भारतीय मूल की बोधना शिवानंदन ने इतिहास रचा, 11 साल की उम्र में बनीं सबसे युवा ‘महिला ग्रैंडमास्टर’

नई दिल्ली। भारतीय मूल की 11 वर्षीय बोधना शिवानंदन ने चेस में इतिहास रच दिया है। बोधना ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में 46वें चेस ओलंपियाड में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना तीसरा और अंतिम वुमन ग्रैंडमास्टर (डब्ल्यूजीएम) नॉर्म हासिल किया। इसके साथ बोधना इतिहास में वुमन ग्रैंडमास्टर का खिताब जीतने वालीं सबसे युवा खिलाड़ी बन गईं। इंग्लैंड की महिला टीम के लिए टॉप बोर्ड पर खेलते हुए बोधना ने टीम की अगुवाई की। उन्होंने छह गेम जीते और 8.0/11 का स्कोर हासिल किया, जिससे इंग्लैंड महिला वर्ग में 15वें स्थान पर रहा। बोधना बोर्ड 1 पर टूर्नामेंट की 13वीं सबसे बेहतरीन खिलाड़ी रहीं। इससे पहले, सबसे युवा वुमन ग्रैंडमास्टर का रिकॉर्ड रूस की ग्रैंडमास्टर कैटरीना लैग्नो के नाम पर था, जिन्होंने 12 साल की उम्र में खिताब जीता था। उनके अलावा, चीन की पूर्व वर्ल्ड चैंपियन होउ यिफान ने भी 12 साल की उम्र में यह खिताब जीता था। शिवानंदन की शतरंज यात्रा ‘कोविड-19 लॉकडाउन’ के दौरान शुरू हुई थी। पिता के दोस्त ने भारत लौटते समय कुछ बैग बोधना के परिवार को दिए थे, जिसमें एक शतरंज बोर्ड भी था। इसी शतरंज बोर्ड ने बोधना की दिलचस्पी को बढ़ाया। उस समय उन्होंने खुद ही इस खेल के दांव-पेंच सीखने शुरू किए थे। शिवानंदन ने यूरोपियन स्कूल्स चैंपियनशिप 2022 में सभी 24 मुकाबले जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था, जिसके एक साल बाद वह किसी ग्रैंडमास्टर के खिलाफ प्रतिस्पर्धी मुकाबले में हार न मानने वालीं सबसे युवा खिलाड़ी बनीं। 9 साल की उम्र में बोधना को शतरंज ओलंपियाड 2024 के लिए इंग्लैंड की टीम में चुना गया। इसके साथ वह किसी भी खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी थीं। अब 11 साल की उम्र में डब्ल्यूजीएम खिताब हासिल करते हुए शिवानंदन ने अपने नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर ली है। उत्तर-पश्चिम लंदन में रहने वालीं बोधना शतरंज के साथ पढ़ाई में भी काफी होशियार हैं। वह यूके ओपन महिला ब्ल्टि्ज चैंपियन हैं, जिन्होंने ब्रिटिश महिला रैपिड चैंपियन का खिताब भी साझा किया है।

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