पितृ पक्ष 2026: पूर्णिमा स्नान के लिए प्रयागराज में संगम घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

प्रयागराज। सनातन धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। पितृपक्ष को केवल शहद और तर्पण का समय नहीं माना जाता, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर भी है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए तर्पण पिंडदान श्राद्ध और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। और उनका आशीर्वाद परिवार पर सदा बना हुआ रहता है। वही आज से शुरू हो गया है पितृपक्ष और बड़ी संख्या में यात्री अपने पितृरों कातर्पण पिंडदान और श्राद्ध करने के लिए प्रयागराज में भरी भीड़ जुटने लगी है। हिंदू धर्म में प्रयागराज (त्रिवेणी संगम – गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती का मिलन स्थल) को पिंडदान और तर्पण के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मान्यता है कि त्रिवेणी संगम पर पिंडदान करने से दिवंगत आत्माओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है। तीर्थ पुरोहित अमरनाथ तिवारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि तीर्थों के राजा प्रयागराज में श्रद्धालु सर्वप्रथम पिंडदान और तर्पण करते हैं। यहां से श्रद्धालु काशी जाते हैं और फिर गयाजी जाते हैं। प्रयागराज में पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण के साथ-साथ मुंडन यहां होता है। आज से पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है। मध्य प्रदेश के सतना जिले से प्रयागराज पहुंचे एक व्यक्ति ने कहा कि हम पितरों का तर्पण करने के लिए यहां से गयाजी के लिए जाएंगे। अभी हम सभी संगम घाट पर पिंडदान करेंगे। इसके बाद अयोध्या के लिए जाएंगे। उन्होंने प्रयागराज का महत्व बताते हुए कहा कि ‘सारे तीर्थ बार-बार और संगम का तीर्थ एक बार’ है। यहां गंगा, यमुना और सरस्वती तीनों नदियों का मिलन होता है। जब तीनों पंचांग के अनुसार, इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से हो रही है। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 को द्वितीया श्राद्ध, 29 को तृतीया श्राद्ध, 30 को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध होगा। वहीं, अक्टूबर में 1 तारीख को षष्ठी श्राद्ध, 2 को सप्तमी श्राद्ध, 3 को अष्टमी श्राद्ध, 4 को नवमी श्राद्ध, 5 को दशमी श्राद्ध, 6 को एकादशी श्राद्ध, 7 को द्वादशी श्राद्ध, 8 त्रयोदशी श्राद्ध और 9 को चतुर्दशी श्राद्ध होगा। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का आखिरी दिन होगा। इस दिन सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या रहेगी। जिन पितरों की श्राद्ध तिथि मालूम नहीं है, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है। किसी कारण से तय तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया हो, तब भी सर्वपितृ अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है।

पंजाब: पटियाला की चिटकारा यूनिवर्सिटी में ‘भूत’ की अफवाह के बाद मचा हंगामा, पुलिस वाहन में भी तोड़फोड़

पटियाला। पंजाब के राजपुरा में स्थित चिटकारा यूनिवर्सिटी में ‘भूत’ की अफवाह के बाद शुक्रवार देर रात हंगामा मच गया। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। यूनिवर्सिटी के सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतर आए और कैंपस में जमकर हंगामा करते हुए तोड़फोड़ की। फिलहाल, पटियाला पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। छात्रों का दावा था कि कैंपस में पहले किसी लड़की ने आत्महत्या की थी और उसका ‘भूत’ अब हॉस्टल के कमरों में रहने वाले छात्रों को परेशान कर रहा है। हालांकि, मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्डों और यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया कि यहां ऐसी कोई आत्महत्या की घटना नहीं हुई है। प्रशासन के मुताबिक, कुछ शरारती छात्र जानबूझकर दूसरे छात्रों के कमरों के दरवाजे खटखटाकर वहां से भाग जाते हैं। हालांकि, छात्र प्रशासन की इस दलील को मानने के लिए तैयार नहीं हुए और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते रहे। मामला बढ़ता देख थाना बनूड़, थाना सदर राजपुरा और थाना सिटी राजपुरा से भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस की ओर से छात्रों को शांत करने और स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किए जाने के दौरान माहौल और बिगड़ गया। आरोप है कि छात्रों ने पुलिस टीम के साथ हाथापाई की और पुलिस की एक गाड़ी में तोड़फोड़ कर दी। इस दौरान छात्रों की ओर से केएसएम चौकी (सिटी राजपुरा) के इंचार्ज अजय कुमार के साथ भी कथित तौर पर मारपीट किए जाने की जानकारी सामने आई। छात्रों ने आरोप लगाया कि चौकी इंचार्ज ने शराब पी रखी थी। इसके बाद यूनिवर्सिटी की लैब में ही उनका मेडिकल परीक्षण करवाया गया। आखिरकार पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए छात्रों को भरोसा दिया कि रात के समय दरवाजे खटखटाने की घटनाओं की सीसीटीवी के माध्यम से बारीकी से जांच की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस मामले में जो भी शरारती तत्व संलिप्त पाया गया, उसके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के इस आश्वासन के बाद छात्र शांत हुए और अपने-अपने हॉस्टल की ओर लौट गए। फिलहाल इलाके में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। डीएसपी सुखदेव सिंह ने कहा ने कहा कि चिटकारा यूनिवर्सिटी में दो छात्राओं के लापता होने की अफवाह और किसी छात्रा का नाम या पहचान सामने नहीं आई। डीएसपी ने कहा कि अभिभावकों और सभी संबंधित लोगों की जानकारी के लिए स्पष्ट करना चाहते हैं कि आज चिटकारा यूनिवर्सिटी में कुछ छात्रों की ओर से दो लड़कियों के लापता होने की बात कही गई थी। इस संबंध में सोशल मीडिया पर भी पोस्ट सामने आई थी। उन्होंने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय एसएचओ गुरसेवक सिंह, डीएसपी बनूड़ और यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ पुलिस टीम ने छात्रों से बातचीत की तथा उनकी शिकायतें भी ली हैं। डीएसपी ने कहा कि फिलहाल किसी भी छात्र को यह जानकारी नहीं है कि कौन-सी दो लड़कियां कथित तौर पर लापता हैं। किसी छात्रा का नाम या पहचान भी सामने नहीं आई है। प्रथम दृष्टया यह बात अफवाह के तौर पर सामने आई है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने छात्रों की शिकायत दर्ज कर ली है और पूरे मामले की जांच की जाएगी। प्रत्येक छात्र से जानकारी लेकर सत्यापन किया जाएगा। यदि कोई छात्रा वास्तव में लापता पाई जाती है तो उसकी भी पूरी जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। डीएसपी सुखदेव सिंह ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि चिटकारा यूनिवर्सिटी में स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण है और सभी बच्चे सुरक्षित हैं। किसी को डरने या चिंता करने की जरूरत नहीं है। पुलिस मौके पर मौजूद है और सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

माता अमृतानंदमयीः 9 साल में छोड़ा स्कूल, त्याग और सेवा से जीता दुनिया का दिल

नई दिल्ली। आध्यात्मिक गुरु और मानवतावादी नेता माता अमृतानंदमयी देवी को दुनिया भर में ‘अम्मा’ के नाम से जाना जाता है। 27 सितंबर 1953 को केरल में जन्मी प्रेम और करुणा की प्रतिमूर्ति माता अमृतानंदमयी ने अपने आलिंगन से लाखों लोगों को शांति का संदेश दिया है, इसलिए उन्हें ‘हगिंग संत’ भी कहा जाता है। मछुआरा परिवार में जन्मी सुधामणि इदमन्नेल से ‘अम्मा’ बनने तक का उनका सफर त्याग और सेवा का प्रतीक है। उनके द्वारा स्थापित माता अमृतानंदमयी मठ आज शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत के क्षेत्र में विश्वभर में सेवा कार्य कर रहा है। माता अमृतानंदमयी देवी का जन्म केरल के छोटे से गांव अलप्पढ़ में हुआ था। जब वे नौ वर्ष की थीं, तब उनकी माताजी बीमार पड़ गईं और माता अमृतानानंदमयी को घर के कामों और अपने सात भाई-बहनों की देखभाल में मदद करने के लिए स्कूल से निकाल लिया गया। जब वे अपने परिवार की गायों के लिए पड़ोसियों से बचा हुआ अनाज इकट्ठा करने के लिए घर-घर जाती थीं, तो उन्हें अपने समुदाय और उससे परे की दुनिया में व्याप्त घोर गरीबी और पीड़ा का सामना करना पड़ा। जहां भी माता अमृतानानंदमयी जरूरतमंद लोगों से मिलती थीं, वे उन्हें अपने घर से भोजन और वस्त्र देती थीं। ऐसा करने पर परिवार से मिलने वाली डांट और सजा से वे विचलित नहीं हुईं। वे लोगों को उनके दुख में सांत्वना देने के लिए सहज रूप से गले लगाने लगीं। उनके स्नेहपूर्ण देखभाल के फलस्वरूप, लोग उन्हें अम्मा (मां) कहने लगे। जबकि उस समय एक 14 वर्ष की कन्या को पुरुष समेत किसी को भी स्पर्श करने की आज्ञा नहीं दी जाती थी। अपने माता-पिता से विपरीत प्रतिक्रियाएं मिलने के बावजूद भी अम्मा ऐसा ही करती रहीं। अम्मा का कहना है, “मै यह नहीं देखती कि वह एक स्त्री है या पुरुष। मैं किसी को भी स्वयं से भिन्न रूप में नहीं देखती। मुझसे संसार की सभी रचनाओं की ओर एक निरंतर प्रेम धारा बहती है। यह मेरा जन्मजात स्वभाव है। एक चिकित्सक का कर्तव्य रोगियों का उपचार करना होता है। इसी प्रकार मेरा कर्तव्य उन लोगों को सांत्वना देना है जो कष्ट में हैं। माता-पिता द्वारा विवाह के अनेकों प्रयासों के बावजूद भी अम्मा ने विवाह नहीं किया। 1981 में जब अनेकों जिज्ञासु पर्यकडवु में आकर अम्मा के शिष्य बनने के लिए उनके माता-पिता की संपत्ति में रहने लगे तो एक विश्वस्तरीय संगठन, माता अमृतानंदमयी मठ की स्थापना की गई। आज माता अमृतानंदमयी मठ अनेकों आध्यात्मिक और धर्मार्थ गतिविधियों में संलग्न है। 1987 में अपने श्रद्धालुओं के अनुरोध पर अम्मा विश्व के सभी देशों में कार्यक्रम आयोजित करती हैं। अम्मा का दर्शन अपने आप में अनूठा है। अम्मा सभी दर्शनार्थियों को गले लगाती हैं, अपने कंधे पर सिर रखकर उन्हें आश्वासन देती हैं। चाहे भीड़ हजारों की हो या लाखों की, अम्मा सभी को दर्शन देने के बाद ही पीठम से उठती हैं। अम्मा के विश्वव्यापी धर्मार्थ मिशन में बेघर लोगों के लिए 100,000 घर, 3 अनाथ आश्रम और 2004 में भारतीय सागर में सुनामी जैसी आपदाओं से सामना होने की अवस्था में राहत-और-पुनर्वास, मुफ्त चिकित्सकीय देखभाल, विधवाओं और असमर्थ व्यक्तियों के लिए पेंशन, पर्यावरणीय सुरक्षा समूह, मलिन बस्तियों का नवीनीकरण, वृद्धों के लिए देखभाल केंद्र और गरीबों के लिए मुफ्त वस्त्र और भोजन आदि कार्यक्रम सम्मिलित हैं। अम्मा अपने भक्ति संगीत के लिए भी प्रसिद्ध हैं। उनके द्वारा गाये गए भजनों की 100 से अधिक रिकॉर्डिंग, 20 से भी अधिक भाषाओं में उपलब्ध हैं। उन्होंने कई भजनों की रचना की है। अम्मा के शिष्यों ने भक्तों और आध्यात्मिक अन्वेषणकर्ताओं के साथ उनके संवादों को लिपिबद्ध करके उनकी शिक्षाओं की लगभग एक दर्जन पुस्तकों का प्रकाशन किया है।

एशियन गेम्स: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और खेल मंत्री मांडविया ने मैराथन में सिल्वर जीतने वाले सावन बरवाल को दी बधाई

नई दिल्ली। भारत के सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष मैराथन में सिल्वर मेडल जीता। बरवाल के सिल्वर ने इवेंट में देश के मेडल जीतने का 44 साल का इंतजार समाप्त किया। बरवाल को उनकी उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बधाई दी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, “एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की मैराथन में सिल्वर मेडल जीतने पर सावन बरवाल को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। आपके शानदार प्रदर्शन ने चार दशकों के बाद एशियन गेम्स मैराथन पोडियम पर भारत की वापसी को चिह्नित किया है। यह शानदार उपलब्धि लंबी दूरी के धावकों की नई पीढ़ी को प्रेरित करे।” खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने एक्स पर बरवाल की जीत का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के लिए ऐतिहासिक सिल्वर। एशियन गेम्स मैराथन मेडल के लिए भारत का 44 साल का इंतजार खत्म करने पर सावन बरवाल को बधाई। उन्होंने पुरुषों की मैराथन में शानदार 2:11:37 का समय निकालकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। पूरे देश को इस ऐतिहासिक कामयाबी पर बहुत गर्व है।” भारतीय नेशनल रिकॉर्ड-होल्डर बरवाल नागोया में एक कड़े मुकाबले वाली रेस में मेडल की दौड़ में बने रहे और फिर 42.195 किलोमीटर के इवेंट में दूसरा स्थान हासिल किया। उनका सिल्वर मेडल 1982 के एडिशन के बाद भारत का पहला एशियन गेम्स मैराथन मेडल है और विदेशी धरती पर किसी भारतीय पुरुष का पहला मेडल है। बरवाल की इस कामयाबी से भारत के ऐतिहासिक एशियन गेम्स मैराथन मेडल की गिनती में चौथा मेडल जुड़ गया है। उनसे पहले छोटा सिंह ने 1951 के एशियन गेम्स में गोल्ड जीता था, जबकि सूरत सिंह माथुर ने उसी एडिशन में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। होसुर कुक्कप्पा सीतारण ने 1982 एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। बरवाल ने 1982 के बाद पहली बार देश को मैराथन में पदक दिलवाया है।

पीएफ से जुड़ा अटका काम चुटकियों में निपटाएं, ईपीएफओ कैंप में मिलेगा हर समाधान

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ‘निधि आपके निकट 2.0’ पहल के तहत 28 सितंबर को कैंप लगाने जा रहा है। इसका उद्देश्य सदस्यों के पीएफ से जुड़े अटके कामों और उससे जुड़े सवालों का तेजी से समाधान करना है। ईपीएफओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ‘निधि आपके निकट 2.0’ पहल की जानकारी दी। साथ ही, बताया कि इसके तहत ईपीएफओ 28 सितंबर को कैंप लगाने जा रहा है, जिसमें संगठन की योजनाओं, फायदों और सेवाओं के बारे में बताया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य ईपीएफओ की सेवाओं को सब्सक्राइबर के करीब पहुंचाना है, जिससे उन्हें पीएफ से जुड़े अटके कामों के लिए केवल ऑनलाइन प्रक्रिया पर निर्भर न रहना पड़े। पोस्ट में ईपीएफओ ने लिखा, “ईपीएफओ की योजनाओं और फायदों के बारे में जानने, अधिकारियों के साथ सेवाओं और प्रक्रियाओं को समझने और अपनी शिकायतों का तुरंत समाधान पाने के लिए 28 सितंबर 2026 को ‘निधि आपके निकट 2.0’ कैंप में जाएं।” ईपीएफओ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस कैंप में अधिकारियों से आप अपनी समस्या को लेकर सीधे बातचीत कर पाएंगे। ऐसे में अगर आपका कोई कार्य ऑनलाइन नहीं हो पा रहा है या किसी विशेष स्थिति के कारण अटका हुआ है तो अधिकारियों के समझ आप अपनी बात को रख सकते हैं। ‘निधि आपके निकट 2.0’ के तहत लगाए जाने वाले कैंप की खास बात यह है कि इसमें शिकायतों के सुनने के साथ उनके तत्काल पर फोकस किया जाएगा। ऐसे में अगर आपकी कोई शिकायत लंबे समय से अटकी हुई है या किसी सेवा को लेकर परेशानी आ रही है तो आप उसे कैंप में संबंधित अधिकारी के समक्ष रख सकते हैं। हालांकि, यह मानना सही नहीं है कि हर समस्या का समाधान तत्काल कैंप में हो जाएगा, यह समस्या की प्रकृति पर भी निर्भर करता है। अगर आप ईपीएफओ सब्सक्राइबर हैं और पीएफ से जुड़ी किसी समस्या या शिकायत का सामना कर रहे हैं तो कैंप में जाने से पहले अपनी समस्या से जुड़े जरूरी दस्तावेज और उपलब्ध जानकारी साथ रखना उपयोगी रहेगा। इससे अधिकारियों के लिए आपके मामले को समझकर उसका समाधान करना आसान रहेगा।

पीएम मोदी और रक्षा मंत्री समेत अन्य नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जयंती पर दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अन्य नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा, “पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई साल बिताए और पूरी निष्ठा के साथ देश की सेवा की।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। सार्वजनिक जीवन और भारत की प्रगति में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।” केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं विख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर सादर नमन करता हूं!” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक्स पोस्ट में कहा, “आज पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर याद कर रहा हूं। देश के लिए उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।” केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक्स पर लिखा, “भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं महान अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।” भाजपा नेता और उद्योगपति नवीन जिंदल ने एक्स पर लिखा, “डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी जयंती पर याद करते हुए। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी और दुनिया में देश को एक नई पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान संसद में सेवा करना और जिस शालीनता और गरिमा के साथ उन्होंने इस सर्वोच्च पद को संभाला, उससे सीखना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी। उनकी विनम्रता और ईमानदारी भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक मिसाल बनी हुई है।” डॉ. मनमोहन सिंह का नाम भारतीय इतिहास में एक ऐसे अर्थशास्त्री के तौर पर हमेशा याद किया जाएगा जिन्होंने देश की आर्थिक प्रगति की मजबूत नींव रखी। 1991 में वित्त मंत्री के तौर पर डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में अहम बदलावों का रास्ता तैयार किया। 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, डॉ. मनमोहन सिंह ने भारत के लोगों के अधिकारों और अवसरों को बढ़ाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, सूचना का अधिकार अधिनियम और शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसे अहम कानून और कार्यक्रम लागू किए।

पुण्यतिथि विशेष: भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत राजा राममोहन राय, जिन्होंने सती प्रथा के अंधेरे को मिटाकर आधुनिक भारत की नींव रखी

नई दिल्ली। 27 सितंबर 1833 को आधुनिक भारत के जनक राजा राममोहन राय ने इस दुनिया को अलविदा कहा था। उनकी पुण्यतिथि पर देश उस महान समाज सुधारक को याद कर रहा है, जिसने अकेले ही दोहरी लड़ाई लड़ी – एक अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ और दूसरी अपने ही समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ। राजा राममोहन राय का जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम रमाकांत राय और माता का नाम तारिणी देवी था। असाधारण प्रतिभा के धनी राममोहन राय ने मात्र 15 वर्ष की आयु तक बंगाली, संस्कृत, अरबी और फारसी जैसी भाषाओं पर महारत हासिल कर ली थी। किशोरावस्था में उन्होंने देश भर का भ्रमण किया, जिससे उन्हें समाज की सच्चाई को करीब से समझने का मौका मिला। 1809 से 1814 तक उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम किया, लेकिन जल्द ही उन्होंने नौकरी छोड़कर खुद को राष्ट्र सेवा में झोंक दिया। यहीं से उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हुआ। उस दौर में भारतीय समाज बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड और पर्दा प्रथा जैसी बुराइयों में जकड़ा हुआ था। राजा राममोहन राय ने इन कुरीतियों को झकझोरने का काम किया। उनका सबसे बड़ा योगदान सती प्रथा के उन्मूलन में माना जाता है। उन्होंने इस अमानवीय प्रथा के खिलाफ लगातार आंदोलन चलाया, जिसके परिणामस्वरूप 1829 में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा को कानूनन अपराध घोषित कर दिया। इस साहसिक कदम के लिए उन्हें काफी विरोध का सामना भी करना पड़ा। 1828 में उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की, जो एकेश्वरवाद पर आधारित था और मूर्ति पूजा का विरोध करता था। वे भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक भी थे। 1825 में उन्होंने वेदांत विश्वविद्यालय की स्थापना की और अंग्रेजी शिक्षा, आधुनिक चिकित्सा और विज्ञान के अध्ययन को बढ़ावा दिया। उनके सबसे प्रमुख अनुयायी देवेंद्र नाथ टैगोर थे। राजा राममोहन राय सिर्फ समाज सुधारक ही नहीं, बल्कि निर्भीक पत्रकार भी थे। उन्होंने ‘ब्रह्ममैनिकल मैग्जीन’, ‘संवाद कौमुदी’, ‘मिरात-उल-अखबार’ और ‘बंगदूत’ जैसे स्तरीय पत्रों का संपादन-प्रकाशन किया। ‘बंगदूत’ एक अनोखा पत्र था, जिसमें बांग्ला, हिंदी और फारसी तीन भाषाओं का प्रयोग एक साथ किया जाता था। उनके जुझारू व्यक्तित्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1821 में जब एक अंग्रेज जज ने प्रताप नारायण दास नामक भारतीय को कोड़े लगाने की सजा दी और उसकी मौत हो गई, तो राय ने इस बर्बरता के खिलाफ बेबाक लेख लिखा। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और पत्रकारिता का कुशल संयोग कर दोनों को नई दिशा दी। मुगल सम्राट ने उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्हें ‘राजा’ की उपाधि दी थी, और वे इंग्लैंड और फ्रांस की यात्रा करने वाले पहले भारतीयों में से थे। ब्रिस्टल (इंग्लैंड) में ही 27 सितंबर 1833 को उन्होंने अंतिम सांस ली। आज भी जब हम आधुनिक, वैज्ञानिक और समानता पर आधारित भारत की बात करते हैं, तो उसकी नींव में राजा राममोहन राय के विचार ही दिखते हैं।

एशियन गेम्स 2026 में दमदार प्रदर्शन करके स्वदेश लौटे भारतीय शूटर्स, एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत

नई दिल्ली एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भारतीय शूटर्स शुक्रवार को स्वदेश लौटे। एयरपोर्ट पर शूटर्स का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत हुआ। इस मौके पर कई शूटर्स के परिवार के लोग भी पहुंचे। भारतीय शूटर राइजा ढिल्लों ने ‘आईएएनएस’ के साथ बात करते हुए कहा, “हमारी पूरी शूटिंग टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है। सभी ने मेडल जीता है और यहां तक पहुंचने के लिए हम सभी ने बहुत कड़ी मेहनत की है, इसलिए हमें बहुत गर्व है। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) और हमारे सभी स्पॉन्सर्स का भी धन्यवाद, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की।उनका बहुत-बहुत धन्यवाद।” पुरुष टीम और मिक्स्ड टीम के साथ कुल दो मेडल जीतने वाले भारतीय शूटर अनंतजीत सिंह नरुका ने कहा, “दो मेडल जीतने की खुशी ही कुछ अलग होती है। पिछली बार भी जब मैं एशियन गेम्स में हिस्सा लेने गया था, तो मैंने दो मेडल जीते थे और इस बार भी मैंने दो मेडल जीते हैं।” भारतीय शूटर भवतेघ सिंह गिल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “यह बहुत खुशी की बात है कि हम देश के लिए मेडल लेकर आ रहे हैं, यह सभी के लिए गर्व का पल है। मुझे बहुत खुशी है कि हमने एशियन गेम्स में भारत के लिए इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की। ​​कुल मिलाकर यह एक शानदार अनुभव था। एशियन गेम्स का आयोजन और हमारी टीम का प्रदर्शन – इन सभी चीजों ने इस अनुभव को बेहतरीन बना दिया। इसकी कोई तुलना नहीं है।” अनंतजीत और परिनाज की जोड़ी ने स्कीट मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। वहीं, इसी स्पर्धा में भारत की पुरुष और महिला टीम भी ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रही। भवतेघ सिंह गिल, अनंतजीत सिंह और मैराज अहमद खान की तिकड़ी ने देश को ब्रॉन्ज दिलाया, जबकि परिनाज राइजा और माहेश्वर ने 331 के स्कोर के साथ ब्रॉन्ज पर कब्जा जमाया। भारत ने एशियन गेम्स 2026 में शूटिंग का अपना पहला पदक महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में हासिल किया, जहां इलावेनिल वलारिवन, सोनम मस्कर और विदर्शा विनोद की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता। इसके अलावा इलावेनिल ने व्यक्तिगत 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल टीम प्रतियोगिता में हिमांशु ढिल्लों, पार्थ माने और रुद्राक्ष पाटिल ने भारत को एक और सिल्वर मेडल दिलाया। बाद में व्यक्तिगत स्पर्धा में भी भारतीय निशानेबाजों का दमदार प्रदर्शन जारी रहा, जहां हिमांशु ने सिल्वर और रुद्राक्ष ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश की पदक संख्या में इजाफा किया।

तलाक पीड़ित बेसहारा महिलाओं को वक्फ बोर्ड देगा घर, अगले महीने लाएंगे प्रस्ताव : शादाब शम्स

नई दिल्ली। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला पीड़ित बेघर और बेसहारा महिलाओं को सहारा देने के लिए एक बड़ी पहल का ऐलान किया। वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शादाब शम्स ने कहा कि बोर्ड के पास मौजूद लैंड बैंक और संपत्तियों का इस्तेमाल अब उनके असली हकदारों, यतीमों, मिस्कीनों और विधवाओं के लिए किया जाएगा। शादाब शम्स ने कहा, “वक्फ प्रॉपर्टीज का एक लैंड बैंक है। हम केयरटेकर हैं, और हमारे पास कई घर और संपत्तियां हैं। हम सरकार के साथ बैठकर बात करेंगे कि हम उन्हें बेहतर तरीके से कैसे सौंप सकते हैं। मुझे उम्मीद है क्योंकि मैंने हमारे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की, और उन्होंने बहुत सकारात्मक जवाब दिया। जब से वक्फ संशोधन एक्ट आया है, तब से बेसहारा महिलाओं में उम्मीद जगी है और अब गरीबों को उनका हक मिलेगा। उसी लाइन को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड की धामी सरकार एक फैसला लेने जा रही है।” उन्होंने कहा कि अगले महीने की मीटिंग में हम एक प्रस्ताव रख रहे हैं कि जो महिलाएं तीन तलाक या हलाला पीड़ित हैं और बेघर या बेसहारा हैं, उन्हें वक्फ बोर्ड सहारा देगा। वक्फ बोर्ड उन्हें रहने की जगह देगा ताकि वे बिना किसी मकसद के न भटकें। उत्तराखंड की धामी सरकार यूसीसी लेकर आई है और उसी की ग्राउंडिंग में हम यह कोशिश कर रहे हैं कि बेटियों को उनके हक दिए जा सकें। जो बेसहारा हैं, वक्फ तो उन्हीं के लिए था। वक्फ सदके, जकात, और खैरात का पैसा है। यह यतीमों, मिस्कीनों, बेवाओं और बेसहाराओं का हक था, लेकिन इसके ऊपर कुछ राजनीतिक दलों के नेता और उनके कार्यकर्ता बैठ गए और वक्फ का जो असली मकसद था, वह खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश उस मकसद को जमीन पर उतारने की है, उन बेटियों को उनके अधिकार दिलाने की है और फिर उन्हें सशक्त बनाकर रोजगार से जोड़ने की है, ताकि वे बेटियां आत्मनिर्भर होकर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर सकें और किसी के सामने झुकना न पड़े। जिस तरह उत्तराखंड में हलाला के दो-तीन मामले सामने आए हैं, उनमें देखने को मिला कि बेटी को मजबूर किया गया और उससे कहा गया कि “तुम कहां जाओगी, तुम्हारे भाई तुम्हें नहीं रखेंगे, और पति ने तलाक देकर घर से निकाल दिया है तो अब तुम कहां जाओगी?” ऐसे में वह कहीं न कहीं इसी दबाव में रहती हैं कि “मैं कहां जाऊंगी।

जिओ पॉलिटिक्स तनाव के दौर में भी ग्लोबल साउथ की आवाज अहम रहेगी: जयशंकर

न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के दौरान कहा कि भू-राजनीतिक विखंडन, संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी बदलाव के इस दौर में भी ग्लोबल साउथ की आवाज दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी। जयशंकर ने ‘रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स: बिल्डिंग ब्रिजेज फॉर अ चेंजिंग वर्ल्ड’ विषय पर आयोजित चर्चा में हिस्सा लिया। इस चर्चा में जमैका, घाना और सूरीनाम के विदेश मंत्रियों के साथ ईस्ट-वेस्ट सेंटर की अध्यक्ष सेलेस्टे कॉनर्स भी शामिल हुईं। बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि संयुक्त राष्ट्र आज भी अपरिहार्य संस्था है, लेकिन इसमें ऐसे सुधार जरूरी हैं जो ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और वर्तमान वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें। उन्होंने कहा कि दुनिया अब दो ध्रुवों या सीमित विकल्पों से परिभाषित नहीं होगी। देश अपने हितों, मूल्यों और आपसी भरोसे के आधार पर निर्णय लेते रहेंगे। जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के साथ आईबीएसए (आईबीएसए) विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया। संयुक्त बयान में तीनों देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता दोहराई। तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की मांग करते हुए कहा कि इसे अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, वैध और समकालीन वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। संयुक्त बयान में ग्लोबल साउथ पर संघर्षों के प्रभाव, विशेषकर ऊर्जा और खाद्य असुरक्षा, महंगाई तथा वित्तीय दबावों पर चिंता जताई गई। आईबीएसए देशों ने संतुलित, निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया। साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने तथा सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करने की प्रतिबद्धता दोहराई। जलवायु परिवर्तन पर तीनों देशों ने ग्लोबल साउथ में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना बढ़ाने, ऊर्जा दक्षता में सुधार और जैव ईंधन, बायोगैस तथा कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन जैसे टिकाऊ ईंधनों के विस्तार का समर्थन किया। बैठक में डिजिटल अवसंरचना, सार्वभौमिक और सार्थक कनेक्टिविटी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए आर्थिक विकास और सतत विकास की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।