अपने पहले बजट में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की घोषणा कर सकती है तमिलनाडु सरकार

चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार अपने पहले बजट में शिक्षा से जुड़ी कई बड़ी योजनाओं की घोषणा कर सकती है। इनमें सरकारी स्कूलों से सरकारी कॉलेजों में जाने वाले छात्रों के लिए 8,000 रुपये की आर्थिक मदद और छोटे किसानों के बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा जैसी योजनाएं शामिल हैं। तमिलनाडु का बजट 5 अगस्त को विधानसभा में पेश किया जाएगा और उसके बाद 6 अगस्त को कृषि बजट पेश किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए तैयारियां चल रही हैं। लोगों को इससे काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि यह विजय सरकार का पहला पूर्ण बजट होगा। खबरों के अनुसार, शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के मकसद से “वेट्री तमिलनाडु” नाम के पांच साल के विजन प्लान के तहत शिक्षा से जुड़ी कई घोषणाओं पर विचार किया जा रहा है। सरकार से यह भी उम्मीद है कि वह शिक्षा को ‘राज्य सूची’ में लाने के अपने रुख को दोहराएगी और शिक्षा क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को दूर करने के उपायों की रूपरेखा बताएगी। इन बाधाओं में राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नीट परीक्षा को लागू करना भी शामिल है। खबरों के मुताबिक, जिन प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है, उनमें अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम से लेकर रिसर्च स्टडीज़ तक के कोर्स करने वाले छात्रों के लिए 20 लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला एजुकेशन लोन शामिल है। सरकार उन किसानों के बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा की घोषणा भी कर सकती है, जिनके पास दो एकड़ से कम खेती योग्य जमीन है। एक और अहम प्रस्ताव यह है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट एडमिशन में आरक्षण को मौजूदा 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया जाए। उन जिलों में पांच नए सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है, जहां अभी कोई सरकारी प्रोफेशनल कॉलेज नहीं है। लगभग 30 सरकारी आर्ट्स और साइंस कॉलेजों को ऑटोनॉमस संस्थानों में अपग्रेड भी किया जा सकता है। कॉलेज एडमिशन से जुड़े आर्थिक बोझ को कम करने के लिए, सरकार उन छात्रों के लिए 8,000 रुपये की एकमुश्त सहायता की योजना बना रही है, जिन्होंने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की है और बाद में सरकारी कॉलेजों में एडमिशन लिया है। बजट उभरती हुई टेक्नोलॉजी को भी बड़ा बढ़ावा दे सकता है। सरकार ‘पेरियार इंस्टीट्यूट ऑफ इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ स्थापित करने पर विचार कर रही है। यह एक खास यूनिवर्सिटी होगी जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी। प्रस्तावित उपाय सरकार के व्यापक पांच साल के शिक्षा रोडमैप का एक अहम हिस्सा होंगे और बजट में इनके लिए फंडिंग और इन्हें लागू करने के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

रोज करें गरुड़ासन, मजबूत होंगे हाथ-पैर और दूर होगी शरीर की जकड़न

नई दिल्ली। स्वस्थ शरीर के लिए रोजाना योगासन और संतुलित आहार जरूरी है। योग में गरुड़ासन एक ऐसा आसन है जो शरीर को लचीलापन और मजबूती देता है। खासकर बच्चों के शारीरिक विकास और सेहत के लिए योग एक आसान और बहुत लाभकारी तरीका माना जाता है। गरुड़ासन का नाम ‘गरुड़’ शब्द पर रखा गया है। ‘गरुड़’ का मतलब होता है ‘चील’। इस आसन में आप चील की मुद्रा में होते हैं, इसलिए इसका नाम ‘गरुड़ासन’ दिया गया है। अंग्रेजी में इसे ईगल पोज कहा जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार गरुड़ासन संतुलन, एकाग्रता और शारीरिक मजबूती को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है, जो हाथ-पैर की मांसपेशियों को मजबूत करता है। इसके साथ ही, यह टखनों, पिंडलियों, जांघों और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। पैरों और कूल्हों में जकड़न दूर करता है। संतुलन और एकाग्रता में सुधार लाता है। कंधों और ऊपरी पीठ की अकड़न को भी दूर करता है। नसों को सक्रिय कर नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है। गरुड़ासन को करने के लिए पहले आप ताड़ासन मुद्रा में आराम से खड़े हो जाएं। इस दौरान आप सामान्य रूप से सांस लेते रहें। अब अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ें और दोनों हाथों को सामने की ओर लाएं। अब पूरे शरीर का संतुलन दाएं पैर पर लें और बाएं पैर को ऊपर की ओर उठाएं। इसके बाद बाएं पैर को दाईं टांग के आगे से घूमाते हुए पीछे की ओर ले जाएं। इस स्थिति में बाईं जांघ दाईं जांघ के ऊपर रहेगी। इसके बाद आपको दोनों बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए क्रॉस करना है। इस दौरान बाईं बाजू को दाईं बाजू के ऊपर रखना है। फिर आपको दोनों हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में लाने की कोशिश करनी है। जब तक संभव हो इस मुद्रा में रहें और धीरे-धीरे अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं। इस तरह गरुड़ासन के तीन से पांच चक्र किए जा सकते हैं। यह आसन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है लेकिन इसके नियमित अभ्यास से कई तरह के लाभ मिलते हैं। घुटने, टखने या कंधे में हाल ही में कोई चोट लगी हो तो यह आसन न करें।

पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने पुडुचेरी के सीएम एन. रंगासामी को जन्मदिन की दी बधाई

नई दिल्ली। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी का मंगलवार को जन्मदिन है। उनका जन्म 4 अगस्त, 1950 को हुआ था। उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर रंगासामी को बधाई देते हुए लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। उनके अनुभवी और विकास पर ध्यान देने वाले नेतृत्व से पुडुचेरी के लोगों को फायदा हुआ है। उनकी लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए प्रार्थना करता हूं।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई देते हुए लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी को उनके जन्मदिन पर बधाई और शुभकामनाएं। वे पुडुचेरी के विकास को और मजबूत करने और लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं। उनकी अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करता हूं।” लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामीजी को जन्मदिन की बधाई। आपके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और लंबी व संतुष्ट जिंदगी की कामना करता हूं।” केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “पुडुचेरी के सीएम एन. रंगासामी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। आपके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और लोगों की समर्पित सेवा के लिए कई और सालों की कामना करता हूं।” मणिपुर के मुख्यमंत्री ⁠युमनाम खेमचंद सिंह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। उनके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और लंबी उम्र की कामना करता हूं। उनकी अनुभवी लीडरशिप पुडुचेरी को तरक्की और खुशहाली के रास्ते पर ले जाती रहे।” हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा, “पुडुचेरी के माननीय मुख्यमंत्री एन. रंगासामी जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर ऊर्जा प्रदान करे तथा आपके नेतृत्व में पुडुचेरी विकास, समृद्धि और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित करता रहे।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उनको बधाई देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। एनडीए के एक अहम सदस्य के तौर पर, वे पुडुचेरी के विकास को तेज करने के लिए बिना थके काम कर रहे हैं। मां कामाख्या और श्रीमंत शंकरदेव से उनकी लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए प्रार्थना।

ग्रेटर नोएडा: इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाने वाली कंपनी में भीषण आग, दीवार गिरने से दो फायर कर्मियों की दर्दनाक मौत

ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के थाना ईकोटेक-3 क्षेत्र स्थित इलेक्ट्रॉनिक चिप निर्माण करने वाली आईएलजीआईएम कंपनी में मंगलवार तड़के भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। आग बुझाने के दौरान कंपनी की एक साइड की दीवार और लोहे का भारी बीम अचानक भरभराकर गिर गया, जिसकी चपेट में आए फायर विभाग के पांच जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान फायरमैन रोहित यादव और मुख्य आरक्षी चालक तीरथपाल सिंह को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, 3 और 4 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि करीब तीन बजे थाना ईकोटेक-3 क्षेत्र में स्थित आईएलजीआईएम कंपनी में आग लगने की सूचना पुलिस और फायर विभाग को मिली। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गया। काफी मशक्कत के बाद फायर कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया, लेकिन इसी दौरान कंपनी की एक दीवार और लोहे का बीम अचानक गिर गया, जिससे राहत कार्य में जुटे पांच फायर कर्मी मलबे की चपेट में आ गए। घायलों में मुख्य आरक्षी चालक राजपाल सिंह, फायरमैन मनीष कुमार, मुख्य आरक्षी चालक तीरथपाल सिंह, फायरमैन अमित कुमार और फायरमैन रोहित यादव शामिल थे। सभी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रोहित यादव और तीरथपाल सिंह की मौत हो गई। वहीं अन्य तीन घायल कर्मियों की हालत चिकित्सकों के अनुसार खतरे से बाहर बताई जा रही है और उनका उपचार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी में कंपनी में इलेक्ट्रॉनिक पीसीबी चिप के निर्माण का कार्य होने की बात सामने आई है। घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, फायर विभाग के अधिकारी तथा एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) की टीम मौके पर पहुंचकर राहत एवं जांच कार्य में जुट गई। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल का निरीक्षण किया जा रहा है और हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। कंपनी में सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। हादसे में जान गंवाने वाले दोनों फायर कर्मियों के प्रति प्रशासन ने गहरा शोक व्यक्त किया है। वहीं, घटना के संबंध में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

ट्रंप ने कहा ईरान से होर्मुज खोलने पर हो रही बात, तेहरान ने बातचीत से किया इनकार

न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही ईरान को “सिर कुचलने से पहले आखिरी मौका” देने की चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर बातचीत चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये भी दावा किया कि ये अगले एक दिन में संभव है। ओवल ऑफिस में सोमवार को उन्होंने कहा, “वे डील जल्दी करेंगे, चाहे जैसे भी। यह बहुत जटिल नहीं है। हम स्ट्रेट को लेकर बात कर रहे हैं, इसे खोलने की बात, इसे शाब्दिक रूप से कल तक खुला रखने की बात।” हालांकि, ईरान ने कहा है कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं हो रही है। अमेरिका और ईरान के इन दावों के बीच जहाजों के लिए होर्मुज से खुले और स्वतंत्र ट्रांजिट की स्थिति अनिश्चितता में है। तेहरान में एक प्रेस ब्रीफिंग में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा, “इस समय हम संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कोई वार्ता नहीं कर रहे हैं।” बाघेई ने कहा कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची को छोड़कर सभी बातचीत करने वाले ईरान में थे। हालांकि, ट्रंप ने ईरानी मंत्री के इस दावे को खारिज करते हुए ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरानी नेतृत्व अविश्वसनीय रूप से दोहरे चरित्र वाली है। मीटिंग के लिए भीख मांगने के बाद वे खुलेआम और गर्व से कहते हैं कि वे कोई बातचीत नहीं कर रहे हैं।” बाघेई ने कहा कि ईरान ओमान के साथ परामर्श कर रहा है। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार इसका मकसद इस स्ट्रेट में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था करना है। उन्होंने कहा कि मस्कट-तेहरान वार्ता में कोई अन्य देश शामिल नहीं है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने रविवार को जिस बड़े बमबारी अभियान की योजना बनाई थी, उसे रोक दिया क्योंकि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर समेत कई देशों ने उनसे पहले से नियोजित हमले रोकने का अनुरोध किया था। रविवार को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से बात की। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार उन्होंने तनाव कम करने के लिए बातचीत को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया और संघर्ष विराम के लिए हर संभव प्रयास करने के महत्व को रेखांकित किया ताकि राजनयिक समाधान का रास्ता साफ हो सके। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि नियोजित हमले की खबरें लीक होने से ईरान घबरा गया था। उन्होंने कहा कि यह हमला द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा होता और ईरान ने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि हम बात करना चाहते हैं। हम स्ट्रेट को लेकर बात करना चाहते हैं। स्ट्रेट को खोलने के लिए एक ज्ञापन समझौते पर ट्रंप और ईरानी प्रेसिडेंट मसूद पेजेश्कियन ने 17 जून को हस्ताक्षर किया था। लेकिन ईरान के स्ट्रेट में जहाजों पर हमला करने और अमेरिका के ईरानी पोर्ट्स को ब्लॉक करने के कुछ ही हफ्तों बाद यह समझौता टूट गया।

महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार पुस्तक का लोकार्पण

नई दिल्ली ।अधिवक्ता, शोधकर्ता एवं लेखक डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना द्वारा रचित ” महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार ” पुस्तक का भव्य लोकार्पण नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन स्वर संसार वेलफेयर एंड कल्चर सोसायटी, नई दिल्ली द्वारा सोशल ट्रांसफॉर्मेशन फाउंडेशन, लखनऊ के सहयोग से किया गया।पुस्तक का लॉन्च मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त)-सैयद अता हसनैन- बिहार के माननीय राज्यपाल, द्वारा किया जाएगा तथा इसका अनावरण भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं नई दिल्ली स्थित NCLAT के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण, जो वैश्विक पुस्तक विमोचन एवं महाकुंभ अमृत सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि हैं, द्वारा किया जाएगा। इस गरिमामय अवसर पर पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह, जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) के प्रोफेसर डॉ. शुभ्रांशु सिंह, प्रख्यात इतिहासकार डॉ. राजीव श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल, जिन्होंने इस पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद किया है, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त आध्यात्मिक गुरु अशोक महाराज (जम्मू महाराज) तथा बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएँगे।इस अवसर पर बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा: “मुझे ‘महाकुंभ-2025’ पर आधारित इस शुभ पुस्तक का लोकार्पण करके अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह पुस्तक उत्सव के दौरान प्राप्त सफलताओं और अनुभवों का सजीव वर्णन करती है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक आयोजन था, जहाँ 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त किया। सरकार द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और सुदृढ़ सुरक्षा प्रबंधन ने इस आयोजन को अभूतपूर्व सफलता दिलाई। मैं डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना जी को इस पुस्तक के लेखन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। उन्होंने महाकुंभ-2025 की कहानी को अत्यंत रोचक एवं प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे लोग इस महान आयोजन को और गहराई से समझ सकेंगे। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक भविष्य में महाकुंभ के प्रबंधन और आयोजन से जुड़े संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।इस भव्य लोकार्पण समारोह में विधि, शिक्षा, पत्रकारिता, अध्यात्म, साहित्य तथा सार्वजनिक जीवन से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की और उन्होंने ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 का दस्तावेजीकरण करने वाली इस महत्वपूर्ण कृति के प्रकाशन का उत्सवपूर्वक स्वागत किया।पुस्तक के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना ने कहा, “‘ महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार’ ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 का एक वस्तुनिष्ठ, संतुलित तथा व्यापक शोध पर आधारित प्रामाणिक वृत्तांत प्रस्तुत करती है।” यह पुस्तक आठ खंडों और अठारह अध्यायों में विभाजित है। इसमें महाकुंभ के प्रत्येक प्रमुख पक्ष का विस्तृत एवं प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया गया है—सूक्ष्म योजना एवं सफल आयोजन से लेकर संतों, अखाड़ों और कल्पवासियों की परंपराओं तक। साथ ही, यह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागम के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को भी प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है।कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘महाकुंभ अमृत सम्मान–2025’ का अलंकरण होगा, जिसके अंतर्गत समाज के प्रति अपने उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।यह पुस्तक वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ का मात्र एक विवरण नहीं है, बल्कि मानव इतिहास के सबसे विशाल समागमों में से एक का संतुलित, तथ्यपरक एवं गहन शोध पर आधारित प्रामाणिक वृत्तांत प्रस्तुत करती है। इतिहास, पौराणिक परंपराओं, अध्यात्म, संस्कृति और समकालीन यथार्थ का समन्वय करते हुए डॉ. सक्सेना ने इस पुस्तक में महाकुंभ के शाश्वत महत्व का गहन विवेचन किया है, साथ ही इसके अभूतपूर्व विराट स्वरूप और उत्कृष्ट आयोजन का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण भी प्रस्तुत किया है।आठ खंडों और अठारह अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक प्रयागराज के धार्मिक महत्व, कुंभ परंपरा के विकास, संतों, अखाड़ों एवं कल्पवासियों की भूमिका तथा महाकुंभ-2025 के आयोजन हेतु की गई व्यापक तैयारियों का विस्तृत एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक भीड़ प्रबंधन, परिवहन व्यवस्था, डिजिटल प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय संरक्षण, सुरक्षा प्रबंध, महिला सशक्तिकरण, क्षेत्रीय विकास तथा इस आयोजन के व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष प्रकाश डालती है। यह कृति अनुभवजन्य आँकड़ों, प्रत्यक्ष अवलोकनों तथा प्रामाणिक संदर्भों से समृद्ध है, जो पाठकों को तथ्यपरक गहराई के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और अनुभवों की भी सशक्त एवं सार्थक समझ प्रदान करती है।इस पुस्तक की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि इसमें आध्यात्मिक परंपराओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ संतुलित रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि यह कृति श्रद्धालुओं, विद्वानों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं तथा सामान्य पाठकों—सभी के लिए समान रूप से उपयोगी और महत्त्वपूर्ण सिद्ध होती है। महत्वपूर्ण सरकारी अधिसूचनाओं, विधिक संदर्भों तथा महाकुंभ से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों को समाहित करने वाले एक विशेष परिशिष्ट का समावेश इस पुस्तक के प्रलेखीय एवं संदर्भात्मक महत्व को और अधिक समृद्ध एवं मूल्यवान बनाता है।अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति शैली, वस्तुनिष्ठ विश्लेषण और गहन शोध के आधार पर ” महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार” भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत पर उपलब्ध साहित्य में एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान योगदान के रूप में उभरकर सामने आती है। यह पुस्तक न केवल ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 की अमूल्य स्मृतियों को संरक्षित करती है, बल्कि इस अद्वितीय आयोजन के महत्व को समझने की इच्छा रखने वाली भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थायी, प्रामाणिक और महत्वपूर्ण संदर्भ-ग्रंथ के रूप में भी स्थापित होती है।

दिल्ली: जीटीबी एन्क्लेव पुलिस ने सुलझाया चोरी का मामला, तीन शातिर बदमाश गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की शाहदरा जिला पुलिस ने एक घर में हुई चोरी के मामले का खुलासा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। जीटीबी एन्क्लेव थाना पुलिस ने महज कुछ ही दिनों में इस वारदात का पर्दाफाश कर तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए सोने की दो अंगूठियां, एक सोने का मंगलसूत्र और एक सोने का लॉकेट भी बरामद किया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर अन्य मामलों में उनकी संलिप्तता की भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, यह मामला 19 जुलाई 2026 का है। अमित कुमार नामक व्यक्ति ने ई-एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि रात के समय उनकी मां घर की दूसरी मंजिल पर सो रही थीं। इसी दौरान अज्ञात चोर घर में घुस आए और ग्राउंड फ्लोर पर रखे सोने के आभूषणों समेत अन्य कीमती सामान चोरी कर फरार हो गए। चोरी की जानकारी मिलने के बाद थाना जीटीबी एन्क्लेव में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए शाहदरा के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के निर्देशन तथा एसीपी और थाना प्रभारी जीटीबी एन्क्लेव की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम में हेड कांस्टेबल सचिन और कांस्टेबल अभिषेक को शामिल किया गया। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके अलावा, संभावित भागने के रास्तों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग भी जांची गई। सीसीटीवी फुटेज से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और तकनीकी साक्ष्यों को जुटाया। जांच के दौरान संदिग्धों की पहचान की गई। पुलिस ने अपने रिकॉर्ड से उनके पुराने आपराधिक विवरण और तस्वीरें निकालीं, जिनका मिलान सीसीटीवी फुटेज से किया गया। इससे यह पुष्टि हो गई कि वारदात को अंजाम देने वाले यही आरोपी थे। लगातार निगरानी और पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 35 वर्षीय मनोज उर्फ जीतू उर्फ दांतला निवासी नंद नगरी, 25 वर्षीय आकिब उर्फ लाले निवासी राहुल गार्डन, लोनी (उत्तर प्रदेश) और 35 वर्षीय महेंद्र मिश्रा उर्फ बिहारी निवासी भलस्वा डेयरी, दिल्ली के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए दो सोने की अंगूठियां, एक सोने का मंगलसूत्र और एक सोने का लॉकेट बरामद किया, जिन्हें शिकायतकर्ता ने अपने चोरी हुए सामान के रूप में पहचान लिया। बरामद जेवरों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया है। पूछताछ के दौरान तीनों आरोपियों ने इस चोरी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने जीटीबी एन्क्लेव थाना क्षेत्र में चोरी और सेंधमारी की दो अन्य घटनाओं को भी अंजाम दिया था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि तीनों आरोपी आदतन अपराधी हैं और पहले भी कई आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हो चुके हैं। फिलहाल वे जमानत पर बाहर थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार, मामले की आगे जांच जारी है। शेष चोरी हुए सामान की बरामदगी, वारदात की पूरी कड़ी जोड़ने और आरोपियों की अन्य चोरी व सेंधमारी के मामलों में भूमिका की भी जांच की जा रही है।

लेक्सिस नेक्सिस ने मनाई मद्रास लॉ जर्नल के 135 वर्ष पूरे होने की ऐतिहासिक उपलब्धि, भारत की न्यायिक विरासत को किया सम्मानित

चेन्नई। लेक्सिसनेक्सिस ने आज मद्रास लॉ जर्नल (एमएलजे) की स्थापना के 135 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मद्रास उच्च न्यायालय, चेन्नई के मिनी ऑडिटोरियम में एक भव्य समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर भारत की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक विधिक पत्रिकाओं में से एक मद्रास लॉ जर्नल की समृद्ध विरासत, न्यायिक उत्कृष्टता तथा भारतीय विधि व्यवस्था के विकास में उसके अतुलनीय योगदान को सम्मानित किया गया।इस समारोह में भारत के सर्वोच्च न्यायालय एवं मद्रास उच्च न्यायालय के वर्तमान एवं पूर्व न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, विधि शिक्षाविदों तथा देशभर से आए विधि समुदाय के प्रतिष्ठित सदस्यों ने भाग लेकर मद्रास लॉ जर्नल की गौरवशाली यात्रा को स्मरण किया।वर्ष 1891 में स्थापित मद्रास लॉ जर्नल पिछले 135 वर्षों से न्यायपालिका, अधिवक्ताओं, विधि शिक्षण संस्थानों और संपूर्ण विधिक समुदाय के लिए एक विश्वसनीय संदर्भ स्रोत रहा है। ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों के प्रमाणिक प्रकाशन तथा गहन विधिक विश्लेषण के माध्यम से इस पत्रिका ने भारतीय न्यायशास्त्र के विकास, न्यायिक सोच को समृद्ध करने तथा विधिक अनुसंधान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।मद्रास उच्च न्यायालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आयोजित इस समारोह की थीम न्याय के तराजू, लेखनी (क्विल) और मद्रास लॉ जर्नल के प्रथम प्रकाशित संस्करण से प्रेरित थी। यह आयोजन केवल पत्रिका की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय विधिक चिंतन को दिशा देने की उसकी सतत भूमिका का भी प्रतीक बना।इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति एम.एम. सुन्दरेश, सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति आर. महादेवन, मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति एम. सुंदर, मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति पी.एन. प्रकाश सहित अनेक वर्तमान एवं पूर्व न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।यद्यपि मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति एस.ए. धर्माधिकारी व्यक्तिगत रूप से समारोह में उपस्थित नहीं हो सके, किंतु उनका विशेष संदेश कार्यक्रम के दौरान पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने मद्रास लॉ जर्नल की 135 वर्षों की गौरवशाली विरासत तथा न्याय व्यवस्था और विधिक पेशे में उसके अमूल्य योगदान की सराहना की।कार्यक्रम के दौरान मद्रास लॉ जर्नल के इतिहास और उसके सतत महत्व पर विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। साथ ही, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दौर में विधिक रिपोर्टिंग की बदलती भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई। समारोह में 135वीं वर्षगांठ स्मारक संस्करण का लोकार्पण किया गया तथा मद्रास लॉ जर्नल की ऐतिहासिक यात्रा को समर्पित एक विशेष स्मृति वीडियो का भी प्रथम प्रदर्शन किया गया।इस अवसर पर लेक्सिसनेक्सिस की दक्षिण-पूर्व एशिया एवं भारत की प्रबंध निदेशक गायत्री रमन ने कहा,“मद्रास लॉ जर्नल पिछले 135 वर्षों से न्यायपालिका और अधिवक्ताओं का विश्वसनीय साथी रहा है। इसने केवल भारतीय न्यायशास्त्र के विकास का दस्तावेजीकरण ही नहीं किया, बल्कि हमारे न्याय तंत्र की मूल भावना को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया है। लेक्सिसनेक्सिस के लिए इस गौरवशाली विरासत का संरक्षक होना सम्मान की बात है। इस ऐतिहासिक अवसर पर हम भरोसे, प्रमाणिकता और उत्कृष्टता की इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आधुनिक एआई एवं प्रौद्योगिकी की शक्ति को हमारी विधिक विशेषज्ञता के साथ जोड़ते हुए हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आज और आने वाली पीढ़ियों के विधिक पेशेवरों को विश्वसनीय एवं प्रमाणिक कानूनी जानकारी निरंतर उपलब्ध होती रहे।इस समारोह के दौरान लेक्सिसनेक्सिस ने “एम्पावर (Empower)” नामक एक नई विधिक साक्षरता श्रृंखला का भी शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों के बीच उनके कानूनी अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूकता बढ़ाकर कानून के शासन (Rule of Law) को और अधिक सशक्त बनाना है।आज जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता विधिक क्षेत्र को नई दिशा दे रही है, तब इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि जिम्मेदार नवाचार की मजबूत नींव हमेशा प्रमाणिक और विश्वसनीय विधिक सामग्री ही होती है। लेक्सिसनेक्सिस उन्नत एआई तकनीकों को विश्वसनीय कानूनी जानकारी के साथ जोड़ते हुए विधिक पेशेवरों को अधिक प्रभावी शोध, बेहतर निर्णय लेने और अपने ग्राहकों के लिए उत्कृष्ट परिणाम सुनिश्चित करने में निरंतर सहयोग प्रदान कर रहा है।एक सदी से भी अधिक समय से मद्रास लॉ जर्नल भारत के ऐतिहासिक न्यायिक निर्णयों का दस्तावेजीकरण करता रहा है और भारतीय विधिक व्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। आज लेक्सिसनेक्सिस के संरक्षण में यह प्रतिष्ठित पत्रिका अपनी समृद्ध विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक विधिक पेशेवरों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित हो रही है।  

नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति ने दिल्ली के सहकारी क्षेत्र के पुनरोद्धार हेतु सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत की

नई दिल्ली।नाबार्ड के नेतृत्व में गठित दिल्ली की अल्पकालिक सहकारी ऋण संस्थाओं (Short Term Cooperative Credit Institutions) पर उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की बैठक 31 जुलाई 2026 को आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता श्री पांडुरंग के. पोले, आईएएस, सचिव (सहकारिता), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) ने की। बैठक में सहकारी संस्थाओं के प्रदर्शन की समीक्षा की गई तथा दिल्ली के सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़, प्रतिस्पर्धी और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।बैठक में नवीन कुमार राय, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय, कृष्ण कुमार सिंह, रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (आरसीएस), जीएनसीटीडी, अशोक कुमार, महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) तथा राजीव कुमार कादयान, कार्यवाहक प्रबंध निदेशक, दिल्ली राज्य सहकारी बैंक (दिल्ली एसटीसीबी) सहित कांगड़ा कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, दिल्ली नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड एवं जैन कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रतिनिधियों तथा आरबीआई, आरसीएस, दिल्ली एसटीसीबी, नैबकॉन्स, नाबार्ड एवं अन्य हितधारक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।समिति ने दिल्ली राज्य सहकारी बैंक के प्रदर्शन, नियामकीय अनुपालन, प्रौद्योगिकी पहलों तथा सुशासन संबंधी पहलुओं की समीक्षा की। चर्चा के दौरान अध्यक्ष ने बैंक के प्रमुख वित्तीय एवं व्यावसायिक मानकों में लंबे समय से बने हुए ठहराव पर गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि वर्तमान प्रवृत्तियों के बने रहने से संस्था की दीर्घकालिक प्रासंगिकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “यथास्थिति का दृष्टिकोण” अब व्यवहार्य नहीं है तथा व्यवसाय विस्तार, ग्राहक आधार वृद्धि, नवाचार, डिजिटल रूपांतरण और बेहतर ग्राहक सेवा पर केंद्रित परिवर्तनकारी कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।बैठक का एक प्रमुख निर्णय दिल्ली के सहकारी क्षेत्र का व्यापक निदानात्मक अध्ययन (डायग्नोस्टिक स्टडी) कराने की स्वीकृति रहा, जिसे नाबार्ड की ओर से नैबकॉन्स द्वारा संचालित किया जाएगा। यह अध्ययन दिल्ली के सहकारी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल होगी, क्योंकि अब तक राज्य में सहकारी संस्थाओं की संस्थागत, प्रशासनिक, परिचालन एवं व्यावसायिक स्थिति का इस स्तर पर कोई समग्र निदानात्मक अध्ययन नहीं किया गया है। अध्ययन के आधार पर सहकारी क्षेत्र के पुनरोद्धार, प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि तथा दीर्घकालिक स्थिरता के लिए साक्ष्य-आधारित रोडमैप तैयार किया जाएगा।समिति ने दिल्ली में सहकारी विकास के लिए समग्र एवं समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। अध्यक्ष महोदय ने उल्लेख किया कि शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) आरबीआई के नेतृत्व वाले टीएएफसीयूबी (TAFCUB) तंत्र के अंतर्गत पृथक रूप से विनियमित होते हैं। उन्होंने कहा कि एचएलसी में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में उनकी भागीदारी से दिल्ली के सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र का अधिक व्यापक मूल्यांकन संभव होगा तथा क्षेत्र के विकास हेतु समन्वित नीतिगत प्रयासों को बल मिलेगा।बैठक के समापन पर नियामकीय अनुपालन को सुदृढ़ बनाने, संस्थागत सुशासन को मजबूत करने, डिजिटल रूपांतरण को गति देने, क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने तथा निदानात्मक अध्ययन को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।

चंपावत में बसा भोलेनाथ का एक ऐसा मंदिर, जहां पत्थरों पर की गई नक्काशी बताती है सदियों पुरानी गाथा

उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में बसा चंपावत इतिहास और आस्था का संगम हैं। इसी धरा में पुराना बालेश्वर मंदिर, अपनी समृद्ध इतिहास और शानदार आर्किटेक्चरल कला के लिए प्रसिद्ध है। सावन के पहले सोमवार में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंदिर की भव्यता के बारे में बताया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मंदिर का खास वीडियो शेयर किया, जिसके साथ उन्होंने लिखा, “देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जिले में मौजूद पुराना बालेश्वर मंदिर, भगवान शिव में पवित्र आस्था, एक समृद्ध इतिहास और शानदार आर्किटेक्चरल कला का एक शानदार संगम है। पत्थरों पर की गई इसकी बेमिसाल नक्काशी और पुरानी कारीगरी सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की शानदार गाथा बताती है। चंपावत आने पर शिव के इस पवित्र धाम पर जरूर जाएं ताकि आपको गहरी आध्यात्मिक शांति का अनुभव हो और हमारी समृद्ध विरासत से कभी न भूलने वाला मिलन हो।” बालेश्वर मंदिर पिथोरागढ़ से 76 किलोमीटर की दूरी पर चंपावत में स्थित जिले का सबसे कलात्मक मंदिर है। यह मंदिर बालेश्वर, रत्नेश्वर और चंपावती दुर्गा को समर्पित मंदिरों का समूह है और चन्द वंश के शुरुआती राजाओं द्वारा बनाया गया था। पहले मंदिर में जटिल संरचनात्मक विशेषताएं थीं और एक मंडप के साथ एक अभयारण्य था। इन मंदिरों की छत पर अभी भी जटिल नक्काशी दिखाई देती है जो कि उनकी प्राचीन महिमा और कलात्मक उत्कृष्टता का सबूत है। एक कहानी के मुताबिक, भगवान शिव को समर्पित मंदिर एक समय में नागों की राजधानी हुआ करती थी। हालांकि, ऐसा लगता है कि शहर का नाम उनकी बहन चंपावती के नाम पर रखा गया था, जिन्होंने शिव को समर्पित बालेश्वर मंदिर में ध्यान किया था। आज भी, यहां की देवी को चंपावती कहा जाता है और यहां पुराने मंदिर परिसर में एक मंदिर है। इसलिए चंद वंश ने बालेश्वर मंदिल कॉम्प्लेक्स बनाया था और 10वीं-12वीं सदी के बीच इसे अपनी राजधानी बनाया। देवी उनकी संरक्षक और रक्षक देवी भी बन गईं। चंपावत में बालेश्वर के अलावा भगवान शिव को समर्पित कई और मंदिर हैं जैसे क्रांतेश्वर, मानेश्वर, ताड़केश्वर, ऋषनेश्वर, दिक्तेश्वर, मल्लारेश्वर। पाताल रुद्रेश्वर नाम की एक और गुफा है।