एसआईआर विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग पर हमला, ज्ञानेश कुमार को बताया ‘मोहरा’

नई दिल्ली। एसआईआर को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें केवल मोहरा करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग राहुल गांधी द्वारा दो साल पहले शुरू किए गए आंदोलन के दबाव में अब अपने फैसले बदल रहा है। विपक्ष का कहना है कि फ्री एंड फेयर इलेक्टोरल रोल के बिना फ्री एंड फेयर चुनाव संभव नहीं है और आयोग को देश से माफी मांगकर स्पष्ट करना चाहिए कि किसके इशारे पर असली वोटरों को लिस्ट से बाहर करने की कोशिश हुई। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “एसआईआर के लिए हो रही नई कोशिशों के बारे में चुनाव आयोग को सबसे पहले देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए और खुलकर बताना चाहिए कि क्या हुआ, किसके कहने पर हुआ और क्यों हुआ। देशभर में चल रहे आंदोलन के दबाव में चुनाव आयोग अब अपना तरीका बदलने लगा है। आंदोलन दो साल पहले हमारे नेता राहुल गांधी ने शुरू किया था और बाद में दूसरी पार्टियों ने भी इसका साथ दिया। राहुल गांधी का उठाया हुआ एक नारा पहले देशभर का नारा बन गया: वोट दो या कुर्सी छोड़ो। उन्होंने कहा कि इसमें स्पष्टीकरण होना चाहिए, क्योंकि इसके साथ-साथ लाखों लोग अभी इस हालत को झेल रहे हैं और इसमें हमारी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बंगाल में है, जहां 7,74,000 लोग हैं। तो जो चुनाव आयोग कहता है कि जो लोग वोट नहीं दे पाए, दोबारा उनके लिए फॉर्म भरा जाएगा, तो क्यों ट्रिब्यूनल में फंसे लोगों के लिए नहीं किया जाता? कांग्रेस नेता ने कहा कि दूसरी बात, चुनाव खत्म होने के बाद उनको लगा कि अब फिर वोटर लिस्ट में कुछ नाम शामिल करो। इसका मतलब यह स्पष्ट हो गया कि चुनाव आयोग सामने के दरवाजे से न सही, बल्कि पीछे के दरवाजे से यह मानता है कि राहुल गांधी के अगुवाई में हमने देश में जो आंदोलन और शेर-ओ-शायरी का जो तेवर था, जो रूप था, उसको मान्यता देते हैं। अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इसमें सवाल यह है कि फेयर इलेक्शन तब होते हैं जब फेयर एंड फ्री इलेक्टोरल रोल होते हैं। यह मेरा मत नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट का ऑब्जर्वेशन है तो फ्री एंड फेयर इलेक्शन कैसे हुआ, जब फ्री एंड फेयर मतदाता सूची ही नहीं थी। अगर किसी की जीत-हार एक वोट के अंतर से हो और कोई एक व्यक्ति वोट देने में नाकामयाब रहे और वह भी चुनाव आयोग की गलती से, तो इसकी जिम्मेदारी किस पर होगी, यह भी तय करना चाहिए। हम लोग यह मांग भी करेंगे, सड़क पर करेंगे, सदन में करेंगे। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि सीडब्ल्यूसी की बैठक में मल्किर्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उपस्थिति में सबकुछ तय हो गया है कि हम ये लड़ाई तब तक लड़ेंगे जब तक कि वोट चोरी नहीं रुकेगा। ज्ञानेश कुमार केवल मोहरा हैं। उनके माध्यम से वोट चोरी की जा रही है। हम ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ाई जरूर लड़ रहे हैं, लेकिन हमारा मुख्य मकसद प्रधानमंत्री को अपदस्थ करना है। जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा, “मौजूदा केंद्र सरकार लोगों के भरोसे के साथ खेल रही है और उनका भरोसा तोड़ रही है। यह ऑटोनॉमस संस्थाओं में ऐसे लोगों को अपॉइंट कर रही है जो करप्ट हैं। जिस तरह से सच सामने आया है, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने इलेक्शन कमीशन के बाकी दो सदस्यों को अंधेरे में रखा और उनकी सहमति या जानकारी के बिना, ऐसे कदम उठाए गए जिनसे असली वोटर्स को परेशान किया गया और उन्हें वोट देने के उनके अधिकार से दूर करने की कोशिश की गई।” शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि जिस ढंग से इस देश में चुनाव आयोग काम कर रहे हैं, वो ईसी कभी नहीं करती। ये तो सत्ता पक्ष के इशारे पर काम हुआ। अब आपस में झगड़ा हुआ तो पता चला। सिर्फ चुनाव आयोग ही नहीं, सभी व्यवस्थाएं भ्रष्ट हुई है। न्यायिक व्यवस्था क्या कर रही है? संविधान के तहत मिलने वाले मूलभूत अधिकार हमसे छीने जा रहे हैं। ये देश का सत्यानाश कर रहे हैं।
‘सिग्मा’ से तमिल सिनेमा में मेरे सफर के रोमांचक नए दौर की शुरुआत: शिव पंडित

चेन्नई। अभिनेता शिव पंडित ने जेसन संजय की हीस्ट थ्रिलर फिल्म ‘सिग्मा’ के साथ तमिल सिनेमा में वापसी की है। अभिनेता का कहना है कि यह फिल्म तमिल सिनेमा में उनके सफर के एक रोमांचक नए दौर की शुरुआत है। फिल्म में शिव पंडित विन्सेंट नाम का किरदार निभा रहे हैं, जिसके व्यक्तित्व में कई ग्रे शेड्स हैं। तमिल दर्शकों के साथ शिव पंडित का खास जुड़ाव रहा है। फिल्म ‘लीलाई’ में उनके अभिनय को रिलीज के वर्षों बाद भी दर्शक याद करते हैं। विष्णुवर्धन की ‘नेसिप्पयाल’ के जरिए तमिल सिनेमा में एक बार फिर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के बाद अब शिव पंडित ‘सिग्मा’ में एक महत्वपूर्ण और बिल्कुल अलग भूमिका में नजर आए हैं। ‘सिग्मा’ का निर्देशन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बेटे जेसन संजय ने किया है। अपने अभिनय के सफर और ‘सिग्मा’ के साथ तमिल सिनेमा में वापसी के बारे में शिव पंडित ने कहा, “मैं करीब 18-20 साल से अभिनय कर रहा हूं। मैंने पहली बार 2002 में कैमरे का सामना किया था, लेकिन अभिनय की शुरुआत इससे काफी पहले हो गई थी। नौ साल की उम्र में मैंने थिएटर में काम करना शुरू कर दिया था। मैं ड्रामा वर्कशॉप और स्टेज परफॉर्मेंस में हिस्सा लेता था।” उन्होंने आगे बताया कि दो से तीन साल तक रेडियो जॉकी के तौर पर काम करने के अनुभव ने उन्हें वॉइस मॉड्यूलेशन, एक्सप्रेशन और कम्युनिकेशन के बारे में बहुत कुछ सिखाया। शिव पंडित ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह मुख्यधारा के अभिनेता बनेंगे। बाद में उन्होंने निर्देशक बिजॉय नांबियार की फिल्म ‘शैतान’ से डेब्यू किया, जिसे अनुराग कश्यप ने प्रोड्यूस किया था। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट मेल डेब्यू कैटेगरी में फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला था। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों और विज्ञापनों में काम किया। तमिल सिनेमा के साथ अपने जुड़ाव पर शिव पंडित ने कहा, “‘लीलाई’ मेरी पहली तमिल फिल्म थी। उस समय इसे बड़े स्तर पर सिनेमाघरों में रिलीज नहीं मिली, लेकिन बाद में इस फिल्म ने ऑनलाइन दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। लोगों ने कई साल बाद फिल्म को खोजा और इसके गानों तथा बैकग्राउंड म्यूजिक को पसंद किया। आज भी इस फिल्म की अपनी फैन फॉलोइंग है। इसलिए एक महत्वपूर्ण भूमिका के साथ तमिल सिनेमा में वापसी करना मेरे लिए काफी रोमांचक है।” शिव पंडित ने बताया कि जेसन संजय ने सोशल मीडिया पर उनके बारे में हो रही चर्चा पर ध्यान दिया था। खासकर ‘लीलाई’ और उनके दूसरे काम को मिल रही प्रतिक्रिया के बाद जेसन को लगा कि उन्हें ‘सिग्मा’ में कास्ट करना दिलचस्प होगा। उन्होंने अपने किरदार के बारे में बताते हुए कहा कि विन्सेंट एक ग्रे कैरेक्टर है। वह महत्वाकांक्षी है और एक गैंबलिंग क्लब का मालिक है। अपने दोस्त एझिल के जरिए वह कुछ गलत गतिविधियों में शामिल हो जाता है। शिव पंडित ने कहा कि उन्हें इस तरह के किरदार को निभाने में काफी मजा आया। ‘सिग्मा’ को तेज रफ्तार वाली एक्शन-एडवेंचर हीस्ट कहानी बताते हुए शिव पंडित ने कहा कि उन्हें फिल्म का हिस्सा होने पर गर्व है। अभिनेता ने जेसन संजय की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने फिल्म के लिए काफी मेहनत की है और वह बेहद प्रोफेशनल फिल्ममेकर हैं। शिव पंडित ने कहा कि उन्हें खुशी है कि जेसन ने विन्सेंट के किरदार के लिए उन पर भरोसा जताया। उन्होंने संदीप किशन और फिल्म की पूरी टीम के साथ काम करने के अनुभव को भी शानदार बताया। शिव पंडित ने कहा, “जेसन अब मेरे लिए परिवार की तरह बन गए हैं और यही बात ‘सिग्मा’ का हिस्सा बनने को मेरे लिए और भी खास बनाती है।
गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने सूरत के लोगों की सुनीं समस्याएं, अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश

सूरत। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शनिवार को सूरत सर्किट हाउस में ‘जन संपर्क’ कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने सूरत शहर और जिले के लोगों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उन पर जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान संघवी ने नागरिकों और आवेदकों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों से जुड़ी उनकी समस्याओं को सुना। इस मौके पर संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लोगों की शिकायतों पर जरूरी कार्रवाई करने और समस्याओं का जल्द समाधान करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। जन संपर्क कार्यक्रम के जरिए सूरत के लोगों को अपनी शिकायतें सीधे उपमुख्यमंत्री के सामने रखने का मौका मिला। संघवी ने अधिकारियों को संबंधित मामलों की जांच कर उनके समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा। कार्यक्रम के दौरान ऐसे नागरिक भी उपमुख्यमंत्री से मिले, जिनकी शिकायतों का हाल ही में प्रशासन की ओर से समाधान किया गया था। उन्होंने समस्याओं के समाधान के बाद अपने अनुभव साझा किए और उपमुख्यमंत्री का आभार जताया। जन संपर्क कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को अपनी समस्याएं सीधे सरकार के सामने रखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना और आवेदकों एवं संबंधित सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाना था। बातचीत के दौरान कई नागरिकों ने अपनी शिकायतों पर प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई पर संतोष भी जताया। कार्यक्रम में नागरिकों, आवेदकों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान लंबित शिकायतों के साथ विकास से जुड़े मुद्दों को प्रशासनिक स्तर पर हल करने पर जोर दिया गया।
सीजेपी प्रोटेस्ट पर भड़के निरुपम बोले-शिवाजी पार्क में प्रतिबंध के बावजूद कानून तोड़ा, आयोजकों पर केस दर्ज करने की मांग

मुंबई। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने गुजरात में यूसीसी बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने का स्वागत करते हुए पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की वकालत की। इसके साथ ही शिवाजी पार्क में प्रतिबंध के बावजूद हुए सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को कानून का उल्लंघन बताते हुए आयोजकों और भीड़ पर केस दर्ज करने की मांग की है। शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा, “भारत का राष्ट्र धर्म हिंदू धर्म है। यह आज से नहीं, बल्कि 5,000 साल से है। धर्म की यह परंपरा चली आ रही है और इसी धर्म की परंपरा से हमारा देश और संस्कृति बने हैं। जब-जब हमारा धर्म कमजोर हुआ, जब-जब हिंदू कमजोर हुए, भारत को लूटा गया, भारत को तोड़ा गया और भारत को तबाह और बर्बाद किया गया। इसलिए अगर पूरे भारत को सुरक्षित रखना है, अगर देश को संकट से मुक्त रखना है और अगर भारत के सभी नागरिकों को सुरक्षित रखना है तो यह बहुत जरूरी है कि हमारा धर्म भी पूरी मजबूती के साथ खड़ा रहे और इसकी सुरक्षा के साथ कोई छेड़छाड़ न हो।” गुजरात के यूसीसी बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर शिवसेना के प्रवक्ता ने कहा कि भारत में एक यूनिफॉर्म सिविल कोड होना चाहिए। आप किसी भी धर्म के हों, आपकी शादी, तलाक, विरासत में प्रॉपर्टी मिलना यानी विरासत का मामला और गोद लेने का विषय बच्चे को गोद लेने की प्रथा। इन चार या पांच विषयों पर एक जैसा कानून होना चाहिए और इसी वजह से यूसीसी बनाया जा रहा है। गुजरात असेंबली से पास हुए यूसीसी को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। इसका मतलब है कि अब गुजरात में एक यूनिफॉर्म सिविल कोड शामिल हो गया है। सीजेपी प्रोटेस्ट को लेकर उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में किसी भी प्रकार की सभा, मीटिंग या विरोध प्रदर्शन करने से मना किया था। कॉकरोच जनता पार्टी को शिवाजी पार्क में किसी भी प्रकार की सभा करने से मना किया गया था, बावजूद इसके उन्होंने कानून का उल्लंघन करते हुए अपने कई फॉलोअर्स को बुलाया और बहुत सारे लोग वहां जमा हुए। उन्होंने कहा कि इस आधार पर सबसे पहला केस तो कॉकरोच जनता पार्टी के जो मुख्य चार-पांच नेता हैं, उनके ऊपर बनता है, क्योंकि उन्होंने कानून तोड़ने के लिए सबको उकसाया। इसके अलावा जो लोग भी आए थे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। संजय निरुपम ने कहा कि वहां पर आप महज एक संवैधानिक प्रावधान के आधार पर अपनी बात कहने के लिए जमा नहीं हो सकते। सरकार ने, पुलिस ने आजाद मैदान का क्षेत्र इस प्रकार के विरोध प्रदर्शनों के लिए मुकर्रर कर रखा है। यदि किसी को विरोध प्रदर्शन करना है तो निश्चित तौर पर आजाद मैदान में परमिशन मांगे, पुलिस उनको परमिशन देगी। मुंबई में कहीं भी वहां के स्थानीय लोगों को डिस्टर्ब करने के लिए यह सब नहीं होना चाहिए। भारत में समान नागरिक संहिता होनी चाहिए।
युद्धविराम में ईरानी जहाज पर अमेरिकी कब्जा ‘युद्ध अपराध’, ईरान जाएगा अंतरराष्ट्रीय अदालत

तेहरान। एक वरिष्ठ ईरानी शिपिंग अधिकारी ने कहा कि देश अंतरराष्ट्रीय अदालतों में अप्रैल में अपने एक कंटेनर जहाज पर हुए अमेरिकी हमले और उसे जब्त किए जाने के मामले को आगे बढ़ाएगा। आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने शनिवार को बताया कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच सीजफायर के दौरान हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान शिपिंग लाइंस (आईआरआईएसएल) के सीईओ मोहम्मद-रजा मोदर्रेस खियाबानी ने तेहरान में एक बैठक के दौरान कहा कि 19 अप्रैल को ओमान की खाड़ी में चाबहार बंदरगाह के पास ईरानी झंडे वाले जहाज ‘तूस्का’ पर अमेरिकी बलों ने चढ़कर उसे जब्त कर लिया था, जो एक ‘युद्ध अपराध’ है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, उन्होंने बताया कि जहाज पर ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी और डायलिसिस के मरीजों के लिए दवाएं थीं। युद्धविराम के दौरान किसी वाणिज्यिक जहाज पर हमला करना युद्ध अपराध और युद्धविराम का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की नौसैनिक नाकाबंदी लगाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और एक शत्रुतापूर्ण कार्य है। मोहम्मद-रजा ने आरोप लगाया कि अमेरिकी नौसेना ने तूस्का के इंजन रूम पर हमला किया और 28 चालक दल के सदस्यों को बंधक बना लिया। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने अगले कदम का खुलासा करने से इनकार कर दिया और कहा कि स्थिति बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और भविष्यवाणी की कि संघर्ष लंबे समय तक नहीं चलेगा। मरीन वन पर रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप से पूछा गया कि ईरान के संबंध में उनका अगला कदम क्या होगा तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुरू में सुझाव दिया कि इसका खुलासा करने से बड़ी खबर बन जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “अगर मैंने आपको बताया तो आपके पास एक बड़ी खबर होगी, है ना? लेकिन आप देखेंगे। सब बहुत अच्छे से हो रहा है। ईरान अच्छा नहीं कर रहा है।” राष्ट्रपति ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि उनका प्रशासन किस कार्रवाई पर विचार कर रहा है या कोई समय-सीमा नहीं दी। लेकिन पत्रकारों के साथ उसी बातचीत में बाद में, ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और यूरोप को बाजार में अधिक डीजल लाने के अपने प्रयासों पर चर्चा करते हुए फिर से ईरान का जिक्र किया।
2027 चुनाव से पहले यूपी भाजपा ने मजबूत किया मीडिया तंत्र, नई टीम का ऐलान

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में अपने मीडिया तंत्र को नए सिरे से व्यवस्थित करते हुए प्रदेश से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक नई जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से शनिवार को जारी सूची में 31 प्रदेश प्रवक्ताओं, 25 मीडिया पैनलिस्टों के साथ मीडिया वॉच और क्षेत्रीय मीडिया संयोजकों एवं सह-संयोजकों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। नई व्यवस्था के तहत हिमांशु दुबे और दीपक बघेल को प्रदेश मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, प्रदेश प्रवक्ता के तौर पर पार्टी ने 31 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश प्रवक्ताओं की सूची में डॉ. समीर सिंह, कौशलेंद्र पटेल, मनीष शुक्ला, हरी बाजपेयी, जुगुल किशोर, पंकज त्रिपाठी, ललजी निर्मल, आनंद दुबे, अनवीश त्यागी, आलोक वर्मा, अनिला सिंह, साक्षी दिवाकर, संजय चौधरी, अशोक पाण्डेय, अंकुश त्रिपाठी और समेत अन्य नेताओं को शामिल किया गया है। पार्टी ने प्रदेश मीडिया पैनलिस्टों की भी नई टीम घोषित की है। इसमें अमित बाल्मीकि, चंद्र मोहन चौबे, अपर्णा दीक्षित, धनंजय शुक्ला समेत 25 मीडिया पैनलिस्ट बनाए गए हैं। भाजपा ने मीडिया वॉच की जिम्मेदारी दिवस चतुर्वेदी और मनोज त्रिवेदी को सौंपी है। दोनों पदाधिकारी मीडिया में पार्टी और उससे जुड़े विषयों के कवरेज पर नजर रखने तथा संबंधित गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे। पार्टी ने प्रदेश स्तर के साथ-साथ क्षेत्रीय स्तर पर भी मीडिया टीम का गठन किया है। छह क्षेत्रों में तय हुई मीडिया टीम भाजपा ने पश्चिम, ब्रज, कानपुर, अवध, काशी और गोरखपुर क्षेत्र के लिए मीडिया संयोजक और सह-मीडिया संयोजकों की नियुक्ति की है। पश्चिम क्षेत्र में गजेन्द्र शर्मा को मीडिया संयोजक बनाया गया है। संजय माहेश्वरी, निमित जायसवाल और नितिन शर्मा सह-मीडिया संयोजक होंगे। ब्रज क्षेत्र में अंकित माहेश्वरी को मीडिया संयोजक बनाया गया है। अमित गुप्ता, शशि भूषण गुप्ता, श्याम सुन्दर पराशर और नीशित शर्मा सह-मीडिया संयोजक होंगे। कानपुर क्षेत्र में अनूप अवस्थी मीडिया संयोजक और संजय सिंह सह-मीडिया संयोजक होंगे। अवध क्षेत्र में आकाश मिश्रा को मीडिया संयोजक बनाया गया है। अमित वर्मा, सिद्धार्थ तिवारी, हिमालय वर्मा और दीपक तिवारी सह-मीडिया संयोजक होंगे। काशी क्षेत्र में मधुकर चित्रांश को मीडिया संयोजक बनाया गया है। संतोष सोलापुरकर और शैलेन्द्र मिश्रा सह-मीडिया संयोजक होंगे। गोरखपुर क्षेत्र में राहुल तिवारी को मीडिया संयोजक बनाया गया है। चंदन आर्य और समरेन्द्र विक्रम सिंह को सह-मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।
बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बीच बांग्लादेश में फैली अराजकता: रिपोर्ट

ढाका। बांग्लादेश में भीड़ के हमलों और तोड़फोड़ की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसमें दिन हो या रात, कोई भी व्यक्ति निशाना बन सकता है, और हिंसा के बाद उसे सही ठहराने के लिए तरह-तरह की बातें या तर्क सामने आते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, चाहे सैकड़ों दरगाहों और खानकाहों (सूफी केंद्रों) को तोड़ना हो या हाल ही में किसी मशहूर कंटेंट क्रिएटर के स्टूडियो में तोड़फोड़, ऐसे कामों को सही ठहराने वालों की कोई कमी नहीं है। यह अराजकता और सामाजिक पतन के चिंताजनक फैलाव को दिखाता है। बांग्लादेश के अखबार ‘प्रोथोम आलो’ की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “समृद्ध बांग्लादेश देखने और बनाने का सपना पुराना है। यह सिर्फ भाषणों या साहित्य तक सीमित नहीं है। हजारों लोगों ने अलग-अलग समय पर इस सपने के लिए अपनी जान दी है। कई लोगों ने अपने करियर को बनाने के बजाय इस सपने को पूरा करने पर ध्यान दिया। उनके लिए अपने करीबी लोगों की इच्छाओं से ज्यादा देश का भला जरूरी था। ऐसा कई दूसरे देशों में भी हुआ है। बांग्लादेश के मामले में वह सपना बार-बार अधूरा ही रह गया है।” बांग्लादेश के अखबार ‘न्यू एज’ का हवाला देते हुए कहा गया कि रिवर पुलिस ने पिछले 20 महीनों में नदियों से 900 से ज्यादा शव बरामद किए हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा शव ढाका इलाके की जलधाराओं में मिले। इसके अलावा, बांग्लादेश के बंगाली भाषा के अखबार ‘भोरर कागोज’ ने बताया कि इस साल के पहले आठ महीनों में राजधानी के पुलिस स्टेशनों में जबरन वसूली के 723 मामले या शिकायतें दर्ज की गईं। जिन शिकायतों की जांच की गई, उनमें से 85 प्रतिशत सही पाई गईं। रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों मामलों में जानकारी पुलिस से ली गई थी। इसमें सवाल उठाया गया, “बांग्लादेश के समाज में होने वाले असली अपराधों का एक छोटा सा हिस्सा ही पुलिस की जानकारी में आता है। अक्सर, और परेशानी से बचने के लिए पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज नहीं कराते। ऐसे में, ये रिपोर्टें एक डरावने आइसबर्ग (बर्फ के पहाड़) के ऊपरी हिस्से जैसी लग सकती हैं। इससे यह सवाल भी उठता है: अगर राजधानी और उसके आसपास के इलाकों का यह हाल है, तो दूर-दराज के गांवों में क्या हो रहा होगा?” रिपोर्ट के मुताबिक, असलियत यह है कि 2024 के बाद कोई भी राजनीतिक व्यवस्था तब तक नहीं टिक सकती जब तक वह लोगों की न्याय की चाहत को पूरा न करे, संसाधनों का समान बंटवारा सुनिश्चित न करे और जनहित में कानूनों और प्रशासन में सुधार न करे। फिर भी, रिपोर्ट में कहा गया है कि ठीक इसी वजह से, मौजूदा राजनीति ऐसे सुधार करने को तैयार नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया, “जबरन गायब करने की घटनाओं को रोकने वाले कानून, मानवाधिकार आयोग कानून, आरएबी में फेरबदल, संसदीय स्थायी समितियों के गठन और कामकाज के तरीके, और साइबर कानून के ड्राफ्ट में अस्पष्ट और खतरनाक प्रावधानों से बहुत कुछ साफ हो गया है।” इस हफ्ते की शुरुआत में बांग्लादेश की अवामी लीग ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी बीएनपी सरकार के दौर में देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई है। उन्होंने हत्या, रेप, भीड़ द्वारा हत्या और लोगों को जबरन गायब करने की चिंताजनक घटनाओं का हवाला दिया। पार्टी ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद पर कानून-व्यवस्था के बजाय राजनीतिक बदले की भावना को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिगड़ते हालात के बावजूद, वे एक मंच पर आए और अवामी लीग को खत्म करने की डींगें हांकते हुए ऐसा करने वालों के लिए इनाम की घोषणा भी की। पार्टी ने कहा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। जब कोई मंत्री उस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहने के बाद राजनीतिक गिरफ्तारियों के लिए इनाम की घोषणा करने लगता है, तो यह साफ हो जाता है कि इस सरकार के लिए लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है, बल्कि राजनीतिक बदला लेना प्राथमिकता है।
कप्तान होप ने 20 बाउंड्री के साथ जड़े नाबाद 162 रन, वेस्टइंडीज की 5 विकेट से जीत, मगर वनडे सीरीज भारत के नाम न्यू

चंडीगढ़। वेस्टइंडीज ने कप्तान शाई होप की 162 रनों की नाबाद पारी के दम पर भारत के खिलाफ वनडे सीरीज के तीसरे और अंतिम मैच को 5 विकेट से अपने नाम किया। यह वनडे में वेस्टइंडीज का सबसे बड़ा सफल रन-चेज रहा। भले ही पीसीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित यह मैच मेहमान टीम के नाम रहा, मगर सीरीज भारत ने 2-1 से जीती। शनिवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने खराब शुरुआत के बावजूद 351/7 का स्कोर खड़ा किया। मेजबानों ने महज 4 रन तक अपने 2 विकेट गंवा दिए थे, जिसके बाद रोहित शर्मा ने ऋतुराज गायकवाड़ (57) के साथ तीसरे विकेट के लिए 132 गेंदों में 137 रन की साझेदारी करते हुए टीम को संभाला। रोहित 85 गेंदों में 3 छक्कों और 10 चौकों के साथ 92 रन बनाकर पवेलियन लौटे। इसके बाद केएल राहुल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने नमन धीर के साथ पांचवें विकेट के लिए 43 गेंदों में 65 रन की साझेदारी करते हुए टीम को 225 के स्कोर तक पहुंचाया। नमन धीर 30 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद डेब्यूटेंट अंशुल कंबोज (17) के साथ केएल राहुल ने 28 गेंदों में 40 रन, जबकि गुरनूर बरार (नाबाद 8) के साथ सिर्फ 26 गेंदों में 61 रन की अटूट साझेदारी करते हुए भारत को विशाल स्कोर तक पहुंचा दिया। केएल राहुल 87 गेंदों में 6 छक्कों और 10 चौकों के साथ 129 रन बनाकर नाबाद रहे। वेस्टइंडीज की तरफ से जायडेन सील्स ने सर्वाधिक 3 विकेट हासिल किए, जबकि कीमो पॉल ने 2 विकेट निकाले। इनके अलावा, एक विकेट गुडाकेश मोती के हाथ लगा। इसके जवाब में वेस्टइंडीज ने 48.2 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया। जॉन कैंपबेल ने शाई होप के साथ पहले विकेट के लिए 41 रन जोड़े। कैंपबेल टीम के खाते में सिर्फ 10 रन का योगदान दे सके। इसके बाद कप्तान शाई होप ने मोर्चा संभाला। शाई होप ने आमिर जंगू के साथ दूसरे विकेट के लिए 109 रन जोड़कर टीम को 150 के स्कोर तक पहुंचाया। जंगू 56 गेंदों में 6 बाउंड्री के साथ 67 रन बनाकर आउट हुए, जिसके बाद होप ने शेरफन रदरफोर्ड के साथ तीसरे विकेट के लिए 56 रन जुटाए। रदरफोर्ड 24 रन बनाकर आउट हुए। यहां से शाई होप ने कीमो पॉल (44) के साथ चौथे विकेट के लिए 65 रन जोड़े। इस टीम को 290 के स्कोर पर पांचवां झटका लग गया था। यहां से मैच रोमांचक स्थिति में था, लेकिन होप ने गुडाकेश मोती के साथ 29 गेंदों में 62 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। होप 143 गेंदों में 162 रन बनाकर नाबाद रहे। उनकी इस पारी में 3 छक्के और 17 चौके शामिल थे, जबकि गुडाकेश मोती ने 14 गेंदों में नाबाद 19 रन बनाए। भारतीय खेमे से मोहम्मद सिराज, गुरनूर बरार, कुलदीप यादव और नमन धीर ने 1-1 विकेट हासिल किया। वनडे के बाद भारत और वेस्टइंडीज की टीमें 6-17 अक्टूबर के बीच पांच मुकाबलों की टी20 सीरीज खेलेंगी।
राजस्थान: विलुप्ति के कगार से वापसी की ओर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, संरक्षण कार्यक्रम पहुंचा नए चरण में

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) संरक्षण कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में यह संरक्षण कार्यक्रम दुनिया के लिए एक उदाहरण बन गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने इस कार्यक्रम में तेजी से हुई प्रगति के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, वन विभाग के अधिकारियों, भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम अब इन पक्षियों को दोबारा प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने यानी रीवाइल्डिंग के चरण तक पहुंच गया है। भूपेंद्र यादव जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए तैयार किए गए दो ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को सॉफ्ट-रिलीज फैसिलिटी से जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया की शुरुआत के मौके पर बोल रहे थे। इन पक्षियों को रविवार को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाना है। आधिकारिक बयान के मुताबिक, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए। भूपेंद्र यादव ने कहा कि जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम की सफलता से पर्यावरण को होने वाले फायदों के साथ स्थानीय समुदायों को इको-टूरिज्म के जरिए आर्थिक लाभ भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड थार के पारिस्थितिकी तंत्र की एक महत्वपूर्ण प्रजाति है। उन्होंने घास के मैदानों के संरक्षण, भूमि क्षरण रोकने और मध्य एशियाई फ्लाईवे से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में इसके महत्व का जिक्र किया। अपने दौरे पर केंद्रीय मंत्री ने इन्क्यूबेशन और ब्रीडिंग फैसिलिटी की समीक्षा की और जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों से बातचीत की। रामदेवरा में रीवाइल्डिंग एवियरी का निर्माण राजस्थान वन विभाग ने राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से कराया है। इसके लिए राजस्थान सरकार ने 9.25 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया था। इसे केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों की सलाह से तैयार किया गया है। यह बड़ी एवियरी बिना खंभों के बनाई गई है, जिससे कैप्टिव ब्रीडिंग के जरिए तैयार किए गए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को उड़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। इससे पक्षियों को अपनी उड़ान क्षमता विकसित करने, प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल होने और जंगल में छोड़े जाने से पहले प्राकृतिक व्यवहार अपनाने में मदद मिलती है। कार्यक्रम के दौरान रामदेवरा और सम में स्थित जीआईबी कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके साथ ही जीआईबी संरक्षण की दस साल की यात्रा पर तैयार एक ब्रोशर भी जारी किया गया। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य पक्षी की रीवाइल्डिंग को पूरे प्रदेश के लिए गर्व का दिन बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से थार की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को विलुप्त होने की कगार से वापस लाने में मदद मिली है। मुख्यमंत्री ने जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम के लिए राजस्थान सरकार की ओर से दी गई आर्थिक सहायता की भी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए अन्य प्रयासों का भी जिक्र किया। कार्यक्रम में राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा के साथ केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सेबी ने फर्जी नोटिस की पहचान आसान बनाई, निवेशकों के लिए नया वेरिफिकेशन सिस्टम लागू

मुंबई। शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निवेशकों की सुरक्षा और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए दो अहम कदम उठाए हैं। एक तरफ सेबी ने फर्जी लेटर और नोटिस की पहचान आसान बनाने के लिए अपने डॉक्यूमेंट नंबर वेरिफिकेशन सिस्टम (डीएनवीएस) को अपग्रेड किया है। वहीं प्रोजेक्ट जागरूक के तहत स्टॉक ब्रोकर्स की वेबसाइट और ट्रेडिंग ऐप पर निवेशक जागरूकता मैसेज दिखाने की व्यवस्था की गई है। सेबी के नाम पर जारी होने वाले फर्जी पत्र और नोटिस के मामलों को देखते हुए डॉक्यूमेंट नंबर वेरिफिकेशन सिस्टम में बदलाव किया गया है। नया सिस्टम सितंबर 2026 से लागू हो गया है। नई व्यवस्था में किसी दस्तावेज को सत्यापित करने के लिए ‘सब्जेक्ट मैटर’ यानी पत्र का विषय भी देना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले मुख्य रूप से आउटवर्ड नंबर के आधार पर वेरिफिकेशन किया जाता था। इसका गलत इस्तेमाल कर ठग किसी असली आउटवर्ड नंबर को फर्जी नोटिस पर इस्तेमाल कर सकते थे। नई व्यवस्था में अतिरिक्त जानकारी के मिलान से इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। अगर किसी व्यक्ति को सेबी के नाम से कोई फिजिकल लेटर, नोटिस या शो-कॉज नोटिस मिलता है तो सेबी की वेबसाइट के जरिए उसकी जांच की जा सकती है। इसके लिए पांच जानकारियां देनी होंगी, जिसमें आउटवर्ड नंबर, पत्र जारी करने वाले अधिकारी का नाम, पत्र जारी होने की तारीख, पत्र का विषय यानी सब्जेक्ट मैटर और प्राप्तकर्ता का नाम शामिल है। अगर सभी जानकारियां रिकॉर्ड से मेल खाती हैं तो सिस्टम यह पुष्टि करेगा कि संबंधित दस्तावेज सेबी की ओर से जारी किया गया है। अगर वेरिफिकेशन के दौरान ‘नो रिकॉर्ड फाउंड’ दिखाई देता है तो संबंधित व्यक्ति ईमेल भेजकर दस्तावेज के बारे में पुष्टि कर सकता है। सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सिस्टम केवल इस बात की पुष्टि करता है कि संबंधित पत्र या दस्तावेज सेबी की ओर से जारी किया गया है या नहीं। यह पत्र में लिखे गए कंटेंट की अलग से पुष्टि नहीं करता। सितंबर 2026 से पहले जारी किए गए पत्रों का सत्यापन ईमेल के माध्यम से किया जाएगा। इसके साथ ही सेबी ने निवेशकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट जागरूक के तहत स्टॉक ब्रोकर्स के लिए नई व्यवस्था की है। इसके तहत ब्रोकर्स को अपनी वेबसाइट और ट्रेडिंग ऐप पर निवेशक जागरूकता से जुड़े संदेश दिखाने होंगे। इस संबंध में 1 अक्टूबर 2026 को सर्कुलर जारी किया गया था। नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की व्यवस्था की गई है। पहले चरण में 5 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक सभी स्टॉक ब्रोकर्स को अपनी वेबसाइट पर सेबी की ओर से दिया गया इन्वेस्टर अवेयरनेस मैसेज और रिस्क डिस्क्लोजर दिखाना होगा। इस अवधि में ट्रेडिंग ऐप पर इन संदेशों को दिखाना स्वैच्छिक रहेगा। दूसरा चरण 1 नवंबर 2026 से शुरू होगा। इसके बाद ब्रोकर्स की वेबसाइट के लैंडिंग पेज पर निवेशक जागरूकता संदेश दिखाना अनिवार्य हो जाएगा। ट्रेडिंग ऐप पर भी जागरूकता संदेश और रिस्क डिस्क्लोजर को बारी-बारी से दिखाना होगा। एक दिन इन्वेस्टर अवेयरनेस मैसेज और अगले दिन रिस्क डिस्क्लोजर दिखाया जाएगा। सेबी के मुताबिक, इन जागरूकता संदेशों को समय-समय पर बदला जा सकता है। ऐसी स्थिति में स्टॉक ब्रोकर्स को नए और अपडेटेड संदेशों को अपनी वेबसाइट तथा ऐप पर दिखाना होगा। यह पहल वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक 2026 से पहले की गई है। इससे पहले मई 2023 में सेबी ने निवेशकों को जोखिम के बारे में बताने के लिए रिस्क डिस्क्लोजर से जुड़ी व्यवस्था लागू की थी। इन दोनों कदमों का उद्देश्य निवेशकों को फर्जी दस्तावेजों से बचाने के साथ उन्हें शेयर बाजार से जुड़े जोखिमों और जरूरी सावधानियों के बारे में जागरूक करना है।