इतिहास के पन्नों में 3 अगस्त: देश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट, जो अंगदान जागरूकता की बन गया मिसाल
नई दिल्ली। 3 अगस्त भारतीय चिकित्सा जगत के लिए बेहद खास दिन है। यही वह तारीख है, जब साल 1994 में भारत ने मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक ऐसा इतिहास रचा, जिसने लाखों दिल के मरीजों के लिए नई उम्मीद जगा दी। इसी दिन नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में देश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया था। 1994 से पहले अगर किसी भारतीय मरीज को हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती थी, तो उसके सामने विदेश जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता था। यह इलाज बेहद महंगा था और हर किसी की पहुंच से बाहर था। भारत में डॉक्टर लगातार इस दिशा में काम कर रहे थे, लेकिन कानूनी व्यवस्था और तकनीकी चुनौतियों के कारण सफलता नहीं मिल पा रही थी। इस दिशा में सबसे बड़ा बदलाव 7 जुलाई 1994 को आया, जब मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। इस कानून ने भारत में कानूनी रूप से अंगदान और अंग प्रत्यारोपण का रास्ता खोल दिया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने पूरी तैयारी के साथ देश का पहला हार्ट ट्रांसप्लांट करने का फैसला किया। 3 अगस्त 1994 को एम्स दिल्ली में वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. पी. वेणुगोपाल के नेतृत्व में करीब 20 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 42 वर्षीय मरीज देवी राम का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया। यह ऑपरेशन अपने समय के हिसाब से बेहद जटिल माना जाता था। पूरी प्रक्रिया लगभग 59 मिनट में पूरी हुई और सर्जरी पूरी तरह सफल रही। इस सफलता ने भारतीय चिकित्सा विज्ञान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। देवी राम का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट सिर्फ एक मरीज की जान बचाने तक सीमित नहीं था। इसने पूरे देश में अंगदान के प्रति लोगों की सोच बदलने का काम किया। लोगों को यह समझ आया कि किसी व्यक्ति के अंगदान से कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है। इसके बाद देश में धीरे-धीरे ऑर्गन डोनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ने लगी और कई अस्पतालों में हार्ट ट्रांसप्लांट की सुविधाएं विकसित हुईं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को सम्मान देने के लिए साल 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 अगस्त को राष्ट्रीय हृदय प्रत्यारोपण दिवस घोषित किया। पहली बार यह दिवस प्रधानमंत्री आवास पर मनाया गया, जहां उस समय तक सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री सुषमा स्वराज और एम्स के निदेशक डॉ. पी. वेणुगोपाल भी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम में डॉ. पी. वेणुगोपाल के प्रस्ताव पर ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन (ओआरबीओ) को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की भी घोषणा की गई। इसके बाद देश में अंगदान की व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। आज भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित डॉक्टरों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की बदौलत हजारों मरीजों को नया जीवन मिल रहा है। हालांकि, आज भी सबसे बड़ी चुनौती अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं, तो हर साल हजारों मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
क्या आपको 31 जुलाई तक आईटीआर दाखिल करना जरूरी था? जानिए किन टैक्सपेयर्स पर लागू नहीं होती यह डेडलाइन
नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की 31 जुलाई की समयसीमा खत्म हो चुकी है और अंतिम दिन बड़ी संख्या में करदाताओं ने रिटर्न दाखिल किया। हालांकि, हर टैक्सपेयर के लिए 31 जुलाई आखिरी तारीख नहीं थी। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि इस बात पर निर्भर करती है कि करदाता की आय का स्रोत क्या है और उसे कौन-सा आईटीआर फॉर्म भरना है। आयकर विभाग ने बताया कि आकलन वर्ष (एवाई) 2026-27 के लिए 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए गए। इनमें से 40 लाख से ज्यादा रिटर्न केवल अंतिम दिन दाखिल हुए। विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर करदाताओं का समय पर टैक्स अनुपालन करने के लिए आभार जताते हुए कहा कि उनका सहयोग देश की आर्थिक प्रगति को गति देता है। बता दें कि 31 जुलाई की अंतिम तिथि मुख्य रूप से वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उन व्यक्तियों के लिए थी, जिनकी आय वेतन, मकान, ब्याज या कैपिटल गेन जैसे स्रोतों से होती है। ऐसे करदाता आमतौर पर आईटीआर-1 या आईटीआर-2 फॉर्म के तहत रिटर्न दाखिल करते हैं। समय पर रिटर्न दाखिल करने से पेनल्टी से बचाव होता है और रिफंड मिलने की प्रक्रिया भी तेज रहती है। लेकिन जिन व्यक्तियों की आय व्यवसाय (बिजनेस) या पेशे से होती है और जिनके खातों का टैक्स ऑडिट आवश्यक नहीं है, उन्हें रिटर्न दाखिल करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। इस श्रेणी में फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, छोटे कारोबारी और कई प्रोफेशनल्स शामिल हैं, जो सामान्यतः आईटीआर-3 या आईटीआर-4 फॉर्म भरते हैं। वहीं, यदि किसी व्यवसाय या पेशे से जुड़े करदाता के खातों का टैक्स ऑडिट अनिवार्य है, तो उनके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है। ऐसे करदाताओं को 31 जुलाई की डेडलाइन को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। आईटीआर दाखिल करने की सही अंतिम तिथि जानने का सबसे आसान तरीका अपनी आय के स्रोत को समझना है। यदि आपकी आय केवल वेतन, पेंशन, ब्याज, किराया या पूंजीगत लाभ से है, तो सामान्यतः 31 जुलाई की समयसीमा लागू होती है। वहीं, यदि आपकी आय व्यवसाय या प्रोफेशन से है, तो आपकी डेडलाइन 31 अगस्त या 31 अक्टूबर हो सकती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आपके लिए कौन-सी समय सीमा लागू है। आमतौर पर, अगर किसी व्यक्ति की कर योग्य आय मूल छूट सीमा से अधिक है, तो उसे आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य होता है। नई टैक्स व्यवस्था के तहत 4 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स नहीं लगता। वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में 60 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के लिए यह सीमा 2.5 लाख रुपए, 60 से 79 वर्ष के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 3 लाख रुपए और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के सुपर सीनियर सिटीजन के लिए 5 लाख रुपए है। हालांकि, कुछ मामलों में आय छूट सीमा से कम होने के बावजूद भी आईटीआर फाइल करना जरूरी होता है। यदि किसी निवासी भारतीय के पास विदेश में कोई संपत्ति है, वह किसी विदेशी संपत्ति का लाभार्थी है, किसी विदेशी बैंक खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार रखता है या विदेश में कोई वित्तीय हित रखता है, तो उसे अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना होगा। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति ने वित्तीय वर्ष के दौरान निर्धारित हाई-वैल्यू वित्तीय लेनदेन किए हैं या उसकी कुल आय कटौतियों और छूट (जैसे धारा 80सी से 80यू या धारा 54 आदि) का लाभ लेने से पहले मूल छूट सीमा से अधिक है, तब भी आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। आयकर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ से अधिक आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं। अंतिम दिन 40 लाख से ज्यादा करदाताओं ने रिटर्न फाइल किया, जिससे साफ है कि बड़ी संख्या में लोगों ने आखिरी समय तक इंतजार किया। विभाग ने करदाताओं से समय पर रिटर्न दाखिल करने और कर नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि अनावश्यक जुर्माने और ब्याज से बचा जा सके।
संस्थागत साझेदारियों से हथकरघा क्षेत्र होगा मजबूत, बुनकर होंगे सशक्त : डॉ. एम. बीना

नई दिल्ली। आईआईटी और निफ्ट जैसे प्रमुख संस्थानों की साझेदारी के माध्यम से ऐसे तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जो बुनकरों की मेहनत को कम करें, पारंपरिक बुनाई प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक सटीकता का समावेश करें और उनके आजीविका स्तर को बेहतर बनाने में मदद करें। यह बात रविवार को वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने कही। डॉ. एम. बीना ने आईआईटी दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) में आयोजित ‘हैंडलूम हैकाथॉन 2.0’ को संबोधित करते हुए भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत और आधुनिक तकनीक के बीच पूरक संबंधों के बारे में विस्तार से बताया। कपड़ा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस हैकाथॉन में 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। देशभर से चुनी गई शीर्ष 100 टीमों के 280 प्रतिभागियों ने भारत के हथकरघा क्षेत्र के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधान विकसित करने में भागीदारी की। डॉ. बीना ने कहा, “हथकरघा हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जबकि प्रौद्योगिकी भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है। हैंडलूम हैकाथॉन के माध्यम से हम इन दोनों क्षेत्रों को जोड़कर बुनकर समुदाय के उत्थान का प्रयास कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि हथकरघा स्वाभाविक रूप से टिकाऊ विकास और परिपत्र अर्थव्यवस्था (सर्कुलैरिटी) को बढ़ावा देता है। साथ ही उन्होंने करघा संचालन, डिजाइन विकास और आधुनिक विपणन के क्षेत्रों में नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल एवं फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता ने कहा कि आईआईटी दिल्ली में स्थापित होने वाला ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हथकरघा टेक्नोलॉजी’ हथकरघा और तकनीक के एकीकरण को और मजबूत करेगा। इससे हस्तनिर्मित वस्त्रों की विशिष्टता को बनाए रखते हुए अधिक मानकीकरण और उत्पादकता सुनिश्चित की जा सकेगी। यह केंद्र वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से अगले सप्ताह उद्घाटित किए जाने का प्रस्ताव है। हैकाथॉन ने भारत के हथकरघा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए नवाचार, सहयोगात्मक अनुसंधान और तकनीक आधारित हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने की दिशा में वस्त्र मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया। बयान के अनुसार, युवा नवप्रवर्तकों को इस क्षेत्र के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर यह पहल उत्पादकता, स्थिरता और बाजार प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाने के साथ-साथ देश की समृद्ध हथकरघा विरासत को संरक्षित करने का लक्ष्य रखती है।
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का डिजाइन करने वाले पिंगली वेंकैया की जयंती पर रक्षा मंत्री, गृह मंत्री समेत अन्य नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। भारतीय ध्वज तिरंगे का डिजाइन करने वाले पिंगली वेंकैया की जयंती पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी सहित अन्य नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, “मैं पिंगली वेंकैया की जयंती पर उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने हमारे तिरंगे का डिजाइन तैयार किया था। एक प्रख्यात विद्वान और कई भाषाओं के जानकार, उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम, शिक्षा और कृषि अनुसंधान में उनके उल्लेखनीय योगदान ने राष्ट्र-निर्माण और राष्ट्रीय प्रगति के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाया। उनकी अमिट विरासत भारतीयों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।” गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट किया, “पिंगली वेंकैया को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उन्होंने हमारे राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ को डिजाइन करने में अमूल्य योगदान दिया, जो हमारे गौरव और आकांक्षाओं के प्रतीक के रूप में शान से लहराता है। स्वतंत्रता आंदोलन और ज्ञान की विभिन्न धाराओं के विकास में उनकी भूमिका भारतीयों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।” केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पोस्ट में कहा, “भारत के राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ को डिजाइन करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया की जयंती पर उन्हें सादर नमन।” केंद्रीय मंत्री ने एचडी कुमारस्वामी एक्स पर लिखा, “पिंगली वेंकैया की जयंती पर, मैं उस दूरदर्शी व्यक्ति को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनके असाधारण योगदान ने स्वतंत्र भारत को एकता, पहचान और राष्ट्रीय गौरव के सबसे स्थायी प्रतीकों में से एक ‘तिरंगा’ प्रदान किया।” केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “एक विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी और देशभक्त के रूप में वेंकैया का जीवन राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक था। भारत का राष्ट्रीय ध्वज केवल एक राष्ट्रीय प्रतीक नहीं है; यह अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान, हमारे संविधान के आदर्शों और एक अरब से अधिक भारतीयों की आकांक्षाओं को समाहित करता है। उनके असाधारण योगदान का सम्मान करते हुए, आइए हम अपने तिरंगे की गरिमा बनाए रखने के अपने संकल्प को दोहराएं और एकता, सेवा तथा राष्ट्र-निर्माण के उन मूल्यों के प्रति खुद को समर्पित करें जिनका यह ध्वज प्रतिनिधित्व करता है।” महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पर पोस्ट किया, “एकता, गर्व और संप्रभुता- हमारा तिरंगा इन सभी का प्रतीक है। भारत को आजादी और पहचान का सबसे अहम प्रतीक देने वाले भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के डिजाइनर, पिंगली वेंकय्या को उनकी जयंती पर सादर नमन!” आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने एक्स पोस्ट में कहा, “पिंगली वेंकय्या की 150वीं जयंती पर मैं उस दूरदर्शी व्यक्ति को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने भारत को हमारा तिरंगा दिया – जो हमारी एकता, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव का शाश्वत प्रतीक है। आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के भाटलापेनुमारु गांव में जन्मे इस महान देशभक्त ने देश को उसका सबसे प्रिय प्रतीक भेंट किया, जो हर तेलुगु व्यक्ति के लिए अत्यंत गर्व की बात है। उनकी असाधारण विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमारे राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और भावना को बनाए रखने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
अमेरिका के इडाहो में रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी, अंधाधुंध फायरिंग में तीन की मौत और कई घायल

सैन फ्रांसिस्को। उत्तर-पश्चिमी अमेरिकी राज्य इडाहो के ट्विन फॉल्स में एक इन-एन-आउट रेस्टोरेंट के इलाके में शनिवार को गोलीबारी की घटना सामने आई। इस गोलीबारी में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और कम से कम दो अन्य घायल हो गए। दोपहर 2:30 बजे से पहले रेस्तरां के अंदर गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय समय (2030 जीएमटी), सीबीएस न्यूज ने ट्विन फॉल्स शहर के सार्वजनिक सूचना समन्वयक जोशुआ पामर का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी। घटना से संबंधित अधिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। इस बीच, अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि पुलिस अमेरिकी राज्य इडाहो में ट्विन फॉल्स में एक इन-एन-आउट बर्गर रेस्तरां के पास एक सक्रिय गोलीबारी की घटना का जवाब दे रही थी। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ट्विन फॉल्स पुलिस विभाग ने एक पब्लिक सेफ्टी अलर्ट में कहा कि अधिकारी उस इलाके में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों को घटनास्थल से दूर रहने को कहा है, ताकि कानून लागू करने वाले अधिकारी और फर्स्ट रेस्पॉन्डर सुरक्षित रूप से काम कर सकें। शनिवार रात एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में, ट्विन फॉल्स पुलिस चीफ मैथ्यू हिक्स ने रिपोर्टरों को बताया कि मौतें हुई हैं। हालांकि, उन्होंने मृतकों की सही संख्या की पुष्टि नहीं की। हिक्स ने कहा कि एक स्थानीय अस्पताल में कई घायल लोगों का इलाज चल रहा है। संदिग्ध बंदूकधारी मर चुका है, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वह व्यक्ति कैसे मारा गया। ट्विन फॉल्स पुलिस डिपार्टमेंट के चीफ ने कहा, “हम उसकी पहचान और उसके पीछे के मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।” पुलिस ने कहा कि इलाके की सड़कें, जिसमें पास का पुल भी शामिल है, बंद कर दी गई हैं और गाड़ी चलाने वालों से कहा गया है कि वे दूसरे रास्ते इस्तेमाल करें और रोके गए इलाके में जाने की कोशिश न करें। शूटर्स की पहचान या संख्या और किसी भी संभावित गिरफ्तारी के बारे में आधिकारिक जानकारी का अभी इंतजार है। अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही और जानकारी मिलेगी, उसे जारी कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि जुलाई की शुरुआत में, सिएटल सेंटर में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई थी और पांच अन्य घायल हो गए थे, जहां बाइट ऑफ सिएटल फूड फेस्टिवल चल रहा था। सिएटल फायर डिपार्टमेंट ने कहा कि दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। चार और लोगों में एक दो साल का बच्चा, एक 23 साल का आदमी और दो बड़ी महिलाएं है, उन्हें हार्बरव्यू मेडिकल सेंटर ले जाया गया। एक 40 साल की महिला को मामूली चोटें आईं थीं, जिनका मौके पर ही इलाज किया गया और उन्होंने हॉस्पिटल ले जाने से मना कर दिया। हार्बरव्यू मेडिकल सेंटर ने कहा कि एक महिला की हालत गंभीर है और उसकी सर्जरी हो रही है, जबकि अस्पताल में भर्ती दूसरे मरीजों की हालत ठीक है। गोलीबारी के तुरंत बाद पुलिस और इमरजेंसी टीम मौके पर पहुंची और इलाके को खाली करा दिया।
स्यूटा संकट पर मंगलवार को बुलाई गई ईयू के गृह मंत्रियों की आपात बैठक

मैड्रिड। स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की अपील पर स्यूटा प्रवासी संकट को लेकर यूरोपीय संघ (ईयू) के गृह मंत्रियों की आपात बैठक मंगलवार को बुलाई गई है। स्पेन के पीएम ने शनिवार को एक खत लिख इसकी मांग की थी। ईयू और अन्य यूरोपीय संस्थाओं से उन्होंने कहा था कि यह केवल स्पेन का नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा और साझा सुरक्षा से जुड़ा मामला है। बैठक बुलाने का फैसला ईयू सदस्यों और फ्रॉन्टेक्स बॉर्डर एजेंसी विशेषज्ञों की टीम ने संयुक्त रूप से लिया। गुरुवार से शुक्रवार के बीच (महज 24 घंटों में) उत्तर मोरक्को से स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा में 50 हजार से ज्यादा प्रवासी अचानक प्रवेश कर गए थे। स्पेन के गृह मंत्रालय के अनुसार इस दौरान 67 लोगों की मौत हो गई। कुछ समुद्र में डूब गए तो कुछ अफरा-तफरी में मारे गए। मंत्रियों की मीटिंग बुलाने का निर्णय सबकी सहमति से लिया गया, क्योंकि ईयू सदस्य ग्रुप में इस मुद्दे को लेकर व्याप्त मतभेद को दूर करने और माइग्रेशन के लिए एक जैसा तरीका अपनाने की कोशिश को लेकर गंभीर हैं। वहीं, स्पेन ने कहा कि स्यूटा में प्रवासियों का प्रवेश रात को बंद हो गया, क्योंकि पुलिस ने मोरक्को के साथ अपने बॉर्डर पर 500 मीटर (1,640 फीट) का एक फ्लोटिंग बैरियर लगाना शुरू कर दिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने शनिवार को कहा, “मैं स्पेनिश पीएम के संपर्क में हूं और हम जो मदद कर सकते हैं, वह कर रहे हैं।” वहीं, इटली, डेनमार्क, पोलैंड और स्वीडन ने शनिवार को एक बैठक कर स्पेन के रवैए की आलोचना की। सांचेज ने कुछ यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में एकजुटता दिखाने के बजाय कुछ देशों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को तरजीह दी, जिससे यूरोपीय एकता कमजोर हुई। उनके अनुसार, स्यूटा में पहुंचे लगभग सभी प्रवासियों को 48 घंटे के भीतर मोरक्को वापस भेज दिया गया और “कोई भी स्पेन के मुख्य भूभाग या यूरोप के अन्य हिस्सों तक नहीं पहुंच सका।” स्यूटा में मोरक्को की ओर से 50,000 से अधिक लोगों ने प्रवेश करने की कोशिश की थी। इस दौरान भगदड़ और अफरा-तफरी में 67 लोगों की मौत हो गई। घटना के बाद स्पेन ने सीमा सुरक्षा कड़ी करते हुए समुद्री क्षेत्र में 500 मीटर लंबे फ्लोटिंग बैरियर लगाए, ताकि आगे इस तरह की घुसपैठ रोकी जा सके।
सीडब्ल्यूजी 2026: एक दिन में 16 मेडल जीतकर भारत ने लगाई मेडल टैली में लंबी छलांग, टॉप पर काबिज ऑस्ट्रेलिया

नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 10वां दिन ऐतिहासिक रहा। देश ने बॉक्सिंग में 10 मेडल समेत कुल 16 मेडल अपने नाम किए। एथलीटों के दमदार प्रदर्शन के बूते भारत ने मेडल टैली में भी लंबी छलांग लगाई है। भारत अब 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल के साथ मेडल टैली में चौथे नंबर पर आ गया है। भारत के कुल मेडल की संख्या अब 39 हो गई है और देश ने छह पायदान की छलांग लगाई है। ऑस्ट्रेलिया 10वें दिन भी अपनी बादशाहत को बरकरार रखने में सफल रहा है। ऑस्ट्रेलिया के पास 61 गोल्ड, 38 सिल्वर और 50 ब्रॉन्ज मेडल हैं। इंग्लैंड 25 गोल्ड, 40 सिल्वर और 34 ब्रॉन्ज मेडल लेकर कुल 99 मेडल के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। वहीं, कनाडा 18 गोल्ड समेत 57 मेडल जीतकर तीसरे नंबर पर काबिज है। भारत के शानदार प्रदर्शन के कारण मेजबान स्कॉटलैंड अब पांचवें नंबर पर खिसक गया है। स्कॉटलैंड के 12 गोल्ड, 8 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज मेडल हैं। वहीं, नाइजीरिया 10 गोल्ड समेत कुल 21 मेडल जीतकर छठे नंबर पर मौजूद है। वेल्स 8 गोल्ड, 10 सिल्वर और 12 ब्रॉन्ज मेडल लेकर सातवें स्थान पर हैं। न्यूजीलैंड 8 गोल्ड के साथ कुल 27 मेडल जीतकर आठवें नंबर पर मौजूद है। 10वें दिन भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन लाजवाब रहा। खासतौर पर भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार खेल दिखाते हुए कुल 10 मेडल अपने नाम किए, जिसमें 7 गोल्ड शामिल रहे। पुरुष कैटेगरी में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि महिला कैटेगरी में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने ‘गोल्डन पंच’ लगाया। वहीं, जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। वहीं, ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल ने सिल्वर, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। वहीं, शॉट पुट में भी भारत का प्रदर्शन दमदार रहा। सोमन राणा ने गोल्ड, जबकि शुभम जुयाल ने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया।
भारत के लिए मेडल जीतकर गर्व महसूस कर रहा हूं’, ब्रॉन्ज जीतने पर बोले सेल्वा प्रभु थिरुमारन

‘ग्लासगो, । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शनिवार को ट्रिपल जंप इवेंट में भारत की झोली में दो मेडल आए। प्रवीण चित्रवेल ने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने ब्रॉन्ज मेडल को अपने नाम किया। सेल्वा ने कहा कि वह भारत के लिए मेडल जीतकर गर्व महसूस कर रहे हैं। सेल्वा ने ‘आईएएनएस’ के साथ बात करते हुए कहा कि वह काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह उनका पहला सीनियर इंटरनेशनल मेडल है। सेल्वा ने कहा कि वह भारत के लिए मेडल जीतकर बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं। भारतीय एथलीट ने कहा कि यह बिल्कुल भी आसान नहीं होता है। सेल्वा ने कहा कि वह अपने यह मेडल परिवार, कोच और उन सभी लोगों को समर्पित करना चाहते हैं, जिन्होंने उनके इस सफर में उनकी मदद की। वहीं, सिल्वर मेडल जीतने वाले प्रवीण चित्रवेल ने कहा कि वह मेडल से ज्यादा अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे रहे थे। उन्होंने बताया कि वह अपने प्रदर्शन से थोड़ा निराश हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में वह चौथे स्थान पर रहे थे और मेडल से चूक गए थे और इसी कारण वह यहां पर सिल्वर मेडल जीतने से बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि वह एशियन गेम्स में और बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगे। प्रवीण ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ जंप के साथ सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। मेंस शॉट पुट एफ57 में सिल्वर मेडल जीतने वाले पैरा एथलीट शुभम जुयाल ने कहा कि यह मेडल उनके लिए काफी बड़ी उपलब्धि है। शुभम ने बताया कि वह चार साल पहले 1 अगस्त को आईसीयू में भर्ती थे और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह इस तरह कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेकर देश के लिए मेडल जीत पाएंगे। शुभम ने कहा कि उनके परिवार, दोस्तों और भारतीय सेना ने उन्हें काफी सपोर्ट किया। शुभम ने मेडल जीतने का श्रेय अपने कोच को दिया। उन्होंने 13.28 मीटर दूर गोला फेंककर सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
कर्नाटक भाजपा प्रमुख ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से कावेरी और मेकेदातु मुद्दों पर मांगा सहयोग

बेंगलुरु। कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने रविवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को एक खुला पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कावेरी नदी विवाद पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ बातचीत के दौरान एक राजनेता की तरह समझदारी भरा रवैया अपनाने और मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वर प्रोजेक्ट के लिए समर्थन देने का आग्रह किया। विजयेंद्र ने पत्र में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से अपील की कि वे प्रस्तावित मेकेदातु प्रोजेक्ट को सहयोग की भावना से देखें। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट तमिलनाडु के पानी के जायज हिस्से को प्रभावित किए बिना बेंगलुरु की पीने के पानी की जरूरतों को काफी हद तक पूरा कर सकता है। इस प्रोजेक्ट का समर्थन दोनों राज्यों के बीच सहयोग का एक मजबूत प्रतीक बनेगा। विजयेंद्र ने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच सदियों से गहरे और स्थायी संबंध रहे हैं, जो साझा इतिहास, संस्कृति, व्यापार और लोगों के बीच करीबी रिश्तों पर आधारित हैं। दोनों राज्य आपसी सम्मान और सद्भावना के आधार पर भाई-राज्यों की तरह रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लाखों तमिल लोगों ने कर्नाटक, खासकर बेंगलुरु को अपना घर बनाया है और इसके विकास में अहम योगदान दिया है, जबकि तमिलनाडु में रहने और काम करने वाले कन्नडिगा लोगों ने भी पड़ोसी राज्य की तरक्की और खुशहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह आपसी निर्भरता लोगों के बीच के उस रिश्ते को दिखाती है जो राज्य की सीमाओं से परे है। विजयेंद्र ने माना कि पड़ोसी राज्यों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उन्होंने कहा कि अहम बात यह है कि उन्हें कैसे सुलझाया जाता है। उन्होंने बेंगलुरु में तिरुवल्लुवर की मूर्ति लगाने से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दे का जिक्र किया और कहा कि आखिरकार इसे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा की सूझबूझ और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि की उदारता से सुलझाया गया। उनके नजरिए से यह साबित हुआ कि जब लोगों के व्यापक हित को प्राथमिकता दी जाती है, तो मुश्किल मुद्दों को भी सुलझाया जा सकता है। कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक के सीएम डी.के. शिवकुमार से बातचीत करने के लिए तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय के जल्द ही बेंगलुरु आने की खबरों का जिक्र करते हुए विजयेन्द्र ने उनसे अपील की कि वे कर्नाटक के किसानों और नागरिकों के प्रति सहानुभूति और राजनेता वाली समझदारी की भावना के साथ बातचीत करें। कावेरी को बेंगलुरु और उसके बेसिन में बसे कई कस्बों की जीवनरेखा बताते हुए विजयेंद्र ने कहा कि कर्नाटक में रहने वाले कन्नड़ और तमिल दोनों समुदायों के लाखों लोग पीने के पानी के लिए इस नदी पर निर्भर हैं। ऐसे समय में जब अनिश्चित मानसून ने किसानों और नागरिकों पर भारी दबाव डाला है, उन्होंने कहा कि उनकी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह उम्मीद जताते हुए कि सी. जोसेफ विजय कर्नाटक की जायज चिंताओं का सम्मान करते हुए तमिलनाडु के हितों की रक्षा करेंगे, विजयेंद्र ने कहा कि इस तरह का नजरिया पड़ोसी राज्यों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करेगा। उन्होंने पत्र का समापन इस संदेश के साथ किया, “कावेरी हमारे लोगों को बांटने के बजाय उन्हें एकजुट करे।
तमिलनाडु कांग्रेस प्रमुख ने कावेरी जल विवाद को लेकर भाजपा पर ‘दोहरा मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया

चेन्नई। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (टीएनसीसी) के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने कावेरी जल बंटवारे के विवाद पर भाजपा पर “दोहरे मापदंड” अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पार्टी के राज्य नेतृत्व ने कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के सामने तमिलनाडु के पानी के अधिकारों का मुद्दा उठाया है। एक्स पर एक पोस्ट में टैगोर ने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन से कई सवाल पूछे और आरोप लगाया कि पार्टी तमिलनाडु और कर्नाटक में कावेरी मुद्दे पर विरोधाभासी रुख अपना रही है। टैगोर ने कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा सहित अन्य भाजपा नेताओं के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया और दावा किया कि उन्होंने तमिलनाडु को पानी छोड़े जाने का विरोध किया था। उन्होंने नागेंद्रन से पूछा कि क्या उन्होंने वे प्रदर्शन देखे हैं और उन्हें चुनौती दी कि वे इस मुद्दे पर अपनी पार्टी के कर्नाटक के सहयोगियों के रुख का सार्वजनिक रूप से विरोध करें। टैगोर ने पूछा, “क्या आपने कल कर्नाटक में येदियुरप्पा समेत भाजपा नेताओं को सड़कों पर उतरकर यह कहते हुए नहीं देखा कि तमिलनाडु को पानी की एक बूंद भी नहीं छोड़ी जानी चाहिए?” उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरें और सोशल मीडिया पोस्ट उनकी पोस्ट के साथ अटैच की गई थीं। कांग्रेस नेता ने आगे यह भी सवाल किया कि क्या तमिलनाडु भाजपा नेतृत्व कावेरी विवाद को लेकर अपनी कर्नाटक इकाई का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने पूछा कि क्या नागेन्द्रन में कर्नाटक के भाजपा नेताओं का विरोध करने की “हिम्मत” थी, जब वे कावेरी के पानी पर तमिलनाडु के दावे के खिलाफ प्रचार कर रहे थे? टैगोर पूछा, “क्या आपने कभी प्रधानमंत्री मोदी या केंद्र में भाजपा सरकार से तमिलनाडु के पानी के वैध क्षेत्र को सुरक्षित करने के बारे में एक शब्द भी कहा है?” भाजपा पर राजनीतिक विरोधाभास का आरोप लगाते हुए टैगोर ने कहा कि पार्टी कर्नाटक में तमिलनाडु के हितों का विरोध करती रही, जबकि केंद्र में उसके नेतृत्व ने राज्य के अधिकारों की रक्षा नहीं की। वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु इकाई ने इस विवाद के लिए कांग्रेस पार्टी को दोषी ठहराने की कोशिश की। उन्होंने इसे भाजपा का “खुला दोहरा मापदंड” बताया और पार्टी पर कावेरी मुद्दे पर राजनीतिक नौटंकी करने का आरोप लगाया। टैगोर ने कहा कि तमिलनाडु के किसान राज्य के कावेरी जल के वैध अधिकारों को लेकर भाजपा के “झूठे ड्रामे और धोखेबाजी वाली राजनीति” से पूरी तरह वाकिफ हैं।