राहुल गांधी के कार्यक्रम पर भड़की भाजपा, तरुण चुघ बोले- हताशा में अपना स्तर गिरा रहे हैं

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने मोर्चा खोल दिया और इसे हताशा व वैचारिक दिवालियापन की पराकाष्ठा करार दिया। भाजपा सांसद तरुण चुघ से लेकर प्रवक्ता शाजिया इल्मी तक ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि लगातार हार से वह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं और अब स्तरहीन राजनीति पर उतर आए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर भाजपा सांसद तरुण चुघ ने कहा, “हताशा, निराशा और गुस्से में राहुल गांधी दिन-ब-दिन अपनी राजनीति का स्तर गिरा रहे हैं। मेरा मानना ​​है कि बार-बार हारने की वजह से राहुल गांधी अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं।” वहीं, आध्यात्मिक गुरु, ज्योतिषी और श्री सिद्ध शक्ति पीठ शनिधाम के पीठाधीश्वर परमहंस दाती महाराज ने कहा, “यह भारत है, और भारत रिश्तों का बरगद है। मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि सनातन हमेशा इस सिद्धांत पर कायम है कि मां तो मां होती है, और जो भी इंसान अपनी मां का सम्मान करता है, वह बहुत खुशकिस्मत है। सनातन में ऐसी बातों के लिए कोई जगह नहीं है। जो इंसान ऐसी बातें करता है, वह सच्चा सनातनी नहीं हो सकता।” भाजपा नेता सुनील देवधर ने कहा कि मां सबसे महान होती हैं। यह सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया में कहीं भी किसी से पूछो तो मां को सबसे महान माना जाता है। कोई भी अपनी मां का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा, यहां तक कि इटली में भी, जहां से उसकी मां आई है। बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि शराफत की सारी हदें पार हो गई हैं। यह बचकाना बर्ताव है और हमारा मानना ​​है कि इससे प्रधानमंत्री की भावनाओं को ठेस पहुंची है, जो पूरे देश और इसके 140 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री हैं। राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, लेकिन उनके कामों से देश को शर्मिंदगी हुई है। वहीं, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि वह एक कॉमेडियन था। वह सिर्फ कॉमेडी कर रहा था। किसी ने मां का मजाक नहीं उड़ाया। भाजपा नेताओं में अक्ल की कमी है। वे कॉमेडी और गंभीरता के बीच का फर्क नहीं समझ पा रहे हैं। मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि झूठ की आवाज ज्यादा दिन नहीं टिकती। जो लोग हमारे सांस्कृतिक मूल्यों से सहमत नहीं हैं, उन्हें हमारे वेजिटेरियनिज्म से दिक्कत है। उन्हें हमारे दीयों से दिक्कत है। उन्हें हमारी दीपावली से दिक्कत है। उन्हें दीपावली के पटाखों से दिक्कत है, लेकिन उन्हें सालों तक दुनिया भर में गिरने वाली मिसाइलों से दिक्कत नहीं है। उन्हें हमसे ज्यादा दिक्कत है। उन्हें दीयों से दिक्कत है, लेकिन शराब से नहीं। उन्हें शराब से दिक्कत नहीं है, लेकिन शाकाहारी भोजन से दिक्कत है। लोगों को पता चल गया है कि राहुल गांधी असल में क्या चाहते हैं। जो भाषा बोली जा रही है, उसे देश और दुनिया सुन रही है, और वे सही एक्शन भी लेंगे। भाजपा की प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने कहा कि राहुल गांधी क्या चाहते हैं? क्या वे लोकतंत्र खत्म करना चाहते हैं? क्या वे कानून का राज हटाना चाहते हैं? क्या वे संविधान खत्म करना चाहते हैं? सिस्टम क्या है? सिस्टम लोकतंत्र है। यह एक रिपब्लिक है, जहां लोग वोट करते हैं, और हर एक इंसान के वोट का बराबर महत्व होता है तो वह क्या चाहते हैं? क्या वह सिस्टम को खत्म करके नेपाल जैसे हालात बनाना चाहते हैं? वह क्या बनाना चाहते हैं? नेपाल या पाकिस्तान। इस देश को कौन चलाएगा? उनके दिमाग में क्या है? क्या हमें देश चलाने के लिए जॉर्ज सोरोस को यहां लाना चाहिए? शाजिया इल्मी ने आगे कहा कि मां राजनीति का मुद्दा नहीं है। जब भी आप किसी बुजुर्ग औरत या किसी की मां के बारे में बात करते हैं तो आपको उन्हें कभी भी मनोरंजन के लिए एक कैरेक्टर के तौर पर नहीं देखना चाहिए। मुझे लगता है कि यह भद्दे और ओछे व्यवहार का एक नया स्तर है, और स्टैंडर्ड्स लगातार गिर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई भी स्टूडेंट इससे कभी सहमत हो सकता है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना ​​है कि एक बुजुर्ग, कमजोर औरत की बेइज्जती करना, बार-बार मां की बेइज्जती करना और उन्हें टारगेट करना, बहुत अफसोस की बात है। मुझे ऐसी सोच के लिए बहुत दुख होता है। वहीं, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि जेन-जी और जेन अल्फा के सम्मान के साथ सरकार ने खिलवाड़ किया। राहुल गांधी के साथ भाजपा की बी टीम, जो कांग्रेस के भीतर है, हमेशा विश्वासघात करती है। राहुल गांधी को ऐसे लोगों को तवज्जो नहीं देना चाहिए और उन्हें पद से हटाना चाहिए। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह मिमिक्री का विषय हो सकता है, यह हंसी का विषय हो सकता है, एक बार वीडियो देखें और ध्यान दें। बस अपनी मां को याद करें, और अगर कोई किसी मां को कुर्सी पर बैठने के लिए कहे तो क्या यह हंसी का विषय भी हो सकता है? मेरा मतलब है, मुझे समझ नहीं आ रहा कि वे क्या कहना चाहते हैं। भाजपा सांसद मुकेश दलाल ने कहा कि एक बुजुर्ग महिला, एक बुजुर्ग मां की नकल करके राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की माताओं समेत देश की सभी माताओं का अपमान किया है। सच तो यह है कि राहुल गांधी को बचपन में उनके माता-पिता ने सही संस्कार नहीं दिए। अगर उन्हें एक-दो थप्पड़ मारकर अनुशासन सिखाया गया होता, तो आज वे इतने बेशर्म नहीं होते। यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि ऐसा इंसान विपक्ष का नेता बन गया है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अल नीनो से एक चुनौती के तौर पर निपटने का आह्वान किया

अमरावती। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को अल नीनो की स्थिति से एक चुनौती के तौर पर निपटने का आह्वान किया। उन्होंने अल नीनो के असर से निपटने के लिए कम समय और मध्यम अवधि की योजनाएं अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने अल नीनो के असर, स्थिति से निपटने के लिए जरूरी उपायों और कार्य योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, कर्मचारियों और रायथु सेवा केंद्रों के कर्मियों के साथ टेलीकांफ्रेंस की। उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में बारिश में 50.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। बारिश में सबसे ज्यादा कमी प्रकाशम, अन्नमय्या और सत्य साईं जिलों में देखी गई है। खरीफ सीजन के दौरान 30.84 लाख हेक्टेयर जमीन पर खेती की योजना बनाई गई थी, लेकिन अल नीनो के असर के कारण 79 प्रतिशत जमीन पर खेती का काम शुरू हो पाया है। हालांकि दालों की खेती संतोषजनक है, लेकिन तिलहन की खेती कम है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे किसानों की मदद करने और कीमतों को काबू में रखने पर ध्यान दें। अधिकारियों को चावल, प्याज, पाम ऑयल और अरहर दाल की कीमतों को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि हमने अल-नीनो की स्थिति का पहले ही अंदाजा लगा लिया था। सभी को पहले से तैयार एक्शन प्लान के मुताबिक काम करना चाहिए। अल-नीनो का असर सिर्फ किसानों पर ही नहीं, बल्कि सभी सेक्टर पर पड़ता है। किसानों को अल-नीनो के असर से बचाने की कोशिश करते हुए, कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के उपाय भी किए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने ज्यादा जोखिम वाले आरएसके इलाकों में बागवानी फसलों की मदद के लिए आवंटित फंड का सही इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने बाजार की मांग के आधार पर फसलें उगाने पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया। चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि हमने फसल बीमा का इंतजाम किया है। अगर फसल का नुकसान होता है, तो हमें यह पक्का करना होगा कि बीमा का पैसा किसानों तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को चावल के स्टॉक की जांच करने और कीमतों को काबू में रखने के लिए चावल का स्टॉक बाजार में जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हम अभी प्याज की कीमतों को काबू में रखने के लिए अलग-अलग इलाकों से प्याज खरीद रहे हैं। भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए प्याज की खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। पाम ऑयल और अरहर दाल की कीमतों को काबू में रखने के लिए जो फैसले पहले ही लिए जा चुके हैं, उन्हें तेजी से लागू किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे किचन गार्डन को बढ़ावा दें और यह पक्का करें कि सब्जियां सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (स्वयं-सहायता समूहों) द्वारा चलाए जा रहे किचन गार्डन में उगाई जाएं। उनका मानना ​​है कि इससे सब्जियों की कीमतों को काबू में रखने में मदद मिलेगी। यह बताते हुए कि केंद्र सरकार कुछ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) देती है, उन्होंने अधिकारियों से इस मामले में केंद्र के साथ तालमेल बिठाने को कहा। उन्होंने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह यह पक्का करे कि आपदाओं के समय जनता पर बुरा असर न पड़े। ऐसी स्थितियों से बचना चाहिए जिनमें अधिकारियों की लापरवाही की वजह से किसानों और ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़े।

विदेश में भारतीय मिशनों ने सेवा पखवाड़ा के तहत ‘विकसित भारत रन 2026’ का आयोजन किया

फ्रैंकफर्ट। यूरोप भर में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाए जा रहे सेवा पखवाड़ा के तहत भारतीय मिशनों ने रविवार को ‘विकसित भारत रन 2026’ का आयोजन किया। इसी कड़ी में फ्रैंकफर्ट में भारत के महावाणिज्य दूतावास ने जर्मन फुटबॉल की शासी निकाय के मुख्यालय में दौड़ का आयोजन किया। भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जर्मनी में भारत (महावाणिज्य दूतावास फ्रैंकफर्ट) ने 20 सितंबर 2026 को जर्मनी के ड्यूशर फुसबॉल बुंड (डीएफबी) ईवी में ‘विकसित भारत रन 2026’ का आयोजन किया। भारतीय प्रवासियों के सदस्यों ने विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा का जश्न मनाने के लिए उत्साहपूर्वक भाग लिया। महावाणिज्य दूत शुचिता किशोर ने बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए सभी प्रतिभागियों का स्वागत और धन्यवाद किया और उन्हें 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में प्रतिबद्ध प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया।” वाणिज्य दूतावास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “दौड़ की शुरुआत विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रयास करने और योगदान देने की प्रतिज्ञा के साथ हुई, जबकि भारत की परंपराओं, संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाया गया और इसके बाद मानव सदाना द्वारा चोट-मुक्त रन के लिए टिप्स और वार्म-अप प्रथाओं पर एक छोटा सत्र आयोजित किया गया।” दूतावास ने कहा, “फिटनेस, समुदाय और विकसित भारत की भावना ज्यूरिख में एक साथ आई जब दूतावास ने युवा मामले और खेल मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से सेवा पखवाड़ा के तहत विकसित भारत रन का आयोजन किया। भारतीय प्रवासियों के सदस्यों, छात्रों और भारत के मित्रों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया, जिससे यह आयोजन सक्रिय जीवन और सामुदायिक जुड़ाव का एक जीवंत उत्सव बन गया।” इसमें कहा गया, “ज्यूरिख में विकसित भारत रन की शुरुआत वंदे मातरम के गायन के साथ हुई, जिसने प्रतिभागियों को एकता, गर्व और समुदाय की साझा भावना में एक साथ लाया। सेवा पखवाड़ा के हिस्से के रूप में आयोजित, इस कार्यक्रम ने स्विट्जरलैंड में भारतीय समुदाय की ऊर्जा और उत्साह को दर्शाया।” स्कॉटलैंड में महावाणिज्य दूतावास ने ग्लासगो में दौड़ का आयोजन किया, जिससे भारतीय समुदाय एक साथ आया। स्कॉटलैंड में भारत के महावाणिज्यदूत ने कहा, “सेवा पखवाड़ा 2026 के हिस्से के रूप में, ‘विकसित भारत रन- राष्ट्र की सेवा के लिए सामुदायिक दौड़’ का सफलतापूर्वक आयोजन रूकेन ग्लेन पार्क, ग्लासगो में किया गया, जिसमें भारतीय समुदाय के सदस्यों और भारत के मित्रों को फिटनेस, एकता और राष्ट्र-निर्माण के जोशपूर्ण उत्सव में एक साथ लाया गया।

भाजपा मुख्यालय में ‘प्रकोष्ठ–संकुल राष्ट्रीय कार्यशाला’, नितिन नवीन ने संगठन को मजबूत करने की समीक्षा की

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में हुई एक संगठनात्मक बैठक की जानकारी साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा मुख्यालय में ‘प्रकोष्ठ–संकुल राष्ट्रीय कार्यशाला’ में संगठनात्मक गतिविधियों, प्रकोष्ठों की भूमिका और आगे की कार्ययोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने बताया कि भाजपा मुख्यालय में ‘प्रकोष्ठ–संकुल राष्ट्रीय कार्यशाला’ में संगठनात्मक गतिविधियों, प्रकोष्ठों की भूमिका और आगे की कार्ययोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की। बताया गया कि चर्चा का मुख्य उद्देश्य विभिन्न स्तरों पर पार्टी के संगठन को मजबूत करना था। इसमें अलग-अलग प्रकोष्ठों की जिम्मेदारियों को समझने और उनके बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। पार्टी की पहुंच और आंतरिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा हुई। कार्यशाला भाजपा की संगठनात्मक व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने की कोशिशों का हिस्सा है। ऐसी बैठकों का उद्देश्य विशेष प्रकोष्ठों की गतिविधियों को पार्टी के व्यापक लक्ष्यों के साथ जोड़ना और यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी के कार्यक्रम जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंचें। नितिन नवीन की पोस्ट से पता चलता है कि पार्टी नेतृत्व योजनाबद्ध तरीके से काम करने और मिलकर विचार-विमर्श करने पर जोर दे रहा है। अलग-अलग प्रकोष्ठों की भूमिका की समीक्षा करके पार्टी अपने संगठन में जिम्मेदारियों और जवाबदेही को बेहतर बनाना चाहती है। भविष्य की कार्ययोजनाओं पर चर्चा से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी आने वाली राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियों के लिए पहले से तैयारी कर रही है। भाजपा परंपरागत रूप से अपने कार्यकर्ता आधारित संगठन और समाज के अलग-अलग वर्गों तथा विभिन्न विषयों से जुड़े विशेष प्रकोष्ठों के कामकाज पर विशेष जोर देती रही है। इस तरह की कार्यशालाएं कामकाज की समीक्षा करने, कमियों की पहचान करने और आने वाले महीनों के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करने का मंच प्रदान करती हैं। नितिन नवीन ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद से वह देशभर में पार्टी की विभिन्न संगठनात्मक इकाइयों के साथ लगातार संपर्क और चर्चा कर रहे हैं। सेल-क्लस्टर राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए पार्टी मुख्यालय में उनकी मौजूदगी से संगठन को अंदरूनी तौर पर मजबूत करने और पार्टी की विभिन्न इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल पर दिए जा रहे जोर का पता चलता है।

मुंबई में गणेशोत्सव के सातवें दिन 6,436 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन, कोई अप्रिय घटना नहीं

मुंबई। मुंबई में गणेशोत्सव के सातवें दिन रविवार को कुल 6,436 गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार रात 9 बजे तक विसर्जन प्रक्रिया के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। बीएमसी की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार रात 9 बजे तक 99 सार्वजनिक गणेश प्रतिमाएं, 6,127 घरेलू गणेश प्रतिमाएं और 210 गौरी प्रतिमाओं का शहर के विभिन्न निर्धारित विसर्जन स्थलों और कृत्रिम विसर्जन कुंडों में विसर्जन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक संख्या घरेलू गणेश प्रतिमाओं की रही, जिनका विसर्जन श्रद्धालुओं ने विभिन्न स्थानों पर किया। सार्वजनिक मंडलों की 99 प्रतिमाओं के साथ-साथ गौरी पूजन के तहत स्थापित 210 गौरी प्रतिमाओं का भी विसर्जन किया गया। बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि विसर्जन स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। नगर निगम की टीमें पूरे दिन विभिन्न विसर्जन स्थलों पर निगरानी करती रहीं। बीएमसी ने कहा कि रात 9 बजे तक विसर्जन के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना दर्ज नहीं हुई और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र के सबसे बड़े धार्मिक उत्सवों में से एक है, जिसमें श्रद्धालु भगवान गणेश की स्थापना, पूजा-अर्चना और निर्धारित दिनों में प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं। विसर्जन को भगवान गणेश की अपने धाम वापसी का प्रतीक माना जाता है।

मालिकों और शेयरधारकों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता, टाटा ग्रुप में विवाद पर बोले टाटा ट्रस्ट्स के वकील अभिषेक मनु सिंघवी

नई दिल्ली। टाटा संस की लिस्टिंग और एन.चंद्रशेखरन की चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्ति पर टाटा ग्रुप में विवाद पर टाटा ट्रस्ट्स के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने रविवार को कहा कि कंपनी पर स्वामित्व रखने वाले शेयरहोल्डर के अधिकारों की मूल बात को इस तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। मालिक, जो शेयरहोल्डर भी हैं, उनके अधिकारों को कमजोर या खत्म करने से भारत की सैकड़ों-हजारों कंपनियों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सिंघवी ने कहा कि रतन टाटा के साथ मिलकर काम करने, टाटा ग्रुप की विरासत (चाहे वह ट्रस्ट हो या कंपनियां) को बहुत करीब से देखने, दोनों तरफ के मुख्य लोगों को न सिर्फ अच्छी तरह जानने बल्कि उनके साथ बेहतरीन संबंध रखने और दोनों पक्षों के लोगों के लिए मन में सच्चा और गहरा सम्मान होने के कारण, मेरी पहली प्रतिक्रिया निराशा की है। लेकिन अब में एक पक्ष के वकील के रूप में शामिल हो रहा हूं, तो कहना चाहूंगा कि मालिक और शेयरधारकों के अधिकारों जैसी बुनियादी बात को इस तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। शेयरधारक मालिकों के अधिकारों को कमजोर या खत्म करना, कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिहाज से सैकड़ों-हजारों भारतीय कंपनियों के लिए बर्बादी का कारण बन सकता है। सिंघवी ने आगे कहा कि चैरिटी कमिश्नर के अचानक आए किसी रहस्यमयी आदेश से किसी ट्रस्ट के कामकाज को रोकना और फैसले लेने की प्रक्रिया में बाधा डालना—जिसका मतलब है कि ट्रस्ट आगे क्या करना है, इस पर चर्चा के लिए बैठक भी नहीं कर सकता—ट्रस्ट के भीतर लोकतांत्रिक कामकाज को पूरी तरह से नाकाम करने का एक और तरीका है। टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच 100 साल से ज्यादा पुराने और गहरे रिश्ते को तोड़ना, और ऐसा व्यवहार करना मानो दोनों के बीच तलाक हो गया हो—कानूनी या किसी भी अन्य नजरिए से यह अकल्पनीय लगता है। सिंघवी के मुताबिक, 100 साल से अधिक समय से बने टाटा संस के नियमों की अनदेखी करना, जो कि टाटा ट्रस्ट्स के साथ कंपनी के विशिष्ट संबंधों को दिखाते हैं, सही नहीं है। मिस्त्री मामले भी सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों को माना था।

पंजाब भाजपा प्रमुख ने ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ‘दबाने’ को लेकर आप सरकार पर निशाना साधा

चंडीगढ़। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने रविवार को राज्य में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने सरकार पर ड्रग्स की समस्या को रोकने में नाकाम रहने और राज्य में ड्रग्स की खुलेआम बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, ढिल्लों ने उन लोगों से जुड़ी तीन कथित घटनाओं का जिक्र किया जिन्होंने ड्रग्स को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने इन घटनाओं को मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर से जोड़ा। ढिल्लों ने लिखा कि पहले, शेरॉन गांव के मोहनजीत सिंह… फिर तुर बंजारा के दलित परिवार से गुलजार सिंह… और अब नमोल गांव के एक गरीब मजदूर जगसीर जागा। आप सरकार पर निशाना साधते हुए पंजाब भाजपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि अधिकारी ड्रग्स की समस्या को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के बजाय, इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि ड्रग्स को रोकने में नाकाम रही ‘आप’ सरकार अब ड्रग्स के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने पर ध्यान दे रही है। ढिल्लों ने दावा किया कि जगसीर सिंह ने अपने गांव में ड्रग्स की कथित खुलेआम बिक्री के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन उनके साथ भी वैसा ही व्यवहार किया गया जैसा गुलजार सिंह के साथ हुआ था। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इस घटना से जगसीर इतने टूट गए कि उन्हें जहर खाने के लिए मजबूर होना पड़ा। गुस्सा जाहिर करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले संगरूर में एक ही महीने में कथित तौर पर ऐसी तीन घटनाएं हुईं। उन्होंने पूछा कि अगर मुख्यमंत्री अपने ही इलाके के लोगों को ड्रग्स और माफिया से नहीं बचा सकते, तो बाकी पंजाब का क्या होगा? ढिल्लों का यह बयान ऐसे समय में आया है जब आप सरकार पंजाब में पिछले साढ़े चार साल की अपनी उपलब्धियों के बारे में लोगों को बताने के लिए घर-घर जाकर अभियान चला रही है। ड्रग्स के खिलाफ अभियान चलाने वालों को भाजपा का समर्थन दोहराते हुए ढिल्लों ने कहा कि उनकी पार्टी बेगुनाह लोगों की आवाज को दबने नहीं देगी और ड्रग्स के खिलाफ लड़ रहे जगसीर सिंह और अन्य लोगों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

नागालैंड: एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल को रोकने पर असम राइफल्स का स्पष्टीकरण, ‘सीमा पार करने के लिए जरूरी अनुमति नहीं थी’

कोहिमा। नागालैंड के मेलुरी जिले के अवांगखु में नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) के प्रतिनिधिमंडल को म्यांमार जाने से रोके जाने के मामले में असम राइफल्स ने स्पष्टीकरण जारी किया है। असम राइफल्स के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल को उसकी पहचान या प्रस्तावित यात्रा के उद्देश्य के कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने के लिए आवश्यक वैध अनुमति और दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण रोका गया। असम राइफल्स ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल को म्यांमार जाते समय अवांगखु में रोक दिया गया। बल का कहना है कि इस मामले को नागा पहचान या लोगों के बीच सांस्कृतिक संपर्क से जोड़ने के बजाय निर्धारित सीमा नियमों और आवश्यक दस्तावेजों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। असम राइफल्स द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, 19 सितंबर को सुबह करीब 11:30 बजे आठ लोग तीन वाहनों में निर्धारित सीमा पारगमन स्थल पर पहुंचे थे। प्रतिनिधिमंडल ने म्यांमार के त्सेरा जाने के लिए भारत-म्यांमार सीमा पार करने की इच्छा जताई थी। स्पष्टीकरण में कहा गया है कि सीमा पार करने के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगे जाने पर प्रतिनिधिमंडल सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध बॉर्डर पास या अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सका। इसी आधार पर प्रतिनिधिमंडल को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी गई। असम राइफल्स ने कहा कि यह मामला सांस्कृतिक संबंधों या लोगों के बीच संपर्क को रोकने का नहीं, बल्कि सीमा पार आवाजाही के लिए लागू नियमों के अनुपालन का है। आधिकारिक बयान में इस बात पर भी आपत्ति जताई गई कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया मंचों पर इस घटना को नागा पहचान से जोड़कर पेश किया जा रहा है। असम राइफल्स का कहना है कि सीमा नियमन से जुड़े एक विशिष्ट मामले को समुदाय और सुरक्षा बलों के बीच टकराव के व्यापक मुद्दे के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है। बल ने दोहराया कि भारत-म्यांमार सीमा पर आवाजाही इस संबंध में निर्धारित सरकारी नीति और शर्तों के अधीन है। असम राइफल्स के स्पष्टीकरण में कहा गया कि मौजूदा विनियमित आवाजाही व्यवस्था के तहत निर्धारित सीमा पारगमन स्थलों से आवाजाही के लिए पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की शर्तें लागू होती हैं। आधिकारिक संचार में उद्धृत प्रावधानों के अनुसार, फ्री मूवमेंट रिजीम की सुविधा भारत-म्यांमार सीमा के दोनों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित पात्र गांवों के लिए लागू होती है। बयान के अनुसार, एनएसएफ प्रतिनिधिमंडल नागालैंड की राजधानी कोहिमा से आया था। ऐसे में केवल प्रस्तावित सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम या किसी संगठन के संदर्भ पत्र के आधार पर प्रतिनिधिमंडल को स्वतः अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने का अधिकार नहीं मिलता। असम राइफल्स ने स्पष्ट किया कि किसी नागरिक संगठन द्वारा जारी रेफरेंस लेटर या सिफारिश पत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की वैध अनुमति का विकल्प नहीं है। असम राइफल्स ने अपने पक्ष के समर्थन में सीमा पार आवाजाही के आंकड़े भी साझा किए हैं। आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक, संबंधित व्यवस्था के तहत अब तक 16,428 बॉर्डर पास जारी किए जा चुके हैं। बल का कहना है कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि निर्धारित शर्तों और दस्तावेजी आवश्यकताओं को पूरा करने वाले लोगों की सीमा पार आवाजाही को नियमानुसार सुगम बनाया जा रहा है। असम राइफल्स ने मीडिया संस्थानों से संवेदनशील सीमा संबंधी मामलों में खबर प्रकाशित करने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारियों से तथ्यों की पुष्टि करने की अपील की है। बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने जैसे संवेदनशील विषयों पर अधूरी या अपुष्ट जानकारी प्रकाशित करने से पहले उचित सावधानी बरती जानी चाहिए और खबरों में इस विषय पर लागू सरकारी नीतियों तथा नियमों का संदर्भ भी शामिल किया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़: आदिवासी कल्याण विभाग के ड्राइवर की संदिग्ध हालात में मौत

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में आदिवासी कल्याण विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर के ड्राइवर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, वह पारंपरिक इलाज के लिए एक रिश्तेदार के साथ दूर-दराज के एक गांव गया था। मृतक की पहचान लखनराम के तौर पर हुई है। वह ओडागी पुलिस स्टेशन इलाके के पर्सिया गांव में अपने जीजा के साथ पारंपरिक इलाज और झाड़-फूंक के लिए गया था। पुलिस के अनुसार, गांव से लौटते समय लखनराम ने बहुत ज्यादा शराब पी ली थी, जिसकी वजह से वह चल नहीं पा रहा था। एक दूसरे व्यक्ति की मदद से उसे एक नाले के पार ले जाया गया और एक परिचित के घर सोने के लिए छोड़ दिया गया। अगली सुबह जब उसका जीजा उसे देखने गया, तो लखनराम वहां नहीं मिला। बाद में उसका शव घर से लगभग 100-200 मीटर दूर एक गड्ढे में मिला। सूरजपुर के एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एएसपी) योगेश कुमार देवांगन ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को शक है कि ज्यादा शराब पीने और गड्ढे में गिरने की वजह से मौत हुई होगी। हालांकि, मौत की असल वजह का पता पोस्टमार्टम और आगे की जांच के बाद ही चलेगा। इस घटना ने मृतक के परिवार वालों और अन्य लोगों के मन में उसकी मौत के हालात को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच, खराब सड़कों की वजह से लखनराम के शव को दूर-दराज के गांव से बाहर निकालना मुश्किल साबित हुआ। कीचड़ और खराब सड़कों के कारण गांव तक गाड़ियां नहीं पहुंच पा रही थीं, इसलिए ग्रामीणों और अन्य लोगों ने बेडशीट, कंबल और बांस से एक कामचलाऊ स्ट्रेचर बनाया और शव को कंधे पर उठाकर उस जगह तक ले गए जहां गाड़ियां पहुंच सकती थीं। इस घटना ने इलाके में अच्छी सड़क सुविधा न होने की बात को भी उजागर किया है। ग्रामीणों ने हाल ही में परसिया गांव तक जाने वाली सड़क को बेहतर बनाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। आगे की जांच चल रही है।

बीजापुर: जंगल में छिपाकर रखा गया हथियारों का जखीरा बरामद, एके-47 समेत चार हथियार और 76 जिंदा कारतूस जब्त

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के बीच भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम उतला के जंगल में पुलिस ने जमीन के भीतर छिपाकर रखा गया हथियारों का जखीरा बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से पूछताछ के दौरान मिली सूचना के आधार पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन में एके-47 समेत चार हथियार और कुल 76 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल अमन झा के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली सूचना के बाद थाना भैरमगढ़ से पुलिस बल को ग्राम उतला के जंगल की ओर रवाना किया गया। अभियान से पहले अनुविभागीय अधिकारी पुलिस भैरमगढ़ नवीन एक्का ने जवानों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश और ब्रीफिंग दी। पुलिस टीम ने निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उतला के जंगल में सर्चिंग अभियान चलाया। इसी दौरान जवानों को जमीन के भीतर छिपाकर रखा गया एक डम्प मिला। पुलिस ने डम्प को बाहर निकालकर उसकी जांच की तो उसमें हथियार और कारतूस मिले। पुलिस के मुताबिक, बरामद सामग्री में एक एके-47 रायफल, एक 315 बोर रायफल, एक सिंगल शॉट रायफल और एक 9 एमएम पिस्टल शामिल है। इसके अलावा पुलिस ने एके-47 की दो मैगजीन, एके-47 के 45 जिंदा राउंड, 9 एमएम के 25 जिंदा राउंड और 315 बोर रायफल के 6 जिंदा राउंड बरामद करने की बात कही है। इस तरह ऑपरेशन में कुल 76 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से संगठन की गतिविधियों और पूर्व की घटनाओं के संबंध में लगातार जानकारी जुटाई जा रही है। इसी प्रक्रिया में मिली सूचनाओं के आधार पर जंगलों में छिपाए गए हथियारों और अन्य सामग्री की तलाश भी की जा रही है। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि इन प्रयासों से आत्मसमर्पण करने वालों का पुलिस और प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल रही है। पुलिस ने उतला के जंगल से बरामद हथियारों और कारतूसों को थाना भैरमगढ़ लाकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक उमेश प्रसाद गुप्ता ने अभियान में शामिल अधिकारियों और जवानों को कार्रवाई के लिए बधाई देते हुए भविष्य में भी इस तरह के अभियान जारी रखने के निर्देश दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, जिले के संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की ओर से लगातार सर्चिंग और निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं।