सिनेमा में इतना योगदान देने के बाद भी रंगमंच में जाने से पहले की बेचैनी आज भी वैसी है : अनुपम खेर

मुंबई। अभिनेता अनुपम खेर इन दिनों अपनी नाटक ‘जाने पहचाने अंजाने’ के लिए अंतर्राष्ट्रीय टूर पर हैं। अभिनेता ने शो में जाने से पहले की बेचैनी के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि अभिनय की दुनिया में इतना योगदान देने के बाद भी रंगमंच में जाने से पहले उनके अंदर की बेकरारी आज भी वैसी की वैसी है। अभिनेता अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट की, जिसमें वे बैकस्टेज से गुजरते हुए स्टेज पर जा रहे हैं। अभिनेता ने अपनी इस पोस्ट के जरिए अपनी बेचैनी को बयां करते हुए लिखा, “स्टेज तक का वो अकेला सफर।” अभिनेता अनुपम खेर ने बताया कि एक थिएटर आर्टिस्ट के लिए सबसे अकेला सफर स्टेज तक का छोटा सा रास्ता होता है। उन्होंने बैकस्टेज के दौरान चल रहे ख्यालों को शब्दों के जरिए पिरोते हुए लिखा, “उस छोटे से सफर में आप अपने ख्यालों, अपने शक, अपनी घबराहट और अपने दिल की धड़कन की आवाज के साथ बिल्कुल अकेले होते हैं। डर लगता है कि क्या होगा अगर मैं स्टेज पर भूल गया? क्या होगा अगर मैं दर्शकों से जुड़ नहीं पाया? क्या होगा अगर आज मेरी रात नहीं है? आप फोकस करने की कोशिश करते हो, एक गहरी सांस लेते हो और खुद को याद दिलाते हो कि इस पल को जीना है।” अभिनेता ने बताया कि भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा में काम करने और इतने कैमरों का सामना करने के बाद स्टेज में जाने से पहले की घबराहट आज भी उतनी ही बरकरार है। उन्होंने लिखा, “मैं 41 सालों से फिल्मों में हूं, अपनी 555वीं फिल्म पर काम शुरू किया है, हजारों बार कैमरे का सामना कर चुका हूं और दुनियाभर के दर्शकों के सामने परफॉर्म कर चुका हूं लेकिन फिर भी, थिएटर के स्टेज पर हर एंट्री से पहले, वो घबराहट आज भी होती है। वो छोटा सा डर आज भी मेरे साथ चलता है।” अभिनेता अनुपम खेर ने शो से जाने से पहले की बेचैनी को आशीर्वाद बताया है। उनका मानना है कि कोई एक्टर जिस दिन नर्वस होना बंद कर देगा, शायद उसी दिन से वो अपने दर्शकों और अपनी कला को हल्के में लेना शुरू कर देगा। उन्होंने लिखा, “डर आपको विनम्र बनाए रखता है। यह आपको याद दिलाता है कि आपने चाहे कितने भी साल परफॉर्म किया हो, हर नया दर्शक एक नई शुरुआत है और फिर आप स्टेज पर कदम रखते हो। लाइट्स आप पर पड़ती हैं, दर्शक आपके साथ सांस लेते हैं और धीरे-धीरे डर फोकस में बदल जाता है, घबराहट एनर्जी में और अकेलापन एक साथ मिलकर खुशी मनाने में बदल जाता है। ये हमारे नाटक ‘जाने पहचान अंजाने’ के लिए डलास में बैकस्टेज से स्टेज तक का मेरा सफर था। कुछ अकेले कदम और उसके बाद थिएटर का जादुई साथ।

महिला विधायकों से दुर्व्यवहार पर तेलंगाना विधानसभा स्पीकर सख्त, रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी

हैदराबाद। तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा प्रवेश द्वार पर सोमवार को हुई उस घटना की रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी, जिसमें भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की महिला विधायकों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप है। विधानसभा स्पीकर ने कहा कि वे महिला विधायकों का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने बीआरएस को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस मामले की जानकारी मिलने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आज विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद बीआरएस नेताओं ने काला बैज पहनकर अपना रोष प्रकट करते हुए इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने पूछा, “आखिर सरकार और पुलिस इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करने जा रही है।” विधायी मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने कहा कि सीएम रेवंत रेड्डी ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं का सम्मान करती है। साथ ही, उन्होंने मुख्य विपक्षी दल को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस मामले में रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बीआरएस के उपनेता टी. हरीश राव ने विधानसभा में पुलिस की ओर से महिला विधायकों के साथ की गई बदतमीजी पर रोष जाहिर किया। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि पुलिस की ओर से महिला विधायक और पूर्व मंत्री सबिता इंदिरा रेड्डी और सुनीता लक्ष्मा रेड्डी के साथ किया गया व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। हरीश राव ने कहा कि उन्होंने पुलिस स्टेशन पहुंचकर महिला विधायकों के साथ मारपीट में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। बीआरएस नेता ने इस प्रकरण को ‘तेलंगाना की महिलाओं’ पर हमला करार दिया। हरीश राव ने कहा कि अगस्त हाउस ‘कौरव सभा’ में तब्दील हो चुका है और उनका भी वही हश्र होगा, जो कौरवों का हुआ था। विधानसभा अध्यक्ष ने हरीश राव के व्यवहार पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें (अध्यक्ष को) इसलिए गुस्सा आना चाहिए क्योंकि उनकी मां के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। प्रसाद कुमार ने कहा कि वह सबिता इंद्रा रेड्डी और सुनीता लक्ष्मा रेड्डी का बहुत सम्मान करते हैं और वे उनकी आठ बहनों की तरह ही उनकी बहनें हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि रिपोर्ट मिलने के बाद वह उचित कार्रवाई करेंगे। मंत्री श्रीधर बाबू ने आरोप लगाया कि बीआरएस विधायक विधानसभा अध्यक्ष को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियां बेहद निंदनीय हैं। वहीं, हरीश राव ने कहा कि बीआरएस एमएलसी टाटा मधु पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्होंने अध्यक्ष के खिलाफ कोई अपमानजनक या अभद्र शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था, इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

सऊदी अरब और लाल सागर में हूती हमलों की कतर ने की न‍िंदा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की सख्‍त कार्रवाई की अपील

दोहा। कतर ने लाल सागर में व्यापारिक जहाजों और सऊदी अरब के शहरों में हूती समूहों के हमलों की न‍िंदा की। कतर ने कहा हूती समूह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और आवाजाही की स्वतंत्रता को खतरे में डाल रहा है। कतर ने ऐसी गैर-जिम्मेदाराना हरकतों को तुरंत रोकने की आवश्यकता पर जोर देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की। कतर व‍िदेश मंत्रालय ने सोशल मीड‍िया ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में नागरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने वाले हूती समूहों के हमलों की न‍िंदा की। कतर व‍िदेश मंत्रालय ने पोस्‍ट में कहा, “सऊदी अरब के आभा, खमीस मुशैत, जाजान और नज्रान शहरों में हूती समूहों ने नागरिक और आर्थिक महत्व के ठिकानों को निशाना बनाया। यह बेहद न‍िंदनीय है। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई नागरिक घायल हुए हैं। इसके अलावा यह समूह लाल सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा तथा आवाजाही की स्वतंत्रता को खतरे में डाल रहा है।” कतर के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये हमले बेहद निंदनीय और आक्रामक हरकत हैं। यह आम नागरिकों की जान और क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया दिखाता है। साथ ही यह सऊदी अरब की संप्रभुता का खुला उल्लंघन, अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन और क्षेत्र की शांति व स्थिरता के लिए खतरनाक तनाव बढ़ाने वाला कदम है। मंत्रालय ने कहा कि कतर नागरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने का पूरी तरह विरोध करता है और ऐसी गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों को तुरंत रोकने की आवश्यकता पर बल देता है। कतर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपनी जिम्मेदारी निभाने और इन उल्लंघनों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील की है। साथ ही उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों को लागू करने की मांग की है, जिनमें यमन पर प्रस्ताव 2216 और लाल सागर में नौवहन की सुरक्षा और स्वतंत्रता से जुड़ा प्रस्ताव 2722 प्रमुख हैं। मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसकी गारंटी 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) की ओर से दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि कतर ने सऊदी अरब के साथ अपनी पूरी एकजुटता दोहराते हुए कहा कि वह उसकी संप्रभुता, सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उठाए जाने वाले सभी वैध कदमों में उसके साथ खड़ा है। मंत्रालय ने कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा, कतर की सुरक्षा और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा से अलग नहीं है, बल्कि उसका एक अहम हिस्सा है। कतर ने हमलों में घायल हुए लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और ईश्वर से प्रार्थना की कि सऊदी अरब और वहां की जनता को हर तरह के नुकसान और खतरे से सुरक्षित रखे।

श्रीलंका पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पारंपरिक अंदाज में हुआ गर्मजोशी से स्वागत

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह श्रीलंका पहुंच चुके हैं। श्रीलंका पहुंचने पर उनका गर्मजोशी और पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। रक्षामंत्री के आगमन व स्वागत के लिए बंडारानायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर श्रीलंका सरकार के प्रतिनिधि व भारतीय उच्चायुक्त मौजूद रहे। वह 8 से 10 सितंबर तक श्रीलंका की तीन दिवसीय आधिकारिक पर हैं। अपनी यात्रा के पहले दिन वह मंगलवार को नई दिल्ली से कोलंबो पहुंचे हैं। यहां हवाई अड्डे पर श्रीलंका के रक्षा उपमंत्री मेजर जनरल अरुण जयसेकरा (सेवानिवृत्त) और श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने रक्षा मंत्री की अगवानी की। श्रीलंकाई पक्ष की ओर से किया गया पारंपरिक स्वागत दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे घनिष्ठ, मैत्रीपूर्ण और भरोसेमंद संबंधों को दर्शाता है। राजनाथ सिंह की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच पहले से मजबूत संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात और बातचीत करेंगे। मंगलवार को ही वे यहां भारतीय उच्चायुक्त से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों से भी मुलाकात करने वाले हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और समुद्री साझेदारी इस यात्रा के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और श्रीलंका की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए समुद्री सुरक्षा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भारत का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी श्रीलंका पहुंचा है। बातचीत के दौरान आपसी हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के संबंध केवल रणनीतिक और रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्ते भी बेहद गहरे हैं। रक्षा मंत्री की यात्रा के दौरान इन संबंधों को और मजबूत करने पर भी जोर रहने की उम्मीद है। अपनी यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह कोलंबो में भारतीय प्रवासी समुदाय से मुलाकात करेंगे। वह श्रीलंका में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद भी करेंगे। रक्षा मंत्री की तीन दिवसीय यात्रा को भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत समुद्री एवं रक्षा साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति से भारतीय राजदूत ने की शिष्टाचार भेंट, बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने पर हुई बात

ढाका। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने मंगलवार को बंगभवन में बांग्लादेश के राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर से शिष्टाचार भेंट की और द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर जोर दिया। बैठक के दौरान, त्रिवेदी और आलमगीर ने दोनों देशों के लोगों के आपसी फायदे के लिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। ढाका में भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर कहा, “उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बंगभवन में बांग्लादेश के राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर से शिष्टाचार भेंट की। उच्चायुक्त ने राष्ट्रपति को हार्दिक बधाई दी और बांग्लादेश के लोगों की निरंतर सेवा के लिए उनकी सफलता की कामना की।” इसमें आगे कहा गया, “इस चर्चा में भारत और बांग्लादेश के बीच गहरे संबंधों पर जोर दिया गया, जो साझा इतिहास, करीबी सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच आपसी रिश्तों पर आधारित हैं। उन्होंने दोनों संप्रभु देशों के लोगों के आपसी फायदे के लिए द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।” पिछले महीने ही बांग्लादेश को अपना नया राष्ट्रपति मिला है। आलमगीर ने 21 अगस्त को बंगभवन में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। इस बीच, यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश (यूएनबी) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय दूत ने सोमवार को उम्मीद जताई कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान सही समय पर भारत का दौरा करेंगे। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमें पूरा भरोसा है… सही समय पर… बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के लिए हमेशा निमंत्रण खुला है, और उन्हें यह पता है।” पिछले महीने, भारत ने कहा था कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री रहमान को बिम्सटेक के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (बिम्सटेक) बंगाल की खाड़ी के तटीय और आस-पास के इलाकों में स्थित सात सदस्य देशों का एक समूह है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह दक्षिण एशिया को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाली एक अनोखी कड़ी है, जिसमें दक्षिण एशिया से पांच सदस्य (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल और श्रीलंका) और दक्षिण-पूर्व एशिया से दो सदस्य (म्यांमार और थाईलैंड) शामिल हैं।

कनाडा रणनीतिक उलझन और अमेरिकी दबाव का शिकार, हमारे खिलाफ तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा तथ्य: ईरान

तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने मंगलवार को कनाडा की व‍िश्‍वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्‍होंने कहा क‍ि कनाडा एक तरफ शांति और सुरक्षा, समुद्री मार्गों की आजादी की बात करता है और दूसरी तरफ दबाव में आकर अमेर‍िका की कार्रवाई का समर्थन करता है। बाघेई ने कहा क‍ि कनाडा खुद अमेरिका की अविश्वसनीय नीतियों से पीड़ि‍त है, फ‍िर भी उसके दवाब में हमारे ख‍िलाफ तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने वाले बयान दे रहा है। यह स्‍थ‍ित‍ि रणनीतिक उलझन और दबाव के आगे झुकने का प्रदर्शन है। बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट किया, ”जिस दिन अमेरिका के राष्ट्रपति ने कनाडा की संप्रभुता और स्वतंत्रता की खुली अनदेखी करते हुए पूरे कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बताया, उसी दिन कनाडा के विदेश और वित्त मंत्रियों ने अपने दबाव बनाने वाले पड़ोसी को और खुश करने का रास्ता चुना। इस बार उन्होंने ईरान के खिलाफ ऐसा बयान दिया, जो हमारे क्षेत्र की स्थिति से जुड़े तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है।” उन्‍होंने कहा क‍ि कनाडा अच्छी तरह जानता है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने से पहले होर्मुज स्‍ट्रेट खुला और सुरक्षित था। बाघेई ने कहा क‍ि कनाडा एक तरफ खुद को ‘शांति और सुरक्षा’, ‘समुद्री मार्गों की आजादी’ और ‘अंतरराष्ट्रीय कानून’ का समर्थक बताता है, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और हमारे क्षेत्र में उसकी गैरकानूनी दखलअंदाजी वाली नीतियों का समर्थन करता है। ऐसे में उसके दावे भरोसेमंद नहीं लगते। उन्‍होंने कहा, कनाडा ने खुद भी अमेरिका की अविश्वसनीय नीतियों का अनुभव किया है और जानता है कि अमेरिका के वादे कितने अस्थायी हो सकते हैं। अगर वास्तव में समुद्री मार्गों की आजादी ही मुख्य मुद्दा है, तो फिर कनाडा, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और आर्थिक दबाव का समर्थन क्यों कर रहा है? वह अमेरिका की आक्रामक नीतियों, नाकेबंदी और आर्थिक युद्ध को खत्म करने की मांग क्यों नहीं करता? यह न तो कूटनीति है और न ही जिम्मेदार शासन का उदाहरण। यह रणनीतिक उलझन और दबाव के आगे झुकने का प्रदर्शन है। ऐसा फैसला कनाडा को भी अमेरिकी दबाव और आक्रामक रवैये से बचा नहीं पाएगा।

सऊदी अरब पर हूती समूह के हमले खतरनाक रूप से तनाव बढ़ाने वाले : सैन्य गठबंधन

रियाद। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करने वाले सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने मंगलवार को कहा कि हूती समूह की ओर से सऊदी अरब पर किए गए हमले ‘खतरनाक रूप से तनाव बढ़ाने वाले’ हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर जारी एक पोस्ट में गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि हूती समूह की बढ़ती सैन्य गतिविधियां और सऊदी अरब, उसकी राष्ट्रीय संपत्तियों, नागरिकों तथा वहां रहने वाले लोगों को निशाना बनाने की कोशिशें ‘आक्रामक और गैर-जिम्मेदाराना रवैये’ को दर्शाती हैं। स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अल-मलिकी ने कहा कि हालिया हमलों में आभा, खमीस मुशैत, जाजान और नज्रान शहरों के नागरिक और आर्थिक महत्व वाले ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित 73 नागरिक घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये हमले सऊदी अरब की संप्रभुता का उल्लंघन हैं और वहां के नागरिकों व निवासियों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा करते हैं। अल-मलिकी ने कहा कि गठबंधन की संयुक्त सेना कमान हूती समूह को रोकने, खतरे के स्रोतों का जवाब देने और उनके खतरे को समाप्त करने के लिए जरूरी सैन्य कदम उठाएगी। दूसरी ओर, हूती समूह ने मंगलवार को दावा किया कि उसने सऊदी अरब में कई ठिकानों पर हमला किया है। हूती संचालित मीडिया आउटलेट ‘अंसारुल्लाह’ के अनुसार, हमलों में अभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, किंग खालिद एयर बेस और सरकारी तेल कंपनी अरामको की अभा और जजान स्थित सुविधाएं शामिल थीं। इससे एक दिन पहले, सोमवार को हूती समूह ने सऊदी अरब पर आरोप लगाया था कि उसने युद्ध प्रभावित यमन के कई प्रांतों में हवाई हमले और क्रूज मिसाइल हमले किए हैं। उसी दौरान सरकारी बलों और हूती लड़ाकों के बीच संघर्ष कई मोर्चों पर फैलता जा रहा था। हूती समर्थित अल-मसीरा टीवी ने बताया, “सऊदी दुश्मन ने अल-जौफ, अल-बैदा, मारीब और ताइज प्रांतों को कई हवाई हमलों और क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया।” हालांकि रिपोर्ट में हताहतों या नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि समूह ने सोमवार को उत्तरी अल-जौफ प्रांत के खब और अश-शाअफ जिले के ऊपर एक सऊदी सीएच-4 निगरानी ड्रोन को मार गिराया।

आरआरबी भर्ती 2026: पैरामेडिकल के 560 पदों पर वैकेंसी का नोटिफिकेशन जारी, आवेदन 15 सितंबर से

नई दिल्ली। रेलवे में नौकरी करना आज भी हजारों-लाखों युवाओं का सपना होता है। अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन मौका सामने आया है। दरअसल, रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) ने पैरामेडिकल कैटेगरी के विभिन्न 560 पदों पर योग्य और इच्छुक उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक शॉर्ट ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करके रिक्तियों की घोषणा की है। आरआरबी की ओर से पैरामेडिकल पोस्ट के लिए जारी कुल 560 रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू हो जाएगी और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 14 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे आरआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित पोस्ट के लिए आवेदन लिंक सक्रिय होने के बाद से तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं। आवेदकों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 जनवरी 2027 के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी), दस्तावेज सत्यापन (डीवी), चिकित्सा जांच (एमई), आदि चरणों के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 7वें सीपीसी के अनुसार पे लेवल 3 से पे लेवल 7 के बीच प्रतिमाह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 500 रुपए और एससी/एसटी/पूर्व सैनिक/विकलांग व्यक्ति/महिला/ट्रांसजेंडर/अल्पसंख्यक/ईबीसी के लिए 250 रुपए तय किया गया है। कैंडिडेट्स ध्यान दें कि आरआरबी की ओर से पैरामेडिकल पोस्ट के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भर्ती प्रक्रिया, आयु सीमा, सैलरी, योग्यता, आदि से जुड़ी विस्तृत जानकारी का नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए उम्मीदवारों को सम-दर-समय ऑफिशियल पोर्टल को चेक करने की सलाह दी जाती है।

जयपुर के आमेर किले के पास चाकू मारे गए टूरिस्ट गाइड की मौत, विरोध में बाजार बंद

जयपुर। जयपुर में आमेर किले के पास मावठा इलाके में एक झगड़े के दौरान चाकू लगने से गंभीर रूप से घायल हुए टूरिस्ट गाइड मनीष सोनी की मंगलवार को सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद आमेर शहर के कुछ हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए और बाजार बंद रहे। पुलिस के अनुसार, यह घटना सोमवार सुबह 10 बजे हुई, जब ऐतिहासिक आमेर किले के पास गाड़ियों की आवाजाही को लेकर विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि मनीष सोनी गाड़ियों को किले की ओर जाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनकी एक जीप ड्राइवर आजम से बहस हो गई। यह बहस जल्द ही हिंसा में बदल गई। पुलिस का आरोप है कि आजम ने अपने साथी नाजिश के साथ मिलकर झगड़े के दौरान सोनी पर चाकू से हमला किया। सोनी के पेट में गंभीर चोट आई और वे वहीं गिर पड़े। उन्हें गंभीर हालत में एसएमएस अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। पुलिस ने बताया कि ज्यादा खून बहने और अंदरूनी गंभीर चोटों के कारण मंगलवार को उनकी मौत हो गई। सोनी की मौत से स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के सदस्यों में गुस्सा फैल गया। विरोध स्वरूप आमेर बाजार की दुकानें बंद रहीं जबकि प्रदर्शनकारी आमेर पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हो गए और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग की। आमेर के एसएचओ राजेंद्र गोदारा ने बताया कि दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस टीमें हमले में इस्तेमाल किए गए चाकू को बरामद करने की भी कोशिश कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आजम के खिलाफ आमेर पुलिस स्टेशन में पहले से ही दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। सोनी की मौत के बाद बढ़ते तनाव को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और एहतियात के तौर पर जल महल रूट से ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे जांच के दौरान शांति बनाए रखें।

कर्नाटक में आपातकालीन सेवाओं में बाधा पहुंची तो सरकार होगी जिम्मेदार : आर अशोक

बेंगलुरु। भाजपा के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर.अशोक ने मंगलवार को सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उनके मुताबिक, सरकार ने 108 ‘आरोग्य कवच’ मुफ्त एंबुलेंस को संकट के समय उतारने का फैसला किया है। अगर सरकार के इस फैसले की वजह से 20 सितंबर के बाद आपातकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की बाधा पहुंचती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्वास्थ्य मंत्री यू.टी खादर की होगी। ज्ञात हो कि मुफ्त एंबुलेंस के 108 ड्राइवरों ने कर्नाटक सरकार को सीधे शब्दों में कह दिया है कि अगर 15 दिनों के अंदर उनकी मांग पूरी नहीं होगी, तो वो सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यू.टी खादर ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आंदोलन से मरीजों को किसी भी प्रकार से परेशानी हुई, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने ड्राइवरों से कहा कि वो सरकार से जुड़े संगठनों से इस बारे में दृढ़ता से बात करें, ताकि उनकी मांगों पर विचार किया जाए। अशोक ने कहा कि 108 एंबुलेंस से जुड़े करीब 35,00 कर्मचारियों ने 20 तारीख को सामूहिक तौर पर इस्तीफा देने का ऐलान किया है। इसके बावजूद सरकार उनकी मांगों पर खामोश बैठी है। अशोक ने आरोप लगाया कि 20 सितंबर को 108 एंबुलेंस से जुड़े करीब 3500 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। इसके बावजूद भी सरकार खामोश बैठी है। ऐसी स्थिति में कोई एक कोई गैर-जिम्मेदार सरकार के बारे में क्या ही कहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन कर्मचारियों की समस्याओं को संवाद के जरिए सुलझाने की जगह उन्हें धमका रही है। सरकार कह रही है कि अगर किसी भी कर्मचारी ने हड़ताल की, तो उसका लाइसेंस निरस्त करके उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अशोक ने कहा कि कर्मचारियों ने प्रमुख रूप से कई मांगें उठाई हैं, जिसमें अतिरिक्त भुगतान में 45 फीसद की कटौती, 12 घंटे की शिफ्ट और अगर किसी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिजनों को 108 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाए। भाजपा नेता ने सवाल पूछा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि सरकार के पास मौजूदा समय में विज्ञापन, उपलब्धियों के लिए कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए तो भरमार पैसा है। अफसोस की बात है कि उन सभी लोगों को न्याय देने के लिए पैसा नहीं है, जो दूसरों की जान बचाने में लगे रहते हैं। अशोक ने पूछा कि यह अफसोस की बात है कि सरकार के पास विज्ञापन और अपनी उपलब्धियों का बखान करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए पैसा है। लेकिन, कर्मचारियों को न्याय देने के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने चेताते हुए कहा कि 20 सितंबर के बाद एंबुलेंस सेवाओं में बाधा पहुंचने की वजह से अगर मरीजों और लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी हुई, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्वास्थ्य मंत्री यू.टी खादर की होगी।