जिओ पॉलिटिक्स तनाव के दौर में भी ग्लोबल साउथ की आवाज अहम रहेगी: जयशंकर

न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान कहा कि भू-राजनीतिक विखंडन, संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी बदलाव के इस दौर में भी ग्लोबल साउथ की आवाज दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी। जयशंकर ने ‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स: बिल्डिंग ब्रिजेज फॉर अ चेंजिंग वर्ल्ड’ विषय पर आयोजित चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में जमैका, घाना और सूरीनाम के विदेश मंत्रियों के साथ ईस्ट-वेस्ट सेंटर की अध्यक्ष सेलेस्टे कॉनर्स भी शामिल हुईं। बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि संयुक्त राष्ट्र आज भी अपरिहार्य संस्था है, लेकिन इसमें ऐसे सुधार जरूरी हैं जो ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें। उन्होंने कहा कि दुनिया अब दो ध्रुवों या सीमित विकल्पों से परिभाषित नहीं होगी। देश अपने हितों, मूल्यों और आपसी भरोसे के आधार पर निर्णय लेते रहेंगे। जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के साथ आईबीएसए (आईबीएसए) विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। संयुक्त बयान में तीनों देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता दोहराई। तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि इसे अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, वैध और समकालीन वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। संयुक्त बयान में ग्लोबल साउथ पर संघर्षों के प्रभाव, विशेषकर ऊर्जा और खाद्य असुरक्षा, महंगाई तथा वित्तीय दबावों पर चिंता जताई गई। आईबीएसए देशों ने संतुलित, निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया। साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने तथा सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करने की प्रतिबद्धता दोहराई। जलवायु परिवर्तन पर तीनों देशों ने ग्लोबल साउथ में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना बढ़ाने, ऊर्जा दक्षता में सुधार और जैव ईंधन, बायोगैस तथा कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन जैसे टिकाऊ ईंधनों के विस्तार का समर्थन किया। बैठक में डिजिटल अवसंरचना, सार्वभौमिक और सार्थक कनेक्टिविटी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए आर्थिक विकास और सतत विकास की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।

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