नोएडा।नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने दिल्ली के एक 27 साल के व्यक्ति को एक भयानक सड़क दुर्घटना के बाद ठीक होने में मदद की। इस दुर्घटना में उसे दिमाग में गंभीर चोट लगी थी और उसके चेहरे, छाती, फेफड़ों और बाएं हाथ पर भी गंभीर चोटें आई थीं। जब उसे हॉस्पिटल लाया गया, तो वह बेहोश था और उसे सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी। उसे तुरंत इंट्यूबेशन, मैकेनिकल वेंटिलेशन और ICU में देखभाल दी गई। कई तरह के इलाज और कई जटिल प्रक्रियाओं के बाद आखिरकार उसे स्थिर हालत में हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया गया।यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती समस्या का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या 3.5% बढ़कर 1,83,382 हो गई। मौतों के अलावा दुर्घटना में बचने वाले कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं, जिससे शरीर के कई अंगों पर असर पड़ता है। ऐसी जटिल चोटों के इलाज के लिए अक्सर एक ही समय में अलग-अलग मेडिकल क्षेत्रों के विशेषज्ञों की ज़रूरत पड़ती है।इस मामले में दुर्घटना से पीड़ित मरीज का नाम नीरज कुमार है। वह एक मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे थे। नोएडा में स्पीड ब्रेकर से टकराने के बाद उनकी मोटरसाइकिल गिर गई। उन्हें सिर, चेहरे, छाती, फेफड़ों और बाएं हाथ में जानलेवा चोटें आईं और उन्हें गंभीर हालत में हॉस्पिटल लाया गया। वे बेहोश थे और उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वह बहुत धीमी साँस ले रहे थे। डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें ब्रीदिंग ट्यूब लगाई और फिर वेंटिलेटर व ICU में रखा। उनका शुरुआती ग्लासगो कोमा स्केल (GCS) स्कोर E1V2M2 था। यह स्कोर सिर की चोट के बाद चेतना के गंभीर नुकसान को दर्शाता है।कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट की न्यूरोसाइंस टीम ने दूसरे स्पेशलिस्ट विभागों की मदद से इस मामले में मरीज का इलाज किया। मरीज़ को दिमाग की गंभीर चोट के साथ-साथ चेहरे, छाती, फेफड़ों और हाथ में भी गंभीर चोटों के इलाज की ज़रूरत थी। ब्रेन स्कैन में ‘डिफ्यूज़ एक्सोनल इंजरी’ और ‘सबअराक्नॉइड हैमरेज’ का पता चला। इसके कारण दिमाग के वेंट्रिकल्स तक ब्लीडिंग फैल गई थी।कैलाश हेल्थकेयर के न्यूरोसाइंसेज के डॉयरेक्टर डॉ श्रीकांत शर्मा ने कहा, “नीरज हमारे पास सिर में गंभीर चोट और बहुत कम होश की हालत में आए थे, साथ ही उनके शरीर के कई अन्य हिस्सों में भी चोटें थीं। हमारी पहली प्राथमिकता उन्हें स्थिर करना और उनके दिमाग की स्थिति पर बारीकी से नज़र रखना थी। हमने नियमित रूप से उनके न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य की जाँच की और फ़ॉलो-अप स्कैन किए। इसके साथ ही उनकी अन्य चोटों का भी इलाज किया। फ़ॉलो-अप स्कैन में दिखा सुधार उत्साहजनक था। उनके ठीक होने में अलग-अलग मेडिकल टीमों के आपसी सहयोग और तालमेल ने अहम भूमिका निभाई।बाद में किए गए CT स्कैन से पता चला कि इंट्रावेंट्रिकुलर हैमरेज यानी दिमाग के वेंट्रिकुलर स्पेस में ब्लीडिंग में थोड़ी कमी आई है। सिर की बाईं ओर जमा खून और सूजन में भी काफी कमी देखी गई। CT ब्रेन एंजियोग्राफी में कोई स्पष्ट असामान्यता नहीं दिखी।इस दुर्घटना में दिमाग के अलावा चेहरे पर भी गंभीर चोटें आई थीं। चेहरे के CT स्कैन से पता चला कि चेहरे की कई हड्डियाँ कई टुकड़ों में टूट गई थीं और अपनी सामान्य जगह से हट गई थीं। इस तरह की चोट को ‘कॉमिन्यूटेड’ और ‘डिस्प्लेस्ड पैन्फेशियल फ्रैक्चर’ कहा जाता है। चोटों में गाल की हड्डी और उसके आर्च, जबड़े की हड्डी और ऊपरी जबड़े के साथ-साथ आँख के आस-पास और चेहरे के अन्य हिस्सों की हड्डियाँ टूटना शामिल था। साथ ही काफी सूजन और सॉफ्ट टिश्यू यानी कोमल ऊतकों में भी चोट आई थी।ठीक होने के बाद नीरज कुमार ने इतने मुश्किल दौर में उनका साथ देने और इलाज करने वाले डॉक्टरों, मेडिकल टीम और अपने परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मेरा ठीक होने का सफ़र लंबा और चुनौतीपूर्ण था। इस दौरान मुझे कई प्रक्रियाओं से गुज़रना पड़ा और कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों की लगातार देखभाल और मार्गदर्शन के साथ-साथ परिवार के सहयोग और हौसले ने मुझे सकारात्मक बने रहने और आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी।यह मामला दिखाता है कि कैसे कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट कई स्पेशलिस्ट्स की मिली-जुली देखभाल के माध्यम से गंभीर चोटों का इलाज करता है। हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, पल्मोनोलॉजी, ENT, डेंटल केयर और क्रिटिकल केयर के एक्सपर्ट्स एक ही जगह पर मौजूद हैं। इन स्पेशलिस्ट्स और एडवांस्ड क्रिटिकल केयर सुविधाओं की वजह से कई चोटों वाले मरीज़ों की तेज़ी से जांच, इलाज और लगातार निगरानी हो पाती है। नीरज के मामले में इस टीम-बेस्ड दृष्टिकोण ने डॉक्टरों को मरीज की गंभीर ब्रेन इंजरी के साथ-साथ चेहरे, छाती, फेफड़ों और हाथ की चोटों का इलाज करने में मदद की। इसी की बदौलत वह गंभीर हालत से उबरकर ठीक होकर घर जा सका।