दक्षिण कोरियाई सेना का दावा, ‘उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी में दागा अज्ञात प्रोजेक्टाइल’

सोल। दक्षिण कोरिया की सेना ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया ने ईस्ट सी (जापान सागर) की ओर अज्ञात प्रोजेक्टाइल दागा है। ज्यादा दिन नहीं बीते जब प्योंगयांग ने वॉनसन इलाके से ईस्ट सी की तरफ कई मिसाइलें दागी थीं। योनहाप न्यूज एजेंसी ने दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (जेसीएस) के हवाले से बताया कि उन्होंने मीडिया को भेजे एक संदेश में इस लॉन्च की जानकारी दी, लेकिन इसके बारे में और कोई डिटेल नहीं साझा किया। अकसर देखा गया है कि जब भी उसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई चर्चा होती है या फिर उसे लगता है कि उसके हित प्रभावित हो रहे हैं तो वो इसी अंदाज में अपनी बात रखता है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने आईएईए के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें एक प्रस्ताव के तहत प्योंगयांग को परमाणु हथियार संपन्न देश का दर्जा न दिए जाने की बात थी। वियना में हुए 70वें महासम्मेलन में ये प्रस्ताव पारित किया गया था। कहा गया कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत उत्तर कोरिया को इजाजत नहीं दी जा सकती। किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग ने गुरुवार को कहा कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार बनाए रखेगा। ये हथियार देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। किम यो ने परमाणु हथियार छोड़ने के लिए मनाने की कोशिशों को ‘बेवकूफी भरी बात’ कहा था। 12 सितंबर को भी उत्तर कोरिया ने वॉनसन इलाके से ईस्ट सी की तरफ कई कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं थीं। उस कार्रवाई को सोल, वॉशिंगटन और टोक्यो के बीच हो रहे त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास (7 सितंबर से 12 सितंबर) के विरोध के तौर पर देखा गया था। उत्तर कोरिया लगातार अपनी आक्रामक रुख पर कायम रहा है। 20 अगस्त को भी प्योंगयांग ने ईस्ट सी की ओर एक मिसाइल दागी थी। दक्षिण कोरिया की सेना ने दावा किया था कि इसकी रेंज 300 किलोमीटर की रही। जेसीएस ने मिसाइल के दागे जाने की जानकारी दी थी। हालांकि, पहले इसे अज्ञात प्रोजेक्टाइल बताया गया था और यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसने कितनी दूरी तय की। उत्तर कोरिया ने इससे पहले 12 अगस्त को भी पूर्व दिशा में एक कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी। अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास के विरोध में किया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति के कहने पर इसकी अवधि घटा दी गई थी। पहले ये 17 अगस्त से 27 अगस्त के बीच होना था, लेकिन बाद में इसे 21 अगस्त तक कर दिया गया था। नॉर्थ कोरिया की कोरियाई सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से योनहाप ने बताया था कि किम यो जोंग ने सैन्य अभ्यास को लेकर किए जा रहे दावे पर संदेह जताते हुए कहा, “सैन्य अभ्यासों का दायरा या अवधि कम करने से उनके उकसावे वाले और आक्रामक स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आता।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्योंगयांग की ट्रंप के इस कदम में “जरा भी दिलचस्पी नहीं” है।

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