ओडोनिल ने भारत में एयर फ्रेशनर के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नया क्षेत्रीय अभियान लॉन्च किया

नई दिल्ली।डाबर इंडिया लिमिटेड के हाउस से आने वाले भारत के नंबर 1 एयर फ्रेशनर ब्रांड ओडोनिल ने अपना नया अभियान “बाथरूम में ओडोनिल नहीं, तो आपकी बदनामी हो रही होगी कहीं” लॉन्च किया है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को अपने घरों में एयर फ्रेशनर के उपयोग के लिए प्रेरित करना है।इस अभियान की खास बात यह है कि एक ही विज्ञापन को अलग-अलग भाषाओं में दिखाने के बजाय, ओडोनिल ने 7 राज्यों के लिए 7 अलग-अलग स्थानीय कहानियां बनाई हैं। ये सभी कहानियां अपने-अपने क्षेत्र की संस्कृति और बोलचाल को दर्शाती हैं, लेकिन एक समान सोच पर आधारित हैं कि बाथरूम की ताजगी भी घर के बारे में लोगों की राय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।इस अवसर पर डाबर इंडिया लिमिटेड के मार्केटिंग डायरेक्टर अभिषेक जुगरण ने कहा:”ओडोनिल लगातार नए उत्पादों और उपभोक्ताओं से जुड़ने वाले अभियानों के माध्यम से अपनी अग्रणी स्थिति को मजबूत कर रहा है। यह अभियान एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता समझ पर आधारित है और क्षेत्रीय स्तर पर लोगों से बेहतर जुड़ाव बनाने का प्रयास करता है। हमारा उद्देश्य बाथरूम की ताजगी को भारतीय घरों की देखभाल और मेहमाननवाजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है।यह अभियान “नोज ब्लाइंडनेस” की अवधारणा पर आधारित है, जिसमें लोग अपने घर के वातावरण के इतने आदी हो जाते हैं कि उन्हें कुछ बातें महसूस नहीं होतीं, लेकिन मेहमान उन्हें आसानी से नोटिस कर लेते हैं।अभियान में बाथरूम की दुर्गंध पर अतिरंजित प्रतिक्रिया दिखाने के बजाय यह दिखाया गया है कि मेहमान के जाने के बाद लोग आपस में क्या बातें करते हैं। हास्य और मजेदार बातचीत के जरिए यह संदेश दिया गया है कि बाथरूम की ताजगी भी घर की अच्छी छवि बनाने में अहम भूमिका निभाती है।इस बारे में डाबर इंडिया लिमिटेड के होम केयर मार्केटिंग हेड वैभव राठी ने कहा:”भारतीय परिवार अपने घर और मेहमानों के स्वागत पर काफी ध्यान देते हैं। लेकिन कई बार लोग अपने आसपास की कुछ ऐसी चीजें नहीं देख पाते जो मेहमानों को तुरंत दिखाई देती हैं। यह अभियान उसी व्यवहार को हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में दिखाता है तथा बाथरूम की ताजगी के महत्व को सामने लाता है।यह अभियान दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना, पंजाब और पश्चिम बंगाल में चलाया जाएगा। इसके साथ ही ओडोनिल विभिन्न क्षेत्रों के कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स के साथ मिलकर स्थानीय भाषा और हास्य से जुड़ी डिजिटल सामग्री भी प्रस्तुत करेगा।इस अभियान के जरिए ओडोनिल न केवल अपनी बाजार नेतृत्व की स्थिति को और मजबूत करना चाहता है, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के बीच बाथरूम फ्रेशनर के नियमित उपयोग की आदत को भी बढ़ावा देना चाहता है।
व्हर्लपूल ने 360° ट्रिपल कूलिंग टेक्नोलॉजी संचालित प्रीमियम 4-डोर रेफ्रिजरेटर की लक्ज़ूरियम रेंज का अनावरण किया

नई दिल्ली। भारत की अग्रणी होम अप्लायंसेज निर्माता कंपनियों में से एक, व्हर्लपूल ऑफ इंडिया लिमिटेड ने आज अपनी प्रीमियम 4-डोर रेफ्रिजरेटर रेंज लक्ज़ूरियम लॉन्च करने की घोषणा की। समझदार और आधुनिक भारतीय उपभोक्ताओं, जो शानदार सौंदर्य, स्मार्ट क्षमता और रोजमर्रा की उपयोगिता का सही संतुलन चाहते हैं, के लिए डिज़ाइन किया गया प्रमुख 654L रेफ्रिजरेटर व्हर्लपूल का अब तक का सबसे उन्नत रेफ्रिजरेशन प्लेटफॉर्म पेश करता है।खाद्य संरक्षण के स्वर्ण मानक, वास्तुशिल्प रूप से बेहतर प्रारूप और उद्योग तथा भारत में पहली बार किए गए नवाचारों Tको एक साथ लाते हुए, 4-डोर रेफ्रिजरेटर की लक्ज़ूरियम रेंज को प्रीमियम भारतीय घरों की विकसित होती जरूरतों को पूरा करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। बेहतरीन कूलिंग तकनीक और स्मार्ट स्टोरेज फ्लेक्सिबिलिटी से लेकर शानदार फिनिश और सोच-समझकर तैयार किए गए इंटीरियर तक, हर एलिमेंट को प्रीमियम रेफ्रिजरेशन के भविष्य को फिर से परिभाषित करते हुए एक उन्नत ओनरशिप अनुभव प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।लॉन्च पर बात करते हुए, नकुल तिवारी, वाइस प्रेसिडेंट – मार्केटिंग, व्हर्लपूल ऑफ इंडिया ने कहा: “जब हम बड़ी क्षमता वाले रेफ्रिजरेटर के मौजूदा उपयोगकर्ताओं से मिले, तो बाजार में उपलब्ध वर्तमान उत्पादों के संबंध में कुछ समस्याएँ सामने आईं – भारतीय खाना पकाने के लिए आवश्यक बड़े और चौड़े बर्तनों को रखने के लिए पर्याप्त जगह का न होना, एक अक्षम कन्वर्टिबल समाधान और एक फल/सब्जी स्टॉकिंग ज़ोन जिसके लिए बार-बार झुकना पड़ता है। हमने महसूस किया कि आज देश में उपलब्ध अधिकांश बड़ी क्षमता वाले रेफ्रिजरेटर भारतीय कुकिंग और स्टोरेज आदतों के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं।व्हर्लपूल लक्ज़ूरियम 4-डोर रेफ्रिजरेटर रेंज इन सभी उपभोक्ता चिंताओं को दूर करती है। यह एक विचारपूर्वक तैयार किए गए उत्पाद प्रारूप को एकीकृत करती है जो बेहतर संरक्षण, अधिक स्टोरेज लचीलापन, परिष्कृत डिज़ाइन और अत्याधुनिक तकनीक को जोड़ती है, जो उपभोक्ताओं की प्रीमियम रेफ्रिजरेशन से उम्मीदों को फिर से परिभाषित करती है।4-डोर रेफ्रिजरेटर की लक्ज़ूरियम रेंज के केंद्र में व्हर्लपूल की 360° ट्रिपल कूलिंग टेक्नोलॉजी है, जो एक उन्नत ट्रिपल इवेपोरेटर आर्किटेक्चर है। इसमें रेफ्रिजरेटर, कन्वर्टिबल और फ्रीजर डिब्बों में तीन स्वतंत्र इवेपोरेटर, तीन समर्पित कूलिंग सिस्टम और तीन समर्पित एयरफ्लो शामिल हैं।खाद्य संरक्षण की बेहतरीन अभिव्यक्ति के रूप में निर्मित, यह तकनीक तीन पूरी तरह से स्वतंत्र कूलिंग वातावरण बनाती है जो ताजे भोजन, जमे हुए भोजन और कन्वर्टिबल स्टोरेज में गंध को आपस में मिलने से रोकते हुए प्रत्येक डिब्बे के लिए सटीक तापमान और आर्द्रता का स्तर बनाए रखती है। विभिन्न खाद्य श्रेणियों के लिए समर्पित कूलिंग वातावरण प्रदान करके, लक्ज़ूरियम 4-डोर रेफ्रिजरेटर रेंज स्वाद, बनावट और गुणवत्ता को सुरक्षित रखती है जबकि फलों और सब्जियों को लंबे समय तक ताजा और कुरकुरा बनाए रखने में मदद करती है।इसके पूरक के रूप में भारत का सबसे तेज कन्वर्टिबल है, जो कन्वर्टिबल डिब्बे को 30 मिनट से भी कम समय में फ्रीजर से रेफ्रिजरेटर मोड में बदलने में सक्षम बनाता है, जबकि समर्पित फ्रीजर स्पेस को बनाए रखता है। यह लचीलापन Lउपभोक्ताओं को बदलती जरूरतों के आधार पर अपने स्टोरेज को अनुकूलित करने की अनुमति देता है, चाहे मेहमानों की मेजबानी करते समय पार्टी प्लैटर्स और पेय पदार्थों के लिए अतिरिक्त रेफ्रिजरेटर स्थान बनाना हो, किराने की खरीदारी के बाद अधिक मात्रा में ताजे उत्पादों को रखना हो, या आइस-क्यूब्स और डेसर्ट को स्टोर करने के लिए फ्रीजर स्पेस को बनाए रखते हुए मौसमी आवश्यकताओं के आधार पर स्थान का पुनर्आवंटन करना हो। 30 मिनट से कम समय का रूपांतरण इस लचीलेपनSa को अंतिम समय की जरूरतों के लिए वास्तव में व्यावहारिक बनाता है, जिससे उपभोक्ताओं को अचानक आए मेहमानों या बदलती योजनाओं के लिए वांछित तापमान तक पहुँचने के लिए कई घंटों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। 100+ कस्टमाइज़ेबल स्टोरेज मोड के साथ, लक्ज़ूरियम जरूरत पड़ने पर घर की आवश्यकताओं के अनुसार रेफ्रिजरेटर स्पेस को कॉन्फ़िगर करना संभव बनाता है। लक्ज़ूरियम रेंज को 4-डोर आर्किटेक्चर के इर्द-गिर्द उद्देश्यपूर्ण ढंग से डिज़ाइन किया गया है, जो प्रीमियम रेफ्रिजरेशन के अगले विकास को दर्शाता है।पारंपरिक साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर के विपरीत, इस सोच-समझकर तैयार किए गए 4-डोर फॉर्मेट को भारतीय रसोई की विशिष्ट स्टोरेज जरूरतों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है, जहाँ रोजमर्रा के खाना पकाने में अक्सर कई व्यंजन, बड़े बर्तन, सर्विंग प्लैटर्स और थोक किराने का स्टोरेज शामिल होता है। बड़ा रेफ्रिजरेटर सेक्शन बड़े कुकवेयर और सर्विंग डिश को आराम से समायोजित करता है, जबकि बड़े वाइड-एक्सेस शेल्फ अधिक उपयोग करने योग्य स्थान और आसान पहुंच प्रदान करते हैं। यह फॉर्मेट विभिन्न खाद्य श्रेणियों को अलग-अलग व्यवस्थित करना भी आसान बनाता है, जिससे रोजमर्रा के भारतीय घरों में अधिक लचीलापन और सुविधा आती है।एर्गोनोमिक रूप से स्थित ज़ीरो-बेंडिंग क्रिस्पर ड्रॉर्स (बिना झुके उपयोग होने वाले दराज) फलों और सब्जियों तक आसान पहुँच प्रदान करते हैं, जबकि समर्पित स्टोरेज ज़ोन उपभोक्ताओं को ताजे उत्पाद, डेयरी, फ्रोजन खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं को अधिक कुशलता से अलग करने में सक्षम बनाते हैं।चार-दरवाजे वाला आर्किटेक्चर कूलिंग लॉस को कम करने में भी मदद करता है, जिससे उपयोगकर्ता पूरे रेफ्रिजरेटर कैविटी को परिवेशी हवा में उजागर करने के बजाय केवल आवश्यक डिब्बे को खोल सकते हैं, जिससे इष्टतम संरक्षण स्थितियों को बनाए रखने और रोजमर्रा की उपयोगिता में सुधार करने में मदद मिलती है।भारतीय घरों के इंटीरियर में भारी बदलाव आया है – वे अधिक समकालीन हो गए हैं। यह आधुनिकीकरण केवल रहने की जगह तक ही सीमित नहीं है बल्कि रसोई में भी देखा जाता है। 4-डोर रेफ्रिजरेटर की लक्ज़ूरियम रेंज को आधुनिक इंटीरियर के पूरक के रूप में सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है।यह रेंज प्रीमियम सामग्रियों के सहज संलयन के माध्यम से एक बोल्ड लेकिन सुरुचिपूर्ण अभिव्यक्ति बनाते हुए, भारत की पहली ग्लास और मेटल डुअल फिनिश (डुओ नोयर) पेश करती है। एक्सटीरियर के पूरक के रूप में भारत का पहला ओब्सीडियन इंटीरियर्स है, जिसे क्वाड थिएटर लाइटिंगद्वारा बढ़ाया गया है, जो एक परिष्कृत, प्रीमियम माहौल के साथ दृश्यता और समग्र स्वामित्व अनुभव दोनों को बेहतर बनाता है।डुओ नोयर, नीरो क्वार्ट्ज, डार्क क्वांटम, रोडियम स्टील और कॉसमॉस ब्लैक (मॉडल की उपलब्धता के अधीन) सहित प्रीमियम फिनिश में उपलब्ध, लक्ज़ूरियम को परिष्कृत, डिज़ाइन-आधारित रसोई में सहजता से एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।संरक्षण और सौंदर्यशास्त्र से परे, 4-डोर रेफ्रिजरेटर की लक्ज़ूरियम
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अनुराग गर्ग ने युवाओं में संस्कारों को बढ़ावा देने पर की चर्चा

नई दिल्ली।अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनुराग गर्ग ने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान युवा पीढ़ी को शिक्षा और रोजगार के साथ भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और अच्छे संस्कारों से जोड़ने को लेकर चर्चा हुई। युवाओं में संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श हुआ।अनुराग गर्ग ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी देश और समाज की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए समाज और राष्ट्र के विकास में प्रभावी योगदान दे सकें। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज मिलकर युवाओं को अच्छे संस्कार देने की दिशा में निरंतर प्रयास करें।मुलाकात के दौरान रितु गर्ग, सक्षम गर्ग और अनुभव गर्ग भी मौजूद रहे।
वाराणसी की मिट्टी से महका आनंद विहार का शिव मंदिर, संत रविदास जयंती पर कलश स्थापित

नई दिल्ली। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर आनंद विहार में श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। शाहदरा जिला भाजपा की ओर से संत रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी की पावन मिट्टी से भरा कलश आनंद विहार मंडल के डी-ब्लॉक स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया गया। कलश स्थापना के दौरान मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी और भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए।इससे पहले कार्यकर्ता और समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिक विवेक विहार स्थित अग्रसेन भवन में एकत्रित हुए। यहां संत रविदास जी के जीवन और उनके सामाजिक समरसता के संदेश को याद किया गया। इसके बाद वाराणसी से लाई गई पावन मिट्टी के कलश को श्रद्धापूर्वक शिव मंदिर लाया गया, जहां विधि-विधान से पूजन के बाद उसे स्थापित किया गया। भाजपा शाहदरा जिलाध्यक्ष दीपक गाबा और भाजपा आनंद विहार वार्ड अध्यक्ष सचिन शर्मा ने कहा कि संत रविदास जी ने अपना पूरा जीवन समानता, भाईचारे और मानवता के लिए समर्पित किया। उनकी जन्मस्थली की मिट्टी का कलश आनंद विहार में स्थापित होना क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी के विचार आज भी समाज को जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम, उपमहापौर मोनिका पंत, महेश माखीजा, कुलदीप, प्रकाश, मंदिर प्रधान अशोक गुप्ता, प्रेम गंभीर सहित मंडल के पदाधिकारी, मंदिर समिति के सदस्य, पंडितगण और डी-ब्लॉक के बड़ी संख्या में निवासी मौजूद रहे। भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालुओं ने संत रविदास जी के भजनों का गायन कर उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
आईपी यूनिवर्सिटी में दिल्ली में अर्बन ग्रीनिंग और एयर क्वालिटी पर विमर्श सत्र का आयोजन

नई दिल्ली।यूनिवर्सिटी को हाल ही में लीड नॉलेज इंस्टीटूशन(एलकेआई) का दर्जा दिया गया है।यह सत्र उसी के तत्वाधान में किया गया।इस सत्र का उद्घाटन करते हुए यूनिवर्सिटी के कुलपति पद्मश्री प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा ने कहा कि सरकार अकेले पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती। इसमें सबकी साझेदारी जरूरी है। लोगों को जागरूक करने एवं प्रेरित करने में अकादमिक जगत की भी बड़ी भूमिका है।उन्होंने कहा कि बदलाव रातों-रात संभव नहीं है।सतत प्रयास के बाद ही सुखद परिणाम की आशा कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है।प्रदूषण के कई स्रोत हैं।उन स्रोतों पर नियंत्रण आवश्यक है और प्रदूषण नियंत्रण के अन्य उपायों पर भी काम करने की ज़रूरत है।उन्होंने कहा की “टेरी” जैसी अकादमिक संस्थाएं इस दिशा में अच्छा काम कर रही है।अन्य संस्थाओं को भी आगे आना होगा।सीएक्यूएम के एक्सपर्ट मेंबर डॉ. एस. डी. अत्री ने इस अवसर कहा कि धुआं और धूल प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत हैं। प्रदूषण कम करने के लिए इन दोनों पर नियंत्रण आवश्यक है।उन्होंने कहा कि विकसित भारत में पर्यावरण भी एक बड़ा कंपोनेंट है।इस अवसर पर दो टेक्निकल सत्र का आयोजन भी किया गया जिसमें देश के कोने-कोने से आयें विशेषज्ञों ने अपने विचार रखें।
स्थायी समिति की बैठक में ‘‘आप’’ ने दिल्ली की बदहाल सफाई व्यवस्था और जलभराव को लेकर भाजपा शासित एमसीडी को घेरा

नई दिल्ली।दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की मंगलवार को हुई बैठक में आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने दिल्ली की बदहाल सफाई व्यवस्था, जगह-जगह फैले कूड़े और बारिश के दौरान होने वाले गंभीर जलभराव को लेकर भाजपा शासित एमसीडी को जमकर घेरा। बैठक के दौरान ‘‘आप’’ के पार्षदों ने सवाल उठाया कि दिल्ली की जनता एक तरफ गंदगी और कूड़े के ढेर से परेशान है, वहीं दूसरी तरफ थोड़ी सी बारिश में दिल्ली की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। इसके बावजूद भाजपा सरकार और एमसीडी प्रशासन के पास इन समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं है। ‘‘आप’’ ने दिल्ली की सफाई व्यवस्था, जलभराव, स्वास्थ्य विभाग और सौंदर्यीकरण जैसे अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।इस बाबत एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली की सफाई व्यवस्था लगातार बदहाल होती जा रही है और बारिश के दौरान जलभराव ने भाजपा सरकार तथा एमसीडी की तैयारियों की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि जब दिल्ली में पर्याप्त सफाई कर्मचारियों की भर्ती करने और मौजूदा कर्मचारियों को पक्का करने की जरूरत है, तब भाजपा सरकार निजी कंपनियों को हजारों मशीनों के टेंडर देकर आखिर किसे फायदा पहुंचाना चाहती है? उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार एमसीडी में नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। आम आदमी पार्टी जनता की आवाज बनकर दिल्ली की सफाई, जलभराव और हर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मजबूती से लड़ती रहेगी।स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य व निगम पार्षद राफिया माहिर ने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी की पांच महीने बाद जनरल मीटिंग हुई। लेकिन उस जनरल मीटिंग के अंदर डीएमसी एक्ट के नियमों के अनुसार कोई भी काम नहीं हो रहा है। सारी एंटीसिपेटरी अप्रूवल गलत तरीके से दी जा रही हैं। आज मैंने स्टैंडिंग कमेटी के अंदर सभी अधिकारियों से पूछा कि क्या डीएमसी एक्ट के अंदर मेयर या स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन को ऐसी कोई पावर है? लेकिन कोई भी अधिकारी इसका जवाब नहीं दे पाया।राफिया माहिर ने कहा कि दिल्ली के अंदर भाजपा की सरकार में बड़े-बड़े घोटाले खुलेआम चल रहे हैं। न अधिकारियों के ऊपर और न ही भाजपा नेताओं के ऊपर किसी का कोई कंट्रोल है। जो काम टेंडर करके किया जाना चाहिए था, वह काम इन्होंने गैर-कानूनी तरीके से बिना टेंडर के ही पुरानी कंपनी को दे दिया है। मैंने इसके ऊपर भी जांच की मांग की है।वहीं, स्टैंडिंग कमेटी सदस्य व निगम पार्षद दौलत पवार ने बताया कि भाजपा शासित एमसीडी से दिल्ली की सफाई व्यवस्था संभल नहीं पा रही है और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए अब इसका पूरा ठीकरा वेब्स कर्मचारियों पर फोड़ा जा रहा है। एमसीडी में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी भाजपा नेतृत्व और प्रशासन की है, लेकिन अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय कर्मचारियों को दोषी ठहराया जा रहा है।उन्होंने कहा कि भाजपा को कर्मचारियों पर जिम्मेदारी डालने के बजाय अपनी विफलताओं की जवाबदेही लेनी चाहिए। दिल्ली की सफाई व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने, पर्याप्त सफाई कर्मचारियों की भर्ती करने, कर्मचारियों को नियमित करने और जलभराव रोकने के लिए नालों एवं ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।दौलत पवार ने बताया कि नगर निगम का कोई भी अधिकारी या कोई भी नेता किसी एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाया, क्योंकि उनके पास कोई जवाब है ही नहीं। भाजपा की सरकार में नगर निगम के अंदर आए दिन नए-नए और बड़े-बड़े भ्रष्टाचार सामने आ रहे हैं। भाजपा सरकार को अब केवल विज्ञापन और दावों की राजनीति छोड़कर दिल्ली की सफाई व्यवस्था और जलभराव जैसी गंभीर समस्याओं का जमीन पर समाधान करना चाहिए।
पक्ष एवं विपक्ष के सभी पार्षदों को अपने मुद्दे एवं सुझाव रखने का पूरा अवसर दिया गया : सत्या शर्मा

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक आज सफलतापूर्वक आयोजित की गई, जिसमें जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई तथा कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक के दौरान पक्ष एवं विपक्ष दोनों के पार्षदों को अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित समस्याएं, मुद्दे एवं सुझाव रखने का पूरा अवसर दिया गया।स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि स्थायी समिति लोकतांत्रिक संवाद और जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि बैठक में सभी पार्षदों द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से सुना गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।बैठक में पार्षदों द्वारा मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम, स्वाइन फ्लू, अवैध प्ले स्कूल, सड़कों पर अवैध अतिक्रमण,बेसहारा पशुओं की समस्या, पार्कों के रखरखाव, प्रदूषण तथा स्वच्छता व्यवस्था सहित विभिन्न जनहित के विषय प्रमुखता से उठाए गए।मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के संबंध में श्रीमती सत्या शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेंगू, मलेरिया एवं अन्य मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग कराने के साथ-साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि इन अभियानों में संबंधित क्षेत्र के पार्षदों को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाए,सत्या शर्मा ने दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि नागरिकों को स्वाइन फ्लू से बचाव एवं सावधानियों के संबंध में जागरूक करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।स्थायी समिति अध्यक्ष ने दिल्ली में संचालित किए जा रहे अवैध प्ले स्कूलों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऐसे संस्थानों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में सड़कों एवं सार्वजनिक स्थानों पर अवैध रूप से संचालित हो रहे खाने के ठेलों तथा खुले में तंदूर का इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। श्रीमती सत्या शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे स्थानों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।सत्या शर्मा ने दिल्ली में आवारा एवं बेसहारा गायों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कहा कि सड़कों पर पशुओं की मौजूदगी से यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर नई गौशालाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जाएगा, ताकि सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को सुरक्षित रूप से निर्धारित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।सत्या शर्मा ने कहा कि स्थायी समिति का उद्देश्य केवल प्रस्ताव पारित करना नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बैठक में उठाए गए जनहित के विषयों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए तथा संबंधित विभागों द्वारा की गई कार्रवाई की नियमित समीक्षा की जाए।उन्होंने कहा कि स्वच्छता, जनस्वास्थ्य, नागरिक सुरक्षा, अतिक्रमण एवं सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े विषय सीधे दिल्लीवासियों के दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं। इन सभी विषयों पर निगम द्वारा प्राथमिकता के आधार पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पीएम मोदी के जन्मदिन पर भाजपा का ‘सेवा संकल्प अभियान’, वडनगर से वाराणसी तक निकलेगी यात्रा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) देशभर में एक महीने का विशेष जनसंपर्क अभियान ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करेगी। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा और प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा होगा। अभियान का सबसे प्रमुख आकर्षण ‘वडनगर से वाराणसी यात्रा’ होगी, जिसे ‘जन्मभूमि से कर्मभूमि यात्रा’ के रूप में भी प्रस्तुत किया जा रहा है। इस यात्रा के तहत प्रधानमंत्री मोदी की जन्मस्थली गुजरात के वडनगर से उनकी कर्मभूमि उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक साथ यात्राएं शुरू होंगी। योजना के अनुसार वडनगर और वाराणसी से 10-10 टीमें एक ही दिन रवाना होंगी। वाराणसी से निकलने वाली टीमें एक महीने में वडनगर पहुंचेंगी, जबकि वडनगर से चलने वाली टीमें इसी अवधि में वाराणसी पहुंचेंगी। प्रत्येक टीम प्रतिदिन करीब 100 किलोमीटर की यात्रा करेगी। इनमें बाइक सवार, बसें और भाजपा कार्यकर्ता शामिल होंगे, जो केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों की उपलब्धियों का संदेश लोगों तक पहुंचाएंगे। यात्रा के दौरान टीमें प्रतिदिन निर्धारित दूरी तय करने के बाद विभिन्न स्थानों पर रुकेंगी और चार विशेष कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए नरेंद्र मोदी सरकार और संबंधित राज्य सरकारों की योजनाओं तथा उपलब्धियों की जानकारी जनता तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा भाजपा ने पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक संपर्क बढ़ाने के लिए अन्य यात्राओं की भी योजना बनाई है। अभियान के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान, स्वास्थ्य और स्वच्छता अभियान तथा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। भाजपा युवाओं को जोड़ने और सेवा तथा जनकल्याण का संदेश फैलाने पर विशेष जोर देगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य प्रधानमंत्री के जन्मदिन को पारंपरिक उत्सव की बजाय सेवा कार्यों से जोड़ना है। देशभर में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों के इस अभियान में शामिल होने की संभावना है। वे आम लोगों से संपर्क कर केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देंगे। पार्टी इस महीने भर चलने वाले अभियान को जनता से अपने जुड़ाव को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़े प्रयास के रूप में देख रही है।
सत्ताधारी एनसी ने श्रीनगर और जम्मू में भाजपा दफ्तर के शांतिपूर्ण ‘घेराव’ की घोषणा की

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने मंगलवार को घोषणा की कि वह केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए जम्मू और श्रीनगर में भारतीय जनता पार्टी के दफ्तरों का शांतिपूर्ण ‘घेराव’ करेगी। यह दबाव इस बात के लिए बनाया जा रहा है कि केंद्र सरकार संसद और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र शासित प्रदेश के लोगों से किए गए वादों को पूरा करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कह चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर को ‘सही समय’ पर राज्य का दर्जा वापस दिया जाएगा। भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस देने का भरोसा दिलाया था। इन आश्वासनों को देखते हुए सत्ताधारी एनसी ने मंगलवार को घोषणा की कि वह बुधवार, 2 सितंबर को श्रीनगर और जम्मू में भाजपा मुख्यालय का शांतिपूर्ण घेराव करेगी। इसका मकसद केंद्र सरकार पर संसद और सुप्रीम कोर्ट के सामने किए गए वादों को पूरा करने के लिए दबाव बनाना है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी एक बयान में कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर से जुड़ी उसकी स्पष्ट और पुरानी मांगों पर केंद्रित होंगे। पार्टी ने अपनी मांगों में राज्य का दर्जा बहाल करने, संवैधानिक गारंटी, आरक्षण फाइल को मंजूरी देने और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने जैसी बातें शामिल कीं। एनसी ने कहा कि इस प्रस्तावित कदम का मकसद संसद और सुप्रीम कोर्ट के सामने किए गए वादों को लेकर केंद्र सरकार से जवाबदेही तय करना है। पार्टी ने कहा, “जम्मू-कश्मीर के लोगों का जनादेश कोई ब्लैंक चेक नहीं है। इसका सम्मान किया जाना चाहिए, इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।” उसने प्रस्तावित घेराव को शांतिपूर्ण बताया और अपनी मांगों को राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीकों से पूरा करने की अपील की। एनसी ने संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन किया था ताकि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
पीएम मोदी की विदेश नीति का मूल ‘शांति’ है, पेजेश्कियन से मुलाकात में दिया बड़ा संदेश : पूर्व एमओएस एमजे अकबर

नई दिल्ली। किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात हुई। अटकलें लगाई जा रही है कि दोनों नेताओं के बीच चाबहार पोर्ट को लेकर भी चर्चा हुई। इसे विदेश मामलों के पूर्व राज्यमंत्री एमजे अकबर ने भारत की शांति-केंद्रित विदेश नीति का बड़ा संकेत बताया। एमजे अकबर ने कहा, “किर्गिस्तान में प्रधानमंत्री मोदी के एजेंडा में सबसे जरूरी ईरानी राष्ट्रपति के साथ उनकी पहली मीटिंग थी। इस मीटिंग से उन्होंने एक बहुत मजबूत संदेश दिया क्योंकि मुलाकात खुद मक्का पैक्ट के बैकग्राउंड में थी और इसने असल में यह संदेश दिया कि समस्याओं का हल युद्ध और गठबंधन नहीं हैं। समस्याओं का हल बातचीत में है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी नीति का मुख्य हिस्सा माना है, जो शांति है।” उन्होंने कहा कि ईरान और भारत ने एक नया तालमेल खोजने के लिए, कूटनीति में जिसे ‘लचीला यथार्थवाद’ कहा जाता है, उसका इस्तेमाल किया है। बातचीत का एक बहुत महत्वपूर्ण तत्व व्यापार पर चर्चा थी और इसे अमेरिका के ईरान पर ‘बाह्य प्रतिबंध’ और टैरिफ लगाने के प्रयास के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। दोनों ने चर्चा की और प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि जहाजों की आवाजाही के लिए होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण है। एमजे अकबर ने कहा कि मेरे विचार में, सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय तत्व चाबहार बंदरगाह पर चर्चा थी। चाबहार बंदरगाह, वर्तमान संकट में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। यह बंदरगाह लंबे समय से भारत-ईरान एजेंडे का हिस्सा रहा है, लेकिन वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के पहले पांच वर्षों में यह साकार हुआ। चाबहार पोर्ट को लेकर फिर से चर्चा होना दोनों देशों के लिए अत्यंत अच्छी खबर है। भारत और ईरान सभ्यताओं के आधार पर बने राष्ट्र हैं, जो समझते हैं कि वे जो द्विपक्षीय संबंध बना सकते हैं, वे युद्ध के लिए बनाए गए पैक्ट से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। चीन को लेकर एमजे अकबर ने कहा, “हमारे एनएसए अजीत डोभाल की चीन की यात्रा का भारत-चीन समीकरणों के साथ-साथ इन दो देशों, इन दो पड़ोसियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कठिनाई, जिसे सीमा प्रबंधन कहा जा सकता है, पर भी असाधारण रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। सीमा प्रबंधन पिछले पांच दशकों से अधिक समय से हमारी समस्या का स्रोत रहा है। 1962 का युद्ध स्वयं ही एक बहुत बड़ी रेखा था। उन्होंने कहा कि इससे पहले हमारे संबंध मोटे तौर पर सौहार्दपूर्ण थे और तब से सीमा हमारे दोनों सेनाओं के साथ-साथ हमारे राजनयिकों और हमारी विदेश नीतियों के लिए संघर्ष और चुनौती दोनों का बिंदु रही है। मोटे तौर पर 1988 में सीमा पर हुई सहमति बनी हुई है, जिसमें दोनों पक्षों ने एक बहुत ही मौलिक समझ विकसित की कि समाधान ‘समाधान न करने’ में है। इसका मतलब है कि आप वास्तविकता को वैसे ही स्वीकार करते हैं, जैसी वह है और फिर सहयोग के अन्य तरीके और अन्य रास्ते खोजते हैं। पूर्व एमओएस ने कहा कि यह एक ऐसा संदेश है जिसे डोभाल की यात्रा ने मजबूत किया है। इसके पर्याप्त सबूत हैं कि चीन ने यह समझा है कि चीनी व्यवस्था के भीतर के ‘हॉक’, चीनी सेना के भीतर के ‘हॉक’ भारत के साथ अच्छे संबंधों के लिए अनुकूल नहीं हैं। ऐसी अटकलें हैं कि चीनी सेना के सर्वोच्च कमान में एक बहुत प्रमुख सैन्य ‘हॉक’ को हाल ही में अचानक हटा दिया गया है। हम इसकी पूरी सच्चाई नहीं जानते क्योंकि चीनी व्यवस्था अपारदर्शी बनी हुई है। लेकिन, हम यह जानते हैं कि राष्ट्रपति शी जल्द ही दिल्ली आएंगे। उन्होंने आगे कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए और दोनों पक्ष यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि यह यात्रा, हालांकि ब्रिक्स के बैनर तले होगी, लेकिन इसमें एक बहुत मजबूत द्विपक्षीय तत्व होगा कि यह बातचीत और यह बैठक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच एक सार्थक बैठक, मौजूदा अशांति को समाप्त करेगी और निकट भविष्य में सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी।