बिहार विधान परिषद चुनाव: प्रचार के अंतिम दिन एनडीए ने झोंकी ताकत, सभी आठ सीटों पर जीत का दावा

पटना। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। बुधवार को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन है। शाम को चुनाव प्रचार थम जाएगा। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इस बीच, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने सभी आठ सीटों पर भारी मतों से जीत हासिल करने का दावा किया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राज्य में एनडीए के पक्ष में माहौल है और गठबंधन सभी सीटों पर जीत दर्ज करेगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी पूरे प्रदेश का दौरा किया है और चुनावी माहौल का आकलन किया है। विजय कुमार चौधरी ने कहा, “हम लोग भी घूमे हैं। पूरे प्रदेश का जो माहौल है, एनडीए के आठों उम्मीदवार भारी मतों से जीतेंगे।” उपमुख्यमंत्री के इस बयान को चुनाव के अंतिम चरण में एनडीए के मजबूत प्रदर्शन को लेकर गठबंधन के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। आठ सीटों पर हो रहे इस चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। प्रचार के अंतिम दिन उम्मीदवार और उनके समर्थक मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे हैं। वहीं, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए प्रत्याशी नवल किशोर यादव ने अपने चुनावी अभियान और मतदाताओं को लेकर अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी तैयारी मतदाता और शिक्षक खुद कर रहे हैं। उन्हें अपने मतदाताओं पर पूरा भरोसा है और उन्हें अलग से प्रचार करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती। नवल किशोर यादव ने कहा, “मेरी तैयारी मेरे मतदाता करते हैं, मेरे शिक्षक करते हैं। उन्होंने सारा इंतजाम पहले से कर रखा है, मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं। मैं क्षेत्र भी नहीं जाता हूं, मैं अपने दफ्तर में बैठता हूं और आप लोगों से मिलता हूं।” उन्होंने शिक्षक समुदाय को जागरूक और बौद्धिक रूप से सक्षम बताते हुए कहा कि शिक्षक अपने सम्मान, स्वाभिमान और शिक्षा के क्षेत्र में संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं सक्षम हैं। उनके मुताबिक, शिक्षकों को समझाने या उन्हें अपनी बात बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे अपने हितों और अधिकारों को लेकर जागरूक हैं। नवल किशोर यादव ने कहा कि शिक्षक अपने सम्मान और स्वाभिमान के लिए स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं। उन्होंने शिक्षकों को देश का सबसे बौद्धिक समुदाय बताते हुए कहा कि उन्हें किसी तरह की अतिरिक्त जानकारी देने या समझाने की आवश्यकता नहीं है।
समुद्र की गहराइयों में खोए बाबिल खान, स्कूबा डाइविंग में हासिल किया स्पेशलिटी डाइवर सर्टिफिकेशन

मुंबई। दिवंगत एक्टर इरफान खान के बेटे बाबिल खान को समुद्र से खास लगाव है। उन्हें स्कूबा डाइविंग के जरिए पानी के नीचे की दुनिया को करीब से जानना और नई चीजें सीखना पसंद है। हाल ही में बाबिल ने अपना स्पेशलिटी डाइवर सर्टिफिकेशन हासिल किया है। एक्टर का कहना है कि यह उनके लिए समुद्र की दुनिया को एक्सप्लोर करने और उसके बारे में सीखने के सफर का एक और कदम है। आईएएनएस से बातचीत में बाबिल ने स्कूबा डाइविंग के अपने अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ”स्कूबा डाइविंग मेरे लिए समुद्र से जुड़ने और उस दुनिया को करीब से अनुभव करने का एक खूबसूरत तरीका रहा है, जो हमें पानी की सतह के ऊपर से दिखाई नहीं देती। स्पेशलिटी डाइवर सर्टिफिकेशन हासिल करना मेरे उस सफर का एक और कदम है, जिसमें मैं लगातार नई चीजें एक्सप्लोर करना, सीखना और आगे बढ़ना चाहता हूं।” उन्होंने कहा, ”पानी के अंदर होना, समुद्री जीवों से घिरे रहना और समुद्र को उसके अपने माहौल में देखना आपको बहुत विनम्र बनाता है। यह एहसास दिलाता है कि अभी बहुत कुछ ऐसा है जिसे हमें जानना है और अपने आसपास की दुनिया के बारे में हमें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।” बाबिल ने कहा, ”मैं आगे भी समुद्र की गहराइयों में उतरना चाहता हूं, नई जगहों को एक्सप्लोर करना चाहता हूं और समुद्र में मौजूद चीजों को और करीब से अनुभव करना चाहता हूं। साथ ही, मुझे उम्मीद है कि इस सफर के दौरान हम सभी समुद्रों और उनमें रहने वाले जीवों को बचाने की जरूरत को लेकर थोड़े और जागरूक हो सकेंगे।” एक्टर की बात करें तो 27 साल के बाबिल ने फिल्मों में अपने करियर की शुरुआत कैमरा असिस्टेंट के तौर पर की थी। उन्होंने बॉलीवुड फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ में कैमरा असिस्टेंट के रूप में काम किया था। इसके बाद साल 2022 में उन्होंने अन्विता दत्त की साइकोलॉजिकल ड्रामा फिल्म ‘कला’ से एक्टिंग में डेब्यू किया। इस फिल्म में उनके साथ तृप्ति डिमरी नजर आई थीं। साल 2023 में बाबिल फिल्म ‘फ्राइडे नाइट प्लान’ में नजर आए, जिसमें उन्होंने जूही चावला के बेटे सिद्धार्थ मेनन का किरदार निभाया था। इसके बाद वह वेब सीरीज ‘द रेलवे मेन’ का हिस्सा बने। भोपाल गैस त्रासदी की पृष्ठभूमि पर बनी इस सीरीज में उनके साथ दिव्येंदु शर्मा, केके मेनन और आर. माधवन भी नजर आए थे। मई 2025 में बाबिल उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने अपना इंस्टाग्राम प्रोफाइल डिलीट कर दिया था।
अफगानिस्तान की बड़ी आबादी भुखमरी की कगार पर : संयुक्त राष्ट्र

काबुल। अफगानिस्तान में करीब 1.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, जिनमें से 34 लाख लोग भुखमरी के आपातकालीन (आईपीसी 4) स्तर पर हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने यह जानकारी दी है। स्थानीय मीडिया की बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों में हालात और बिगड़ने की आशंका है। यूएन ओसीएचए की प्रवक्ता ओल्गा चेरेव्को ने दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान दौरे के बाद यह बयान दिया। अफगानिस्तान की समाचार एजेंसी ‘खामा प्रेस’ के अनुसार, उन्होंने बताया कि बेरोजगारी, कम आय और जरूरी सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण लाखों परिवार अभी भी पर्याप्त भोजन नहीं खरीद पा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की यह चेतावनी अगले कुछ महीनों की विषम स्थिति को देखते हुए सामने आई है। सर्दियों के मौसम में लोगों को अक्सर रोजगार की तलाश और भोजन खरीदने में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ओल्गा चेरेव्को ने कहा कि वर्षों के संघर्ष, आर्थिक समस्याओं, सूखे और बार-बार आए संकटों ने अफगानिस्तान के लोगों की किसी भी नए झटके या संकट का सामना करने की क्षमता को कमजोर कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों की जान बचाने के लिए मानवीय सहायता जरूरी है, लेकिन यह सार्वजनिक सेवाओं, नौकरियों और आय के स्थायी स्रोतों की जगह नहीं ले सकती। चेरेव्को ने कृषि, ग्रामीण आजीविका, स्थानीय बाजारों, रोजगार, जल प्रणालियों और स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक निवेश करने तथा महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने का आह्वान किया। ‘खामा प्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सर्दियों के आने से पहले कदम उठाने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरतमंद परिवारों तक सहायता तब पहुंच जानी चाहिए, जब उनके पास बचे-खुचे संसाधन पूरी तरह खत्म न हुए हों। पिछले हफ्ते, खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने कहा था कि इस साल सर्दियों के मौसम में अफगानिस्तान की लगभग 40 प्रतिशत आबादी गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकती है। साथ ही, 2027 में गंभीर कुपोषण के मामलों में भी भारी वृद्धि होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की इन दोनों एजेंसियों ने ‘इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन’ (आईपीसी) के ताजा विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि नवंबर से अप्रैल के बीच (जब भोजन की कमी सबसे अधिक होती है), लगभग 1.92 करोड़ (19.2 मिलियन) लोग – यानी कुल आबादी का 38 प्रतिशत – गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करेंगे। पिछले साल इसी अवधि के लिए यह आंकड़ा 1.74 करोड़ (17.4 मिलियन) रहने का अनुमान था। इनमें से लगभग 50 लाख लोगों को आपातकालीन स्तर की भुखमरी (आईपीसी चरण 4) का सामना करना पड़ सकता है। यह संख्या अप्रैल-सितंबर 2026 के लिए अनुमानित आंकड़ों से दोगुनी है। बदख्शां, बदगीस, दायकुंडी, घोर, समंगन, सर-ए-पोल और गजनी के ग्रामीण इलाकों में हालात सबसे खराब होने की आशंका है। एजेंसियों के अनुसार, कुपोषण के मामलों में 2026 की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह संख्या 40 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इनमें से एक-चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा हैं। बचाव और इलाज की सुविधाएं अपर्याप्त होने के कारण महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा खतरे में हैं। यह संकट कई कारणों से पैदा हुआ है। इनमें इस साल ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी, सीमाओं पर पाबंदी, होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग में रुकावटें (जिससे जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ गई हैं), और मानवीय सहायता के लिए फंड की भारी कमी शामिल हैं। एजेंसियों ने बताया कि 2026 में अच्छी बारिश के कारण फसल उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन लगातार बेरोजगारी के चलते कई परिवार, जो अपना अनाज खुद नहीं उगाते, अब भी पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं।
विजयादशमी पर दिल्ली, बंगाल, त्रिपुरा में महिलाओं ने ‘सिंदूर खेला’ रस्म मनाई

नई दिल्ली। दिल्ली, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में महिलाओं ने बुधवार को विजयादशमी के अवसर पर पारंपरिक ‘सिंदूर खेला’ रस्म मनाई। यह रस्म दुर्गा पूजा के समापन का प्रतीक है। महिलाओं ने एक-दूसरे के माथे और गालों पर सिंदूर लगाया और देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की, साथ ही सभी के लिए उनका आशीर्वाद और सुरक्षा मांगी। दिल्ली में आरामबाग पूजा समिति के पंडाल में सिंदूर खेला बहुत उत्साह के साथ मनाया गया। चित्तरंजन पार्क में भी महिलाओं ने इस रस्म में हिस्सा लिया। यह जगह अपनी शानदार दुर्गा पूजा के लिए जानी जाती है। दिल्ली में इस उत्सव में शामिल एक महिला ने कहा कि हम सभी यहां रहने वाले बंगाली प्रवासी हैं और हम एक परिवार की तरह मिलकर मां दुर्गा की पूजा करते हैं। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में महिलाओं ने विजयादशमी के दिन मुदियाली क्लब में सिंदूर खेला मनाया। बीरभूम जिले में भी ऐसा ही उत्सव मनाया गया, जहां महिलाओं ने एक-दूसरे के गालों पर सिंदूर लगाया और अपने परिवारों तथा अपनों की भलाई और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। दक्षिण त्रिपुरा में दुर्गा पूजा पंडालों में महिलाओं ने सिंदूर खेला में हिस्सा लिया, जबकि मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन की तैयारियां चल रही थी। पुजारी ने विसर्जन की रस्में पूरी की और पारंपरिक ‘डाक डोले’ रस्म के तहत महिलाएं देवी के पवित्र कलश को पुजारी के घर तक ले गईं। ‘सिंदूर खेला’ जिसका अर्थ है सिंदूर से खेलना, बंगाली हिंदू समुदाय में दुर्गा पूजा से जुड़ी सबसे प्रमुख रस्मों में से एक है। यह उत्सव के आखिरी दिन, विजयादशमी को मनाया जाता है, जब भक्त मां दुर्गा को विदाई देते हैं। इस रस्म की शुरुआत में महिलाएं देवी को सिंदूर अर्पित करती हैं, उनके माथे और चरणों पर सिंदूर लगाती हैं और विदाई की प्रार्थनाओं में शामिल होती हैं। इसके बाद, वे एक-दूसरे के माथे और गालों पर सिंदूर लगाती हैं, मिठाइयां बांटती हैं और एक-दूसरे को सुख, समृद्धि और खुशहाली की शुभकामनाएं देती हैं। पारंपरिक रूप से यह रस्म विवाहित बंगाली हिंदू महिलाओं से जुड़ी है और इसका गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। हालांकि, अलग-अलग समुदायों में इसमें शामिल होने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, और कुछ आयोजक इसे और भी अधिक समावेशी बनाते हैं। यह रस्म इस मान्यता पर आधारित है कि दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा अपने मायके आती हैं और फिर वापस कैलाश पर्वत पर अपने पति भगवान शिव के पास लौट जाती हैं। देवी का स्वागत एक बेटी की तरह किया जाता है और उन्हें बहुत स्नेह के साथ विदा किया जाता है, जो इस त्योहार से जुड़ी पारिवारिक भावनाओं को दर्शाता है। इस प्रकार, सिंदूर खेला में भक्ति, सांस्कृतिक परंपराएं और एकजुटता की भावना का संगम देखने को मिलता है, जो दुर्गा पूजा के समापन को एक भावपूर्ण रूप देता है। विजयादशमी के साथ ही ‘बिजोया’ की शुभकामनाओं का दौर भी शुरू हो जाता है, जिसमें लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं और आने वाले वर्ष में सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
आयुष्मान भारत योजना से कोडरमा में हजारों गरीबों को मिल रहा मुफ्त इलाज, आर्थिक बोझ से राहत

कोडरमा। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना झारखंड में कोडरमा जिले के हजारों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। इससे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिवारों को इलाज पर होने वाले खर्च की चिंता से राहत मिल रही है। कोडरमा जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़ी संख्या में लोग स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। पहले आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों के लिए गंभीर बीमारियों का इलाज कराना मुश्किल हो जाता था। इलाज के लिए पैसे जुटाने के चक्कर में लोगों को कर्ज तक लेना पड़ता था। हालांकि अब पात्र लाभार्थी योजना के माध्यम से निर्धारित सीमा और नियमों के तहत इलाज करा सकते हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी मरीज इस योजना का लाभ ले रहे हैं। गंभीर बीमारियों के इलाज और ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के परिजनों का कहना है कि योजना से उनके परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है। इलाज के बाद मरीजों की सेहत में सुधार होने से परिवारों को भी राहत मिल रही है। योजना का लाभ लेने के लिए आयुष्मान कार्ड महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से पात्र लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार इलाज करा सकते हैं। कोडरमा में भी कई जरूरतमंद लोग आयुष्मान कार्ड के जरिए चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। योजना के लाभार्थियों का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके लिए महंगे इलाज का खर्च उठाना आसान नहीं था। ऐसे में आयुष्मान भारत योजना उनके लिए मददगार साबित हो रही है। योजना के एक लाभार्थी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके पेट में तेज दर्द होने पर वे जांच कराने अस्पताल पहुंचे। जांच के बाद पता चला कि उन्हें पित्त की पथरी है। जब उन्होंने इलाज के खर्च के बारे में जानकारी ली, तो उन्हें बताया गया कि इसमें लगभग 30 से 40 हजार रुपये खर्च हो सकते हैं। एक अन्य लाभार्थी ने बताया कि शुरुआत में उनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। उनको पता चला कि कार्ड होने पर इलाज मुफ्त हो सकता है। इसके बाद हम लोगों ने आयुष्मान कार्ड बनवाया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब उन्हें इलाज के लिए पैसों का इंतजाम करने की चिंता नहीं है। आयुष्मान भारत योजना से मिली इस राहत ने उनके परिवार की आर्थिक परेशानी कम कर दी है। योजना का लाभ निर्धारित पात्रता, उपचार पैकेज और नियमों के अनुसार मिलता है, जिससे हम लोगों को काफी फायदा पहुंच रहा है।
गृह मंत्री अमित शाह की तुलना बिश्नोई से करना पूरी तरह अनुचित : रामदास आठवले

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत के बयान पर केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। दरअसल, संजय राउत ने कहा था कि असली बिश्नोई तो अमित शाह हैं। इस पर आठवले ने इसे पूरी तरह अनुचित बताया है। आईएएनएस से बात करते हुए रामदास अठावले ने कहा, “मेरा मानना है कि ऐसे आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है। अमित शाह देश के गृह मंत्री हैं और भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। उनकी तुलना बिश्नोई से करना बिल्कुल गलत है।” उन्होंने कहा कि संजय राउत हमेशा ऐसे ही बयान देते रहते हैं। वे कहते रहते हैं कि ‘जब हमारी सरकार आएगी’। उन्होंने 2024 में भी यही कहा था और आज भी वही कह रहे हैं। रामदास आठवले ने कहा, “अगर आप अपनी सरकार लाना चाहते हैं तो आपको कोशिश करने का पूरा हक है लेकिन सिर्फ धरना-प्रदर्शन और आंदोलन से सरकार नहीं बदली जा सकती। उद्धव ठाकरे ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के आंदोलन का समर्थन किया है, ठीक है अगर वे उनके आंदोलन का समर्थन करना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “आंदोलन से सत्ता परिवर्तन नहीं होता है क्योंकि यह बांग्लादेश नहीं भारत है। यहां केवल चुनाव से ही सत्ता परिवर्तन होता है, आंदोलन से नहीं।” वहीं, महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाओं पर भी रामदास आठवले ने बयान दिया। शिवसेना का कहना है कि पार्टी का विस्तार किया जाएगा और बहुत जल्द एकनाथ शिंदे फिर से सीएम बनेंगे। इस पर आठवले ने कहा कि महायुति में कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा, “अच्छी बात है, हमारे महायुति गठबंधन में कोई विवाद नहीं है। आज देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हैं क्योंकि भाजपा ने 132 सीटें जीती हैं जबकि एकनाथ शिंदे की पार्टी ने 57 सीटें जीती हैं।” रामदास आठवले ने एकनाथ शिंदे की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ढाई साल तक मुख्यमंत्री के रूप में बहुत अच्छा काम किया है। वे एक अच्छे नेता हैं जो ऑटो-रिक्शा चलाने से आगे उठकर शिवसेना के जरिए मुख्यमंत्री बने। भाजपा ने उन्हें ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद दिया था। उन्होंने कहा, “अगर उनकी पार्टी के नेता चाहते हैं कि शिंदे फिर से मुख्यमंत्री बनें, तो उनका ऐसा कहना स्वाभाविक है। यह अच्छी बात है कि वे भाजपा से ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद कर रहे हैं ताकि एकनाथ शिंदे फिर से मुख्यमंत्री बन सकें।
नए उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं: मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस पर बलिदान हुए पुलिस कर्मियों को नमन किया। उन्होंने नए उत्तर प्रदेश में आए बदलाव की तस्वीर भी ‘एक्स’ पर साझा करते हुए कहा कि नए उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई भी नहीं है। मुख्यमंत्री ने लिखा कि आज पुलिस स्मृति दिवस पर मैं उन सभी वीर पुलिस कार्मिकों को कृतज्ञतापूर्वक नमन करता हूं, जिन्होंने देश की सुरक्षा, समाज की शांति और नागरिकों के जीवन की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। कर्तव्य की वेदी पर अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर पुलिस कार्मिकों का शौर्य, साहस और समर्पण हम सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के कृत्यों पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में माफिया राज था। उस समय अराजक तत्वों के हौसले इतने बुलंद थे कि मथुरा के जवाहर बाग में कानून की रक्षा करते हुए वीर पुलिस अधिकारियों को प्राणों का बलिदान देना पड़ा। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि नए उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। उत्तर प्रदेश उपद्रव से उत्सव प्रदेश बना है। पुलिस को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की स्वतंत्रता मिली है। 2.26 लाख से अधिक पुलिस भर्तियों, प्रशिक्षण क्षमता में 10 गुना वृद्धि, 7 बड़े शहरों में कमिश्नरेट प्रणाली, प्रत्येक जनपद में साइबर थाने तथा प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना से पुलिस व्यवस्था अधिक सक्षम, आधुनिक और जवाबदेह बनी है। गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 88,973 अपराधियों पर कार्रवाई और ₹15 हजार करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति की जब्ती अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि हमारा संकल्प है कि वीर पुलिस कार्मिकों के बलिदान और उनके परिवारों के त्याग को सदैव स्मरण रखते हुए हम उत्तर प्रदेश को सुरक्षित, न्यायपूर्ण और भयमुक्त बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।
दिल्ली में राष्ट्रपति से मिलेंगे सीएम देवेंद्र फडणवीस, सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वजारोहण समारोह के लिए करेंगे आमंत्रित

मुंबई। महाराष्ट्र के नासिक में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियां जोरों पर हैं। इसी कड़ी में बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दिल्ली में रहेंगे, जहां वे दिल्ली में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री फडणवीस उन्हें ध्वजारोहण समारोह के लिए आमंत्रित करेंगे। सिंहस्थ महाकुंभ के शुभारंभ की तैयारियों के तहत 31 अक्टूबर को ध्वजारोहण समारोह आयोजित होना है। बताया गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 31 अक्टूबर को होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के ध्वजारोहण समारोह के लिए आमंत्रित करेंगे। इस दौरान, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के भी मौजूद रहने की उम्मीद है। 31 अक्टूबर को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ का महत्वपूर्ण चरण होगा। सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वजारोहण के लिए दो प्रमुख स्थान निर्धारित किए गए हैं। नासिक में रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से जुड़े क्षेत्र में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। दोनों स्थानों पर एक ही समय में 31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर ध्वजारोहण किया जाएगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। तैयारियों के तहत सितंबर में कुंभ मेला प्रशासन और कुंभ मेला प्राधिकरण की महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। इसकी अध्यक्षता कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने की। बैठक में साधु-संतों, महंतों, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। मंत्री गिरीश महाजन ने बताया था कि एक स्थान पर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से ध्वजारोहण होने की योजना है, जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया जाएगा। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के कई नेता भी उपस्थित रहेंगे। बैठक में भक्तों की भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, पार्किंग, आपातकालीन व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय जैसे विषयों पर अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया गया था।
अमित शाह भाजपा के चुनाव मंत्री बन गए हैं, गृहमंत्री पद से दें इस्तीफा : कांग्रेस

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के यूपी दौरे से लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि अमित शाह अब देश के गृह मंत्री नहीं रहे, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के चुनाव मंत्री या प्रचार मंत्री बनकर रह गए हैं। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आज देश की आंतरिक सुरक्षा गंभीर खतरे में है। पूरा मणिपुर जल रहा है, पंजाब नशे की चपेट में है और गुजरात से ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। हजारों करोड़ की ड्रग पकड़ी जा रही है, लेकिन लाखों करोड़ की ड्रग देश भर में सप्लाई हो रही है। ऐसे हालात में भी गृह मंत्री को सिर्फ चुनावों की चिंता है। बेहतर होगा कि अमित शाह गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दें और भाजपा के चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालें। राजपूत ने कहा कि गृह मंत्री का काम देश की सुरक्षा देखना है, न कि चुनावी रैलियां करना। जब देश के कई राज्य संकट से गुजर रहे हैं, तब उनका चुनावी अभियान में जुट जाना उनकी प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। समाजवादी पार्टी प्रमुख द्वारा यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर किए गए बड़े ऐलान, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे हर मुद्दे पर जमीन पर उतरकर लड़ाई लड़ेंगे और जन-मन के मेनिफेस्टो को अगले महीने संविधान दिवस पर जारी करेंगे, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि सपा प्रमुख को यह कहने का पूरा हक है। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन पूरी ताकत के साथ देश में राहुल गांधी के नेतृत्व में और उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में गांव-गांव, नगर-नगर और डगर-डगर जा रहा है। अब यह लड़ाई और तेज होगी। राजपूत ने कहा कि यह लड़ाई वोट चोरों के खिलाफ होगी, संविधान चोरों के खिलाफ तेज होगी। जिन लोगों ने तिरंगा जलाया है, उनके खिलाफ भी यह लड़ाई तेज होगी और जिन लोगों ने युवाओं के रोजगार छीने हैं, उनके खिलाफ भी यह लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी एआई का दुरुपयोग करके दुनिया भर में विपक्षी नेताओं, चाहे वे राहुल गांधी हों या अखिलेश यादव, को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि असली रामराज्य हमेशा कांग्रेस के शासन में रहा है। रामराज्य की परिकल्पना वही है जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी भाई-भाई की भावना से रहते हैं। सांप्रदायिकता में रामराज्य नहीं, बल्कि रावण राज्य होता है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने रामलीला में कांग्रेस का पुतला जलाने को हिंदू आस्था को आहत करने जैसा बताया था, सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि किसी का भी पुतला जलाना किसी भी रूप में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पुतला जलाने और निम्न स्तर के विरोध की शुरुआत आम आदमी पार्टी ने ही की थी। आज की तारीख में भाजपा वाले राहुल गांधी का पुतला जला रहे हैं। उन्होंने कहा कि उससे भाजपा की सोच साफ दिखती है। इससे पता चलता है कि भाजपा वैचारिक रूप से कितनी खराब हो चुकी है। सीजेपी नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को लेकर राजपूत ने कहा कि आज देश में तिरंगा लहराने पर लोगों को देशद्रोही बताया जाता है और जेल में बंद किया जाता है। तिरंगा लहराने पर जेल में बंद करना सिर्फ अंग्रेजों के शासन में होता था, लेकिन अब अंग्रेजों के मानस पुत्रों के शासन में भी तिरंगा लहराने पर जेल में डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह तिरंगे का अपमान करने वाले चाहे भाजपा वाले हों, संघ वाले हों, विश्व हिंदू परिषद वाले हों या दिल्ली पुलिस, सभी को मुंह की खानी पड़ेगी। तिरंगा यात्रियों को अंग्रेजों के समय में जेल जाने से डर नहीं लगता था, तो अब ये जेलें क्या डराएंगी।
एग्रीवोल्टाइक्स से किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण समृद्धि को मिलेगा नया आधार: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान के एक लेख को शेयर करते हुए एग्रीवोल्टाइक्स की संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक कृषि गतिविधियों के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध करा सकता है, ऊर्जा लागत कम कर सकता है और फसल उत्पादकता को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने इसे ग्रामीण विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया। गौरतलब है कि भारत 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में सातवें एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है, जिसकी थीम ‘पावरिंग द ग्लोबल साउथ’ रखी गई है। लेख में प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स, जिसे एग्रीपीवी भी कहा जाता है, किसानों को एक ही भूमि पर खेती जारी रखते हुए स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का अवसर देता है। इससे किसानों की आय के स्रोत बढ़ सकते हैं और कृषि क्षेत्र में अनिश्चितताओं के बीच उनकी आर्थिक मजबूती बढ़ सकती है। सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री-कुसुम योजना के अगले चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष स्थान दिए जाने की तैयारी है। इससे कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन को और गति मिलेगी और सिंचाई के सौरकरण के प्रयासों को मजबूत आधार मिलेगा। मंत्रियों ने अपने लेख में उल्लेख किया कि भारत के लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत किसान हैं। एग्रीवोल्टाइक्स उन्हें कृषि उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा, दोनों से आय अर्जित करने का अवसर दे सकता है। उनके अनुसार, यह मॉडल बिजली बिक्री से अतिरिक्त आय उपलब्ध कराने के साथ-साथ डीजल और खरीदी गई बिजली पर निर्भरता कम कर सकता है। इसके अलावा यह सूक्ष्म जलवायु (माइक्रोक्लाइमेट) तैयार करने में मदद करता है, जिससे फसलों को अत्यधिक गर्मी, सूखे, तीव्र सौर विकिरण और ओलावृष्टि जैसी स्थितियों से सुरक्षा मिल सकती है। लेख में कहा गया है कि एग्रीवोल्टाइक्स के व्यापक उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सौर अवसंरचना की स्थापना, रखरखाव और उससे जुड़ी कृषि सेवाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एग्रीवोल्टाइक्स के सफल क्रियान्वयन के लिए उपयुक्त फसलों का चयन, पर्याप्त सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और ऐसे डिजाइन आवश्यक होंगे जो खेती के लिए पर्याप्त सूर्य प्रकाश सुनिश्चित करें। मंत्रियों ने कहा कि कृषि और ऊर्जा विभागों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों तथा स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय इस मॉडल को सफल बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।