मक्का समझौते की जिम्मेदारियों से बचने के लिए अफगानिस्तान पर हमले कर रहा पाकिस्तान: तालिबान

काबुल। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह अपनी आंतरिक समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाने और मक्का समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए अफगानिस्तान पर हमले कर रहा है। कंधार के एक धार्मिक मदरसे में बोलते हुए मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में बढ़ती राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं तथा देश के भीतर हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस्लामाबाद अफगानिस्तान पर हमले कर रहा है। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त को मक्का में एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसका उद्देश्य हमलों के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना था। समझौते के तहत किसी एक हस्ताक्षरकर्ता देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। मुजाहिद ने कहा, ”अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हालिया हमलों का उद्देश्य सऊदी अरब के साथ हुए मक्का समझौते से बचना और यह दिखाना है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में युद्ध लड़ रहा है।” अफगान मीडिया संस्थान एरियाना न्यूज के मुताबिक, मुजाहिद ने आगे कहा, ”पाकिस्तान अपने पड़ोसी इस्लामिक देश की सीमा का उल्लंघन करके अपनी नाकामियों से ध्यान हटाना चाहता है।” मुजाहिद ने पाकिस्तान के राजनीतिक हालात की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि वहां राजनीतिक गतिविधियों के लिए जगह कम हुई है और कानून के तहत मिली स्वतंत्रता भी लोगों को नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति काफी खराब हुई है। मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ संघर्ष के जरिए अपनी जनता का ध्यान इन परेशानियों से हटाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर अपनी कथित ‘गलत स्थिति’ के कारण अपने ही लोगों को खतरे में डालने का आरोप भी लगाया। मुजाहिद ने चेतावनी दी कि अफगानिस्तान पाकिस्तानी सैन्य शासन की कथित ‘धमकी और दबाव’ का उचित जवाब देगा। उनका यह बयान पाकिस्तान की सेना की ओर से गुरुवार को अफगानिस्तान के कंधार, पकतिया और खोस्त प्रांतों में एक बार फिर हवाई हमले किए जाने के बाद आया है। इन हमलों में चार नागरिकों की मौत हुई। मुजाहिद ने एक्स पर एक पोस्ट में इन हमलों की निंदा करते हुए इन्हें ‘अंधाधुंध और कायरतापूर्ण’ बताया। उन्होंने कहा कि ये हमले सभी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन और ‘आक्रामकता तथा अपराध’ का स्पष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा, ”इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान अपने लोगों को भरोसा दिलाता है कि पाकिस्तानी सैन्य शासन की ओर से किए गए इन हमलों और आक्रामक कार्रवाइयों का दृढ़ रुख के साथ उचित जवाब दिया जाएगा।” मुजाहिद ने चेतावनी दी कि इस तरह की ‘लापरवाह और शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयां’ अफगान लोगों में गुस्सा पैदा करेंगी और इसके पाकिस्तानी सैन्य शासन के लिए प्रतिकूल परिणाम होंगे। ताजा हमले पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान के कुनार और पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों के कुछ दिनों बाद हुए हैं। उन हमलों में तीन लोगों की मौत हुई थी। मुजाहिद ने 21 सितंबर को हुए हवाई हमलों की भी निंदा की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान ने अफगान क्षेत्र और नागरिकों को निशाना बनाया। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान इन हमलों का उचित जवाब देगा।

मणिपुर में महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को मिलेगी विशेष आर्थिक सहायता, सीएम खेमचंद सिंह ने किया ऐलान

इंफाल। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य सरकार ‘निंगोल चाकौबा-2026’ से पहले महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए एक विशेष वित्तीय सहायता योजना शुरू करेगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को उनके परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक मदद देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन महिला विक्रेताओं ने अभी तक अपना पंजीकरण नहीं कराया है, वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र के विधायकों (एमएलए) के माध्यम से पंजीकरण करा सकती हैं। बिश्नुपुर जिले के मोइरांग स्थित आईएनए शहीद स्मारक परिसर में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक माह का अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य जनसेवा और सुशासन की भावना को आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 से जारी जातीय हिंसा का राज्य की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। हिंसा के कारण राज्य को जीएसटी राजस्व में भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि बार-बार होने वाले बंद और नाकेबंदी से राज्य सरकार को प्रतिदिन लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये के कर राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मतभेदों का समाधान संवाद के जरिए किया जाए और ऐसे आंदोलनों से बचा जाए, जो आम जनजीवन को प्रभावित करते हैं। खेमचंद सिंह ने कहा कि हाल ही में संपन्न मणिपुर विधानसभा के आठवें सत्र में चर्चा के बाद राज्य सरकार ने करीब 3,00,050 परिवारों को 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है। इसके लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान भी कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट के बाद विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास की खाई काफी हद तक कम हुई है और कई क्षेत्रों में लोग अब फिर से शांति और सौहार्द के साथ रह रहे हैं। उन्होंने राज्य की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए सभी समुदायों से मिलकर काम करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की सरकारी योजनाओं के लाभ पात्र लोगों को वितरित किए और 25 से अधिक सेवा काउंटरों एवं स्टॉलों का निरीक्षण कर लाभार्थियों से बातचीत भी की।

भारी बारिश का असर: यूपी के कई जिलों में 26 सितंबर को स्कूल बंद, छत्तीसगढ़ में भी सभी स्कूलों में छुट्टी

लखनऊ/रायपुर। उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश का असर जनजीवन के साथ स्कूलों पर भी पड़ा है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 26 सितंबर को स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के सभी शासकीय, अशासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में 26 सितंबर को अवकाश घोषित किया है। उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के कारण कई जगह जलभराव की स्थिति बनी है। अलग-अलग जिलों में स्थानीय प्रशासन ने मौसम की स्थिति को देखते हुए स्कूलों में छुट्टी का फैसला लिया है। उपलब्ध आदेशों के अनुसार कुछ जिलों में कक्षा 8 तक, जबकि कई जिलों में कक्षा 12 तक के स्कूल बंद रखे गए हैं। हरदोई में भारी बारिश और अतिवृष्टि को देखते हुए कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों में 26 सितंबर को अवकाश घोषित किया गया है। यह फैसला खराब मौसम के बीच बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्नाव में लगातार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 12 घंटे से जारी बारिश के बीच कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों को 26 सितंबर को बंद रखने का आदेश दिया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। कानपुर में अत्यधिक बारिश के कारण 26 सितंबर को कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी स्थानीय प्रशासन की ओर से इसी तरह के फैसले लिए गए हैं। प्रयागराज जिला प्रशासन ने मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें 25 से 27 सितंबर के बीच प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में आंधी-तूफान, बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका के मद्देनजर लोगों से सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रशासन ने बारिश और तूफान के दौरान लोगों को टिन की छत, होर्डिंग, बिजली के खंभों, पेड़ों और मोबाइल टावर से दूर रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही अनावश्यक यात्रा से बचने और बिजली चमकने के दौरान पक्के भवन में शरण लेने को कहा गया है। आकाशीय बिजली के दौरान पेड़ के नीचे खड़े न होने, तालाब और जलाशयों से दूरी बनाए रखने तथा धातु वाली वस्तुओं को छूने से बचने की सलाह भी दी गई है। मौसम की जानकारी के लिए ‘सचेत’ और ‘दामिनी’ ऐप का इस्तेमाल करने को कहा गया है। बारिश को देखते हुए प्रयागराज में भी 26 सितंबर को प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित किए जाने की जानकारी है। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में भारी बारिश को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूरे राज्य में 26 सितंबर को स्कूल बंद रखने की घोषणा की है। यह आदेश सभी शासकीय, अशासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों के लिए है। मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को घर पर रखने के साथ लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की।

पुण्यतिथि विशेष : सुरों के जादूगर हेमंत कुमार, जिनकी आवाज आज भी दिलों में गूंजती है

नई दिल्ली। हिंदी और बंगाली सिनेमा के सुनहरे दौर में अपनी रेशमी आवाज से श्रोताओं के दिलों में जगह बनाने वाले हेमंत कुमार मुखोपाध्याय सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि संगीतकार और फिल्म निर्माता भी थे। 26 सितंबर को उनकी पुण्यतिथि है। हेमंत कुमार का जन्म वाराणसी में हुआ था, जबकि उनके परिवार की जड़ें पश्चिम बंगाल के बहारू गांव से जुड़ी थी। बीसवीं सदी के शुरुआती वर्षों में उनका परिवार कोलकाता आकर बस गया। हेमंत कुमार का बचपन और शिक्षा कोलकाता में ही हुई। इसी शहर में उनकी मुलाकात कवि और लेखक सुभाष मुखोपाध्याय से हुई, जो उनके करीबी मित्र बने। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद हेमंत कुमार ने जादवपुर विश्वविद्यालय में अभियांत्रिकी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, लेकिन संगीत के प्रति बढ़ते आकर्षण के कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। कुछ समय तक उन्होंने साहित्य में भी हाथ आजमाया। उनकी कई लघुकथाएं उस दौर की प्रतिष्ठित बांग्ला पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। हालांकि, अंततः संगीत ही उनका जीवन और करियर बन गया। हेमंत कुमार ने 1933 में ऑल इंडिया रेडियो के लिए अपना पहला गीत रिकॉर्ड कराया। बंगाली संगीतकार शैलेश दासगुप्ता से उन्हें काफी प्रेरणा मिली। 1980 के दशक में एक टेलीविजन साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि उन्होंने उस्ताद फैयाज खान से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी, लेकिन उस्ताद के निधन के बाद यह प्रशिक्षण आगे जारी नहीं रह सका। संगीत की दुनिया में शुरुआती सफर उनके लिए आसान नहीं था। कई जगह स्वर परीक्षा देने के बावजूद उन्हें असफलता मिली और कोई संगीत निर्देशक उन्हें अपने साथ काम देने के लिए तैयार नहीं था। लेकिन संगीत के प्रति उनका जुनून और अपनी आवाज पर विश्वास कायम रहा। संघर्ष के उस दौर में उन्होंने हार मानने के बजाय साहित्य की ओर भी रुख किया। बाद में जब उन्हें संगीत की दुनिया में अवसर मिला, तो उनकी विशिष्ट आवाज ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। 1937 में हेमंत कुमार ने कोलंबिया लेबल के लिए अपना पहला गैर-फिल्मी रिकॉर्ड जारी किया। इसमें संगीत शैलेश दासगुप्ता का था और गीत नरेश भट्टाचार्य ने लिखा था। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया के लिए गैर-फिल्मी गीत रिकॉर्ड किए। उनका पहला हिंदी रिकॉर्ड भी इसी कंपनी के लिए जारी हुआ, जिसमें ‘कितना दुख भुलाया तुमने’ और ‘ओ प्रीत निभाने वाली’ जैसे गीत शामिल थे। हेमंत कुमार रवींद्र संगीत के प्रमुख गायकों में भी गिने जाते हैं। 1944 में उन्होंने बांग्ला फिल्म ‘प्रिया बंधाबी’ के लिए पहली बार रवींद्र संगीत रिकॉर्ड किया। इसी वर्ष उन्होंने कोलंबिया लेबल के लिए गैर-फिल्मी रवींद्र संगीत भी रिकॉर्ड किया। उन्होंने 1947 में बांग्ला फिल्म ‘अभियात्री’ के लिए संगीत निर्देशन किया। हिंदी सिनेमा में भी उनकी आवाज ने अमिट छाप छोड़ी। ‘है अपना दिल तो आवारा,’ ‘बेकरार करके हमें यूं न जाइए,’ ‘याद किया दिल ने’ और ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं’ जैसे गीत उनकी पहचान का हिस्सा बने। उनके गायन में भावुकता, ठहराव और सहजता का अनूठा मेल था। यही वजह रही कि उनकी आवाज कई पीढ़ियों के श्रोताओं तक पहुंची। उनका निधन 26 सितंबर 1989 को कोलकाता (तब कलकत्ता) में हुआ।

ट्रंप-शी जिनपिंग की मुलाकात में रिश्तों में प्रगति का दावा, इस साल दो और बैठकों पर सहमति

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को शी जिनपिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा का समापन सकारात्मक माहौल में किया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति का दावा किया और इस साल दो और बार मुलाकात करने पर सहमति जताई। शी जिनपिंग ने दोनों देशों के रिश्तों को “रणनीतिक स्थिरता” पर आधारित बनाने की बात कही। व्हाइट हाउस में चाय पर मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि यह दौरा बेहद सफल रहा और दोनों देशों ने रिश्तों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। ट्रंप ने कहा, “हमारी शानदार मुलाकात हुई। हमने दोनों देशों के लिए बेहद सकारात्मक कदम उठाए हैं और रिश्तों में काफी आगे बढ़े हैं।” वहीं, शी जिनपिंग ने ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप का आतिथ्य के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि दोनों नेता चीन-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करने वाले दो लोगों की तरह हैं। शी ने कहा, “जब राष्ट्रपति ट्रंप मई में चीन आए थे, तब हमने रणनीतिक स्थिरता पर आधारित रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंध बनाने का विजन साझा किया था। इस बार हमने उसमें नई सामग्री जोड़ने पर सहमति बनाई है। यह संबंध सम्मान, निष्पक्षता और पारस्परिकता पर आधारित होगा।” उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों का भविष्य और उज्ज्वल होगा। शी जिनपिंग ने बताया कि वर्ष 2026 के अंत तक दोनों नेताओं की दो और मुलाकातें होंगी। पहली बैठक चीन में होने वाली एपीईसी शिखर बैठक में और दूसरी अमेरिका में आयोजित होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में होगी। उन्होंने ट्रंप और मेलानिया ट्रंप को चीन आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे ट्रंप ने स्वीकार कर लिया। ट्रंप ने कहा, “हम जरूर चीन आएंगे और हमारी बातचीत लगातार जारी रहेगी।” ट्रंप ने कहा कि इस यात्रा से अमेरिकी किसानों को फायदा होगा और कई सकारात्मक बातें हुई हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन दोनों इस यात्रा से खुश हैं और इससे दोनों देशों को लाभ होगा। पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने पुष्टि की कि उनकी और शी जिनपिंग की बातचीत में ईरान का मुद्दा भी शामिल रहा। यात्रा के अंतिम चरण में ट्रंप और शी जिनपिंग अपनी-अपनी पत्नियों के साथ नेशनल आर्काइव्स पहुंचे, जहां उन्होंने अमेरिका की स्वतंत्रता घोषणा, संविधान और बिल ऑफ राइट्स का अवलोकन किया। ट्रंप ने कहा कि वह और शी जिनपिंग अमेरिकी इतिहास और चीन के लगभग 6,000 वर्ष पुराने इतिहास की तुलना पर चर्चा कर रहे थे। इसके बाद शी जिनपिंग जॉइंट बेस एंड्रयूज से अपने विमान से रवाना हो गए और उनकी तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा औपचारिक रूप से समाप्त हो गई।

सत्य निकेतन मामले में वकील ऋषभ सिंह ने एमसीडी के ऑडिट पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में अवैध निर्माण को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले के वकील ऋषभ सिंह ने एमसीडी के हलफनामे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं कि बिना नोटिस के सर्टिफिकेशन कैसे हो रहा है? सत्य निकेतन मामले के वकील ऋषभ सिंह ने कहा, “हमें सत्य निकेतन में जवाब दाखिल करने का समय मिला। कोर्ट ने हमें एमसीडी और अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। अगर मैं जवाब पर संक्षिप्त जानकारी दूं, तो अवैध अतिक्रमण और अवैध निर्माण के मुद्दे को उजागर किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि जवाब में, एमसीडी ने उनके अनुसार सभी पीजी का ऑडिट किया है। लेकिन साथ ही, यदि आप एफिडेविट को गहराई से पढ़ते हैं, तो आप देख सकते हैं कि उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया है कि उन्होंने कुछ इमारतों के मालिकों को डीटीयू और आईआईटी के विशेषज्ञों के पास भेजा है ताकि उनसे उनका ऑडिट करवाया जा सके। लेकिन उन्होंने इसके साथ नोटिस नहीं लगाया है। यही मुख्य मुद्दा है। वे कौन से विशेषज्ञ हैं जो इन इमारतों को प्रमाणित करने वाले हैं? और एमसीडी का सबसे पहला कर्तव्य इन सभी चीजों को देखना है। वकील ऋषभ सिंह ने कहा कि उन्होंने पीजी के इन मालिकों से रूपांतरण (कनवर्जन) की राशि ली है, लेकिन उन्होंने यह नहीं देखा कि वे इन परिस्थितियों का पालन कर रहे हैं या नहीं। चाहे वे वहां बने निर्माण का पालन कर रहे हों या नहीं। और उन्होंने बिल्डिंग गिरने की तस्वीरें भी शामिल की हैं। लेकिन उन्होंने मुखर्जी नगर क्षेत्र से केवल एक तस्वीर लगाई है, और मैं व्यक्तिगत रूप से वहां गया हूं और मैंने देखा है कि छात्र इस भीड़भाड़ वाले इलाके में कैसे रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि उन्होंने वहां किसी अन्य इमारत को क्यों नहीं गिराया है। तो ये मुख्य मुद्दे हैं और निश्चित रूप से हम इस विशेष रिट में अपना जवाब दाखिल करेंगे और हम यह भी सुझाव देंगे कि क्या परिणाम हैं और क्या सुधार हैं जो एमसीडी कर सकती है। हमारी सबसे पहली अपील यह है कि निर्माण स्थलों के इन ऑडिट में शामिल अधिकारियों की एक निश्चित जिम्मेदारी होनी चाहिए। वकील ऋषभ सिंह ने आगे बताया कि मूल रूप से, एसजी तुषार मेहता ने इसका विरोध किया। लेकिन अंततः, अदालत ने वह आवेदन खारिज कर दिया। उन्हें अपने सुझाव दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। यदि उनके पास अतिक्रमण की इस विशेष स्थिति के बारे में कोई सुझाव है, तो वे इसके लिए तैयार हैं। तो हम विशेष रूप से एमसीडी अधिकारियों के एफिडेविट का जवाब दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपना एफिडेविट दायर किया है, और वे कह रहे हैं कि हमारे पास उपलब्ध छात्रावास सुविधाओं की यह संख्या है, लेकिन बड़ी संख्या में छात्र पूरे देश से यहां पढ़ने आ रहे हैं, और वे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। इसके बावजूद यह उजागर करना है कि यह मेरा मौलिक अधिकार है, इस राष्ट्र के नागरिक के रूप में यह मेरा मौलिक अधिकार है कि मेरे चारों ओर एक सुरक्षित ढांचा हो और इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है। तो आगे देखेंगे कि इसका क्या परिणाम आता है।

एसआईआर विवाद पर उपेंद्र कुशवाहा बोले- जनता में उलझन की स्थिति, आयोग जारी करे स्पष्टीकरण

नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद के बीच राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़े विवाद के कारण लोगों के बीच काफी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है और इसे दूर करने के लिए चुनाव आयोग को तुरंत स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए। उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “एसआईआर से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। विषय को एड्रेस करने की जरूरत है। कंफ्यूजन दूर करने हेतु चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए।” कुशवाहा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन किए और उनके इस्तीफे तथा गिरफ्तारी की मांग की। कांग्रेस की ओर से दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़, ओडिशा समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन किए गए। पार्टी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते हुए एसआईआर का विरोध किया। दिल्ली में युवा कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च किया। वहीं, चंडीगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए। हालांकि, ये कांग्रेस और अन्य पक्षों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इसी बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) भी दाखिल की गई है। चुनाव आयोग ने 23 सितंबर को जारी एक प्रेस नोट में आयोग के भीतर मतभेद को संस्थागत टकराव के तौर पर पेश किए जाने को खारिज किया था। आयोग का कहना था कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में आंतरिक आपत्तियां और लिखित टिप्पणियां स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा हैं और मतभेद की स्थिति में फैसले बहुमत से किए जाते हैं।

सबसे पहले ममता ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठाई थी आवाज, आज पूरा विपक्ष साथ है: कुणाल घोष

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता कुणाल घोष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद और उनके खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शनिवार को श्रीरामपुर में होने वाली रैली से इस मुद्दे पर पार्टी और विपक्षी दलों की आगे की रणनीति को लेकर संदेश देंगी। कुणाल घोष ने कहा कि श्रीरामपुर की रैली में ममता बनर्जी विस्तार से बताएंगी कि ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोपों का पश्चिम बंगाल पर क्या असर हो सकता है और राज्य में इस मुद्दे को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर भी वरिष्ठ नेताओं को एकजुट कर इस आंदोलन को आगे बढ़ाने की दिशा ममता बनर्जी तय करेंगी। घोष ने दावा किया कि पहले सरकार की ओर से ममता बनर्जी की श्रीरामपुर रैली की अनुमति देने से इनकार किया गया था। हालांकि, कोर्ट के आदेश के बाद रैली आयोजित की जा रही है। बड़ी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। ममता बनर्जी मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति, बंगाल और देश में आगे की स्थिति तथा गैर-भाजपा, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील ताकतों की भूमिका को लेकर दिशा देंगी। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध अब कई राजनीतिक दलों और लोगों के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ममता बनर्जी ने इस विषय पर सबसे पहले आवाज उठाई थी और बाद में दूसरे राज्यों में भी चुनाव हुए। बनर्जी ने बंगाल की धरती से जिस मुद्दे को लेकर सवाल उठाए थे, आज उसी को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत कई दल विरोध में शामिल हैं। घोष ने दावा किया कि आम लोग और जेनजी युवा भी लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में शामिल हो रहे हैं। कुणाल घोष ने भाजपा के चुनावी खर्च को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से सबसे अधिक खर्च किया गया और इसका संबंध पार्टी के चुनावी आत्मविश्वास से है।

राजस्थान: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने युवाओं से की ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाने की अपील

जयपुर। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को युवाओं से जीवन में शॉर्टकट से बचने और धैर्य के साथ लगातार मेहनत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जीवन 100 मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि मैराथन की तरह है। जयपुर में आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवीन ने कहा कि छोटी दौड़ में रफ्तार की परीक्षा होती है, जबकि लंबी दूरी की दौड़ में सहनशक्ति की। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे छोटी-मोटी असफलताओं या मुश्किलों से निराश न हों और अपने लक्ष्य के लिए पूरी लगन और धैर्य के साथ काम करते रहें। नवीन ने युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाने और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शॉर्टकट से जल्दी परिणाम मिलता हुआ दिखाई दे सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसके जरिए व्यक्ति अपनी मंजिल तक पहुंच जाए। सफलता के लिए समर्पण, निरंतर मेहनत और लंबे समय तक अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहना जरूरी है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान राजस्थान के युवाओं की आवाज, कविताओं और गीतों में दिखाई दिए उत्साह का भी जिक्र किया। नवीन ने कहा, ”किसी भी काम को छोटा नहीं समझना चाहिए। छोटी जिम्मेदारी भी बड़ी और सकारात्मक सोच के साथ की जाए तो वह महत्वपूर्ण बन सकती है।” उन्होंने युवाओं के सामने तीन सवाल रखे। पहला, वे भविष्य में कैसा भारत देखना चाहते हैं? दूसरा, वे कैसा राजस्थान चाहते हैं? और तीसरा, एक नागरिक के तौर पर वे अपनी क्या भूमिका देखते हैं? उन्होंने कहा कि प्राथमिकता में सबसे पहले राष्ट्र, उसके बाद राज्य या संगठन और फिर स्वयं को रखना चाहिए। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सफलता मिलने पर हर कोई खुशी मनाता है, लेकिन कई बार युवा छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे थोड़े समय की निराशा के कारण कोई नुकसान पहुंचाने वाला फैसला न लें और अपने लक्ष्य से दूर न हों। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए उन्होंने ने कहा कि राजनीति देश की दिशा और विकास में योगदान देने का अवसर दे सकती है। उन्होंने युवाओं से सार्वजनिक जीवन को सकारात्मक नजरिए से देखने की अपील की। वर्ष 2012-13 के समय का जिक्र करते हुए नितिन नवीन ने दावा किया कि उस दौर में युवाओं के बीच निराशा थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद नरेंद्र मोदी ने युवाओं को खुद पर और देश पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि अगर भारत के 140 करोड़ लोग 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की ओर एक साथ आगे बढ़ें तो इसे हासिल किया जा सकता है। स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए नवीन ने कहा, ”उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” उन्होंने एक और संदेश देते हुए कहा, ”अतीत एक खजाना है, उसे संभालकर रखें। वर्तमान एक संघर्ष है, उसमें डटे रहें और भविष्य एक सपना है, उसकी ओर आगे बढ़ें।” भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ जीवन का लक्ष्य तय करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत उपलब्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन देश और समाज के लिए काम करने से पहचान और सम्मान मिलता है।

बंगाल: फराक्का से कोलकाता के लिए एनसीसी नौकायन अभियान को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

कोलकाता। बहु-जिला नदी नौकायन अभियान, हुगली संकल्प मेनू 2026, फरक्का से कोलकाता तक शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह आयोजन फरक्का लॉकगेट जेटी पर पूरे धूमधाम और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। पश्चिम बंगाल और सिक्किम निदेशालय के एनसीसी कैडेटों ने इस वार्षिक अभियान में भाग लिया। पश्चिम बंगाल और सिक्किम निदेशालय, एनसीसी के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल एपीएस चहल ने कई विशिष्ट अतिथियों और नागरिक सैन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मेजर जनरल चहल ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि यह अभियान एक पारंपरिक नौकायन यात्रा से कहीं अधिक है। यह एक ‘फ्लोटिंग क्लासरूम’ के रूप में कार्य करता है जहां 60 चयनित कैडेट समुद्री कौशल में महारत हासिल करेंगे, चरित्र निर्माण करेंगे और नेतृत्व और टीम वर्क को बढ़ावा देंगे। अगले 20 दिनों में, लड़के और लड़कियों सहित युवा नाविक, हुगली नदी के किनारे फरक्का से कोलकाता तक 410 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण नदी दूरी तय करेंगे और सामुदायिक विकास और सामाजिक आउटरीच कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए सात प्रमुख स्थानों पर रुकेंगे। ध्वजारोहण समारोह के दौरान, प्रतिभागियों ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के अंतर्गत 150 पौधे लगाए। संजय जयसिंह, मित्री मिट्टी ट्रस्ट के संस्थापक के सहयोग से आयोजित इस प्रभावशाली हरित अभियान ने रोमांच को सक्रिय पर्यावरण संरक्षण के साथ एकीकृत किया। एडीजी ने नौकायन दल को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और नौसेना एनसीसी इकाइयों के असाधारण समन्वय और सावधानीपूर्वक योजना की सराहना की। पड़ावों के दौरान, कैडेट स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे, कार्यक्रमों में भाग लेंगे और कई महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करेंगे। तट भ्रमण के दौरान, एनसीसी कैडेट स्थानीय संस्कृति और रीति-रिवाजों के बारे में अधिक जानेंगे और राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाएंगे। कैडेट व्हेल पकड़ने वाली नावों पर यात्रा करेंगे, जिनमें से प्रत्येक के साथ नौसेना के कर्मी होंगे जो आवश्यकतानुसार उनका मार्गदर्शन और सहायता करेंगे। एक अधिकारी ने बताया, “अगले 20 दिनों में कैडेट नाव चलाने के कौशल, नौवहन तकनीक और टीम के रूप में काम करना सीखेंगे। नाव में सभी को समन्वय और अनुशासन के साथ काम करना होता है। ये पाल वाली नावें हैं, इसलिए बेहतर समन्वय और टीम वर्क की आवश्यकता होगी।” कैडेटों को बारिश और आंधी-तूफान का भी सामना करना पड़ेगा और तेज धाराओं से निपटना होगा, जिससे रोमांच और भी बढ़ जाएगा।