विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित

नई दिल्ली। विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण संसद का मानसून सत्र लगातार बाधित हो रहा है। सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष के सदस्यों ने फिर से नारेबाजी और हंगामा किया। इसके कारण लोकसभा को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। सुबह 11 बजे सत्र की शुरुआत ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदक विजेताओं के सम्मान के साथ हुई। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारत के पदक विजेताओं को बधाई दी है। उन्होंने खिलाड़ियों के समर्पण, कड़ी मेहनत और बेहतरीन उपलब्धियों के लिए उनकी सराहना की। इसके बाद जैसे ही सदन में प्रश्नकाल शुरू हुआ, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नाराजगी जाहिर की। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के सांसदों से कहा, “क्या आप सभी संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का पहले से ही मन बनाकर आते हैं? प्रश्नकाल बहुत महत्वपूर्ण है। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने दें। इस तरह सदन में बाधा डालना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।” स्पीकर ओम बिरला की बार-बार की अपील के बावजूद विपक्ष ने प्रश्नकाल में बाधा डाली। जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद, विपक्ष के सदस्यों ने राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान, विपक्षी सांसदों ने ‘चंदा चोरों – गद्दी छोड़ो’ के नारे लगाए। उधर, केंद्र सरकार संसद में कई लंबित विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। मानसून सत्र के दौरान पिछले कुछ दिनों में बार-बार विरोध और व्यवधान देखने को मिले हैं, क्योंकि विपक्षी दल परीक्षा के पेपर लीक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर दान चोरी के मामले जैसे मुद्दे उठा रहे हैं। संभावित व्यवधानों के बावजूद सरकार ने संसद के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधायी कामकाज की योजना बनाई है। लोकसभा की कार्य-सूची के अनुसार, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ‘द इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026’ पेश करेंगे, जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सदन में विचार के लिए ‘द बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026’ लेकर आएंगी।
शारदाकेयर हेल्थसिटी और लक्ष्मी तरु फ़ाउंडेशन ने चलाया बड़ा रक्तदान अभियान, 3,100 से ज्यादा लोगों ने किया स्वैच्छिक रक्तदान

नई दिल्लीi कम्युनिटी हेल्थकेयर और स्वेच्छा से रक्तदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मज़बूत करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी ने लक्ष्मी तरू फ़ाउंडेशन के साथ मिलकर हेल्थकेयर पार्टनर के तौर पर भारत के सबसे बड़े स्वैच्छिक रक्तदान अभियानों में से एक में हिस्सा लिया। यह अभियान आज नई दिल्ली के रोहिणी में आयोजित किया गया था। इस बड़े अभियान में लगभग 10,000 लोगों ने हिस्सा लिया और 3,000 से ज़्यादा रक्तदान किए गए। इससे यह देश की सबसे बड़ी कम्युनिटी-आधारित स्वैच्छिक रक्तदान पहलों में से एक बन गया।खून दान करना जान बचाने के सबसे महत्वपूर्ण तरीकों में से एक है। दान किए गए खून की एक यूनिट कई मरीज़ों की मदद कर सकती है। यह इमरजेंसी और दुर्घटना के मामलों, बड़ी सर्जरी, बच्चे के जन्म, अंग प्रत्यारोपण और कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण और ज़रूरी प्रक्रिया है।स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व पर बात करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और ब्लड बैंक के प्रमुख डॉ. हरप्रीत सिंह ने कहा, “दान किए गए खून की हर यूनिट कई जानें बचाने की क्षमता रखती है। खून को बनाया नहीं जा सकता, इसलिए स्वेच्छा से खून देने वाले लोग ही हर हेल्थकेयर सिस्टम की रीढ़ होते हैं। इस तरह की बड़े पैमाने पर खून दान करने की पहल से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि हॉस्पिटल इमरजेंसी से निपटने और जान बचाने वाले ट्रांसफ्यूजन की ज़रूरत वाले मरीज़ों को समय पर इलाज देने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।योग्य लोगों द्वारा नियमित रूप से स्वेच्छा से रक्तदान करने से स्वास्थ्य को भी लाभ हो सकते हैं। इससे शरीर में आयरन का स्तर सही बना रहता है, नई रक्त कोशिकाओं के बनने में मदद मिलती है और पूरा स्वास्थ्य बेहतर होता है। साथ ही इससे उन कई मरीज़ों की जान बचाने में भी मदद मिलती है जिन्हें खून की जरुरत होती है।शारदाकेयर हेल्थसिटी में हीमैटो-ऑन्कोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के वाइस चेयरमैन डॉ. पवन कुमार सिंह ने रक्तदान के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) करवाने वाले मरीज़ों और खून से जुड़ी बीमारियों वाले मरीज़ों को अक्सर इलाज के दौरान बार-बार खून और प्लेटलेट चढ़ाने की ज़रूरत पड़ती है। नियमित रूप से स्वेच्छा से रक्तदान करने से खून की लगातार सप्लाई बनी रहती है, जिससे इलाज के बेहतर नतीजे मिलते हैं और मरीज़ों व उनके परिवारों को उम्मीद मिलती है।ब्लड कैंसर और खून से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों वाले लोग अक्सर अपने इलाज के लिए समय पर खून और खून के घटकों (ब्लड कम्पोनेंट्स) की उपलब्धता पर निर्भर रहते हैं। रक्त दान अभियान को मिली ज़बरदस्त प्रक्रिया सामाजिक ज़िम्मेदारी की बढ़ती भावना और लोगों की जान बचाने में समुदाय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।इस पहल का समर्थन करते हुए शारदाकेयर हेल्थसिटी और शारदा हॉस्पिटल के ग्रुप CEO डॉ. कौसर शाह ने कहा, “हेल्थकेयर सिर्फ़ हॉस्पिटल की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं है। हेल्थकेयर प्रोवाइडर के तौर पर हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम ज़्यादा स्वस्थ और संवेदनशील समाज का निर्माण करें। यह पहल दान की सामूहिक भावना और जान बचाने के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है। हम इस शानदार पहल की रूपरेखा तैयार करने और इसका नेतृत्व करने के लिए लक्ष्मी तरु फ़ाउंडेशन का दिल से धन्यवाद करते हैं। रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण काम के लिए समुदायों को एकजुट करने की उनकी कोशिशें बहुत तारीफ़ और समर्थन की हकदार हैं।इस कैंपेन के तहत शारदाकेयर हेल्थसिटी ने हर स्वैच्छिक रक्तदाता (वॉलंटरी ब्लड डोनर) को ISI-मार्क वाला हेलमेट मुफ़्त में दिया। इस पहल से यह बात सामने आई कि जहाँ रक्तदान से जान बचती है, वहीं हेलमेट पहनने से सुरक्षा भी मिलती है। इससे हॉस्पिटल की मेडिकल ट्रीटमेंट के अलावा प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, कम्युनिटी की भलाई और पब्लिक हेल्थ के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखी। Thalassemics India, Rotary Club, Lions Club और DATRI Foundation समेत लगभग 250 NGO और अन्य संगठनों ने इस रक्तदान अभियान का समर्थन किया।
प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता, जनता को न हो परेशानी: केशव प्रसाद मौर्य

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मानसून सत्र-2026 से पहले राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और चेतावनी दी कि नागरिकों के प्रति लापरवाही या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लखनऊ के विधान भवन में आयोजित बैठक के दौरान केशव मौर्य ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है और उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छात्र प्रदर्शनकारियों को अनावश्यक रूप से परेशान न करें। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग छात्र आंदोलनों का दुरुपयोग आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की और संबंधित विभागों को श्रद्धालुओं के लिए सुचारू, सुरक्षित और सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी निगरानी रखने का आह्वान किया और चेतावनी दी कि तीर्थयात्रा व्यवस्था के प्रबंधन में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा, अतिरिक्त महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अमिताभ यश, एडीजी लॉजिस्टिक्स संजीव गुप्ता, एडीजी मानवाधिकार राज कुमार और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उपमुख्यमंत्री ने साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आह्वान करते हुए साइबर पुलिस इकाइयों और तकनीकी टीमों को मजबूत करने का निर्देश दिया ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी के पीड़ितों को समय पर सहायता मिल सके। उन्होंने अफवाहों, गलत सूचनाओं और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की निगरानी बढ़ाने का भी आदेश दिया। बैठक में जन शिकायतों, ऑनलाइन ट्रैफिक चालानों और अयोध्या मामले से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मौर्य ने इस बात पर जोर दिया कि प्रवर्तन कार्रवाई पारदर्शी, निष्पक्ष और जनहित पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि उत्तर प्रदेश सरकार अपराध और अराजकता के खिलाफ शून्य-सहिष्णुता नीति के प्रति प्रतिबद्ध है, साथ ही शासन में जवाबदेही, संवेदनशीलता और पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है।
यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू, सपा का प्रदर्शन, सीएम योगी ने जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की अपील

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का चार दिवसीय मानसून सत्र सोमवार को शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत से पहले समाजवादी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा परिसर में राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितता, नीट पेपर लीक और शिक्षक भर्ती जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी दलों से लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप स्वस्थ और सकारात्मक चर्चा करने की अपील करते हुए कहा कि विधायिका जनहित से जुड़े मुद्दों पर विमर्श और समाधान का सबसे प्रभावी मंच है। सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा पहुंचने पर सभी सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सत्र गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा और समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में 6 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालकर मध्यम वर्ग की श्रेणी में लाया गया है। उत्तर प्रदेश का किसान अपनी मेहनत से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है और किसानों की आय में पहले की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल का निर्माण करा रही है, ताकि उन्हें रोजगार के दौरान सुविधा मिल सके। साथ ही बेहतर औद्योगिक माहौल के कारण बड़ी संख्या में युवाओं को अपने जिलों में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। कांवड़ यात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में शिवभक्त आस्था के साथ यात्रा निकाल रहे हैं और उनकी सुरक्षा तथा स्वागत के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त से विधायक भी कांवड़ियों के स्वागत कार्यक्रमों में भाग लेंगे। आउटसोर्स कर्मियों के कल्याण के लिए भी सरकार लगातार काम कर रही है। उधर, सत्र शुरू होने से पहले समाजवादी पार्टी के विधायक चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के निकट प्रदर्शन पर बैठे। विधायक अपने हाथों में पोस्टर और दानपेटी लेकर पहुंचे तथा राम मंदिर चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, नीट पेपर लीक और शिक्षक भर्ती के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष के प्रदर्शन पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह केवल राजनीतिक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने भी कहा कि राज्य सरकार विकास और जनहित से जुड़े हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। चार कार्य दिवस तक चलने वाले इस मानसून सत्र के दूसरे दिन वित्त मंत्री सुरेश खन्ना वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश करेंगे। इसके अलावा सरकार नौ अध्यादेशों को सदन से पारित कराने के साथ संभल हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रख सकती है।
वर्ल्ड चैंपियन जॉर्जीव के खिलाफ ओवैस याकूब की ऐतिहासिक जीत पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने दी बधाई, बोले- देश के लिए गर्व का क्षण

नई दिल्ली। भारत के मिक्सड मार्शल आर्ट्स खिलाड़ी ओवैस याकूब ने शनिवार को बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दो बार के वर्ल्ड चैंपियन और अजेय फाइटर डेलियन जॉर्जीव को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ओवैस याकूब को इस खास जीत के लिए बधाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री के आधिकारिक पेज पर बताया गया, “मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के प्रतिभाशाली एमएमए फाइटर ओवैस याकूब को बुल्गारिया में ब्रेव कॉम्बैट फेडरेशन 107 में मिली शानदार जीत पर बधाई दी, जहां उन्होंने दो बार के आईएमएमएएफ वर्ल्ड चैंपियन को हराया, जो अब तक अजेय थे। इस उपलब्धि को जम्मू-कश्मीर और देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए मुख्यमंत्री ने उनके निरंतर सफल होने और वैश्विक मंच पर और भी कई उपलब्धियां हासिल करने की कामना की।” ओवैस याकूब ने 68 किलोग्राम के कैचवेट मुकाबले में बुल्गारिया के जॉर्जीव को तकनीकी नॉकआउट के जरिए शिकस्त दी। याकूब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले हैं और उन्होंने जॉर्जीव को हराने के लिए सिर्फ 4 मिनट का समय लिया। यह जॉर्जीव के करियर की पहली हार रही। वहीं, याकूब ने अपने लगातार छह मैच जीतने के रिकॉर्ड को और आगे बढ़ाया है। याकूब ने शुरुआत से ही बुल्गारिया के फाइटर के खिलाफ अपना दबदबा बनाए रखा और उन्हें वापसी करने का कोई मौका नहीं दिया। ओवैस याकूब के प्रहारों का जॉर्जीव के पास कोई जवाब नहीं था और वह पूरे मुकाबले में बैकफुट पर ही दिखाई दिए। याकूब ने रिंक में उतरने के साथ ही भविष्यवाणी की थी कि वह इस मैच का अंत पहले राउंड में ही कर देंगे। भारतीय एमएमए फाइटर अपनी भविष्यवाणी को दमदार प्रदर्शन के बूते सही साबित करने में भी सफल रहा। मैच खत्म होने के तुरंत बाद याकूब रिंग की जाली के ऊपर जाकर जीत का जश्न मनाते हुए नजर आए। इस जीत को भारतीय एमएमए के इतिहास में सबसे बड़ी जीत माना जा रहा है।
ईरान के साथ शांति समझौता बरकरार रखने के लिए अमेरिका पर दबाव बनाना जरूरी है: राष्ट्रपति पेजेश्कियन

तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका को दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर किए गए शांति समझौते (एमओयू) पर कायम रहने के लिए मजबूर करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि एमओयू पर ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों के बीच एक राय है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेश्कियन ने कहा कि उनका मानना है कि यह एमओयू भविष्य में ईरान के विदेशी संबंधों का केंद्र बिंदु होगा। उन्होंने कहा, “हमें दुश्मन को उस बात पर मजबूर करने की कोशिश करनी चाहिए जिस पर उसने हस्ताक्षर किया है। इस एमओयू से देश, इलाके और हमारे साथियों की सुरक्षा बेहतर होगी।” इस बीच, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद इब्न अल-रजा ने रविवार को कहा कि तेहरान हर दुश्मन की धमकी को वास्तविक और गंभीर मानता है। उन्होंने इसे महज मनोवैज्ञानिक युद्ध करार दिए जाने को खारिज कर दिया। अल-रजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हम न तो आश्चर्यचकित होंगे और न ही निष्क्रिय रहेंगे। हम धमकियों को अपनी तैयारी बढ़ाने, अपनी रोकथाम क्षमता मजबूत करने और अपनी ताकत विकसित करने के आधार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।” यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ नए हमले टालने की बात कहने के बाद आया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका पूरी तरह तैयार है और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के खिलाफ सैन्य आतंक, ताकत और शक्ति के उस स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखा गया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और अन्य मध्य पूर्वी देशों के अनुरोध पर उन्होंने हमला टाल दिया है। उन्होंने एक आगामी समझौते का हवाला दिया जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत और पूरी तरह से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल होगा। इससे पहले अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिका और इजरायल ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हफ्ते के अंत में हमले शुरू कर सकते हैं। 18 जून को, ईरान और अमेरिका ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देशों को आखिरी समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के अंदर बातचीत करनी थी। हालांकि, उनके बीच हाल ही में हुए तनाव के कारण बातचीत का नतीजा अधर में लटका हुआ है। अमेरिकी सेना ने पिछले महीने ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए। उनका कहना था कि ये हमले होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में किए गए थे और इनका मकसद कमर्शियल शिपिंग को धमकाने की ईरान की क्षमता को कम करना था। ईरान ने इस इलाके में अमेरिकी सैन्य बेस और जगहों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
इजरायल में अब से तंबाकू उत्पादों के 75 प्रतिशत हिस्से पर ग्राफिक चेतावनी तस्वीरें अनिवार्य, कैंसर संस्थान ने बताई वजह

यरुशलम। इजरायल में हर महीने करीब एक हजार लोगों की मौत की वजह तंबाकू होता है। स्वास्थ्य मंत्री ने इसकी जानकारी दी। बहुत सोच विचार के बाद आखिरकार इजरायल में रविवार से नए तंबाकू नियंत्रण नियम लागू हो गए हैं, जिनके तहत सभी तंबाकू और निकोटीन उत्पादों की पैकेजिंग पर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर दुष्प्रभाव दिखाने वाली ग्राफिक चेतावनी तस्वीरें लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम पारंपरिक सिगरेट, ई-सिगरेट, रोलिंग तंबाकू, हुक्का उत्पादों और निकोटीन पाउच सहित सभी धूम्रपान उत्पादों पर लागू होगा। नए नियमों के अनुसार, तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा ऐसी तस्वीरों से ढका होगा, जिनमें धूम्रपान और निकोटीन के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को स्पष्ट रूप से दिखाया जाएगा। पैकेजिंग का शेष 25 प्रतिशत हिस्सा उसी सादे रंग में रहेगा, जिसे इजरायल ने वर्ष 2020 में ब्रांड के लोगो और आकर्षक डिजाइन को समाप्त करने के लिए अनिवार्य किया था। इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि चेतावनी तस्वीरों को तैयार करते समय स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा गया है, जबकि उनका प्रभाव सभी आयु और सामाजिक वर्गों के लोगों पर समान रूप से पड़े, यह भी सुनिश्चित किया गया है। सरकार ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया है। जो कंपनियां या आयातक निर्धारित मानकों के अनुरूप पैकेजिंग के बिना तंबाकू उत्पादों का वितरण करेंगे, उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। इसके अलावा, कॉरपोरेट संस्थाओं पर 4,52,000 इजरायली शेकेल (लगभग 1.23 लाख अमेरिकी डॉलर) और निजी कारोबारियों पर 2,26,000 शेकेल (करीब 61,400 अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इजरायल ने वर्ष 2003 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के तंबाकू नियंत्रण रूपरेखा सम्मेलन (एफसीटीसी) पर हस्ताक्षर किए थे और 2005 में इसकी पुष्टि (रैटिफिकेशन) की थी। इन नए नियमों के लागू होने के साथ इजराइल उन लगभग 140 देशों में शामिल हो गया है, जहां तंबाकू उत्पादों की पैकेजिंग पर पूर्ण ग्राफिक चेतावनी तस्वीरें अनिवार्य हैं। ट टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, इजरायल कैंसर एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोशे बार-हैम ने कहा कि ऐसी तस्वीरें लोगों को तंबाकू सेवन और उससे होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के बीच तत्काल संबंध स्थापित करने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल में तंबाकू के कारण हर महीने 1,000 से अधिक लोगों की जान जाती है, ऐसे में यह कदम धूम्रपान की आदत को हतोत्साहित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव पहुंचे नई दिल्ली, दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने पर फोकस

नई दिल्ली। उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव, भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए सोमवार को आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनके आने का स्वागत करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव का नई दिल्ली में आधिकारिक दौरे पर आने पर बहुत गर्मजोशी से स्वागत है।” सैदोव भारत सरकार के निमंत्रण पर तीन से पांच अगस्त तक भारत में रहेंगे। अपने दौरे के दौरान, उज्बेक के विदेश मंत्री राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलेंगे और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ भी बातचीत करेंगे। वह नई दिल्ली में एक बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक और कमर्शियल सहयोग बढ़ाने के मौकों पर बात करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और उज्बेकिस्तान व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और कनेक्टिविटी जैसे कई क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना चाहते हैं। दौरे से पहले, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 20 जुलाई को सैदोव के साथ टेलीफोन पर बात की, जिसमें दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। बातचीत के बाद, विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने कहा कि बातचीत व्यापार, निवेश और दूसरे क्षेत्र में हमारे द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित थी। सैदोव ने भी बातचीत को अहम बताया और कहा कि दोनों पक्ष अपने विदेश मंत्रालयों के बीच नियमित और भरोसे पर आधारित बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए। भारत और उज्बेकिस्तान ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के तहत करीबी डिप्लोमैटिक एंगेजमेंट बनाए रखा है। दोनों देशों ने मई में नई दिल्ली में फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन का 17वां राउंड आयोजित किया, जहां अधिकारियों ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रोग्रेस की समीक्षा की और आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। सैदोव के दौरे से भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है, खासकर आर्थिक साझेदारी बढ़ाने और मध्य एशिया में दोनों रणनीतिक साझेदारों के बीच सहयोग के नए क्षेत्र तलाशने में।
पूर्व ‘आप’ विधायक नरेश बाल्यान को मकोका मामले में बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस मनोज जैन ने यह आदेश पारित किया। यह मामला कथित गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू के संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ा है। नरेश बाल्यान पर फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू की ओर से कथित तौर पर चलाए जा रहे एक संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप है। यह आरोप मुख्य रूप से बाल्यान और सांगवान के बीच कथित मोबाइल बातचीत की एक ऑडियो क्लिप पर आधारित है। नरेश बाल्यान को इस मामले में दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया। बाद में दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने नरेश बाल्यान और कई अन्य लोगों के खिलाफ मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। इससे पहले, 31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने 13 जुलाई को इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या और अन्य गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया था। सजा पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने सभी दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला फरवरी 2020 का है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान आईबी के सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उनका शव चांदबाग इलाके में एक नाले से बरामद किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि अंकित के शरीर पर 40 से ज्यादा घाव थे। इस मामले में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे। कोर्ट ने इनमें से छह आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। दोषी करार दिए गए पांच लोगों में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन का नाम भी शामिल है। उनके अलावा नाजिम, जावेद, कासिम और अनस को भी दोषी माना गया।
बिना भोजन नली के पैदा हुए बच्चे की सफल सर्जरी, अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों को मिली सफलता

अहमदाबाद। अहमदाबाद सिविल अस्पताल में एक ढाई साल के बच्चे की सफल सर्जरी हुई है, जिसका जन्म एक दुर्लभ बीमारी के साथ हुआ था। बच्चे की भोजन नली ठीक से बनी ही नहीं थी। अहमदाबाद सिविल अस्पताल में जटिल सर्जरी के बाद अब वह बच्चा मुंह से खाना खाने लगा है। अस्पताल के अधिकारियों ने रविवार को बताया कि यह बाल रोग सर्जरी विभाग की एक और सफल उपलब्धि है। बच्चे का नाम मंतव्य है। वह अहमदाबाद जिले के सानंद निवासी शैलेश पटेल का बेटा है। उसका जन्म 7 नवंबर 2023 को हुआ था। उसे ‘प्योर ओसोफेगल एट्रेसिया’ नाम की दुर्लभ जन्मजात बीमारी थी। इसमें भोजन नली के दोनों सिरे इतने दूर होते हैं कि एक पूरी नली नहीं बन पाती। इस वजह से जन्म से ही वह मुंह से दूध या खाना नहीं पी/खा पा रहा था। उसकी जान बचाने के लिए जन्म के दूसरे दिन ही सर्जनों ने गले में एक छेद कर ‘ओसोफेगोस्टोमी’ और पेट में सीधे नली डालकर ‘गैस्ट्रोस्टोमी’ की थी। इसके बाद उसे नली के जरिए तरल आहार दिया जा रहा था और नियमित जांच भी होती थी। जब उसकी पोषण स्थिति, वजन और शारीरिक विकास ठीक हो गया तो डॉक्टरों ने भोजन नली की पक्की सर्जरी करने का फैसला किया। यह ऑपरेशन 3 जुलाई को ‘एडवांस्ड गैस्ट्रिक पुल-अप’ तकनीक से किया गया। इसमें पेट के हिस्से का इस्तेमाल करके नई भोजन नली बनाई जाती है। सर्जरी अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और बाल रोग सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश जोशी के नेतृत्व वाली टीम ने की। टीम में डॉ. जयश्री रामजी और एनेस्थीसिया डॉक्टर अदिति और सोनल भलावत भी शामिल थे। ऑपरेशन के 23 दिन बाद मंतव्य ने पहली बार मुंह से खाना खाया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चा बिना किसी परेशानी के ठीक हो गया है और अब उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। मेडिकल आंकड़ों के अनुसार, ‘ट्रेको-ओसोफेगल फिस्टुला’, यानी टीओएफ, हर 2500 से 4000 में से 1 बच्चे में होता है, लेकिन ‘प्योर ओसोफेगल एट्रेसिया’ के मामलों में, जहां भोजन नली के सिरे बहुत दूर होते हैं, वहां ‘गैस्ट्रिक पुल-अप’ सर्जरी ही सबसे कारगर इलाज मानी जाती है। इसकी सफलता दर 85 से 90 प्रतिशत बताई जाती है। डॉ. राकेश जोशी ने कहा, “इस तरह की सर्जरी के लिए बहुत विशेष तकनीकी दक्षता और अनुभवी टीम चाहिए। बच्चे का पोषण बनाए रखना और सही समय पर ऑपरेशन करना ही सफलता की कुंजी है। यह एडवांस सर्जरी जो निजी अस्पतालों में बहुत महंगी मानी जाती है, वह अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध है। पिछले एक साल में हमारी टीम ने ऐसे 7 जटिल केस सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।” बच्चे के माता-पिता ने कहा कि वे अपने बेटे को पहली बार मुंह से खाते देखकर बहुत भावुक हो गए। उन्होंने इलाज में शामिल सभी डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ का आभार जताया।