भारत और कजाकिस्तान ने साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया

अस्ताना। भारत और कजाकिस्तान ने बुधवार को अपने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और इस साझेदारी को ठोस नतीजों में बदलने के लिए और भी मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बुधवार को कजाकिस्तान में भारत के राजदूत वाई.के. सैलास थंगल और कजाकिस्तान के उप विदेश मंत्री अरमान इस्सागालिव के बीच हुई बैठक में ये चर्चाएं हुईं। कजाकिस्तान में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “राजदूत वाई.के. सैलास थंगल की कजाकिस्तान के नवनियुक्त उप विदेश मंत्री के साथ एक सौहार्दपूर्ण और सार्थक बैठक हुई। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और भारत-कजाकिस्तान की मजबूत साझेदारी को ठोस नतीजों में बदलने के लिए और भी मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।” इसमें आगे कहा गया, “उन्होंने उभरते अवसरों का लाभ उठाने, आपसी समझ को गहरा करने और भारत और कजाकिस्तान के बीच भविष्योन्मुखी साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।” पिछले महीने, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात की थी और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी। विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कजाकिस्तान के साथ भारत के प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को याद किया और हाल के वर्षों में भारत-कजाकिस्तान संबंधों के निरंतर विकास पर संतोष व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, “दोनों नेताओं ने राजनीति, व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, उभरती प्रौद्योगिकियों, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच संबंधों सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए।” इसमें आगे कहा गया, “नेताओं ने अपने लोगों के आपसी लाभ के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि के लिए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।” अपनी यात्रा के दौरान, टोकायेव ने 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने 12 सितंबर को भारत मंडपम में आए नेताओं के लिए पीएम मोदी द्वारा आयोजित रात्रिभोज में भी भाग लिया।

सीआरपीएफ के डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने 99 ट्रेनी अधिकारियों से कहा- अच्छे इंसान और संवेदनशील लीडर बनें

गुरुग्राम। सीआरपीएफ अकादमी, कादरपुर, गुरुग्राम में सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारियों (डीएजीओ) के 57वें बैच की बेसिक ट्रेनिंग का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। सीआरपीएफ अकादमी के एडीजी/निदेशक सुनील जून, अकादमी के वरिष्ठ अधिकारियों और फैकल्टी सदस्यों की मौजूदगी में सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह (आईपीएस) ने मुख्य अतिथि के तौर पर इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। 57वें बैच में देश भर से चुने गए 99 ट्रेनी अधिकारी शामिल हैं, जिनमें तीन महिला अधिकारी भी हैं। इस बैच की शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि विविध है; इसमें 22 पोस्ट-ग्रेजुएट और 77 ग्रेजुएट शामिल हैं और इनकी औसत आयु 26.8 वर्ष है। 28 अधिकारियों को सशस्त्र बलों, सीएपीएफ, पुलिस और अन्य सरकारी संगठनों में काम करने का पहले से अनुभव है, जबकि कई ट्रेनी अधिकारियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। ट्रेनी अधिकारियों को संबोधित करते हुए सीआरपीएफ के डीजी ने उनसे अकादमी में मिलने वाली कड़ी ट्रेनिंग का पूरा लाभ उठाने और खुद को सक्षम, अनुशासित और संवेदनशील लीडर के रूप में विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सबसे बढ़कर, उन्हें अच्छे इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए, अपने कर्मियों के साथ सम्मान, गरिमा और देखभाल के साथ पेश आना चाहिए और खुद मिसाल बनकर उनका नेतृत्व करना चाहिए। डीजी ने शारीरिक फिटनेस के उच्च स्तर को हासिल करने और बनाए रखने, ट्रेनिंग के दौरान गंभीर और प्रतिबद्ध रहने, लगातार पेशेवर ज्ञान बढ़ाने और फोर्स के अधिकारी के लिए जरूरी चरित्र, ईमानदारी और नेतृत्व के गुण विकसित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने उनके पेशेवर विकास और तरक्की के एक जरूरी हिस्से के तौर पर ‘पुरानी बातें भूलने, नई बातें सीखने और फिर से सीखने’ के अहम सिद्धांत पर जोर दिया। यह समारोह एक गहन ट्रेनिंग यात्रा की शुरुआत का प्रतीक था, जिसका मकसद युवा अधिकारियों को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में नेतृत्व की विविध और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों को संभालने के लिए तैयार करना है। डीजी सीआरपीएफ ने ट्रेनी अधिकारियों को आगे की परिवर्तनकारी ट्रेनिंग यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

2014 में पहली बार देश ने राजनीतिक विरासत नहीं, बल्कि जनादेश से पीएम मोदी को चुना: नितिन नवीन

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर उनका अभिनंदन किया। नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संघर्ष, संकल्प और सेवा की यात्रा ने जनसेवा को राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि 2014 के बाद गरीब, युवा, किसान और नारी शक्ति के लिए चलाई गई योजनाओं से बदलाव आया तथा कोरोना संकट के दौरान टीकाकरण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास, विरासत, सुरक्षा और भारत के सम्मान को नई दिशा मिली, ताकि विकसित भारत का संकल्प साकार हो। नितिन नवीन ने कहा कि आज का दिन हम सभी भारतवासियों और भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए अविस्मरणीय है। यह दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की उस यात्रा का साक्षी बनने का अवसर है, जो संघर्षों के बीच शुरू हुई और जिसने हर चुनौती का सामना करते हुए निरंतर आगे बढ़ने का काम किया। उनकी तप, साधना और संकल्प ने जनसेवा को ही उनके जीवन का ध्येय बनाया। उनके लिए जनसेवा ही राष्ट्रसेवा का मार्ग बनी और इसी संकल्प के साथ वे राजनीति में सत्ता को सेवा का माध्यम बनाते हुए राष्ट्रसेवा के पथ पर निरंतर अग्रसर रहे। ऐसे हम सबके प्रधानमंत्री और इस देश के प्रधान सेवक का मैं बहुत-बहुत अभिनंदन और बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि मैं सर्वप्रथम प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन की 25 वर्षों की अनवरत, अविचल और अथक सेवा एवं समर्पण की यात्रा के लिए 140 करोड़ देशवासियों और भारतीय जनता पार्टी के लाखों-लाख कार्यकर्ताओं की ओर से हार्दिक बधाई, अभिनंदन और शुभकामनाएं देता हूं। देश के सभी जिलों से लोग आज प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की इस यात्रा के साक्षी बन रहे हैं। भारत की 140 करोड़ जनता आज अपने प्रिय नेता को आशीर्वाद दे रही है और उनके यशस्वी जीवन के लिए शुभकामनाएं दे रही है, ताकि वे विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन 25 वर्षों में दीपक की तरह स्वयं को जलाकर, अपने परिश्रम और समर्पण से 140 करोड़ देशवासियों के जीवन में विकास, आत्मविश्वास और स्वाभिमान का उजाला फैलाने का निरंतर प्रयास किया है। आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं और उनके दीर्घ एवं यशस्वी सार्वजनिक जीवन के लिए शुभकामनाएं देता हूं। देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में 2014 के चुनाव को ‘टेक्टॉनिक शिफ्ट’ के रूप में कहा था। उन्होंने इसे भारतीय राजनीति का एक बड़ा बदलाव बताया था। उनके अनुसार, पीएम मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें जनता के सामने एक घोषित उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया और बाद में उन्हें जनता का अपार जनसमर्थन मिला तथा वे देश के पहले चुने हुए घोषित प्रधानमंत्री के रूप में आए। उससे पहले कई चुनाव हुए। चाहे जनता ने किसी पार्टी को समर्थन दिया हो या गठबंधन को वोट दिया हो, चुनाव के बाद प्रधानमंत्री का नाम तय होता था। 2014 में पहली बार ऐसा हुआ कि राष्ट्रीय चुनाव में प्रधानमंत्री का चेहरा केवल पार्टी का चेहरा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को सीधे जनता के सामने चुनाव के प्रमुख चेहरे के रूप में पेश किया गया और देश की जनता ने उन्हें जनादेश देकर प्रधानमंत्री बनाया। अगर हम इतिहास के पन्नों को देखें तो जवाहरलाल नेहरू को आजादी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री बनने से पहले कांग्रेस के नेताओं ने चुना। इंदिरा गांधी को भी कांग्रेस के नेताओं ने पहली बार चुनकर प्रधानमंत्री बनाया। वहीं, राजीव गांधी अपनी माता के दिवंगत होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री बने और बाद में जनादेश लेकर आए, लेकिन पीएम मोदी किसी राजनीतिक परिवार या विरासत के साथ नहीं आए। उन्होंने केवल अपने सार्वजनिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और जनता के जनादेश के आधार पर देश का प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त किया। नितिन नवीन ने कहा कि आज के इस अवसर पर हम उन माताओं-बहनों, लखपति दीदियों, किसान भाइयों, खिलाड़ियों, गरीब परिवारों और देश के युवाओं की ओर से प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन और आभार व्यक्त करते हैं, जिनके जीवन में प्रधानमंत्री मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतियों ने सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने माताओं-बहनों के लिए शौचालय निर्माण से लेकर उज्ज्वला योजना तक की व्यवस्था की और उनकी सुरक्षा एवं स्वाभिमान सुनिश्चित करने का काम किया। 3 करोड़ लखपति दीदियों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्होंने महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल वूमेन डेवलपमेंट की बात नहीं की, बल्कि वूमेन-लेड डेवलपमेंट की बात की है और अब 33 प्रतिशत महिलाओं को मिलने वाले आरक्षण से उनकी राजनीतिक भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। 11 करोड़ से अधिक किसान भाइयों के लिए किसान सम्मान योजना के माध्यम से उनका सम्मान और कल्याण सुनिश्चित किया गया। कृषि को केवल एक विभाग तक सीमित न रखते हुए किसान कल्याण को भी प्राथमिकता दी गई और किसानों के प्रति देश के नेतृत्व की सोच को प्रदर्शित किया गया। ‘खेलो इंडिया’ के माध्यम से खिलाड़ियों को नए अवसर दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप आज हमारे खिलाड़ी भारत का नाम रोशन कर रहे हैं और नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से 4 करोड़ गरीब परिवारों को उनके सपनों का घर और सिर पर छत देने का काम किया गया। नितिन नवीन ने कहा कि कोरोना जैसी आपदा के समय, जब पूरी दुनिया ठहर-सी गई थी, तब प्रधानमंत्री मोदी ने करोड़ों भारतवासियों के बेटे और भाई की तरह उनकी चिंता की। निःशुल्क वैक्सीन से लेकर 80 करोड़ लोगों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की गई, जिससे देश इस अस्थिरता और आपदा की घड़ी से बाहर निकल पाया। प्रधानमंत्री मोदी ने 2013-14 में निराशा और नाउम्मीदी के माहौल से गुजर रहे देश के युवाओं में आशा और उम्मीद की नई किरण जगाई। उन्होंने कहा कि आज देश में ढाई लाख से अधिक स्टार्टअप और 125 से अधिक यूनिकॉर्न इस बदलाव के

भ्रष्टाचार जांच मामले में पंजाब सरकार की याचिका पर 8 अक्टूबर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

चंडीगढ़। पंजाब सरकार और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के बीच भ्रष्टाचार जांच मामले को लेकर कानूनी लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई करेगा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ करेगी। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को राज्य सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ लोगों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने तथा दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया था। यह आदेश पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अधिवक्ता निखिल सराफ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने सीबीआई को मामले में एफआईआर दर्ज कर तत्काल जांच शुरू करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने जांच एजेंसी से कहा था कि वह पूरे मामले की जांच कर दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों के तबादले और तैनाती से लेकर टेंडर, लाइसेंस, मंजूरियां तथा विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्तियों में कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध लेनदेन का नेटवर्क सक्रिय था। याचिका में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई जांच का आदेश दिया था। वहीं, पंजाब सरकार ने इस आदेश का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार का कहना है कि नवंबर 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पंजाब में सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट) वापस ले ली थी। इसी आधार पर सरकार हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दे रही है। इससे पहले पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी कहा था कि राज्य सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील करेगी। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे यह तय होगा कि हाई कोर्ट द्वारा निर्देशित सीबीआई जांच आगे बढ़ेगी या नहीं। मामले का राजनीतिक और कानूनी महत्व देखते हुए इस सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है।

एसआईआर को तुरंत रद्द किया जाए’, प्रकाश राज ने लगाया लोकतंत्र खत्म करने की साजिश का आरोप

तिरुवनंतपुरम। एक्टर और एक्टिविस्ट प्रकाश राज ने बुधवार को वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) को तुरंत रद्द करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से नागरिकों के वोटिंग अधिकारों को गंभीर खतरा है और यह लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश के बराबर है। तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बात करते हुए राज ने भारत के चुनाव आयोग पर तीखा हमला किया और मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया को लागू करने में शामिल सभी लोगों की कानूनी जवाबदेही तय करने की भी मांग की। राज ने आरोप लगाया कि इस बदलाव से देश भर में 13 करोड़ से ज्यादा लोग वोट देने के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे नागरिकों के दो वर्ग बन सकते हैं, एक वे जिनके पास वोट देने का अधिकार है और दूसरे वे जिनके पास यह अधिकार नहीं है। एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद पर एक्टर प्रकाश राज ने कहा कि अब हमें एसआईआर के पीछे की साजिश और एजेंडा समझ आ रहा है। इसके लिए हमें भारत के चुनाव आयोग और देश की चुनावी प्रक्रिया के इतिहास के बारे में थोड़ा जानना होगा। जब भारत आजाद हुआ, तो यह एक नया देश था और संविधान बनाया गया था। अगर आपको याद हो, तो अंग्रेजों ने सुझाव दिया था कि यह एक नया देश है जहां बहुत से लोग गरीब और अशिक्षित हैं और उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या सभी को सरकार चुनने का अधिकार दिया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया था कि यह अधिकार कुछ उच्च-वर्ग या अच्छी तरह से पढ़े-लिखे लोगों को दिया जाना चाहिए। लेकिन उस समय के नेताओं ने, चाहे वे अंबेडकर हों, नेहरू हों या कोई और, इससे इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह देश हर किसी को अपने प्रतिनिधि चुनने की शक्ति देगा, जो उनके मुद्दों को उठाएंगे, चाहे वे किसान हों, आदिवासी हों, दलित हों या अल्पसंख्यक। राज ने कहा कि वोट देने का अधिकार उन बुनियादी सिद्धांतों में से एक है जिन पर लोकतांत्रिक भारत की नींव रखी गई थी और आरोप लगाया कि मौजूदा प्रक्रिया उस सिद्धांत को कमजोर कर रही है। उन्होंने लोगों से अपने वोटिंग अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने की अपील की और कहा कि स्थानीय स्तर पर विरोध के और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन लोगों के साथ जन-अदालतें (पब्लिक ट्रिब्यूनल) आयोजित की जाएंगी जो कथित तौर पर इस संशोधन प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बढ़ते विवाद के बीच राज ने दखल दिया है। राजनीतिक पार्टियां और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स वोटर लिस्ट से असली वोटरों के नाम कटने की आशंका को लेकर चिंता जता रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से सतर्क रहने और उन कोशिशों का विरोध करने को कहा, जिन्हें उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने की कोशिश बताया।

गुजरात बोर्ड ने कक्षा 10 और 12 की मार्कशीट के लिए ‘पारख सेल’ और डिजीलॉकर सुविधा शुरू की

गांधीनगर। गुजरात माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बुधवार को राज्य स्तरीय ‘पारख सेल’ का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य स्कूली मूल्यांकन को योग्यता-आधारित शिक्षा की ओर ले जाना है और परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कक्षा 10 और 12 की मार्कशीट को सीधे डिजीलॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू की गई है। शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने गांधीनगर स्थित गुजरात बोर्ड मुख्यालय में पारख सेल का उद्घाटन किया और राज्य द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के कार्यान्वयन के तहत डिजिटल मार्कशीट सेवा शुरू की। वाजा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश की शिक्षा प्रणाली में बदलाव ला रही है और गुजरात एक पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। वाजा ने कहा कि पारख सेल के शुभारंभ से छात्र रटने की पद्धति से मुक्त होकर योग्यता-आधारित शिक्षा की ओर बढ़ेंगे। पारख सेल के शुभारंभ से छात्र रटने की पद्धति से मुक्त होकर योग्यता-आधारित शिक्षा की ओर अग्रसर होंगे। नई डिजीलॉकर सुविधा के तहत, कक्षा 10 और कक्षा 12 की परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों की डिजिटल मार्कशीट परिणाम घोषित होने के बाद उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य ने 2021 से 2026 के बीच परीक्षा देने वाले लगभग एक करोड़ छात्रों की मार्कशीट पहले ही डिजीलॉकर पर अपलोड कर दी है। छात्र डिजीलॉकर ऐप के माध्यम से अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे। इस सुविधा से भारत और विदेश में उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन में सरलता और तेजी आने की भी उम्मीद है। वाजा ने कहा कि शिक्षा में प्रौद्योगिकी का एकीकरण राज्य की शिक्षा प्रणाली को और मजबूत करेगा। उन्होंने समन्वित प्रयासों के माध्यम से इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग और गुजरात बोर्ड की टीम को बधाई भी दी। राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र के रूप में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा स्थापित पारख (परफॉर्मेंस असेसमेंट, रिव्यू, एंड एनालिसिस ऑफ नॉलेज फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट) के ढांचे के तहत राज्य स्तर पर पारख प्रकोष्ठ कार्य करेगा। इसके मार्गदर्शन में, राज्य स्तरीय प्रकोष्ठ योग्यता-आधारित प्रश्न बैंक और मूल्यांकन उपकरण तैयार करेगा। यह गुजरात की भाषा और पाठ्यक्रम आवश्यकताओं के अनुरूप समग्र प्रगति कार्ड (एचपीसी) के कार्यान्वयन को भी सुगम बनाएगा।

दिल्ली में अंतिम हिंदू सम्राट हेमू का विजयोत्सव सम्पन्न, प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ में उल्लेख पर जताया आभार

नई दिल्ली। रौनियार वैश्य सभा, दिल्ली (पंजी.) के तत्वावधान में अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) को समर्पित ‘विजयोत्सव’ का आयोजन बुधवार को हिमाचल भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज के बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों, इतिहास प्रेमियों और युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में असम और नागालैंड के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि प्रख्यात लेखक और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अतुल सिंघल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विजयोत्सव का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करना था। सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि 30 अगस्त को प्रसारित ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के इतिहास के उपेक्षित नायक और अंतिम हिंदू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) का उल्लेख किया था, जिससे रौनियार वैश्य समाज खुद को सम्मानित और गौरवान्वित महसूस कर रहा है। सभा ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रहने वाले हजारों रौनियार वैश्य परिवारों और देशभर में फैले लगभग एक करोड़ रौनियार समाज की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया गया है। सभा के अनुसार, ‘मन की बात’ कार्यक्रम के बाद आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि समाज की प्रमुख मांगों को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। इसी क्रम में प्रधानमंत्री कार्यालय को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि सम्राट हेमू की एक भव्य आदमकद प्रतिमा उनकी कर्मभूमि सासाराम (बिहार) में स्थापित की जाए और उसका अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जाए। साथ ही, सम्राट हेमू के जीवन और योगदान को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में शामिल करने की भी मांग की गई है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सम्राट हेमू भारतीय इतिहास के उन महान योद्धाओं और कुशल प्रशासकों में शामिल थे, जिन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से उठकर अपने पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और संगठन कौशल के बल पर इतिहास में विशेष स्थान बनाया। उन्होंने विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय स्वाभिमान की रक्षा की और राष्ट्रभक्ति तथा साहस का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर समाज के पूर्व अध्यक्ष और शोधकर्ता सुबोध कुमार गुप्ता द्वारा लगभग 15 वर्षों के शोध के बाद लिखी गई पुस्तक ‘आखिर कौन था – हेमू अंतिम हिन्दू सम्राट अंतिम विक्रमादित्य’ का भी विशेष उल्लेख किया गया। सभा के अनुसार, इस शोध में ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर हेमू को रौनियार वैश्य समाज से संबंधित बताया गया है। इस शोध कार्य को विभिन्न विश्वविद्यालयों और इतिहासकारों द्वारा सराहना भी मिल चुकी है। मुख्य अतिथि प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि इतिहास के ऐसे विस्मृत नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाना समय की आवश्यकता है। वहीं सभा के अध्यक्ष सुबोध प्रसाद पंकज और राष्ट्रीय संयोजक एवं मीडिया प्रभारी पंकज कुमार ने कहा कि रौनियार वैश्य समाज इस दिशा में हर संभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और उसे उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेगी। कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, इतिहास संरक्षण और सम्राट हेमू के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर ने लोक भवन में 77वें टीबी सील बिक्री अभियान की शुरुआत की

विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और आंध्र प्रदेश टीबी एसोसिएशन के अध्यक्ष एस. अब्दुल नजीर ने बुधवार को लोक भवन के दरबार हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में 77वें टीबी सील बिक्री अभियान की शुरुआत की। इस मौके पर बोलते हुए, राज्यपाल अब्दुल नजीर ने कहा कि 144 साल पहले सर रॉबर्ट कोच ने टीबी (तपेदिक) फैलाने वाले बैक्टीरिया की खोज की थी और इसे नियंत्रित करने में काफी प्रगति के बावजूद, यह अब भी एक जानलेवा बीमारी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि टीबी केवल एक मेडिकल चुनौती नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है जो व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों को प्रभावित करती है। टीबी के खिलाफ हमारी प्रतिक्रिया में केवल इलाज ही नहीं, बल्कि जागरूकता पैदा करना, जल्द पहचान, रोकथाम, पोषण, सामाजिक सहयोग और सामुदायिक भागीदारी भी शामिल होनी चाहिए। राज्यपाल ने आगे कहा कि केंद्र सरकार की पहल ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ का मकसद संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए 2030 के ग्लोबल एसडीजी लक्ष्य से पहले भारत से टीबी को खत्म करना है। इसके लिए सरकार और समाज, दोनों के मिलकर काम करने वाले नजरिए पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि टीबी सील बिक्री अभियान का खास महत्व है क्योंकि यह जन-जागरूकता और जन-भागीदारी को एक साथ लाता है। उन्होंने नागरिकों, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों, कॉर्पोरेट घरानों, स्वयंसेवी संगठनों और दानदाताओं से अपील की कि वे टीबी सील बिक्री अभियान में दिल खोलकर योगदान दें और इस नेक काम का समर्थन करें। इस कार्यक्रम में संरक्षक डॉ. अरुण कुमार कांति मोहंती और डॉ. पी.एस. शर्मा; उपाध्यक्ष डॉ. कोडली रामकृष्ण और डॉ. बी. मसीलामणि; महासचिव डॉ. पी. जयकर बाबू; संयुक्त निदेशक और आंध्र प्रदेश टीबी एसोसिएशन के मानद सचिव डॉ. टी. रमेश; राज्यपाल के संयुक्त सचिव पी.एस. सूर्य प्रकाश और अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी सहित कई नेताओं ने रूपी सोरेन के निधन पर जताया शोक

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत सोरेन परिवार के सदस्यों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने रूपी सोरेन के निधन को परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जताई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रूपी सोरेन के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माताजी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएं हेमंत सोरेन और पूरे सोरेन परिवार के साथ हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी रूपी सोरेन के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पूज्य माताजी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति मिलने की कामना की। हेमंत सोरेन की पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन ने अपनी मां के निधन पर भावुक संदेश में कहा कि बाबा के बाद आज उनकी मां सभी को अकेला छोड़कर चली गईं। उन्होंने कहा कि यह खालीपन अब कभी नहीं भर पाएगा। कल्पना सोरेन ने अपनी मां को अंतिम जोहार देते हुए कहा कि उनका स्नेह, सीख और आशीर्वाद हमेशा परिवार के साथ रहेगा। सोरेन परिवार की बड़ी बहू सीता सोरेन ने भी रूपी सोरेन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मेरे पति दुर्गा सोरेन के असमय निधन के बाद रूपी सोरेन ने जिस पीड़ा को अपने हृदय में समेटकर उन्हें संभाला, उसे शब्दों में बयान करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज मां भी हमेशा के लिए चली गईं। सीता सोरेन ने कहा कि शिबू सोरेन के साथ जीवनभर का सफर निभाने वाली रूपी सोरेन परिवार की ममता और शक्ति का आधार थीं। उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी। उन्होंने कहा कि मां का स्नेह, आशीर्वाद और उनकी स्मृतियां हमेशा परिवार के दिलों में जीवित रहेंगी।

दिल्ली विधानसभा में युवाओं ने उठाए प्रदूषण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे

नई दिल्ली। बुधवार को दिल्ली विधानसभा में एक अनोखा लेकिन प्रेरणादायक सत्र देखने को मिला, जिसमें 7 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों ने विधायकों की सीटों पर बैठकर पर्यावरण और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस की। राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद ने विभिन्न राज्यों के युवा प्रतिभागियों को एक साथ लाया, जिन्होंने आत्मविश्वास से प्रदूषण, जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता, घटते हरित क्षेत्रों और जिम्मेदार नागरिकता जैसे मुद्दों पर चिंताएं व्यक्त कीं और अपने विचार साझा किए। इस पहल ने बच्चों को लोकतंत्र और संसदीय बहस की कार्यप्रणाली को करीब से अनुभव करने का अवसर प्रदान किया। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बच्चों की तथ्य-आधारित, अनुशासित और शांतिपूर्ण चर्चाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का मंच है, और युवा प्रतिभागियों ने प्रश्न पूछने, विभिन्न दृष्टिकोणों को सुनने और अपने तर्कों को तार्किक रूप से प्रस्तुत करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र केवल अपने विचार व्यक्त करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि असहमति को समझना और संवाद के माध्यम से समाधान की ओर बढ़ना भी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सीधे तौर पर मानव जीवन से जुड़ा है, और इस बात पर बल दिया कि स्वच्छ हवा के लिए वृक्षों का संरक्षण आवश्यक है, जबकि जल उपलब्धता और घटता हरित आवरण भावी पीढ़ियों के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। गुप्ता ने कहा कि आज लिए गए निर्णय यह निर्धारित करेंगे कि भावी पीढ़ियां किस प्रकार की दुनिया विरासत में पाएंगी, और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों पर चर्चा में बच्चों को शामिल करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा कक्ष के भीतर बाल संसद का आयोजन करने का निर्णय युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया था। उन्होंने आगे कहा कि किताबें और परीक्षाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखना भी उतना ही आवश्यक है। एक छात्रा ने अध्यक्ष के रूप में कुर्सी संभाली और सदन की कार्यवाही का संचालन किया, जबकि अन्य प्रतिभागियों ने मंत्रिमंडल मंत्रियों, सत्तारूढ़ दल के सदस्यों और विपक्ष के नेताओं की भूमिकाएं निभाईं।