एनडीए नेताओं ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को बताया ‘नौटंकी’, कहा-सीईसी के इस्तीफे की मांग गलत

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को एनडीए ने नौटंकी बताया है। राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के सांसदों के साथ आकाशवाणी भवन के बाहर विरोध जताया। इस दौरान उनकी बहन व कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं। आईएएनएस से बातचीत में शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने कहा कि राहुल गांधी को अपने पद की गरिमा का कोई सम्मान नहीं है, चाहे वे कांग्रेस अध्यक्ष हों या विपक्ष के नेता। जब नीट का मुद्दा उठा तो उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। वे अपने साथ संविधान की एक कॉपी लेकर चलते हैं। क्या संविधान बिना इजाजत कहीं भी विरोध प्रदर्शन शुरू करने या नौटंकी करने की अनुमति देता है? उन्हें इस तरह का ड्रामा करने की आदत हो गई है। जब ज्ञानेश कुमार पद पर नहीं थे, तब लोकसभा के चुनाव हुए। शिवसेना नेता ने कहा कि चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने पहले ईवीएम पर सवाल उठाए, लेकिन सिद्ध नहीं कर पाए। इसके बाद जब मुद्दा नहीं मिला तो वोट चोरी का मुद्दा उठाया, लेकिन वह सिद्ध नहीं कर पाए। जब कुछ नहीं मिला तो वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वे चाहते हैं कि बोकस लोग वोट करे? जिन लोगों ने उन्हें वोट दिया है और जिनके वोटिंग के बदौलत वे जीते हैं। क्या वे छोड़ने को तैयार हैं? क्योंकि वे वोटर तब भी वहीं थे। अगर हर चीज पर आपत्ति है तो उन्हें खुद के चुने जाने पर भी आपत्ति होनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं को राहुल गांधी के इस्तीफे की मांग करनी चाहिए क्योंकि उन्होंने पूरी तरह से एक ‘अर्बन नक्सल’ की भूमिका अपना ली है। वह विपक्ष के नेता के पद की गरिमा को मिट्टी में मिला रहे हैं। भ्रम फैलाना और अराजकता पैदा करना ही उनका मकसद बन गया है. केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा कि राहुल गांधी का एकमात्र काम धरना देना ही रह गया है। अब उनके पास कोई और काम नहीं बचा है। रैलियां निकालने और झूठ बोलने के लिए राहुल गांधी को वहां इतनी देर तक बैठने की जरूरत नहीं है। वे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जो कि अच्छी बात नहीं है क्योंकि बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें संविधान दिया है। संविधान के अनुसार, चुनाव आयोग को गलत मतदाताओं के नाम हटाने का अधिकार है, जिसमें दो जगहों पर पंजीकृत मतदाता भी शामिल हैं। राहुल गांधी को चुनाव आयोग से बात करनी चाहिए। यह मामला चुनाव आयोग का है, सरकार का नहीं। हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव आयोग एक साफ-सुथरी मतदाता सूची तैयार करेगा।

आंध्र प्रदेश: विशाखापट्टनम में गलती से राइफल चलने से एक कांस्टेबल घायल

विशाखापत्तनम। मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विशाखापट्टनम दौरे के दौरान सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात आंध्र प्रदेश पुलिस के एक कांस्टेबल को उनकी सर्विस राइफल के अनजाने में चलने से चोट लग गई। यह घटना आईएनएस देगा में हुई, जब सशस्त्र रिजर्व (एआर) कांस्टेबल राजनाथ सिंह के विमान की सुरक्षा के लिए ड्यूटी पर तैनात थे। आंध्र प्रदेश विशेष पुलिस बटालियन से जुड़े एआर कांस्टेबल अप्पलाकोंडा को सीने के निचले बाएं हिस्से में गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार, कांस्टेबल के पास मौजूद सेल्फ-लोडिंग राइफल (एसएलआर) अनजाने में चल गई। तेज आवाज सुनकर पुलिस और सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे। कांस्टेबल बेहोश पाए गए। उन्हें तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टर उनकी हालत पर कड़ी नजर रख रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। अधिकारियों ने राइफल के अनजाने में चलने के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को विशाखापट्टनम में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में फ्लीट सपोर्ट शिप-1 (एफएसएस-1) का शुभारंभ करने पहुंचे। उन्होंने फ्लीट सपोर्ट शिप-5 (एफएसएस-5) की नींव भी रखी और उन्नत स्लिपवे-4 तथा 300 टन क्षमता वाली गोलियाथ क्रेन का उद्घाटन किया। सोमवार को विशाखापट्टनम पहुंचे राजनाथ सिंह ने ‘बड़ाखाना’ कार्यक्रम के दौरान नौसेना कर्मियों से बातचीत की। एफएसएस-1 के प्रक्षेपण, एफएसएस-5 की नींव रखने और उन्नत स्लिपवे-4 तथा 300 टन के गोलियाथ क्रेन के उद्घाटन के बाद, वे ओडिशा के कोरापुट के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में दूसरी शक्ति इंजन निर्माण इकाई का उद्घाटन किया। उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के कोरापुट डिवीजन द्वारा 2000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी के उपलक्ष्य में आयोजित ऐतिहासिक कार्यक्रम का उद्घाटन किया। विशाखापत्तनम में आयोजित इस कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, आंध्र प्रदेश के सड़क, भवन, अवसंरचना एवं विकास मंत्री जनार्दन रेड्डी, विशाखापत्तनम सांसद श्रीभरत मथुकुमिल्ली, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्वी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय भल्ला, पूर्वी तट के तटरक्षक कमांडर अतिरिक्त महानिदेशक डोनी माइकल, एचएसएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रियर एडमिरल सी रघुराम (सेवानिवृत्त) तथा भारतीय नौसेना और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

असम: नगांव लोकसभा उपचुनाव में 76 प्रतिशत वोटिंग; भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच कड़ा मुकाबला

गुवाहाटी। असम की नगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए वोटिंग सोमवार शाम 5 बजे शांतिपूर्ण ढंग से खत्म हुई। इस दौरान निर्वाचन क्षेत्र के 19.05 लाख रजिस्टर्ड वोटर्स में से लगभग 76 प्रतिशत ने अपने वोट डाले। चुनाव अधिकारियों ने बताया कि वोटिंग का अंतिम प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि पोलिंग स्टाफ ने उन लोगों को वोट डालने की अनुमति दी जो तय समय से पहले पोलिंग स्टेशन में आ गए थे। नगांव संसदीय क्षेत्र में सुबह 7 बजे वोटिंग शुरू हुई थी। इस क्षेत्र में विधानसभा के आठ हिस्से आते हैं। यह उपचुनाव कांग्रेस के पूर्व लोकसभा सदस्य प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद कराना पड़ा था। बोरदोलोई ने बाद में भाजपा के टिकट पर दिसपुर से असम विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें मुख्य मुकाबला भाजपा उम्मीदवार देवाशीष शर्मा, कांग्रेस उम्मीदवार सिबामनी बोरा और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के बीच है। पूरे निर्वाचन क्षेत्र में मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, हालांकि विपक्षी दलों ने कुछ मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। कांग्रेस नेता और धुबरी लोकसभा सदस्य रकीबुल हुसैन ने दिन में आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा क्षेत्र के कई मतदान केंद्रों में अज्ञात लोग घुस आए थे। उन्होंने बीजेपी पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई। चुनाव अधिकारियों ने सुचारू मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पूरे निर्वाचन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के प्रमुख उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण इस राजनीतिक मुकाबले ने काफी ध्यान आकर्षित किया और इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता वोट डालने पहुंचे। नगांव उपचुनाव पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसके नतीजे असम के अहम संसदीय क्षेत्रों में से एक के राजनीतिक मिजाज का संकेत दे सकते हैं। वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होनी है, जब सभी 15 उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत का फैसला होगा। असम में हो रहे बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह उपचुनाव और भी अहम हो गया है, क्योंकि भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ राज्य में अपने-अपने समर्थक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। नगांव लोकसभा उपचुनाव की जरूरत तब पड़ी, जब कांग्रेस के मौजूदा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद 20 मार्च, 2026 को लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद बोरदोलोई ने असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिससे नगांव की सीट खाली हो गई और उपचुनाव की स्थिति बन गई। यह सीट इसलिए भी अहम है, क्योंकि 2019 से इस पर कांग्रेस का कब्जा रहा है और अब यहां भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है। कांग्रेस के लिए नगांव पिछले दो लोकसभा चुनावों से एक मजबूत गढ़ रहा है। 2019 में प्रद्युत बोरदोलोई ने भाजपा के रूपक शर्मा को बहुत कम अंतर से हराया था, जबकि 2024 में बोरदोलोई ने भाजपा के सुरेश बोराह को हराकर कांग्रेस की स्थिति और मजबूत की थी। इसलिए, मौजूदा उपचुनाव इस बात की बड़ी परीक्षा है कि क्या बोरदोलोई के पार्टी छोड़ने और एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के मैदान में उतरने के बावजूद कांग्रेस इस सीट को अपने पास बनाए रख पाएगी।

महाराष्ट्र में सूखे पर बोले उपमहापौर संजय घाडी- केंद्र से किसानों को मिलेगी बड़ी मदद

मुंबई। महाराष्ट्र के उपमहापौर संजय घाडी ने राज्य में गहराए सूखे के संकट पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि शिवसेना के मुख्य नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री के सामने महाराष्ट्र के सूखे की स्थिति रखी है। घाडी ने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार की मदद से किसानों को राहत मिलेगी और किसी की भी दीपावली अंधेरे में नहीं बीतेगी। साथ ही उन्होंने पानी के इस्तेमाल, गणेशोत्सव में पर्यावरण संरक्षण और मुंबई में अवैध होर्डिंग्स पर भी अपनी राय रखी। महाराष्ट्र के उपमहापौर संजय घाडी ने कहा, “हमारे शिवसेना के मुख्य नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिल्ली जाकर महाराष्ट्र में आए सूखे की स्थिति प्रधानमंत्री के सामने रखी है। मुझे लगता है कि 265 तहसीलों में अकाल घोषित किया गया है। कुछ तालुकों और कुछ जिलों में तो बारिश ही नहीं हुई, जिस कारण हमारे किसान भाइयों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है और वे प्रति एकड़ 25,000 से 50,000 रुपए की मांग कर रहे हैं। इस सब के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर मदद करेगी।” उन्होंने आगे कहा कि इस विषय पर शिंदे और पीएम मोदी के बीच बैठक हो चुकी है, और उन्होंने कहा कि जब एकनाथ शिंदे कहते हैं और उनके साथ पीएम नरेंद्र मोदी हैं तो 100 प्रतिशत केंद्र के माध्यम से महाराष्ट्र को अच्छी मदद मिलेगी। गणेशोत्सव में बीएमसी के योगदान और महाराष्ट्र में अवैध होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर और साइनबोर्ड हटाने को लेकर जारी निर्देश पर उन्होंने कहा कि उन्होंने एक बहुत अच्छा निर्णय घोषित किया है कि 10 दिनों तक इशारों की मिट्टी और सर्टिफाइड बैनरों के अलावा अन्य बैनरों पर कार्रवाई होगी। यह जरूरी भी है, क्योंकि उन्होंने पहले भी गणेशोत्सव में अपील की थी कि सभी लोग शाडू मिट्टी की मूर्ति लाएं और पर्यावरण की मदद करें, क्योंकि शाडू मिट्टी की मूर्ति का विसर्जन आसानी से तालाब में, कृत्रिम तालाब में या घर के छोटे बर्तन में भी किया जा सकता है। संजय घाडी ने आगे कहा कि उसी मिट्टी को हम अपने पेड़-पौधों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यही उनका उद्देश्य है। दूसरा, उन्होंने कहा है कि 365 दिन मुंबई शहर में लगने वाले गैरकानूनी और अनधिकृत होर्डिंग्स पर कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए महानगरपालिका प्रशासन को उपलब्ध नियमों के तहत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और नियमों का उपयोग करके, यदि और अधिक कड़े नियम बनाने की आवश्यकता है तो अच्छे नियम बनाकर इसे लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं भी सभी लोगों से अपील करूंगा कि हर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों पर यह प्रतिबंध लगाए कि होर्डिंग न लगाएं। आपने देखा होगा कि ठाणे में भी ब्रिज के ऊपर से होर्डिंग गिरने से टू-व्हीलर पर जा रही महिला का एक्सीडेंट हो गया था। हमारे यहां भी जब हम वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जाते हैं, तो वहां अवैध रूप से लगे होर्डिंग टूटकर उनकी लकड़ियां इधर-उधर बिखर जाती हैं। उपमहापौर ने कहा कि इसकी वजह से एक्सीडेंट भी हो सकते हैं। किसी की जान भी जा सकती है, इसलिए मैं आपसे विनती करता हूं, आपके माध्यम से मुंबईवासियों और सभी राजनीतिक नेताओं से विनती करूंगा कि आप इस पर विचार कीजिए और हमारी मुंबई की महापौर ने जो अपील की है, उसका साथ दीजिए।

चेन्नई में नवजात को लेकर विवाद, मां ने फर्टिलिटी क्लिनिक और दंपति पर लगाया बच्चा न लौटाने का आरोप

चेन्नई। चेन्नई में एक 27 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर महिला ने पुलिस से शिकायत की है कि निजी फर्टिलिटी क्लिनिक में जन्मे उसके बेटे को एक दंपति के पास दे दिया गया था, जो अब बच्चे को वापस लौटाने से इनकार कर रहा है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने क्लिनिक के डॉक्टर और तिरुवोत्तियूर के एक दंपति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चा दंपति के पास कैसे पहुंचा और क्या यह व्यवस्था सिर्फ अस्थायी थी। चेंगलपट्टू की रहने वाली के. मेगला ने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने अपने नवजात बेटे की देखभाल के लिए उसे तीन महीने के लिए उस दंपति के पास रखा था। अब उनका आरोप है कि दंपति बच्चा लौटाने को तैयार नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी पक्षों से पूछताछ की जा रही है, हालांकि पुलिस का कहना है कि उसके बयानों में कुछ विरोधाभास थे, जिनकी और जांच की जरूरत है। पुलिस के मुताबिक, मेगला का एक चार साल का बेटा पहले से ही था और फरवरी 2025 में प्राकृतिक कारणों से उसके पति की मौत हो गई थी। उस समय वह अपने दूसरे बच्चे के साथ तीन महीने की गर्भवती थी और आर्थिक तंगी से जूझ रही थी। अपनी शिकायत में मेगला ने बताया कि उसे सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन दिखा, जिसमें कोलाथुर के एक अस्पताल में मुफ्त इलाज की पेशकश की गई थी। वह अपनी गर्भावस्था के सातवें महीने में उस अस्पताल गई और डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों को अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बताया। 29 जुलाई 2025 को उसने अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया। मेगाला का आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने शुरू में उनसे कहा था कि नवजात शिशु को आइसोलेशन में रखने की जरूरत है। उनके अनुसार, डिलीवरी के 10 दिन बाद ही उन्हें बच्चा दिखाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि एक दूसरे डॉक्टर ने उन्हें तिरुवोत्तियूर के एक ऐसे जोड़े से मिलवाया जिनकी कोई संतान नहीं थी और सुझाव दिया कि वे बच्चे को तीन महीने तक अपने पास रखें और फिर उसे उन्हें वापस कर दें। मेगला ने कहा कि वह इस अस्थायी व्यवस्था के लिए सहमत हो गईं। उनकी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में अस्पताल के स्टाफ ने बच्चे को उस जोड़े को सौंप दिया। हालांकि, जब उन्होंने हाल ही में उनसे संपर्क किया और अपने बेटे को वापस मांगा, तो उस जोड़े ने मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी।

राजस्थान पुलिस ने मध्य प्रदेश के झाबुआ में 26 साल से फरार डकैत किया गिरफ्तार

जयपुर। अजमेर जिले में राजस्थान पुलिस ने एक घोषित अपराधी और कथित डकैत को गिरफ्तार किया है। डकैत 2000 के एक डकैती मामले में 26 साल से फरार था। यह गिरफ्तारी राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा वांछित अपराधियों, गिरफ्तारी वारंट का सामना कर रहे व्यक्तियों और घोषित अपराधियों को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई है। यह अभियान 15 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2026 तक चलाया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान दल्ला उर्फ ​​रमेश/दल्ला बारिया के रूप में हुई है, जिसने कथित तौर पर अपने साथियों के साथ 3 अप्रैल, 2000 को मंगलियावास पुलिस थाना क्षेत्र के एनएच-8 पर स्थित वैष्णो देवी पेट्रोल पंप पर डकैती की थी। गिरोह कथित तौर पर 1,64,513 रुपए नकद लेकर फरार हो गया था। रामसन उर्फ ​​कल्ला, बापू उर्फ ​​भानिया, पौ उर्फ ​​बाबू, ओजिनू उर्फ ​​जिनू, धुलिया और नाहरिया समेत कई सह-आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन डल्ला 26 साल तक फरार रहा। नासिराबाद के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था। अजमेर के पुलिस अधीक्षक हर्ष वर्धन अग्रवाल के निर्देशों के बाद, मंगलियावास एसएचओ हरीश चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। यह अभियान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) लालचंद कायल के निर्देशन और सर्किल अधिकारी सत्येंद्र नेगी (ग्रामीण) और नीरज गुप्ता (पिसंगन) के पर्यवेक्षण में चलाया गया। पुलिस टीम ने मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले में व्यापक खुफिया जानकारी जुटाने का अभियान चलाया, जहां आरोपी के रहने की आशंका थी। खबरों के मुताबिक, अधिकारियों ने कल्याणपुर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नेगड़िया, महेंद्रिखेड़ा और सुल्ला मेहुदा जैसे गांवों में भेस बदलकर डेरा डाला। आरोपी की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के बाद, टीम ने छापा मारा और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, दल्ला ने शुरू में अपनी पहचान के बारे में अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश की। हालांकि, तकनीकी सत्यापन और पूछताछ के बाद उसकी पहचान स्थापित हो गई। कल्याणपुर पुलिस और स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से उसकी पहचान डल्ला उर्फ ​​रमेश/डल्ला बारिया, पुत्र कोडिया उर्फ ​​सुमला बारिया, उम्र 50 वर्ष, निवासी कल्याणपुर पुलिस थाना क्षेत्र के नेगड़िया, झाबुआ जिले के रूप में हुई। बाद में उसे जारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में लाया गया।

अक्षर योग केंद्र को आयुष मंत्रालय से बड़ी मान्यता, ‘लीडिंग योग इंस्टीट्यूशन’ का दर्जा मिला

बेंगलुरु। योग शिक्षा के क्षेत्र में बेंगलुरु स्थित अक्षर योग केंद्र को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के योग सर्टिफिकेशन बोर्ड (वाईसीबी) ने अक्षर योग केंद्र को ‘लीडिंग योग इंस्टीट्यूशन’ यानी प्रमुख योग संस्थान के तौर पर मान्यता दी है। यह मान्यता योग सर्टिफिकेशन बोर्ड के फ्रेमवर्क के तहत इंस्टीट्यूशनल एक्रेडिटेशन की सबसे ऊंची कैटेगरी मानी जाती है। यह सम्मान उन चुनिंदा और स्थापित योग संस्थानों को दिया जाता है, जिन्हें उनकी विरासत, दायरे, इंफ्रास्ट्रक्चर, एकेडमिक सिस्टम और योग शिक्षा में लगातार योगदान के लिए पहचाना जाता है। इस मान्यता के बाद अक्षर योग केंद्र देश के शीर्ष योग संस्थानों की श्रेणी में शामिल हो गया है। संस्थान के मुताबिक, यह मान्यता उसके दो दशकों से ज्यादा के सफर को सम्मान देती है। अक्षर योग केंद्र के लिए यह पड़ाव इसके संस्थापक हिमालयन सिद्ध अक्षर के मार्गदर्शन में 20 साल से किए जा रहे काम का परिणाम है। संस्थान का फोकस पारंपरिक योग ज्ञान को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सीखने वालों और प्रोफेशनल्स के लिए व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से योग सीखने का रास्ता तैयार करना रहा है। इन वर्षों में अक्षर योग केंद्र ने आसन, प्राणायाम, ध्यान, मुद्रा, योग दर्शन, अलाइनमेंट, सिखाने के तरीके, वेलनेस और एडवांस्ड योग प्रैक्टिस से जुड़े कई प्रोग्राम विकसित किए हैं। संस्थान का दावा है कि इसकी पहल 80 से ज्यादा देशों में 2 करोड़ से ज्यादा छात्रों और अभ्यास करने वालों तक पहुंची है, जबकि इसके एजुकेशनल इकोसिस्टम के जरिए 50,000 से ज्यादा योग शिक्षकों को ट्रेनिंग दी गई है। अक्षर योग केंद्र ने योग में 42 गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए हैं, जो इसकी ट्रेनिंग और पहुंच बढ़ाने वाली पहलों के बड़े पैमाने को दर्शाते हैं। इसके प्रोग्राम में छात्र, एथलीट, शिक्षक, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल, पुलिस और डिफेंस कर्मी, सीनियर सिटिजन, दिव्यांग व्यक्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग करने वाले लोग शामिल रहे हैं। इस मान्यता पर टिप्पणी करते हुए अक्षर योग केंद्र के संस्थापक हिमालय सिद्ध अक्षर ने कहा, “यह पहचान हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह योग की प्रामाणिकता और अनुशासन को बनाए रखने की हमारी जिम्मेदारी को और मजबूत करती है। दो दशकों से अधिक समय से, हमारा प्रयास एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का रहा है जहाँ पारंपरिक योग ज्ञान को व्यवस्थित शिक्षा और कठोर शिक्षक प्रशिक्षण का समर्थन मिले।” एक प्रमुख योग संस्थान के रूप में, अब अक्षर योग केंद्र वाईसीबी के दिशानिर्देशों के अनुसार कई श्रेणियों में प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए अधिकृत है, जिनमें योग स्वयंसेवक, योग प्रोटोकॉल प्रशिक्षक, योग वेलनेस प्रशिक्षक, योग शिक्षक और मूल्यांकनकर्ता, योग मास्टर, योग चिकित्सक, चिकित्सीय योग सलाहकार, योगासन कोच और स्कूल-स्तरीय योग शिक्षक कार्यक्रम शामिल हैं। संस्थान अब योग्य उम्मीदवारों का वाईसीबी ढांचे के तहत मूल्यांकन करने और सतत योग शिक्षा कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार और सम्मेलन जैसी पेशेवर विकास पहल आयोजित करने के लिए भी अधिकृत है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों पर केंद्रित पहलों सहित अपनी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति के साथ, अक्षर योग केंद्र का लक्ष्य भारत की प्राचीन ज्ञान प्रणाली को व्यापक वैश्विक समुदाय तक पहुंचाना है।

राहुल-प्रियंका की हिरासत पर अखिलेश का हमला, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध दर्ज करा रहे लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी दलों के सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले ले लिया। इस पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को भाजपा के इशारे पर काम नहीं करना चाहिए। हम सभी लोग इलेक्शन कमीशन के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को इतने कार्यालय बनाने की क्या जरूरत थी। चुनाव आयोग के बिल्डिंग में ही एक फ्लोर पर कार्यालय खोल लेना चाहिए था। उन्होंने कहा, “भाजपा चाहती है कि देश में वहीं नागरिक रहें जो भाजपा के नेता, कार्यकर्ता हैं, जो नहीं हैं उनके वोट काटे जाएं। विपक्ष के लोग ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हैं, उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। विपक्ष के इस आंदोलन के सामने भाजपा को बचाव में नहीं आना चाहिए। विपक्ष में हम सभी चुनाव आयोग के खिलाफ बोल रहे हैं। भाजपा क्यों आगे आ रही है। भाजपा इसीलिए सामने आ रही है ताकि आयोग के माध्यम से वोट चोरी की जा सके। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि क्या आकाशवाणी किसी की निजी संपत्ति है? यह इस देश की संपत्ति है। यह हमारी संपत्ति है। यह जनता की संपत्ति है। यह सरकार की संपत्ति नहीं है, यह आपकी संपत्ति है। क्या हमने आकाशवाणी को घेरा है? क्या हमने किसी को बंधक बनाया है। देश में जिस तरह के हालात हैं, उसके बारे में पूरी दुनिया और पूरा देश जानता है। एसआईआर के नाम पर वोट चुराए जा रहे हैं और भाजपा को चुनाव जिताया जा रहा है। मेरा मानना ​​है कि यह अन्याय है, संविधान का उल्लंघन है और लोकतंत्र की हत्या है। ममता गुट के नेता कल्याण बनर्जी ने कहा कि इंडी गठबंधन और सभी राजनीतिक दलों ने एसआईआर का विरोध किया है। हम मुख्य रूप से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। जिस तरह से, पूरी तरह से असंवैधानिक तरीके से, देश के मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और जिसके नतीजे में भाजपा जीत रही है। सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ इंडिया ब्लॉक गठबंधन तक सीमित नहीं है। ज्ञानेश कुमार जिस तरह से काम कर रहे हैं, उसे लेकर पूरे देश में प्रतिक्रिया हो रही है। पार्टियों से बाहर के लोग भी अपने-अपने तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं। पहले, पार्टी नेता विरोध करते थे और कहते थे कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि शिकायत उनके अपने ही सहयोगियों ने की है। चुनाव आयुक्त के तौर पर काम कर रहे दो लोगों का कहना है कि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया जाता है। ज्ञानेश कुमार अकेले ही फैसले लेते हैं। कांग्रेस नेता उदय भानु ने कहा कि दिल्ली पुलिस लोकतंत्र के हत्यारों को बचाने की कोशिश कर रही है। हालात ऐसे हैं कि जो लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें उठाकर ले जाया जा रहा है। कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। जब मैं यह बात कह रहा हूं, तब विपक्ष के नेता राहुल गांधी हर युवा और हर भारतीय के वोट देने के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं।

एसआईआर पर राजनीति कर रहे राहुल गांधी,’ 13 करोड़ वोट क्यों कटे? रामदास आठवले ने बताया पूरा हिसाब

नई दिल्ली। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एसआईआर मुद्दे पर राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन द्वारा 13 करोड़ वोट काटे जाने का ब्रेकअप उनके पास है और इसमें जानबूझकर वोट काटने जैसा कुछ नहीं है। साथ ही उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर भी तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पर अपमानजनक टिप्पणी करना ठीक नहीं है। रामदास आठवले ने कहा, “एसआईआर के मुद्दे पर राहुल गांधी और सभी विपक्षी दल राजनीति कर रहे हैं और यह बात सही है कि इलेक्शन कमीशन ने 13 करोड़ वोट काटे थे, लेकिन उसकी जो महत्वपूर्ण जानकारी है, वह जानकारी मेरे पास है। 2.8 करोड़ मृत लोगों के नाम काटे गए हैं। दूसरा, 3 करोड़ लोग लापता हैं, मतलब उनका पता ही नहीं है, ऐसे 3 करोड़ वोट काटे गए हैं और 6.3 करोड़ मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं, इसलिए उनके वोट काटे गए हैं, इस तरह कुल 13 करोड़ वोट काटे गए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी से मेरा निवेदन है कि इलेक्शन कमीशन जो बात कह रहा है, उस पर वे आंदोलन कर रहे हैं, उन्हें आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन जानबूझकर माहौल बिगाड़ने का काम उन्हें नहीं करना चाहिए, इलेक्शन कमीशन से बात करनी चाहिए। जिन लोगों के नाम कटे हैं, उनके नाम दोबारा डालने का आदेश भी ज्ञानेश कुमार, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने दिया है और तीनों इलेक्शन कमिश्नरों में कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने पूरे देश के सामने आकर बताया है कि एसआईआर का निर्णय हम सब ने तय करके लिया था। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि जो नाम गलत हैं, ऐसे गलत नामों को हटाने के लिए ही यह एसआईआर था, इसलिए मुझे लगता है कि एसआईआर के मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। राहुल गांधी और विपक्ष से भी हमारा निवेदन है कि अगर वोट काटे गए हैं तो वे सब वोट उन्हें ही मिलने वाले थे, ऐसा नहीं है, उसमें से कुछ वोट हमको भी मिलने वाले थे, इसलिए जानबूझकर वोट काटने की बात नहीं है। सरकार को इलेक्शन कमीशन को आदेश देने का कोई अधिकार बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जो संविधान दिया है, उस संविधान ने इलेक्शन कमीशन को स्वतंत्र अधिकार दिए हैं। उनको निर्णय लेने का पूरा अधिकार है। इलेक्शन कैसा करना है, लिस्ट कैसे बनानी है, यह जिम्मेदारी इलेक्शन कमीशन की होती है। उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन पर सरकार का बिल्कुल दबाव नहीं है। इलेक्शन कमीशन एक स्वतंत्र संस्था है। जब 2014 में भाजपा की सरकार बनी थी, तब इलेक्शन कमीशन को कांग्रेस पार्टी ने नियुक्त किया था। इसलिए मुझे लगता है कि इस तरह की राजनीति करना ठीक नहीं है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर उन्होंने कहा कि दूसरा विषय है कि अभिजीत दीपके हमारे समाज के हैं, हमें उन पर गर्व है कि वे नौजवान हैं, और उन्होंने पेपर लीक के मामले पर पूरे देश का ध्यान आकर्षित करने का काम किया था। सरकार ने भी उनकी मांग के मुताबिक निर्णय ले लिया है, और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया। अब ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं तो हर मुद्दे पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को इस तरह आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं। आठवले ने कहा कि मैं इतना बताना चाहता हूं, “एक कॉकरोच, तू थोड़ा सोच, मैं हूं नरेंद्र मोदी की टीम का कोच, इसलिए ज्यादा गड़बड़ मत कर कॉकरोच।” मुझे इतना कहना है कि प्रधानमंत्री के संबंध में गलत टिप्पणी करना ठीक नहीं है।

कैबिनेट के बड़े फैसलों की पीएम मोदी ने की सराहना, कहा- “आईटीएलए से परिवहन क्षेत्र में बढ़ेगा समन्वय; एमएसएमई को मिलेगी मजबूती

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों को देश की विकास यात्रा के लिए अहम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि कैबिनेट ने इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (आईटीएलए) के गठन को मंजूरी दी है, जिससे भारत के परिवहन तंत्र में बेहतर समन्वय, डेटा-आधारित योजना निर्माण और मल्टीमॉडल एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पहल देश के विकास पथ पर व्यापक और दूरगामी प्रभाव डालने वाली साबित होगी। सरकार का कहना है कि आईटीएलए विभिन्न परिवहन मंत्रालयों और एजेंसियों के बीच लंबे समय से मौजूद समन्वय संबंधी चुनौतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कैबिनेट के फैसले के तहत आईटीएलए को एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अनुसंधान, योजना निर्माण, परियोजनाओं के मूल्यांकन, निगरानी और प्रभाव आकलन को मजबूत बनाना है। सरकार के अनुसार, सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई और जल परिवहन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर मल्टीमॉडल परिवहन प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे परिवहन अवसंरचना विकास की दक्षता, स्थिरता और प्रभावशीलता बढ़ने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य पोस्ट में एमएसएमई क्षेत्र के लिए मंजूर किए गए एसएमई ग्रोथ फंड (एसजीएफ) को बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारत के अगले दौर के उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि यह फंड छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को अपने कारोबार का विस्तार करने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने, विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने और वैश्विक वैल्यू चेन से जुड़ने के लिए मजबूत मंच प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी! मंत्रिमंडल का यह निर्णय भारतीय व्यापार जगत के भावी नेताओं को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एसएमई का विकास करने, उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने, विनिर्माण का विस्तार करने, वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ जुड़ने का मंच प्रदान करता है।” सरकारी बयान के अनुसार, केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता के साथ एसएमई ग्रोथ फंड को मंजूरी दी है, जो केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित व्यापक एमएसएमई समर्थन पैकेज का हिस्सा है। वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश इक्विटी फंड शुरुआती चरण के उद्यमों और सूक्ष्म इकाइयों पर केंद्रित हैं, जबकि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए विकास-उन्मुख इक्विटी पूंजी की कमी महसूस की जाती रही है। नया फंड इसी अंतर को भरने का प्रयास करेगा। आधिकारिक बयान के अनुसार, एसएमई ग्रोथ फंड विनिर्माण, सेवाओं, तकनीक, नवाचार-आधारित उद्योगों और रणनीतिक वैल्यू चेन में काम करने वाली कंपनियों को बढ़ने का अवसर देगा। इससे ऐसे भारतीय उद्यमों का विकास होगा जो भविष्य में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। यह पहल घरेलू पूंजी बाजार को भी गहरा बनाने और विकासशील कंपनियों को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकती है।