विदेश मंत्री जयशंकर ने मनीला में श्रीलंकाई, बांग्लादेशी समकक्षों और ईयू की काजा कैलास से की मुलाकात

मनीला। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर आसियान समिट में शामिल होने के लिए फिलीपींस के मनीला पहुंचे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलास से मुलाकात की। इसके साथ ही विदेश मंत्री ने अपने श्रीलंकाई और बांग्लादेशी समकक्ष विजिथा हेराथ और खलीलुर रहमान से मुलाकात की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने श्रीलंका और बांग्लादेश के अपने समकक्षों के साथ मुलाकात की तस्वीरें साझा कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “एआरएफ मीटिंग के दौरान श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ और बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मिलकर खुशी हुई।” वहीं एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, “ईयू की एचआरवीपी काजा कैलास से मिलकर अच्छा लगा।” विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 22-23 जुलाई 2026 को मनीला, फिलीपींस के दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने आसियान फ्रेमवर्क के तहत विदेश मंत्री लेवल की मीटिंग्स में हिस्सा लिया। इन बैठकों में आसियान-इंडिया, ईस्ट एशिया समिट (ईएएस) और आसियान रीजनल फोरम (एआरएफ) मीटिंग्स शामिल है। बता दें, आसियान से इतर, विदेश मंत्री ने फिलीपींस की विदेश मंत्री मा. थेरेसा पी. लाजारो, ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष सीनेटर पेनी वोंग, चीनी समकक्ष वांग यी, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियान बालाकृष्णन, कनाडाई समकक्ष अनिता आनंद, थाईलैंड के सिहासक फुआंगकेटकेओ, न्यूजीलैंड के विंस्टन पीटर्स और आसियान के सेक्रेटरी जनरल डॉ. काओ किम होर्न से भी मुलाकात की। विदेश मंत्री जयशंकर ने इन नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकों भी की। इसके अलावा, विदेश मंत्री जयशंकर ने क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया और इसकी जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, “मनीला में क्वाड विदेश मंत्रियों की मीटिंग में हिस्सा लेकर खुशी हुई। हिंद-प्रशांत माहौल की समीक्षा और हाल के विकास पर चर्चा हुई। हाल ही में नई दिल्ली में हुई मीटिंग के नतीजों पर फॉलोअप किया। आसियान सेंट्रलिटी को पहचानते हुए एक आजाद और खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्ध।” विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह दौरा एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत आसियान के साथ भारत के गहरे होते जुड़ाव को दिखाता है और आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के हमारे पक्के कमिटमेंट को सुनिश्चित करता है। यह खास तौर पर जरूरी है कि 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग का साल बनाया गया है।
ट्रंप का दावा: वैश्विक निवेश के 19.2 ट्रिलियन डॉलर अमेरिका की ओर आ रहे, इसे बताया ‘स्वर्णिम युग’

वॉशिंगटन,। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी सरकार ने अमेरिका के लिए 19.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के नए निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी व्यापार और आर्थिक नीतियों के कारण एशिया और यूरोप की कई विनिर्माण कंपनियां अपना उत्पादन अमेरिका स्थानांतरित कर रही हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (ग्लोबल सप्लाई चेन) का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) जॉर्जिया के मैरिएटा में आयोजित एक रैली में दावा किया कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था “स्वर्णिम युग” में प्रवेश कर चुकी है। उन्होंने नए विनिर्माण संयंत्रों, दवा उद्योग में निवेश और ऊर्जा साझेदारियों का हवाला देते हुए कहा कि एशिया और यूरोप की कई कंपनियां अब अन्य देशों के बजाय अमेरिका में निवेश और उत्पादन को प्राथमिकता दे रही हैं। ट्रंप ने कहा, “मेरे प्रशासन के दो साल पूरे होने से पहले ही, बल्कि पहले साल के अंत तक ही, हमने दुनिया भर से 19.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के नए निवेश सुनिश्चित किए हैं।” उन्होंने पूर्ववर्ती प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा, “चार वर्षों में उन्होंने 1 ट्रिलियन डॉलर से भी कम निवेश हासिल किया, जबकि हमने केवल 15 महीनों में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया है।” ट्रंप ने दावा किया कि कई वैश्विक कंपनियां अपना उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित कर रही हैं। उन्होंने कहा, “टोयोटा ने अभी घोषणा की है कि वह मेक्सिको छोड़कर अमेरिका आ रही है और यहां दुनिया का सबसे बड़ा संयंत्र बनाएगी। वे सभी वापस आ रहे हैं। वे कनाडा और मेक्सिको छोड़ रहे हैं। जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया से भी कंपनियां अमेरिका आ रही हैं।” राष्ट्रपति ने जॉर्जिया में घोषित नई औद्योगिक परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दवा कंपनी यूसीबी (UCB) 2 अरब डॉलर का निवेश कर ग्विनेट, जॉर्जिया में अपना पहला अमेरिकी विनिर्माण संयंत्र स्थापित करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि जापान जॉर्जिया में 60 करोड़ डॉलर की लागत से हीरा प्रसंस्करण (डायमंड प्रोसेसिंग) इकाई स्थापित कर रहा है, जबकि यामाहा मोटर केनेसॉ में अपना नया अमेरिकी मुख्यालय बना रही है। रोजगार के मोर्चे पर ट्रंप ने दावा किया, “आज अमेरिका में पहले से कहीं अधिक लोग रोजगार में हैं और यह अंतर बहुत बड़ा है।” उन्होंने शेयर बाजार और महंगाई का जिक्र करते हुए कहा, “चुनाव के बाद से शेयर बाजार 73 बार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुका है। जहां शेयर बाजार नई ऊंचाइयों पर है, वहीं महंगाई लगातार घट रही है।” ट्रंप ने अपनी सरकार की कर नीतियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किए गए कानून के तहत टिप (बख्शीश), ओवरटाइम वेतन और कई अमेरिकियों के लिए सोशल सिक्योरिटी लाभ पर कर समाप्त कर दिया गया है। उनके अनुसार, जॉर्जिया में 1.30 लाख टिप पाने वाले कर्मचारियों ने औसतन 7,000 डॉलर से अधिक कर की बचत की है, जबकि लगभग 7 लाख कर्मचारियों को ‘ओवरटाइम पर कोई टैक्स नहीं’ प्रावधान का लाभ मिला है। ट्रंप ने बच्चों के लिए शुरू किए गए ‘ट्रंप अकाउंट्स’ का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे कर लाभ वाले बचत खातों की योजना बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देना है। ऊर्जा क्षेत्र पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, “हम उस अभियान की लागत कई बार वसूल कर चुके हैं। हम भारी मात्रा में तेल प्राप्त कर रहे हैं। यदि अमेरिका और वेनेजुएला को मिलाकर देखें तो हमारे पास दुनिया के लगभग 62 प्रतिशत तेल संसाधन हैं।” ट्रंप ने दावा किया कि उनकी आर्थिक रणनीति के कारण अमेरिकी उद्योग फिर से प्रतिस्पर्धी बन रहा है और कंपनियां विदेशों में उत्पादन करने के बजाय अमेरिका में ही विनिर्माण कर रही हैं। उन्होंने कहा, “इस समय अमेरिका में जितना निवेश हो रहा है, उतना हमारे देश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। यही अमेरिका का स्वर्णिम युग है।” ट्रंप का यह दावा ऐसे समय आया है जब उनका प्रशासन टैरिफ, कर प्रोत्साहनों और कंपनियों को विनिर्माण इकाइयां अमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली औद्योगिक नीति को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहा है। इस रणनीति का विशेष फोकस सेमीकंडक्टर, दवा उद्योग, महत्वपूर्ण खनिज, उन्नत विनिर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अवसंरचना पर है।
कॉर्पोरेट लोन राइट ऑफ पर शिवसेना (यूबीटी) का सवाल-बड़े कर्जदारों पर नरमी, आम लोगों पर सख्ती क्यों?

मुंबई, । शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह बड़े कॉर्पोरेट लोन डिफॉल्टर्स को बचा रही है, जबकि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों से लोन की वसूली के लिए सख्त कदम उठा रही है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा कि लोकसभा में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के लिखित जवाब के मुताबिक, पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच 1,249 ऐसे खातों के 7.75 लाख करोड़ रुपए के बैड लोन बट्टे खाते में डाल दिए, जिनमें प्रत्येक पर 100 करोड़ रुपए या उससे अधिक का बकाया था। पार्टी ने कहा कि इतने बड़े डिफॉल्ट के बावजूद बैंक अब तक केवल 3.10 लाख करोड़ रुपए ही वसूल कर पाए हैं। सरकार ने संसद में कहा कि लोन को बट्टे खाते में डालना (राइट ऑफ) एक सामान्य तकनीकी लेखा प्रक्रिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि लोन माफ कर दिया गया है। हालांकि ‘सामना’ के संपादकीय में सरकार के इस तर्क को चौंकाने वाला और पाखंडपूर्ण बताया गया। शिवसेना (यूबीटी) ने सवाल उठाया कि मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से बैंकिंग व्यवस्था में वित्तीय अनुशासन लाने का दावा करती रही है। फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि बड़े उद्योगपति बैंकों का इतना बड़ा कर्ज नहीं चुकाएं और सरकार वसूली करने के बजाय उसे बैड लोन के रूप में बट्टे खाते में डाल दे? संपादकीय में कहा गया, “बड़ा लोन लेना, उसका थोड़ा सा हिस्सा चुकाना और बाकी रकम नहीं लौटाना मानो सरकारी मंजूरी के साथ हो रहा है।” इसमें मौजूदा दौर को लोन डिफॉल्ट का अमृत काल बताया गया। देश में ऐसी स्थिति बन गई है कि गरीब लोगों को लोन की किस्तें चुकाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, जबकि अरबपति बैंकों का हजारों करोड़ रुपए का कर्ज नहीं चुकाते। अगर सरकार भी इसमें शामिल है तो जनता के पैसे की लूट करने वालों को कौन रोकेगा?” संपादकीय में एक बड़ा मुद्दा यह भी उठाया गया कि सरकार बड़े कॉर्पोरेट लोन डिफॉल्टर्स के नाम सार्वजनिक करने से इनकार कर रही है। सरकार का कहना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अधिनियम की धारा 45ई के तहत कर्ज से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखी जाती है, इसलिए इन लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सकते। संपादकीय में सरकार के इस तर्क पर सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया, “छोटे लोन डिफॉल्टर्स के नाम सार्वजनिक किए जाते हैं, लेकिन बड़े उद्योगपतियों के नाम गोपनीयता का हवाला देकर क्यों छिपाए जाते हैं? मध्यम वर्ग के लोगों, छोटे कारोबारियों और किसानों की छोटी सी चूक पर उनकी संपत्तियां, गाड़ियां और घर जब्त या सील कर दिए जाते हैं, जबकि बड़े कॉर्पोरेट डिफॉल्टर्स के खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं होती?” ठाकरे गुट ने सवाल उठाया कि क्या बड़े लोन डिफॉल्टर्स सत्ताधारी पार्टी को भारी चंदा देते हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि इसके पीछे “चंदा दो, लोन माफ कराओ” जैसी एक अघोषित नीति काम कर रही है। संपादकीय में कहा गया कि आम लोगों और बड़े उद्योगपतियों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाता है। इसमें कहा गया कि जहां आम टैक्स देने वाले लोग छोटे-छोटे लोन चुकाने के लिए अपने खर्चों में कटौती करते हैं, वहीं अमीर उद्योगपतियों को सरकारी बैंकों का बड़ा कर्ज नहीं चुकाने पर भी कार्रवाई से बचाया जाता है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि उद्योग जगत के धोखेबाज़ों और सरकार में बैठे लोगों की मिलीभगत से सरकारी बैंकों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि अगर सरकार ऐसे लोगों को बचाती रही, तो जनता का पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा।
इक्विटी ऑप्शंस मार्केट में घट रही एनएसई की बादशाहत, बीते तीन वित्त वर्षों में बाजार हिस्सेदारी 22 प्रतिशत से अधिक घटी

मुंबई, । आशीष चौहान के नेतृत्व वाले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का दबदबा धीरे-धीरे इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) मार्केट में कम हो रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, बीते तीन वित्त वर्षों में इस सेगमेंट में देश के सबसे एक्सचेंज मार्केट शेयर 22 प्रतिशत से अधिक कम हो गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की ओर से जारी की गई एनअुल रिपोर्ट्स और आरएचपी में दिए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में इक्विटी ऑप्शंस (प्रीमियम वैल्यू) सेगमेंट में उसका मार्केट शेयर 96.9 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर 87.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71 प्रतिशत रह गया है। यह दिखाता है कि इस सेगमेंट में एनएसई का मार्केट शेयर बीते तीन वर्षों में 22.2 प्रतिशत कम हो है। हालांकि, अन्य सेगमेंट में एनएसई की पकड़ मजबूत बनी हुई है। एनएसई का मार्केट शेयर इक्विटी कैश सेगमेंट में वित्त वर्ष 2023-24 में 92.7 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2024-25 में 93.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 92.99 प्रतिशत था। वहीं, इक्विटी फ्यूचर्स में एनएसई का मार्केट शेयर वित्त वर्ष 2023-24 में 99.9 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2024-25 में 99.9 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 99.79 प्रतिशत था। आईपीओ लाने जा रही एनएसई का परिचालन प्रदर्शन भी कमजोर बना हुआ है। रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (आरएचपी) में दिए आंकड़ों के मुताबिक, देश के सबसे बड़े एक्सचेंज की कुल परिचालन से आय वित्त वर्ष 2026 में 16,601.30 करोड़ रुपए थी। वहीं, वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 17,140.67 करोड़ रुपए पर था, जो कि सालाना आधार पर तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट को दिखाता है। बड़ी बात यह है कि इस दौरान कंपनी की आय का मुख्य स्रोत ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी गिरावट देखी गई है, जो कि समीक्षा अवधि में 13,635.76 करोड़ रुपए से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपए पर आ गया है। यह आंकड़ा सालाना आधार पर चार प्रतिशत की गिरावट को दिखाता है। वित्त वर्ष 2026 में एनएसई की क्लियरिंग एंड सेटलमेंट सर्विसेज से आय 21.8 प्रतिशत कम होकर 251.45 करोड़ रुपए रह गई है, जो कि वित्त वर्ष 2025 की समान अवधि में 321.34 करोड़ रुपए थी। प्रदर्शन और मार्केट शेयर में आ रही गिरावट को लेकर आईएएनएस से एनएसई को कुछ सवाल भेजे थे, लेकिन खबर लिखे जाने तक एक्सचेंज ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया है।
नीट मुद्दे पर राज्यसभा में तीखी बहस, नड्डा ने विपक्ष को बताया गैरजिम्मेदार

नई दिल्ली। राज्यसभा में नीट परीक्षा मुद्दे पर जारी गतिरोध के बीच नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष का व्यवहार बेहद गैरजिम्मेदाराना है। विपक्ष न तो चर्चा चाहता है और न ही सदन को चलने देना चाहता है। नड्डा ने कहा कि शुरुआत में विपक्ष पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा था। सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह नीट समेत हर संबंधित विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। इसके बावजूद विपक्ष ने अपनी मांग बदल दी और अब नई शर्तें सामने रख रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा से कभी नहीं भागी और सदन में सभी मुद्दों पर जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष लगातार अपना रुख बदलकर कार्यवाही में बाधा डाल रहा है। दरअसल, संसद में विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष कहना है की चर्चा से पहला शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए। नीट परीक्षा विवाद को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन में हंगामा बढ़ गया। इसके बाद सभापति ने कार्यवाही स्थगित करते हुए घोषणा की कि राज्यसभा की बैठक दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है। गौरतलब है कि सदन में इससे पहले भी हंगामा हुआ था जिसके चलते सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 तक के लिए स्थगित की गई। दोपहर बारह बजे भी सदन में यही हालात बने रहे और फिर सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस मुद्दे पर जेपी नड्डा कह चुके हैं कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा था कि नीट परीक्षा, कथित प्रश्नपत्र लीक और उससे जुड़े सभी पहलुओं पर भी सरकार विस्तृत चर्चा कराने के लिए तैयार है। नेता सदन ने कहा कि यह पारदर्शिता के साथ काम करने वाली सरकार है और हमेशा जनता के हित में निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का मौजूदा रवैया जनविरोधी है और वह सार्थक चर्चा से बचने का प्रयास कर रहा है। नड्डा ने कहा कि विपक्ष के आचरण से यह प्रतीत होता है कि उसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय मूल्यों पर विश्वास नहीं है। उन्होंने विपक्ष की कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और संवाद ही लोकतंत्र का सही रास्ता है।
सरकार शुरू से ही नीट पर चर्चा कराने के पक्ष में, एनडीए के सभी दल चर्चा चाहते हैंः रिजिजू

नई दिल्ली,। संसद के मौजूदा मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। यह गतिरोध संसद की कार्यवाही में भी देखने को मिल रहा है। गुरुवार को नीट परीक्षा पर चर्चा के विषय पर सदन में एक बार फिर हंगामा हुआ। इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में कहा कि सरकार शुरू से ही नीट मुद्दे पर चर्चा कराने के पक्ष में है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी दल भी इस विषय पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने सदन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया है। गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद किरेन रिजिजू ने सदन को बताया कि सरकार की ओर से विपक्ष के नेताओं, विशेष रूप से मल्लिकार्जुन खड़गे तथा अन्य नेताओं से बातचीत की गई थी। यह बातचीत इसलिए की गई थी ताकि सदन में चर्चा शुरू हो सके। रिजिजू ने कहा कि सरकार ने विपक्ष से अनुरोध किया है कि चर्चा की अवधि और स्वरूप आपसी सहमति से तय किया जा सकता है, लेकिन चर्चा के लिए कोई शर्त नहीं लगाई जानी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा की बात तो करता है लेकिन शर्तें लगाकर उसे बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इससे यह संदेश जाता है कि विपक्ष चर्चा नहीं होने देना चाहता। गौरतलब है कि विपक्ष ने सरकार के समक्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रखी है। विपक्ष स्पष्ट कहना है की धर्मेंद्र प्रधान की इस्तीफा होने तक कोई सार्थक चर्चा नहीं हो सकती। रिजिजू ने कहा कि नीट परीक्षा के मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और इस विषय पर लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक न्यायालयों की व्यवस्था की जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि दोषियों को जल्द और सख्त सजा मिल सके। रिजिजू ने विपक्ष से पुन अपील करते हुए कहा कि वह अपनी शर्तें वापस ले और सदन में बिना किसी बाधा के नीट मुद्दे पर चर्चा शुरू होने दे। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि चर्चा पहले दिन से ही शुरू हो जानी चाहिए थी। हालांकि विपक्ष सरकार की इन बातों पर सहमत नहीं हुआ। विपक्षी सांसदों का स्पष्ट कहना था की वे अपनी मांगों पर अडिग हैं और परीक्षा में हुई अनियमितता की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपनी पद से इस्तीफा देना चाहिए।
पीएम मोदी के नेतृत्व में युवाओं के हित सर्वोच्च प्राथमिकता’, फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन पर राज्यों ने की प्रशंसा

‘ नई दिल्ली,। युवाओं के भविष्य के लिए और पेपर लीक की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन का निर्णय लिया है। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को ऐलान किया कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड देने और केस के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा। पीएम मोदी ने यह भी जानकारी दी कि इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं कि संबंधित विभाग जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेपर लीक के मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का निर्णय करोड़ों छात्रों के भविष्य की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है। इस निर्णय से पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगेगा, दोषियों को कठोर दंड मिलेगा, परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी व छात्रों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।” उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। छात्र हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उठाए गए इस निर्णायक कदम के लिए प्रधानमंत्री का समस्त उत्तराखंडवासियों की ओर से हार्दिक आभार और अभिनंदन।” दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छात्रों के हितों की रक्षा और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “पेपर लीक के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का यह निर्णय हर परिश्रमी छात्र के साथ न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। छात्रों के अधिकारों और उनके परिश्रम पर आघात करने वालों के विरुद्ध कानून पूरी कठोरता के साथ अपना कार्य करेगा।” छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने लिखा, “140 करोड़ जन को अपना परिवार मानने वाले प्रधान सेवक प्रधानमंत्री मोदी को अंतिम व्यक्ति के जनभाव की चिंता है, मोदी सरकार में युवाओं के भविष्य से किसी भी प्रकार के समझौते की गुंजाइश नहीं है, युवा देश की शक्ति है देश का भविष्य है। मोदी जी के नेतृत्व में पेपर लीक जैसे अपराधों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट का निर्णय ईमानदारी से परिश्रम करने वाले हर छात्र के विश्वास को और मजबूत करेगा। दोषियों को कठोर दंड मिलना ही चाहिए।” बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लिखा, “युवा हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके सपनों और भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलेगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना मोदी सरकार की गारंटी है।” राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने लिखा, “पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों युवाओं की मेहनत, प्रतिभा और सपनों पर आघात करती हैं। ऐसे अपराधों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन का निर्णय माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की युवाओं के हितों की रक्षा तथा उनके उज्ज्वल भविष्य को सुरक्षित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचायक है।” उन्होंने आगे लिखा, “दोषियों को शीघ्र और कठोर दंड दिलाने की यह पहल पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वासपूर्ण भर्ती व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए स्पष्ट संदेश है कि ऐसे अपराधों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। युवा शक्ति का सम्मान, उनके परिश्रम का संरक्षण और उनके उज्ज्वल भविष्य का संकल्प, यही विकसित भारत की मजबूत नींव है।” इस फैसले पर केंद्रीय कानून और न्याय व संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “प्रधानमंत्री ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि भारत के युवाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि ठोस निर्णयों से भी परिलक्षित होती है। पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की मंजूरी उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो मेहनती विद्यार्थियों के सपनों से खिलवाड़ करते हैं, अब न्याय में कोई देरी नहीं होगी। हर विद्यार्थी को निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए। हर युवा की आशा, आकांक्षाओं व सपनों को संरक्षण मिलना चाहिए।” केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं के हित और उनका उज्ज्वल भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में दोषियों को जल्द से जल्द कठोर दंड दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की दिशा में कदम युवाओं की मेहनत और उनके भविष्य की सुरक्षा के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संदेश स्पष्ट है, देश के युवाओं के सपनों, उनकी मेहनत और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।” केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने पोस्ट किया, “पेपर लीक के मामलों में दोषियों को जल्द और कठोर सजा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन की घोषणा की है, ताकि ऐसे मामलों का त्वरित निस्तारण हो और युवाओं को समय पर न्याय मिल सके। इससे पहले केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 लागू कर देश में पहली बार पेपर लीक और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ सख्त केंद्रीय कानून बनाया। यह कानून संगठित परीक्षा माफियाओं पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। देश के इतिहास में पहली बार ऐसी सरकार है जो युवाओं के अधिकारों और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए केवल बातें नहीं करती, बल्कि ठोस निर्णय लेकर उन्हें लागू भी करती है।” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता नितिन नवीन ने फैसले की प्रशंसा करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार युवाओं के सपनों, उनकी मेहनत और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। पेपर लीक जैसे अपराधों पर निर्णायक कार्रवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा, ताकि
नीट मामले में नितिन नवीन की विपक्ष को खुली चुनौती, सदन में करें चर्चा, सरकार हर सवाल का देगी जवाब

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नीट पेपर लीक विवाद को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार नीट समेत युवाओं से जुड़े सभी विषयों पर सदन में चर्चा करने और हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष इस चर्चा से बच रहा है। उन्होंने संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारी सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े हर मुद्दे पर हर स्तर पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन राहुल गांधी, कांग्रेस और पूरा विपक्ष चर्चा से भाग रहा है, क्योंकि उन्हें पता है कि जब वे सदन के पटल पर चर्चा के लिए आएंगे तो उनका दोहरा चरित्र जनता और युवाओं के सामने उजागर हो जाएगा।” नितिन नवीन ने कहा, “हम खुली चुनौती देते हैं कि आइए, संसद के पटल पर छात्रों और युवाओं से जुड़े हर विषय, नीट के मुद्दे और अन्य सभी मामलों पर चर्चा करें। भाजपा के सांसद हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं और एनडीए सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है।” उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का 50-60 वर्षों का इतिहास युवाओं को गुमराह करने और उनके मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा और एनडीए सरकार ने युवाओं के भविष्य को सही दिशा देने का काम किया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि देश में शिक्षा संस्थान, कोचिंग संस्थान और अन्य सुविधाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज का युवा स्टार्टअप और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जाना जाता है। कुछ लोग युवाओं को केवल नकारात्मक नजरिए से देखते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन युवाओं को उनके सुनहरे भविष्य के लिए तैयार करना है।” उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है और परीक्षा से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। देश का युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन के साथ खड़ा है। पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान पर नितिन नवीन ने कहा कि सरकार हर मामले की जांच के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे ताकि जो लोग भी इन अपराधों में शामिल हैं और दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई हो। हम सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब कोई संकल्प लेते हैं तो देश और दुनिया जानती है कि उसे पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम किया जाता है।” वहीं, भाजपा के अन्य सांसदों ने भी पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने के पीएम के ऐलान पर प्रतिक्रिया दी। तरुण चुघ ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार देश के युवाओं की भलाई के लिए पूरी तरह तैयार है। ये हमारे बच्चे हैं लेकिन कुछ लोग अपने राजनीतिक फायदे के लिए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। पेपर लीक मामले में शामिल एक भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सख्त कार्रवाई की जाएगी और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा दिया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट भी बनेगा। एक भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।” सांसद मयंकभाई नायक ने कहा, “प्रधानमंत्री ने आज अपने एक्स पोस्ट के जरिए देश की जनता और युवाओं तक यह बात पहुंचाई कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इन अपराधों में पकड़े गए लोगों को विशेष अदालतों के ज़रिए सजा मिले। सजा ऐसी होगी कि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने या छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।” सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा, “प्रधानमंत्री ने विकसित भारत का संकल्प लिया है। मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि विपक्ष द्वारा पैदा की जा रही अफरातफरी और अव्यवस्था से सही तरीके से निपटा जाएगा और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।” भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा, “केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य को बहुत अहमियत देती है और बहुत संवेदनशीलता के साथ फैसले लेती है। आज प्रधानमंत्री ने फिर कहा कि नीट में गड़बड़ी करने वालों को फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के ज़रिए सबसे कड़ी सजा दी जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम भी उठाए जाएंगे।” उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा, “सदन नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलता है। अगर आप संसद में किसी मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं, तो आपको स्पीकर को लिखित नोटिस देना होगा, लेकिन यहां स्थिति इसके उलट है। वे मांगें कर रहे हैं, हंगामा कर रहे हैं, लेकिन चर्चा नहीं करना चाहते। भाजपा सांसदों ने नियमों का पालन करते हुए स्पीकर को इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा के लिए लिखित अनुरोध सौंपा है। कल हमारे संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी सदन में साफ कहा था कि सरकार नीट समेत हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।