भू-राजनीतिक संकटों के बावजूद भारत ने सुनिश्चित की ऊर्जा आपूर्ति, ऊर्जा कूटनीति रही सफल: हरदीप पुरी

नई दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि हाल के भू-राजनीतिक संकटों और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधानों के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपनाई गई ऊर्जा कूटनीति और पिछले एक दशक में की गई रणनीतिक तैयारियों का परिणाम है। राष्ट्रीय राजधानी में मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सदस्यों को संबोधित करते हुए पुरी ने कहा कि आज ऊर्जा सुरक्षा का अर्थ केवल ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि संघर्षों, रणनीतिक समुद्री मार्गों में रुकावटों, कीमतों में अस्थिरता और अचानक आने वाले व्यवधानों के बीच भी देश की अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से चलाए रखना है। उन्होंने कहा, “भारत इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना इसलिए कर सका क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र ने पहले से ही व्यापक तैयारी कर ली थी। पिछले 10 वर्षों में भारत ने कच्चे तेल के आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक किया है। इसके साथ ही 5.33 मिलियन टन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार तैयार किए गए, रिफाइनिंग क्षमता 215 एमएमटीपीए से बढ़ाकर 267 एमएमटीपीए की गई और देशभर में ईंधन आउटलेट्स की संख्या लगभग 52,000 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि एलपीजी आयात टर्मिनलों की संख्या भी 11 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है। इन तैयारियों का परिणाम यह रहा कि जब दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा संकट और कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला, तब भी भारत में पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति सामान्य बनी रही, रसोई गैस सिलेंडरों की उपलब्धता बाधित नहीं हुई और खुदरा ईंधन कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखा जा सका। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का विषय ‘भारत की ऊर्जा सुरक्षा: भू-राजनीतिक अनिश्चितता से निपटना’ मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए बेहद प्रासंगिक है, क्योंकि दुनिया अभी भी अनेक भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पेट्रोलियम मंत्री ने पश्चिम बंगाल की ऊर्जा क्षमता का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में मौजूद संभावनाएं उद्योग, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय संपर्क को नई गति दे सकती हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 17,600 करोड़ रुपए की तेल एवं गैस परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिससे राज्य का ऊर्जा बुनियादी ढांचा तेजी से मजबूत हो रहा है। उन्होंने बताया कि हल्दिया रिफाइनरी, जिसकी क्षमता 1975 में 2.5 एमएमटीपीए थी, अब बढ़कर 8 एमएमटीपीए हो गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस रिफाइनरी ने 8.5 मिलियन टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया। पुरी ने कहा कि वर्ष 2018 में अशोकनगर में हुई तेल खोज अब व्यावसायिक उत्पादन के चरण में पहुंच चुकी है। लगभग 1,000 करोड़ रुपए के निवेश के बाद ओएनजीसी द्वारा उत्पादित पहला कच्चे तेल का खेप अगस्त 2026 में हल्दिया पहुंचा। उन्होंने कहा कि यह विकास पश्चिम बंगाल की ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा स्रोतों में विविधता, रणनीतिक भंडारण, रिफाइनिंग क्षमता का विस्तार और बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे कदमों ने भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में सक्षम बनाया है। उन्होंने बताया कि यही रणनीति भविष्य में भी देश की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक विकास को मजबूती प्रदान करेगी।

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