नीट विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत, 5 सितंबर का प्रदर्शन रद्द: अभिजीत दिपके

छत्रपति संभाजीनगर। नीट से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को रद्द करने की घोषणा की। उन्होंने अदालत के निर्देशों को छात्रों और प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राहत बताते हुए इसे लंबे समय से चल रहे आंदोलन की बड़ी जीत करार दिया। अभिजीत दिपके ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत के निर्णय से उन छात्रों और परिवारों को न्याय मिला है, जो नीट विवाद को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे थे। यह जीत केवल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले लोगों की नहीं, बल्कि देशभर में आंदोलन का समर्थन करने वाले हर व्यक्ति की है। जो लोग सड़कों पर नहीं उतर पाए, लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट, व्हाट्सऐप स्टेटस या किसी अन्य माध्यम से अपनी आवाज उठाते रहे, वे भी इस जीत के हिस्सेदार हैं। लोगों की लगातार आवाज और दबाव के कारण दिल्ली से प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र आया और विभिन्न स्तरों पर बैठकों का दौर चला। दिपके ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों में कई बैठकें हुईं और दिल्ली से विशेष प्रतिनिधिमंडल भी महाराष्ट्र पहुंचा। करीब सात-आठ बैठकों में इस बात पर चर्चा हुई कि आंदोलन कर रहे छात्रों और अपने बच्चों के लिए न्याय की मांग कर रहे परिवारों को किस तरह उचित न्याय दिलाया जा सके। आंदोलन के दौरान कथित धमकियों और लाठीचार्ज के बावजूद लोगों ने अपनी आवाज उठाना बंद नहीं किया। उनके मुताबिक, इसी दृढ़ता ने इस परिणाम को संभव बनाया। अभिजीत दिपके ने नीट विवाद से प्रभावित और अपने बच्चों को खो चुके परिवारों से भावुक होकर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोग उन बच्चों को बचा नहीं सके और इस कमी की भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने अपनी जान गंवाई, उनकी कोई गलती नहीं थी। इन बच्चों ने डॉक्टर बनने के लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई की थी और अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया था। दिपके ने कहा कि वह कई प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं। उन्होंने आकांक्षा, काहान पटेल, प्रदीप मेघवाल और रिया थापा के परिवारों से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिवारों की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने मेहनत से परीक्षा की तैयारी की और अपने भविष्य के लिए सपने देखे, उनके साथ जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय की लड़ाई आगे भी महत्वपूर्ण रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को रद्द करने का ऐलान करते हुए दिपके ने इसे आंदोलन से जुड़े छात्रों, अभिभावकों और देशभर में आवाज उठाने वाले लोगों की सामूहिक उपलब्धि बताया।

जंतर-मंतर टेरर मॉड्यूल विवाद के बाद आईपीएस अधिकारी भुल्लर बॉर्डर रेंज के आईजीपी नियुक्त

चंडीगढ़। अमृतसर के पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के एक महीने के अंदर ही सीनियर आईपीएस ऑफिसर गुरप्रीत सिंह भुल्लर को मंगलवार को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें सुरक्षा से जुड़े अहम पद पर नियुक्त किया गया है। भुल्लर को पंजाब पुलिस द्वारा पकड़े गए पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल का कनेक्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों से जोड़ने वाले बयान पर हुए विवाद के बाद अमृतसर सीपी के पद से हटाया गया था। पुलिस अधिकारियों के बड़े फेरबदल में भुल्लर को बॉर्डर रेंज का इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) नियुक्त किया गया। इस रेंज में अमृतसर, बटाला, गुरदासपुर और पठानकोट जिले आते हैं, जो ज्यादातर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित हैं। उन्होंने बॉर्डर रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) हरमनबीर सिंह गिल की जगह ली, जिन्हें अमृतसर का पुलिस कमिश्नर बनाया गया था। ट्रांसफर से पहले, भुल्लर उस जांच का नेतृत्व कर रहे थे जिसमें आईएसआई से जुड़ी एक साजिश का पर्दाफाश हुआ था। पिछले महीने अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने आईएसआई समर्थित सीमा-पार आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इस दौरान नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया (जिनमें चार नाबालिग भी शामिल थे) और तीन अवैध पिस्तौल, नौ कारतूस और चार पेट्रोल-बोतल बम बरामद किए गए। सोशल मीडिया पर भुल्लर की प्रेस ब्रीफिंग के वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस प्रवक्ता ने साफ किया कि 4 अगस्त को अमृतसर में पुलिस कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ हिस्सों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था। उस कॉन्फ्रेंस में पुलिस द्वारा आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने की जानकारी दी गई थी, और उन हिस्सों का इस्तेमाल जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल से जोड़ने की कोशिश के तौर पर किया गया। प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने बताया था कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों ने जंतर-मंतर की रेकी (निगरानी) की थी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। उन्होंने साफ किया कि ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया था जिससे यह लगे कि गिरफ्तार लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल थे या जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों का उस मॉड्यूल से कोई संबंध था। प्रवक्ता ने कहा कि बदले हुए बैकग्राउंड विजुअल, चुनिंदा वीडियो एडिटिंग और साथ में दिए गए कैप्शन या स्पष्टीकरण ‘गलत हैं और एक भ्रामक धारणा बनाते हैं कि गिरफ्तार लोग जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों से जुड़े थे।’ उन्होंने कहा, “प्रेस कॉन्फ्रेंस के ऑडियो और असल जानकारी में कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की गई थी, लेकिन चुनिंदा एडिटिंग और साथ में दिए गए कैप्शन प्रेस कॉन्फ्रेंस को सही ढंग से पेश नहीं करते हैं। ऐसा लगता है कि ये पुलिस कमिश्नर के बयान को गलत और भ्रामक तरीके से पेश करने की कोशिशें हैं।

‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ मैन्युफैक्चरिंग विजन का आधार होना चाहिए: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग विजन को ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने एमएसएमई से कहा कि वे उभरते हुए ग्लोबल ट्रेड के मौकों का फायदा उठाएं और खुद को ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव कंपनियों में बदलें। ग्रेटर नोएडा में एमएसएमई कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने छोटे और मध्यम उद्योगों से अपने टर्नओवर का एक हिस्सा रिसर्च, डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों, आईआईटी, रिसर्च संस्थानों, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का विजन एक ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व करता है जो मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में अग्रणी हो, और रणनीतिक व आर्थिक क्षमताओं में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ देश के युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करे। बदलती वैश्विक सप्लाई चेन और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स की बढ़ती मांग पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ये घटनाक्रम भारतीय एमएसएमई के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा अमेरिका, यूके, न्यूजीलैंड, ओमान, स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से व्यापारिक साझेदारी को गहरा करने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “ये एफटीए नेटवर्क एमएसएमई और उद्योगों के लिए वैश्विक व्यापार और निर्यात के अवसरों का एक विशाल भंडार खोलते हैं। उन्हें क्रेडिट गारंटी विस्तार और जीएसटी युक्तिकरण जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और व्यापार समझौतों का पूरा लाभ उठाना चाहिए और भारतीय उत्पादों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना चाहिए।” राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में एमएसएमई की संख्या 2012-13 में लगभग 4.67 करोड़ से बढ़कर वर्तमान में लगभग 8 करोड़ हो गई है, जो देश में बढ़ते उद्यमिता इकोसिस्टम को दर्शाता है। उन्होंने ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, ऑटोनॉमस सिस्टम, एडवांस्ड मैटेरियल्स, स्पेस और क्वांटम टेक्नोलॉजीज को ऐसे क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया जो एमएसएमई के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय एमएसएमई को गुणवत्ता और विश्वसनीयता के माध्यम से वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान बनानी चाहिए। रक्षा क्षेत्र में इन गुणों का महत्व और भी अधिक है, जहां हर कंपोनेंट की विश्वसनीयता सीधे रक्षा बलों की परिचालन प्रभावशीलता को प्रभावित करती है।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने सिंगल जज के आदेश पर लगाई रोक, हाइड्रा कमिश्नर को राहत

हैदराबाद। तेलंगाना हाई कोर्ट ने मंगलवार को हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (हाइड्रा) के कमिश्नर ए.वी. रंगनाथ को राहत देते हुए, सिंगल जज के उस आदेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को उन्हें पद से हटाने और उनकी जगह किसी दूसरे अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। रंगनाथ ने 27 जुलाई को सिंगल जज के आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी। यह याचिका एक डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राजीव शकधर ने रंगनाथ की ओर से पक्ष रखा। शुरुआती दलीलें सुनने के बाद बेंच ने सिंगल जज के आदेश पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। जस्टिस अनिल कुमार जुकांती ने 27 जुलाई को मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर के पद से हटा दें और उनकी जगह किसी उपयुक्त व्यक्ति को नियुक्त करें। यह आदेश शांता श्रीराम कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका पर आया था। कंपनी का आरोप था कि हाइड्रा के अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया और 50 गाड़ियों और 200 कर्मचारियों के साथ लोथकुंटा में उनकी 40 एकड़ जमीन में घुस गए। कोर्ट ने कहा था कि रंगनाथ ‘अपनी मर्जी से काम करने वाले’ बन गए हैं और हाइड्रा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है, साथ ही रेवेन्यू, सिंचाई और जीएचएमसी विभागों को नजरअंदाज कर रहा है। इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने हाइड्रा कमिश्नर को कड़ी फटकार लगाई थी और चेतावनी दी थी कि कोर्ट के आदेशों का बार-बार उल्लंघन करने पर उन्हें सेना की हिरासत में लेकर आर्मी बैरक में रखने का निर्देश दिया जा सकता है। कमिश्नर को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता की अनुमति के बिना विवादित संपत्ति में हाइड्रा के कर्मचारियों और मशीनरी के घुसने और वहां बाड़ लगाने के लिए स्पष्ट रूप से माफी मांगी जानी थी। हलफनामा दाखिल नहीं किया गया और अधिकारी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए, इसलिए जस्टिस जुकांती ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सरकार को रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर के पद से हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने गौर किया कि लगभग डेढ़ साल की अवधि में रंगनाथ के खिलाफ 63 अवमानना ​​याचिकाएं लंबित थीं। आदेश के बाद रंगनाथ ने कहा कि वह अपने खिलाफ दायर सभी 63 अवमानना ​​मामलों का कानूनी तरीके से सामना करेंगे और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी मामले प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों द्वारा दायर किए गए थे, जो झीलों और सरकारी जमीनों की सुरक्षा के लिए हाइड्रा के अभियान से प्रभावित हुए थे। रंगनाथ ने आरोप लगाया कि जमीन माफिया और अतिक्रमणकारी गलत जानकारी देकर कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा मुझे सौंपी गई जिम्मेदारियों की परवाह किए बिना मैं 100 प्रतिशत परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हूं और ऐसा करना जारी रखूंगा।” इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) के अधिकारी रंगनाथ, दो साल पहले राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एजेंसी हाइड्रा के प्रमुख हैं। पिछले दो सालों में हाइड्रा का दावा है कि उसने 1.5 लाख करोड़ रुपए की कीमत वाली 3,315 एकड़ सरकारी जमीन बचाई है और कई जल निकायों को बहाल किया है। एजेंसी ने कहा कि उसने झीलों, नालों, पार्कों, सरकारी जमीनों और ब्लू-ग्रीन संसाधनों को वापस हासिल किया और उनकी सुरक्षा की। हाइड्रा के कामकाज की विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की है। उन्होंने एजेंसी पर सरकारी जमीन पर बने गरीबों के घरों को बुलडोजर से गिराने का आरोप लगाया है।

मुंबई : कूपर अस्पताल में बुर्का पहनने की वजह दो महिलाओं को एंट्री से रोकने का आरोप, नेताओं ने की आलोचना

मुंबई। मुंबई के कूपर अस्पताल के प्रसूति (मेटरनिटी) वार्ड में कथित तौर पर बुर्का पहनने के कारण दो महिलाओं को प्रवेश नहीं दिए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इसकी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की है। एक दिन पहले, अधिवक्ता जहांआरा ने आईएएनएस को बताया था कि उन्हें बुर्का पहनने के कारण मेटरनिटी वार्ड में जाने से रोका गया। उन्होंने दावा किया, “मैंने बात की और अपना परिचय भी दिया, लेकिन फिर भी मुझे रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि आप कोई भी हों, हम आपको बुर्का पहनकर अंदर नहीं जाने देंगे। जब मैंने वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि बुर्का पहनकर अंदर आने वाले लोग बच्चों को चुरा लेते हैं।” दूसरी महिला, अधिवक्ता जहरा शेख ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो असली हैं। उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मेरे साथ भी अंधेरी स्थित कूपर अस्पताल में यही घटना हुई। मैं अपने एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। मेटरनिटी वार्ड के बाहर सुरक्षा कर्मियों ने मुझसे कहा कि अंदर जाने से पहले बुर्का उतारना होगा। मैंने उन्हें अपना चेहरा दिखाया और जब कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा कारणों से है।” इस घटना की निंदा करते हुए एनसीपी (शरद पवार) की प्रवक्ता विद्या चव्हाण ने कहा, “अगर उनका धर्म उन्हें बुर्का पहनने की अनुमति देता है, तो किसी चौकीदार या व्यक्ति को पूछने का अधिकार नहीं है कि वे बुर्का क्यों पहन रही हैं? भारतीय संविधान सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है।” उन्होंने कहा, “मुस्लिम महिलाओं को इस तरह परेशान करना गलत है।” मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि वह इस मामले को देखेंगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह पूरी तरह गलत है। यह बुनियादी मानवता का मामला है। यह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित अस्पताल है, हालांकि ऐसी घटना किसी भी अस्पताल में नहीं होनी चाहिए। अस्पताल किसी व्यक्ति को उसके धर्म, चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो या किसी अन्य धर्म का, उसके आधार पर आंकने की जगह नहीं है।” उन्होंने कहा कि किसी बीएमसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस नेता चरण सिंह सप्रा ने भी इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। वहीं, एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “इस तरह का व्यवहार देश के लिए नुकसानदायक है। जो लोग रोजाना मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं और गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हैं, वे बुर्का और हिजाब पहनने वाली महिलाओं को निशाना बना रहे हैं।” उन्होंने कहा, “मुस्लिम महिलाएं बुर्का और हिजाब पहनती हैं और आगे भी पहनती रहेंगी। उन्हें रोका नहीं जा सकता। हम मांग करते हैं कि सिर्फ बुर्का पहनने के कारण महिला को अस्पताल में प्रवेश से रोकने वाले कांस्टेबल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।” सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर वारिस पठान ने कहा, “बीएमसी को अपने संसाधनों से अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए।” शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा कि कोई भी जानबूझकर ऐसा काम नहीं करेगा। हर व्यक्ति को अपने धर्म की परवाह किए बिना पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखना भी नगर निगम और अस्पताल की जिम्मेदारी है।

राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन की तैयारियों पर ओम बिरला की समीक्षा बैठक, भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दिए अहम निर्देश

नई दिल्‍ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में मंगलवार को 13 से 19 सितंबर तक दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित होने वाले 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सभी सदस्यों और महिला प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे निर्धारित सत्रों और कार्यशालाओं में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने कहा कि चर्चाओं के दौरान प्रभावी ढंग से अपने विचार रखें, ताकि भारत के राष्ट्रीय हितों और दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत एवं संरक्षित किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि इस प्रकार के वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी से हमारी संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का दायरा और अधिक मजबूत होता है। साथ ही, उन्होंने सभी प्रतिनिधियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सम्मेलन के दौरान निर्धारित सभी बैठकों और वार्ताओं में समयबद्धता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखें, जिससे देश का प्रतिनिधिमंडल एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर सके। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘बदलती विश्व व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय कानून और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना: कॉमनवेल्थ नेतृत्व’ निर्धारित किया गया है, जिसके तहत वैश्विक परिदृश्य पर संसद की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल के लिए छह प्रमुख सीपीसी (सीपीसी) कार्यशालाओं के एजेंडे को रेखांकित किया गया। इन कार्यशालाओं में विविध अर्थव्यवस्थाओं में समावेशी और निष्पक्ष व्यापार, सुलभ संसद एवं दिव्यांगजनों का समावेशन, जलवायु अनुकूलन और लचीलापन, संसदों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के वर्तमान अनुप्रयोग, मानवाधिकारों की रक्षा और पश्च-विधायी संवीक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। मुख्य सत्रों के अतिरिक्त, सम्मेलन में युवाओं की सहभागिता पर केंद्रित ‘लोकतंत्र में युवाओं का भरोसा और भागीदारी फिर से बनाना’ विषयक युवा गोलमेज बैठक और सीपीए महासभा की डिबेट भी आयोजित होगी। इसके साथ ही, 10वें राष्ट्रमंडल महिला संसद सदस्य (सीडब्‍ल्‍यूपी) सम्मेलन के अंतर्गत “मेकिंग जेंडर सेंसिटिविटी एन इंस्‍टीट्यूटनल मेंडेट” थीम पर आधारित चार विशेष कार्यशालाएं भी इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेंगी। बैठक के अंत में लोकसभा के महासचिव तथा संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सम्मेलन की रूपरेखा, प्रशासनिक और सामरिक विषयों से जुड़े विस्तृत विवरण सभी उपस्थित सदस्यों के सामने प्रस्तुत किए, जिससे सभी प्रतिनिधियों को अपनी सहभागिता की रूपरेखा स्पष्ट हो गई है।

जीडीपी ग्रोथ पर सरकार ने डेटा पेश करने में महारत हासिल की, वक्त बताएगा हकीकत: टीएस सिंह देव

नई दिल्ली। भारत की 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ पर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से डेटा पेश करने की कला में महारत हासिल कर ली है और इसकी हकीकत क्या है, यह तो वक्त ही बताएगा। साथ ही, उन्होंने चीनी और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे रेस्टोरेंट, होटल और आम कंज्यूमर्स पर सीधा असर पड़ेगा। भारत की 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने कहा, “इस सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से डेटा पेश करने की कला में भी महारत हासिल कर ली है। क्या यह सच में वैसा ही है जैसा दिखाया गया है, या कहानी का कोई और पहलू भी है? यह तो वक्त ही बताएगा।” विश्लेषण में थोड़ा समय लगता है। अर्थशास्त्री इसका विश्लेषण करेंगे और अपने नतीजे पेश करेंगे। अगर यह सच में 7.8 है तो यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा, “चीनी की कीमत 75 के पार हो गई है। अगर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ रही हैं तो कमर्शियल गैस इस्तेमाल करने वाले कंज्यूमर्स के लिए, मतलब जहां खाना बनता है, रेस्टोरेंट चलते हैं, होटल चलते हैं और ढाबे चलते हैं, अगर आप वहां कीमतें बढ़ाते हैं, तो ये सभी चीजें कंज्यूमर्स के लिए और भी महंगी हो जाएंगी। यह चिंता की बात है।” उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मेहनती भारतीयों का अपमान एक ऐसी सरकार कर रही है जो उनकी मेहनत का क्रेडिट खुद लेना चाहती है। भारतीय जनता पार्टी और उसकी लीडरशिप ने लगातार यह दिखाने की कोशिश की है कि उनके पास कोई जादू की छड़ी है, जैसे देश के लोग बस घर पर बैठकर कुछ नहीं कर रहे हैं, और जो कुछ भी हो रहा है वह सिर्फ उनकी मेहनत की वजह से हो रहा है। अर्थव्यवस्था को लेकर राहुल गांधी के बयानों को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि कई दूसरे लोग भी आज इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि देश की आर्थिक हालत या बताई गई जीडीपी ग्रोथ उतनी सकारात्मक नहीं है जितना सरकार दिखाती है।

दिल्ली सरकार की बस ऑपरेटरों को चेतावनी, यात्री सुरक्षा नियमों में लापरवाही पर तय कार्रवाई

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सभी बस ऑपरेटरों को यात्रियों की सुरक्षा और सुचारू संचालन से जुड़े निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश जारी किए हैं। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा, “सुरक्षा उपाय केवल कागजों पर नहीं, बल्कि पूरी तरह से लागू होने चाहिए। बस ऑपरेटर सुनिश्चित करें कि सभी आवश्यक सिस्टम, उपकरण और प्रक्रियाएं सही तरीके से काम कर रही हों।” उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। परिवहन विभाग इन निर्देशों और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुपालन की जांच के लिए विशेष अभियान चलाएगा। बस ऑपरेटरों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे इन दिशानिर्देशों की जानकारी ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों तक पहुंचाएं और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। परिवहन विभाग द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए निर्देश दिल्ली में चलने वाली सभी बसों पर लागू होंगे, जिनमें अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाली और यहां संचालित होने वाली बसें भी शामिल हैं। सरकार ने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर जोर दिया है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पंकज कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करने और अनिवार्य सुरक्षा मानकों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री के निर्देशों के बाद परिवहन विभाग ने सभी बस ऑपरेटरों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन हर समय चालू और कार्यशील रहें। पैनिक बटन यात्रियों की पहुंच में हों और सही स्थिति में बनाए रखे जाएं। सभी बसों में काम करने योग्य अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) और फर्स्ट एड किट रखना भी अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, बसों को रात या खाली समय में केवल अधिकृत, सुरक्षित और पर्याप्त रोशनी वाले स्थानों पर ही खड़ा किया जाना चाहिए। निर्देशों के अनुसार, हर बस के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट होना चाहिए और वाहन पूरी तरह से तकनीकी रूप से फिट होना चाहिए। साथ ही प्रदूषण संबंधी मानकों का पालन और वैध पीयूसी प्रमाण पत्र रखना भी जरूरी होगा। ऑपरेटरों को यातायात नियमों और निर्धारित बस लेन के पालन का निर्देश दिया गया है। यात्रियों को बस में चढ़ाने और उतारने का कार्य केवल अधिकृत बस स्टॉप या निर्धारित स्थानों पर ही किया जा सकेगा। सड़क के बीच में, चौराहों पर या किसी असुरक्षित और गैर-अधिकृत स्थान पर बस रोकने पर सख्त रोक लगाई गई है।

बीडब्ल्यूएफ चाइना मास्टर्स: लोह कीन से मिली करारी हार, चीन के युकी पहले ही राउंड में बाहर

शेनझेन (चीन)। बीडब्ल्यूएफ चाइना मास्टर्स 2026 में चीन के शी युकी को सिंगापुर के लोह कीन यू के हाथों सीधे गेम में 21-11, 21-10 से हार का सामना करना पड़ा। मंगलवार को शेनझेन में खेला गया यह मुकाबला 30 मिनट तक चला, जिसमें हार के बाद युकी वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद लगातार दूसरे टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में ही बाहर हो गए। छठी वरीयता प्राप्त शी युकी और लोह के बीच का मुकाबला पहले दिन के मुख्य आकर्षणों में से एक था, क्योंकि दोनों खिलाड़ी क्रमशः 2025 और 2021 में वर्ल्ड चैंपियन रह चुके हैं। हालांकि, शी पूरे मैच में संघर्ष करते नजर आए। एक अन्य चीनी खिलाड़ी हू झेआन को डेनमार्क के पांचवीं वरीयता प्राप्त एंडर्स एंटोनसेन से हार का सामना करना पड़ा। एंटोनसेन ने पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए 19-21, 21-11, 21-16 से जीत हासिल की। वहीं, विमेंस सिंगल्स में, चीन की हान कियानक्सी ने चीनी ताइपे की पाई यू-पो को आसानी से 21-10, 21-9 से शिकस्त दी। अब अगले राउंड में उनका मुकाबला साउथ कोरिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त एन से-यंग से होगा। एन ने चीनी ताइपे की लिन शियांग-टी को 21-11, 21-3 से शिकस्त देकर अगले दौर में जगह बनाई। थाईलैंड की पोर्नपावी चोचुवोंग को चीनी ताइपे की चिउ पिन-चियान ने 21-14, 21-15 से हराया। मेंस डबल्स में शीर्ष वरीयता प्राप्त साउथ कोरिया की जोड़ी किम वॉन-हो और सियो सेउंग-जे भी पहले राउंड में बाहर हो गई। उन्हें इंडोनेशिया के लियो रोली करनांडो और डैनियल मार्थिन से 21-19, 21-19 से हार का सामना करना पड़ा। मिक्स्ड डबल्स में, चीन के टॉप सीड फेंग यानझे और हुआंग डोंगपिंग ने जापान के युता वातानाबे और माया तागुची के खिलाफ एक रोमांचक मुकाबले में जीत हासिल की। ​​दोनों जोड़ियों के बीच मुकाबला निर्णायक गेम तक खिंचा, जिसमें फेंग और हुआंग ने छह मैच प्वाइंट्स गंवाए, लेकिन आखिर में संयम बनाए रखते हुए 27-25 से जीत दर्ज की और अंतिम 16 में अपनी जगह सुनिश्चित की।

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में बारिश का अलर्ट, उधम सिंह नगर के साथ ही लखीमपुर खीरी के स्कूलों में अवकाश

देहरादून/लखनऊ। उत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है। इसी कड़ी में उत्तराखंड के उधम सिंह नगर और उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 2 सितंबर को स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून द्वारा 1 सितंबर को शाम 3:30 बजे जारी पूर्वानुमान में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। विभाग के अनुसार राज्य के विभिन्न जनपदों में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से नदियों और नालों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने बड़ा निर्देश दिया है। जिलाधिकारी ने जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष के तौर पर आदेश जारी किया है कि उधम सिंह नगर के अंतर्गत संचालित सभी शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों और सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में 2 सितंबर, बुधवार को अवकाश रहेगा। हालांकि, शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने-अपने केंद्रों पर उपस्थित रहेंगे और विभागीय कार्यों का निर्वहन करेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 51 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। उधर, यूपी के लखीमपुर खीरी में भी लगातार बारिश, जलभराव और अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। इसको लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार, जनपद के सभी परिषदीय, मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्ड से संचालित हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में 2 सितंबर को अवकाश घोषित किया जाता है। सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित होकर अपार आईडी, डीबीटी, यू-डायस और अन्य विभागीय कार्यों को पूरा करेंगे। आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों जिलों में प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि खराब मौसम में बच्चों को घर पर ही सुरक्षित रखें और अफवाहों पर ध्यान न दें।