महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार पुस्तक का लोकार्पण

नई दिल्ली ।अधिवक्ता, शोधकर्ता एवं लेखक डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना द्वारा रचित ” महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार ” पुस्तक का भव्य लोकार्पण नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन स्वर संसार वेलफेयर एंड कल्चर सोसायटी, नई दिल्ली द्वारा सोशल ट्रांसफॉर्मेशन फाउंडेशन, लखनऊ के सहयोग से किया गया।पुस्तक का लॉन्च मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त)-सैयद अता हसनैन- बिहार के माननीय राज्यपाल, द्वारा किया जाएगा तथा इसका अनावरण भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं नई दिल्ली स्थित NCLAT के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण, जो वैश्विक पुस्तक विमोचन एवं महाकुंभ अमृत सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि हैं, द्वारा किया जाएगा। इस गरिमामय अवसर पर पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह, जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) के प्रोफेसर डॉ. शुभ्रांशु सिंह, प्रख्यात इतिहासकार डॉ. राजीव श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल, जिन्होंने इस पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद किया है, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त आध्यात्मिक गुरु अशोक महाराज (जम्मू महाराज) तथा बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएँगे।इस अवसर पर बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा: “मुझे ‘महाकुंभ-2025’ पर आधारित इस शुभ पुस्तक का लोकार्पण करके अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह पुस्तक उत्सव के दौरान प्राप्त सफलताओं और अनुभवों का सजीव वर्णन करती है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक आयोजन था, जहाँ 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त किया। सरकार द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और सुदृढ़ सुरक्षा प्रबंधन ने इस आयोजन को अभूतपूर्व सफलता दिलाई। मैं डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना जी को इस पुस्तक के लेखन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। उन्होंने महाकुंभ-2025 की कहानी को अत्यंत रोचक एवं प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे लोग इस महान आयोजन को और गहराई से समझ सकेंगे। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक भविष्य में महाकुंभ के प्रबंधन और आयोजन से जुड़े संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।इस भव्य लोकार्पण समारोह में विधि, शिक्षा, पत्रकारिता, अध्यात्म, साहित्य तथा सार्वजनिक जीवन से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की और उन्होंने ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 का दस्तावेजीकरण करने वाली इस महत्वपूर्ण कृति के प्रकाशन का उत्सवपूर्वक स्वागत किया।पुस्तक के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना ने कहा, “‘ महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार’ ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 का एक वस्तुनिष्ठ, संतुलित तथा व्यापक शोध पर आधारित प्रामाणिक वृत्तांत प्रस्तुत करती है।” यह पुस्तक आठ खंडों और अठारह अध्यायों में विभाजित है। इसमें महाकुंभ के प्रत्येक प्रमुख पक्ष का विस्तृत एवं प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया गया है—सूक्ष्म योजना एवं सफल आयोजन से लेकर संतों, अखाड़ों और कल्पवासियों की परंपराओं तक। साथ ही, यह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागम के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को भी प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है।कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘महाकुंभ अमृत सम्मान–2025’ का अलंकरण होगा, जिसके अंतर्गत समाज के प्रति अपने उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।यह पुस्तक वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ का मात्र एक विवरण नहीं है, बल्कि मानव इतिहास के सबसे विशाल समागमों में से एक का संतुलित, तथ्यपरक एवं गहन शोध पर आधारित प्रामाणिक वृत्तांत प्रस्तुत करती है। इतिहास, पौराणिक परंपराओं, अध्यात्म, संस्कृति और समकालीन यथार्थ का समन्वय करते हुए डॉ. सक्सेना ने इस पुस्तक में महाकुंभ के शाश्वत महत्व का गहन विवेचन किया है, साथ ही इसके अभूतपूर्व विराट स्वरूप और उत्कृष्ट आयोजन का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण भी प्रस्तुत किया है।आठ खंडों और अठारह अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक प्रयागराज के धार्मिक महत्व, कुंभ परंपरा के विकास, संतों, अखाड़ों एवं कल्पवासियों की भूमिका तथा महाकुंभ-2025 के आयोजन हेतु की गई व्यापक तैयारियों का विस्तृत एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक भीड़ प्रबंधन, परिवहन व्यवस्था, डिजिटल प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय संरक्षण, सुरक्षा प्रबंध, महिला सशक्तिकरण, क्षेत्रीय विकास तथा इस आयोजन के व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष प्रकाश डालती है। यह कृति अनुभवजन्य आँकड़ों, प्रत्यक्ष अवलोकनों तथा प्रामाणिक संदर्भों से समृद्ध है, जो पाठकों को तथ्यपरक गहराई के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और अनुभवों की भी सशक्त एवं सार्थक समझ प्रदान करती है।इस पुस्तक की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि इसमें आध्यात्मिक परंपराओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ संतुलित रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि यह कृति श्रद्धालुओं, विद्वानों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं तथा सामान्य पाठकों—सभी के लिए समान रूप से उपयोगी और महत्त्वपूर्ण सिद्ध होती है। महत्वपूर्ण सरकारी अधिसूचनाओं, विधिक संदर्भों तथा महाकुंभ से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों को समाहित करने वाले एक विशेष परिशिष्ट का समावेश इस पुस्तक के प्रलेखीय एवं संदर्भात्मक महत्व को और अधिक समृद्ध एवं मूल्यवान बनाता है।अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति शैली, वस्तुनिष्ठ विश्लेषण और गहन शोध के आधार पर ” महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार” भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत पर उपलब्ध साहित्य में एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान योगदान के रूप में उभरकर सामने आती है। यह पुस्तक न केवल ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 की अमूल्य स्मृतियों को संरक्षित करती है, बल्कि इस अद्वितीय आयोजन के महत्व को समझने की इच्छा रखने वाली भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थायी, प्रामाणिक और महत्वपूर्ण संदर्भ-ग्रंथ के रूप में भी स्थापित होती है।

दिल्ली: जीटीबी एन्क्लेव पुलिस ने सुलझाया चोरी का मामला, तीन शातिर बदमाश गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की शाहदरा जिला पुलिस ने एक घर में हुई चोरी के मामले का खुलासा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। जीटीबी एन्क्लेव थाना पुलिस ने महज कुछ ही दिनों में इस वारदात का पर्दाफाश कर तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए सोने की दो अंगूठियां, एक सोने का मंगलसूत्र और एक सोने का लॉकेट भी बरामद किया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर अन्य मामलों में उनकी संलिप्तता की भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, यह मामला 19 जुलाई 2026 का है। अमित कुमार नामक व्यक्ति ने ई-एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि रात के समय उनकी मां घर की दूसरी मंजिल पर सो रही थीं। इसी दौरान अज्ञात चोर घर में घुस आए और ग्राउंड फ्लोर पर रखे सोने के आभूषणों समेत अन्य कीमती सामान चोरी कर फरार हो गए। चोरी की जानकारी मिलने के बाद थाना जीटीबी एन्क्लेव में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहदरा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के निर्देशन तथा एसीपी और थाना प्रभारी जीटीबी एन्क्लेव की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम में हेड कांस्टेबल सचिन और कांस्टेबल अभिषेक को शामिल किया गया। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके अलावा, संभावित भागने के रास्तों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग भी जांची गई। सीसीटीवी फुटेज से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और तकनीकी साक्ष्यों को जुटाया। जांच के दौरान संदिग्धों की पहचान की गई। पुलिस ने अपने रिकॉर्ड से उनके पुराने आपराधिक विवरण और तस्वीरें निकालीं, जिनका मिलान सीसीटीवी फुटेज से किया गया। इससे यह पुष्टि हो गई कि वारदात को अंजाम देने वाले यही आरोपी थे। लगातार निगरानी और पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 35 वर्षीय मनोज उर्फ जीतू उर्फ दांतला निवासी नंद नगरी, 25 वर्षीय आकिब उर्फ लाले निवासी राहुल गार्डन, लोनी (उत्तर प्रदेश) और 35 वर्षीय महेंद्र मिश्रा उर्फ बिहारी निवासी भलस्वा डेयरी, दिल्ली के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए दो सोने की अंगूठियां, एक सोने का मंगलसूत्र और एक सोने का लॉकेट बरामद किया, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अपने चोरी हुए सामान के रूप में पहचान लिया। बरामद जेवरों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया है। पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने इस चोरी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने जीटीबी एन्क्लेव थाना क्षेत्र में चोरी और सेंधमारी की दो अन्य घटनाओं को भी अंजाम दिया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि तीनों आरोपी आदतन अपराधी हैं और पहले भी कई आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं। फिलहाल वे जमानत पर बाहर थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार, मामले की आगे जांच जारी है। शेष चोरी हुए सामान की बरामदगी, वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने और आरोपियों की अन्य चोरी व सेंधमारी के मामलों में भूमिका की भी जांच की जा रही है।

लेक्सिस नेक्सिस ने मनाई मद्रास लॉ जर्नल के 135 वर्ष पूरे होने की ऐतिहासिक उपलब्धि, भारत की न्यायिक विरासत को किया सम्मानित

चेन्नई। लेक्सिसनेक्सिस ने आज मद्रास लॉ जर्नल (एमएलजे) की स्थापना के 135 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मद्रास उच्च न्यायालय, चेन्नई के मिनी ऑडिटोरियम में एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर भारत की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक विधिक पत्रिकाओं में से एक मद्रास लॉ जर्नल की समृद्ध विरासत, न्यायिक उत्कृष्टता तथा भारतीय विधि व्यवस्था के विकास में उसके अतुलनीय योगदान को सम्मानित किया गया।इस समारोह में भारत के सर्वोच्च न्यायालय एवं मद्रास उच्च न्यायालय के वर्तमान एवं पूर्व न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, विधि शिक्षाविदों तथा देशभर से आए विधि समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्यों ने भाग लेकर मद्रास लॉ जर्नल की गौरवशाली यात्रा को स्मरण किया।वर्ष 1891 में स्थापित मद्रास लॉ जर्नल पिछले 135 वर्षों से न्यायपालिका, अधिवक्ताओं, विधि शिक्षण संस्थानों और संपूर्ण विधिक समुदाय के लिए एक विश्वसनीय संदर्भ स्रोत रहा है। ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों के प्रमाणिक प्रकाशन तथा गहन विधिक विश्लेषण के माध्यम से इस पत्रिका ने भारतीय न्यायशास्त्र के विकास, न्यायिक सोच को समृद्ध करने तथा विधिक अनुसंधान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।मद्रास उच्च न्यायालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस समारोह की थीम न्याय के तराजू, लेखनी (क्विल) और मद्रास लॉ जर्नल के प्रथम प्रकाशित संस्करण से प्रेरित थी। यह आयोजन केवल पत्रिका की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय विधिक चिंतन को दिशा देने की उसकी सतत भूमिका का भी प्रतीक बना।इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति एम.एम. सुन्दरेश, सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति आर. महादेवन, मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति एम. सुंदर, मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति पी.एन. प्रकाश सहित अनेक वर्तमान एवं पूर्व न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।यद्यपि मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति एस.ए. धर्माधिकारी व्यक्तिगत रूप से समारोह में उपस्थित नहीं हो सके, किंतु उनका विशेष संदेश कार्यक्रम के दौरान पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने मद्रास लॉ जर्नल की 135 वर्षों की गौरवशाली विरासत तथा न्याय व्यवस्था और विधिक पेशे में उसके अमूल्य योगदान की सराहना की।कार्यक्रम के दौरान मद्रास लॉ जर्नल के इतिहास और उसके सतत महत्व पर विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में विधिक रिपोर्टिंग की बदलती भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई। समारोह में 135वीं वर्षगांठ स्मारक संस्करण का लोकार्पण किया गया तथा मद्रास लॉ जर्नल की ऐतिहासिक यात्रा को समर्पित एक विशेष स्मृति वीडियो का भी प्रथम प्रदर्शन किया गया।इस अवसर पर लेक्सिसनेक्सिस की दक्षिण-पूर्व एशिया एवं भारत की प्रबंध निदेशक गायत्री रमन ने कहा,“मद्रास लॉ जर्नल पिछले 135 वर्षों से न्यायपालिका और अधिवक्ताओं का विश्वसनीय साथी रहा है। इसने केवल भारतीय न्यायशास्त्र के विकास का दस्तावेजीकरण ही नहीं किया, बल्कि हमारे न्याय तंत्र की मूल भावना को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। लेक्सिसनेक्सिस के लिए इस गौरवशाली विरासत का संरक्षक होना सम्मान की बात है। इस ऐतिहासिक अवसर पर हम भरोसे, प्रमाणिकता और उत्कृष्टता की इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आधुनिक एआई एवं प्रौद्योगिकी की शक्ति को हमारी विधिक विशेषज्ञता के साथ जोड़ते हुए हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आज और आने वाली पीढ़ियों के विधिक पेशेवरों को विश्वसनीय एवं प्रमाणिक कानूनी जानकारी निरंतर उपलब्ध होती रहे।इस समारोह के दौरान लेक्सिसनेक्सिस ने “एम्पावर (Empower)” नामक एक नई विधिक साक्षरता श्रृंखला का भी शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों के बीच उनके कानूनी अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर कानून के शासन (Rule of Law) को और अधिक सशक्त बनाना है।आज जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता विधिक क्षेत्र को नई दिशा दे रही है, तब इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि जिम्मेदार नवाचार की मजबूत नींव हमेशा प्रमाणिक और विश्वसनीय विधिक सामग्री ही होती है। लेक्सिसनेक्सिस उन्नत एआई तकनीकों को विश्वसनीय कानूनी जानकारी के साथ जोड़ते हुए विधिक पेशेवरों को अधिक प्रभावी शोध, बेहतर निर्णय लेने और अपने ग्राहकों के लिए उत्कृष्ट परिणाम सुनिश्चित करने में निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है।एक सदी से भी अधिक समय से मद्रास लॉ जर्नल भारत के ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों का दस्तावेजीकरण करता रहा है और भारतीय विधिक व्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। आज लेक्सिसनेक्सिस के संरक्षण में यह प्रतिष्ठित पत्रिका अपनी समृद्ध विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विधिक पेशेवरों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित हो रही है।  

नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति ने दिल्ली के सहकारी क्षेत्र के पुनरोद्धार हेतु सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की

नई दिल्ली।नाबार्ड के नेतृत्व में गठित दिल्ली की अल्पकालिक सहकारी ऋण संस्थाओं (Short Term Cooperative Credit Institutions) पर उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की बैठक 31 जुलाई 2026 को आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता श्री पांडुरंग के. पोले, आईएएस, सचिव (सहकारिता), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) ने की। बैठक में सहकारी संस्थाओं के प्रदर्शन की समीक्षा की गई तथा दिल्ली के सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़, प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।बैठक में नवीन कुमार राय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय, कृष्ण कुमार सिंह, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (आरसीएस), जीएनसीटीडी, अशोक कुमार, महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) तथा राजीव कुमार कादयान, कार्यवाहक प्रबंध निदेशक, दिल्ली राज्य सहकारी बैंक (दिल्ली एसटीसीबी) सहित कांगड़ा कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड एवं जैन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रतिनिधियों तथा आरबीआई, आरसीएस, दिल्ली एसटीसीबी, नैबकॉन्स, नाबार्ड एवं अन्य हितधारक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।समिति ने दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के प्रदर्शन, नियामकीय अनुपालन, प्रौद्योगिकी पहलों तथा सुशासन संबंधी पहलुओं की समीक्षा की। चर्चा के दौरान अध्यक्ष ने बैंक के प्रमुख वित्तीय एवं व्यावसायिक मानकों में लंबे समय से बने हुए ठहराव पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि वर्तमान प्रवृत्तियों के बने रहने से संस्था की दीर्घकालिक प्रासंगिकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “यथास्थिति का दृष्टिकोण” अब व्यवहार्य नहीं है तथा व्यवसाय विस्तार, ग्राहक आधार वृद्धि, नवाचार, डिजिटल रूपांतरण और बेहतर ग्राहक सेवा पर केंद्रित परिवर्तनकारी कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।बैठक का एक प्रमुख निर्णय दिल्ली के सहकारी क्षेत्र का व्यापक निदानात्मक अध्ययन (डायग्नोस्टिक स्टडी) कराने की स्वीकृति रहा, जिसे नाबार्ड की ओर से नैबकॉन्स द्वारा संचालित किया जाएगा। यह अध्ययन दिल्ली के सहकारी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल होगी, क्योंकि अब तक राज्य में सहकारी संस्थाओं की संस्थागत, प्रशासनिक, परिचालन एवं व्यावसायिक स्थिति का इस स्तर पर कोई समग्र निदानात्मक अध्ययन नहीं किया गया है। अध्ययन के आधार पर सहकारी क्षेत्र के पुनरोद्धार, प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि तथा दीर्घकालिक स्थिरता के लिए साक्ष्य-आधारित रोडमैप तैयार किया जाएगा।समिति ने दिल्ली में सहकारी विकास के लिए समग्र एवं समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। अध्यक्ष महोदय ने उल्लेख किया कि शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) आरबीआई के नेतृत्व वाले टीएएफसीयूबी (TAFCUB) तंत्र के अंतर्गत पृथक रूप से विनियमित होते हैं। उन्होंने कहा कि एचएलसी में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में उनकी भागीदारी से दिल्ली के सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र का अधिक व्यापक मूल्यांकन संभव होगा तथा क्षेत्र के विकास हेतु समन्वित नीतिगत प्रयासों को बल मिलेगा।बैठक के समापन पर नियामकीय अनुपालन को सुदृढ़ बनाने, संस्थागत सुशासन को मजबूत करने, डिजिटल रूपांतरण को गति देने, क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने तथा निदानात्मक अध्ययन को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।

चंपावत में बसा भोलेनाथ का एक ऐसा मंदिर, जहां पत्थरों पर की गई नक्काशी बताती है सदियों पुरानी गाथा

उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में बसा चंपावत इतिहास और आस्था का संगम हैं। इसी धरा में पुराना बालेश्वर मंदिर, अपनी समृद्ध इतिहास और शानदार आर्किटेक्चरल कला के लिए प्रसिद्ध है। सावन के पहले सोमवार में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता के बारे में बताया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मंदिर का खास वीडियो शेयर किया, जिसके साथ उन्होंने लिखा, “देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जिले में मौजूद पुराना बालेश्वर मंदिर, भगवान शिव में पवित्र आस्था, एक समृद्ध इतिहास और शानदार आर्किटेक्चरल कला का एक शानदार संगम है। पत्थरों पर की गई इसकी बेमिसाल नक्काशी और पुरानी कारीगरी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की शानदार गाथा बताती है। चंपावत आने पर शिव के इस पवित्र धाम पर जरूर जाएं ताकि आपको गहरी आध्यात्मिक शांति का अनुभव हो और हमारी समृद्ध विरासत से कभी न भूलने वाला मिलन हो।” बालेश्वर मंदिर पिथोरागढ़ से 76 किलोमीटर की दूरी पर चंपावत में स्थित जिले का सबसे कलात्मक मंदिर है। यह मंदिर बालेश्वर, रत्नेश्वर और चंपावती दुर्गा को समर्पित मंदिरों का समूह है और चन्द वंश के शुरुआती राजाओं द्वारा बनाया गया था। पहले मंदिर में जटिल संरचनात्मक विशेषताएं थीं और एक मंडप के साथ एक अभयारण्य था। इन मंदिरों की छत पर अभी भी जटिल नक्काशी दिखाई देती है जो कि उनकी प्राचीन महिमा और कलात्मक उत्कृष्टता का सबूत है। एक कहानी के मुताबिक, भगवान शिव को समर्पित मंदिर एक समय में नागों की राजधानी हुआ करती थी। हालांकि, ऐसा लगता है कि शहर का नाम उनकी बहन चंपावती के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने शिव को समर्पित बालेश्वर मंदिर में ध्यान किया था। आज भी, यहां की देवी को चंपावती कहा जाता है और यहां पुराने मंदिर परिसर में एक मंदिर है। इसलिए चंद वंश ने बालेश्वर मंदिल कॉम्प्लेक्स बनाया था और 10वीं-12वीं सदी के बीच इसे अपनी राजधानी बनाया। देवी उनकी संरक्षक और रक्षक देवी भी बन गईं। चंपावत में बालेश्वर के अलावा भगवान शिव को समर्पित कई और मंदिर हैं जैसे क्रांतेश्वर, मानेश्वर, ताड़केश्वर, ऋषनेश्वर, दिक्तेश्वर, मल्लारेश्वर। पाताल रुद्रेश्वर नाम की एक और गुफा है।

विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित

नई दिल्ली। विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण संसद का मानसून सत्र लगातार बाधित हो रहा है। सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष के सदस्यों ने फिर से नारेबाजी और हंगामा किया। इसके कारण लोकसभा को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। सुबह 11 बजे सत्र की शुरुआत ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदक विजेताओं के सम्मान के साथ हुई। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारत के पदक विजेताओं को बधाई दी है। उन्होंने खिलाड़ियों के समर्पण, कड़ी मेहनत और बेहतरीन उपलब्धियों के लिए उनकी सराहना की। इसके बाद जैसे ही सदन में प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नाराजगी जाहिर की। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के सांसदों से कहा, “क्या आप सभी संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का पहले से ही मन बनाकर आते हैं? प्रश्नकाल बहुत महत्वपूर्ण है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने दें। इस तरह सदन में बाधा डालना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।” स्पीकर ओम बिरला की बार-बार की अपील के बावजूद विपक्ष ने प्रश्नकाल में बाधा डाली। जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद, विपक्ष के सदस्यों ने राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान, विपक्षी सांसदों ने ‘चंदा चोरों – गद्दी छोड़ो’ के नारे लगाए। उधर, केंद्र सरकार संसद में कई लंबित विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। मानसून सत्र के दौरान पिछले कुछ दिनों में बार-बार विरोध और व्यवधान देखने को मिले हैं, क्योंकि विपक्षी दल परीक्षा के पेपर लीक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर दान चोरी के मामले जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। संभावित व्यवधानों के बावजूद सरकार ने संसद के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधायी कामकाज की योजना बनाई है। लोकसभा की कार्य-सूची के अनुसार, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ‘द इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026’ पेश करेंगे, जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सदन में विचार के लिए ‘द बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026’ लेकर आएंगी।

शारदाकेयर हेल्थसिटी और लक्ष्मी तरु फ़ाउंडेशन ने चलाया बड़ा रक्तदान अभियान, 3,100 से ज्यादा लोगों ने किया स्वैच्छिक रक्तदान

नई दिल्लीi कम्युनिटी हेल्थकेयर और स्वेच्छा से रक्तदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मज़बूत करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी ने लक्ष्मी तरू फ़ाउंडेशन के साथ मिलकर हेल्थकेयर पार्टनर के तौर पर भारत के सबसे बड़े स्वैच्छिक रक्तदान अभियानों में से एक में हिस्सा लिया। यह अभियान आज नई दिल्ली के रोहिणी में आयोजित किया गया था। इस बड़े अभियान में लगभग 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया और 3,000 से ज़्यादा रक्तदान किए गए। इससे यह देश की सबसे बड़ी कम्युनिटी-आधारित स्वैच्छिक रक्तदान पहलों में से एक बन गया।खून दान करना जान बचाने के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है। दान किए गए खून की एक यूनिट कई मरीज़ों की मदद कर सकती है। यह इमरजेंसी और दुर्घटना के मामलों, बड़ी सर्जरी, बच्चे के जन्म, अंग प्रत्यारोपण और कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण और ज़रूरी प्रक्रिया है।स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व पर बात करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और ब्लड बैंक के प्रमुख डॉ. हरप्रीत सिंह ने कहा, “दान किए गए खून की हर यूनिट कई जानें बचाने की क्षमता रखती है। खून को बनाया नहीं जा सकता, इसलिए स्वेच्छा से खून देने वाले लोग ही हर हेल्थकेयर सिस्टम की रीढ़ होते हैं। इस तरह की बड़े पैमाने पर खून दान करने की पहल से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि हॉस्पिटल इमरजेंसी से निपटने और जान बचाने वाले ट्रांसफ्यूजन की ज़रूरत वाले मरीज़ों को समय पर इलाज देने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।योग्य लोगों द्वारा नियमित रूप से स्वेच्छा से रक्तदान करने से स्वास्थ्य को भी लाभ हो सकते हैं। इससे शरीर में आयरन का स्तर सही बना रहता है, नई रक्त कोशिकाओं के बनने में मदद मिलती है और पूरा स्वास्थ्य बेहतर होता है। साथ ही इससे उन कई मरीज़ों की जान बचाने में भी मदद मिलती है जिन्हें खून की जरुरत होती है।शारदाकेयर  हेल्थसिटी में हीमैटो-ऑन्कोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के वाइस चेयरमैन डॉ. पवन कुमार सिंह ने रक्तदान के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) करवाने वाले मरीज़ों और खून से जुड़ी बीमारियों वाले मरीज़ों को अक्सर इलाज के दौरान बार-बार खून और प्लेटलेट चढ़ाने की ज़रूरत पड़ती है। नियमित रूप से स्वेच्छा से रक्तदान करने से खून की लगातार सप्लाई बनी रहती है, जिससे इलाज के बेहतर नतीजे मिलते हैं और मरीज़ों व उनके परिवारों को उम्मीद मिलती है।ब्लड कैंसर और खून से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों वाले लोग अक्सर अपने इलाज के लिए समय पर खून और खून के घटकों (ब्लड कम्पोनेंट्स) की उपलब्धता पर निर्भर रहते हैं। रक्त दान अभियान को मिली ज़बरदस्त प्रक्रिया सामाजिक ज़िम्मेदारी की बढ़ती भावना और लोगों की जान बचाने में समुदाय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।इस पहल का समर्थन करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी और शारदा हॉस्पिटल के ग्रुप CEO डॉ. कौसर शाह ने कहा, “हेल्थकेयर सिर्फ़ हॉस्पिटल की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं है। हेल्थकेयर प्रोवाइडर के तौर पर हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम ज़्यादा स्वस्थ और संवेदनशील समाज का निर्माण करें। यह पहल दान की सामूहिक भावना और जान बचाने के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है। हम इस शानदार पहल की रूपरेखा तैयार करने और इसका नेतृत्व करने के लिए लक्ष्मी तरु फ़ाउंडेशन का दिल से धन्यवाद करते हैं। रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण काम के लिए समुदायों को एकजुट करने की उनकी कोशिशें बहुत तारीफ़ और समर्थन की हकदार हैं।इस कैंपेन के तहत शारदाकेयर हेल्थसिटी ने हर स्वैच्छिक रक्तदाता (वॉलंटरी ब्लड डोनर) को ISI-मार्क वाला हेलमेट मुफ़्त में दिया। इस पहल से यह बात सामने आई कि जहाँ रक्तदान से जान बचती है, वहीं हेलमेट पहनने से सुरक्षा भी मिलती है। इससे हॉस्पिटल की मेडिकल ट्रीटमेंट के अलावा प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, कम्युनिटी की भलाई और पब्लिक हेल्थ के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखी। Thalassemics India, Rotary Club, Lions Club और DATRI Foundation समेत लगभग 250 NGO और अन्य संगठनों ने इस रक्तदान अभियान का समर्थन किया।

प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता, जनता को न हो परेशानी: केशव प्रसाद मौर्य

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मानसून सत्र-2026 से पहले राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और चेतावनी दी कि नागरिकों के प्रति लापरवाही या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लखनऊ के विधान भवन में आयोजित बैठक के दौरान केशव मौर्य ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है और उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छात्र प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान न करें। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग छात्र आंदोलनों का दुरुपयोग आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की और संबंधित विभागों को श्रद्धालुओं के लिए सुचारू, सुरक्षित और सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी निगरानी रखने का आह्वान किया और चेतावनी दी कि तीर्थयात्रा व्यवस्था के प्रबंधन में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा, अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अमिताभ यश, एडीजी लॉजिस्टिक्स संजीव गुप्ता, एडीजी मानवाधिकार राज कुमार और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उपमुख्यमंत्री ने साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आह्वान करते हुए साइबर पुलिस इकाइयों और तकनीकी टीमों को मजबूत करने का निर्देश दिया ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी के पीड़ितों को समय पर सहायता मिल सके। उन्होंने अफवाहों, गलत सूचनाओं और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की निगरानी बढ़ाने का भी आदेश दिया। बैठक में जन शिकायतों, ऑनलाइन ट्रैफिक चालानों और अयोध्या मामले से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मौर्य ने इस बात पर जोर दिया कि प्रवर्तन कार्रवाई पारदर्शी, निष्पक्ष और जनहित पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि उत्तर प्रदेश सरकार अपराध और अराजकता के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता नीति के प्रति प्रतिबद्ध है, साथ ही शासन में जवाबदेही, संवेदनशीलता और पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है।

यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू, सपा का प्रदर्शन, सीएम योगी ने जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की अपील

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का चार दिवसीय मानसून सत्र सोमवार को शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत से पहले समाजवादी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा परिसर में राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितता, नीट पेपर लीक और शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी दलों से लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप स्वस्थ और सकारात्मक चर्चा करने की अपील करते हुए कहा कि विधायिका जनहित से जुड़े मुद्दों पर विमर्श और समाधान का सबसे प्रभावी मंच है। सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा पहुंचने पर सभी सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सत्र गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा और समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में 6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालकर मध्यम वर्ग की श्रेणी में लाया गया है। उत्तर प्रदेश का किसान अपनी मेहनत से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है और किसानों की आय में पहले की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल का निर्माण करा रही है, ताकि उन्हें रोजगार के दौरान सुविधा मिल सके। साथ ही बेहतर औद्योगिक माहौल के कारण बड़ी संख्या में युवाओं को अपने जिलों में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में शिवभक्त आस्था के साथ यात्रा निकाल रहे हैं और उनकी सुरक्षा तथा स्वागत के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त से विधायक भी कांवड़ियों के स्वागत कार्यक्रमों में भाग लेंगे। आउटसोर्स कर्मियों के कल्याण के लिए भी सरकार लगातार काम कर रही है। उधर, सत्र शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के विधायक चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के निकट प्रदर्शन पर बैठे। विधायक अपने हाथों में पोस्टर और दानपेटी लेकर पहुंचे तथा राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, नीट पेपर लीक और शिक्षक भर्ती के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष के प्रदर्शन पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह केवल राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने भी कहा कि राज्य सरकार विकास और जनहित से जुड़े हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। चार कार्य दिवस तक चलने वाले इस मानसून सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री सुरेश खन्ना वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करेंगे। इसके अलावा सरकार नौ अध्यादेशों को सदन से पारित कराने के साथ संभल हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रख सकती है।

वर्ल्ड चैंपियन जॉर्जीव के खिलाफ ओवैस याकूब की ऐतिहासिक जीत पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने दी बधाई, बोले- देश के लिए गर्व का क्षण

नई दिल्ली। भारत के मिक्सड मार्शल आर्ट्स खिलाड़ी ओवैस याकूब ने शनिवार को बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दो बार के वर्ल्ड चैंपियन और अजेय फाइटर डेलियन जॉर्जीव को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ओवैस याकूब को इस खास जीत के लिए बधाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री के आधिकारिक पेज पर बताया गया, “मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के प्रतिभाशाली एमएमए फाइटर ओवैस याकूब को बुल्गारिया में ब्रेव कॉम्बैट फेडरेशन 107 में मिली शानदार जीत पर बधाई दी, जहां उन्होंने दो बार के आईएमएमएएफ वर्ल्ड चैंपियन को हराया, जो अब तक अजेय थे। इस उपलब्धि को जम्मू-कश्मीर और देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए मुख्यमंत्री ने उनके निरंतर सफल होने और वैश्विक मंच पर और भी कई उपलब्धियां हासिल करने की कामना की।” ओवैस याकूब ने 68 किलोग्राम के कैचवेट मुकाबले में बुल्गारिया के जॉर्जीव को तकनीकी नॉकआउट के जरिए शिकस्त दी। याकूब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले हैं और उन्होंने जॉर्जीव को हराने के लिए सिर्फ 4 मिनट का समय लिया। यह जॉर्जीव के करियर की पहली हार रही। वहीं, याकूब ने अपने लगातार छह मैच जीतने के रिकॉर्ड को और आगे बढ़ाया है। याकूब ने शुरुआत से ही बुल्गारिया के फाइटर के खिलाफ अपना दबदबा बनाए रखा और उन्हें वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया। ओवैस याकूब के प्रहारों का जॉर्जीव के पास कोई जवाब नहीं था और वह पूरे मुकाबले में बैकफुट पर ही दिखाई दिए। याकूब ने रिंक में उतरने के साथ ही भविष्यवाणी की थी कि वह इस मैच का अंत पहले राउंड में ही कर देंगे। भारतीय एमएमए फाइटर अपनी भविष्यवाणी को दमदार प्रदर्शन के बूते सही साबित करने में भी सफल रहा। मैच खत्म होने के तुरंत बाद याकूब रिंग की जाली के ऊपर जाकर जीत का जश्न मनाते हुए नजर आए। इस जीत को भारतीय एमएमए के इतिहास में सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।