पीओके में मानवाधिकारों की उड़ाई जा रही धज्जियां, संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की उठी मांग

इस्लामाबाद, । यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कथित तौर पर गहराते मानवाधिकार संकट पर गंभीर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यूकेपीएनपी के प्रवक्ता सरदार नासिर अजीज खान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उन्नत सामरिक ड्रोन और जीवित गोलियों का इस्तेमाल किया, जिससे 24 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उन्होंने बताया कि यूकेपीएनपी और स्विस कश्मीर ह्यूमन राइट्स कमीशन (एसकेएचआरसी) ने 26 जून को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) को एक आपात अपील भेजकर शांतिपूर्ण नागरिकों पर कथित कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी प्रशासन ने मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं। साथ ही क्षेत्र की सीमाओं को सील कर खाद्यान्न, गेहूं का आटा और जरूरी दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोक दी गई है। यूकेपीएनपी के अनुसार, स्थानीय अस्पतालों में अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती के कारण कई घायल लोग गिरफ्तारी के डर से इलाज कराने से भी बच रहे हैं। यूकेपीएनपी और एसकेएचआरसी ने कथित न्यायेतर हत्याओं की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग मिशन भेजने और पीओके में लगाए गए कथित अवैध प्रतिबंधों को तत्काल हटाने की मांग की। संगठन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर चुप नहीं रह सकता। संगठन ने दावा किया कि 5 जून से पीओके में संचार सेवाएं बंद हैं और क्षेत्र की नाकेबंदी जारी है। इसके कारण भोजन, दवाइयों, शिशु आहार और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे लाखों लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है। यूकेपीएनपी ने यह भी आरोप लगाया कि घायलों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को उपचार नहीं मिल पा रहा है। वहीं, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। संगठन ने पाकिस्तान की संघीय सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं और सीनेटरों को भी पीओके जाने से रोका गया। यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों, मानवाधिकार संगठनों और विदेशी मीडिया को रावलाकोट सहित प्रभावित क्षेत्रों में बिना किसी बाधा के पहुंच की अनुमति देने की मांग की। संगठन ने कहा,” शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी या अपराधी नहीं बताया जाना चाहिए।
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पिता को किया सैल्यूट, परिजनों का लिया आशीर्वाद

नई दिल्ली,। भारतीय सेना के नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के ‘गार्ड ऑफ ऑनर्स’ समारोह में एक भावुक और गौरवपूर्ण दृश्य देखने को मिला। रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में बुधवार को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्राप्त करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल केएम सेठ (सेवानिवृत्त) को सेल्यूट किया। इसके जवाब में उनके पिता ने भी सैल्यूट किया। इसके बाद उन्होंने अपने पिता समेत यहां मौजूद अपने परिजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य वहां उपस्थित सैन्य अधिकारियों, जवानों और अतिथियों के लिए विशेष आकर्षण व प्रेरणा का केंद्र रहा। समारोह में जनरल धीरज सेठ के छोटे भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ भी मौजूद थे। इस अवसर पर छोटे भाई रियर एडमिरल रवनीश सेठ ने जनरल सेठ को सैल्यूट किया। भारतीय सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं में सेवा दे चुके और दे रहे इस परिवार की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक विशेष बना दिया। सैन्य परंपरा, पारिवारिक संस्कार और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का यह अनूठा संगम यहां देखने को मिला। जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का नेतृत्व करना उनके लिए गर्व और विनम्रता का विषय है। उन्होंने ‘कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि’ के सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने का संकल्प व्यक्त किया। नए थलसेना प्रमुख ने राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका साहस, समर्पण और निस्वार्थ सेवा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना प्रमुख बनने से पहले सेना के उपप्रमुख के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने 30 जून 2026 को सेना प्रमुख का कार्यभार संभाला है। उन्होंने सेना में रेगिस्तानी क्षेत्र से लेकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम मंगलवार को सेवा से सेवानिवृत्त हो गए थे। जनरल धीरज सेठ ने पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी सहित सभी पूर्व सेना प्रमुखों के योगदान को नमन किया। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारतीय सेना देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में तैयार है। जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। दिसंबर 1986 में उन्होंने भारतीय सेना की बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त किया था। अपने चार दशकों के शानदार सैन्य करियर के दौरान, उन्होंने ऑपरेशनल, रणनीतिक, क्षमता विकास और संस्थागत क्षेत्रों में व्यापक अनुभव प्राप्त किया है। उनके इस अनुभव ने भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और दीर्घकालिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जनरल सेठ कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में विभिन्न स्तर पर कमान संभाल चुके हैं। उनके कमांड असाइनमेंट में रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवाद-विरोधी बल शामिल हैं। जनरल धीरज सेठ ने लेफ्टिनेंट जनरल के रहते हुए सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली। गौरतलब है कि सुदर्शन चक्र कोर, भारतीय सेना की एक प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन है। उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य किया है। यहां तैनाती के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों और औपचारिक जिम्मेदारियों की देखरेख की।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’ प्रभावी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की घोषणा

‘ देहरादून,। देवभूमि उत्तराखंड में ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’ प्रभावी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को इसकी घोषणा की। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “आज से ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम’ प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम एवं गैर-सरकारी अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम समाप्त हो गए हैं।” मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार प्रदेश में ऐसी शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है जो आधुनिक, पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण, जवाबदेह और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर आधारित हो। नई व्यवस्था सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए समान एवं पारदर्शी मान्यता प्रणाली सुनिश्चित करेगी। सीएम धामी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “हमारा संकल्प स्पष्ट है कि प्रदेश का नौनिहाल आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कौशल और भारतीय जीवन मूल्यों से सशक्त होकर विकसित उत्तराखंड एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाए। इसी लक्ष्य के साथ हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।” बता दें कि 1 जुलाई से उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा बोर्ड पूरी तरह से समाप्त हो गया है। राज्य में बुधवार से नया राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आ गया है। उत्तराखंड राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में शैक्षिक रूप से बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसमें यहां पर पढ़ने वाले बच्चे को एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम की किताबें मिलेंगी। उत्तराखंड सरकार की ओर से पहले ही उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है। प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है; इसके अलावा, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिष्ठित विद्वानों और प्रोफेसरों को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है। सदस्यों में प्रोफेसर राकेश कुमार जैन, डॉ सैयद अली हामिद, प्रोफेसर पेमा तेनजिंग, प्रोफेसर गुरमीत सिंह, डॉ एल्बा मंड्रेले, प्रोफेसर रॉबिन अमन, चंद्रशेखर भट्ट, और राजेंद्र सिंह बिष्ट शामिल हैं। महानिदेशक विद्यालय शिक्षा और निर्देशक एससीआरईटी को पदेन सदस्य बनाया गया है, जबकि निर्देशक अल्पसंख्यक कल्याण पदेन सदस्य सचिव की भूमिका में रहेंगे।
मध्य प्रदेश : जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ी, कोर्ट ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट

ग्वालियर। कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ ग्वालियर की विशेष एमपी एमएलए कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए 27 जुलाई को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। दरअसल, मामला साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है। भिंड संसदीय क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार देवाशीष जरारिया को लेकर कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने बयान दिया था। उन्होंने बसपा उम्मीदवार के भाजपा से सांठगांठ और लेनदेन करने का आरोप लगाया था। जीतू पटवारी के बयान के खिलाफ बसपा उम्मीदवार जरारिया ने ऊमरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने कांग्रेस नेता के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की सीडी भी पुलिस को सौंपी थी। बताया गया है कि इस मामले की कोर्ट में सुनवाई हुई और न्यायालय ने 16 जनवरी 2026 को पेश होने का नोटिस जारी किया था, मगर जीतू पटवारी कोर्ट नहीं पहुंचे। पुलिस की ओर से तर्क दिया गया कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहीं पता नहीं चल रहा है। इस पर न्यायालय ने सख्त ऐतराज दर्ज कराते हुए कहा कि पटवारी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं और उनके बयान आ रहे हैं, तो पुलिस को वह कैसे नहीं मिल रहे? ग्वालियर की विशेष एमपी एमएलए कोर्ट ने जीतू पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है, साथ ही भिंड पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि 27 जुलाई को कांग्रेस नेता पटवारी की उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
केलावरपल्ली बांध के पास साउथ पेन्नई नदी में जहरीले झाग से बुरा हाल, किसानों ने की कार्रवाई की मांग

चेन्नई। होसुर में केलावरपल्ली बांध के पास दक्षिण पेन्नई नदी में लगातार जमा हो रहे जहरीले झाग ने कृष्णगिरि जिले के किसानों को चिंतित कर दिया है। किसान तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार से मांग कर रहे हैं कि वे मिलकर प्रदूषण के स्रोत की जांच करें और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं। नदी में लगभग एक महीने से झाग दिखाई दे रहा है और कर्नाटक में हाल ही में हुई बारिश के बाद यह और बढ़ गया है, जिससे केलावरपल्ली बांध में पानी का बहाव भी बढ़ गया है। किसानों को डर है कि पानी की खराब होती गुणवत्ता का सिंचाई, खेती और नदी के पूरे इकोलॉजिकल स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। केलावरपल्ली बांध इस इलाके में हजारों एकड़ खेती की जमीन के लिए सिंचाई का एक अहम जरिया है। इस जलाशय पर निर्भर किसानों ने चिंता जताई है कि लगातार प्रदूषण से फसल की खेती पर खतरा मंडरा सकता है और कमांड एरिया में खेती की लंबे समय तक चलने की क्षमता कम हो सकती है। स्थानीय किसान संगठनों का मानना है कि यह प्रदूषण मुख्य रूप से साउथ पेन्नई नदी में ऊपर की तरफ (अपस्ट्रीम) बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज मिलने की वजह से है, खासकर कर्नाटक के शहरी इलाकों से। उन्होंने तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों राज्यों में नदी के किनारे मौजूद मिलों समेत सभी इंडस्ट्रियल यूनिट्स की व्यापक जांच की भी मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इंडस्ट्री से निकलने वाला कचरा भी इस प्रदूषण की वजह है। किसान संगठनों के प्रतिनिधि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से मिलकर तुरंत कदम उठाने और दोनों राज्यों को शामिल करते हुए एक समन्वित कार्य योजना बनाने की मांग करेंगे। उन्होंने प्रदूषण के सही स्रोतों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और बिना ट्रीट किए गए कचरे को नदी में जाने से रोकने के उपाय लागू करने की मांग की है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदी के पानी की नियमित निगरानी हर महीने की जा रही है। शुरुआती नतीजों से सल्फेट और फॉस्फेट का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है, जो आमतौर पर केमिकल इंडस्ट्री के कचरे के बजाय सीवेज के प्रदूषण से जुड़े होते हैं। विभाग ने यह भी पाया है कि प्रभावित हिस्से में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर एक मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे गिर गया है, जो पानी की बहुत खराब गुणवत्ता को दर्शाता है और इसमें मछली सहित जलीय जीवन का पनपना मुश्किल है। पानी के सैंपल लगातार लिए जा रहे हैं और क्वालिटी से जुड़े अलग-अलग पैमानों की बारीकी से जांच के लिए चेन्नई और पोलाची की लैब में भेजे जा रहे हैं। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी प्रदूषण के स्तर का पता लगाने के लिए स्वतंत्र रूप से सैंपल ले रहा है। किसानों ने अधिकारियों से जांच में तेजी लाने और प्रदूषण को रोकने के लिए लंबे समय तक चलने वाले उपाय लागू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दक्षिण पेन्नई नदी की हालत लगातार बिगड़ती रही, तो इस इलाके में खेती, जैव-विविधता और लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
आंध्र प्रदेशः दो ट्रकों की भीषण टक्कर के बाद लगी आग, तीन लोग जिंदा जले

गुंटूर,। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। प्रतिपाडु मंडल में बोयापालेम के पास एक ट्रक के सामने से आ रहे दूसरे वाहन से टकराने के बाद तीन लोगों की जलकर मौत हो गई। यह हादसा सुबह करीब 6 बजे बोयापालेम गांव में हुआ। नरहरी इंस्पेक्टर के अनुसार, एक ट्रक कुरनूल से गुंटूर की ओर और दूसरी गुंटूर से चिलकलुरिपेट की ओर कागज का सामान लेकर जा रही थी। तभी बोयापालेम के पास नेशनल हाईवे-16 पर आमने-सामने टकरा गईं। टक्कर के बाद गाड़ियों में आग लग गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग में दो ड्राइवर और एक हेल्पर जिंदा जल गए। यह हादसा सुबह करीब 6 बजे बोयापालेम गांव में हुआ। हादसे के कारण नेशनल हाईवे पर भारी जाम लग गया, क्योंकि दोनों लॉरी पूरी तरह आग की लपटों में घिरी हुई थीं। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और बचाव व राहत कार्य शुरू किया, जबकि भीड़ कम करने के लिए गाड़ियों की आवाजाही सर्विस रोड से डायवर्ट कर दी गई। फायरफाइटर भी दुर्घटना स्थल पर पहुंचे और आग बुझाने का काम किया। इसके पहले 23 जून को आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में एक भीषण सड़क हादसा हो गया था। समरलाकोटा के गुम्मादिवेदी गांव के प्रवासी मजदूर 16 जून को गुंटूर के पास कोल्लुरु में कंक्रीट की फेंसिंग लगाने गए थे। गुंटूर से घर लौटते मध्यरात्रि में ड्राइवर की लापरवाही के कारण उनकी बोलेरो गाड़ी पलट गई। गाड़ी में निर्माण का सामान भी लदा हुआ था, जिससे हादसा और गंभीर हो गया। इस हादसे में तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 9 लोग घायल हो गए। घायलों को तुरंत पेड्डापुरम के अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। मृतकों की पहचान मसाकापल्ली बालू, मुरामाला राजकुमार और ताथापुडी राजेश के रूप में हुई थी। ये तीनों समरलाकोटा के गुम्मादिवेदी गांव के रहने वाले थे। हादसे में ड्राइवर भी घायल हो गया था।
सनातन बोर्ड के गठन से मंदिरों के चढ़ावे का होगा सदुपयोग और रुकेगी चोरी : देवकीनंदन ठाकुर

नई दिल्ली, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोप, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार के बयान, सनातन बोर्ड, चंपत राय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत विभिन्न मुद्दों पर आईएएनएस से विशेष बातचीत की। राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, “मैं अभी इस मुद्दे पर ज़्यादा कुछ नहीं कह सकता। सभी जानते हैं कि यदि ऐसा कुछ हुआ है तो इसकी जांच चल रही है। लेकिन अगर ऐसा हुआ है, तो उन 100 करोड़ हिंदुओं और सनातन भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंची है, जिनकी भगवान राम में आस्था है।” विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा है कि राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विहिप की भूमिका समाप्त हो गई थी। इसके बाद मंदिर निर्माण से लेकर उसके संचालन तक उनकी कोई भूमिका नहीं रही। इस पर देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, “किसी ने मुझसे आलोक जी के उस बयान के बारे में पूछा कि फैसले के बाद राम मंदिर से उनका अब कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद, सनातन और देश के लिए बहुत काम किया है तथा आगे भी करते रहेंगे। मैं उनकी बात से सहमत हूं।” उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि एक सनातन बोर्ड का गठन होना चाहिए। मैंने संघ और विहिप के लोगों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। कई वरिष्ठ लोग भी मानते हैं कि इसके लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए। जैसे आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को संविधान का ज्ञान होता है, वैसे क्या उन्हें रामायण, वेद और शास्त्रों का भी ज्ञान होता है? धर्म से जुड़े कार्य धर्माचार्यों पर छोड़ दिए जाने चाहिए, जबकि प्रशासन और सरकार अपने दायित्व निभाएं। यदि राम मंदिर से शंकराचार्यों को जोड़ा गया होता तो आज कथित चढ़ावा चोरी जैसे आरोपों का सामना नहीं करना पड़ता।” देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, “मेरी मांग है कि सनातन बोर्ड का गठन हो और चारों शंकराचार्य तथा पांचवें वैष्णवाचार्य इस व्यवस्था का नेतृत्व करें। भगवान का धन गरीबों, माताओं-बहनों और गौसेवा के कार्यों में लगाया जाए। इसके अलावा नि:शुल्क अस्पताल बनाए जाएं। राम और कृष्ण का धन किसी एक ट्रस्ट का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज का होना चाहिए। सनातन बोर्ड का गठन ही सबसे अच्छा विकल्प है।” उन्होंने कहा, “सनातन बोर्ड के गठन से राम मंदिर में कथित चोरी जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है। हमारे शास्त्र कहते हैं कि यदि कोई धर्म का नाश करता है तो धर्म उसका नाश कर देता है। यदि कथित चोरी हुई है और किसी ने इसे अंजाम दिया है, तो जो कुछ उनके साथ हो रहा है, वह उनके कर्मों का फल है। आज पूरी दुनिया में उनकी बदनामी हो रही है। यदि धर्म के जानकार सनातन बोर्ड में होंगे तो भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। यदि ऐसी घटनाएं होती भी हैं तो उनका समाधान धर्माचार्य ही करेंगे।” राम मंदिर चंदे को लेकर हुए विवाद के बाद चंपत राय के इस्तीफे और विपक्ष के बयान पर देवकी नंदन ठाकुर ने कहा, “मैं न तो कोई सरकारी अधिकारी हूं और न ही सत्ता में बैठा कोई व्यक्ति। मेरा कहना यह नहीं है कि जो हो चुका है, उस पर चर्चा न की जाए। हमें इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि भविष्य में ऐसी चीज़ों को कैसे रोका जाए। मुझे हमारे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह से उम्मीद है कि इस बार फैसला ऐसा होना चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहें।” उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि सनातन बोर्ड के माध्यम से आधुनिक गुरुकुल, अस्पताल, गौशालाएं और गरीबों की सेवा के कार्य किए जाएं। आजादी के बाद आज तक किसी प्रधानमंत्री ने यह काम नहीं किया। मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से आशा है कि वक्फ बोर्ड को मिले अधिकारों की तरह सनातन बोर्ड को भी अधिकार दिए जाएं। सभी मंदिरों को सनातन बोर्ड के अंतर्गत लाया जाए। चारों शंकराचार्यों में से किसी एक को बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर कार्य आगे बढ़ाया जाए। इससे भारत, मानवता और सनातन की रक्षा होगी।
अफगानिस्तान का दावा, ‘पाकिस्तान स्थित आईएसआईएस ठिकानों पर की एयरस्ट्राइक’

काबुल,। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को दावा किया कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कथित आईएसआईएस (दाएश) से जुड़े ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मंगलवार रात ये हमले पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में स्थित उन ठिकानों पर किए गए, जहां से कथित तौर पर अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की योजना बनाई जा रही थी। मंत्रालय के अनुसार, बलूचिस्तान के पिशिन जिले के सरानन क्षेत्र स्थित एक संयुक्त आईएसआईएस केंद्र को निशाना बनाया गया। बयान में कहा गया कि यह अफगानिस्तान के नागरिकों के खिलाफ बम धमाकों और आतंकी गतिविधियों के संचालन एवं समन्वय का प्रमुख केंद्र था। इसके अलावा, खैबर पख्तूनख्वा के कंबर खेल क्षेत्र में एक अन्य दाएश केंद्र पर भी सफल हवाई हमला किया गया। वहीं, चित्राल के शाह सलीम घाटी के गरम चश्मा क्षेत्र में स्थित एक संयुक्त दाएश ठिकाने और उससे जुड़े तत्वों को भी निशाना बनाया गया। मंत्रालय का दावा है कि इन केंद्रों से नागरिकों पर हमलों और अन्य विध्वंसक गतिविधियों की योजना बनाई जा रही थी। रक्षा मंत्रालय ने प्रारंभिक जानकारी के आधार पर कहा कि इन हमलों में आईएसआईएस और उसके समर्थकों को भारी जनहानि और आर्थिक नुकसान पहुंचा है। मंत्रालय का यह भी दावा है कि हमले पूरी सटीकता के साथ केवल निर्धारित सैन्य लक्ष्यों पर किए गए और इनमें किसी भी नागरिक की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा कि अफगानिस्तान की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किसी भी ठिकाने को भविष्य में भी निशाना बनाया जाएगा। इस बीच पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार रात ड्रोन को मार गिराने की पुष्टि की। दावा किया कि अफगानिस्तान की सीमा से बलूचिस्तान में चार साधारण (रुडिमेंटरी) ड्रोन भेजे गए, जिन्हें पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली ने समय रहते पहचानकर मार गिराया। सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर) के अनुसार, ये ड्रोन अफगान तालिबान शासन की ओर से उन आतंकी संगठनों को समर्थन और संरक्षण देने की नीति का हिस्सा थे, जो अफगानिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से सक्रिय हैं। वहीं मंगलवार देर रात पेशावर के बाहरी क्षेत्र में भी संदिग्ध ड्रोन हमले की खबर है। प्रमुख पाकिस्तानी दैनिक डॉन के अनुसार, इस हमले में एक महिला की मौत हो गई जबकि एक ही परिवार के छह लोग घायल हो गए। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में 36 नागरिकों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, के मारे जाने तथा 163 अन्य के घायल होने का दावा किया गया था। इसके बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल स्थित पाकिस्तान दूतावास के प्रभारी (चार्जे डी’अफेयर्स) को तलब कर अफगान हवाई क्षेत्र के कथित उल्लंघन और कुनार, पक्तिया तथा पक्तिका में नागरिक घरों पर बमबारी के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। अफगान विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवीय कानून और किसी संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
‘डॉक्टर्स डे’ पर पीएम मोदी ने वेनेजुएला में सेवाएं दे रहे भारतीय चिकित्सकों को किया नमन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) के अवसर पर वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे भारतीय चिकित्सा पेशेवर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा, “आज, जब हम डॉक्टर्स डे मना रहे हैं, मैं ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत वेनेजुएला में अथक सेवा दे रहे भारत के सभी डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों की सराहना करता हूं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए उनके प्रयास इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि जब भी समाज किसी चुनौती का सामना करता है, हमारे चिकित्सा पेशेवर हमेशा आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय डॉक्टरों की प्रतिबद्धता, सेवा भावना और मानवीय दृष्टिकोण पूरी दुनिया में भारत की सकारात्मक पहचान को मजबूत कर रहा है। उन्होंने चिकित्सा समुदाय के योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। इससे पहले की एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के डॉक्टरों को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण, करुणा और अथक सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ही भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “डॉक्टर्स डे पर हमारे समर्पित चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएं। उनकी कड़ी मेहनत, करुणा और सेवा के प्रति प्रतिबद्धता भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है। सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उनके अथक प्रयासों ने करोड़ों लोगों का विश्वास और आभार अर्जित किया है।” उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है, जबकि स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) मेडिकल सीटों में भी बड़े पैमाने पर वृद्धि की गई है। पीएम मोदी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में यह अभूतपूर्व विस्तार भावी डॉक्टरों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है, देश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मजबूत मानव संसाधन तैयार कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं देश के हर कोने तक पहुंचें। उन्होंने कहा, ” विकसित भारत के निर्माण की दिशा में डॉक्टरों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी। डॉक्टर न केवल निवारक स्वास्थ्य सेवाओं (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) को बढ़ावा देंगे, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने, नवाचार को अपनाने तथा सभी नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी अग्रणी भूमिका निभाएंगे।” प्रधानमंत्री ने देश के सभी डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वस्थ, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अमूल्य है। ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ भारत सरकार की ओर से वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप के बाद शुरू की गई मानवीय पहल है। एचएडीआर मिशन के तहत भारत ने 41 सदस्यीय चिकित्सा दल, दो ‘भीष्म’ पोर्टेबल अस्पताल और 66 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री और दवाइयां वेनेजुएला भेजी हैं।
नॉर्वे की पहली फीफा वर्ल्ड कप नॉकआउट जीत पर हालैंड ने कहा, अब सब कुछ है बोनस

आर्लिंगटन। फीफा विश्व कप में नॉर्वे को इतिहास की पहली नॉकआउट जीत दिलाने के बाद स्टार स्ट्राइकर एरलिंग हालैंड बेहद खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि 28 वर्षों बाद विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने और ग्रुप चरण से आगे बढ़ने के बाद अब टीम के लिए आगे मिलने वाली हर सफलता “बोनस” के समान है। एरलिंग हालैंड ने फीफा विश्व कप में अपने गोल करने का सिलसिला जारी रखते हुए अंतिम क्षणों में निर्णायक गोल दागा, जिससे नॉर्वे ने कोट डी आइवर को 2-1 से हराया। इस जीत के साथ नॉर्वे ने 1998 के बाद पहली बार विश्व कप के अंतिम 16 (राउंड ऑफ 16) में जगह बनाई। हालैंड ने कहा, “यह इतिहास है और इसका अहसास अविश्वसनीय है। हमने 28 साल बाद पहली बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया, फिर ग्रुप चरण पार किया और अब अगले दौर में पहुंचकर न्यूयॉर्क में ब्राजील से मुकाबला करेंगे। यह शानदार है। अब इसके बाद मिलने वाली हर उपलब्धि हमारे लिए बोनस है। अब हम बिना किसी दबाव के खेल सकते हैं और इस पल का आनंद ले सकते हैं, क्योंकि शायद हमें दोबारा ऐसा एहसास कभी नहीं होगा।” पूरे मैच के दौरान कोट डी आइवर के खिलाड़ियों ने हालैंड को काफी हद तक रोककर रखा। हालांकि, दूसरे हाफ में अमाद डियालो के शानदार बराबरी के गोल से मुकाबले में वापसी करने वाली कोट डी आइवर की चुनौती को हालैंड ने अपने निर्णायक गोल से खत्म कर दिया। इस जीत के साथ स्टाले सोलबाकेन की टीम ने 6 जुलाई को न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी में ब्राजील के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 16 मुकाबले में जगह बना ली। नॉर्वे के मुख्य कोच स्टाले सोलबाकेन ने कहा कि बेहद करीबी मुकाबले में उनकी टीम की अंत तक मजबूती बनाए रखने की क्षमता ही जीत का कारण बनी। उन्होंने फीफा से कहा, “मुझे लगता है कि यह बेहद बराबरी का मुकाबला था। दोनों टीमें अच्छी थीं और मैच किसी भी तरफ जा सकता था। लेकिन आज हमने अंत में शानदार खेल दिखाया और 1-1 की बराबरी के बाद वापसी करते हुए जीत हासिल की। मैच के आखिर में उन्हें एक अच्छा फ्री-किक मिला और उनके पास गोल करने के कुछ मौके भी थे।” उन्होंने आगे कहा, “कुल मिलाकर मुझे लगता है कि हम उनसे थोड़ा बेहतर रहे, लेकिन कोट डी आइवर की भी तारीफ करनी होगी, उन्होंने बहुत अच्छा खेल दिखाया। नॉर्वे के लिए यह पहली बार है जब हमने विश्व कप के नॉकआउट चरण में जीत हासिल की है और हमें इस उपलब्धि का पूरा आनंद लेना चाहिए। अब हम थोड़ा आराम करेंगे और ब्राजील के खिलाफ मुकाबले की तैयारी करेंगे।