जांच आगे बढ़ेगी तो पंजाब के कथित भ्रष्टाचार का पता चलेगा: दलजीत सिंह चीमा

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े परिसरों में सीबीआई की कार्रवाई को लेकर शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार पर जुबानी हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई की कार्रवाई से पंजाब में कथित भ्रष्टाचार से जुड़े कई सवाल सामने आए हैं और जांच आगे बढ़ने पर पूरा मामला और बड़ा हो सकता है। दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि सीबीआई की रेड ने पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मई में हुई ईडी की कार्रवाई का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री के ओएसडी राजवीर सिंह के एक दोस्त के घर से बड़ी रकम बरामद होने और पैसे से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया। चीमा ने कहा कि उस समय भी भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठे थे। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के बंगलों में ईडी की कार्रवाई को लेकर भी कई बातें सामने आईं। उनका आरोप है कि दिल्ली के नेताओं की मौजूदगी और कथित समानांतर व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। ईडी की ओर से तीन बार एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखे जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। हाई कोर्ट ने भी सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा था। चीमा ने कहा कि जब जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद कार्रवाई शुरू हुई तो उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने दावा किया कि पंजाब से जुड़ा यह मामला आगे चलकर दिल्ली में सामने आए कथित घोटालों से भी बड़ा हो सकता है। दलजीत सिंह चीमा ने पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कथित भ्रष्टाचार केवल किसी एक विभाग तक सीमित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों की पोस्टिंग, नीतियों में बदलाव, हथियारों के लाइसेंस और टेंडर की शर्तों में बदलाव जैसे मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर किसी नीति में बदलाव करवाना हो, किसी अधिकारी की पोस्टिंग करवानी हो या किसी टेंडर की शर्त बदलवानी हो, तो कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान के ‘कट्टर ईमानदार’ होने के दावों पर भी निशाना साधा। चीमा ने कहा कि एक तरफ सरकार ईमानदारी का दावा करती है, जबकि दूसरी तरफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई में गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सीबीआई की कार्रवाई को पंजाब के खिलाफ कार्रवाई बताए जाने के आरोपों पर चीमा ने कहा कि भ्रष्टाचार की जांच को पंजाब के खिलाफ हमला नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि जब सरकार से एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने को कहा जा रहा था, तब उसने कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जांच की मांग पहले से की जा रही थी तो अब कार्रवाई होने पर इसे संविधान या पंजाब के खिलाफ हमला क्यों बताया जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि पंजाब के साथ कथित तौर पर किस तरह का नुकसान हुआ। चीमा ने आम आदमी पार्टी के उन नेताओं का भी जिक्र किया, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कार्रवाई हुई थी। उन्होंने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन जेल में थे, तब भी आम आदमी पार्टी उन्हें देशभक्त बताती रही। चीमा ने तंज कसते हुए कहा कि जेल से बाहर आने के बाद भी उन्हें पंजाब में लाकर महत्वपूर्ण भूमिका दी गई। पार्टी का यह दावा कि उसके नेता देश के लिए काम करने आए हैं, उसके नेताओं की कथित गतिविधियों के बावजूद लगातार दोहराया जाता रहा है। सीबीआई की कार्रवाई के समय को चुनाव से जोड़ने पर चीमा ने कहा कि ऐसी कार्रवाई बहुत पहले होनी चाहिए थी। अगर जांच पहले शुरू होती तो पंजाब को कथित तौर पर हुए नुकसान को कम किया जा सकता था। लेकिन, देर से हुई कार्रवाई को भी सही दिशा में कदम माना जाना चाहिए। सरकार के आखिरी छह महीने भ्रष्टाचार करने की कोई छूट नहीं देते और अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो चुनाव से पहले या बाद में उसकी जांच होनी चाहिए। जांच आगे बढ़ने पर ही स्पष्ट होगा कि पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर क्या है और पंजाब में कथित भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी किसकी बनती है।

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