सरकार शुरू से ही नीट पर चर्चा कराने के पक्ष में, एनडीए के सभी दल चर्चा चाहते हैंः रिजिजू

नई दिल्ली,। संसद के मौजूदा मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। यह गतिरोध संसद की कार्यवाही में भी देखने को मिल रहा है। गुरुवार को नीट परीक्षा पर चर्चा के विषय पर सदन में एक बार फिर हंगामा हुआ। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में कहा कि सरकार शुरू से ही नीट मुद्दे पर चर्चा कराने के पक्ष में है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी दल भी इस विषय पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने सदन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया है। गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद किरेन रिजिजू ने सदन को बताया कि सरकार की ओर से विपक्ष के नेताओं, विशेष रूप से मल्लिकार्जुन खड़गे तथा अन्य नेताओं से बातचीत की गई थी। यह बातचीत इसलिए की गई थी ताकि सदन में चर्चा शुरू हो सके। रिजिजू ने कहा कि सरकार ने विपक्ष से अनुरोध किया है कि चर्चा की अवधि और स्वरूप आपसी सहमति से तय किया जा सकता है, लेकिन चर्चा के लिए कोई शर्त नहीं लगाई जानी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा की बात तो करता है लेकिन शर्तें लगाकर उसे बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे यह संदेश जाता है कि विपक्ष चर्चा नहीं होने देना चाहता। गौरतलब है कि विपक्ष ने सरकार के समक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रखी है। विपक्ष स्पष्ट कहना है की धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा होने तक कोई सार्थक चर्चा नहीं हो सकती। रिजिजू ने कहा कि नीट परीक्षा के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और इस विषय पर लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक न्यायालयों की व्यवस्था की जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि दोषियों को जल्द और सख्त सजा मिल सके। रिजिजू ने विपक्ष से पुन अपील करते हुए कहा कि वह अपनी शर्तें वापस ले और सदन में बिना किसी बाधा के नीट मुद्दे पर चर्चा शुरू होने दे। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि चर्चा पहले दिन से ही शुरू हो जानी चाहिए थी। हालांकि विपक्ष सरकार की इन बातों पर सहमत नहीं हुआ। विपक्षी सांसदों का स्पष्ट कहना था की वे अपनी मांगों पर अडिग हैं और परीक्षा में हुई अनियमितता की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपनी पद से इस्तीफा देना चाहिए।

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