पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कनाडा के मंत्री मनिंदर सिद्धू से की मुलाकात

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को आगे बढ़ाने के संबंध में एक सार्थक बैठक की। गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों पक्षों ने अपने नेतृत्व की उस प्रतिबद्धता को दोहराया है जिसके तहत सीईपीए वार्ताओं को तेजी से पूरा कर जल्द से जल्द समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि इससे वस्तुओं, सेवाओं और निवेश सहित कई क्षेत्रों में नए अवसर खुलेंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत-कनाडा सीईपीए का शीघ्र निष्कर्ष दोनों देशों के साझा लक्ष्य को साकार करने में मदद करेगा। इससे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी को आपसी लाभ के लिए और मजबूत किया जा सकेगा। इस सप्ताह भारत और कनाडा ने प्रस्तावित सीईपीए के लिए नई दिल्ली में चौथे दौर की वार्ता शुरू की। दोनों देशों का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देना है। पांच दिनों तक चली इन वार्ताओं में वस्तुओं का व्यापार, सेवाएं, मूल नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन) और तकनीकी व्यापार बाधाएं जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से शामिल रहे। इससे पहले तीसरा दौर जुलाई में कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसी वर्ष मार्च में नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान सीईपीए वार्ताओं को वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया था। दोनों नेताओं ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा, जबकि कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर तक पहुंचा। कनाडा को भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में दवा उत्पाद, मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरणों के पुर्जे, लोहे और इस्पात से बने उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कार्बनिक रसायन, आभूषण, रत्न एवं कीमती पत्थर, परिधान एवं वस्त्र, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। वहीं कनाडा से भारत के प्रमुख आयातों में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का पल्प, रत्न एवं कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी के हिस्से तथा लोहा और एल्युमीनियम स्क्रैप शामिल हैं। सेवा क्षेत्र में भारत का आईटी उद्योग कनाडा को सेवाओं के निर्यात में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है। सीईपीए के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।
तमिलनाडु में सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलेगा एक ग्राम का सोने का छल्ला

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 28 सितंबर को सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए ‘थायमामन थंगा मोथिरम’ योजना की शुरुआत करेंगे। योजना के तहत 22 जून 2026 से सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे को एक ग्राम वजन का सोने का छल्ला दिया जाएगा। योजना के शुभारंभ और क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में समीक्षा बैठक हुई। तमिलनाडु सरकार के अनुसार, राज्य में मातृ एवं शिशु कल्याण को प्राथमिकता दी जा रही है। गर्भवती महिलाओं को वित्तीय सहायता, मुफ्त प्रसव और नवजात देखभाल, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं, पोषण, प्रसव योजना और प्रेग्नेंसी एंड चाइल्ड ट्रैकिंग इवैल्यूएशन सॉफ्टवेयर जैसी कई योजनाएं लागू की गई हैं। सरकार ने बताया कि तमिल संस्कृति और परंपरा में ‘थायमामन सीर’ की परंपरा को ध्यान में रखते हुए तथा सरकारी चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य सेवाओं में लोगों का विश्वास और मजबूत करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की जा रही है। इसके लिए 23 जून 2026 को शासनादेश जारी किया गया था। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में हर साल करीब 7.80 लाख बच्चों का जन्म होता है। इनमें 99.9 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में होते हैं। करीब 4.20 लाख यानी 53 प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पतालों में होते हैं। योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले सभी बच्चों को एक ग्राम वजन का सोने का छल्ला दिया जाएगा। प्रत्येक छल्ले पर यूनिक सीरियल नंबर होगा और इन्हें छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग में रखा जाएगा। योजना के लिए पहले चरण में 1,28,000 सोने के छल्ले खरीदे जा चुके हैं। इस योजना का लाभ तमिलनाडु की स्थायी निवासी माताओं को मिलेगा। इसके लिए उनका पीआईसीएमई में पंजीकरण और आरसीएच आईडी प्राप्त होना अनिवार्य होगा। सरकार के मुताबिक, 22 जून 2026 से 28 सितंबर 2026 तक सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए 28 सितंबर से 107 हब के माध्यम से प्रतिदिन 100 बच्चों को सोने के छल्ले वितरित करने की व्यवस्था की गई है। योजना के शुभारंभ के बाद सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को अस्पताल से छुट्टी के समय ही सोने का छल्ला दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस योजना से सरकारी चिकित्सा सेवाओं में लोगों का विश्वास बढ़ने के साथ सुरक्षित संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन मिलेगा और मातृ एवं शिशु सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। समीक्षा बैठक में चिकित्सा, चिकित्सा शिक्षा एवं जन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अरुणराज, मुख्य सचिव डॉ. एम. साईकुमार, डीजीपी महेश कुमार अग्रवाल, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. थारेस अहमद, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. अनीश शेखर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पश्चिम बंगाल: सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने के खिलाफ पीआईएल वापस, हाई कोर्ट ने किया खारिज

कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कथित तौर पर सार्वजनिक स्थानों और सरकारी संपत्तियों को भगवा रंग से रंगने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश आरवी घुगे और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता पेशे से वकील हैं और उन्होंने सार्वजनिक स्थानों एवं संरचनाओं को भगवा रंगने पर सरकारी धन खर्च किए जाने पर सवाल उठाया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इस काम पर बिना किसी स्पष्ट सार्वजनिक उद्देश्य के सरकारी धन खर्च किया जा रहा है और यह जनता के पैसे का अनावश्यक खर्च है। याचिका में उदाहरण के तौर पर कोलकाता के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स की दीवारों का जिक्र किया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इसकी दीवारों को भगवा रंग से रंगा गया है। इसके अलावा एक मीडिया संस्थान के गेट को भी कथित तौर पर भगवा रंगने का मुद्दा अदालत के सामने उठाया गया। हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई मामला पेश नहीं कर सके, जिसमें अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और याचिका को वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया। इससे दो दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के नेता एवं डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के मध्य कोलकाता स्थित कैमक स्ट्रीट कार्यालय को लेकर पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा विभाग की ओर से जारी बेदखली नोटिस को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने अग्निशमन विभाग को निर्देश दिया था कि वह पहले तृणमूल कांग्रेस को कार्यालय के निरीक्षण की तारीख की जानकारी देते हुए नोटिस जारी करे। अदालत ने यह भी कहा था कि अग्निशमन विभाग कार्यालय में आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपायों के बारे में पार्टी को जानकारी दे। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस को निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार सुरक्षा से जुड़े जरूरी कदम उठाने होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि अगर इसके बाद भी जरूरी दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो अग्निशमन विभाग कानूनी प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकता है। अभिषेक बनर्जी का कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय पिछले महीने उस समय विवाद में आया था, जब कोलकाता नगर निगम के कर्मचारियों और पुलिस ने इमारत की छत पर लगे एक कथित अवैध होर्डिंग को हटा दिया था।
विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026: जेपी नड्डा ने सुरक्षित और स्वच्छ स्वास्थ्य सेवा का दिया मंत्र, मध्य प्रदेश के पीपीपी मॉडल को सराहा

नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026 को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए। स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “एबीवीआईएमएस और डॉ. आरएमएल हॉस्पिटल, नई दिल्ली में ‘विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026’ की झलकियां; इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पर जोर दिया। इस कार्यक्रम में ‘स्वच्छता ही सेवा’ की भावना दिखी, जिसमें स्वच्छता, साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव को रोगी की सुरक्षा के लिए जरूरी माना गया। ‘स्वच्छता ही सेवा’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए, आइए देखभाल के हर काम से सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा संस्थानों और हर मरीज की सम्मानजनक देखभाल के प्रति हमारे सामूहिक संकल्प को मजबूत करें।” इस मौके पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि मरीज की सुरक्षा ही स्वास्थ्य सेवा की नींव है। अस्पतालों में स्वच्छता, संक्रमण से बचाव और गुणवत्तापूर्ण इलाज को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता ही सेवा है और इसी सोच के साथ सभी स्वास्थ्य संस्थानों को काम करना होगा। इससे पहले एक पोस्ट में मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की जानकारी दी गई। पोस्ट में लिखा, “जेपी नड्डा ने मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और पीपीपी मॉडल की सराहना की। मध्य प्रदेश ने मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया। एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़कर 6,120 हुई। राज्य ने मेडिकल कॉलेजों के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए नए पीपीपी मॉडल को अपनाया। केंद्र और राज्य ने स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण व किफायती स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।” मंत्रालय के अनुसार, मध्य प्रदेश ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। राज्य में एमबीबीएस सीटों की संख्या अब बढ़कर 6,120 हो गई है। इससे प्रदेश के युवाओं को डॉक्टर बनने के ज्यादा मौके मिलेंगे और राज्य में डॉक्टरों की कमी भी दूर होगी।
नशा मुक्त पंजाब यात्रा को नितिन नवीन के साथ राघव चड्ढा ने भी दिखाई हरी झंडी

पठानकोट। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा शुक्रवार को पठानकोट में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ में शामिल हुए और यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस अभियान का उद्देश्य पंजाब में नशे की समस्या और उससे प्रभावित परिवारों की परेशानियों को सामने लाना है। राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कार्यक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने नशे के कारण गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इन परिवारों की कहानियां नशे की समस्या से होने वाले नुकसान की दर्दनाक तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने कहा, “नशा सिर्फ जिंदगी बर्बाद नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है।” सांसद ने आरोप लगाया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने नशे की समस्या को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन वह इसे पूरा करने में नाकाम रही। उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में नशे की समस्या काफी बढ़ गई है। खासकर ‘चिट्टे’ की सप्लाई बढ़ी है और यह राज्य में आसानी से उपलब्ध हो रहा है। राघव चड्ढा ने कहा कि नशे की ओवरडोज से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ी है और नशीले पदार्थों की खपत में भी इजाफा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अब बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों की होम डिलीवरी तक हो रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नौकरियां, अवसर और बेहतर भविष्य देने का वादा किया गया था, लेकिन नशे की समस्या के कारण आज भी परिवारों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। पठानकोट में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को हरी झंडी दिखाई गई। इस अभियान का उद्देश्य राज्य में नशे की समस्या की गंभीरता को सामने लाना और इसके खिलाफ लोगों को जागरूक एवं एकजुट करना है। चड्ढा के इस यात्रा में शामिल होने और उनके बयानों के बाद पंजाब सरकार के नशा विरोधी कदमों को लेकर जारी राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ आने वाले दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से होकर गुजरेगी। इस दौरान नशे से प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों से बातचीत करने की भी योजना है।
सुनीता विलियम्स : नासा के जरिए अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला

नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की सबसे अनुभवी और चर्चित अंतरिक्ष यात्रियों में से एक सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष में उड़ान भरी। सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो राज्य के यूक्लिड शहर में हुआ। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या भारतीय मूल के हैं, जो गुजरात से हैं, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पांड्या स्लोवेनियाई मूल की अमेरिकी हैं। सुनीता का पूरा नाम सुनीता लिन विलियम्स है। उन्होंने 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी से फिजिकल साइंस में स्नातक की डिग्री हासिल की और 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री ली। नासा में आने से पहले वह अमेरिकी नौसेना में हेलीकॉप्टर पायलट थीं और उन्होंने 30 से ज्यादा विभिन्न एयरक्राफ्ट में 3,000 घंटे से अधिक उड़ान भरी है। सुनीता को 1998 में नासा ने अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना था। इससे पहले भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला थीं, जिन्होंने 1997 में पहली बार अंतरिक्ष में उड़ान भरी थीं। कल्पना चावला के बाद सुनीता विलियम्स ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। सुनीता ने पहली बार 9 दिसंबर 2006 को डिस्कवरी स्पेस शटल से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर एक्सपीडिशन 14 और 15 मिशन का हिस्सा रहीं। इस मिशन में उन्होंने 195 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो उस समय किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा सबसे लंबा अंतरिक्ष प्रवास था। उन्होंने इस दौरान 4 बार स्पेसवॉक किया, जिसमें कुल 29 घंटे 17 मिनट तक वह अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर रहीं। दूसरी बार सुनीता 14 जुलाई 2012 को रूसी सोयुज अंतरिक्ष यान से आईएसएस के लिए रवाना हुईं और एक्सपीडिशन 32/33 मिशन की कमांडर बनीं। इस मिशन में वह 127 दिन अंतरिक्ष में रहीं। सुनीता विलियम्स का तीसरा मिशन उनके करियर का सबसे चर्चित और चुनौतीपूर्ण रहा। दरअसल, 5 जून 2024 को वह बोइंग के स्टारलाइनर क्रू फ्लाइट टेस्ट के तहत बैरी विल्मोर के साथ आईएसएस पर गईं। वैसे तो यह मिशन केवल 8 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से उन्हें नौ महीने से ज्यादा समय तक अंतरिक्ष में ही रुकना पड़ा। आखिरकार 18 मार्च 2025 को सुनीता विलियम्स स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से सुरक्षित पृथ्वी पर लौटीं। सुनीता के लिए सकुशल पृथ्वी पर वापस लौटना बेहद चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, कड़ी मशक्कत के बाद उनकी सुरक्षित वापसी हुई। अब तक सुनीता विलियम्स कुल 3 अंतरिक्ष मिशनों में 608 दिन अंतरिक्ष में बिता चुकी हैं और 9 स्पेसवॉक किए, जिसका कुल समय 62 घंटे 6 मिनट है। उन्हें भारत सरकार ने भी सम्मानित किया है। सुनीता ने अंतरिक्ष में भगवदगीता और गणेशजी की मूर्ति ले जाने और अंतरिक्ष में समोसे का जिक्र कर भारत से अपना गहरा जुड़ाव दिखाया है।
शिवसेना के नाम-निशान पर बोले राजू वाघमारे- विरोधियों की दलीलें निराधार

नई दिल्ली। शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों और दिशा सालियान मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस को अपनी खोखली होती पार्टी पर ध्यान देने की नसीहत दी। शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने कहा, “कोर्ट में हमारे चिन्ह और पार्टी के नाम को लेकर सुनवाई चल रही है। आज हमारे वकील ने उन सभी दलीलों को पूरी तरह से गलत बताया जो विरोधी पार्टी ने कोर्ट को गुमराह करने के लिए दी थीं। उन्होंने दावा किया था कि इलेक्शन कमीशन सिंबल और पार्टी के बारे में कोई फैसला नहीं ले सकता, यह तर्क देते हुए कि अगर डिसक्वालिफिकेशन का मामला पेंडिंग है तो कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।” शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि हमारे वकीलों ने सफलतापूर्वक यह दिखा दिया कि कहीं भी, किसी भी एक्ट या कानून में यह नहीं लिखा है कि डिसक्वालिफिकेशन की कार्रवाई चलने के दौरान इलेक्शन कमीशन को फैसला लेने से रोका गया है। शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने हमें शिवसेना का नाम और निशान पूरी तरह से कानून और संविधान के दायरे में रहकर सौंपा है। आयोग ने संविधान, चुनाव आयोग के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है। हमने न किसी की चोरी की है, न डाका डाला है। वाघमारे ने कहा कि यह फैसला बाबा साहेब अंबेडकर के बनाए कानून के अनुसार ही दिया गया है। ऐसे में बचकाने पोस्ट करके राहुल गांधी क्या दिखाना चाहते हैं, समझ से परे है। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपनी पार्टी की तरफ देखना चाहिए। कांग्रेस अंदर से खोखली हो चुकी है और उनके नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। राहुल गांधी को शिवसेना पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए। शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने दिशा सालियान की मौत के मामले पर कहा, “दिशा सालियान के बुजुर्ग पिता, जिन्होंने अपनी बेटी को खो दिया है, के दुख को देखते हुए, उन्होंने अपने पास मौजूद सबूतों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने एफआईआर में कई लोगों के नाम लिए हैं। आदित्य ठाकरे खुद कहते हैं कि वह दिशा सालियान से कभी मिले नहीं हैं और न ही उन्हें देखा है। जाहिर है कि अब जब एफआईआर में नाम आ गए हैं, तो लोग इस बारे में बात करेंगे।
राहुल गांधी गजनी हो गए हैं क्या? कांग्रेस भस्मासुर पार्टी है: प्रदीप भंडारी का तीखा पलटवार

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी के एक्स पोस्ट को लेकर कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या वह गजनी हो गए हैं जो अपना इतिहास भूल गए। भाजपा नेता ने कांग्रेस को भस्मासुर पार्टी करार देते हुए कहा कि हर क्षेत्रीय दल तंग आकर ही बना है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, “राहुल गांधी गजनी हो गए हैं क्या? कांग्रेस पार्टी ऐसी भस्मासुर पार्टी है जिसने हर क्षेत्रीय दल को तोड़ा और हर क्षेत्रीय दल इसलिए क्षेत्रीय बना क्योंकि वो कंग्रेस से तंग आ गया था। कांग्रेस को अपना इतिहास याद कराना चाहता हूं।” भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस के इतिहास पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के तीन अलग-अलग चुनाव चिन्ह रहे हैं- 1952 से 1969 के बीच एक चिन्ह, 1971 से 1977 के बीच दूसरा, और 1977 के बाद से मौजूदा वाला चिन्ह। यह इस बात का सबूत है कि कांग्रेस ऐतिहासिक रूप से कई बार टूटी है। उन्होंने कहा कि 1951 से अब तक कांग्रेस में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 70 विभाजन हो चुके हैं। चाहे शरद पवार का अलग पार्टी बनाना हो, ममता बनर्जी का अपनी पार्टी बनाना हो, या 1951 में जेबी कृपलानी का अलग होना हो, ये सभी घटनाएं बताती हैं कि कांग्रेस पार्टी ऐतिहासिक तौर पर लोकतंत्र के लिए खतरा रही है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि आज लोकतंत्र की हत्या नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सम्मान हुआ है। जब बंगाल की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को उखाड़ फेंका था, तो उनके पास न कार्यकर्ता बचे, न करीबी और न ही संगठन। ऐसे में नियम के मुताबिक कार्रवाई होना लाजिमी है। भंडारी ने कहा कि जिस कांग्रेस ने देश में इमरजेंसी लगाई, पहली कम्युनिस्ट सरकार को गिराया और जिसकी वजह से क्षेत्रीय दलों का जन्म हुआ, जिसके कई बार विभाजन के कारण चुनाव चिन्ह तक बदल गए, वही कांग्रेस आज संविधान को हाथ में लेकर घूमती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भारत के संविधान को कभी ठीक से पढ़ा ही नहीं है। इससे साफ होता है कि राहुल गांधी की कांग्रेस में हमेशा से ही कॉमन सेंस, लॉजिक और संविधान की हत्या होती रही है। इसलिए जब आज नियमों के तहत लोकतांत्रिक कार्रवाई हो रही है, तो राहुल गांधी बौखला रहे हैं। वह इसलिए बौखला रहे हैं क्योंकि देश का बच्चा-बच्चा उन्हें उनका इतिहास दिखा रहा है।
नंदीग्राम उपचुनाव पर कांग्रेस का वार, उदित राज बोले- भाजपा सहयोगियों को निगल जाती है

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता उदित राज ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर भाजपा और चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार के नामांकन वापसी और कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी को जोड़ते हुए इसे अलोकतांत्रिक करार दिया, साथ ही भाजपा पर सहयोगी दलों को खत्म करने की रणनीति का आरोप लगाया। नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव पर कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “हमारी पार्टी के जनरल सेक्रेटरी, वेणुगोपाल ने लिखा है कि जिस तरह से टीएमसी का चुनाव चिन्ह जब्त किया गया, वह बहुत ही अलोकतांत्रिक है। और यह ‘लिफाफा’ वाला मामला क्या है? नंदीग्राम की तरह ही, टीएमसी के उम्मीदवार पर दबाव, लालच या डर का इस्तेमाल किया गया होगा, जिससे वे पीछे हट गए। इससे पता चलता है कि देश में लोकतंत्र खत्म हो गया है।” नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर उन्होंने कहा कि इस घटना से यह बात पुष्ट हो जाती है कि टीएमसी उम्मीदवार पीछे हट गए। इसका मतलब है कि जो पीछे नहीं हटा, उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अगर कांग्रेस उम्मीदवार भी बाहर बैठने या चुनाव लड़ने से मना कर देता, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता। इसलिए, टीएमसी उम्मीदवार को जरूर डराया, धमकाया या रिश्वत दी गई होगी। यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा भी एक समय में क्षेत्रीय पार्टी थी। अगर कांग्रेस ऐसा करती तो भाजपा कभी अस्तित्व में नहीं आती। भाजपा ने शिवसेना से समझौता किया। शिवसेना और जनता दल यूनाइटेड बड़ी पार्टी थी और भाजपा छोटी थी। अब भाजपा बड़ी हो गई, शिवसेना खत्म हो गई। ऐसा उदाहरण कांग्रेस में नहीं है। उन्होंने अकाली दल और बीजद के साथ भी यही किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा जिसके साथ गई, उनकी बड़ी पार्टी को खत्म करके छोटा बना दिया और कांग्रेस जिसके साथ भी गई, चाहे राजद, सपा या कोई दूसरा दल हो, हमेशा छोटी ही रही। उदित राज ने कहा कि पंजाब की हालात बहुत खराब हैं। कानून नाम की कोई चीज नहीं है। पंजाब की सरकार दिल्ली वाले चला रहे हैं। राज्य नशे में डूबा हुआ है और कानून व्यवस्था की हालत दयनीय है।
हम भारत के खाते में एक और गोल्ड जोड़ना चाहते हैं, हमारी तैयारी बहुत अच्छी है: सुनील कुमार

नई दिल्ली। भारतीय पुरुष कबड्डी टीम के कप्तान सुनील कुमार का मानना है कि टीम आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के लिए पूरी तरह तैयार है। लंबे समय तक चले ट्रेनिंग प्रोग्राम से खिलाड़ियों को कॉम्बिनेशन बनाने, रणनीति पर काम करने और अपनी व्यक्तिगत स्किल्स को बेहतर करने में मदद मिली है। 27 वर्षीय राइट डिफेंडर सुनील कुमार भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे। सुनील पिछले एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे। इस बार वह अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं से सजी टीम की अगुवाई करेंगे। मौजूदा 12 सदस्यीय टीम में हांग्जो में गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम के चार खिलाड़ी शामिल हैं, जो सुनील, अर्जुन देशवाल, असलम इनामदार और पवन सहरावत हैं। टीम में प्रो कबड्डी लीग के जाने-माने खिलाड़ी जैसे आशु मलिक, जयदीप दहिया, देवांक दलाल और राहुल सेठपाल भी हैं, जबकि अयान लोहचब युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुनील ने कहा कि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) और कबड्डी फेडरेशन ने टीम का कैंप छह से आठ महीने पहले ही शुरू कर दिया था, जिससे खिलाड़ियों को अपने कॉम्बिनेशन और रणनीति पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिला। सुनील ने साई मीडिया से कहा, “तैयारी बहुत अच्छी रही है क्योंकि हमारे फेडरेशन और साई ने छह से आठ महीने पहले ही कैंप शुरू कर दिया था। हमने टीम के कॉम्बिनेशन और रणनीति की अच्छी योजना बनाई है। हमने पहले साई बेंगलुरु में प्रैक्टिस की, फिर ट्रेनिंग के लिए बेल्लारी गए, और फिर हमारा कैंप साई गांधीनगर में रहा।” लंबे समय तक चली तैयारी से खिलाड़ियों को अपनी भूमिकाओं को समझने और टीम की रणनीतिक सोच के बारे में बेहतर समझ बनाने में भी मदद मिली है। भारत कबड्डी में अपने शानदार रिकॉर्ड को आगे बढ़ाते हुए एशियन गेम्स में उतरेगा। पुरुष टीम ने पिछले एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था, और सुनील, अर्जुन, असलम और पवन उस अभियान का हिस्सा थे। सुनील ने कहा, “हमारे सीनियर खिलाड़ियों ने टीम को एक अलग पहचान दी और भारत के लिए कई गोल्ड मेडल जीते। हम उस विरासत को बनाए रखना चाहते हैं, भारत के खाते में एक और गोल्ड मेडल जोड़ना चाहते हैं और उस रास्ते पर चलना चाहते हैं जो हमारे दिग्गजों ने बनाया है।” कप्तान ने टीम के तौर पर मिलकर खेलने की अहमियत पर भी जोर दिया, क्योंकि भारत के पास रेडिंग और डिफेंस दोनों में मजबूती है। उन्होंने कहा, “सिर्फ एक खिलाड़ी की कोशिश से जीत नहीं मिल सकती। इस बार, हमारी रेडिंग और डिफेंस दोनों ही टीमें काफी मजबूत हैं। हमारी टीम में कबड्डी के बेहतरीन खिलाड़ी हैं, चाहे रेडर्स हों या डिफेंडर्स।” उन्होंने आगे कहा, “हमने पूरी तैयारी कर ली है। हमने अपनी रणनीति, टीम कॉम्बिनेशन, फिटनेस और व्यक्तिगत स्किल्स पर काम किया है। अब प्रतियोगिता के दौरान हमें इन सभी चीजों को सही ढंग से लागू करना होगा। सिर्फ एक खिलाड़ी की कोशिश काफी नहीं होगी। सभी को योगदान देना होगा। हमारे रेडर्स, डिफेंडर्स और ऑलराउंडर्स को एक टीम के तौर पर मिलकर काम करना होगा।” कबड्डी प्रतियोगिता आइची प्रीफेक्चर के टोकाई शहर में टोकाई सिटिजन जिम्नेजियम में होगी। भारत का अभियान 21 सितंबर से शुरू होगा और फाइनल 26 सितंबर को खेला जाना है।