जंतर-मंतर जा रहे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के नेता हिरासत में लिए गए

नई दिल्ली। इंडिया ब्लॉक के नेताओं को बुधवार को जंतर-मंतर जाते समय पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हैं। विपक्षी नेता लगातार दूसरे दिन मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर जा रहे थे। हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “गृह मंत्री अमित शाह, पीएम नरेंद्र मोदी, सीईसी ज्ञानेश कुमार और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ये सब कुछ कर सकते हैं, लेकिन हम उन्हें न्याय के कटघरे में लाएंगे। यह मेरी गारंटी है कि इन चारों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह सब घबराहट में की गई प्रतिक्रिया है। यह सब डर है।” पुलिस ने राहुल गांधी समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को धक्का देते हुए बसों में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कस्तूरबा गांधी मार्ग पर हिरासत में लिए गए राहुल गांधी और अन्य नेताओं को ले जा रही बस का टायर कथित तौर पर पंक्चर कर दिया। इससे पहले प्रियंका गांधी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों की भारी मौजूदगी के बीच सड़क पर लेट गईं और विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग से मिलने की अनुमति दिए जाने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया। प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से कहा, “यह है कि वे सांसदों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, जो सिर्फ चुनाव आयुक्त से मिलने की मांग कर रहे हैं।” उन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर सांसदों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कहा, “पुलिसकर्मियों ने मुझे पूरी तरह खरोंच दिया है। उन्होंने हमें जमीन पर गिरा दिया। अब हम यहां से नहीं हटेंगे। उन्हें अपनी फोर्स वापस बुलाने दीजिए। मैं यहां से नहीं हटूंगी।” कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सुरक्षाकर्मियों पर लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हम कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज बर्दाश्त नहीं करेंगे। राहुल जी और मैं बस में थे। जब राहुल जी बस से नीचे उतरे तो राहुल जी और प्रियंका जी के साथ धक्का-मुक्की शुरू हो गई। उन्होंने गुंडागर्दी की है और गुंडों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।” कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, “जब तक हमें अपने सवालों के जवाब नहीं मिलते, हमारी आवाज मजबूत बनी रहेगी।” वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ पुलिस के कथित व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेताओं को बसों में भरकर पुलिस थानों ले जाया गया और दुर्भाग्य से सुबह उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या सार्वजनिक स्थानों पर जाना, धरना देना, विरोध प्रदर्शन करना या मार्च निकालना देश में गैरकानूनी है। इससे पहले जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले राहुल गांधी ने मंगलवार को आकाशवाणी भवन के बाहर नौ घंटे से अधिक समय तक धरना देने के मामले में अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले से ही 45 मामले हैं और उनका “लक्ष्य 100 प्राथमिकी” का है। मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने चुनाव आयोग के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए प्रदर्शन किया था। बुधवार को भी विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा।
’12 घंटे हिरासत में रखा, फोन छीन लिया, अब विधानसभा नहीं जाऊंगा’, गिरफ्तारी के बाद हुमायूं कबीर का फूटा गुस्सा

मुर्शीदाबाद। उपचुनाव के दौरान 12 घंटे तक हिरासत में रखे जाने के बाद विधायक हुमायूं कबीर ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस आम लोगों पर जुल्म कर रही है, झूठे केसों में फंसा रही है और लूटपाट कर रही है, जिसका वह विरोध नहीं कर पाए। इसके विरोध में उन्होंने विधानसभा और उसकी कमेटियों की बैठकों से दूर रहने का ऐलान किया और रेजिनगर की जनता से माफी मांगी। साथ ही पुलिस की ओर से किए गए बर्ताव का भी जिक्र किया। विधायक हुमायूं कबीर ने कहा, “पुलिस वाला जो मुझे रात 8 बजे ले गया, वहां से लेकर जाकर मेरा फोन ले लिया और मुझे एक अलग घर में बैठाकर रखा। उस घर में मैं बैठा था, मैंने सहयोग किया। उन्होंने मेरे साथ कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि आखिर में रिलीज होने के समय फिर उन्होंने कहा कि जुबान संभाल कर चलनी चाहिए। तो कोई पुलिस वाला मुझे बताएगा कि मैं जुबान से क्या बोलूंगा और क्या नहीं बोलूंगा, वह मैं नहीं मानूंगा। पुलिस लोगों पर अत्याचार कर रही है, जुल्म कर रही है, झूठे मामले देकर उन्हें पकड़ रही है, उनके घर में घुसकर उनकी मां-बहन की इज्जत लेने की कोशिश कर रही है। उनकी बात सुनकर मैं कभी नहीं चलूंगा। विधायक हुमायूं कबीर ने आगे कहा कि इसलिए मैंने उनसे कहा कि ठीक है, कोशिश करूंगा, लेकिन रेजिनगर थाने का ओसी मेरे सामने नहीं आया। वह मुझे छोड़कर फिर चला गया। एक इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर गोपाल सरकार भी थे, उन्होंने भी मेरे साथ कोई गलत बात नहीं की, अच्छे तरीके से बात की। बार-बार पूछा कि क्या जरूरत है, क्या खाएंगे, क्या खाना आएगा, सब कुछ किया। कोई बदतमीजी नहीं की। पुलिस वालों ने अंदर जो 12 घंटे रखा, इज्जत से बात की। किसी ने मेरे साथ कोई बदसलूकी नहीं की, कोई गलत बात भी नहीं की। राजनीति छोड़ने की अटकलों के बीच उन्होंने कहा कि मैंने राजनीति अभी छोड़ी नहीं है, लेकिन निर्णय नहीं लिया है। मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्रियों को बताना चाहता हूं कि दो महीने से पुलिस आम आदमी पर जबरदस्ती कर रही है। मंगलवार को उपचुनाव था, उसी समय से पुलिस ने आम आदमी के साथ जो बदतमीजी की, वोटरों के साथ जो किया, वह बर्दाश्त नहीं हो रहा है। लेकिन मैं इसका प्रतिकार नहीं कर पाया, इसके लिए रेजिनगर के जो आम आदमी हैं, वोटर हैं, उनसे माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा कि मैं पुलिस की जबरदस्ती के खिलाफ कुछ नहीं कर पाया। मुझे बंद करके 12 घंटे रखा गया, इसीलिए कल जो पुलिस वालों ने लूटपाट की, लोगों के सर्टिफिकेट छीन लिए, उसके विरोध में मैं विधानसभा से दूर रहूंगा। मैं विधानसभा का सदस्य रहूंगा, लेकिन विधानसभा नहीं जाऊंगा, न ही किसी कमेटी की मीटिंग में शामिल होऊंगा, विधानसभा के किसी प्रोग्राम में नहीं जाऊंगा। जब अगला सत्र होगा, असेंबली शुरू होगी, उस समय देखेंगे, जब विधानसभा में मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे तब जाऊंगा, फिर वापस आ जाऊंगा।
सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने आडवाणी से लिया आशीर्वाद, कहा- उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन में सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से उनके आवास पर मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने आडवाणी जी से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी जी के दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र के लिए उनके योगदान ने देश में अमिट छाप छोड़ी है। भारत की प्रगति को मजबूत बनाने में आडवाणी जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25 वर्ष पूरे किए हैं। उन्होंने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था और बाद में वर्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने, तब से वह लगातार शासन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों के नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी और उनके नेतृत्व की सराहना की है। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे ने प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें ‘हमारे समय का अवतार’ बताया। वहीं, नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टीनूबू ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई संदेश भेजते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लगातार 25 वर्षों तक नेतृत्व करना एक दुर्लभ उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश में यह उपलब्धि भारतीय जनता के प्रधानमंत्री मोदी पर अटूट विश्वास को दर्शाती है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने बधाई देते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष की अवधि पूरे होने पर मैं अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करना चाहती हूं। भारत के समाज और राष्ट्र के विकास को साकार करने के लिए वे वर्षों से प्रयास करते आए हैं और सन 2001 से अपने उत्कृष्ट राजनीतिक नेतृत्व से सरकार के प्रमुख के पद संभालते आए हैं। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी ने भारत के विकास को गति देने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इन सारी उपलब्धियों के लिए, मैं एक साथी राजनीतिज्ञ के रूप में सम्मान की भावना व्यक्त करती हूं। वहीं, भाजपा और कई सरकारों की ओर से कई राज्यों में ‘सेवा ही संकल्प’ अभियान चलाया जा रहा है।
25 साल के प्रशासनिक सफर पर दक्षिण कोरिया से आई बधाई, पीएम मोदी बोले- मिलकर बढ़ाएंगे शांति और समृद्धि का विजन

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रशासनिक जीवन के 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर पीएम मोदी को न केवल देशभर से, बल्कि दुनिया के कई देशों से शुभकामनाएं मिली हैं। इस लिस्ट में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का नाम भी शामिल है। वहीं, पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ली की शुभकामनाओं के लिए आभार जताया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राष्ट्रपति ली का आभार जताते हुए लिखा, “आपके प्यार भरे मैसेज के लिए राष्ट्रपति ली जे-म्यांग का धन्यवाद। मुझे अप्रैल में आपका भारत दौरा याद है, जिसने हमारी विशेष रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार दी।” पीएम मोदी ने आगे कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि हम सब मिलकर अपने कई तरह के सहयोग को और गहरा करेंगे और दुनिया भर में शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए अपने साझा नजरिए को आगे बढ़ाएंगे। वहीं, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने अपने बधाई संदेश में लिखा था, “आज से 25 वर्ष पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभालने के बाद से आपने भारत के लोगों के बेहतर जीवन के निर्माण के लिए स्वयं को समर्पित किया है। आपकी इस अटूट समर्पण के प्रति मैं अपना गहरा सम्मान व्यक्त करता हूं और इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपको हार्दिक बधाई देता हूं।” राष्ट्रपति ली ने प्रधानमंत्री की लीडरशिप की सराहना करते हुए कहा कि आपके नेतृत्व में भारत ने विनिर्माण क्षेत्र के विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के माध्यम से लगातार प्रगति की है और अलग-अलग चुनौतियों के बीच भी अपनी दृढ़ता का प्रदर्शन किया है। ये उपलब्धियां भारतीय जनता के लिए गर्व का विषय हैं और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका के विस्तार के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रणनीतिक साझेदारों के रूप में कोरिया गणराज्य और भारत मिलकर विकास और नवाचार के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। हम दोनों देशों में व्यवसायों और युवाओं की आकांक्षाओं और विकास को समर्थन देना जारी रखेंगे और पिछले अप्रैल में नई दिल्ली में हमने जो साझा दृष्टिकोण निर्धारित किया था, उसे साकार करेंगे। राष्ट्रपति ली ने पीएम मोदी को दक्षिण कोरिया आने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि मैं इस बार सियोल में आपका फिर से स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं। मैं आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं और भारत की जनता के प्रति कोरिया गणराज्य की जनता की गहरी मित्रता व्यक्त करता हूं।
चुनाव आयोग के रवैये और विपक्षी सांसदों से बर्ताव पर सचिन पायलट ने उठाए सवाल

जयपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने बुधवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से जुड़े हालिया घटनाक्रम और दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों के साथ किए गए व्यवहार ने देश में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। पायलट ने चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करने वाले प्रदर्शनों के दौरान विपक्ष के नेताओं, जिनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल थे, द्वारा विरोध-प्रदर्शनों को संभालने के तरीके की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग से मिलने की कोशिश कर रहे विपक्षी सांसदों को हिरासत में ले लिया गया और सवाल उठाया कि चुने हुए प्रतिनिधियों को संवैधानिक संस्था के सामने अपनी बात रखने की इजाजत क्यों नहीं दी गई। पायलट ने इन घटनाओं को तानाशाही बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को बातचीत और जवाबदेही के लिए खुला रहना चाहिए। वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों वोटरों के नाम लिस्ट से कटने का खतरा है और इस मुद्दे को संविधान में दिए गए वोटिंग के अधिकार के लिए खतरा बताया। पायलट ने ‘वोटबंदी’ (वोट देने का अधिकार छिनना) शब्द का भी इस्तेमाल किया और इसकी तुलना नोटबंदी से करते हुए कहा कि वोटर लिस्ट से जुड़ी चिंताओं पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। राजस्थान नगर निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए पायलट ने दावा किया कि कांग्रेस का प्रदर्शन नतीजों से कहीं बेहतर रहा क्योंकि पार्टी को ज्यादा वोट शेयर मिला। उन्होंने कहा कि मुझे यह कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि भाजपा जीत के बावजूद हार गई, जबकि हम हार के बावजूद जीत गए क्योंकि हमें ज्यादा वोट मिले। कांग्रेस नेता ने निकाय चुनावों के दौरान गड़बड़ियों और प्रशासनिक दखल का आरोप लगाया और दावा किया कि चुनाव के संचालन को लेकर कई जिलों से शिकायतें मिली थीं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने नतीजों की समीक्षा कर ली है और आने वाले पंचायती राज चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। पायलट ने भरोसा जताया कि कांग्रेस ग्रामीण राजस्थान में अच्छा प्रदर्शन करेगी और पंचायत चुनावों में भारी बहुमत हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी बेरोजगारी, किसानों की चिंताओं, कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने और राज्य में डीएपी खाद की कमी जैसे मुद्दों पर ध्यान देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में डीएपी खाद की भारी कमी है। इसे पुलिस सुरक्षा में बांटा जा रहा है, फिर भी सरकार बेपरवाह बनी हुई है। पायलट ने कहा कि कांग्रेस आगामी चुनाव एकजुट होकर लड़ेगी और पूरे राजस्थान के गांवों और मंडलों में दो महीने का जन-संपर्क अभियान चलाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी न केवल चुनावी मुद्दों पर ध्यान देगी, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और वोटिंग के अधिकारों की रक्षा करने की ज़रूरत पर भी जोर देगी। पंचायत चुनावों में बड़ी जीत की भविष्यवाणी करते हुए पायलट ने कहा कि इससे मिलने वाली बढ़त कांग्रेस को 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनावों की तैयारी में मदद करेगी।
दुर्गा पूजा में कैसे सजता है बंगाल? जानिए क्यों लाल-पाड़ वाली सफेद साड़ी है खास

कोलकाता। दुर्गा पूजा आते ही पश्चिम बंगाल, खासकर कोलकाता, रोशनी, कला, सजावट और धार्मिक उत्सव के रंग में रंग जाता है। शहर की गलियों से लेकर बड़े चौराहों तक पंडाल, रोशनी और अलग-अलग तरह की सजावट लोगों का ध्यान खींचती है। इस दौरान पारंपरिक परिधान भी उत्सव का खास हिस्सा बन जाते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान अलग-अलग इलाकों में अस्थायी पंडाल तैयार किए जाते हैं। इनकी सजावट कई बार ऐतिहासिक इमारतों, मंदिरों या सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों की थीम पर आधारित होती है। पारंपरिक बंगाली संस्कृति से लेकर अलग-अलग कलात्मक विषयों को पंडाल की सजावट में जगह दी जाती है। पंडालों के साथ-साथ आसपास के इलाकों को भी रोशनी से सजाया जाता है। गलियों और प्रमुख स्थानों पर रंग-बिरंगी लाइटें, झांकियां और आधुनिक तकनीक से तैयार की गई सजावट देखने को मिलती है। दुर्गा पूजा की तैयारियों में महालया का विशेष महत्व है। इस अवसर से जुड़ी परंपराओं में देवी दुर्गा की प्रतिमा की आंखें बनाने की रस्म को चक्षु दान कहा जाता है। दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण में मिट्टी के साथ बांस और कपड़े जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल भी पारंपरिक रूप से किया जाता है। पूजा के दिनों में लोग नए कपड़े पहनकर अलग-अलग पंडालों में जाते हैं। रात के समय पंडालों को देखने निकलने की यह परंपरा दुर्गा पूजा के सार्वजनिक उत्सव का प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। दुर्गा पूजा की परंपराओं में धनुची नृत्य का भी खास स्थान है। संध्या आरती के दौरान धुनुची के साथ यह पारंपरिक नृत्य किया जाता है। वहीं, विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की विदाई से पहले महिलाओं के बीच सिंदूर खेला की परंपरा देखने को मिलती है। इस दौरान महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। इसके बाद प्रतिमा विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा का समापन होता है। दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली महिलाओं के पारंपरिक परिधानों में सफेद साड़ी और लाल बॉर्डर वाली साड़ी, जिसे आम तौर पर लाल-पाड़ साड़ी कहा जाता है, खास तौर पर नजर आती है। यह बंगाली पारंपरिक पहनावे की पहचान से जुड़ी साड़ी है। लाल-पाड़ साड़ी कपास और रेशम जैसे कपड़ों में तैयार की जाती रही है। बंगाल में तांत जैसी पारंपरिक साड़ियों की अपनी अलग पहचान है। दुर्गा पूजा जैसे अवसरों पर लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनने की परंपरा सांस्कृतिक और धार्मिक वातावरण से जुड़ती है। इस साड़ी के दोनों रंगों को लेकर भी पारंपरिक मान्यताएं हैं। लाल रंग को शक्ति और ऊर्जा से जोड़ा जाता है, जबकि सफेद रंग को पवित्रता से संबंधित माना जाता है। यही वजह है कि लाल और सफेद रंगों वाली साड़ी दुर्गा पूजा के अवसर पर विशेष रूप से पसंद की जाती है। हालांकि, इसे सभी बंगाली महिलाओं के लिए अनिवार्य परिधान मानना सही नहीं होगा। लाल-पाड़ साड़ी का पारंपरिक बंगाली ड्रेपिंग स्टाइल भी इसे अलग पहचान देता है। इसमें पल्लू और बॉर्डर को इस तरह रखा जाता है कि साड़ी का लाल किनारा स्पष्ट दिखाई दे। पारंपरिक बंगाली लुक में गहनों की भी अहम भूमिका होती है। सोने के हार, झुमके, चूड़ियां और पारंपरिक डिजाइन वाले आभूषण साड़ी के साथ पहने जाते हैं। इससे दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली पारंपरिक परिधान का स्वरूप और अधिक स्पष्ट दिखाई देता है।
राहुल गांधी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया, कांग्रेसियों को इलाज कराना चाहिए: आलोक कुमार

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने एसआईआर और वोट चोरी के आरोपों को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लगातार चुनाव हारने से राहुल गांधी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और चुने हुए प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलना गलत है। संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाने से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने के वादे का स्वागत किया, गरबा में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक को जायज ठहराया और कहा कि एक देश एक चुनाव से विकास कार्यों में तेजी आएगी। विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “लगातार चुनाव हारने से उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। देशद्रोह जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना गलत है।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एसआईआर गलत है तो क्या केरल में दोबारा चुनाव कराया जाए? तमिलनाडु विधानसभा भंग कर चुनाव कराया जाए? कांग्रेस अध्यक्ष कह रहे हैं, “लोकसभा भंग करो, विधानसभाएं भंग करो, दोबारा चुनाव करो।” उनके मन में कहीं यह बैठा है कि हम राज परिवार से हैं और भारत में राज करने का हमारा पुश्तैनी अधिकार है। उन्होंने आगे कहा कि जनता समझती है कि यह सब नाटक है और इसका नुकसान होगा। संवैधानिक संस्थाओं का निरादर करना और उन पर उंगली उठाना ठीक नहीं है। इससे न तो कम समय के लिए कुछ फायदा होगा, न ही लंबे समय के लिए। कांग्रेसियों को खुद राहुल गांधी के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कुछ प्रयास करने चाहिए। पश्चिम बंगाल में यूसीसी को लेकर विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि यह बहुत अच्छा कदम है। हमने इसकी मांग की थी और संयोग से विश्व हिंदू परिषद की सभा में बोलते हुए उन्होंने इसका वादा किया है। लालच या धोखे से होने वाला अवैध धर्मांतरण तो बंद होना ही चाहिए। यह कानून आएगा तो देश के लिए अच्छा होगा। गरबा में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक की तैयारी को लेकर उन्होंने कहा कि मुसलमानों को खुद भी सोचना चाहिए कि वे क्यों आ रहे हैं। काबा उनका पवित्र स्थान है, वहां अन्य धर्मावलंबियों को आने की अनुमति नहीं है। हम इससे सहमत हैं कि अनुमति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह सैर-सपाटे की जगह नहीं बल्कि धार्मिक स्थान है। गरबा देवी की पूजा का स्थान है, माता की आराधना और श्रद्धा के साथ नृत्य करना एक धार्मिक कार्यक्रम है। आलोक कुमार ने कहा कि उनको तो इस धर्म में विश्वास नहीं है। अगर मुसलमानों को विश्वास नहीं है तो उन्हें नहीं आना चाहिए। कैसे रोकेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि मैं इतना आश्वासन दे सकता हूं कि कानून की मर्यादा में रहकर रोकेंगे। बाकी जो होगा वह आपके भी ध्यान में आएगा। एक देश एक चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि इन सभी विषयों पर हमें बोलने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए एक आयोग बना है जो विचार कर रहा है। अभी क्या हो रहा है कि हर साल लगातार चुनाव होते हैं तो आचार संहिता लग जाती है, नई योजनाएं लागू नहीं हो पातीं, और सबका ध्यान चुनाव में लगा रहता है। एक देश एक चुनाव होगा तो इसके बहुत सारे लाभ हैं, और जो आयोग बना है वह इस पर विचार करके अपनी राय देगा।
मध्य प्रदेश : राहुल-प्रियंका के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ 8 अक्टूबर को कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से 8 अक्टूबर को राज्यभर में प्रदर्शन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में विरोध मार्च के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य इंडिया गठबंधन सांसदों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में ये प्रदर्शन किए जाएंगे। पटवारी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जिला, ब्लॉक और मंडल स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने तथा 8 अक्टूबर को भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया। अपने संदेश में उन्होंने कहा, “आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे। इस दौरान उन्हें रोका गया और उनके साथ बल प्रयोग किया गया।” पटवारी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं पर लाठी चार्ज किया गया और उनके साथ “बर्बर व्यवहार” किया गया, जिससे कई नेताओं को चोटें आईं। उन्होंने एक्स पर लिखा, “लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर यह हमला संविधान पर हमला है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस दिन को भारतीय लोकतंत्र के लिए ‘काला दिवस’ घोषित किया है।” पटवारी ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील की। उनकी यह अपील कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ओर से सोशल मीडिया पर जारी संदेश के बाद आई है। पवन खेड़ा ने प्रदेश कांग्रेस समितियों, जिला कांग्रेस समितियों और ब्लॉक कांग्रेस समितियों से 8 अक्टूबर को ‘काला दिवस’ मनाने का आह्वान किया था। पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, “सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों, जिला कांग्रेस समितियों और ब्लॉक कांग्रेस समितियों को निर्देश दिया जाता है कि वे 8 अक्टूबर 2026 को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाएं। यह दिल्ली पुलिस द्वारा नेता प्रतिपक्ष और अन्य वरिष्ठ विपक्षी सांसदों पर की गई कथित कार्रवाई के विरोध में होगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई ‘आरएसएस-भाजपा-ईसीआई गठजोड़’ के इशारे पर की गई। गौरतलब है कि कांग्रेस हाल के दिनों में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ अपना अभियान तेज कर रही है और चुनाव आयोग से अधिक जवाबदेही की मांग कर रही है। बुधवार को मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के सांसद इसी मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे थे।
नवरात्रि विशेष: सती के 10 विराट रूपों से बनीं दशमहाविद्या, हर रूप का है अलग प्रतीक

नई दिल्ली। हिंदू धर्म की शाक्त परंपरा में दशमहाविद्या दस देवियों के एक समूह को कहा जाता है। ‘महाविद्या’ का सामान्य अर्थ ‘महान ज्ञान’ से जुड़ा है। इन देवियों की उपासना विशेष रूप से शाक्त और तांत्रिक परंपराओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है। विभिन्न ग्रंथों और परंपराओं में इनके स्वरूप, क्रम और व्याख्याओं में कुछ अंतर भी मिलता है। आम तौर पर जिन दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है, उनमें काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। विद्वत अध्ययनों के अनुसार यही क्रम और समूह आधुनिक स्रोतों में सबसे अधिक प्रचलित है। कहा जाता है कि जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जाने से शिव जी ने माता सती को रोका, तो क्रोध में सती ने अपना विराट रूप दिखाया। शिव जी जिस भी दिशा में जाते, उन्हें माता का एक नया रूप दिखता। इस तरह 10 दिशाओं में 10 रूप प्रकट हुए। वही दशमहाविद्या कहलाईं। काली: दशमहाविद्याओं में काली का स्थान प्रमुख है। उनका स्वरूप समय, मृत्यु और परिवर्तन से जुड़े प्रतीकों के साथ चित्रित किया जाता है। शाक्त परंपरा में काली को देवी के उग्र स्वरूपों में गिना जाता है। तारा: तारा दशमहाविद्याओं की दूसरी देवी मानी जाती हैं। उनका संबंध देवी की उस परंपरा से है जिसमें उन्हें संकट से पार लगाने वाली शक्ति के रूप में देखा जाता है। तारा की उपासना शाक्त और तांत्रिक परंपराओं में मिलती है। त्रिपुरसुंदरी: त्रिपुरसुंदरी को षोडशी नाम से भी जाना जाता है। उनका संबंध विशेष रूप से श्रीविद्या परंपरा से है। इस परंपरा में त्रिपुरसुंदरी की उपासना का महत्वपूर्ण स्थान है। भुवनेश्वरी: भुवनेश्वरी को दशमहाविद्याओं में चौथी देवी के रूप में रखा जाता है। उनके नाम का संबंध ‘भुवन’ यानी संसार या जगत से माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में उन्हें जगत की अधिष्ठात्री देवी के रूप में संबोधित किया जाता है। छिन्नमस्ता: छिन्नमस्ता का स्वरूप दशमहाविद्याओं में सबसे विशिष्ट और प्रतीकात्मक रूपों में माना जाता है। पारंपरिक चित्रण में उन्हें अपना ही सिर धारण किए हुए दिखाया जाता है। उनके स्वरूप की व्याख्या विभिन्न शाक्त परंपराओं में अलग-अलग प्रतीकों के माध्यम से की जाती है। भैरवी: भैरवी को दशमहाविद्याओं की छठी देवी माना जाता है। उनका स्वरूप शक्ति, तप और उग्रता से जुड़े प्रतीकों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। शाक्त साहित्य में भैरवी की अलग-अलग धार्मिक व्याख्याएं मिलती हैं। धूमावती: धूमावती का स्वरूप अन्य महाविद्याओं से अलग है। उन्हें सामान्यतः वृद्धा और विधवा स्वरूप में चित्रित किया जाता है। उनका संबंध वैराग्य और जीवन के कठिन पक्षों से जोड़कर समझाया जाता है। बगलामुखी: बगलामुखी दशमहाविद्याओं में आठवें स्थान पर मानी जाती हैं। उनके पारंपरिक चित्रण में उन्हें एक विशेष मुद्रा में दिखाया जाता है, जिसमें वे एक व्यक्ति की वाणी और गतिविधि को रोकने का प्रतीक प्रस्तुत करती हैं। इसी कारण उनकी उपासना को तांत्रिक परंपराओं में विशिष्ट स्थान मिला है। मातंगी: मातंगी दशमहाविद्याओं की नौवीं देवी हैं। उनका संबंध वाणी, संगीत और कला से जुड़े प्रतीकों के साथ बताया जाता है। उन्हें कई शाक्त परंपराओं में देवी सरस्वती के कुछ पहलुओं से संबंधित माना जाता है, हालांकि दोनों देवियों की धार्मिक पहचान अलग है। कमला: कमला दसवीं और अंतिम महाविद्या मानी जाती हैं। उनका स्वरूप कमल और समृद्धि से जुड़े प्रतीकों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। कई परंपराओं में कमला को देवी लक्ष्मी के स्वरूप से जोड़ा जाता है। दशमहाविद्या को नवदुर्गा से अलग समझना जरूरी है। नवदुर्गा में नौ नाम, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री, शामिल हैं। इन नौ रूपों की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों के क्रम में की जाती है। वहीं दशमहाविद्या दस देवियों का समूह है, जिसका संबंध विशेष रूप से शाक्त और तांत्रिक धार्मिक परंपराओं से है, इसलिए दोनों को देवी के स्वरूपों से जुड़ी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है। दशमहाविद्या को हिंदू शाक्त परंपरा में देवी के दस विशिष्ट स्वरूपों के समूह के रूप में समझा जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी का जीवन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा: स्वामी चिदानंद सरस्वती

नई दिल्ली। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की जीवन यात्रा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत के ऊर्जावान और तपस्वी प्रधानमंत्री मोदी की जीवन यात्रा, सेवा के 25 वर्षों का अभिनंदन है। राष्ट्र प्रथम के संकल्प को नमन है। भारत के उज्ज्वल भविष्य का अभिनंदन है। ‘जनता ही मेरा परिवार है’ जैसे भाव वाले महापुरुष के सार्वजनिक जीवन और सेवा के 25 वर्ष पूर्ण हुए हैं। इस अवसर पर ज्योति यात्रा के संकल्प का भी मैं अभिनंदन करता हूं। यह केवल 25 वर्षों का कालखंड नहीं है, बल्कि राष्ट्र सेवा, जनसेवा, संकल्प, साधना और समर्पण की ऐसी अद्भुत और अखंड यात्रा है, जिसे इतिहास स्वर्ण अक्षरों में लिखेगा। यह राष्ट्र निर्माण, भारत के पुनर्जागरण और देश के आत्मविश्वास के जागरण की यात्रा है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में अनेक राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री हुए हैं। कुछ लोग केवल इतिहास का हिस्सा बनते हैं, जबकि कुछ लोग इतिहास रचते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं। प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन की यह यात्रा एक ऐसी परिवर्तनकारी गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। कहां से शुरुआत की, कहां पहुंचे और कहां भारत को पहुंचाया। पीएम मोदी ने ऐसे काम किए कि पहचान बन गए। गुजरात से शुरू हुई प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा आज विकसित भारत के संकल्प से लेकर वैश्विक और विश्व कल्याण के संकल्प तक पहुंच गई है। इन 25 वर्षों में सेवा, सुशासन, संकल्प और राष्ट्र प्रथम की भावना ने करोड़ों भारतीयों के हृदय में एक नया आत्मविश्वास जगाया है। प्रधानमंत्री मोदी का हर कदम राष्ट्र के लिए, हर संकल्प भारत के लिए और हर उपलब्धि विश्व कल्याण के लिए है। भारत जैसे देश का प्रधानमंत्री होना आसान नहीं है और किसी भी निर्णय से पहले अनेक पहलुओं पर विचार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि उन्होंने देशवासियों के अंदर यह विश्वास जगाया कि हम कर सकते हैं, हम बदलाव ला सकते हैं और हम विश्व का नेतृत्व कर सकते हैं। आज दुनिया भारत को भारत की दृष्टि, भारत की चेतना और भारत के अपने दृष्टिकोण से देख रही है। पिछले 25 वर्षों में देश ने विकास से लेकर विरासत तक अनेक महत्वपूर्ण बदलावों और निर्णयों को देखा है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में विज्ञान और आध्यात्मिकता, विकास और विरासत के साथ-साथ तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहल हुई हैं। अयोध्या में श्री राम मंदिर, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ कॉरिडोर, महाकाल, डिजिटल इंडिया, यूपीआई, जी-20 और ग्लोबल साउथ से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों, व्यापक चुनौतियों और विभिन्न आलोचनाओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिनका देश की दिशा और दशा पर प्रभाव पड़ा। उन्होंने कच्छ के पुनर्निर्माण, नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक, अनुच्छेद 370 से जुड़ा निर्णय, तीन तलाक के खिलाफ कानून, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), नई शिक्षा नीति, आत्मनिर्भर भारत, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, राम मंदिर निर्माण, डिजिटल इंडिया, यूपीआई और जी-20 जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए इन्हें बदलते भारत की यात्रा के महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई युद्धों और चुनौतियों के बीच भारत ने विकास की अपनी यात्रा को आगे बढ़ाया है। देशवासियों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत केवल विकसित राष्ट्र बनने की क्षमता नहीं रखता, बल्कि विश्व को दिशा देने की भी क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सभ्यता, धार्मिक आस्था और धार्मिक पर्यटन को भी नए तरीके से आगे बढ़ाया है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पक्ष और विपक्ष से ऊपर उठकर सभी का सम्मान किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को भारत रत्न दिए जाने का भी जिक्र किया। मां गंगा के पावन तट और परमार्थ निकेतन से उनकी मंगलकामना है कि भारत का वैभव और आत्मविश्वास बढ़े, भारत की संस्कृति से पूरा विश्व प्रकाशित हो और 2047 का विकसित भारत विश्व कल्याण का एक दिव्य संकल्प बने। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि वे दीर्घायु हों, स्वस्थ रहें और उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए निरंतर ऊर्जा प्राप्त हो। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए भारत के उज्ज्वल भविष्य के महायज्ञ में सभी लोग सहभागी बनें और विकसित, आत्मनिर्भर, संस्कारित एवं विश्व कल्याणकारी भारत के संकल्प को मिलकर आगे बढ़ाएं।