लेक्सिस नेक्सिस ने मनाई मद्रास लॉ जर्नल के 135 वर्ष पूरे होने की ऐतिहासिक उपलब्धि, भारत की न्यायिक विरासत को किया सम्मानित

चेन्नई। लेक्सिसनेक्सिस ने आज मद्रास लॉ जर्नल (एमएलजे) की स्थापना के 135 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मद्रास उच्च न्यायालय, चेन्नई के मिनी ऑडिटोरियम में एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर भारत की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक विधिक पत्रिकाओं में से एक मद्रास लॉ जर्नल की समृद्ध विरासत, न्यायिक उत्कृष्टता तथा भारतीय विधि व्यवस्था के विकास में उसके अतुलनीय योगदान को सम्मानित किया गया।इस समारोह में भारत के सर्वोच्च न्यायालय एवं मद्रास उच्च न्यायालय के वर्तमान एवं पूर्व न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, विधि शिक्षाविदों तथा देशभर से आए विधि समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्यों ने भाग लेकर मद्रास लॉ जर्नल की गौरवशाली यात्रा को स्मरण किया।वर्ष 1891 में स्थापित मद्रास लॉ जर्नल पिछले 135 वर्षों से न्यायपालिका, अधिवक्ताओं, विधि शिक्षण संस्थानों और संपूर्ण विधिक समुदाय के लिए एक विश्वसनीय संदर्भ स्रोत रहा है। ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों के प्रमाणिक प्रकाशन तथा गहन विधिक विश्लेषण के माध्यम से इस पत्रिका ने भारतीय न्यायशास्त्र के विकास, न्यायिक सोच को समृद्ध करने तथा विधिक अनुसंधान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।मद्रास उच्च न्यायालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस समारोह की थीम न्याय के तराजू, लेखनी (क्विल) और मद्रास लॉ जर्नल के प्रथम प्रकाशित संस्करण से प्रेरित थी। यह आयोजन केवल पत्रिका की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय विधिक चिंतन को दिशा देने की उसकी सतत भूमिका का भी प्रतीक बना।इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति एम.एम. सुन्दरेश, सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति आर. महादेवन, मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति एम. सुंदर, मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति पी.एन. प्रकाश सहित अनेक वर्तमान एवं पूर्व न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।यद्यपि मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति एस.ए. धर्माधिकारी व्यक्तिगत रूप से समारोह में उपस्थित नहीं हो सके, किंतु उनका विशेष संदेश कार्यक्रम के दौरान पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने मद्रास लॉ जर्नल की 135 वर्षों की गौरवशाली विरासत तथा न्याय व्यवस्था और विधिक पेशे में उसके अमूल्य योगदान की सराहना की।कार्यक्रम के दौरान मद्रास लॉ जर्नल के इतिहास और उसके सतत महत्व पर विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में विधिक रिपोर्टिंग की बदलती भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई। समारोह में 135वीं वर्षगांठ स्मारक संस्करण का लोकार्पण किया गया तथा मद्रास लॉ जर्नल की ऐतिहासिक यात्रा को समर्पित एक विशेष स्मृति वीडियो का भी प्रथम प्रदर्शन किया गया।इस अवसर पर लेक्सिसनेक्सिस की दक्षिण-पूर्व एशिया एवं भारत की प्रबंध निदेशक गायत्री रमन ने कहा,“मद्रास लॉ जर्नल पिछले 135 वर्षों से न्यायपालिका और अधिवक्ताओं का विश्वसनीय साथी रहा है। इसने केवल भारतीय न्यायशास्त्र के विकास का दस्तावेजीकरण ही नहीं किया, बल्कि हमारे न्याय तंत्र की मूल भावना को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। लेक्सिसनेक्सिस के लिए इस गौरवशाली विरासत का संरक्षक होना सम्मान की बात है। इस ऐतिहासिक अवसर पर हम भरोसे, प्रमाणिकता और उत्कृष्टता की इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आधुनिक एआई एवं प्रौद्योगिकी की शक्ति को हमारी विधिक विशेषज्ञता के साथ जोड़ते हुए हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आज और आने वाली पीढ़ियों के विधिक पेशेवरों को विश्वसनीय एवं प्रमाणिक कानूनी जानकारी निरंतर उपलब्ध होती रहे।इस समारोह के दौरान लेक्सिसनेक्सिस ने “एम्पावर (Empower)” नामक एक नई विधिक साक्षरता श्रृंखला का भी शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों के बीच उनके कानूनी अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर कानून के शासन (Rule of Law) को और अधिक सशक्त बनाना है।आज जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता विधिक क्षेत्र को नई दिशा दे रही है, तब इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि जिम्मेदार नवाचार की मजबूत नींव हमेशा प्रमाणिक और विश्वसनीय विधिक सामग्री ही होती है। लेक्सिसनेक्सिस उन्नत एआई तकनीकों को विश्वसनीय कानूनी जानकारी के साथ जोड़ते हुए विधिक पेशेवरों को अधिक प्रभावी शोध, बेहतर निर्णय लेने और अपने ग्राहकों के लिए उत्कृष्ट परिणाम सुनिश्चित करने में निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है।एक सदी से भी अधिक समय से मद्रास लॉ जर्नल भारत के ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों का दस्तावेजीकरण करता रहा है और भारतीय विधिक व्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। आज लेक्सिसनेक्सिस के संरक्षण में यह प्रतिष्ठित पत्रिका अपनी समृद्ध विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विधिक पेशेवरों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित हो रही है।

 

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