सऊदी अरब में हमले के बाद फीफा ने फीफा-ई फाइनल्स को टाल दिया

नई दिल्ली। फीफा और सऊदी ईस्पोर्ट्स फेडरेशन ने फीफा-ई फाइनल्स 2026 को टाल दिया है। इवेंट 16 से 25 अक्टूबर तक जेद्दा में होने वाला था। यह फैसला हाल ही में रियाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले के बाद लिया गया है। 10 अक्टूबर को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाकर किए गए हमले में 12 लोग मारे गए और 309 घायल हो गए। यमन के ईरान से जुड़े हूती मूवमेंट ने रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली, जिसे एक दशक से ज्यादा समय में देश का सबसे खतरनाक हमला माना जा रहा है। इवेंट के आयोजक ने एक बयान में कहा, “यह फैसला इलाके में हाल के डेवलपमेंट और टूर्नामेंट को कराने के लिए जरूरी लॉजिस्टिक इंतजामों पर उनके असर की जांच के बाद लिया गया है।” इसमें कहा गया है कि फीफा-ई फाइनल्स के बारे में आगे की घोषणाएं सही समय पर की जाएंगी। बयान में कहा गया, “फीफा ने सऊदी अरब और सऊदी ईस्पोर्ट्स फेडरेशन के फीफा-ई फाइनल्स 2026 की तैयारियों में दिए गए सपोर्ट और सहयोग की तारीफ की, जो सऊदी अरब ने टूर्नामेंट के पिछले एडिशन की सफल मेजबानी के आधार पर किया है।” रियाद एयरपोर्ट पर हुए जानलेवा हमले की वजह से सऊदी अरब में सिक्स किंग्स स्लैम टेनिस एग्जिबिशन इवेंट को भी लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण 27–30 दिसंबर 2026 तक के लिए टाल दिया गया है। इसके अलावा, सऊदी अरब में 2027 एएफसी एशियन कप को रियाद पर मिसाइल हमलों के बाद एक साल के लिए टाला जा सकता है। यह कॉन्टिनेंटल टूर्नामेंट अगले साल 7 जनवरी को रियाद, जेद्दा और अल-खोबर में शुरू होने वाला है। लीग ने एक बयान में कहा कि मैचों के बीच आवश्यक न्यूनतम आराम के समय को ध्यान में रखते हुए, ‘लॉजिस्टिकल कारणों से’ मैचों को रीशेड्यूल किया गया था।
बस्तर में नक्सलवाद ने आदिवासियों को पहुंचाया नुकसान, अब उनके घाव भरना हमारी जिम्मेदारी : अमित शाह

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद ने पिछले पांच दशकों में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के गरीब आदिवासियों को गहरी चोट पहुंचाई है। नक्सलवाद के कारण दिव्यांग हुए लोगों के जीवन में फिर से खुशियां लाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करना सरकार की प्राथमिकता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों और अन्य दिव्यांगजनों के लिए आयोजित सहायता उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जा रहे सेवा कार्यक्रमों की कड़ी में शामिल है। इसके तहत छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण दिव्यांग हुए आदिवासियों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें। गृह मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पांच से सात अक्टूबर के बीच जगदलपुर में सहायता उपकरण वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस अभियान से 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए। इनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी शामिल थे। अमित शाह ने कहा कि ये आंकड़े बस्तर के दर्द और वहां के गरीब आदिवासी परिवारों पर नक्सलवाद के कारण प्रभाव को दर्शाते हैं। पांच दशकों तक चले नक्सलवाद ने क्षेत्र के लोगों को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। बड़ी संख्या में लोगों को हिंसा के कारण दिव्यांगता का सामना करना पड़ा, जिससे उनके सामान्य जीवन और आजीविका पर असर पड़ा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को समाप्त करने का अर्थ यह नहीं है कि बीते पांच दशकों के दुखों को मिटाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों को भरा जाए और उन्हें दोबारा जीवन संवारने में सहायता दी जाए। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण मिलने से प्रभावित लोग दोबारा अपने रोजमर्रा के काम करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के कारण जिन लोगों ने अपने हाथ-पैर गंवाए हैं, जिनकी सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है या जिनकी आंखों की रोशनी चली गई है, उनकी मदद करना बेहद जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि ऐसे सभी जरूरतमंद लोगों की पहचान की जाए और उन्हें उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा, ”नक्सलवाद को खत्म करने का मतलब यह नहीं है कि हम पिछले पांच दशकों में झेले गए दुखों को मिटा सकते हैं। जहां भी इन दुखों के निशान हैं, हमें उन घावों को भरना होगा। प्रभावित लोगों को अपना जीवन फिर से संवारने में मदद करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सम्मान के साथ जी सकें।” उन्होंने कहा कि कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने का उद्देश्य लोगों को फिर से अपने हाथों से काम करने में सक्षम बनाना है। इसी तरह कृत्रिम पैर की सहायता से वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े होकर सामान्य जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने सहायता कार्यक्रम के शुरुआती परिणामों को उत्साहजनक बताया। अमित शाह ने अभियान के एक लाभार्थी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऐसे व्यक्ति की बात सुनी, जिसे इस कार्यक्रम के तहत सहायता मिली थी। उस व्यक्ति ने बताया कि तीन साल बाद वह अपने हाथ से गिलास उठाकर खुद पानी पी सका। गृह मंत्री ने कहा कि लाभार्थी की यह बात सुनकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को फिर से अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में सक्षम बनाना केवल सहायता उपलब्ध कराना नहीं बल्कि उसे आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता लौटाने का भी प्रयास है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया था। अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी इसी तरह के ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ का उद्देश्य केवल दिव्यांगजनों को उपकरण उपलब्ध कराना नहीं है बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन जीने में सहयोग देना भी है। अमित शाह ने विश्वास जताया कि कृत्रिम अंगों और अन्य सहायक उपकरणों की मदद से नक्सल हिंसा से प्रभावित लोग अपने जीवन को नई दिशा दे सकेंगे। सरकार का प्रयास है कि हिंसा के कारण जिन लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है, उन्हें आवश्यक सहायता देकर आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
जब लच्छू महाराज ने ठुकराया पद्मश्री, बोले- ‘दर्शकों का प्यार ही सबसे बड़ा सम्मान’

मुंबई। तबले की थाप पर लोगों को झूमने पर मजबूर कर देने वाले पंडित लच्छू महाराज ने अपनी जिंदगी में नाम और शोहरत तो खूब कमाई, लेकिन उनके लिए सबसे जरूरी चीज दर्शकों का प्यार था। वह उन कलाकारों में शामिल थे, जो अपनी कला को किसी पुरस्कार या सम्मान से बड़ा मानते थे। यही वजह थी कि जब सरकार ने उन्हें पद्मश्री देने का फैसला किया, तो उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उनका मानना था कि किसी कलाकार के लिए दर्शकों की तालियां ही सबसे बड़ा पुरस्कार हैं। लच्छू महाराज का असली नाम लक्ष्मी नारायण सिंह था। उनका जन्म 16 अक्टूबर 1944 को उत्तर प्रदेश के बनारस में हुआ था। उनके पिता वासुदेव महाराज भी संगीत से जुड़े थे। ऐसे में लच्छू महाराज को बचपन से ही संगीत का माहौल मिला। उन्होंने अपने पिता से तबला बजाना सीखा और बहुत छोटी उम्र में ही मंच पर अपनी कला दिखाने लगे। धीरे-धीरे उनकी उंगलियों की तेजी, ताल पर पकड़ और अलग अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया। उनके कार्यक्रमों में बैठे लोग उनकी कला में खो जाते थे। लच्छू महाराज ने शास्त्रीय संगीत के साथ हिंदी फिल्मों में भी काम किया। वह ‘महल’, ‘मुगल-ए-आजम’, ‘छोटी छोटी बातें’ और ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों से जुड़े रहे। फिल्मों में उन्होंने कोरियोग्राफी के जरिए भी अपनी प्रतिभा दिखाई। ‘मुगल-ए-आजम’ और ‘पाकीजा’ जैसी फिल्मों में शास्त्रीय नृत्य की खूबसूरती दिखाने में उनका योगदान रहा। उस दौर में फिल्मों के गानों में कथक और दूसरे शास्त्रीय नृत्य को जगह देना आसान काम नहीं था, लेकिन लच्छू महाराज इस कला को पर्दे पर पेश करने में माहिर थे। लच्छू महाराज के जीवन का सबसे चर्चित किस्सा पद्मश्री सम्मान से जुड़ा है। सरकार ने उन्हें इस सम्मान के लिए चुना था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका मानना था कि कलाकार को उसके काम के लिए मिलने वाली सच्ची सराहना दर्शकों से मिलती है। दर्शकों की तालियां और उनकी वाहवाही ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान थीं। वह नहीं चाहते थे कि किसी पुरस्कार को उनकी कला की पहचान का पैमाना बनाया जाए। लच्छू महाराज का रिश्ता बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा से भी था। वह गोविंदा के मामा थे। उनकी बहन निर्मला देवी, गोविंदा की मां थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोविंदा ने उन्हें मुंबई लाने की कोशिश भी की, लेकिन लच्छू महाराज का मन बनारस में ही लगता था। वह अपने शहर और वहां के माहौल से गहराई से जुड़े हुए थे। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन बनारस में बिताया और अपनी पसंद के मुताबिक जिंदगी जी। लच्छू महाराज का निधन 28 जुलाई 2016 को बनारस में हुआ। वह 71 साल के थे।
अमेरिका में नवरात्रि के दौरान हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश की निंदा, संगठनों ने की सतर्क रहने की अपील

न्यूयॉर्क। अमेरिका में नवरात्रि के बीच एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर फायरिंग की साजिश सामने आने के बाद हिंदू और भारतीय संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने बढ़ती हिंदू-विरोधी घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई है। बुधवार (स्थानीय समय) को अधिकारियों की ओर से आरोपी की गिरफ्तारी की घोषणा के तुरंत बाद दो प्रमुख हिंदू संगठनों ने इन पवित्र दिनों के दौरान मंदिरों और श्रद्धालुओं से सतर्क रहने की अपील की। हिंदू मंदिर एम्पावरमेंट काउंसिल (एचएमईसी) ने मंदिरों और भक्तों से कहा कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें। संगठन ने कहा, “जब हम प्रार्थना, उत्सव और सेवा के लिए एक साथ आते हैं, तो हमें नफरत के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर श्रद्धालु अपने पूजा स्थल पर बिना डर, शांति और स्वतंत्रता के साथ पूजा कर सके।” अधिकारियों ने बुधवार को इलिनोइस में एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया, जो खुद को ‘व्हाइट सुप्रेमेसिस्ट नीओ-नाजी’ बताता था। पुलिस के अनुसार, उसके एक सहकर्मी की सूचना के बाद यह कार्रवाई की गई। बताया गया कि आरोपी ने शनिवार को एक हिंदू मंदिर में सामूहिक गोलीबारी करने की कोशिश की थी लेकिन उसकी राइफल जाम हो गई, जिससे हमला नाकाम हो गया और वह वहां से भाग गया। अधिकारियों के अनुसार, हमले का निशाना शिकागो से लगभग 70 किलोमीटर दूर ऑरोरा स्थित एक हिंदू मंदिर था। पुलिस ने बताया कि आरोपी की योजना के बारे में सूचना उसके एक सहकर्मी ने दी थी। फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज ने कहा, “यह घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि भारत और हिंदुओं के खिलाफ नफरत सिर्फ इंटरनेट या राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है। यह वास्तविक दुनिया में हमारे समुदाय और पूजा स्थलों के लिए खतरा बन सकती है।” फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अमेरिका में हिंदू-विरोधी घृणा अपराधों की संख्या बढ़कर 32 हो गई जबकि 2024 में यह संख्या 25 थी। यह विफल साजिश तीन अक्टूबर को ओहायो के रिचमंड हाइट्स में स्थित स्वामीनारायण वडताल धाम मंदिर पर हुए हमले के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है। उस घटना में मंदिर पर ईंटें फेंकी गई थीं जबकि अंदर पुजारी और श्रद्धालु प्रार्थना सभा में शामिल थे। कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (सीओएचएनए) ने पुलिस अधिकारियों से मंदिरों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। संगठन ने कहा कि हम निर्वाचित प्रतिनिधियों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से अपील करते हैं कि वे हिंदू पूजा स्थलों के खिलाफ बढ़ते खतरों को गंभीरता से लें, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करें और हिंदूफोबिया की स्पष्ट रूप से निंदा करें। संगठन ने कहा कि हम मंदिरों और सामुदायिक संगठनों से भी अनुरोध करते हैं कि वे अपनी सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करें, सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत जानकारी दें।
रूस ने उत्तर कोरिया के साथ संबंध और मजबूत करने का लिया संकल्प

नई दिल्ली। रूस ने उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 78 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्योंगयांग में आयोजित एक समारोह में रूसी अधिकारियों ने द्विपक्षीय साझेदारी को और व्यापक बनाने पर जोर दिया। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने गुरुवार को बताया कि रूस के राजदूत आंद्रेई पोडेलिशेव ने बुधवार को प्योंगयांग के ताएदोंगगांग डिप्लोमैटिक क्लब में स्वागत समारोह आयोजित किया। इसमें उत्तर कोरिया के उप विदेश मंत्री किम जोंग-ग्यू शामिल हुए। केसीएनए के हवाले से योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि पोडेलिशेव के प्योंगयांग में राजदूत का पद संभालने के बाद यह पहला स्वागत समारोह था। उन्होंने पिछले महीने के अंत में अपना कार्यभार संभाला था। रूसी दूतावास के टेलीग्राम चैनल पर साझा जानकारी के अनुसार, राजदूत ने दोनों देशों के संबंधों को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा, “ये संबंध पूर्ण समानता और आपसी सम्मान के सिद्धांतों पर आगे बढ़ रहे हैं।” राजदूत ने रूस और उत्तर कोरिया के बीच जून 2024 में हस्ताक्षरित व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि को द्विपक्षीय संबंधों का कानूनी आधार बताया। यह संधि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के बीच हुए समझौते का हिस्सा है। पोडेलिशेव ने कहा कि इस संधि ने दोनों देशों के बीच सहयोग को गुणात्मक रूप से नए स्तर पर पहुंचाया है और भविष्य में इसे और मजबूत करने के लिए एक उच्च मानक स्थापित किया है। वहीं, उत्तर कोरिया के उप विदेश मंत्री किम जोंग-ग्यू ने कहा कि उनके देश की अडिग नीति रूस के साथ पारंपरिक मित्रता और सहयोग के संबंधों का व्यापक विस्तार करना है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सामरिक और रणनीतिक सहयोग मजबूत करने तथा द्विपक्षीय संबंधों को विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई। समारोह में वक्ताओं ने दोनों देशों के साझा उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि शक्तिशाली देशों के निर्माण और जनता के कल्याण के साझा लक्ष्य की दिशा में उनकी साझेदारी सफल होगी। उन्होंने दोनों देशों के बीच खून से बने गठबंधन को स्थायी बताया। रूसी आंतरिक मंत्रालय का एक प्रतिनिधिमंडल भी इन दिनों प्योंगयांग के दौरे पर है। प्रवासन सेवा के उप प्रमुख डी.वी. सर्गिएन्को के नेतृत्व वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने भी समारोह में हिस्सा लिया। रूस और उत्तर कोरिया के बीच जून 2024 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर के बाद संबंधों में तेजी से मजबूती आई है। इस संधि में पारस्परिक रक्षा से जुड़ा प्रावधान भी शामिल है। दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य और रणनीतिक सहयोग पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में, मार्को रुबियो की भारत यात्रा से पहले हो सकता है ऐलान: सर्जियो गोर

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ शेष बिंदुओं पर बातचीत जारी है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को यह जानकारी दी। नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए गोर ने कहा कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा लगभग तैयार हो चुका है और उन्हें भरोसा है कि दोनों देश जल्द ही इसे अंतिम रूप दे देंगे। उन्होंने कहा, “बड़ी तस्वीर, व्यापक ढांचा और प्रमुख मुद्दों पर काम पूरा हो चुका है।” इस बीच, उन्होंने इन वार्ताओं को दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच होने वाली सबसे तेजी से आगे बढ़ रही व्यापार चर्चाओं में से एक बताया। गोर ने कहा कि बातचीत अब उत्पाद-विशिष्ट और शुल्क स्तर से जुड़े मुद्दों तक पहुंच चुकी है, जिसमें अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने माना कि दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत स्वाभाविक रूप से जटिल होती है, लेकिन दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर प्रकाश डालते हुए अमेरिकी राजदूत ने भारत को अमेरिका का एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में पहल को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सराहना की और कहा कि भारत उन शुरुआती देशों में शामिल रहा है, जिन्हें महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी साझेदारियों में आमंत्रित किया गया। गोर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रौद्योगिकी विकास, स्वच्छ ऊर्जा और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और माइक्रोन जैसी प्रमुख अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा भारत में बढ़ाए जा रहे निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी है और रोजगार सृजन में मदद करती है। रक्षा संबंधों पर उन्होंने कहा कि भारत किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ अधिक संयुक्त सैन्य अभ्यास करता है। हाल के संयुक्त अभ्यासों और भारत में एफ-35 लड़ाकू विमानों की भागीदारी को उन्होंने बढ़ते रणनीतिक विश्वास का प्रमाण बताया। गोर ने यह भी घोषणा की कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो जल्द ही भारत की यात्रा करेंगे। उनकी मुंबई और जामनगर में कई बैठकें और कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के बीच इस यात्रा का प्रमुख फोकस व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारियों पर रहेगा। रूस से जुड़े प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर उठ रही चिंताओं पर गोर ने कहा कि ये कदम किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं, बल्कि संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा अभी जारी है और अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिया जाएगा।
पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या की सीबीआई जांच की मांग, हाई कोर्ट में पीआईएल दायर

चंडीगढ़। पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में अब सीबीआई जांच की मांग उठी है। इस संबंध में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। मानसा में दर्ज मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है, जिसकी निगरानी हाई कोर्ट करे। वहीं, दूसरी ओर मानसा में परविंदर सिंह की मौत के बाद परिवार और लोगों के रोष को देखते हुए महिला इंस्पेक्टर बेअंत कौर थाना सिटी-1 को सस्पेंड कर दिया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोपी को मेडिकल स्टोर का ड्रग लाइसेंस देने, आपराधिक पृष्ठभूमि के बावजूद आर्म्स लाइसेंस देने, मृतक की कॉल पर लोकल पुलिस द्वारा असंवेदनशील कदम उठाए जाने, अस्पताल ले जाने में देरी करने और मृतक के परिवार और गवाहों की सुरक्षा के साथ राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने की भी मांग की है। याचिका के अनुसार, 45 वर्षीय परविंदर सिंह उर्फ झोटा पूर्व फ्रीस्टाइल कबड्डी खिलाड़ी था और मानसा का निवासी था। उसने ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ बनाई थी और मेडिकल स्टोरों पर नशे की अवैध बिक्री का लाइव वीडियो बनाकर अपने फेसबुक पेज पर डालता था, जिसके करीब 63 हजार फॉलोअर्स थे। जुलाई 2023 में उसने बठिंडा रोड, मानसा स्थित आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बेचने का आरोप लगाया था। उसकी शिकायत पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था और उसके खिलाफ भी क्रॉस-केस दर्ज कर हिरासत में लिया गया था। इस मामले में परविंदर सिंह झोटा को सितंबर 2023 में रिहा किया गया। 13 अक्टूबर को झोटा ने आरोपी के मेडिकल स्टोर से एक व्यक्ति को नशीले कैप्सूल खरीदकर निकलते हुए देखा। उसने वीडियो बनाना शुरू किया, आरोपी से सवाल पूछा और पुलिस को कॉल किया, लेकिन पुलिस नहीं आई। इसी दौरान आरोपी ने उस पर गोली चला दी। इस घटना में परविंदर सिंह झोटा के चार साथी कुलविंदर सिंह, गोबिंद सिंह, बलतेज सिंह और हैप्पी भी घायल हो गए। पिता की शिकायत के अनुसार आरोपी और उसके साथियों ने दिनदहाड़े उसके बेटे का पीछा कर गोली मारी। फायरिंग के बाद भी पुलिस करीब 20-25 मिनट तक मौके पर नहीं पहुंची और गंभीर रूप से घायल परविंदर को तुरंत अस्पताल नहीं ले जाया गया। बाद में उसे सिविल अस्पताल मानसा ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। याचिका में ड्रग लाइसेंस पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रेस रिपोर्ट में ड्रग इंस्पेक्टर मानसा के बयान के हवाले से कहा गया है कि पिछले चार साल में आरोपी की दुकान पर करीब दस बार छापे पड़े, तीन बार लाइसेंस सस्पेंड किया गया, तीन बार नशीले पदार्थ बरामद किए गए और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कार्रवाई की गई, फिर भी लाइसेंस रद्द नहीं किया गया। घटना के बाद मानसा में 13 अक्टूबर को पूर्ण बंद रहा। प्रदर्शनकारियों ने बरनाला-सिरसा रोड पर टिंकोनी चौक जाम किया। 14 अक्टूबर को भीड़ ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी और फायर टेंडर को भी नुकसान पहुंचाया। वहीं, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया।
बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापितों का आंदोलन तेज, 106 युवाओं का भूख हड़ताल जारी

बोकारो। झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में रोजगार की मांग को लेकर विस्थापित परिवारों के प्रशिक्षित युवाओं ने आंदोलन तेज कर दिया है। प्लांट में स्थायी नौकरी और विस्थापितों के लिए स्पष्ट नियोजन नीति लागू करने की मांग पर आंदोलन कर रहे युवाओं ने गुरुवार को प्लांट के गेट नंबर 9 और 10 को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो वे प्लांट के अन्य प्रवेश द्वारों को भी बंद करेंगे। आंदोलनकारियों ने जरूरत पड़ने पर उत्पादन ठप करने की चेतावनी भी दी है। विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आंदोलन कर रहे 106 युवक पिछले छह दिनों से प्लांट परिसर के निकट टू-टैंक गार्डन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में विस्थापित अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं में से 1,500 युवाओं की नियमित नियुक्ति, चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में पहले लागू आरक्षण व्यवस्था को बहाल करना और विस्थापित परिवारों के लिए स्पष्ट रोजगार नीति तैयार करना शामिल है। मोर्चा के अध्यक्ष अरुण कुमार महतो ने आरोप लगाया कि प्रबंधन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों ने प्लांट की स्थापना के लिए अपनी जमीन दी, लेकिन उनके आश्रितों को रोजगार के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने जल्द कोई ठोस पहल नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और प्लांट का कामकाज रोकने की कोशिश की जाएगी। आंदोलन से जुड़े नेता सुनील कुमार ने कहा कि युवाओं को पिछले करीब डेढ़ साल से आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन नियुक्ति के सवाल पर कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा कर चुके युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि उन्हें स्थायी नौकरी के बजाय ठेका आधारित काम से संतोष करने को कहा जाता है। आंदोलनकारियों की मांग है कि प्रशिक्षित विस्थापित युवाओं को स्थायी नियुक्ति देने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जाए। आंदोलन के तेज होने के बीच बीएसएल के सुरक्षा विभाग ने भी प्रशासन को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है। पत्र में आशंका जताई गई है कि आंदोलन के कारण संयंत्र के उत्पादन और औद्योगिक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। कोक ओवन से लेकर सीआरएम तक विभिन्न इकाइयों के कामकाज पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने टू-टैंक गार्डन के आसपास तीन पालियों में दंडाधिकारियों की तैनाती की है। भूख हड़ताल में शामिल लोगों में से कुछ की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया है। फिलहाल आंदोलनकारियों और प्रबंधन के बीच गतिरोध बना हुआ है। एक ओर विस्थापित युवा स्थायी रोजगार और नियोजन नीति पर ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आंदोलन के विस्तार से संयंत्र के कामकाज और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
फिल्म ‘नई नवेली’ से पहले राम दरबार पहुंचीं यामी गौतम, अयोध्या में टेका माथा

मुंबई। अभिनेत्री यामी गौतम अपनी आगामी फिल्म ‘नई नवेली’ की सफलता के लिए राम दरबार पहुंची। अभिनेत्री ने मीडिया के साथ बातचीत में बताया कि वे पहली बार अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर और हनुमान गढ़ी के दर्शन करने आई हैं। अभिनेत्री का कहना है कि वे अयोध्या की अध्यात्मिकता को करीब से देखना चाहती थीं। उन्होंने कहा, “अभी मैं राम जन्मभूमि दर्शन करके हनुमान गढ़ी आई हूं। पहली बार मेरा अयोध्या नगरी में बहुत भावुकता और मन में श्रद्धा के साथ आना हुआ है। प्रभु श्री राम, हनुमान भगवान और माता रानी की कृपा से मेरे परिवार के लिए बहुत अच्छा रहा है और मैं कामना करती हूं कि जिसके लिए मैं यहां आई हूं, वो काम अच्छे से पूरा हो।” यामी ने भगवान राम से जुड़ी इस पवित्र भूमि पर आने का मौका मिलने पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “मैं यहां पर भगवान राम का आशीर्वाद लेने के लिए आई हूं और इस पवित्र भूमि को करीब से देखना चाहती थी। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे इस पवित्र भूमि के दर्शन करने का मौका मिला, जहां श्रीराम 14 साल तक रहे थे।” अभिनेत्री यामी गौतम ने इंस्टाग्राम पर भी इस अध्यात्मिक यात्रा की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं, जिसमें वह सरयू घाट पर आरती में शामिल नजर आ रही हैं। मंदिर में दर्शन के लिए एक्ट्रेस ने पीले रंग की साड़ी पहनी थी, जिसके साथ उन्होंने लंबे झुमके पहने थे। हल्के मेकअप के साथ उन्होंने अपने लुक को सिंपल और एलिगेंट रखा था। अभिनेत्री ने लिखा, “अयोध्या में मां सरयू घाट पर आरती और मन में शांति। नवरात्रि के दिनों में इस पावन नगरी से आशीर्वाद मिला और मन भावुक हो गया। अब जो कल हो, सो ‘श्री राम की कृपा’। सभी सकारात्मकता और शुभकामनाओं के साथ, कल रिलीज होने वाली सभी फिल्मों के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं। नई नवेली शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।” बालाजी मोहन द्वारा निर्देशित फिल्म नई नवेली में अभिनेत्री यामी गौतम मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं। यह फिल्म16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
ट्रंप ने शी जिनपिंग के अमेरिकी दौरे का किया बचाव, कहा-चीन से अमेरिका को हो रहा है फायदा

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी करने का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन अब चीन से “बहुत पैसा” कमाता है। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि वह ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) को अब ‘सुपरइंटेलिजेंस’ (अति-बुद्धिमत्ता) के रूप में पेश कर रहे हैं क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका चीन से आगे है। बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को एरिजोना के बुलहेड सिटी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग की हालिया यात्रा दोनों नेताओं के अच्छे व्यक्तिगत संबंधों को दिखाती है। उन्होंने कहा कि हम चीन के साथ बहुत अच्छा कर रहे हैं। अब हम चीन से बहुत पैसा कमा रहे हैं। पहले हम चीन के साथ व्यापार में बहुत पैसा गंवाते थे, लेकिन अब हम उससे काफी कमाई कर रहे हैं। चीन भी हमारा सम्मान करता है। ट्रंप ने कहा कि शी जिनपिंग का लंबी यात्रा करके अमेरिका आना भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने कहा कि वह 21 घंटे की उड़ान भरकर किसी देश में तब तक नहीं आते, जब तक वह उस देश के राष्ट्रपति या उस देश का सम्मान न करते हों। हमारी बैठक बहुत शानदार रही। हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि इस मुलाकात में क्या समझौते हुए या उनके इस दावे का क्या आधार है कि अमेरिका को अब चीन के साथ व्यापार से लाभ हो रहा है। तकनीक के विषय पर बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका इस समय दुनिया के सभी देशों से आगे है। उन्होंने कहा, “हम दुनिया में सबसे आगे हैं। हम चीन से आगे हैं, हम सब से आगे हैं। लोग इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहते हैं लेकिन मैंने कहा कि यह आर्टिफिशियल नहीं है, यह वास्तव में सुपर है। यह सुपर इंटेलिजेंस है। कभी-कभी यह बहुत ज्यादा सुपर भी हो सकता है और हमें उसी पर नजर रखनी होगी।” ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हाल ही में कई प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के अधिकारियों को व्हाइट हाउस बुलाया था। इनमें से कुछ लोग शी जिनपिंग के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज में भी शामिल हुए थे। हालांकि, ट्रंप ने किसी भी टेक कंपनी या अधिकारी का नाम नहीं बताया। उन्होंने कहा, “वे भी मेरी बात से सहमत हैं कि इसे सुपर इंटेलिजेंस कहना ज्यादा सही होगा, इसलिए हम अब इसी शब्द का इस्तेमाल करेंगे।” तीन नवंबर को होने वाले चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन की अपील करते हुए ट्रंप ने अपनी उस योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत कांग्रेस पर रिपब्लिकन नियंत्रण बरकरार रहने पर अमेरिकियों को पांच हजार डॉलर देने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि यह पैसा अमेरिका के भीतर ही खर्च किया जाना चाहिए।