राहुल गांधी को इतिहास पढ़ना चाहिए, कांग्रेस सहयोगियों को खत्म करती है : किरेन रिजिजू

नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक्स पोस्ट पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद भस्मासुर है जो टूट-फूट से बनी पार्टी है। राहुल गांधी को भाजपा-एनडीए पर उंगली उठाने की जरूरत नहीं है। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी भारतीय जनता पार्टी पर ऐसी बातें मढ़ रहे हैं जो असल में उन पर लागू होनी चाहिए। किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी भस्मासुर की तरह है, जो भी पार्टी इसके संपर्क में आती है, वह खत्म हो जाती है, फिर भी वे हम पर आरोप लगाते हैं। कांग्रेस पार्टी को यह समझना चाहिए कि तृणमूल कांग्रेस खुद कांग्रेस से ही अलग हुई थी। जो लोग एनसीपी की बात करते हैं, वे भी कांग्रेस से ही अलग हुए थे। इसीलिए, कांग्रेस हम पर आरोप लगाती है, लेकिन वे खुद टूट-फूट से बने थे और वे फिर से टूट जाते हैं। दूसरी पार्टियों को तोड़ना और खत्म करना ही कांग्रेस पार्टी का काम है। कांग्रेस ने इसी तरह अपने बड़े नेताओं को बाहर निकाला है, कई नेता तो कांग्रेस छोड़ने के बाद प्रधानमंत्री भी बने, जबकि पहले वे कांग्रेस के प्रमुख नेता थे। हर कोई कांग्रेस का इतिहास जानता है और यह भी कि वह अपने सहयोगियों को कैसे तोड़ती है। रिजिजू ने इस दौरान कुछ पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अशोक मेहता और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के बारे में सभी जानते होंगे। 1963 में कैसे कांग्रेस पार्टी ने अशोक मेहता को योजना आयोग का उपाध्यक्ष पद देकर उन्हें कांग्रेस में विलय करने के लिए पार्टी को तोड़ दिया था। उसके बाद प्रोफेसर एनजी रंगा के बारे में सब जानते हैं। कांग्रेस ने प्रोफेसर रंगा के साथ क्या किया? और कैसे रंगा और राजगोपालाचारी ने 1959 में कांग्रेस पार्टी से अलग होकर एक समाजवादी समूह बनाया। 1971 के चुनावों के बाद उन्होंने पार्टी को कैसे तोड़ा, यह सब जानते हैं। राहुल गांधी ने आज जो कहा है, उस पर ममता बनर्जी और शरद पवार से पूछिए कि वे कांग्रेस पार्टी से कैसे बाहर आए और कांग्रेस पार्टी ने कैसे क्षेत्रीय पार्टी को तोड़कर उसे कांग्रेस पार्टी में शामिल किया। उन्होंने कहा कि टीडीपी के एन. टी. रामा राव को कैसे परेशान किया गया, कांग्रेस ने कैसे आर्टिकल 356 और राष्ट्रपति शासन लगाकर राज्य सरकारों को खत्म किया। वे तो सरकारों को पूरी तरह से खत्म ही कर देते थे। कांग्रेस पार्टी जो कह रही है, उस पर मैं हंसकर कहूं या दुख के साथ, लेकिन किसी ने राहुल गांधी को यह बात समझाई नहीं है। राहुल गांधी ने भाजपा पर शिवसेना, टीएमसी और एनसीपी को तोड़ने का आरोप लगाया। किसी को राहुल गांधी को यह समझाना चाहिए कि एनसीपी और टीएमसी के लोग असल में कांग्रेस से ही अलग हुए थे और जैसा कि मैंने यह कहानी बताई है, किसी को राहुल गांधी को यह समझाना चाहिए कि कांग्रेस खुद एक ‘भस्मासुर’ है। जो भी इसके साथ रहता है, यह उसे तोड़ देती है और बर्बाद कर देती है। भाजपा एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यह परिवार के किसी एक सदस्य की पार्टी नहीं है। सबसे सफल नेता, सबसे ताकतवर और दूरदर्शी सोच वाले लोग ही पार्टी के नेता बनते हैं। रिजिजू ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का विस्तार हुआ है। किसी ने पार्टी को नहीं तोड़ा है। हमने कोई गंदी चालें चलकर बड़ी पार्टी नहीं बनाई है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने एक-एक करके, कड़ी मेहनत और पसीने से भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाया है। इसलिए राहुल गांधी का आरोप उन्हीं पर लागू होता है। तीसरे मोर्चे का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने 1997-98 में क्या किया था। उस समय जनता दल (यूनाइटेड) की स्थिति क्या थी-पहले देवेगौड़ा प्रधानमंत्री बने, फिर कांग्रेस पार्टी ने आई.के. गुजराल का समर्थन किया और फिर कुछ ही महीनों के भीतर कांग्रेस पार्टी ने सरकार गिरा दी। उसके बाद, 1977 में क्या हुआ, यह भी सभी जानते हैं, मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार चल रही थी, और कैसे उन्होंने चरण सिंह को समर्थन देने का दिखावा किया, जिससे चरण सिंह के लिए संसद में बहुमत साबित करना असंभव हो गया। कांग्रेस पार्टी ने तुरंत समर्थन वापस ले लिया। इसी तरह, जब शरद पवार की बात आती है, तो शरद पवार कांग्रेस पार्टी के एक बड़े नेता थे। उन्होंने सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर सवाल उठाए और बाद में कांग्रेस छोड़ दी। उनके जाने के बाद सभी जानते हैं कि शरद पवार को तोड़ने की कोशिश में सुरेश कलमाडी का कैसे इस्तेमाल किया गया। वह कहानी सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि 1989 की घटना के बारे में सभी जानते हैं। वी.पी. सिंह कांग्रेस से अलग होकर प्रधानमंत्री बने थे। कांग्रेस पार्टी ने चंद्र शेखर का समर्थन करने का दिखावा करने की साजिश रची, वी. पी. सिंह की सरकार गिरा दी और फिर कुछ ही महीनों में अपना समर्थन वापस लेकर चंद्र शेखर की सरकार भी गिरा दी।

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