजन

नई दिल्ली।यूनिवर्सिटी को हाल ही में लीड नॉलेज इंस्टीटूशन(एलकेआई) का दर्जा दिया गया है।यह सत्र उसी के तत्वाधान में किया गया।इस सत्र का उद्घाटन करते हुए यूनिवर्सिटी के कुलपति पद्मश्री प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा ने कहा कि सरकार अकेले पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती। इसमें सबकी साझेदारी जरूरी है। लोगों को जागरूक करने एवं प्रेरित करने में अकादमिक जगत की भी बड़ी भूमिका है।उन्होंने कहा कि बदलाव रातों-रात संभव नहीं है।सतत प्रयास के बाद ही सुखद परिणाम की आशा कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है।प्रदूषण के कई स्रोत हैं।उन स्रोतों पर नियंत्रण आवश्यक है और प्रदूषण नियंत्रण के अन्य उपायों पर भी काम करने की ज़रूरत है।उन्होंने कहा की “टेरी” जैसी अकादमिक संस्थाएं इस दिशा में अच्छा काम कर रही है।अन्य संस्थाओं को भी आगे आना होगा।सीएक्यूएम के एक्सपर्ट मेंबर डॉ. एस. डी. अत्री ने इस अवसर कहा कि धुआं और धूल प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत हैं। प्रदूषण कम करने के लिए इन दोनों पर नियंत्रण आवश्यक है।उन्होंने कहा कि विकसित भारत में पर्यावरण भी एक बड़ा कंपोनेंट है।इस अवसर पर दो टेक्निकल सत्र का आयोजन भी किया गया जिसमें देश के कोने-कोने से आयें विशेषज्ञों ने अपने विचार रखें।

स्थायी समिति की बैठक में ‘‘आप’’ ने दिल्ली की बदहाल सफाई व्यवस्था और जलभराव को लेकर भाजपा शासित एमसीडी को घेरा

नई दिल्ली।दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की मंगलवार को हुई बैठक में आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने दिल्ली की बदहाल सफाई व्यवस्था, जगह-जगह फैले कूड़े और बारिश के दौरान होने वाले गंभीर जलभराव को लेकर भाजपा शासित एमसीडी को जमकर घेरा। बैठक के दौरान ‘‘आप’’ के पार्षदों ने सवाल उठाया कि दिल्ली की जनता एक तरफ गंदगी और कूड़े के ढेर से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ थोड़ी सी बारिश में दिल्ली की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। इसके बावजूद भाजपा सरकार और एमसीडी प्रशासन के पास इन समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं है। ‘‘आप’’ ने दिल्ली की सफाई व्यवस्था, जलभराव, स्वास्थ्य विभाग और सौंदर्यीकरण जैसे अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।इस बाबत एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली की सफाई व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है और बारिश के दौरान जलभराव ने भाजपा सरकार तथा एमसीडी की तैयारियों की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि जब दिल्ली में पर्याप्त सफाई कर्मचारियों की भर्ती करने और मौजूदा कर्मचारियों को पक्का करने की जरूरत है, तब भाजपा सरकार निजी कंपनियों को हजारों मशीनों के टेंडर देकर आखिर किसे फायदा पहुंचाना चाहती है? उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार एमसीडी में नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। आम आदमी पार्टी जनता की आवाज बनकर दिल्ली की सफाई, जलभराव और हर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मजबूती से लड़ती रहेगी।स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य व निगम पार्षद राफिया माहिर ने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी की पांच महीने बाद जनरल मीटिंग हुई। लेकिन उस जनरल मीटिंग के अंदर डीएमसी एक्ट के नियमों के अनुसार कोई भी काम नहीं हो रहा है। सारी एंटीसिपेटरी अप्रूवल गलत तरीके से दी जा रही हैं। आज मैंने स्टैंडिंग कमेटी के अंदर सभी अधिकारियों से पूछा कि क्या डीएमसी एक्ट के अंदर मेयर या स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन को ऐसी कोई पावर है? लेकिन कोई भी अधिकारी इसका जवाब नहीं दे पाया।राफिया माहिर ने कहा कि दिल्ली के अंदर भाजपा की सरकार में बड़े-बड़े घोटाले खुलेआम चल रहे हैं। न अधिकारियों के ऊपर और न ही भाजपा नेताओं के ऊपर किसी का कोई कंट्रोल है। जो काम टेंडर करके किया जाना चाहिए था, वह काम इन्होंने गैर-कानूनी तरीके से बिना टेंडर के ही पुरानी कंपनी को दे दिया है। मैंने इसके ऊपर भी जांच की मांग की है।वहीं, स्टैंडिंग कमेटी सदस्य व निगम पार्षद दौलत पवार ने बताया कि भाजपा शासित एमसीडी से दिल्ली की सफाई व्यवस्था संभल नहीं पा रही है और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अब इसका पूरा ठीकरा वेब्स कर्मचारियों पर फोड़ा जा रहा है। एमसीडी में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भाजपा नेतृत्व और प्रशासन की है, लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय कर्मचारियों को दोषी ठहराया जा रहा है।उन्होंने कहा कि भाजपा को कर्मचारियों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय अपनी विफलताओं की जवाबदेही लेनी चाहिए। दिल्ली की सफाई व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने, पर्याप्त सफाई कर्मचारियों की भर्ती करने, कर्मचारियों को नियमित करने और जलभराव रोकने के लिए नालों एवं ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।दौलत पवार ने बताया कि नगर निगम का कोई भी अधिकारी या कोई भी नेता किसी एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाया, क्योंकि उनके पास कोई जवाब है ही नहीं। भाजपा की सरकार में नगर निगम के अंदर आए दिन नए-नए और बड़े-बड़े भ्रष्टाचार सामने आ रहे हैं। भाजपा सरकार को अब केवल विज्ञापन और दावों की राजनीति छोड़कर दिल्ली की सफाई व्यवस्था और जलभराव जैसी गंभीर समस्याओं का जमीन पर समाधान करना चाहिए।

पक्ष एवं विपक्ष के सभी पार्षदों को अपने मुद्दे एवं सुझाव रखने का पूरा अवसर दिया गया : सत्या शर्मा

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक आज सफलतापूर्वक आयोजित की गई, जिसमें जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई तथा कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक के दौरान पक्ष एवं विपक्ष दोनों के पार्षदों को अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित समस्याएं, मुद्दे एवं सुझाव रखने का पूरा अवसर दिया गया।स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि स्थायी समिति लोकतांत्रिक संवाद और जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि बैठक में सभी पार्षदों द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।बैठक में पार्षदों द्वारा मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम, स्वाइन फ्लू, अवैध प्ले स्कूल, सड़कों पर अवैध अतिक्रमण,बेसहारा पशुओं की समस्या, पार्कों के रखरखाव, प्रदूषण तथा स्वच्छता व्यवस्था सहित विभिन्न जनहित के विषय प्रमुखता से उठाए गए।मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के संबंध में श्रीमती सत्या शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेंगू, मलेरिया एवं अन्य मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग कराने के साथ-साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि इन अभियानों में संबंधित क्षेत्र के पार्षदों को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाए,सत्या शर्मा ने दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि नागरिकों को स्वाइन फ्लू से बचाव एवं सावधानियों के संबंध में जागरूक करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।स्थायी समिति अध्यक्ष ने दिल्ली में संचालित किए जा रहे अवैध प्ले स्कूलों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऐसे संस्थानों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से संचालित हो रहे खाने के ठेलों तथा खुले में तंदूर का इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। श्रीमती सत्या शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे स्थानों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।सत्या शर्मा ने दिल्ली में आवारा एवं बेसहारा गायों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कहा कि सड़कों पर पशुओं की मौजूदगी से यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर नई गौशालाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को सुरक्षित रूप से निर्धारित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।सत्या शर्मा ने कहा कि स्थायी समिति का उद्देश्य केवल प्रस्ताव पारित करना नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में उठाए गए जनहित के विषयों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए तथा संबंधित विभागों द्वारा की गई कार्रवाई की नियमित समीक्षा की जाए।उन्होंने कहा कि स्वच्छता, जनस्वास्थ्य, नागरिक सुरक्षा, अतिक्रमण एवं सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े विषय सीधे दिल्लीवासियों के दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं। इन सभी विषयों पर निगम द्वारा प्राथमिकता के आधार पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पीएम मोदी के जन्मदिन पर भाजपा का ‘सेवा संकल्प अभियान’, वडनगर से वाराणसी तक निकलेगी यात्रा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देशभर में एक महीने का विशेष जनसंपर्क अभियान ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करेगी। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा और प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा होगा। अभियान का सबसे प्रमुख आकर्षण ‘वडनगर से वाराणसी यात्रा’ होगी, जिसे ‘जन्मभूमि से कर्मभूमि यात्रा’ के रूप में भी प्रस्तुत किया जा रहा है। इस यात्रा के तहत प्रधानमंत्री मोदी की जन्मस्थली गुजरात के वडनगर से उनकी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक साथ यात्राएं शुरू होंगी। योजना के अनुसार वडनगर और वाराणसी से 10-10 टीमें एक ही दिन रवाना होंगी। वाराणसी से निकलने वाली टीमें एक महीने में वडनगर पहुंचेंगी, जबकि वडनगर से चलने वाली टीमें इसी अवधि में वाराणसी पहुंचेंगी। प्रत्येक टीम प्रतिदिन करीब 100 किलोमीटर की यात्रा करेगी। इनमें बाइक सवार, बसें और भाजपा कार्यकर्ता शामिल होंगे, जो केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों की उपलब्धियों का संदेश लोगों तक पहुंचाएंगे। यात्रा के दौरान टीमें प्रतिदिन निर्धारित दूरी तय करने के बाद विभिन्न स्थानों पर रुकेंगी और चार विशेष कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए नरेंद्र मोदी सरकार और संबंधित राज्य सरकारों की योजनाओं तथा उपलब्धियों की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा भाजपा ने पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक संपर्क बढ़ाने के लिए अन्य यात्राओं की भी योजना बनाई है। अभियान के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान, स्वास्थ्य और स्वच्छता अभियान तथा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। भाजपा युवाओं को जोड़ने और सेवा तथा जनकल्याण का संदेश फैलाने पर विशेष जोर देगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य प्रधानमंत्री के जन्मदिन को पारंपरिक उत्सव की बजाय सेवा कार्यों से जोड़ना है। देशभर में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों के इस अभियान में शामिल होने की संभावना है। वे आम लोगों से संपर्क कर केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। पार्टी इस महीने भर चलने वाले अभियान को जनता से अपने जुड़ाव को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़े प्रयास के रूप में देख रही है।

सत्ताधारी एनसी ने श्रीनगर और जम्मू में भाजपा दफ्तर के शांतिपूर्ण ‘घेराव’ की घोषणा की

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने मंगलवार को घोषणा की कि वह केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए जम्मू और श्रीनगर में भारतीय जनता पार्टी के दफ्तरों का शांतिपूर्ण ‘घेराव’ करेगी। यह दबाव इस बात के लिए बनाया जा रहा है कि केंद्र सरकार संसद और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र शासित प्रदेश के लोगों से किए गए वादों को पूरा करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर को ‘सही समय’ पर राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा। भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस देने का भरोसा दिलाया था। इन आश्वासनों को देखते हुए सत्ताधारी एनसी ने मंगलवार को घोषणा की कि वह बुधवार, 2 सितंबर को श्रीनगर और जम्मू में भाजपा मुख्यालय का शांतिपूर्ण घेराव करेगी। इसका मकसद केंद्र सरकार पर संसद और सुप्रीम कोर्ट के सामने किए गए वादों को पूरा करने के लिए दबाव बनाना है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी एक बयान में कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर से जुड़ी उसकी स्पष्ट और पुरानी मांगों पर केंद्रित होंगे। पार्टी ने अपनी मांगों में राज्य का दर्जा बहाल करने, संवैधानिक गारंटी, आरक्षण फाइल को मंजूरी देने और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने जैसी बातें शामिल कीं। एनसी ने कहा कि इस प्रस्तावित कदम का मकसद संसद और सुप्रीम कोर्ट के सामने किए गए वादों को लेकर केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करना है। पार्टी ने कहा, “जम्मू-कश्मीर के लोगों का जनादेश कोई ब्लैंक चेक नहीं है। इसका सम्मान किया जाना चाहिए, इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।” उसने प्रस्तावित घेराव को शांतिपूर्ण बताया और अपनी मांगों को राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीकों से पूरा करने की अपील की। एनसी ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन किया था ताकि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके।

पीएम मोदी की विदेश नीति का मूल ‘शांति’ है, पेजेश्कियन से मुलाकात में दिया बड़ा संदेश : पूर्व एमओएस एमजे अकबर

नई दिल्ली। किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात हुई। अटकलें लगाई जा रही है कि दोनों नेताओं के बीच चाबहार पोर्ट को लेकर भी चर्चा हुई। इसे विदेश मामलों के पूर्व राज्यमंत्री एमजे अकबर ने भारत की शांति-केंद्रित विदेश नीति का बड़ा संकेत बताया। एमजे अकबर ने कहा, “किर्गिस्तान में प्रधानमंत्री मोदी के एजेंडा में सबसे जरूरी ईरानी राष्ट्रपति के साथ उनकी पहली मीटिंग थी। इस मीटिंग से उन्होंने एक बहुत मजबूत संदेश दिया क्योंकि मुलाकात खुद मक्का पैक्ट के बैकग्राउंड में थी और इसने असल में यह संदेश दिया कि समस्याओं का हल युद्ध और गठबंधन नहीं हैं। समस्याओं का हल बातचीत में है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी नीति का मुख्य हिस्सा माना है, जो शांति है।” उन्होंने कहा कि ईरान और भारत ने एक नया तालमेल खोजने के लिए, कूटनीति में जिसे ‘लचीला यथार्थवाद’ कहा जाता है, उसका इस्तेमाल किया है। बातचीत का एक बहुत महत्वपूर्ण तत्व व्यापार पर चर्चा थी और इसे अमेरिका के ईरान पर ‘बाह्य प्रतिबंध’ और टैरिफ लगाने के प्रयास के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। दोनों ने चर्चा की और प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि जहाजों की आवाजाही के लिए होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण है। एमजे अकबर ने कहा कि मेरे विचार में, सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय तत्व चाबहार बंदरगाह पर चर्चा थी। चाबहार बंदरगाह, वर्तमान संकट में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। यह बंदरगाह लंबे समय से भारत-ईरान एजेंडे का हिस्सा रहा है, लेकिन वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के पहले पांच वर्षों में यह साकार हुआ। चाबहार पोर्ट को लेकर फिर से चर्चा होना दोनों देशों के लिए अत्यंत अच्छी खबर है। भारत और ईरान सभ्यताओं के आधार पर बने राष्ट्र हैं, जो समझते हैं कि वे जो द्विपक्षीय संबंध बना सकते हैं, वे युद्ध के लिए बनाए गए पैक्ट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। चीन को लेकर एमजे अकबर ने कहा, “हमारे एनएसए अजीत डोभाल की चीन की यात्रा का भारत-चीन समीकरणों के साथ-साथ इन दो देशों, इन दो पड़ोसियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कठिनाई, जिसे सीमा प्रबंधन कहा जा सकता है, पर भी असाधारण रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सीमा प्रबंधन पिछले पांच दशकों से अधिक समय से हमारी समस्या का स्रोत रहा है। 1962 का युद्ध स्वयं ही एक बहुत बड़ी रेखा था। उन्होंने कहा कि इससे पहले हमारे संबंध मोटे तौर पर सौहार्दपूर्ण थे और तब से सीमा हमारे दोनों सेनाओं के साथ-साथ हमारे राजनयिकों और हमारी विदेश नीतियों के लिए संघर्ष और चुनौती दोनों का बिंदु रही है। मोटे तौर पर 1988 में सीमा पर हुई सहमति बनी हुई है, जिसमें दोनों पक्षों ने एक बहुत ही मौलिक समझ विकसित की कि समाधान ‘समाधान न करने’ में है। इसका मतलब है कि आप वास्तविकता को वैसे ही स्वीकार करते हैं, जैसी वह है और फिर सहयोग के अन्य तरीके और अन्य रास्ते खोजते हैं। पूर्व एमओएस ने कहा कि यह एक ऐसा संदेश है जिसे डोभाल की यात्रा ने मजबूत किया है। इसके पर्याप्त सबूत हैं कि चीन ने यह समझा है कि चीनी व्यवस्था के भीतर के ‘हॉक’, चीनी सेना के भीतर के ‘हॉक’ भारत के साथ अच्छे संबंधों के लिए अनुकूल नहीं हैं। ऐसी अटकलें हैं कि चीनी सेना के सर्वोच्च कमान में एक बहुत प्रमुख सैन्य ‘हॉक’ को हाल ही में अचानक हटा दिया गया है। हम इसकी पूरी सच्चाई नहीं जानते क्योंकि चीनी व्यवस्था अपारदर्शी बनी हुई है। लेकिन, हम यह जानते हैं कि राष्ट्रपति शी जल्द ही दिल्ली आएंगे। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए और दोनों पक्ष यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि यह यात्रा, हालांकि ब्रिक्स के बैनर तले होगी, लेकिन इसमें एक बहुत मजबूत द्विपक्षीय तत्व होगा कि यह बातचीत और यह बैठक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच एक सार्थक बैठक, मौजूदा अशांति को समाप्त करेगी और निकट भविष्य में सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।

पीएम विश्वकर्मा योजना से संवर रही नीमच के युवाओं की किस्मत, उद्यमियों को मिल रहा सहारा

नीमच। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ नीमच जिले में पारंपरिक कारीगरों, छोटे कामगारों और स्वरोजगार की इच्छुक महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया बनती नजर आ रही है। योजना के माध्यम से प्रशिक्षण, कौशल विकास और बैंक ऋण की सुविधा मिलने से कई छोटे कारोबारी गुमटी या घरेलू स्तर के काम से आगे बढ़कर अपनी दुकान और व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं। नीमच जिला पंचायत के सीईओ अमन वैष्णव की मानें तो योजना शुरू होने के बाद जिले में अब तक करीब 36 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 5,500 आवेदनों का सफल पंजीकरण हुआ, जबकि 5,050 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ब्यूटी पार्लर, कारपेंट्री, बार्बर शॉप सहित अलग-अलग ट्रेड में लाभार्थियों को आधुनिक कौशल और व्यवसाय से जुड़ी जानकारी दी गई। जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 1,800 ऋण आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिनके माध्यम से कुल 15.5 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे गरीब और छोटे कामगारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है, जो अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या मौजूदा काम को विस्तार देना चाहते हैं। रक्षिता ब्यूटी पार्लर की संचालक नयागांव की रानी जैन ने बताया कि वह करीब आठ वर्षों से पार्लर का काम कर रही थीं। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग मिली। इसके बाद उन्हें 1 लाख रुपए का ऋण मिला, जिससे उन्होंने पार्लर के लिए नए उत्पाद और जरूरी सामान खरीदे। इससे कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली और परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई। नयागांव की ही नंदिनी ब्यूटी पार्लर की संचालक सोनम सेन ने बताया कि योजना के तहत 15 दिन की ट्रेनिंग में व्यवसाय चलाने और आगे बढ़ाने के तरीके समझाए गए। बैंक के माध्यम से मिले 1 लाख रुपए के ऋण को उन्होंने अपने व्यवसाय में लगाया। उन्होंने कहा कि पूंजी की कमी के कारण छोटे कारोबार को विस्तार देना मुश्किल होता है। ऐसे में योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हुई। नीमच की रत्ना व्यास ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत उन्हें सिलाई मशीन और 1 लाख रुपए का ऋण मिला। उन्होंने इस राशि से अपने सिलाई व्यवसाय को आगे बढ़ाया। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के कपड़े तैयार करने का काम शुरू किया। रत्ना की मानें तो उन्होंने योजना के तहत मिला ऋण भी चुका दिया है और अब थोक में कपड़े लेकर सिलाई का काम कर रही हैं। सिलाई के व्यवसाय ने उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। जावी निवासी दशरथ देवीलाल सेन के लिए भी योजना स्वरोजगार को नई दिशा देने वाली साबित हुई। उन्होंने बताया कि पहले वह गुमटी पर दुकान चलाते थे। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 1 लाख रुपए का ऋण मिलने के बाद उन्होंने अपनी खुद की दुकान स्थापित की। दशरथ को योजना के तहत प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन 500 रुपए का भत्ता भी मिला। साथ ही, उन्हें काम से संबंधित किट और मशीनें भी उपलब्ध कराई गईं। अपनी दुकान शुरू होने के बाद उनकी आजीविका पहले की तुलना में बेहतर हुई है।

मुस्लिम नेताओं-बुद्धिजीवियों की 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन, अधिकारों के मुद्दों पर करेगी काम

नई दिल्‍ली। मुस्लिम नेताओं और बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में लिए गए फैसले के बाद मंगलवार को 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का ऐलान किया गया। इस समिति में सामाजिक, धार्मिक, कानूनी, राजनीतिक और सिविल सोसाइटी से जुड़े प्रमुख लोग शामिल हैं। समिति का गठन भारतीय मुसलमानों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक रास्ते अपनाने और संविधान में मिले अधिकारों, नागरिक अधिकारों, प्रतिनिधित्व और समुदाय से जुड़े दूसरे मामलों पर मिल-जुलकर कार्रवाई करने के लिए किया गया है। समिति के ऐलान के लिए नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसे समिति के कई प्रमुख सदस्यों ने संबोधित किया। समिति में कानून, सार्वजनिक जीवन, राजनीति, सामाजिक काम, धार्मिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले लोग शामिल हैं। इसका मकसद लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से इन मुद्दों को उठाना है। राष्ट्रीय निगरानी समिति की 24वीं बैठक में यह तय किया गया कि जिन इलाकों में संकट और गंभीर चुनौतियां हैं, वहां दौरे किए जाएंगे। इसका मकसद मुस्लिम समुदाय के बीच भरोसा बढ़ाना और स्थानीय लोगों व संगठनों से सीधे बात करना है। पहला दौरा उत्तराखंड का करने का फैसला किया गया, क्योंकि यह दिल्ली के करीब है और राज्य में कई मुद्दे सामने आ रहे हैं। इसके तहत एक प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून का दौरा किया और उत्तराखंड के सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों तथा मुस्लिम नेतृत्व के साथ कई बैठकें कीं। पहली बैठक उत्तराखंड के प्रमुख सिविल सोसाइटी सदस्यों के साथ हुई। इसमें राज्य की मौजूदा स्थिति और समाज के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल भी बैठक में मौजूद रहे। दूसरी बैठक उत्तराखंड के मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ हुई, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व के लोग शामिल हुए। बैठक में समुदाय के सामने मौजूद चिंताओं और राज्य की व्यापक स्थिति पर चर्चा हुई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के सदस्यों ने कहा कि भारतीय मुसलमानों के अधिकारों और हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए सरकारी संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ मिलकर काम करना जरूरी है। सलमान खुर्शीद ने कहा, “इस आंदोलन ने सभी को एक साथ लाया है। यह भारत के मुसलमानों की तरफ से एक पहल है। इस देश के हर नागरिक के अपने अधिकार हैं। देश में हमारी अलग-अलग तरह की विविधता के बावजूद हम सभी के अधिकार बराबर हैं। हम सभी लोगों को अपने साथ जुड़ने और कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए आमंत्रित करते हैं। हम भारत में हो रहे एक बड़े मुद्दे में अपना योगदान देना चाहते हैं।” मौलाना अत्ताउर रहमान कासमी ने कहा, “इस वक्त यह कारवां समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। इसकी जरूरत सिर्फ शहरों में ही नहीं, बल्कि गांवों और देहातों में भी महसूस की जा रही है। यह कारवां पूरब से पश्चिम तक जाए, देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों तक पहुंचे और उन लोगों को सहारा दे जो खुद को हाशिये पर और कमजोर महसूस कर रहे हैं।” मोहम्मद अदीब ने कहा, “मैंने कुछ पत्रकारों को यह सवाल करते सुना कि क्या यह आंदोलन पर्सनल लॉ बोर्ड या जमाअत के खिलाफ है। शरीयत से जुड़े मामलों में हम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत हैं और उसकी रहनुमाई पर चलते हैं। हमारा काम राजनीतिक दायरे में है। यह संगठन किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सबको साथ लेकर चलना और मिलकर काम करना चाहता है।” नदीम खान ने स्थिति की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, “पूरे देश में हम ध्वस्तीकरण, विस्थापन, पुशबैक और धार्मिक स्थलों पर हमले देख रहे हैं, जिनसे मुसलमान खास तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। असम में हजारों परिवार विस्थापित हुए हैं, जबकि जारी पुशबैक की कार्रवाई ने यह गंभीर चिंता पैदा की है कि भारतीय नागरिकों को भी गलत तरीके से हिरासत में लिया जा रहा है या बाहर धकेला जा रहा है। गुजरात के कच्छ क्षेत्र और राजस्थान के कुछ हिस्सों में दरगाहों और मस्जिदों को भी निशाना बनाया गया है। इन घटनाओं का पैमाना एक बड़ी संस्थागत चुनौती की ओर इशारा करता है, जिसके लिए मिल-जुलकर और प्रभावी तरीके से जवाब देने की जरूरत है। कर्नूला महापंचायत, एसआईआर और फॉर्म-7 समेत कानूनी मामलों में हमारे हस्तक्षेप के साथ-साथ हमारी टीमें जमीन पर लगातार काम कर रही हैं, हिंसा की घटनाओं का दस्तावेज तैयार कर रही हैं और प्रभावित समुदायों से बातचीत कर रही हैं।” सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा, “यह एक बड़ी मुहिम और एक अहम पल की शुरुआत है। यह ऐसी समिति है जिसमें पूरे देश के मुसलमानों का प्रतिनिधित्व है और इसमें नेताओं से लेकर युवाओं तक सभी को शामिल किया गया है। समिति हालात पर लगातार नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप भी करेगी। इसका काम सिर्फ मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश के लिए होगा।” जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी ने असम की स्थिति पर कहा, “असम में हिंदू-मुस्लिम तनाव भाषा के मुद्दे की तुलना में कम है। वहां बेदखली की कार्रवाई बंगाली मुसलमानों तक सीमित है। असमिया और बंगाली मुसलमानों के बीच एक दूरी है। हम दोनों पक्षों के साथ बिना किसी पक्षपात के बराबरी से खड़े हैं।” मौलाना मोहसिन अली तकवी ने कहा, “आज देश में जिस तरह के हालात हैं, जिस तरह लोगों के साथ नाइंसाफी हो रही है और देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को कमजोर किया जा रहा है, ऐसे में इस कोशिश को कामयाब बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।” फुजैल अहमद अय्यूबी ने कहा, “हमारे धार्मिक रहनुमा, राजनीतिक प्रतिनिधि, सिविल सोसाइटी संगठन और वकील, सभी को एक छतरी के नीचे मिलकर काम करना चाहिए। इस वक्त हम जिस तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैं, उसे देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि सभी एक साथ आएं और एक बैनर के नीचे मिलकर इस चुनौती का सामना करें।” एसक्यूआर इलियास ने कहा, “इस वक्त भारतीय मुसलमान जिस हालात से गुजर रहे हैं, उससे लगता है कि मुसलमानों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें घेरा जा रहा है। एसआईआर, एनआरसी का एक और रूप नजर आता है, जिसके जरिए मुस्लिम नामों को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है। भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू किया जा रहा है। लिंचिंग

यमन में संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान में आईएस का प्रवक्ता ढेर

अदन। यमन सरकार ने मंगलवार को दावा किया कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकी संगठन का आधिकारिक प्रवक्ता अबू हुज़ैफा अल-अंसारी संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान में मारा गया। यह अभियान यमनी सुरक्षा बलों और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की विशेष बलों ने मिलकर चलाया। सरकारी टीवी चैनल सबा ने केंद्रीय राज्य सुरक्षा एजेंसी के हवाले से बताया कि अभियान का उद्देश्य अल-अंसारी को जीवित पकड़ना था, लेकिन कार्रवाई के दौरान वह मारा गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की स्पेशल फोर्सेज को यमन की 22वीं काउंटर टेररिज्म यूनिट का सहयोग मिला। हालांकि, एजेंसी ने अभियान की जगह और अन्य परिचालन संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की। स्थानीय सैन्य सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे दक्षिण-पूर्वी हदरमौत प्रांत के सैयून शहर में की गई। सुरक्षा बलों ने अल-हौटा इलाके के एक पुराने मिट्टी के मकान को निशाना बनाया, जहां अल-अंसारी ठहरा हुआ था। सूत्रों ने बताया कि अल-अंसारी अभियान में घायल होने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन बाद में चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई में मकान में मौजूद एक अन्य व्यक्ति भी मारा गया। अभियान के दौरान ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि छापेमारी के समय सैयून शहर में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष और अस्थिरता का फायदा उठाकर अल-कायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला और आईएस जैसे आतंकी संगठन देश के दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। इस बीच यमन सरकार ने यह भी दावा किया कि उसकी नौसेना ने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के पास स्थित सरकारी नियंत्रण वाले द्वीपों की ओर बढ़ रही हूती विद्रोहियों की चार विस्फोटकों से लदी नौकाओं को रोक लिया। सरकारी समाचार एजेंसी सबा के अनुसार, नौकाएं रणनीतिक हनिश और ज़ुकर द्वीपों की ओर बढ़ रही थीं, जिन्हें यमनी नौसेना ने बीच रास्ते में रोक दिया। सैन्य सूत्रों का कहना है कि रविवार और सोमवार को भी हूती नौकाओं की गतिविधियां दर्ज की गई थीं। हालांकि, हूती समूह ने इन दावों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।