‘डॉक्टर्स डे’ पर पीएम मोदी ने वेनेजुएला में सेवाएं दे रहे भारतीय चिकित्सकों को किया नमन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) के अवसर पर वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे भारतीय चिकित्सा पेशेवर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर जारी अपने संदेश में कहा, “आज, जब हम डॉक्टर्स डे मना रहे हैं, मैं ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत वेनेजुएला में अथक सेवा दे रहे भारत के सभी डॉक्टरों और चिकित्सा पेशेवरों की सराहना करता हूं। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए उनके प्रयास इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण हैं कि जब भी समाज किसी चुनौती का सामना करता है, हमारे चिकित्सा पेशेवर हमेशा आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय डॉक्टरों की प्रतिबद्धता, सेवा भावना और मानवीय दृष्टिकोण पूरी दुनिया में भारत की सकारात्मक पहचान को मजबूत कर रहा है। उन्होंने चिकित्सा समुदाय के योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। इससे पहले की एक पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के डॉक्टरों को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण, करुणा और अथक सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता ही भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “डॉक्टर्स डे पर हमारे समर्पित चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएं। उनकी कड़ी मेहनत, करुणा और सेवा के प्रति प्रतिबद्धता भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है। सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उनके अथक प्रयासों ने करोड़ों लोगों का विश्वास और आभार अर्जित किया है।” उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है, जबकि स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) मेडिकल सीटों में भी बड़े पैमाने पर वृद्धि की गई है। पीएम मोदी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में यह अभूतपूर्व विस्तार भावी डॉक्टरों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है, देश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मजबूत मानव संसाधन तैयार कर रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं देश के हर कोने तक पहुंचें। उन्होंने कहा, ” विकसित भारत के निर्माण की दिशा में डॉक्टरों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होगी। डॉक्टर न केवल निवारक स्वास्थ्य सेवाओं (प्रिवेंटिव हेल्थकेयर) को बढ़ावा देंगे, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान को आगे बढ़ाने, नवाचार को अपनाने तथा सभी नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी अग्रणी भूमिका निभाएंगे।” प्रधानमंत्री ने देश के सभी डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वस्थ, सक्षम और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अमूल्य है। ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ भारत सरकार की ओर से वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप के बाद शुरू की गई मानवीय पहल है। एचएडीआर मिशन के तहत भारत ने 41 सदस्यीय चिकित्सा दल, दो ‘भीष्म’ पोर्टेबल अस्पताल और 66 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री और दवाइयां वेनेजुएला भेजी हैं।
नॉर्वे की पहली फीफा वर्ल्ड कप नॉकआउट जीत पर हालैंड ने कहा, अब सब कुछ है बोनस

आर्लिंगटन। फीफा विश्व कप में नॉर्वे को इतिहास की पहली नॉकआउट जीत दिलाने के बाद स्टार स्ट्राइकर एरलिंग हालैंड बेहद खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि 28 वर्षों बाद विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने और ग्रुप चरण से आगे बढ़ने के बाद अब टीम के लिए आगे मिलने वाली हर सफलता “बोनस” के समान है। एरलिंग हालैंड ने फीफा विश्व कप में अपने गोल करने का सिलसिला जारी रखते हुए अंतिम क्षणों में निर्णायक गोल दागा, जिससे नॉर्वे ने कोट डी आइवर को 2-1 से हराया। इस जीत के साथ नॉर्वे ने 1998 के बाद पहली बार विश्व कप के अंतिम 16 (राउंड ऑफ 16) में जगह बनाई। हालैंड ने कहा, “यह इतिहास है और इसका अहसास अविश्वसनीय है। हमने 28 साल बाद पहली बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया, फिर ग्रुप चरण पार किया और अब अगले दौर में पहुंचकर न्यूयॉर्क में ब्राजील से मुकाबला करेंगे। यह शानदार है। अब इसके बाद मिलने वाली हर उपलब्धि हमारे लिए बोनस है। अब हम बिना किसी दबाव के खेल सकते हैं और इस पल का आनंद ले सकते हैं, क्योंकि शायद हमें दोबारा ऐसा एहसास कभी नहीं होगा।” पूरे मैच के दौरान कोट डी आइवर के खिलाड़ियों ने हालैंड को काफी हद तक रोककर रखा। हालांकि, दूसरे हाफ में अमाद डियालो के शानदार बराबरी के गोल से मुकाबले में वापसी करने वाली कोट डी आइवर की चुनौती को हालैंड ने अपने निर्णायक गोल से खत्म कर दिया। इस जीत के साथ स्टाले सोलबाकेन की टीम ने 6 जुलाई को न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी में ब्राजील के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ 16 मुकाबले में जगह बना ली। नॉर्वे के मुख्य कोच स्टाले सोलबाकेन ने कहा कि बेहद करीबी मुकाबले में उनकी टीम की अंत तक मजबूती बनाए रखने की क्षमता ही जीत का कारण बनी। उन्होंने फीफा से कहा, “मुझे लगता है कि यह बेहद बराबरी का मुकाबला था। दोनों टीमें अच्छी थीं और मैच किसी भी तरफ जा सकता था। लेकिन आज हमने अंत में शानदार खेल दिखाया और 1-1 की बराबरी के बाद वापसी करते हुए जीत हासिल की। मैच के आखिर में उन्हें एक अच्छा फ्री-किक मिला और उनके पास गोल करने के कुछ मौके भी थे।” उन्होंने आगे कहा, “कुल मिलाकर मुझे लगता है कि हम उनसे थोड़ा बेहतर रहे, लेकिन कोट डी आइवर की भी तारीफ करनी होगी, उन्होंने बहुत अच्छा खेल दिखाया। नॉर्वे के लिए यह पहली बार है जब हमने विश्व कप के नॉकआउट चरण में जीत हासिल की है और हमें इस उपलब्धि का पूरा आनंद लेना चाहिए। अब हम थोड़ा आराम करेंगे और ब्राजील के खिलाफ मुकाबले की तैयारी करेंगे।
ओटीटी की चुनौती से जूझ रहे सिनेमाघर, बॉक्स ऑफिस के कारोबार पर बंटी संचालकों की राय

मुंबई। साल 2026 के पहले छह महीने पूरे होने के बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सामने एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या दर्शक अब भी पहले की तरह सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं या उनकी पसंद बदल चुकी है। इसी मुद्दे पर देश के दो अनुभवी सिनेमाघर संचालकों ने अपनी-अपनी राय रखी है। पहले छह महीनों में रिलीज हुई फिल्मों के प्रदर्शन पर आईएएनएस से बात करते हुए मुंबई के ऐतिहासिक गेयटी गैलेक्सी सिनेमाघर के मालिक मनोज देसाई ने कहा, ”इस दौरान बहुत कम हिंदी फिल्में उम्मीद के मुताबिक कारोबार कर सकीं। ‘धुरंधर’ और ‘बॉर्डर 2’ जैसी कुछ फिल्मों को छोड़ दिया जाए तो बाकी ज्यादातर फिल्में दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में असफल रहीं। यह स्थिति फिल्म इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि अब लोगों के पास घर बैठे फिल्में देखने के कई विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में सिनेमाघरों तक दर्शकों को लाना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।” उन्होंने कहा, ”ओटीटी के बढ़ते प्रभाव ने सिनेमाघरों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पहले कोई सफल फिल्म कई हफ्ते तक लगातार चलती थी, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि अगर कोई फिल्म केवल एक हफ्ते तक भी अच्छा कारोबार कर ले, तो सिनेमाघर संचालक राहत की सांस लेते हैं। यह बदलाव पूरे कारोबार की तस्वीर बदल चुका है और अब हर नई फिल्म के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती रहती है।” मनोज देसाई ने अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का उदाहरण देते हुए कहा, ”इतने बड़े कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद फिल्म दर्शकों को लंबे समय तक बांधकर नहीं रख सकी। केवल बड़े नाम या ज्यादा कलाकार किसी फिल्म की सफलता की गारंटी नहीं होते। अगर दर्शकों को कहानी पसंद नहीं आती तो वे फिल्म देखने नहीं आते।” जब आईएएनएस ने उनसे पूछा कि किसी फिल्म की सफलता में कलाकार ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं या कहानी, तो मनोज देसाई ने कहा, ”सबसे बड़ा महत्व कहानी का है। दर्शक अब पहले की तरह केवल किसी बड़े अभिनेता के नाम पर टिकट नहीं खरीदते। आज लोग वही फिल्म देखना चाहते हैं जिसकी कहानी उन्हें नई लगती है। किसी फिल्म का संगीत भी उसकी सफलता में अहम भूमिका निभाता है। अच्छे गाने दर्शकों के बीच फिल्म के प्रति उत्सुकता बढ़ाते हैं और उन्हें सिनेमाघरों तक आने के लिए प्रेरित करते हैं।” मनोज देसाई ने कहा, “मुंबई जैसे शहर में भी कई बार साउथ फिल्में हिंदी फिल्मों की तुलना में ज्यादा अच्छा कारोबार कर रही हैं। दर्शक भाषा नहीं, बल्कि अच्छी कहानी और बेहतर प्रस्तुति को महत्व दे रहे हैं।” वहीं दूसरी ओर बिहार के पूर्णिया के सिनेमाघर संचालक अभिषेक चौहान ने पहले छह महीनों के कारोबार को संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा, ”मेरे अनुभव के अनुसार यह समय फिल्म इंडस्ट्री के लिए काफी अच्छा रहा है। ‘धुरंधर’, ‘बॉर्डर 2’, ‘भूत बंगला’ और ‘वेलकम टू द जंगल’ जैसी फिल्मों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अच्छा प्रदर्शन किया है। अगर फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है तो लोग उसे बड़े पर्दे पर देखने जरूर आते हैं।” अभिषेक चौहान ने कहा, ”फिल्म निर्माता अब फिर से ऐसी कहानियों की ओर लौट रहे हैं जो पूरे देश के दर्शकों से जुड़ सकें। कुछ समय पहले फिल्मों का ज्यादा ध्यान केवल बड़े शहरों के दर्शकों पर था, लेकिन अब निर्माता आम लोगों के जीवन, उनकी भावनाओं और सरल विषयों को अपनी फिल्मों में जगह दे रहे हैं। दर्शक इन फिल्मों से खुद को आसानी से जोड़ पा रहे हैं।” उन्होंने बताया, ”मेरे लिए सबसे बड़ी हैरानी ‘हॉन्टेड’ की सफलता रही। वहीं इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की शुरुआती रफ्तार धीमी थी, क्योंकि इसे मुख्य रूप से बड़े शहरों के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। अच्छी और मनोरंजक फिल्मों के लिए दर्शक आज भी सिनेमाघरों तक पहुंच रहे हैं।
काजोल का मजेदार अंदाज, बोलीं–’जो मेरी पोस्ट पसंद करते हैं, वही सबसे ज्यादा खुश, समझदार और खूबसूरत हैं’

मुंबई। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री काजोल अपनी शानदार अदाकारी के साथ-साथ अपने चुलबुले अंदाज के लिए भी जानी जाती हैं। वह जब भी सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट करती हैं तो उनके फैंस उसे खूब पसंद करते हैं। इस बार भी उन्होंने अपनी एक नई फोटो पोस्ट की, लेकिन उससे ज्यादा चर्चा उनके साथ लिखे गए मजेदार कैप्शन की हो रही है। काजोल ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक मुस्कुराती हुई सेल्फी पोस्ट की। यह सेल्फी उन्होंने कार के अंदर क्लिक की है। लुक की बात करें तो वह पिंक कलर की साड़ी में नजर आ रही है। इसके साथ उन्होंने डायमंड और रूबी चोकर नेकलेस पहना हुआ है। लाइट मेकअप के साथ उनका लुक काफी आकर्षक लग रहा है। तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, ”मेरी बनाई हुई एक स्टडी के अनुसार, जो लोग मेरे पोस्ट लाइक करते हैं, वे उन लोगों की तुलना में ज्यादा खुश, ज्यादा इंटेलिजेंट और बेहतर दिखने वाले होते हैं, जो उन्हें लाइक नहीं करते।” अगर काजोल के अभिनय सफर की बात करें तो उन्होंने साल 1992 में ‘बेखुदी’ फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार कई सफल फिल्मों जैसे- ‘बाजीगर’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘करण अर्जुन’, ‘गुप्त’, ‘प्यार तो होना ही था’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘फना’, ‘माय नेम इज खान’, ‘दिलवाले’, ‘तान्हाजी: द अनसंग वॉरियर’ और ‘लस्ट स्टोरीज 2’ में काम किया। फैंस उनकी जोड़ी को अभिनेता शाहरुख खान के साथ ज्यादा पसंद करते है। वह मशहूर अभिनेत्री तनुजा और दिवंगत फिल्म निर्माता शोमू मुखर्जी की बेटी हैं। उन्होंने साल 1999 में अभिनेता अजय देवगन से शादी किया। दोनों के दो बच्चे हैं, बेटी न्यासा देवगन और बेटा युग देवगन।
जीएसटी संग्रह जून में 13.9 प्रतिशत बढ़कर 1.94 लाख करोड़ रुपए रहा

नई दिल्ली। सकल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) संग्रह जुलाई में सालाना आधार पर 13.9 प्रतिशत बढ़कर 1,94,812 करोड़ रुपए हो गया है। यह पिछले साल समान अवधि में 1,71,105 करोड़ रुपए पर था। यह जानकारी सरकार की ओर से बुधवार को जारी डेटा में दी गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल सकल जीएसटी में सीजीएसटी (सेंट्रल जीएसटी) की हिस्सेदारी 37,376 करोड़ रुपए, एसजीएसटी (स्टेट जीएसटी) की हिस्सेदारी 45,116 करोड़ रुपए और आईजीएसटी (इंटीग्रेटिड जीएसटी) की हिस्सेदारी 1,12,320 करोड़ रुपए रही है। इसमें आयात जीएसटी से प्राप्त 60,038 करोड़ रुपए भी शामिल है। जून में जीएसटी रिफंड 32,436 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 25,121 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 29.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिफंड को हटाकर जून में शुद्ध जीएसटी संग्रह 1,62,377 करोड़ रुपए रहा है, जो कि जून 2025 में 1,45,984 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी संग्रह 6,31,699 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 5,82,542 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सरकार ने 91,482 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है, जिससे शुद्ध जीएसटी संग्रह 5,40,218 करोड़ रुपए रह गया है। जून में जीएसटी संग्रह में शीर्ष पांच राज्यों में महाराष्ट्र (9,924 करोड़ रुपए), गुजरात (4,333 करोड़ रुपए), कर्नाटक (4,118 करोड़ रुपए), तमिलनाडु (3,639 करोड़ रुपए) और उत्तर प्रदेश (3,249 करोड़ रुपए) का नाम शामिल था। इसके अतिरिक्त, आज से नौ वर्ष पहले 1 जुलाई, 2017 को जीएसटी को पूरे देश में लागू किया गया था। इसे आजादी के बाद का अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाता है। इसके चलते वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), सेल्स टैक्स जैसे कई कर समाप्त हुए और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो सकी है, जिससे देश में कारोबार करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया।
असम में वन महोत्सव की शुरुआत, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने लोगों से की एक-एक पौधा लगाने की अपील

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार को राज्य के लोगों से वन महोत्सव के दौरान कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर नागरिक की भागीदारी से ही राज्य को अधिक हरा-भरा बनाया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित व बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। वन महोत्सव की शुरुआत के अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोगों से ‘जन भागीदारी’ की ताकत को प्रकृति संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति इस अभियान में शामिल होगा, तो यह सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन आंदोलन बन जाएगा। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज से ‘वन महोत्सव’ सप्ताहभर चलने वाले प्रकृति उत्सव की शुरुआत हो रही है।” उन्होंने लोगों से अगले एक सप्ताह के भीतर कम से कम एक पौधा लगाने की अपील करते हुए कहा, “आइए, जन भागीदारी की ताकत से राज्य का हरित क्षेत्र बढ़ाएं और एक पौधा लगाकर अपने बच्चों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करें।” मुख्यमंत्री हिमंता ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब भी वे सरकारी काम से गुवाहाटी से बाहर किसी जिले की यात्रा पर जाते हैं, तो वहां एक पौधा जरूर लगाते हैं। उन्होंने कहा, “गुवाहाटी से बाहर अपनी हर यात्रा के दौरान मैं एक पौधा अवश्य लगाता हूं।” मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और बड़े स्तर पर वृक्षारोपण को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वन महोत्सव हर वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह में मनाया जाता है। यह देशव्यापी वृक्षारोपण अभियान है, जिसका उद्देश्य लोगों में जंगलों, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस दौरान सरकारें, शैक्षणिक संस्थान, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक मिलकर बड़े पैमाने पर पौधारोपण करते हैं। असम सरकार भी पिछले कुछ वर्षों से बड़े स्तर पर वृक्षारोपण और संरक्षण कार्यक्रम चला रही है। इसके साथ ही राज्य की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सरकार लगातार पर्यावरण संरक्षण अभियानों में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।
अखिलेश यादव के जन्मदिन पर खड़गे-मायावती ने दी शुभकामनाएं

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन्मदिन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें बधाई दी। साथ ही उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना भी की। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। मैं आपके उज्जवल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं। सामाजिक न्याय, समावेशी विकास व लोकतंत्र एवं संविधान को मजबूत करने की ओर हम मिलकर अग्रसर रहेंगे।” बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक्स पर लिखा, ”समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद अखिलेश यादव को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लंबी उम्र की शुभकामनाएं।” अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने एक्स पोस्ट में लिखा, ”समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। तथागत गौतम बुद्ध जी आपको स्वास्थ्य एवं दीर्घायु प्रदान करें।” इसके अलावा, यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा, ”सपा प्रमुख, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद अखिलेश यादव को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और ढेरों शुभकामनाएं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण और आदि देव महादेव की कृपा आप पर बरसे और आप सदैव स्वस्थ रहें और दीर्घायु हों।” सपा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट लिखा, “समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अपनी कार्यकुशलता और सटीक रणनीति से भाजपा को 2024 लोकसभा चुनाव में पटखनी देने वाले शानदार नेता, जनता के हितैषी, विकास के विजन से युक्त, प्रदेश और देश का भविष्य अखिलेश यादव आपको जन्मदिन की हार्दिक हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर आपको शक्ति दें और आप प्रदेश का आगामी चुनाव में नेतृत्व करें जनता आपको वापिस से सूबे का सुल्तान बना देखना चाहती है और जनता आपको वोट और सीट देकर जन्मदिन का तोहफा देना चाहती है। जनता के हित के लिए जितना आप करते और सोचते हैं, कार्यकर्ताओं के हित और उज्जवल भविष्य के लिए जितना आप करते और सोचते हैं उतना कोई दूसरा नेता नहीं करता इसीलिए आप सर्वश्रेष्ठ हैं और जनता और कार्यकर्ता की पहली पसंद थे और हैं एवं रहेंगे। आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।” उधर, समाजवादी पार्टी मुख्यालय समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में बुधवार सुबह से ही जन्मदिन को लेकर उत्साह का माहौल है। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का तांता लगा है, जहां अखिलेश यादव का केक काटकर जन्मदिन मनाया जा रहा। समर्थकों में काफी उल्लास देखने को मिल रहा है। उनके स्वस्थ, दीर्घायु और सक्रिय सार्वजनिक जीवन की कामना कर रहे हैं। ज्ञात हो 1 जुलाई 1973 को इटावा जिले के सैफई में जन्मे अखिलेश यादव वर्ष 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वर्तमान में वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज के सांसद के रूप में पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल: कोलकाता पुलिस ने 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ पर लगाई पाबंदी, हाईकोर्ट जाएगी टीएमसी

कोलकाता। टीएमसी ने बुधवार को कोलकाता पुलिस की ओर से 21 जुलाई को मध्य कोलकाता में निषेधाज्ञा लागू करने के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। टीएमसी का कहना है कि इस इलाके में पार्टी हर वर्ष 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ मनाती है। मंगलवार को कोलकाता पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि इस वर्ष मध्य कोलकाता के व्यस्त एस्प्लेनेड क्रॉसिंग के पास सीईएससी हाउस के सामने ‘शहीद दिवस’ मनाने की इजाजात नहीं दी जाएगी। कोलकाता पुलिस की ओर से उस इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी है। इसके तहत एक ही समय और जगह पर तय संख्या से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं की ओर से कोलकाता पुलिस के इस फैसले पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन टीएमसी नेताओं ने कहा है कि वे इस मामले को कानूनी और राजनीतिक स्तर पर उठाएंगे। तृणमूल कांग्रेस के चार बार लोकसभा सांसद रहे और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी का कहना है कि पूरे इलाके में बीएनएसएस की धारा 163 लागू करना, और वह भी दो महीने के लिए, गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री, सुवेंदु अधिकारी, लोगों के लोकतांत्रिक रूप से इकट्ठा होने और संगठित विरोध प्रदर्शनों से डरते हैं। उन्होंने कहा, “हम इस आदेश के खिलाफ निश्चित रूप से अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। हम केस दायर करेंगे। हम कानूनी और राजनीतिक, दोनों तरह से इसका मुकाबला करेंगे। हमें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।” कल्याण बनर्जी ने आगे कहा, “लोगों के लोकतांत्रिक आंदोलन को इस तरह नहीं रोका जा सकता।” टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि न्यायपालिका राज्य प्रशासन की अलोकतांत्रिक ज्यादतियों का समाधान निकालेगी। तृणमूल कांग्रेस हमेशा सीईएससी हाउस के सामने शहीद दिवस रैली आयोजित करती रही है। वर्ष 1993 में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या की निंदा करने के लिए हर वर्ष 21 जुलाई को टीएमसी रैली निकालती है। पहले कांग्रेस की ओर से यह कार्यक्रम किया जाता था। वर्ष 1998 में कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने टीएमसी का गठन किया। उसके बाद से ही टीएमसी की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
सेना प्रमुख ने ‘विजय’ के विजन के साथ तय की भविष्य की दिशा

नई दिल्ली, ) भारतीय सेना के नए थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने सेना को तकनीक-सक्षम, आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार बल बनाने का संकल्प व्यक्त किया। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को ‘विजय’ नामक रणनीतिक अवधारणा में समाहित किया है। यह विजन रक्षा मंत्री द्वारा घोषित ‘परिवर्तन के दशक’ की अवधारणा से प्रेरित है और आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की कार्ययोजना का आधार बनेगा। बुधवार को रक्षा मंत्रालय मुख्यालय में आयोजित समारोह में थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री द्वारा उन पर जताए गए विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया तथा राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। सीमाओं पर पारंपरिक चुनौतियों के साथ-साथ साइबर, अंतरिक्ष, सूचना और तकनीक आधारित नए खतरे भी सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण को नई गति और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। ऐसे में सेना प्रमुख का लक्ष्य सेना को ऐसी शक्ति में बदलना है जो तकनीकी रूप से सक्षम, बहुआयामी अभियानों के लिए तैयार और हर स्तर पर सशक्त हो। सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना, युद्ध के लिए तैयार और अनुभवी सैन्य बल है। ये युद्ध क्षेत्र की हर चुनौती का सामना करने के लिए सदैव तैयार और सक्षम है। उन्होंने बताया कि ‘विजय’ का पहला स्तंभ सतर्कता और युद्धक तत्परता है। इसके अंतर्गत सीमाओं की सुरक्षा, उभरते खतरों पर निरंतर नजर, खुफिया क्षमता को मजबूत करना तथा हर परिस्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने की तैयारी बनाए रखना शामिल है। सेना का उद्देश्य किसी भी सुरक्षा चुनौती का सामना करने के लिए उच्च स्तर की परिचालन क्षमता बनाए रखना होगा। दूसरा स्तंभ नवाचार और परिवर्तन है। जनरल सेठ ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धक्षेत्र को देखते हुए हथियारों के आधुनिकीकरण व सैन्य सिद्धांतों, रणनीतियों और संचालन पद्धतियों में भी बदलाव आवश्यक है। एआई, ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर क्षमताओं और उन्नत संचार तकनीकों के अधिक उपयोग पर विशेष बल दिया जाएगा। उनकी रणनीति में संयुक्तता और एकीकरण को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त अभियानों की क्षमता और संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह दृष्टिकोण भविष्य के एकीकृत युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप माना जा रहा है। आत्मनिर्भरता भी उनके विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन, घरेलू उद्योगों के साथ सहयोग और भारतीय तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देकर सेना की आवश्यकताओं को देश के भीतर ही पूरा करने की दिशा में प्रयास तेज किए जाएंगे। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को भी लाभ होगा। जनरल सेठ ने सैनिकों को भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए उनके कल्याण, प्रशिक्षण, पेशेवर विकास और मनोबल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उनका मानना है कि आधुनिक उपकरणों और तकनीक के साथ-साथ सैनिकों का आत्मविश्वास और क्षमता ही सेना की वास्तविक ताकत है। नए थल सेनाध्यक्ष ने कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को लगातार विकसित करती रहेगी और देश की संप्रभुता तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहेगी। उन्होंने कहा कि एक अग्निवीर से लेकर सबसे वरिष्ठ वेटरन तक सब योद्धा हैं ये योद्धा हमारी सेना की सबसे बड़ी ताकत हैं ।
राघव चड्ढा को दिल्ली हाईकोर्ट से आंशिक राहत, पांच आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का दिया आदेश

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को आंशिक राहत देते हुए उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई पांच प्रथमदृष्टया मानहानिकारक पोस्ट हटाने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की व्यापक सुरक्षा देने या बाकी सभी पोस्ट हटाने के लिए कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद की एकल पीठ ने कहा कि पहली नजर में इस मामले में पर्सनैलिटी राइट्स का कोई उल्लंघन नहीं दिखाई देता। अदालत ने कहा, “इस मामले में पर्सनैलिटी राइट्स का सवाल नहीं बनता। मैंने केवल पांच दस्तावेज हटाने का आदेश दिया है। बाकी सामग्री पहली नजर में मानहानिकारक नहीं है।” राघव चड्ढा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर उनके नाम, तस्वीर, पहचान और छवि का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। कई पोस्ट में यह दिखाने की कोशिश की गई कि उन्होंने ‘पैसों के लिए खुद को बेच दिया।’ याचिका में यह भी कहा गया था कि उनके खिलाफ एआई से तैयार सामग्री, डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरें, कृत्रिम आवाज (सिंथेटिक वॉयस क्लोनिंग) और फर्जी भाषण सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए, जिन्हें हटाने का आदेश दिया जाए। इस मामले में मई महीने में अंतरिम राहत पर फैसला सुरक्षित रखते समय भी हाई कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि पहली नजर में यह मामला राजनीतिक फैसले की आलोचना से जुड़ा लगता है, न कि पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन से। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था, “पहली नजर में यहां पर्सनैलिटी राइट्स का कोई मामला नहीं बनता। राजनीतिक क्षेत्र में लिए गए आपके फैसले की आलोचना की जा रही है।” कोर्ट ने यह भी कहा था कि आलोचना और मानहानि के बीच की सीमा बहुत पतली होती है, लेकिन केवल पर्सनैलिटी राइट्स के आधार पर अंतरिम रोक लगाने की जरूरत इस मामले में नहीं दिखती। राघव चड्ढा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने अदालत में दलील दी थी कि कुछ पोस्ट सामान्य आलोचना से कहीं आगे बढ़कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाली और मानहानिकारक हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन तस्वीरों का जिक्र किया, जिनमें प्रधानमंत्री को राघव चड्ढा पर नोटों की बारिश करते हुए दिखाया गया था, साथ ही अन्य मॉर्फ्ड तस्वीरें भी पेश की गई थीं। राजीव नायर ने कहा कि इस तरह की सामग्री अशोभनीय है और इससे राघव चड्ढा की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अदालत ने मौखिक रूप से स्पष्ट किया कि यह मामला मानहानि का अधिक प्रतीत होता है, न कि पर्सनैलिटी राइट्स का। न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद ने यह भी कहा था कि यदि राघव चड्ढा मानहानि का दावा करना चाहते हैं, तो वे अपनी याचिका में आवश्यक संशोधन कर सकते हैं।