पीएम विश्वकर्मा योजना से संवर रही नीमच के युवाओं की किस्मत, उद्यमियों को मिल रहा सहारा

नीमच। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ नीमच जिले में पारंपरिक कारीगरों, छोटे कामगारों और स्वरोजगार की इच्छुक महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया बनती नजर आ रही है। योजना के माध्यम से प्रशिक्षण, कौशल विकास और बैंक ऋण की सुविधा मिलने से कई छोटे कारोबारी गुमटी या घरेलू स्तर के काम से आगे बढ़कर अपनी दुकान और व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं। नीमच जिला पंचायत के सीईओ अमन वैष्णव की मानें तो योजना शुरू होने के बाद जिले में अब तक करीब 36 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 5,500 आवेदनों का सफल पंजीकरण हुआ, जबकि 5,050 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ब्यूटी पार्लर, कारपेंट्री, बार्बर शॉप सहित अलग-अलग ट्रेड में लाभार्थियों को आधुनिक कौशल और व्यवसाय से जुड़ी जानकारी दी गई। जानकारी के अनुसार, अब तक करीब 1,800 ऋण आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिनके माध्यम से कुल 15.5 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे गरीब और छोटे कामगारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है, जो अपना छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं या मौजूदा काम को विस्तार देना चाहते हैं। रक्षिता ब्यूटी पार्लर की संचालक नयागांव की रानी जैन ने बताया कि वह करीब आठ वर्षों से पार्लर का काम कर रही थीं। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग मिली। इसके बाद उन्हें 1 लाख रुपए का ऋण मिला, जिससे उन्होंने पार्लर के लिए नए उत्पाद और जरूरी सामान खरीदे। इससे कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिली और परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई। नयागांव की ही नंदिनी ब्यूटी पार्लर की संचालक सोनम सेन ने बताया कि योजना के तहत 15 दिन की ट्रेनिंग में व्यवसाय चलाने और आगे बढ़ाने के तरीके समझाए गए। बैंक के माध्यम से मिले 1 लाख रुपए के ऋण को उन्होंने अपने व्यवसाय में लगाया। उन्होंने कहा कि पूंजी की कमी के कारण छोटे कारोबार को विस्तार देना मुश्किल होता है। ऐसे में योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हुई। नीमच की रत्ना व्यास ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत उन्हें सिलाई मशीन और 1 लाख रुपए का ऋण मिला। उन्होंने इस राशि से अपने सिलाई व्यवसाय को आगे बढ़ाया। उन्होंने महिलाओं और बच्चों के कपड़े तैयार करने का काम शुरू किया। रत्ना की मानें तो उन्होंने योजना के तहत मिला ऋण भी चुका दिया है और अब थोक में कपड़े लेकर सिलाई का काम कर रही हैं। सिलाई के व्यवसाय ने उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। जावी निवासी दशरथ देवीलाल सेन के लिए भी योजना स्वरोजगार को नई दिशा देने वाली साबित हुई। उन्होंने बताया कि पहले वह गुमटी पर दुकान चलाते थे। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 1 लाख रुपए का ऋण मिलने के बाद उन्होंने अपनी खुद की दुकान स्थापित की। दशरथ को योजना के तहत प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन 500 रुपए का भत्ता भी मिला। साथ ही, उन्हें काम से संबंधित किट और मशीनें भी उपलब्ध कराई गईं। अपनी दुकान शुरू होने के बाद उनकी आजीविका पहले की तुलना में बेहतर हुई है।
मुस्लिम नेताओं-बुद्धिजीवियों की 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन, अधिकारों के मुद्दों पर करेगी काम

नई दिल्ली। मुस्लिम नेताओं और बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में लिए गए फैसले के बाद मंगलवार को 51 सदस्यीय राष्ट्रीय निगरानी समिति का ऐलान किया गया। इस समिति में सामाजिक, धार्मिक, कानूनी, राजनीतिक और सिविल सोसाइटी से जुड़े प्रमुख लोग शामिल हैं। समिति का गठन भारतीय मुसलमानों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक रास्ते अपनाने और संविधान में मिले अधिकारों, नागरिक अधिकारों, प्रतिनिधित्व और समुदाय से जुड़े दूसरे मामलों पर मिल-जुलकर कार्रवाई करने के लिए किया गया है। समिति के ऐलान के लिए नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसे समिति के कई प्रमुख सदस्यों ने संबोधित किया। समिति में कानून, सार्वजनिक जीवन, राजनीति, सामाजिक काम, धार्मिक संस्थाओं और नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले लोग शामिल हैं। इसका मकसद लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से इन मुद्दों को उठाना है। राष्ट्रीय निगरानी समिति की 24वीं बैठक में यह तय किया गया कि जिन इलाकों में संकट और गंभीर चुनौतियां हैं, वहां दौरे किए जाएंगे। इसका मकसद मुस्लिम समुदाय के बीच भरोसा बढ़ाना और स्थानीय लोगों व संगठनों से सीधे बात करना है। पहला दौरा उत्तराखंड का करने का फैसला किया गया, क्योंकि यह दिल्ली के करीब है और राज्य में कई मुद्दे सामने आ रहे हैं। इसके तहत एक प्रतिनिधिमंडल ने देहरादून का दौरा किया और उत्तराखंड के सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों तथा मुस्लिम नेतृत्व के साथ कई बैठकें कीं। पहली बैठक उत्तराखंड के प्रमुख सिविल सोसाइटी सदस्यों के साथ हुई। इसमें राज्य की मौजूदा स्थिति और समाज के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल भी बैठक में मौजूद रहे। दूसरी बैठक उत्तराखंड के मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ हुई, जिसमें राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व के लोग शामिल हुए। बैठक में समुदाय के सामने मौजूद चिंताओं और राज्य की व्यापक स्थिति पर चर्चा हुई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में समिति के सदस्यों ने कहा कि भारतीय मुसलमानों के अधिकारों और हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए सरकारी संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ मिलकर काम करना जरूरी है। सलमान खुर्शीद ने कहा, “इस आंदोलन ने सभी को एक साथ लाया है। यह भारत के मुसलमानों की तरफ से एक पहल है। इस देश के हर नागरिक के अपने अधिकार हैं। देश में हमारी अलग-अलग तरह की विविधता के बावजूद हम सभी के अधिकार बराबर हैं। हम सभी लोगों को अपने साथ जुड़ने और कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए आमंत्रित करते हैं। हम भारत में हो रहे एक बड़े मुद्दे में अपना योगदान देना चाहते हैं।” मौलाना अत्ताउर रहमान कासमी ने कहा, “इस वक्त यह कारवां समाज की सबसे बड़ी जरूरत है। इसकी जरूरत सिर्फ शहरों में ही नहीं, बल्कि गांवों और देहातों में भी महसूस की जा रही है। यह कारवां पूरब से पश्चिम तक जाए, देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों तक पहुंचे और उन लोगों को सहारा दे जो खुद को हाशिये पर और कमजोर महसूस कर रहे हैं।” मोहम्मद अदीब ने कहा, “मैंने कुछ पत्रकारों को यह सवाल करते सुना कि क्या यह आंदोलन पर्सनल लॉ बोर्ड या जमाअत के खिलाफ है। शरीयत से जुड़े मामलों में हम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत हैं और उसकी रहनुमाई पर चलते हैं। हमारा काम राजनीतिक दायरे में है। यह संगठन किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सबको साथ लेकर चलना और मिलकर काम करना चाहता है।” नदीम खान ने स्थिति की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, “पूरे देश में हम ध्वस्तीकरण, विस्थापन, पुशबैक और धार्मिक स्थलों पर हमले देख रहे हैं, जिनसे मुसलमान खास तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। असम में हजारों परिवार विस्थापित हुए हैं, जबकि जारी पुशबैक की कार्रवाई ने यह गंभीर चिंता पैदा की है कि भारतीय नागरिकों को भी गलत तरीके से हिरासत में लिया जा रहा है या बाहर धकेला जा रहा है। गुजरात के कच्छ क्षेत्र और राजस्थान के कुछ हिस्सों में दरगाहों और मस्जिदों को भी निशाना बनाया गया है। इन घटनाओं का पैमाना एक बड़ी संस्थागत चुनौती की ओर इशारा करता है, जिसके लिए मिल-जुलकर और प्रभावी तरीके से जवाब देने की जरूरत है। कर्नूला महापंचायत, एसआईआर और फॉर्म-7 समेत कानूनी मामलों में हमारे हस्तक्षेप के साथ-साथ हमारी टीमें जमीन पर लगातार काम कर रही हैं, हिंसा की घटनाओं का दस्तावेज तैयार कर रही हैं और प्रभावित समुदायों से बातचीत कर रही हैं।” सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा, “यह एक बड़ी मुहिम और एक अहम पल की शुरुआत है। यह ऐसी समिति है जिसमें पूरे देश के मुसलमानों का प्रतिनिधित्व है और इसमें नेताओं से लेकर युवाओं तक सभी को शामिल किया गया है। समिति हालात पर लगातार नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप भी करेगी। इसका काम सिर्फ मुस्लिम समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश के लिए होगा।” जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी ने असम की स्थिति पर कहा, “असम में हिंदू-मुस्लिम तनाव भाषा के मुद्दे की तुलना में कम है। वहां बेदखली की कार्रवाई बंगाली मुसलमानों तक सीमित है। असमिया और बंगाली मुसलमानों के बीच एक दूरी है। हम दोनों पक्षों के साथ बिना किसी पक्षपात के बराबरी से खड़े हैं।” मौलाना मोहसिन अली तकवी ने कहा, “आज देश में जिस तरह के हालात हैं, जिस तरह लोगों के साथ नाइंसाफी हो रही है और देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को कमजोर किया जा रहा है, ऐसे में इस कोशिश को कामयाब बनाना हम सभी की जिम्मेदारी है।” फुजैल अहमद अय्यूबी ने कहा, “हमारे धार्मिक रहनुमा, राजनीतिक प्रतिनिधि, सिविल सोसाइटी संगठन और वकील, सभी को एक छतरी के नीचे मिलकर काम करना चाहिए। इस वक्त हम जिस तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैं, उसे देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि सभी एक साथ आएं और एक बैनर के नीचे मिलकर इस चुनौती का सामना करें।” एसक्यूआर इलियास ने कहा, “इस वक्त भारतीय मुसलमान जिस हालात से गुजर रहे हैं, उससे लगता है कि मुसलमानों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें घेरा जा रहा है। एसआईआर, एनआरसी का एक और रूप नजर आता है, जिसके जरिए मुस्लिम नामों को वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है। भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू किया जा रहा है। लिंचिंग
यमन में संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान में आईएस का प्रवक्ता ढेर

अदन। यमन सरकार ने मंगलवार को दावा किया कि इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकी संगठन का आधिकारिक प्रवक्ता अबू हुज़ैफा अल-अंसारी संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान में मारा गया। यह अभियान यमनी सुरक्षा बलों और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की विशेष बलों ने मिलकर चलाया। सरकारी टीवी चैनल सबा ने केंद्रीय राज्य सुरक्षा एजेंसी के हवाले से बताया कि अभियान का उद्देश्य अल-अंसारी को जीवित पकड़ना था, लेकिन कार्रवाई के दौरान वह मारा गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की स्पेशल फोर्सेज को यमन की 22वीं काउंटर टेररिज्म यूनिट का सहयोग मिला। हालांकि, एजेंसी ने अभियान की जगह और अन्य परिचालन संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की। स्थानीय सैन्य सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी सोमवार देर रात करीब 1:30 बजे दक्षिण-पूर्वी हदरमौत प्रांत के सैयून शहर में की गई। सुरक्षा बलों ने अल-हौटा इलाके के एक पुराने मिट्टी के मकान को निशाना बनाया, जहां अल-अंसारी ठहरा हुआ था। सूत्रों ने बताया कि अल-अंसारी अभियान में घायल होने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन बाद में चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई में मकान में मौजूद एक अन्य व्यक्ति भी मारा गया। अभियान के दौरान ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि छापेमारी के समय सैयून शहर में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष और अस्थिरता का फायदा उठाकर अल-कायदा इन द अरेबियन पेनिनसुला और आईएस जैसे आतंकी संगठन देश के दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। इस बीच यमन सरकार ने यह भी दावा किया कि उसकी नौसेना ने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के पास स्थित सरकारी नियंत्रण वाले द्वीपों की ओर बढ़ रही हूती विद्रोहियों की चार विस्फोटकों से लदी नौकाओं को रोक लिया। सरकारी समाचार एजेंसी सबा के अनुसार, नौकाएं रणनीतिक हनिश और ज़ुकर द्वीपों की ओर बढ़ रही थीं, जिन्हें यमनी नौसेना ने बीच रास्ते में रोक दिया। सैन्य सूत्रों का कहना है कि रविवार और सोमवार को भी हूती नौकाओं की गतिविधियां दर्ज की गई थीं। हालांकि, हूती समूह ने इन दावों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
नीट विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत, 5 सितंबर का प्रदर्शन रद्द: अभिजीत दिपके

छत्रपति संभाजीनगर। नीट से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को रद्द करने की घोषणा की। उन्होंने अदालत के निर्देशों को छात्रों और प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण राहत बताते हुए इसे लंबे समय से चल रहे आंदोलन की बड़ी जीत करार दिया। अभिजीत दिपके ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत के निर्णय से उन छात्रों और परिवारों को न्याय मिला है, जो नीट विवाद को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे थे। यह जीत केवल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले लोगों की नहीं, बल्कि देशभर में आंदोलन का समर्थन करने वाले हर व्यक्ति की है। जो लोग सड़कों पर नहीं उतर पाए, लेकिन सोशल मीडिया पर पोस्ट, व्हाट्सऐप स्टेटस या किसी अन्य माध्यम से अपनी आवाज उठाते रहे, वे भी इस जीत के हिस्सेदार हैं। लोगों की लगातार आवाज और दबाव के कारण दिल्ली से प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र आया और विभिन्न स्तरों पर बैठकों का दौर चला। दिपके ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों में कई बैठकें हुईं और दिल्ली से विशेष प्रतिनिधिमंडल भी महाराष्ट्र पहुंचा। करीब सात-आठ बैठकों में इस बात पर चर्चा हुई कि आंदोलन कर रहे छात्रों और अपने बच्चों के लिए न्याय की मांग कर रहे परिवारों को किस तरह उचित न्याय दिलाया जा सके। आंदोलन के दौरान कथित धमकियों और लाठीचार्ज के बावजूद लोगों ने अपनी आवाज उठाना बंद नहीं किया। उनके मुताबिक, इसी दृढ़ता ने इस परिणाम को संभव बनाया। अभिजीत दिपके ने नीट विवाद से प्रभावित और अपने बच्चों को खो चुके परिवारों से भावुक होकर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े लोग उन बच्चों को बचा नहीं सके और इस कमी की भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने अपनी जान गंवाई, उनकी कोई गलती नहीं थी। इन बच्चों ने डॉक्टर बनने के लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी से पढ़ाई की थी और अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया था। दिपके ने कहा कि वह कई प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिल चुके हैं। उन्होंने आकांक्षा, काहान पटेल, प्रदीप मेघवाल और रिया थापा के परिवारों से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिवारों की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने मेहनत से परीक्षा की तैयारी की और अपने भविष्य के लिए सपने देखे, उनके साथ जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय की लड़ाई आगे भी महत्वपूर्ण रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 5 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को रद्द करने का ऐलान करते हुए दिपके ने इसे आंदोलन से जुड़े छात्रों, अभिभावकों और देशभर में आवाज उठाने वाले लोगों की सामूहिक उपलब्धि बताया।
जंतर-मंतर टेरर मॉड्यूल विवाद के बाद आईपीएस अधिकारी भुल्लर बॉर्डर रेंज के आईजीपी नियुक्त

चंडीगढ़। अमृतसर के पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के एक महीने के अंदर ही सीनियर आईपीएस ऑफिसर गुरप्रीत सिंह भुल्लर को मंगलवार को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें सुरक्षा से जुड़े अहम पद पर नियुक्त किया गया है। भुल्लर को पंजाब पुलिस द्वारा पकड़े गए पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल का कनेक्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों से जोड़ने वाले बयान पर हुए विवाद के बाद अमृतसर सीपी के पद से हटाया गया था। पुलिस अधिकारियों के बड़े फेरबदल में भुल्लर को बॉर्डर रेंज का इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) नियुक्त किया गया। इस रेंज में अमृतसर, बटाला, गुरदासपुर और पठानकोट जिले आते हैं, जो ज्यादातर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित हैं। उन्होंने बॉर्डर रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) हरमनबीर सिंह गिल की जगह ली, जिन्हें अमृतसर का पुलिस कमिश्नर बनाया गया था। ट्रांसफर से पहले, भुल्लर उस जांच का नेतृत्व कर रहे थे जिसमें आईएसआई से जुड़ी एक साजिश का पर्दाफाश हुआ था। पिछले महीने अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने आईएसआई समर्थित सीमा-पार आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इस दौरान नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया (जिनमें चार नाबालिग भी शामिल थे) और तीन अवैध पिस्तौल, नौ कारतूस और चार पेट्रोल-बोतल बम बरामद किए गए। सोशल मीडिया पर भुल्लर की प्रेस ब्रीफिंग के वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस प्रवक्ता ने साफ किया कि 4 अगस्त को अमृतसर में पुलिस कमिश्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ हिस्सों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था। उस कॉन्फ्रेंस में पुलिस द्वारा आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने की जानकारी दी गई थी, और उन हिस्सों का इस्तेमाल जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को आईएसआई समर्थित आतंकी मॉड्यूल से जोड़ने की कोशिश के तौर पर किया गया। प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने बताया था कि गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों ने जंतर-मंतर की रेकी (निगरानी) की थी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। उन्होंने साफ किया कि ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया था जिससे यह लगे कि गिरफ्तार लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल थे या जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों का उस मॉड्यूल से कोई संबंध था। प्रवक्ता ने कहा कि बदले हुए बैकग्राउंड विजुअल, चुनिंदा वीडियो एडिटिंग और साथ में दिए गए कैप्शन या स्पष्टीकरण ‘गलत हैं और एक भ्रामक धारणा बनाते हैं कि गिरफ्तार लोग जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों से जुड़े थे।’ उन्होंने कहा, “प्रेस कॉन्फ्रेंस के ऑडियो और असल जानकारी में कोई बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की गई थी, लेकिन चुनिंदा एडिटिंग और साथ में दिए गए कैप्शन प्रेस कॉन्फ्रेंस को सही ढंग से पेश नहीं करते हैं। ऐसा लगता है कि ये पुलिस कमिश्नर के बयान को गलत और भ्रामक तरीके से पेश करने की कोशिशें हैं।
‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ मैन्युफैक्चरिंग विजन का आधार होना चाहिए: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत के मैन्युफैक्चरिंग विजन को ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड’ के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने एमएसएमई से कहा कि वे उभरते हुए ग्लोबल ट्रेड के मौकों का फायदा उठाएं और खुद को ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव कंपनियों में बदलें। ग्रेटर नोएडा में एमएसएमई कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने छोटे और मध्यम उद्योगों से अपने टर्नओवर का एक हिस्सा रिसर्च, डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों, आईआईटी, रिसर्च संस्थानों, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का विजन एक ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व करता है जो मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में अग्रणी हो, और रणनीतिक व आर्थिक क्षमताओं में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ देश के युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करे। बदलती वैश्विक सप्लाई चेन और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स की बढ़ती मांग पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ये घटनाक्रम भारतीय एमएसएमई के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा अमेरिका, यूके, न्यूजीलैंड, ओमान, स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से व्यापारिक साझेदारी को गहरा करने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “ये एफटीए नेटवर्क एमएसएमई और उद्योगों के लिए वैश्विक व्यापार और निर्यात के अवसरों का एक विशाल भंडार खोलते हैं। उन्हें क्रेडिट गारंटी विस्तार और जीएसटी युक्तिकरण जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और व्यापार समझौतों का पूरा लाभ उठाना चाहिए और भारतीय उत्पादों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाना चाहिए।” राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में एमएसएमई की संख्या 2012-13 में लगभग 4.67 करोड़ से बढ़कर वर्तमान में लगभग 8 करोड़ हो गई है, जो देश में बढ़ते उद्यमिता इकोसिस्टम को दर्शाता है। उन्होंने ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, ऑटोनॉमस सिस्टम, एडवांस्ड मैटेरियल्स, स्पेस और क्वांटम टेक्नोलॉजीज को ऐसे क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया जो एमएसएमई के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय एमएसएमई को गुणवत्ता और विश्वसनीयता के माध्यम से वैश्विक बाजारों में अपनी पहचान बनानी चाहिए। रक्षा क्षेत्र में इन गुणों का महत्व और भी अधिक है, जहां हर कंपोनेंट की विश्वसनीयता सीधे रक्षा बलों की परिचालन प्रभावशीलता को प्रभावित करती है।
तेलंगाना हाई कोर्ट ने सिंगल जज के आदेश पर लगाई रोक, हाइड्रा कमिश्नर को राहत

हैदराबाद। तेलंगाना हाई कोर्ट ने मंगलवार को हैदराबाद डिजास्टर रिस्पॉन्स एंड एसेट प्रोटेक्शन एजेंसी (हाइड्रा) के कमिश्नर ए.वी. रंगनाथ को राहत देते हुए, सिंगल जज के उस आदेश पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार को उन्हें पद से हटाने और उनकी जगह किसी दूसरे अधिकारी को नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। रंगनाथ ने 27 जुलाई को सिंगल जज के आदेश को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी। यह याचिका एक डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राजीव शकधर ने रंगनाथ की ओर से पक्ष रखा। शुरुआती दलीलें सुनने के बाद बेंच ने सिंगल जज के आदेश पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी। जस्टिस अनिल कुमार जुकांती ने 27 जुलाई को मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वे रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर के पद से हटा दें और उनकी जगह किसी उपयुक्त व्यक्ति को नियुक्त करें। यह आदेश शांता श्रीराम कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर अवमानना याचिका पर आया था। कंपनी का आरोप था कि हाइड्रा के अधिकारियों ने कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया और 50 गाड़ियों और 200 कर्मचारियों के साथ लोथकुंटा में उनकी 40 एकड़ जमीन में घुस गए। कोर्ट ने कहा था कि रंगनाथ ‘अपनी मर्जी से काम करने वाले’ बन गए हैं और हाइड्रा अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है, साथ ही रेवेन्यू, सिंचाई और जीएचएमसी विभागों को नजरअंदाज कर रहा है। इससे पहले की सुनवाई में कोर्ट ने हाइड्रा कमिश्नर को कड़ी फटकार लगाई थी और चेतावनी दी थी कि कोर्ट के आदेशों का बार-बार उल्लंघन करने पर उन्हें सेना की हिरासत में लेकर आर्मी बैरक में रखने का निर्देश दिया जा सकता है। कमिश्नर को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता की अनुमति के बिना विवादित संपत्ति में हाइड्रा के कर्मचारियों और मशीनरी के घुसने और वहां बाड़ लगाने के लिए स्पष्ट रूप से माफी मांगी जानी थी। हलफनामा दाखिल नहीं किया गया और अधिकारी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए, इसलिए जस्टिस जुकांती ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और सरकार को रंगनाथ को हाइड्रा कमिश्नर के पद से हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने गौर किया कि लगभग डेढ़ साल की अवधि में रंगनाथ के खिलाफ 63 अवमानना याचिकाएं लंबित थीं। आदेश के बाद रंगनाथ ने कहा कि वह अपने खिलाफ दायर सभी 63 अवमानना मामलों का कानूनी तरीके से सामना करेंगे और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी मामले प्रभावशाली अतिक्रमणकारियों द्वारा दायर किए गए थे, जो झीलों और सरकारी जमीनों की सुरक्षा के लिए हाइड्रा के अभियान से प्रभावित हुए थे। रंगनाथ ने आरोप लगाया कि जमीन माफिया और अतिक्रमणकारी गलत जानकारी देकर कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा मुझे सौंपी गई जिम्मेदारियों की परवाह किए बिना मैं 100 प्रतिशत परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हूं और ऐसा करना जारी रखूंगा।” इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) के अधिकारी रंगनाथ, दो साल पहले राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एजेंसी हाइड्रा के प्रमुख हैं। पिछले दो सालों में हाइड्रा का दावा है कि उसने 1.5 लाख करोड़ रुपए की कीमत वाली 3,315 एकड़ सरकारी जमीन बचाई है और कई जल निकायों को बहाल किया है। एजेंसी ने कहा कि उसने झीलों, नालों, पार्कों, सरकारी जमीनों और ब्लू-ग्रीन संसाधनों को वापस हासिल किया और उनकी सुरक्षा की। हाइड्रा के कामकाज की विपक्षी पार्टियों ने आलोचना की है। उन्होंने एजेंसी पर सरकारी जमीन पर बने गरीबों के घरों को बुलडोजर से गिराने का आरोप लगाया है।
मुंबई : कूपर अस्पताल में बुर्का पहनने की वजह दो महिलाओं को एंट्री से रोकने का आरोप, नेताओं ने की आलोचना

मुंबई। मुंबई के कूपर अस्पताल के प्रसूति (मेटरनिटी) वार्ड में कथित तौर पर बुर्का पहनने के कारण दो महिलाओं को प्रवेश नहीं दिए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इसकी विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की है। एक दिन पहले, अधिवक्ता जहांआरा ने आईएएनएस को बताया था कि उन्हें बुर्का पहनने के कारण मेटरनिटी वार्ड में जाने से रोका गया। उन्होंने दावा किया, “मैंने बात की और अपना परिचय भी दिया, लेकिन फिर भी मुझे रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि आप कोई भी हों, हम आपको बुर्का पहनकर अंदर नहीं जाने देंगे। जब मैंने वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि बुर्का पहनकर अंदर आने वाले लोग बच्चों को चुरा लेते हैं।” दूसरी महिला, अधिवक्ता जहरा शेख ने मंगलवार को कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो असली हैं। उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मेरे साथ भी अंधेरी स्थित कूपर अस्पताल में यही घटना हुई। मैं अपने एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। मेटरनिटी वार्ड के बाहर सुरक्षा कर्मियों ने मुझसे कहा कि अंदर जाने से पहले बुर्का उतारना होगा। मैंने उन्हें अपना चेहरा दिखाया और जब कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा कारणों से है।” इस घटना की निंदा करते हुए एनसीपी (शरद पवार) की प्रवक्ता विद्या चव्हाण ने कहा, “अगर उनका धर्म उन्हें बुर्का पहनने की अनुमति देता है, तो किसी चौकीदार या व्यक्ति को पूछने का अधिकार नहीं है कि वे बुर्का क्यों पहन रही हैं? भारतीय संविधान सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है।” उन्होंने कहा, “मुस्लिम महिलाओं को इस तरह परेशान करना गलत है।” मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि वह इस मामले को देखेंगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह पूरी तरह गलत है। यह बुनियादी मानवता का मामला है। यह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित अस्पताल है, हालांकि ऐसी घटना किसी भी अस्पताल में नहीं होनी चाहिए। अस्पताल किसी व्यक्ति को उसके धर्म, चाहे वह मुस्लिम हो, हिंदू हो या किसी अन्य धर्म का, उसके आधार पर आंकने की जगह नहीं है।” उन्होंने कहा कि किसी बीएमसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस नेता चरण सिंह सप्रा ने भी इस घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। वहीं, एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “इस तरह का व्यवहार देश के लिए नुकसानदायक है। जो लोग रोजाना मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं और गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हैं, वे बुर्का और हिजाब पहनने वाली महिलाओं को निशाना बना रहे हैं।” उन्होंने कहा, “मुस्लिम महिलाएं बुर्का और हिजाब पहनती हैं और आगे भी पहनती रहेंगी। उन्हें रोका नहीं जा सकता। हम मांग करते हैं कि सिर्फ बुर्का पहनने के कारण महिला को अस्पताल में प्रवेश से रोकने वाले कांस्टेबल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।” सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर वारिस पठान ने कहा, “बीएमसी को अपने संसाधनों से अधिक संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने चाहिए।” शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा कि कोई भी जानबूझकर ऐसा काम नहीं करेगा। हर व्यक्ति को अपने धर्म की परवाह किए बिना पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखना भी नगर निगम और अस्पताल की जिम्मेदारी है।
राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन की तैयारियों पर ओम बिरला की समीक्षा बैठक, भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दिए अहम निर्देश

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में मंगलवार को 13 से 19 सितंबर तक दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में आयोजित होने वाले 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन की तैयारियों को लेकर एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सभी सदस्यों और महिला प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे निर्धारित सत्रों और कार्यशालाओं में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने कहा कि चर्चाओं के दौरान प्रभावी ढंग से अपने विचार रखें, ताकि भारत के राष्ट्रीय हितों और दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत एवं संरक्षित किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि इस प्रकार के वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी से हमारी संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का दायरा और अधिक मजबूत होता है। साथ ही, उन्होंने सभी प्रतिनिधियों को यह भी निर्देश दिया कि वे सम्मेलन के दौरान निर्धारित सभी बैठकों और वार्ताओं में समयबद्धता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखें, जिससे देश का प्रतिनिधिमंडल एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत कर सके। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘बदलती विश्व व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय कानून और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना: कॉमनवेल्थ नेतृत्व’ निर्धारित किया गया है, जिसके तहत वैश्विक परिदृश्य पर संसद की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल के लिए छह प्रमुख सीपीसी (सीपीसी) कार्यशालाओं के एजेंडे को रेखांकित किया गया। इन कार्यशालाओं में विविध अर्थव्यवस्थाओं में समावेशी और निष्पक्ष व्यापार, सुलभ संसद एवं दिव्यांगजनों का समावेशन, जलवायु अनुकूलन और लचीलापन, संसदों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के वर्तमान अनुप्रयोग, मानवाधिकारों की रक्षा और पश्च-विधायी संवीक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। मुख्य सत्रों के अतिरिक्त, सम्मेलन में युवाओं की सहभागिता पर केंद्रित ‘लोकतंत्र में युवाओं का भरोसा और भागीदारी फिर से बनाना’ विषयक युवा गोलमेज बैठक और सीपीए महासभा की डिबेट भी आयोजित होगी। इसके साथ ही, 10वें राष्ट्रमंडल महिला संसद सदस्य (सीडब्ल्यूपी) सम्मेलन के अंतर्गत “मेकिंग जेंडर सेंसिटिविटी एन इंस्टीट्यूटनल मेंडेट” थीम पर आधारित चार विशेष कार्यशालाएं भी इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेंगी। बैठक के अंत में लोकसभा के महासचिव तथा संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सम्मेलन की रूपरेखा, प्रशासनिक और सामरिक विषयों से जुड़े विस्तृत विवरण सभी उपस्थित सदस्यों के सामने प्रस्तुत किए, जिससे सभी प्रतिनिधियों को अपनी सहभागिता की रूपरेखा स्पष्ट हो गई है।
जीडीपी ग्रोथ पर सरकार ने डेटा पेश करने में महारत हासिल की, वक्त बताएगा हकीकत: टीएस सिंह देव

नई दिल्ली। भारत की 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ पर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से डेटा पेश करने की कला में महारत हासिल कर ली है और इसकी हकीकत क्या है, यह तो वक्त ही बताएगा। साथ ही, उन्होंने चीनी और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे रेस्टोरेंट, होटल और आम कंज्यूमर्स पर सीधा असर पड़ेगा। भारत की 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने कहा, “इस सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से डेटा पेश करने की कला में भी महारत हासिल कर ली है। क्या यह सच में वैसा ही है जैसा दिखाया गया है, या कहानी का कोई और पहलू भी है? यह तो वक्त ही बताएगा।” विश्लेषण में थोड़ा समय लगता है। अर्थशास्त्री इसका विश्लेषण करेंगे और अपने नतीजे पेश करेंगे। अगर यह सच में 7.8 है तो यह अच्छी बात है। उन्होंने कहा, “चीनी की कीमत 75 के पार हो गई है। अगर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़ रही हैं तो कमर्शियल गैस इस्तेमाल करने वाले कंज्यूमर्स के लिए, मतलब जहां खाना बनता है, रेस्टोरेंट चलते हैं, होटल चलते हैं और ढाबे चलते हैं, अगर आप वहां कीमतें बढ़ाते हैं, तो ये सभी चीजें कंज्यूमर्स के लिए और भी महंगी हो जाएंगी। यह चिंता की बात है।” उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मेहनती भारतीयों का अपमान एक ऐसी सरकार कर रही है जो उनकी मेहनत का क्रेडिट खुद लेना चाहती है। भारतीय जनता पार्टी और उसकी लीडरशिप ने लगातार यह दिखाने की कोशिश की है कि उनके पास कोई जादू की छड़ी है, जैसे देश के लोग बस घर पर बैठकर कुछ नहीं कर रहे हैं, और जो कुछ भी हो रहा है वह सिर्फ उनकी मेहनत की वजह से हो रहा है। अर्थव्यवस्था को लेकर राहुल गांधी के बयानों को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि कई दूसरे लोग भी आज इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि देश की आर्थिक हालत या बताई गई जीडीपी ग्रोथ उतनी सकारात्मक नहीं है जितना सरकार दिखाती है।