बिहार : खान सर पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप, जान से मारने की कोशिश का दावा

पटना। पटना में शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर पर एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। हुस्नारा खातून नामक महिला का आरोप है कि उसे खान सर से जान का खतरा है और इसी आशंका के चलते उसने पुलिस थाने में आवेदन देकर सुरक्षा की मांग की है। महिला ने कहा कि उसे पुलिस की ओर से सुरक्षा का आश्वासन मिला है और किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल थाना से संपर्क करने के लिए नंबर भी दिया गया है। हुस्नारा खातून ने आईएएनएस से बातचीत में दावा किया कि वर्ष 2017 में उसकी रूम पार्टनर सबीना खातून के साथ खान सर का संपर्क था और वह लगातार करीब छह महीने तक उनके कमरे पर आते-जाते थे। महिला के मुताबिक, उसने इसको लेकर कई बार आपत्ति जताई थी। उसका आरोप है कि इस दौरान करीब दो महीने तक उनके बीच विवाद और झगड़े की स्थिति बनी रही, जिसके बाद मामला थाना-पुलिस तक भी पहुंचा। हुस्नारा ने आरोप लगाया कि खान सर की ओर से उसे नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका को लेकर उसने अपने एक रिश्तेदार, जो थानेदार हैं, को जानकारी दी थी। इसके बाद, रिश्तेदार द्वारा खान सर को डांटने के बाद उन्होंने माफी मांगी थी, जिसके बाद कुछ समय तक उसे परेशान नहीं किया गया। हालांकि, महिला का दावा है कि इसके बावजूद उसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश जारी रही। महिला ने कहा कि उसे इस बात का डर है कि यदि उसके किसी रिश्तेदार या परिचित के साथ कोई अनहोनी हो सकती है, तो उसे भी निशाना बनाया जा सकता है। इसी आशंका के चलते उसने पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने अपनी रूम पार्टनर सबीना खातून और खान सर के संबंधों को लेकर भी कई दावे किए। उनका कहना है कि उसकी रूम पार्टनर और खान सर के बीच करीबी संबंध थे। महिला ने आरोप लगाया कि कई बार खान सर और उसकी रूम पार्टनर कमरे के अंदर रहते थे और दरवाजा नहीं खोला जाता था। ऐसे मौकों पर उसे कई-कई घंटे कमरे के बाहर इंतजार करना पड़ता था। उस दौरान उसे कई ऐसी बातें पता चलीं, जिनकी वजह से अब वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसके रिश्तेदारों को फोन कर उसके बारे में जानकारी लेने की कोशिश की जाती है। उसने दावा किया कि सुल्तानगंज थाना क्षेत्र से फोन करने की बात कहकर उसके परिवार के लोगों से इस तरह की बातें की गईं कि उनकी बेटी वहां है और वे आकर उसे ले जाएं। लगातार इस तरह की घटनाओं के कारण उसके मन में डर बना हुआ है। उसने पुलिस से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और मामले की जांच कराने की मांग की है। हुस्नारा खातून ने करीब 4,500 रुपए चोरी करने का भी आरोप लगाया। उसने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गरीबों की मदद करने का दावा करता है तो उसे ईमानदारी से दूसरों का पैसा वापस करना चाहिए। महिला ने अपनी आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उसके लिए यह रकम भी महत्वपूर्ण है। खान सर चाहते हैं कि वह पटना छोड़ दे। हुस्नारा खातून ने आगे कहा कि उसने पीरबहोर थाना में अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए पुलिस को आवेदन दिया है। पुलिस की ओर से उसे सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है। थाना स्तर से उसे बताया गया है कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर वह तत्काल पुलिस से संपर्क कर सकती है। पुलिस ने संपर्क के लिए नंबर भी उपलब्ध कराया है और सुरक्षा को लेकर भरोसा दिलाया है।

सलमान खान की बढ़ी मुश्किलें, चंडीगढ़ अदालत ने बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी शोरूम धोखाधड़ी मामले में जारी किया नोटिस

चंडीगढ़। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चंडीगढ़ जिला अदालत ने अभिनेता सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री, ‘बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन’ और ‘स्टाइल कोशेंट ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड’ के डायरेक्टर्स को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस मनीमाजरा में प्रस्तावित ‘बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी शोरूम’ से जुड़ी धोखाधड़ी की शिकायत के मामले में जारी किया गया है। यह मामला केस नंबर सीओएमआई/9/2023, अरुण गुप्ता बनाम स्टाइल कोशेंट ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दर्ज है। शिकायत मनीमाजरा के व्यवसायी अरुण गुप्ता ने दर्ज कराई है। अदालत ने सभी पक्षों को 5 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत से जारी नोटिस के अनुसार, सलमान खान निवासी 3 गैलेक्सी अपार्टमेंट, बीजे रोड, बैंड स्टैंड, बांद्रा वेस्ट मुंबई, उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री निवासी 6 अश्विनी पाली माला रोड बांद्रा पश्चिम, बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन, स्टाइल कोशेंट ज्वेलरी प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर संतोष श्रीवास्तव और प्रसाद बिंदु माधव कापड़े को अदालत में पेश होना होगा। नोटिस में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने आपके खिलाफ शिकायत दर्ज की है, इसलिए बीएनएसएस की धारा 223 के तहत मामले पर संज्ञान लेने से पहले के चरण में यह नोटिस भेजा जा रहा है। इस मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए अदालत के समक्ष आपकी उपस्थिति आवश्यक है। निर्देश दिया गया है कि तय तारीख 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे उक्त अदालत में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से उपस्थित हों। जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला मनीमाजरा में प्रस्तावित बीइंग ह्यूमन ज्वेलरी शोरूम से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अरुण गुप्ता का आरोप है कि शोरूम के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। हालांकि, इस मामले में अभी अदालत ने केवल नोटिस जारी कर पक्ष रखने को कहा है, संज्ञान लेना बाकी है। इस केस की पिछली सुनवाई 4 अगस्त को हुई थी, जिसके बाद अदालत ने 24 अगस्त को यह नोटिस जारी किया है। अब अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी, जिसमें सलमान खान और अन्य को अपना पक्ष रखना होगा। बता दें कि बीइंग ह्यूमन फाउंडेशन सलमान खान का चैरिटी ब्रांड है, जो कपड़े, ज्वेलरी और अन्य प्रोडक्ट्स के जरिए चैरिटी करता है।

दिल्ली की जनता को एच1एन1 से घबराने की जरूरत नहीं: मंत्री पंकज सिंह

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि एच1एन1 से लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इससे ठीक होकर वापस अपने घर लौट रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत की। पंकज सिंह ने कहा कि हमने दिल्ली स्वास्थ्य विभाग और एनडीएमसी के अधिकारियों के साथ बैठक की। हमारी बैठक का केंद्र बिंदु एच1एन1 और डेंगू था। हमने दिल्ली के हालात को जानने की कोशिश की। मैं सभी को बताना चाहता हूं कि किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। स्थिति नियंत्रण में हैं। हमारी स्वास्थ्य तैयारियां पूरी हैं। मरीज आ रहे हैं और ठीक होकर जा रहे हैं। स्वास्थ्य मोर्चे पर किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। हालात पूरी तरह से काबू में है। मैं दिल्ली की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी तैयारियां पूरी हैं। मंत्री के मुताबिक, अब तक एच1एन1 के 2308 मामले सामने आए हैं। दूसरे वैरिएंट के 600 मामले सामने आए हैं। हमने डेंगू के भी 2200 मामले चिन्हित किए हैं। इसमें कई मरीज आए हैं, जिन्होंने खुद को बुखार होने की शिकायत की थी। इसके बाद उनका ट्रीटमेंट किया गया। अब उनकी हालत ठीक है। केंद्र सरकार की एडवाइजरी को हमने दिल्ली के अस्पतालों में भेजा है, जिसमें कहा गया है कि मास्क लगाकर रखें और सोशल मीडिया डिस्टेसिंग अपनाएं, ताकि संक्रमण का प्रचार रुके। अब तक किसी भी मरीज की डेथ नहीं हुई है। सभी सामान्य अवस्था में हैं। सभी का उपचार चल रहा है, सभी ठीक हो रहे हैं। सरकार पूरी तरह से सजग है। भाजपा की सरकार काम करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि हमारे पास डॉक्टर, दवाई की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि कहीं पर कोई कमी नहीं हो। हमने आज की बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों को बुलाया था। हमने लोगों को जागरूक करने का काम किया। मंत्री ने कहा कि दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने इस पूरी स्थिति को लेकर रिव्यू बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रूपरेखा निर्धारित की जाएगी। मैं दिल्ली की जनता को यही कहना चाहूंगा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है।

बांग्लादेश जुलाई 2024 विरोध-प्रदर्शन मामला: आईसीटी ने तीन पत्रकारों को भेजा जेल

ढाका। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने जुलाई आंदोलन से जुड़े केस में तीन पत्रकारों को जेल भेज दिया। कोर्ट ने तीनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाकर जेल भेजने का आदेश दिया। इन तीन बांग्लादेशी पत्रकारों में ‘भोरर कागोज’ के पूर्व संपादक श्यामला दत्ता, ‘एकात्तोर टीवी’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ मोजम्मेल बाबू और उनकी मुख्य संवाददाता फरजाना रूपा शामिल हैं। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जेल अधिकारियों ने सोमवार को इन तीनों को ट्रिब्यूनल के सामने पेश किया; ये तीनों पहले से ही हिरासत में थे। अभियोजक गाजी मोनाववर हुसैन तमीम ने आरोप लगाया कि 14 जुलाई, 2024 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपियों के भड़काऊ बयानों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने “रजाकार” वाली टिप्पणी की थी, जिससे बाद में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। बाबू और रूपा पर मानवता के विरुद्ध अपराध के एक अलग मामले में भी मुकदमा चल रहा है। यह मामला 2013 में मोटिज्हील के शापला चत्तर और नारायणगंज में हेफाजत-ए-इस्लाम की रैली पर की गई कार्रवाई से जुड़ा है। जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराध मामले में, आईसीटी (अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण) ने पिछले हफ्ते जेल अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे सोमवार को तीनों पत्रकारों को ट्रिब्यूनल के सामने पेश करें। इस कदम की दुनिया भर में कड़ी निंदा हुई। इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताते हुए, फ्रांस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ‘जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस’ (जेएमबीएफ) ने कहा कि पत्रकारों की बातचीत, सवाल-जवाब, टिप्पणी, संपादकीय रुख या राजनीतिक नैरेटिव पर “मानवता के खिलाफ अपराध” जैसा बेहद गंभीर आरोप लगाने की कोशिश “बेहद चिंताजनक” है। मानवाधिकार समूह ने कहा कि ऐसे आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय और ठोस सबूत होने चाहिए जो ऐसे आचरण को साबित करें जो लागू आपराधिक कानून और अंतरराष्ट्रीय मानकों की सख्त शर्तों को पूरा करते हों। जेएमबीएफ ने कहा, “पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है। राजनीतिक असहमति कोई अपराध नहीं है। आलोचना, सवाल-जवाब, टिप्पणी और यहां तक ​​कि विवादास्पद या अलोकप्रिय विचारों को केवल इसलिए ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ नहीं माना जा सकता क्योंकि वे विचार बाद में राजनीतिक रूप से आपत्तिजनक हो जाते हैं।” जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार के दौरान देखी गई कार्यप्रणाली के बाद, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के तहत पत्रकारों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध की कार्यवाही शुरू करना आपराधिक न्याय प्रणाली के “राजनीतिक प्रतिशोध और डराने-धमकाने” के हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। उन्होंने कहा, “ऐसी कार्यप्रणाली बेहद परेशान करने वाली, लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ और पूरी तरह से अस्वीकार्य है।” पिछले हफ्ते ही, प्रेस की आजादी के लिए काम करने वाले ग्लोबल ग्रुप ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) ने बांग्लादेशी अधिकारियों से कहा था कि वे तीन पत्रकारों को ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ का नया केस वापस लें और न्यूज रिपोर्टिंग को ‘अपराध’ का दर्जा देना बंद करें। सीपीजे के एशिया-पैसिफिक प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर कुणाल मजूमदार ने कहा, “सिर्फ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने के लिए पत्रकार श्यामला दत्ता, मोजम्मेल बाबू और फरजाना रूपा पर ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ केस शुरू करना चौंकाने वाला और बहुत चिंताजनक है।

उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियां भारत को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में देख रही हैं: कामी विश्वनाथन

नई दिल्ली। वैश्विक लॉजिस्टिक्स कंपनी फेडएक्स ने भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक एकीकृत एयर कार्गो हब विकसित करने की घोषणा की है। कंपनी ने इस परियोजना के लिए लगभग 150 मिलियन डॉलर (करीब 1,250 करोड़ रुपए) के निवेश का ऐलान किया है। यह नया हब दिल्ली एयरपोर्ट के जीएमआर कार्गो सिटी में विकसित किया जाएगा और इसके जरिए भारत के उत्तरी एवं पूर्वी क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक माल की आवाजाही को अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बनाया जाएगा। इस दौरान, न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए फेडएक्स की भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य पूर्व और अफ्रीका की अध्यक्ष कामी विश्वनाथन ने कहा कि कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट स्थित जीएमआर कार्गो सिटी में एक नया एकीकृत एयर हब विकसित कर रही है, जिसके लिए 115 मिलियन डॉलर का दीर्घकालिक निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “यह हब भारत के उत्तरी और पूर्वी बाजारों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का काम करेगा। इससे हमारी इंटरनेशनल गेटवे सेवाएं और पिकअप-एंड-डिलीवरी ऑपरेशंस एक ही स्थान पर संचालित किए जा सकेंगे, जिससे परिचालन दक्षता बढ़ेगी और क्षमता में भी इजाफा होगा।” उन्होंने आगे बताया कि इस हब में अत्याधुनिक ऑटोमेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिसमें ऑटोमेटेड सॉर्टेशन सिस्टम और हाई-स्पीड एक्स-रे स्क्रीनिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे भारत से विदेशों और विदेशों से भारत आने वाले शिपमेंट की प्रोसेसिंग पहले से कहीं ज्यादा तेज और प्रभावी हो जाएगी। कामी विश्वनाथन ने आईएएनएस से आगे कहा कि फेडएक्स भारत के व्यापारिक भविष्य को लेकर बेहद आशावादी है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में कंपनी ने भारत से अमेरिका और यूरोप के लिए अतिरिक्त क्षमता निर्माण, एशिया से भारत आने वाले व्यापारिक मार्गों को मजबूत करने तथा बेंगलुरु, नवी मुंबई और अब दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े निवेश किए हैं। उन्होंने कहा, “भारत वैश्विक व्यापार में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियां भारत को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में देख रही हैं। ऐसे में यह नया हब निर्यात वृद्धि को समर्थन देगा।” विश्वनाथन ने बताया कि फेडएक्स छोटे और मझोले निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए अपनी विशेषज्ञता और वैश्विक नेटवर्क का लाभ उपलब्ध करा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। कंपनी के अनुसार, लगभग 2.30 लाख वर्ग फुट में फैला यह नया एयर कार्गो हब पूरी तरह स्वचालित होगा। इसके संचालन शुरू होने के बाद पैकेज प्रोसेसिंग क्षमता वर्तमान 600 पैकेज प्रति घंटे से बढ़कर 5,000 पैकेज प्रति घंटे तक पहुंच जाएगी। फेडएक्स ने बताया कि भविष्य में बढ़ती मांग को देखते हुए इसमें और विस्तार की भी पर्याप्त संभावना होगी। हब में नवीनतम पीढ़ी की एक्स-रे मशीनें, उन्नत सुरक्षा प्रणाली, इंटेलिजेंट पैकेज हैंडलिंग तकनीक और आधुनिक ऑटो-सॉर्टर लगाए जाएंगे। कंपनी का मानना है कि इन सुविधाओं से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा, शिपमेंट प्रोसेसिंग में तेजी आएगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। फेडएक्स भारत सरकार के ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) कार्यक्रम के साथ भी काम कर रहा है। कंपनी के अनुसार, यह पहल देश के लगभग 750 जिलों में 200 से अधिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद कर रही है। प्रस्तावित फेडएक्स हब जीएमआर कार्गो सिटी का हिस्सा होगा, जो दिल्ली एयरपोर्ट पर विकसित किया जा रहा एक एकीकृत कार्गो और लॉजिस्टिक्स केंद्र है। यह परियोजना लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है और इसमें कुल 15 से 20 लाख वर्ग फुट विकास की क्षमता मौजूद है।

तमिलनाडु में शिक्षकों के हित में बड़ा कदम, टीईटी छूट के लिए प्रस्ताव पारित

चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक विशेष प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देने का आग्रह किया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने सदन में यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि टीईटी अनिवार्य होने के बाद हजारों कार्यरत शिक्षकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि तय कट-ऑफ तारीख से पहले नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा देने और पास करने से पूरी तरह छूट दी जानी चाहिए। इसमें केंद्र से बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) में जरूरी संशोधन करने की भी मांग की गई है, ताकि प्रभावित शिक्षकों को कानूनी सुरक्षा मिल सके। ए. राजमोहन के मुताबिक, टीईटी अनिवार्य करने के आदेश से करीब 3.28 लाख शिक्षक प्रभावित हुए हैं। इनमें से कई की भर्ती टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले के नियमों और भर्ती प्रक्रिया के तहत हुई थी। ए. राजमोहन ने कहा कि वैध भर्ती प्रक्रिया से पहले से सेवा में आए शिक्षकों पर बाद में नई पात्रता शर्त थोपना अनुचित होगा। उन्होंने कहा कि इस अनिवार्य परीक्षा ने लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों में चिंता पैदा कर दी है और उनकी नौकरी की सुरक्षा, प्रमोशन और रिटायरमेंट लाभों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। स्थायी समाधान के लिए केंद्रीय कानून में संशोधन जरूरी है, क्योंकि केवल राज्य सरकार के प्रशासनिक कदम टीईटी से जुड़े कानूनी मुद्दों को ठीक से हल नहीं कर सकते। प्रस्ताव को सभी राजनीतिक दलों का समर्थन मिला। डीएमके, एआईएडीएमके, पीएमके, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के सदस्यों ने सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया। चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा कि कई सालों से सेवा दे रहे शिक्षकों को ऐसी परीक्षा पास करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जो उनकी भर्ती के समय अनिवार्य नहीं थी। उन्होंने केंद्र सरकार से ऐसे शिक्षकों के अनुभव और सेवा रिकॉर्ड पर विचार करने और इस मुद्दे को जल्द हल करने का आग्रह किया। बहस के बाद स्पीकर जेसीटी प्रभाकर ने विशेष प्रस्ताव पर ध्वनि मत कराया। इसके बाद उन्होंने घोषणा की कि प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया है। अब यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा, जिसमें टीआरई कानून में संशोधन और 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से पूरी छूट देने की मांग की गई है।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदबाद में एडवांस रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी से दुर्लभ किडनी ट्यूब ब्लॉकेज से ग्रस्त एक-वर्षीय शिशु की जान बचायी गई

फरीदाबाद। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने लेफ्ट प्राइमरी ऑब्सट्रक्टिव मेगायूरेटर, जो कि मूत्र मार्ग में अवरोध (ब्लॉकेज) की दुर्लभ जन्मजात कंडीशन होती है, से पीड़ित 1-वर्षीय शिशु की रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस जटिल रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी को डॉ अनूप गुलाटी, डायरेक्टर, यूरोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने डॉ अमित गुप्ता, डायरेक्टर पिडियाट्रिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद के नेतृत्व में गठित पिडियाट्रिक टीम के सहयोग से पूरा किया।इस शिशु को करीब एक महीने से बार-बार बुखार, दस्त और पेशाब कम आने की समस्या के बाद इलाज के लिए फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में जांच के बाद, डॉक्टरों ने शिशु को मूत्र मार्ग में अवरोध (ब्लॉकेज) की दुर्लभ जन्मजात कंडीशन से ग्रस्त पाया। उक्त मरीज के बाएं गुर्दे से पेशाब को मूत्राशय में ले जाने वाली नली असामान्य रूप से काफी बड़ी हो गई थी और जहां यह मूत्राशय से जुड़ रही थी वहां अवरुद्ध भी थी। इस अवरोध की वजह से गुर्दे में पेशाब जमा होने लगा था जिसके कारण मरीज के गुर्दे को क्षति पहुंचने और उसमें गंभीर संक्रमण का जोखिम भी बढ़ गया था।शिशु की विस्तृत क्लीनिकल जांच के बाद, यूरोलॉजी टीम ने मिनीमॅली इन्वेसिव लैपरोस्कोपिक सर्जरी कर, गुर्दे से पेशाब ले जाने वाली बढ़ी हुई नली को नए सिरे से आकार देकर रींइप्लांट किया और ब्लॉकेज दूर करने के लिए इसे मूत्राशय से दोबारा जोड़ा गया। घाव भरने के दौरान, इसे खुला रखने के लिए एक छोटे आकार की अस्थायी नली (स्टेंट) लगायी गई। सर्जरी के बाद, मरीज ने बिना किसी परेशानी के रिकवरी की और डॉक्टरों की कड़ी निगरानी, देखभाल तथा एंटीबायोटिक उपचार में रखने के तीन दिन बाद इस बच्चे को स्थिर, और स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।मामले की जानकारी देते हुए, डॉ अनूप गुलाटी, डायरेक्टर, यूरोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “प्राइमरी ऑब्सट्रक्टिव मेगायूरेटर बच्चों में एक प्रकार की दुर्लभ कंडीशन है। यदि इसका सही समय पर उपचार नहीं किया जाए, तो इसकी वजह से बार-बार संक्रमण हो सकता है और इससे धीरे-धीरे किडनी फंक्शन पर भी असर पड़ता है। इस मामले में, समय पर डायग्नॉसिस और सर्जरी से हमें ब्लॉकेज को दूर करने और बच्चे के किडनी फंक्शन को सुरक्षित रखने में मदद मिली। सर्जरी के बाद बच्चे की सही तरीके से रिकवरी हुई और स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।डॉ अमित गुप्ता, डायरेक्टर पिडियाट्रिक्स, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “जिन बच्चों के मूत्र मार्ग में यह दुर्लभ कंडीशन होती है उनमें कई गैर-विशिष्ट लक्षण जैसे बुखार और पेट में खराबी जैसे लक्षण उभरते हैं जो इस कंडीशन के असली कारण को छिपाते हैं। विस्तृत पिडियाट्रिक जांच से हमें इस समस्या के सही कारण की पहचान करने और इंफेक्शन का उपचार करने के साथ-साथ बच्चे को सर्जरी के लिए तैयार करने में सहायता मिली।डॉ अभिषेक शर्मा, फेसिलिटी डायरेक्टर, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, फरीदाबाद ने कहा, “कम उम्र के बच्चों में जटिल मामलों का उपचार करने के लिए उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चरल बैकअप के साथ-साथ उपयुक्त क्लीनिकल माहौल जरूरी होता है। इस मामले में मिली सफलता ने बच्चों में जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं को सुरक्षित तरीके से अंजाम देने की हमारी ताकत को प्रदर्शित किया है।

नोएडा में हुए भयानक सड़क हादसे में दिमाग, फेफड़े, चेहरे और हाथों में गंभीर चोट के बावजूद 27 वर्षीय युवक ने मौत को दी मात, कैलाश अस्पताल में बची जान

नोएडा।नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने दिल्ली के एक 27 साल के व्यक्ति को एक भयानक सड़क दुर्घटना के बाद ठीक होने में मदद की। इस दुर्घटना में उसे दिमाग में गंभीर चोट लगी थी और उसके चेहरे, छाती, फेफड़ों और बाएं हाथ पर भी गंभीर चोटें आई थीं। जब उसे हॉस्पिटल लाया गया, तो वह बेहोश था और उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी। उसे तुरंत इंट्यूबेशन, मैकेनिकल वेंटिलेशन और ICU में देखभाल दी गई। कई तरह के इलाज और कई जटिल प्रक्रियाओं के बाद आखिरकार उसे स्थिर हालत में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया।यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती समस्या का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या 3.5% बढ़कर 1,83,382 हो गई। मौतों के अलावा दुर्घटना में बचने वाले कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं, जिससे शरीर के कई अंगों पर असर पड़ता है। ऐसी जटिल चोटों के इलाज के लिए अक्सर एक ही समय में अलग-अलग मेडिकल क्षेत्रों के विशेषज्ञों की ज़रूरत पड़ती है।इस मामले में दुर्घटना से पीड़ित मरीज का नाम नीरज कुमार है। वह एक मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे थे। नोएडा में स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद उनकी मोटरसाइकिल गिर गई। उन्हें सिर, चेहरे, छाती, फेफड़ों और बाएं हाथ में जानलेवा चोटें आईं और उन्हें गंभीर हालत में हॉस्पिटल लाया गया। वे बेहोश थे और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वह बहुत धीमी साँस ले रहे थे। डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें ब्रीदिंग ट्यूब लगाई और फिर वेंटिलेटर व ICU में रखा। उनका शुरुआती ग्लासगो कोमा स्केल (GCS) स्कोर E1V2M2 था। यह स्कोर सिर की चोट के बाद चेतना के गंभीर नुकसान को दर्शाता है।कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट की न्यूरोसाइंस टीम ने दूसरे स्पेशलिस्ट विभागों की मदद से इस मामले में मरीज का इलाज किया। मरीज़ को दिमाग की गंभीर चोट के साथ-साथ चेहरे, छाती, फेफड़ों और हाथ में भी गंभीर चोटों के इलाज की ज़रूरत थी। ब्रेन स्कैन में ‘डिफ्यूज़ एक्सोनल इंजरी’ और ‘सबअराक्नॉइड हैमरेज’ का पता चला। इसके कारण दिमाग के वेंट्रिकल्स तक ब्लीडिंग फैल गई थी।कैलाश हेल्थकेयर के न्यूरोसाइंसेज के डॉयरेक्टर डॉ श्रीकांत शर्मा ने कहा, “नीरज हमारे पास सिर में गंभीर चोट और बहुत कम होश की हालत में आए थे, साथ ही उनके शरीर के कई अन्य हिस्सों में भी चोटें थीं। हमारी पहली प्राथमिकता उन्हें स्थिर करना और उनके दिमाग की स्थिति पर बारीकी से नज़र रखना थी। हमने नियमित रूप से उनके न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य की जाँच की और फ़ॉलो-अप स्कैन किए। इसके साथ ही उनकी अन्य चोटों का भी इलाज किया। फ़ॉलो-अप स्कैन में दिखा सुधार उत्साहजनक था। उनके ठीक होने में अलग-अलग मेडिकल टीमों के आपसी सहयोग और तालमेल ने अहम भूमिका निभाई।बाद में किए गए CT स्कैन से पता चला कि इंट्रावेंट्रिकुलर हैमरेज यानी दिमाग के वेंट्रिकुलर स्पेस में ब्लीडिंग में थोड़ी कमी आई है। सिर की बाईं ओर जमा खून और सूजन में भी काफी कमी देखी गई। CT ब्रेन एंजियोग्राफी में कोई स्पष्ट असामान्यता नहीं दिखी।इस दुर्घटना में दिमाग के अलावा चेहरे पर भी गंभीर चोटें आई थीं। चेहरे के CT स्कैन से पता चला कि चेहरे की कई हड्डियाँ कई टुकड़ों में टूट गई थीं और अपनी सामान्य जगह से हट गई थीं। इस तरह की चोट को ‘कॉमिन्यूटेड’ और ‘डिस्प्लेस्ड पैन्फेशियल फ्रैक्चर’ कहा जाता है। चोटों में गाल की हड्डी और उसके आर्च, जबड़े की हड्डी और ऊपरी जबड़े के साथ-साथ आँख के आस-पास और चेहरे के अन्य हिस्सों की हड्डियाँ टूटना शामिल था। साथ ही काफी सूजन और सॉफ्ट टिश्यू यानी कोमल ऊतकों में भी चोट आई थी।ठीक होने के बाद नीरज कुमार ने इतने मुश्किल दौर में उनका साथ देने और इलाज करने वाले डॉक्टरों, मेडिकल टीम और अपने परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मेरा ठीक होने का सफ़र लंबा और चुनौतीपूर्ण था। इस दौरान मुझे कई प्रक्रियाओं से गुज़रना पड़ा और कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों की लगातार देखभाल और मार्गदर्शन के साथ-साथ परिवार के सहयोग और हौसले ने मुझे सकारात्मक बने रहने और आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी।यह मामला दिखाता है कि कैसे कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट कई स्पेशलिस्ट्स की मिली-जुली देखभाल के माध्यम से गंभीर चोटों का इलाज करता है। हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, पल्मोनोलॉजी, ENT, डेंटल केयर और क्रिटिकल केयर के एक्सपर्ट्स एक ही जगह पर मौजूद हैं। इन स्पेशलिस्ट्स और एडवांस्ड क्रिटिकल केयर सुविधाओं की वजह से कई चोटों वाले मरीज़ों की तेज़ी से जांच, इलाज और लगातार निगरानी हो पाती है। नीरज के मामले में इस टीम-बेस्ड दृष्टिकोण ने डॉक्टरों को मरीज की गंभीर ब्रेन इंजरी के साथ-साथ चेहरे, छाती, फेफड़ों और हाथ की चोटों का इलाज करने में मदद की। इसी की बदौलत वह गंभीर हालत से उबरकर ठीक होकर घर जा सका।

डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया की रोकथाम एवं नियंत्रण को मजबूत करने के लिए एनडीएमसी ने संवादात्मक जागरूकता सत्र आयोजित किया

नई दिल्ली। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार द्विवेदी ने एनडीएमसी क्षेत्र में डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया के खिलाफ रोकथाम एवं नियंत्रण उपायों को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से स्वच्छता निरीक्षकों, सहायक स्वच्छता निरीक्षकों, स्वच्छता कर्मचारियों तथा क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक जागरूकता सेमिनार के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।इस प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए एनडीएमसी अध्यक्ष – मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा, “वर्तमान में एनडीएमसी क्षेत्र में मलेरिया का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, इससे हमें आत्मसंतुष्ट या लापरवाह नहीं होना चाहिए। हमें मालूम है कि वेक्टर जनित रोग अक्सर चक्रीय रूप से फैलते हैं और डेंगू तथा मलेरिया जैसी बीमारियां अचानक दोबारा उभरकर महामारी का रूप ले सकती हैं। इसलिए, पिछले कुछ वर्षों में मामलों का सामने न आना भविष्य के लिए किसी गारंटी के रूप में नहीं लिया जा सकता।उन्होंने कहा कि “इस वर्ष बारिश के बदलते स्वरूप—बीच-बीच में शुष्क मौसम के बाद अचानक होने वाली बारिश—से जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और रोग फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं। वर्तमान में हमें मलेरिया, डेंगू और H1N1 इन्फ्लुएंजा के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि तापमान में उतार-चढ़ाव भी संक्रमण के प्रसार को बढ़ावा दे सकता है।उन्होंने आगे कहा कि “हमारे स्वच्छता कर्मचारी इस रोकथाम अभियान के अग्रिम पंक्ति के योद्धा हैं। यदि वे अनुशासन, समर्पण तथा पेशेवर और तकनीकी रूप से सक्षम दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं, तो हम अपनी तैयारियों को काफी मजबूत कर सकते हैं और इन बीमारियों की रोकथाम कर सकते हैं। मैं अपने स्वच्छता कर्मियों को आश्वस्त करता हूं कि उन्हें अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के लिए सभी आवश्यक उपकरण, संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। द्विवेदी ने स्वच्छता कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि “जब हमारे स्वच्छता कर्मचारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर कार्य करते हैं, तो वे वास्तव में एनडीएमसी के चेहरे और प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए, इन बीमारियों की रोकथाम संबंधी उपायों में किसी भी प्रकार की लापरवाही के प्रति हमें स्पष्ट रूप से शून्य-सहिष्णुता ( जीरो टॉलरेंस ) का दृष्टिकोण अपनाना होगा। हमारा उद्देश्य शून्य मामले होना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि एनडीएमसी क्षेत्र में एक भी मामला सामने न आए, प्रत्येक संभावित निवारक उपाय निरंतर और सक्रिय रूप से किया जाना चाहिए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हमारी टीमें पूरी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ चौबीसों घंटे कार्य कर रही हैं।इसी क्रम में कर्मचारियों की तैयारियों और सुरक्षा को मजबूत करने की पहल के तहत कार्यक्रम के दौरान पालिका सहायकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) और फ्लोरोसेंट जैकेट प्रदान किए गए। इन सुरक्षात्मक उपकरणों का उद्देश्य क्षेत्रीय कार्यों के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा और दृश्यता सुनिश्चित करने में सहायता करना है।इस अवसर पर एनडीएमसी की चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शकुंतला श्रीवास्तव ने बताया कि इस सत्र का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर तैयारियों को बेहतर करना, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना तथा एनडीएमसी के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आवासीय, वाणिज्यिक और सार्वजनिक क्षेत्रों में मच्छरों के प्रजनन स्थलों की समय पर पहचान और उनका उन्मूलन सुनिश्चित करना था।उन्होंने यह भी बताया कि एनडीएमसी पिछले दो वर्षों से मलेरिया मुक्त है और अब एनडीएमसी क्षेत्र से मलेरिया उन्मूलन की दिशा में कार्य करने का समय आ गया है। यह कार्यशाला एनडीएमसी को मलेरिया मुक्त स्थिति बनाए रखने के लिए योजनाएं तैयार करने और आवश्यक कदम उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।प्रशिक्षण सत्र के दौरान वेक्टर जनित रोग विशेषज्ञ – डॉ. आर.एस. शर्मा ने क्षेत्रीय कर्मचारियों के साथ संवाद किया और संवेदनशील क्षेत्रों के नियमित निरीक्षण, मच्छरों के प्रजनन स्रोतों को समाप्त करने, जलभराव की रोकथाम तथा प्रभावी वेक्टर नियंत्रण उपायों के महत्व के बारे में जानकारी दी। संभावित मच्छर प्रजनन स्थलों की पहचान करने और वेक्टर जनित रोगों के लिए जिम्मेदार मच्छरों के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने पर विशेष जोर दिया गया।प्रशिक्षण के प्रतिभागियों ने क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा की तथा समन्वय, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को बेहतर बनाने के लिए सुझावों का आदान-प्रदान किया। इस संवादात्मक प्रारूप के माध्यम से स्वच्छता एवं क्षेत्रीय कर्मचारियों को अपने अनुभव साझा करने तथा जमीनी स्तर पर मच्छर जनित बीमारियों से निपटने के लिए अधिक प्रभावी रणनीतियां अपनाने का अवसर मिला।एनडीएमसी अधिकारियों ने जोर दिया कि क्षेत्रीय कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास, निरंतर निगरानी और जनभागीदारी के सहयोग से ही डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया को प्रभावी रूप से नियंत्रण में रखा जा सकता है। स्वच्छता टीमों को सतर्कता बढ़ाए रखने, नियमित निरीक्षण करने और जहां भी मच्छरों के प्रजनन के अनुकूल परिस्थितियां पाई जाएं, वहां तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।एनडीएमसी द्वारा वेक्टर जनित रोगों के मौसम के दौरान जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अपनी व्यापक रणनीति के तहत लगातार निवारक उपाय किए जा रहे हैं। इनमें एंटी-लार्वा गतिविधियां, मच्छरों के प्रजनन स्रोतों का उन्मूलन, संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण, जागरूकता अभियान और गहन क्षेत्रीय निगरानी शामिल हैं। इस सत्र ने वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए एनडीएमसी के सक्रिय, समन्वित और क्षेत्र-केंद्रित दृष्टिकोण को और मजबूत किया। इसका उद्देश्य एनडीएमसी क्षेत्र के निवासियों, आगंतुकों और कर्मचारियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

डीएमआरसी ने सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर के शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन पर निर्माण कार्य आरंभ किया

नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने आज सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर के अंतर्गत शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन पर निर्माण कार्य आरंभ किया। शिवाजी स्टेडियम स्टेशन का निर्माण फेज़-V(A) के अंतर्गत जनकपुरी पश्चिम से आर.के. आश्रम मार्ग तक मौजूदा मैजेंटा लाइन के विस्तार के एक भाग के रूप में किया जा रहा है।  उपराज्यपाल, दिल्ली, सरदार तरनजीत सिंह संधू की गरिमामयी उपस्थिति में इस कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।इस अवसर पर माननीय उपराज्यपाल, जो सुरक्षित, सुगम, निर्बाध और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को निरंतर बढ़ावा देते रहे हैं तथा स्वयं भी अनेक अवसरों पर आवागमन के लिए मेट्रो का उपयोग करते हैं, ने कहा, “आज शिवाजी स्टेडियम साइट पर कार्य का शुभारंभ दिल्ली मेट्रो की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मैंने उस दौर की दिल्ली भी देखी है, जब यहाँ मेट्रो नहीं थी। मेट्रो के आगमन और उसके निरंतर विस्तार ने दिल्ली की तस्वीर बदल दी है। दिल्ली मेट्रो की प्रगति और विस्तार की इस यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए हम हर आवश्यक सहयोग और सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन एक भूमिगत स्टेशन होगा और एक महत्त्वपूर्ण इंटरचेंज सुविधा प्रदान करेगा। यहाँ मैजेंटा लाइन के नए स्टेशन को 230 मीटर लंबी भूमिगत सब-वे के माध्यम से मौजूदा शिवाजी स्टेडियम एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन स्टेशन के साथ निर्बाध रूप से जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को दोनों मेट्रो कॉरिडोरों के बीच सुविधाजनक इंटरचेंज की सुविधा प्राप्त होगी।इसके अतिरिक्त, शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन को ट्रैवलेटरयुक्त 800 मीटर लंबी भूमिगत सब-वे के माध्यम से राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को दोनों स्टेशनों के बीच निर्बाध और सुविधाजनक पैदल संपर्क उपलब्ध होगा।नए शिवाजी स्टेडियम स्टेशन की डायाफ्राम वॉल लगभग 38 मीटर गहरी होगी, जो लगभग 12 मंजिला भवन की ऊँचाई के बराबर है। स्टेशन का निर्माण मौजूदा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के नीचे किया जाना है, इसलिए इतनी अधिक गहराई पर निर्माण आवश्यक हो गया है।फलस्वरूप, आगामी शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन पर निर्माण कार्य की प्रगति के साथ निर्माण-संबंधी वाहनों की आवाजाही भी काफी अधिक रहने की संभावना है। प्रतिमाह लगभग 3,000 घनमीटर कंक्रीट की आवश्यकता होगी, जिसके लिए करीब 500 ट्रांजिट मिक्सर फेरे लगाने होंगे। इसी प्रकार, प्रतिमाह लगभग 15,000 घनमीटर मिट्टी की खुदाई के लिए करीब 750 डंपर फेरे लगाने होंगे। इस प्रकार, खुदाई से निकली सामग्री के निस्तारण के लिए प्रतिदिन लगभग 25 डंपर फेरे लगाए जाएंगे।वाहनों की अत्यधिक आवाजाही को देखते हुए आसपास की सड़कों की स्वच्छता बनाए रखने और यातायात के सुचारु प्रवाह को सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। इसके लिए खुदाई से निकली सामग्री को उचित रूप से ढकने, वाहनों के पहियों की धुलाई करने, सामग्री को सड़क पर गिरने से रोकने तथा प्रभावित सड़क-खंडों की तत्काल सफाई करने जैसे उपाय अपनाए जाएंगे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य शिवाजी स्टेडियम स्टेशन पर निर्माण कार्य को निर्बाध रूप से जारी रखते हुए यात्रियों और स्थानीय निवासियों को होने वाली असुविधा को न्यूनतम करना है।शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन से आसपास के क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों, स्कूली विद्यार्थियों, गुरुद्वारा बंगला साहिब आने वाले श्रद्धालुओं तथा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर यात्रा करने वाले यात्रियों को विशेष रूप से लाभ मिलने की संभावना है। यहाँ निर्माण कार्य की जिम्मेदारी मैसर्स एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को सौंपी गई है।सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 9.913 किलोमीटर होगी और इसमें नौ भूमिगत स्टेशन होंगे: शिवाजी स्टेडियम, युगे युगीन भारत, केंद्रीय सचिवालय, कर्तव्य भवन, इंडिया गेट, वॉर मेमोरियल–हाई कोर्ट, बड़ौदा हाउस, भारत मंडपम और इंद्रप्रस्थ।सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर के अंतर्गत शिवाजी स्टेडियम मेट्रो स्टेशन पर निर्माण कार्य का आरंभ मध्य नई दिल्ली में मेट्रो संपर्क के विस्तार की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी कॉरिडोर के केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर निर्माण कार्य 24 जून, 2026 को आरंभ किया गया था।सेंट्रल विस्टा कॉरिडोर के निर्माण से प्रमुख सरकारी कार्यालयों, न्यायिक संस्थानों, राष्ट्रीय स्मारकों और सम्मेलन स्थलों तक संपर्क सुदृढ़ हो सकेगा। इसके साथ ही, मध्य नई दिल्ली में मेट्रो नेटवर्क का एकीकरण, परिचालन दक्षता और यात्रियों की समग्र सुविधा भी बेहतर बन सकेगी।