पीओके में मानवाधिकारों की उड़ाई जा रही धज्जियां, संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की उठी मांग

इस्लामाबाद, । यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कथित तौर पर गहराते मानवाधिकार संकट पर गंभीर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यूकेपीएनपी के प्रवक्ता सरदार नासिर अजीज खान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उन्नत सामरिक ड्रोन और जीवित गोलियों का इस्तेमाल किया, जिससे 24 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उन्होंने बताया कि यूकेपीएनपी और स्विस कश्मीर ह्यूमन राइट्स कमीशन (एसकेएचआरसी) ने 26 जून को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को एक आपात अपील भेजकर शांतिपूर्ण नागरिकों पर कथित कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी प्रशासन ने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं। साथ ही क्षेत्र की सीमाओं को सील कर खाद्यान्न, गेहूं का आटा और जरूरी दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोक दी गई है। यूकेपीएनपी के अनुसार, स्थानीय अस्पतालों में अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती के कारण कई घायल लोग गिरफ्तारी के डर से इलाज कराने से भी बच रहे हैं। यूकेपीएनपी और एसकेएचआरसी ने कथित न्यायेतर हत्याओं की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन भेजने और पीओके में लगाए गए कथित अवैध प्रतिबंधों को तत्काल हटाने की मांग की। संगठन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर चुप नहीं रह सकता। संगठन ने दावा किया कि 5 जून से पीओके में संचार सेवाएं बंद हैं और क्षेत्र की नाकेबंदी जारी है। इसके कारण भोजन, दवाइयों, शिशु आहार और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे लाखों लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है। यूकेपीएनपी ने यह भी आरोप लगाया कि घायलों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। वहीं, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। संगठन ने पाकिस्तान की संघीय सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं और सीनेटरों को भी पीओके जाने से रोका गया। यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों, मानवाधिकार संगठनों और विदेशी मीडिया को रावलाकोट सहित प्रभावित क्षेत्रों में बिना किसी बाधा के पहुंच की अनुमति देने की मांग की। संगठन ने कहा,” शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी या अपराधी नहीं बताया जाना चाहिए।

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