श्रीलंका पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पारंपरिक अंदाज में हुआ गर्मजोशी से स्वागत

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह श्रीलंका पहुंच चुके हैं। श्रीलंका पहुंचने पर उनका गर्मजोशी और पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। रक्षामंत्री के आगमन व स्वागत के लिए बंडारानायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर श्रीलंका सरकार के प्रतिनिधि व भारतीय उच्चायुक्त मौजूद रहे। वह 8 से 10 सितंबर तक श्रीलंका की तीन दिवसीय आधिकारिक पर हैं। अपनी यात्रा के पहले दिन वह मंगलवार को नई दिल्ली से कोलंबो पहुंचे हैं। यहां हवाई अड्डे पर श्रीलंका के रक्षा उपमंत्री मेजर जनरल अरुण जयसेकरा (सेवानिवृत्त) और श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने रक्षा मंत्री की अगवानी की। श्रीलंकाई पक्ष की ओर से किया गया पारंपरिक स्वागत दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे घनिष्ठ, मैत्रीपूर्ण और भरोसेमंद संबंधों को दर्शाता है। राजनाथ सिंह की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच पहले से मजबूत संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात और बातचीत करेंगे। मंगलवार को ही वे यहां भारतीय उच्चायुक्त से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों से भी मुलाकात करने वाले हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और समुद्री साझेदारी इस यात्रा के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत और श्रीलंका की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए समुद्री सुरक्षा दोनों देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भारत का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी श्रीलंका पहुंचा है। बातचीत के दौरान आपसी हित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका के संबंध केवल रणनीतिक और रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्ते भी बेहद गहरे हैं। रक्षा मंत्री की यात्रा के दौरान इन संबंधों को और मजबूत करने पर भी जोर रहने की उम्मीद है। अपनी यात्रा के दौरान राजनाथ सिंह कोलंबो में भारतीय प्रवासी समुदाय से मुलाकात करेंगे। वह श्रीलंका में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद भी करेंगे। रक्षा मंत्री की तीन दिवसीय यात्रा को भारत की पड़ोसी प्रथम नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत समुद्री एवं रक्षा साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

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