नई दिल्ली।यूनिवर्सिटी को हाल ही में लीड नॉलेज इंस्टीटूशन(एलकेआई) का दर्जा दिया गया है।यह सत्र उसी के तत्वाधान में किया गया।इस सत्र का उद्घाटन करते हुए यूनिवर्सिटी के कुलपति पद्मश्री प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा ने कहा कि सरकार अकेले पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती। इसमें सबकी साझेदारी जरूरी है। लोगों को जागरूक करने एवं प्रेरित करने में अकादमिक जगत की भी बड़ी भूमिका है।उन्होंने कहा कि बदलाव रातों-रात संभव नहीं है।सतत प्रयास के बाद ही सुखद परिणाम की आशा कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है।प्रदूषण के कई स्रोत हैं।उन स्रोतों पर नियंत्रण आवश्यक है और प्रदूषण नियंत्रण के अन्य उपायों पर भी काम करने की ज़रूरत है।उन्होंने कहा की “टेरी” जैसी अकादमिक संस्थाएं इस दिशा में अच्छा काम कर रही है।अन्य संस्थाओं को भी आगे आना होगा।सीएक्यूएम के एक्सपर्ट मेंबर डॉ. एस. डी. अत्री ने इस अवसर कहा कि धुआं और धूल प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत हैं। प्रदूषण कम करने के लिए इन दोनों पर नियंत्रण आवश्यक है।उन्होंने कहा कि विकसित भारत में पर्यावरण भी एक बड़ा कंपोनेंट है।इस अवसर पर दो टेक्निकल सत्र का आयोजन भी किया गया जिसमें देश के कोने-कोने से आयें विशेषज्ञों ने अपने विचार रखें।