आईपीयू में विश्व मच्छर दिवस पर तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन

नई दिल्ली।गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (जीजीएसआईपीयू) ने विश्व मच्छर दिवस के अवसर पर “स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ समुदाय: बड़े प्रभाव के लिए छोटे कदम” थीम के तहत वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जलवायु-अनुकूल पर्यावरण प्रबंधन पर एक तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन किया।इस संगोष्ठी का आयोजन सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड क्लाइमेट चेंज (सीएससीसी), यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट मैनेजमेंट (यूएसईएम), जीजीएसआईपीयू द्वारा आईसीएमआर-राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (एनआईएमआर), कैराह वुमेन फाउंडेशन और दिल्ली नगर निगम के सहयोग से किया गया।संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. वरुण जोशी, डीन, यूएसईएम, जीजीएसआईपीयू ने की। कार्यक्रम में जन-स्वास्थ्य, जलवायु विज्ञान और पर्यावरणीय सामुदायिक कार्यों से जुड़े विशेषज्ञ एक साथ आए। तकनीकी सत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एनसीडीसी के डॉ. आकाश श्रीवास्तव ने “जलवायु जनित डेंगू और मलेरिया जोखिम – ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव” विषय पर मुख्य भाषण दिया। कैराह वुमेन फाउंडेशन की डॉ. रूप कुमारी ने जलवायु परिवर्तन, वेक्टर जनित रोग और एकीकृत वेक्टर प्रबंधन पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण “वन हेल्थ इन एक्शन” विषय पर पैनल चर्चा थी, जिसकी अध्यक्षता प्रो. प्रोद्युत भट्टाचार्य, प्रमुख, सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड क्लाइमेट चेंज (सीएससीसी), यूएसईएम, जीजीएसआईपीयू ने की और सह-अध्यक्षता प्रो. एन.सी. गुप्ता, यूएसईएम, जीजीएसआईपीयू ने की। सत्र का संचालन डॉ. रजनी कांत, पूर्व निदेशक, आईसीएमआर-आरएमआरसी गोरखपुर और अध्यक्ष, रोग उन्मूलन, आईसीएमआर ने किया, जिसमें वक्ताओं के रूप में टीसीआई फाउंडेशन के राष्ट्रीय तकनीकी लीड और एनआईएमआर के पूर्व वैज्ञानिक जी डॉ. रमेश सी. धीमान; वैज्ञानिक जी, एनआईएमआर-आईसीएमआर डॉ. हिम्मत सिंह; और दिल्ली नगर निगम की डॉ. अंजलि शामिल थीं।कार्यक्रम में मलेरिया और वेक्टर जनित रोग नियंत्रण में विशिष्ट योगदान को मान्यता देते हुए मलेरिया एवं वेक्टर जनित रोग नियंत्रण में उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित सर रोनाल्ड रॉस पुरस्कार डॉ. तनु जैन, निदेशक, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र, दिल्ली को और वेक्टर नियंत्रण में उत्कृष्टता पुरस्कार डॉ. सूरजिता बनर्जी, राज्य कीट विज्ञानी, आईडीएसपी, पश्चिम बंगाल को प्रदान किया गया।छात्रों की भागीदारी के अंतर्गत एक संवादात्मक सत्र और क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसके बाद प्रमुख सिफारिशें, पुरस्कार वितरण और प्रो. पमपोश, सह-समन्वयक, सीएससीसी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। संगोष्ठी का समापन निवारक कार्रवाई को बढ़ावा देने और स्वस्थ, जलवायु-लचीले समुदायों के निर्माण के लिए जन-स्वास्थ्य संस्थानों, पर्यावरण विशेषज्ञों, समुदायों, शोधकर्ताओं और शहरी प्राधिकरणों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर के साथ हुआ।

उत्तर पश्चिम रेलवे पर नराकास (कार्यालय-2) जयपुर की छमाही बैठक संपन्न

जयपुर । उत्तर पश्चिम रेलवे प्रधान कार्यालय, जयपुर के “संकल्प” सभाकक्ष में मंगलवार  को महाप्रबंधक उत्तर पश्चिम रेलवे एवं अध्यक्ष, नराकास पंकज शर्मा की अध्यक्षता में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (कार्यालय-2) जयपुर की छमाही बैठक का आयोजन किया गया।उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी  अमित सुदर्शन के अनुसार इस बैठक में 01 जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक की छमाही अवधि के दौरान सदस्य कार्यालयों द्वारा हिंदी के प्रयोग एवं प्रगति रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की गई तथा दैनिक सरकारी कार्यों में राजभाषा के प्रयोग को और अधिक गति देने पर विशेष बल दिया गया।बैठक का शुभारंभ मुख्य राजभाषा अधिकारी  अतुल सक्सेना ने समिति अध्यक्ष एवं महाप्रबंधक पंकज शर्मा, अपर महाप्रबंधक  अशोक माहेश्वरी को पौधा भेंट कर किया। स्वागत संबोधन में मुख्य राजभाषा अधिकारी ने सभी सदस्य कार्यालय प्रमुखों से राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।बैठक की अध्यक्षता करते हुए महाप्रबंधक पंकज शर्मा ने समस्त सदस्य कार्यालयों के प्रमुखों एवं प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि वे अपने दैनिक प्रशासनिक एवं शासकीय कार्यों में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों से अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को भी नियमित रूप से राजभाषा के प्रयोग हेतु समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश देने और प्रेरित करने का आह्वान किया। अध्यक्ष महोदय ने बैठक में यह गौरवपूर्ण जानकारी साझा की कि वर्ष 2025-26 के दौरान राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्य निष्पादन के लिए नराकास (कार्यालय-2) जयपुर को नवी मुंबई (महाराष्ट्र) में आगामी 14 व 15 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर “प्रशंसनीय” श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा।समिति के सदस्य सचिव एवं वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी शिवचरण बैरवा द्वारा बैठक की कार्यसूची पर मदवार प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिस पर अध्यक्ष महोदय ने आवश्यक दिशा-निर्देश व सुझाव जारी किए। बैठक में उपस्थित सदस्य कार्यालयों के प्रमुखों एवं प्रतिनिधियों से सुझाव भी आमंत्रित किए गए।इस दौरान अध्यक्ष एवं महाप्रबंधक महोदय के कर-कमलों द्वारा नराकास स्तर पर आयोजित हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा वर्ष 2025-26 के निर्धारित मापदंडों के अनुसार राजभाषा अधिनियमों व नियमों का अनुपालन करने वाले सदस्य कार्यालयों को नराकास स्तर पर ‘राजभाषा चल वैजयंती शील्ड’ एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।’क’ वर्ग के कार्यालय में उत्तर पश्चिम रेलवे, प्रधान कार्यालय, जयपुर, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कार्यालय, राज्य इकाई, जयपुर,मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, जयपुर क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे।केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक-1, जयपुर एवं दूरदर्शन केन्द्र, जयपुर को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। ‘ख’ वर्ग के कार्यालयों में केंद्रीय विद्यालय संगठन, केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग, पत्र सूचना कार्यालय, जयपुर क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहे।केन्द्रीय जल आयोग (चंबल मंडल), केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (द्वितीय), जयपुर को प्रशस्ति पत्र दिया गया।

उत्तर-पश्चिम रेलवे पर “खेलेगा भारत, जीतेगा भारत” थीम के साथ मनाया जाएगा राष्ट्रीय खेल दिवस

जयपुर ।उत्तर-पश्चिम रेलवे स्पोर्ट्स एसोसिएशन द्वारा भारत के महान हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में उत्तर पश्चिम रेलवे पर तीन दिवसीय देशव्यापी खेल अभियान का आयोजन किया जा रहा है।उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार  29 अगस्त को भारत के महान हॉकी जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में इस वर्ष  28  से 30 अगस्त 2026 तक तीन दिवसीय देशव्यापी खेल अभियान का आयोजन किया जा रहा है। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ के अंतर्गत इस वर्ष का मुख्य विषय “खेलेगा भारत, जीतेगा भारत” रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य रेल कर्मियों और आम नागरिकों में खेल के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देना है। इस वर्ष के खेल उत्सव का मुख्य केंद्र “एक घंटा खेल के मैदान में” पहल है।इसके तहत उत्तर-पश्चिम रेलवे के मुख्यालय सहित सभी मंडलों जोधपुर, जयपुर, अजमेर, बीकानेर और कारखानों में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों को खेल के मैदान में उतरकर कम से कम एक घंटा स्वेच्छा से खेल गतिविधियों या शारीरिक व्यायाम में बिताने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अंतर्गत 28 से 30 अगस्त 2026 तक उत्तर-पश्चिम रेलवे के विभिन्न खेल परिसरों में विभिन्न खेल, फिटनेस और मनोरंजक प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। इस आयोजन में क्षेत्रीय और मंडल स्तर पर देश के जाने-माने खेल दिग्गजों, ओलंपियनों और अर्जुन पुरस्कार विजेताओं को आमंत्रित किया जाएगा, जो रेल कर्मचारियों और उनके बच्चों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे।उत्तर-पश्चिम रेलवे अपने सभी रेल कर्मियों और उनके परिवारों से अपील करता की है कि वे इस राष्ट्रीय उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और “स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत” के सपने को साकार करने में अपना योगदान दें।

पीसीओएम सम्मेलन में डिजिटल फ्रेट टूल्स, परिचालन समन्वय एवं भविष्य की परिवहन व्यवस्था पर चर्चा

लखनऊ। भारतीय रेल परिवहन प्रबंधन संस्थान (IRITM), लखनऊ में जोनल रेलों के प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधकों (PCOMs) के दो दिवसीय सम्मेलन के दूसरे दिन आज माल परिचालन, डिजिटल टूल्स, परिचालन समन्वय तथा रेल परिवहन में उभरते अवसरों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ रोड टैरिफ डैशबोर्ड एवं फ्रेट मैप विज़ुअलाइज़ेशन डैशबोर्ड के उद्घाटन के साथ हुआ। इन डैशबोर्ड का उद्घाटन डॉ. मनोज सिंह, सदस्य (परिचालन एवं व्यवसाय विकास), रेलवे बोर्ड द्वारा किया गया। इसके पश्चात राकेश कुमार रौसन, कार्यकारी निदेशक (व्यवसाय विकास), रेलवे बोर्ड द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। यह पहल माल परिवहन से संबंधित विश्लेषण, टैरिफ निर्धारण एवं दृश्यांकन के लिए डिजिटल टूल्स के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी तथा माल परिचालन की दक्षता में वृद्धि होगी।इसके बाद विभिन्न जोनल रेलों के प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधकों (PCOMs) द्वारा प्रस्तुतीकरण दिए गए, जिनमें प्रमुख परिचालन पहलों, उभरते रुझानों तथा रेल परिवहन के क्षेत्र में अपनाई जा रही सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को रेखांकित किया गया। प्रमुख रेल सार्वजनिक उपक्रमों, जिनमें DFCCIL, CONCOR एवं CRIS शामिल हैं, के प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए प्रस्तुतीकरणों ने भी विचार-विमर्श को समृद्ध किया। इन प्रस्तुतीकरणों में माल परिवहन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल समाधान तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा गया। इस सत्र ने ज्ञान के आदान-प्रदान, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने तथा रेल माल परिवहन परिचालन की दक्षता, प्रतिस्पर्धात्मकता एवं ग्राहक-केंद्रितता को बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा के लिए एक उपयोगी मंच प्रदान किया।इसके पश्चात रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ यातायात अधिकारियों के साथ एक विस्तृत संवाद सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में विभिन्न परिचालन तथा यातायात परिवहन से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा एवं विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्राप्त हुआ।तत्पश्चात औपचारिक कार्यक्रम के अंतर्गत राहुल अग्रवाल, PEDTT(M), रेलवे बोर्ड द्वारा समापन टिप्पणी प्रस्तुत की गई। सम्मेलन का समापन ओपन फोरम के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागी अधिकारियों को साझा हित के विषयों पर विचार-विमर्श करने तथा अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराया गया। IRITM में आयोजित दो दिवसीय इस सम्मेलन में जोनल रेलों एवं विभिन्न रेल संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन ने सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने, समकालीन परिचालन चुनौतियों का मूल्यांकन करने तथा रेल परिवहन एवं माल परिचालन को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम समाधानों की संभावनाओं पर विचार करने हेतु एक सार्थक एवं रचनात्मक मंच प्रदान किया।सम्मेलन के दौरान रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों, रेलवे सार्वजनिक उपक्रमों एवं जोनल रेलों के अधिकारियों के साथ-साथ IRITM के संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे।

असम ने ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना में समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया: सीएम सरमा

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार विकसित भारत-जी राम जी पहल के तहत ‘समुदाय-प्रथम’ (कम्यूनिटी फर्स्ट) दृष्टिकोण अपना रही है, जिसमें गांवों में आजीविका, कनेक्टिविटी और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि एक विकसित असम का सरकारी विजन जमीनी स्तर पर लोगों की सक्रिय भागीदारी से ही साकार होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “विकसित भारत-जी राम जी के तहत असम ‘समुदाय-प्रथम’ (कम्यूनिटी फर्स्ट) का दृष्टिकोण अपना रहा है। हर गांव के लिए बेहतर आजीविका, बेहतर कनेक्टिविटी, बेहतर सार्वजनिक स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।” उन्होंने कहा कि राज्य के विकास की प्रक्रिया में सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए गांवों में और लोगों के खुद के प्रयासों से ही ‘विकसित असम’ का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री की ये बातें ऐसे समय में आई हैं जब राज्य सरकार ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच बेहतर बनाने के साथ-साथ गांवों में रहने वाले लोगों के लिए आजीविका के ज्यादा अवसर पैदा करने की कोशिश कर रही है। ‘समुदाय-प्रथम’ दृष्टिकोण इस बात पर जोर देता है कि विकास की पहल ग्रामीण परिवारों तक पहुंचे और रोजगार के अवसरों, कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सुविधाओं सहित स्थानीय जरूरतों को पूरा करे। सरमा ने कहा कि गांव राज्य के व्यापक विकास विजन के केंद्र में रहेंगे, और स्थानीय समुदाय विकास की पहलों को आकार देने और उन्हें लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर देने का मकसद गांवों और आस-पास के कस्बों व विकास केंद्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाना भी है, ताकि ग्रामीण निवासी बाजारों, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच सकें। बेहतर सार्वजनिक स्थानों और गांव की सुविधाओं से जीवन की स्थितियों में सुधार होने और सामुदायिक बुनियादी ढांचे के मजबूत होने की उम्मीद है। सरकार एक विकसित असम के अपने व्यापक विजन के मुख्य घटकों के रूप में ग्रामीण विकास और आजीविका सृजन पर जोर देती रही है। मुख्यमंत्री का बयान विकास में स्थानीय भागीदारी के महत्व को भी रेखांकित करता है। सरकार ग्रामीणों को सिर्फ कल्याणकारी और बुनियादी ढांचा कार्यक्रमों के लाभार्थी के तौर पर नहीं, बल्कि असम की विकास गाथा में सक्रिय भागीदार के तौर पर स्थापित करना चाहती है। इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने और बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने की राज्य की व्यापक कोशिशों को बल मिलने की उम्मीद है। सरमा ने कहा कि ‘विकसित असम” का विजन गांव के स्तर से शुरू होगा, जिसमें विकास की बागडोर स्थानीय समुदायों के हाथ में होगी और जिसका मकसद पूरे राज्य के लोगों के लिए बेहतर अवसर और जीवन की स्थितियां पैदा करना होगा। मुख्यमंत्री की पोस्ट ने सरकार के इस संदेश को और मजबूत किया कि समावेशी ग्रामीण विकास और सामुदायिक भागीदारी असम के विकास एजेंडे के महत्वपूर्ण स्तंभ बने रहेंगे।

पंजाब के लोगों का भाजपा और अकाली दल पर भरोसा नहीं: राज कुमार वेरका

अमृतसर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. राज कुमार वेरका ने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। राज कुमार वेरका ने भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन पर कहा कि मुझे नहीं लगता है कि इससे पंजाब के लोगों का फायदा होगा या अकाली दल या भाजपा को कोई फायदा होगा। इन लोगों ने जब 2022 में पीएम मोदी के नाम पर चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, तब भी इन्हें कोई खास फायदा नहीं हुआ था। 2024 के चुनाव में भी राम मंदिर और पीएम मोदी के नाम पर इन्होंने चुनाव लड़ा था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ था। अकाली दल का भी हाल बुरा है। अब शून्य के साथ दूसरा शून्य जोड़ोगे, तो परिणाम शून्य ही होगा। पंजाब में इन दोनों पार्टियों को खारिज किया जा चुका है, जिन्हें कोई नहीं पूछता है। उन्होंने कहा कि पूरी स्थिति काफी अलग बनी हुई है। भाजपा वाले कह रहे हैं कि हमारा समझौता नहीं हुआ। पीएम मोदी और बीएल संतोष भी अकाली दल के खिलाफ बोल चुके हैं। इसके बावजूद बादल साहब सहारा खोज रहे हैं। अगर सहारा चाहिए तो वो पंजाब की जनता के पास जाएं, क्योंकि राज्य के लोगों का भरोसा अब केंद्र सरकार से उठ चुका है। इसके अलावा, उन्होंने राम रहीम को मिली पैरोल पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, ये भाजपा का खेल है, जिन लोगों ने पंजाब को जख्म दिया है। भाजपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए लोगों की भावनाओं को नहीं देखती है। वह अपना सियासी लाभ देख रही है। वहीं, उन्होंने राहुल गांधी के पंजाब दौरे के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जल्दी ही यहां आएंगे। उनके पहले हफ्ते आने का कार्यक्रम है। पूरे पंजाब का दौरा करेंगे। बस यात्रा भी करेंगे।

चीन की पहली दोहरी स्तरीय पीली नदी सुरंग यातायात के लिए खुली

बीजिंग। चीन के शानतोंग प्रांत के चिनान शहर में हुआंगकांग रोड पर स्थित पीली नदी सुरंग को आधिकारिक रूप से यातायात के लिए खोल दिया गया। यह पीली नदी को पार करने वाली चीन की पहली एकल सुरंग दोहरी स्तरीय ढाल सुरंग है। इसके खुलने से चिनान के लोंगहू वेटलैंड पार्क से लानश्यांग मिडिल रोड तक पहुंचने में लगने वाला समय 40 मिनट से घटकर लगभग 5 मिनट रह गया है। इस सुरंग की सबसे बड़ी विशेषता इसकी एकल सुरंग दोहरी स्तरीय संरचना है। सुरंग का ऊपरी स्तर दक्षिण से उत्तर की ओर यातायात के लिए है, जबकि निचला स्तर उत्तर से दक्षिण की ओर यातायात के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दोनों स्तरों पर कुल छह लेन हैं और इनकी डिजाइन गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा है। सुरंग के अंदर प्रत्येक स्तर की ऊंचाई 4.2 मीटर है, जिससे बसों और अग्निशमन तथा बचाव वाहनों की आवाजाही भी आसानी से हो सकती है। वहीं, पारंपरिक दोहरी सुरंग योजना में अधिक भूमि की जरूरत पड़ती है और परियोजना की लागत भी बढ़ जाती है। इसके मुकाबले एकल सुरंग दोहरी स्तरीय डिजाइन भूमिगत स्थान का बेहतर इस्तेमाल करता है और परियोजना के निवेश को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, परियोजना टीम ने ठोस और तरल पदार्थों को प्रभावी ढंग से अलग करने के लिए एक नई संयोजन तकनीक भी विकसित की है। इस सुरंग के खुलने के बाद चिनान खंड में पीली नदी को पार करने वाले मार्गों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इससे शहर के दोनों हिस्सों के बीच यातायात और आवाजाही और अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला के ठिकाने और रोहिणी आश्रम के कामकाज की जांच के दिए आदेश

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने विजय विहार पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को निर्देश दिया है कि वे एक महिला के लापता होने का मामला दर्ज करें और रोहिणी के एक आश्रम से लापता हुई उस महिला के ठिकाने का पता लगाएं। साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि इस आध्यात्मिक संस्थान के कामकाज और मैनेजमेंट की जांच की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने यह निर्देश महिला के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। माता-पिता ने राजधानी के रोहिणी इलाके में स्थित ‘अध्यात्मिक विद्यालय’ आश्रम से जुड़े लोगों की कस्टडी से अपनी बेटी को छुड़ाने की मांग की थी। माता-पिता ने बताया कि उनकी सेहत खराब है और लगातार बिगड़ रही है, और ज्‍यादा उम्र होने के कारण उनकी देखभाल करने वाला कोई और नहीं है। सुनवाई के दौरान, एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) आकांक्षा कौल ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने कोर्ट में मौजूद दो महिलाओं से बात की है, जो खुद को उस आध्यात्मिक संस्था की अनुयायी बताती हैं। उन्होंने बताया कि वह महिला अभी रोहिणी आश्रम में नहीं रह रही है, हालांकि उसका सामान अभी भी वहीं रखा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आश्रम के संस्थापक और आध्यात्मिक प्रमुख पर आपराधिक मुकदमा चल रहा था, वे मुकदमे के दौरान फरार हो गए थे, और अब उनके मरने की खबर है। यह जानकारी सीबीआई की ओर से पेश स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने दी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि एक संबंधित रिट याचिका में कुछ रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद, इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि अभी आश्रम कौन चलाता है और उसका मैनेजमेंट कौन करता है, इसके और इससे जुड़े अन्य आश्रमों के लिए फंड कहां से आता है, और इन संस्थानों का मैनेजमेंट कैसे किया जा रहा है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, “इन हालात को देखते हुए, हमारी राय है कि आश्रम के कामकाज और जिस तरह से इसे चलाया जा रहा है, उसकी जांच-पड़ताल होनी चाहिए।” कोर्ट ने अपने सामने मौजूद दो महिलाओं के बयानों पर भी गौर किया। उनमें से एक, प्रगति ने बताया कि वह दिल्ली के नांगलोई स्थित एक आश्रम में रह रही थी और सुनवाई वाले दिन रोहिणी आश्रम आई थी। दूसरी महिला, श्याम लता ने बताया कि वह किसी आश्रम में नहीं रहती थीं, लेकिन उसी आध्यात्मिक समूह से जुड़ी थीं। यह देखते हुए कि महिला के लापता होने की बात कही गई थी, जबकि उनका सामान और कुछ अन्य चीजें रोहिणी आश्रम में ही थीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने विजय विहार पुलिस स्टेशन के एसएचओ को लापता व्यक्ति का मामला दर्ज करने और उनके ठिकाने का पता लगाने के लिए जांच करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि एसएचओ अगली सुनवाई की तारीख पर रिपोर्ट पेश करें और जांच के नतीजों के बारे में बेंच को जानकारी देने के लिए खुद मौजूद रहें। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल, समीर वशिष्ठ से भी कहा कि वे संबंधित एसएचओ को इस आदेश के बारे में बताएं और जांच करने में हर जरूरी मदद दें। साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया कि रिकॉर्ड की जांच के बाद रिट याचिका में मौजूद जरूरी जानकारी पुलिस अधिकारी को दी जाए। इस मामले को एक संबंधित रिट याचिका के साथ 31 अगस्त को लिस्ट करने और इसे “हाई ऑन बोर्ड” रखने का आदेश दिया गया है।

दिल्ली के स्पीकर ने किरोड़ी मल और रामजस कॉलेज के छात्रों से लोकतंत्र को मजबूत करने का किया आह्वान

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को विधानसभा में दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ी मल और रामजस कॉलेज के छात्रों से बातचीत की और उन्हें लोकतंत्र में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। गुप्ता ने विधानसभा की खास ‘यूथ आउटरीच पहल’ (युवा संपर्क पहल) के तहत बातचीत के सत्र की शुरुआत करते हुए कहा, “एक मजबूत लोकतंत्र तब बनता है जब उसके युवा नागरिक इसके संस्थानों, विचारों और प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं।” लगातार भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि एक लोकतांत्रिक समाज की जीवंतता जानकारी रखने वाले, जागरूक और सक्रिय युवाओं पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थानों को काम करते हुए सीधे अनुभव करके, युवा नागरिक अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा और जोश को सार्थक नागरिक भागीदारी, जवाबदेही और जनसेवा में बदल सकते हैं। एक बयान में कहा गया है कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय की यह व्यवस्थित पहल भारत के युवाओं और शासन के बीच की दूरी को कम करने के लिए बनाई गई है। इसका मकसद विधायी प्रक्रियाओं को आसान बनाना और ‘जेन जेड’ में गहरी नागरिक जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है। अपनी यात्रा के दौरान, छात्रों को भारत की संसदीय विरासत से रूबरू कराया गया। इसकी शुरुआत मशहूर विधानसभा भवन के ऐतिहासिक महत्व को जानने से हुई। 1912 में बनी इस इमारत में पहले ऐतिहासिक ‘सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली’ (केंद्रीय विधायी सभा) हुआ करती थी और यह विट्ठलभाई पटेल जैसी हस्तियों की अमिट विरासत को संजोए हुए है। छात्रों ने 1993 में दोबारा स्थापना के बाद से लोकतांत्रिक शासन में विधानसभा की चल रही भूमिका के बारे में भी जानकारी हासिल की। उनकी समझ को और गहरा करने के लिए, कार्यक्रम में विधायी प्रक्रियाओं पर एक विस्तृत जानकारी सत्र रखा गया, जिसमें कानून बनाने, उन पर बहस करने और उन्हें पारित करने के तरीके के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई। इस शैक्षिक सत्र में संस्थान के विकासक्रम को दिखाने वाली एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें पद्म भूषण से सम्मानित अनुपम खेर की आवाज (वॉयस-ओवर) शामिल थी। छात्रों को ‘एक शताब्दी यात्रा’ नाम का एक यादगार कॉफी टेबल प्रकाशन भी भेंट किया गया, जिसमें विधायी इतिहास की एक सदी का दस्तावेजीकरण किया गया है। कार्यक्रम का समापन विधानसभा सदन के कक्ष के गाइडेड टूर के साथ हुआ, ताकि स्थानीय शासन के कामकाज के मुख्य केंद्र को देखा जा सके।

दिल्ली विश्वविद्यालय में पानी को लेकर एनएसयूआई का प्रदर्शन, खाली बोतल लेकर निकाली ‘पानी अधिकार यात्रा’

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों को पीने का साफ पानी नहीं मिलने के मुद्दे पर एनएसयूआई ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एनएसयूआई कार्यकर्ता समर्थ बेनीवाल के नेतृत्व में छात्रों ने नॉर्थ कैंपस में खाली बोतल लेकर प्रदर्शन किया और वीसी को चेतावनी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनिंदा 5-6 कॉलेजों को छोड़कर कहीं भी साफ पानी नहीं मिल रहा, जिससे छात्रों को 20-40 रुपए खर्च कर बोतलबंद पानी पीना पड़ रहा है। एनएसयूआई के कार्यकर्ता समर्थ बेनीवाल ने कहा, “हमारे दिल्ली विश्वविद्यालय में जेन-जी ने प्रदर्शन के जरिए एक संदेश दिया है कि डीयू के बच्चों की हालत खाली बोतल जैसी है। आज हम खाली बोतल लिए घूम रहे हैं और वीसी के सामने ये खाली बोतल रख रहे हैं। हम कहना चाहते हैं कि जब तक छात्रों को पीने का साफ पानी नहीं मिलेगा, हम अपना अधिकार मांगते रहेंगे। ये कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। ये छात्रों का मुद्दा है। इस अधिकार को हम लेकर रहेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि ये एनएसयूआई की तरफ से पानी अधिकार यात्रा है। हम हर कॉलेज के कैंपस और विभाग में जा रहे हैं और ये जांच कर रहे हैं कि बच्चों को पीने का साफ पानी मिल रहा है या नहीं। केवल सिर्फ पांच-छह चुनिंदा कॉलेज हैं, जहां बच्चों को पीने का साफ पानी मिल रहा है। कुछ जगह तो पानी आ ही नहीं रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी का प्रशासन जानबूझकर धांधली कर रहा है। समर्थ बेनीवाल ने आगे कहा कि बच्चे कहां जाएंगे? वे पैक्ड पानी पिएंगे। उनके जेब से 20-40 रुपए निकलेंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय ने शिक्षा को तो बना ही रखा है, अब पानी को भी लूट का माध्यम बना लिया। फीस भी बढ़ा रखी है, लेकिन पानी से भी डीयू छात्रों को लूट रही है। आज हमने नॉर्थ कैंपस में यह लड़ाई लड़ी। एनएसयूआई के कार्यकर्ता ने चेतावनी देते हुए कहा, “हमारी यात्रा पिछले 10 दिनों से चल रही है। 10 दिनों में जितने कॉलेज संभव हुए, हम वहां गए और आगे भी हम हर कॉलेज और डिपार्टमेंट में जाएंगे। भले ही वो छात्र हमें वोट देते हों या नहीं, लेकिन वो दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के वीसी से मैं कहना चाहता हूं कि अगर वो हमारा हक नहीं दे सकते हैं तो हमें अपना अधिकार छीनना भी आता है।