माता अमृतानंदमयीः 9 साल में छोड़ा स्कूल, त्याग और सेवा से जीता दुनिया का दिल

नई दिल्ली। आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी नेता माता अमृतानंदमयी देवी को दुनिया भर में ‘अम्मा’ के नाम से जाना जाता है। 27 सितंबर 1953 को केरल में जन्मी प्रेम और करुणा की प्रतिमूर्ति माता अमृतानंदमयी ने अपने आलिंगन से लाखों लोगों को शांति का संदेश दिया है, इसलिए उन्हें ‘हगिंग संत’ भी कहा जाता है। मछुआरा परिवार में जन्मी सुधामणि इदमन्नेल से ‘अम्मा’ बनने तक का उनका सफर त्याग और सेवा का प्रतीक है। उनके द्वारा स्थापित माता अमृतानंदमयी मठ आज शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत के क्षेत्र में विश्वभर में सेवा कार्य कर रहा है। माता अमृतानंदमयी देवी का जन्म केरल के छोटे से गांव अलप्पढ़ में हुआ था। जब वे नौ वर्ष की थीं, तब उनकी माताजी बीमार पड़ गईं और माता अमृतानानंदमयी को घर के कामों और अपने सात भाई-बहनों की देखभाल में मदद करने के लिए स्कूल से निकाल लिया गया। जब वे अपने परिवार की गायों के लिए पड़ोसियों से बचा हुआ अनाज इकट्ठा करने के लिए घर-घर जाती थीं, तो उन्हें अपने समुदाय और उससे परे की दुनिया में व्याप्त घोर गरीबी और पीड़ा का सामना करना पड़ा। जहां भी माता अमृतानानंदमयी जरूरतमंद लोगों से मिलती थीं, वे उन्हें अपने घर से भोजन और वस्त्र देती थीं। ऐसा करने पर परिवार से मिलने वाली डांट और सजा से वे विचलित नहीं हुईं। वे लोगों को उनके दुख में सांत्वना देने के लिए सहज रूप से गले लगाने लगीं। उनके स्नेहपूर्ण देखभाल के फलस्वरूप, लोग उन्हें अम्मा (मां) कहने लगे। जबकि उस समय एक 14 वर्ष की कन्या को पुरुष समेत किसी को भी स्पर्श करने की आज्ञा नहीं दी जाती थी। अपने माता-पिता से विपरीत प्रतिक्रियाएं मिलने के बावजूद भी अम्मा ऐसा ही करती रहीं। अम्मा का कहना है, “मै यह नहीं देखती कि वह एक स्त्री है या पुरुष। मैं किसी को भी स्वयं से भिन्न रूप में नहीं देखती। मुझसे संसार की सभी रचनाओं की ओर एक निरंतर प्रेम धारा बहती है। यह मेरा जन्मजात स्वभाव है। एक चिकित्सक का कर्तव्य रोगियों का उपचार करना होता है। इसी प्रकार मेरा कर्तव्य उन लोगों को सांत्वना देना है जो कष्ट में हैं। माता-पिता द्वारा विवाह के अनेकों प्रयासों के बावजूद भी अम्मा ने विवाह नहीं किया। 1981 में जब अनेकों जिज्ञासु पर्यकडवु में आकर अम्मा के शिष्य बनने के लिए उनके माता-पिता की संपत्ति में रहने लगे तो एक विश्वस्तरीय संगठन, माता अमृतानंदमयी मठ की स्थापना की गई। आज माता अमृतानंदमयी मठ अनेकों आध्यात्मिक और धर्मार्थ गतिविधियों में संलग्न है। 1987 में अपने श्रद्धालुओं के अनुरोध पर अम्मा विश्व के सभी देशों में कार्यक्रम आयोजित करती हैं। अम्मा का दर्शन अपने आप में अनूठा है। अम्मा सभी दर्शनार्थियों को गले लगाती हैं, अपने कंधे पर सिर रखकर उन्हें आश्वासन देती हैं। चाहे भीड़ हजारों की हो या लाखों की, अम्मा सभी को दर्शन देने के बाद ही पीठम से उठती हैं। अम्मा के विश्वव्यापी धर्मार्थ मिशन में बेघर लोगों के लिए 100,000 घर, 3 अनाथ आश्रम और 2004 में भारतीय सागर में सुनामी जैसी आपदाओं से सामना होने की अवस्था में राहत-और-पुनर्वास, मुफ्त चिकित्सकीय देखभाल, विधवाओं और असमर्थ व्यक्तियों के लिए पेंशन, पर्यावरणीय सुरक्षा समूह, मलिन बस्तियों का नवीनीकरण, वृद्धों के लिए देखभाल केंद्र और गरीबों के लिए मुफ्त वस्त्र और भोजन आदि कार्यक्रम सम्मिलित हैं। अम्मा अपने भक्ति संगीत के लिए भी प्रसिद्ध हैं। उनके द्वारा गाये गए भजनों की 100 से अधिक रिकॉर्डिंग, 20 से भी अधिक भाषाओं में उपलब्ध हैं। उन्होंने कई भजनों की रचना की है। अम्मा के शिष्यों ने भक्तों और आध्यात्मिक अन्वेषणकर्ताओं के साथ उनके संवादों को लिपिबद्ध करके उनकी शिक्षाओं की लगभग एक दर्जन पुस्तकों का प्रकाशन किया है।

एशियन गेम्स: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और खेल मंत्री मांडविया ने मैराथन में सिल्वर जीतने वाले सावन बरवाल को दी बधाई

नई दिल्ली। भारत के सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष मैराथन में सिल्वर मेडल जीता। बरवाल के सिल्वर ने इवेंट में देश के मेडल जीतने का 44 साल का इंतजार समाप्त किया। बरवाल को उनकी उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बधाई दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, “एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की मैराथन में सिल्वर मेडल जीतने पर सावन बरवाल को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। आपके शानदार प्रदर्शन ने चार दशकों के बाद एशियन गेम्स मैराथन पोडियम पर भारत की वापसी को चिह्नित किया है। यह शानदार उपलब्धि लंबी दूरी के धावकों की नई पीढ़ी को प्रेरित करे।” खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने एक्स पर बरवाल की जीत का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के लिए ऐतिहासिक सिल्वर। एशियन गेम्स मैराथन मेडल के लिए भारत का 44 साल का इंतजार खत्म करने पर सावन बरवाल को बधाई। उन्होंने पुरुषों की मैराथन में शानदार 2:11:37 का समय निकालकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। पूरे देश को इस ऐतिहासिक कामयाबी पर बहुत गर्व है।” भारतीय नेशनल रिकॉर्ड-होल्डर बरवाल नागोया में एक कड़े मुकाबले वाली रेस में मेडल की दौड़ में बने रहे और फिर 42.195 किलोमीटर के इवेंट में दूसरा स्थान हासिल किया। उनका सिल्वर मेडल 1982 के एडिशन के बाद भारत का पहला एशियन गेम्स मैराथन मेडल है और विदेशी धरती पर किसी भारतीय पुरुष का पहला मेडल है। बरवाल की इस कामयाबी से भारत के ऐतिहासिक एशियन गेम्स मैराथन मेडल की गिनती में चौथा मेडल जुड़ गया है। उनसे पहले छोटा सिंह ने 1951 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीता था, जबकि सूरत सिंह माथुर ने उसी एडिशन में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। होसुर कुक्कप्पा सीतारण ने 1982 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। बरवाल ने 1982 के बाद पहली बार देश को मैराथन में पदक दिलवाया है।

पीएफ से जुड़ा अटका काम चुटकियों में निपटाएं, ईपीएफओ कैंप में मिलेगा हर समाधान

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ‘निधि आपके निकट 2.0’ पहल के तहत 28 सितंबर को कैंप लगाने जा रहा है। इसका उद्देश्य सदस्यों के पीएफ से जुड़े अटके कामों और उससे जुड़े सवालों का तेजी से समाधान करना है। ईपीएफओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘निधि आपके निकट 2.0’ पहल की जानकारी दी। साथ ही, बताया कि इसके तहत ईपीएफओ 28 सितंबर को कैंप लगाने जा रहा है, जिसमें संगठन की योजनाओं, फायदों और सेवाओं के बारे में बताया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य ईपीएफओ की सेवाओं को सब्सक्राइबर के करीब पहुंचाना है, जिससे उन्हें पीएफ से जुड़े अटके कामों के लिए केवल ऑनलाइन प्रक्रिया पर निर्भर न रहना पड़े। पोस्ट में ईपीएफओ ने लिखा, “ईपीएफओ की योजनाओं और फायदों के बारे में जानने, अधिकारियों के साथ सेवाओं और प्रक्रियाओं को समझने और अपनी शिकायतों का तुरंत समाधान पाने के लिए 28 सितंबर 2026 को ‘निधि आपके निकट 2.0’ कैंप में जाएं।” ईपीएफओ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस कैंप में अधिकारियों से आप अपनी समस्या को लेकर सीधे बातचीत कर पाएंगे। ऐसे में अगर आपका कोई कार्य ऑनलाइन नहीं हो पा रहा है या किसी विशेष स्थिति के कारण अटका हुआ है तो अधिकारियों के समझ आप अपनी बात को रख सकते हैं। ‘निधि आपके निकट 2.0’ के तहत लगाए जाने वाले कैंप की खास बात यह है कि इसमें शिकायतों के सुनने के साथ उनके तत्काल पर फोकस किया जाएगा। ऐसे में अगर आपकी कोई शिकायत लंबे समय से अटकी हुई है या किसी सेवा को लेकर परेशानी आ रही है तो आप उसे कैंप में संबंधित अधिकारी के समक्ष रख सकते हैं। हालांकि, यह मानना सही नहीं है कि हर समस्या का समाधान तत्काल कैंप में हो जाएगा, यह समस्या की प्रकृति पर भी निर्भर करता है। अगर आप ईपीएफओ सब्सक्राइबर हैं और पीएफ से जुड़ी किसी समस्या या शिकायत का सामना कर रहे हैं तो कैंप में जाने से पहले अपनी समस्या से जुड़े जरूरी दस्तावेज और उपलब्ध जानकारी साथ रखना उपयोगी रहेगा। इससे अधिकारियों के लिए आपके मामले को समझकर उसका समाधान करना आसान रहेगा।

पीएम मोदी और रक्षा मंत्री समेत अन्य नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जयंती पर दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अन्य नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई साल बिताए और पूरी निष्ठा के साथ देश की सेवा की।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। सार्वजनिक जीवन और भारत की प्रगति में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।” केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं विख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर सादर नमन करता हूं!” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पोस्ट में कहा, “आज पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं। देश के लिए उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।” केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक्स पर लिखा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।” भाजपा नेता और उद्योगपति नवीन जिंदल ने एक्स पर लिखा, “डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर याद करते हुए। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी और दुनिया में देश को एक नई पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान संसद में सेवा करना और जिस शालीनता और गरिमा के साथ उन्होंने इस सर्वोच्च पद को संभाला, उससे सीखना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी। उनकी विनम्रता और ईमानदारी भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक मिसाल बनी हुई है।” डॉ. मनमोहन सिंह का नाम भारतीय इतिहास में एक ऐसे अर्थशास्त्री के तौर पर हमेशा याद किया जाएगा जिन्होंने देश की आर्थिक प्रगति की मजबूत नींव रखी। 1991 में वित्त मंत्री के तौर पर डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में अहम बदलावों का रास्ता तैयार किया। 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, डॉ. मनमोहन सिंह ने भारत के लोगों के अधिकारों और अवसरों को बढ़ाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, सूचना का अधिकार अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसे अहम कानून और कार्यक्रम लागू किए।

पुण्यतिथि विशेष: भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत राजा राममोहन राय, जिन्होंने सती प्रथा के अंधेरे को मिटाकर आधुनिक भारत की नींव रखी

नई दिल्ली। 27 सितंबर 1833 को आधुनिक भारत के जनक राजा राममोहन राय ने इस दुनिया को अलविदा कहा था। उनकी पुण्यतिथि पर देश उस महान समाज सुधारक को याद कर रहा है, जिसने अकेले ही दोहरी लड़ाई लड़ी – एक अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ और दूसरी अपने ही समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ। राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम रमाकांत राय और माता का नाम तारिणी देवी था। असाधारण प्रतिभा के धनी राममोहन राय ने मात्र 15 वर्ष की आयु तक बंगाली, संस्कृत, अरबी और फारसी जैसी भाषाओं पर महारत हासिल कर ली थी। किशोरावस्था में उन्होंने देश भर का भ्रमण किया, जिससे उन्हें समाज की सच्चाई को करीब से समझने का मौका मिला। 1809 से 1814 तक उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया, लेकिन जल्द ही उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद को राष्ट्र सेवा में झोंक दिया। यहीं से उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हुआ। उस दौर में भारतीय समाज बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड और पर्दा प्रथा जैसी बुराइयों में जकड़ा हुआ था। राजा राममोहन राय ने इन कुरीतियों को झकझोरने का काम किया। उनका सबसे बड़ा योगदान सती प्रथा के उन्मूलन में माना जाता है। उन्होंने इस अमानवीय प्रथा के खिलाफ लगातार आंदोलन चलाया, जिसके परिणामस्वरूप 1829 में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा को कानूनन अपराध घोषित कर दिया। इस साहसिक कदम के लिए उन्हें काफी विरोध का सामना भी करना पड़ा। 1828 में उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की, जो एकेश्वरवाद पर आधारित था और मूर्ति पूजा का विरोध करता था। वे भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक भी थे। 1825 में उन्होंने वेदांत विश्वविद्यालय की स्थापना की और अंग्रेजी शिक्षा, आधुनिक चिकित्सा और विज्ञान के अध्ययन को बढ़ावा दिया। उनके सबसे प्रमुख अनुयायी देवेंद्र नाथ टैगोर थे। राजा राममोहन राय सिर्फ समाज सुधारक ही नहीं, बल्कि निर्भीक पत्रकार भी थे। उन्होंने ‘ब्रह्ममैनिकल मैग्जीन’, ‘संवाद कौमुदी’, ‘मिरात-उल-अखबार’ और ‘बंगदूत’ जैसे स्तरीय पत्रों का संपादन-प्रकाशन किया। ‘बंगदूत’ एक अनोखा पत्र था, जिसमें बांग्ला, हिंदी और फारसी तीन भाषाओं का प्रयोग एक साथ किया जाता था। उनके जुझारू व्यक्तित्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1821 में जब एक अंग्रेज जज ने प्रताप नारायण दास नामक भारतीय को कोड़े लगाने की सजा दी और उसकी मौत हो गई, तो राय ने इस बर्बरता के खिलाफ बेबाक लेख लिखा। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और पत्रकारिता का कुशल संयोग कर दोनों को नई दिशा दी। मुगल सम्राट ने उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें ‘राजा’ की उपाधि दी थी, और वे इंग्लैंड और फ्रांस की यात्रा करने वाले पहले भारतीयों में से थे। ब्रिस्टल (इंग्लैंड) में ही 27 सितंबर 1833 को उन्होंने अंतिम सांस ली। आज भी जब हम आधुनिक, वैज्ञानिक और समानता पर आधारित भारत की बात करते हैं, तो उसकी नींव में राजा राममोहन राय के विचार ही दिखते हैं।

एशियन गेम्स 2026 में दमदार प्रदर्शन करके स्वदेश लौटे भारतीय शूटर्स, एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत

नई दिल्ली एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भारतीय शूटर्स शुक्रवार को स्वदेश लौटे। एयरपोर्ट पर शूटर्स का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत हुआ। इस मौके पर कई शूटर्स के परिवार के लोग भी पहुंचे। भारतीय शूटर राइजा ढिल्लों ने ‘आईएएनएस’ के साथ बात करते हुए कहा, “हमारी पूरी शूटिंग टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है। सभी ने मेडल जीता है और यहां तक पहुंचने के लिए हम सभी ने बहुत कड़ी मेहनत की है, इसलिए हमें बहुत गर्व है। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) और हमारे सभी स्पॉन्सर्स का भी धन्यवाद, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की।उनका बहुत-बहुत धन्यवाद।” पुरुष टीम और मिक्स्ड टीम के साथ कुल दो मेडल जीतने वाले भारतीय शूटर अनंतजीत सिंह नरुका ने कहा, “दो मेडल जीतने की खुशी ही कुछ अलग होती है। पिछली बार भी जब मैं एशियन गेम्स में हिस्सा लेने गया था, तो मैंने दो मेडल जीते थे और इस बार भी मैंने दो मेडल जीते हैं।” भारतीय शूटर भवतेघ सिंह गिल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “यह बहुत खुशी की बात है कि हम देश के लिए मेडल लेकर आ रहे हैं, यह सभी के लिए गर्व का पल है। मुझे बहुत खुशी है कि हमने एशियन गेम्स में भारत के लिए इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की। ​​कुल मिलाकर यह एक शानदार अनुभव था। एशियन गेम्स का आयोजन और हमारी टीम का प्रदर्शन – इन सभी चीजों ने इस अनुभव को बेहतरीन बना दिया। इसकी कोई तुलना नहीं है।” अनंतजीत और परिनाज की जोड़ी ने स्कीट मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। वहीं, इसी स्पर्धा में भारत की पुरुष और महिला टीम भी ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही। भवतेघ सिंह गिल, अनंतजीत सिंह और मैराज अहमद खान की तिकड़ी ने देश को ब्रॉन्ज दिलाया, जबकि परिनाज राइजा और माहेश्वर ने 331 के स्कोर के साथ ब्रॉन्ज पर कब्जा जमाया। भारत ने एशियन गेम्स 2026 में शूटिंग का अपना पहला पदक महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में हासिल किया, जहां इलावेनिल वलारिवन, सोनम मस्कर और विदर्शा विनोद की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता। इसके अलावा इलावेनिल ने व्यक्तिगत 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम प्रतियोगिता में हिमांशु ढिल्लों, पार्थ माने और रुद्राक्ष पाटिल ने भारत को एक और सिल्वर मेडल दिलाया। बाद में व्यक्तिगत स्पर्धा में भी भारतीय निशानेबाजों का दमदार प्रदर्शन जारी रहा, जहां हिमांशु ने सिल्वर और रुद्राक्ष ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश की पदक संख्या में इजाफा किया।

तलाक पीड़ित बेसहारा महिलाओं को वक्फ बोर्ड देगा घर, अगले महीने लाएंगे प्रस्ताव : शादाब शम्स

नई दिल्ली। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेघर और बेसहारा महिलाओं को सहारा देने के लिए एक बड़ी पहल का ऐलान किया। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा कि बोर्ड के पास मौजूद लैंड बैंक और संपत्तियों का इस्तेमाल अब उनके असली हकदारों, यतीमों, मिस्कीनों और विधवाओं के लिए किया जाएगा। शादाब शम्स ने कहा, “वक्फ प्रॉपर्टीज का एक लैंड बैंक है। हम केयरटेकर हैं, और हमारे पास कई घर और संपत्तियां हैं। हम सरकार के साथ बैठकर बात करेंगे कि हम उन्हें बेहतर तरीके से कैसे सौंप सकते हैं। मुझे उम्मीद है क्योंकि मैंने हमारे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की, और उन्होंने बहुत सकारात्मक जवाब दिया। जब से वक्फ संशोधन एक्ट आया है, तब से बेसहारा महिलाओं में उम्मीद जगी है और अब गरीबों को उनका हक मिलेगा। उसी लाइन को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड की धामी सरकार एक फैसला लेने जा रही है।” उन्होंने कहा कि अगले महीने की मीटिंग में हम एक प्रस्ताव रख रहे हैं कि जो महिलाएं तीन तलाक या हलाला पीड़ित हैं और बेघर या बेसहारा हैं, उन्हें वक्फ बोर्ड सहारा देगा। वक्फ बोर्ड उन्हें रहने की जगह देगा ताकि वे बिना किसी मकसद के न भटकें। उत्तराखंड की धामी सरकार यूसीसी लेकर आई है और उसी की ग्राउंडिंग में हम यह कोशिश कर रहे हैं कि बेटियों को उनके हक दिए जा सकें। जो बेसहारा हैं, वक्फ तो उन्हीं के लिए था। वक्फ सदके, जकात, और खैरात का पैसा है। यह यतीमों, मिस्कीनों, बेवाओं और बेसहाराओं का हक था, लेकिन इसके ऊपर कुछ राजनीतिक दलों के नेता और उनके कार्यकर्ता बैठ गए और वक्फ का जो असली मकसद था, वह खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश उस मकसद को जमीन पर उतारने की है, उन बेटियों को उनके अधिकार दिलाने की है और फिर उन्हें सशक्त बनाकर रोजगार से जोड़ने की है, ताकि वे बेटियां आत्मनिर्भर होकर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें और किसी के सामने झुकना न पड़े। जिस तरह उत्तराखंड में हलाला के दो-तीन मामले सामने आए हैं, उनमें देखने को मिला कि बेटी को मजबूर किया गया और उससे कहा गया कि “तुम कहां जाओगी, तुम्हारे भाई तुम्हें नहीं रखेंगे, और पति ने तलाक देकर घर से निकाल दिया है तो अब तुम कहां जाओगी?” ऐसे में वह कहीं न कहीं इसी दबाव में रहती हैं कि “मैं कहां जाऊंगी।

जिओ पॉलिटिक्स तनाव के दौर में भी ग्लोबल साउथ की आवाज अहम रहेगी: जयशंकर

न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान कहा कि भू-राजनीतिक विखंडन, संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी बदलाव के इस दौर में भी ग्लोबल साउथ की आवाज दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी। जयशंकर ने ‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स: बिल्डिंग ब्रिजेज फॉर अ चेंजिंग वर्ल्ड’ विषय पर आयोजित चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में जमैका, घाना और सूरीनाम के विदेश मंत्रियों के साथ ईस्ट-वेस्ट सेंटर की अध्यक्ष सेलेस्टे कॉनर्स भी शामिल हुईं। बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि संयुक्त राष्ट्र आज भी अपरिहार्य संस्था है, लेकिन इसमें ऐसे सुधार जरूरी हैं जो ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें। उन्होंने कहा कि दुनिया अब दो ध्रुवों या सीमित विकल्पों से परिभाषित नहीं होगी। देश अपने हितों, मूल्यों और आपसी भरोसे के आधार पर निर्णय लेते रहेंगे। जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के साथ आईबीएसए (आईबीएसए) विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। संयुक्त बयान में तीनों देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता दोहराई। तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि इसे अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, वैध और समकालीन वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। संयुक्त बयान में ग्लोबल साउथ पर संघर्षों के प्रभाव, विशेषकर ऊर्जा और खाद्य असुरक्षा, महंगाई तथा वित्तीय दबावों पर चिंता जताई गई। आईबीएसए देशों ने संतुलित, निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया। साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने तथा सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करने की प्रतिबद्धता दोहराई। जलवायु परिवर्तन पर तीनों देशों ने ग्लोबल साउथ में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना बढ़ाने, ऊर्जा दक्षता में सुधार और जैव ईंधन, बायोगैस तथा कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन जैसे टिकाऊ ईंधनों के विस्तार का समर्थन किया। बैठक में डिजिटल अवसंरचना, सार्वभौमिक और सार्थक कनेक्टिविटी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए आर्थिक विकास और सतत विकास की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।

दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: एआई मॉर्फ तस्वीरें 24 घंटे में हटाए मेटा, पीड़िता को पुलिस सुरक्षा

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कथित तौर पर एआई के जरिए मॉर्फ की गई तस्वीरों के प्रसार से जुड़े मामले में बड़ा आदेश देते हुए मेटा को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेबसाइटों से सभी आपत्तिजनक तस्वीरें और संबंधित वेबलिंक 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता महिला को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया। साथ ही दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी। हाई कोर्ट ने इस मामले में सीजेपी से जुड़े अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को भी नोटिस जारी किया है। याचिका में पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसकी तस्वीर को एआई तकनीक की मदद से एडिट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मॉर्फ किया गया और उसे सोशल मीडिया तथा अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया। महिला ने अदालत से इन तस्वीरों और उनसे जुड़े सभी वेबलिंक हटाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इस मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही एफआईआर दर्ज कर चुकी है। इसके बावजूद कथित आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, जिन्हें हटाने की मांग को लेकर महिला ने हाई कोर्ट का रुख किया। इससे पहले नई दिल्ली जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में पीड़िता की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उसे धमकाया, उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की और उसकी तस्वीर का एआई के जरिए गलत इस्तेमाल किया। एफआईआर में अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम शामिल हैं। महिला ने यह भी मांग की है कि तस्वीर बनाने, उसे प्रदर्शन में इस्तेमाल करने, वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने और पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की भूमिका की गहन जांच की जाए।

छत्तीसगढ़ : बालोद में भीषण सड़क हादसे में 6 की मौत, सीएम विष्णुदेव साय ने जताया शोक

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के मरकाटोला घाट में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई जबकि सात लोग घायल हो गए। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी और घायलों के इलाज के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं। कवर्धा से जगदलपुर जा रही एक गाड़ी खराब होने के कारण सड़क किनारे खड़ी थी। इसी दौरान पीछे से आ रहे गेहूं लदे 16 पहिया ट्रक ने वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। जानकारी के मुताबिक, कवर्धा से जगदलपुर जा रही गाड़ी में कई यात्री सवार थे। हालांकि, मरकाटोला घाट में गाड़ी अचानक खराब हो गई। गाड़ी को सड़क किनारे खड़ा कर दिया गया और दो लोग मैकेनिक की तलाश में धमतरी चले गए। बताया गया कि खड़ी गाड़ी में 13 यात्री मौजूद थे। इस दौरान शुक्रवार सुबह साढ़े 11 बजे रायपुर से जगदलपुर की ओर जा रहे गेहूं से लदे ट्रक ने पीछे से खड़ी गाड़ी को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक खड़ी गाड़ी को घसीटते हुए कुछ दूर तक आगे ले गया। इस घटना के बाद गाड़ी में सवार लोगों को कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर यह हुआ क्या। हालांकि, हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 घायलों को उपचार के लिए जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया। इलाज के दौरान चार अन्य घायलों ने भी दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर छह हो गई। फिलहाल सात घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। घटना को लेकर सीएम विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बालोद जिले के मरकाटोला घाट में हुई भीषण सड़क दुर्घटना में छह लोगों के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। इस हृदयविदारक घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले शोकाकुल परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं। घायलों के समुचित उपचार के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। दुःख की इस घड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी सोशल मीडिया पर लिखा कि कांकेर-बालोद एवं धमतरी जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में नेशनल हाईवे-30 स्थित मरकाटोला घाट पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में कवर्धा के लोगों के निधन की खबर अत्यंत हृदयविदारक है। हादसे में घायल लोगों को बेहतर उपचार के लिए अस्पताल रेफर किया गया है। मैंने संबंधित अधिकारियों को घायलों के समुचित एवं बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ईश्वर से सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।