सर्वोच्च बलिदान देने वाले लांस नायक एबेट पालोह को जनरल धीरज सेठ ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। भारतीय सेना के थलसेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और सेना के सभी रैंक ने लांस नायक एबेट पालोह को श्रद्धांजलि अर्पित की है। लांस नायक एबेट पालोह ने ड्यूटी के दौरान देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। भारतीय सेना ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और शोकसंतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है। लांस नायक एबेट पालोह सेना की गजराज कोर में थे। भारतीय सेना की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि गजराज कोर के लांस नायक एबेट पालोह ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। थलसेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और सेना के सभी रैंक ने वीर जवान के बलिदान को नमन किया। भारतीय सेना ने शोक की इस घड़ी में दिवंगत जवान के परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहने की बात कही है। सेना ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में उनके साथ एकजुटता जताई है। जनरल धीरज सेठ, थलसेनाध्यक्ष तथा भारतीय सेना के सभी पदों ने वीरयोद्धा लांस नायक एबेट पालोह को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय सेना शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है। सेना का कहना है कि वह इस कठिन घड़ी में परिवार के साथ दृढ़ता से खड़ी है। गौरतलब है कि बीते दिनों अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम दिबांग क्षेत्र में देश की सुरक्षा के लिए तैनात भारतीय सेना के तीन अग्निवीरों ने भी कर्तव्य की राह में सर्वोच्च बलिदान दिया था। अग्निवीर आदित्य कुमार, अग्निवीर कुंदन कुमार और अग्निवीर विनोद यादव के निधन से सेना में शोक की लहर थी। पूर्वी सेना कमान के सेना कमांडर और सभी सैन्य रैंकों ने तीनों जवानों के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की थी। सेना के मुताबिक तीनों अग्निवीरों ने कर्तव्य निभाते हुए वीरतापूर्वक सर्वोच्च बलिदान दिया। अरुणाचल प्रदेश की दिबांग वैली में 14 अगस्त को आई बाढ़ के दौरान लापता हुए औरैया के मूल निवासी अग्निवीर विनोद यादव, बिहार के कुंदन कुमार व अग्निवीर आदित्य कुमार लापता हो गए थे। हादसे के कई दिन बाद बीते दिनों डीएनए जांच के जरिए इनकी पहचान हुई। इसके बाद सेना के जवानों के अस्थि कलश उनके गांव पहुंचे। विनोद यादव उन जवानों में शामिल थे, जो अरुणाचल प्रदेश के बेहद दुर्गम क्षेत्र में देश की सुरक्षा के लिए तैनात थे। प्राकृतिक आपदा के बीच उनका लापता होना परिवार के लिए लंबे इंतजार और अनिश्चितता का कारण बना रहा। डीएनए जांच से पहचान होने के बाद परिवार को उनके अंतिम अवशेष सौंपे गए थे।

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