एसआईआर विवाद: पूर्व सीएम शंकरसिंह वाघेला ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

गांधीनगर। गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने मंगलवार को चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना की। वहीं, नई दिल्ली में विपक्षी सांसदों ने मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। पुलिस ने नीति आयोग इलाके के पास मार्च को रोक दिया, जिसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के कई नेताओं और सांसदों को कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया। विपक्ष एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा और वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को फिर से शामिल करने की मांग कर रहा है। इंडिया ब्लॉक ने अपने बड़े ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान के तहत 6 अक्टूबर को मार्च निकालने का ऐलान किया था। इस अभियान में देश भर में विरोध प्रदर्शन और 1 नवंबर को नई दिल्ली में एक बड़ी रैली शामिल है। वाघेला ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में काम किया है और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए। एसआईआर प्रक्रिया और पिछले चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के कामकाज से भाजपा को राजनीतिक फायदा हुआ है। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर विचारधारा और राजनीतिक जुड़ाव के बढ़ते असर की भी आलोचना की। विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर टिप्पणी करते हुए वाघेला ने कहा कि अलग-अलग पीढ़ियों के राजनीतिक नेताओं को जन-आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक असहमति और विरोध प्रदर्शन सार्वजनिक जीवन का हिस्सा हैं और उन्हें उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों के मामले में ज़्यादा जांच-पड़ताल और पारदर्शिता की भी मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि रिटायर होने वाले जजों, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों और दूसरे सीनियर सरकारी अधिकारियों के लिए कोई नई सरकारी जिम्मेदारी संभालने से पहले एक ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ (काम से कुछ समय का ब्रेक) होना चाहिए। 86 साल के वाघेला का राजनीतिक करियर लंबा रहा है और वे कई पार्टियों और विचारधाराओं से जुड़े रहे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत आरएसएस प्रचारक के तौर पर की और बाद में जनसंघ और भाजपा से जुड़े। 1995 में भाजपा से बगावत करने के बाद वे 1996 में कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए, लोकसभा सांसद रहे और यूपीए सरकार में कपड़ा मंत्री का पद संभाला। वाघेला ने 2017 में कांग्रेस छोड़ दी और उसके बाद अलग-अलग राजनीतिक संगठन बनाए और उनमें शामिल हुए। अभी वे कांग्रेस में वापसी को लेकर बातचीत कर रहे हैं और पार्टी नेताओं ने पुष्टि की है कि बातचीत चल रही है।

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