आईएफएफजेके में निर्देशक श्रीराम राघवन ने की शिरकत, कहा- जम्मू-कश्मीर के युवाओं को मिलेगा हौसला

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (आईएफएफजेके) श्रीनगर में आयोजित किया जा रहा है, जहां फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज निर्देशक और लेखक श्रीराम राघवन भी आयोजन में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने आयोजन की जमकर सराहना की। उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि यह समारोह घाटी के साथ बॉलीवुड के रिश्ते को फिर से मजबूत कर सकता है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि समारोह से जम्मू-कश्मीर के लोगों को मनोरंजन जगत में आने के लिए हौसला मिलेगा। उन्होंने कहा, “अभी फिल्ममेकिंग के हर क्षेत्र में काफी लोगों की जरूरत है और मुझे यकीन है कि इस समारोह से उन लोगों को भी हौसला मिलेगा, जो मनोरंजन जगत में आना चाहते हैं। उन्हें लगेगा कि हां, हम भी कोशिश कर सकते हैं।” हालांकि, निर्देशक ने यह भी स्पष्ट किया कि समारोह का नतीजा हाल ही में न सही लेकिन कुछ समय के बाद जरूर देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस समारोह से लोगों को थोड़ी मदद मिलेगी और इसका फर्क तुरंत नहीं लेकिन कुछ सालों में जरूर दिखेगा।” श्रीराम राघवन का मानना है कि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (आईएफएफजेके) को हिंदी सिनेमा को एक अवसर के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को इसे एक अवसर के तौर पर लेना चाहिए, क्योंकि आज हर राज्य का अपना सांस्कृतिक सिनेमा है, बहुत सारी रीजनल फिल्में भी अच्छा कर रही हैं। बहुत कुछ हो रहा है और शायद यहां भी होगा।” उन्होंने कहा कि समारोह में भीड़ बहुत थी, जिसे देखकर वे काफी खुश नजर आए। उन्होंने क्राउड को लेकर कहा, “यहां पर भारी मात्रा में लोग देखने को मिले, इतना तो मुंबई में भी नहीं देखा होगा। वहां तो 40-50 लोग होते थे और यहां तो पूरा हॉल भरा हुआ था। मैं बस यही चाहता था कि यहां पर और एक दो घंटा कर पाता और मुझे लगा कि मैं यहां पर एक पूरा दिन बिता सकता था।” जम्मू-कश्मीर का पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर 7 सितंबर से 10 सितंबर 2026 तक श्रीनगर में आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में इस महोत्सव का उद्घाटन किया। इस फेस्टिवल का मुख्य विषय है- ‘रंग-ए-सिनेमा’।

एएसआई के सहारनपुर दौरे पर इमरान मसूद बोले, मस्जिद के रिकॉर्ड देखकर हो जाएगी स्थिति स्पष्ट

सहारनपुर। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) टीम के सहारनपुर दौरे को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की प्रतिक्रिया सामने आई है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने कहा, “हम तो पहले दिन से कह रहे हैं कि प्राचीन मस्जिद है। वजू करने के लिए मस्जिदों में कुआं होता था। हो सकता है कुआं 300 वर्षों से भी पुराना हो। मस्जिद के कागज के देख लेना चाहिए कि कब से हैं। मस्जिद के अंदर ही कुआं होता है। कई जगह अभी भी हैं।” राशिद अल्वी के बयान पर इमरान मसूद ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर भाजपा ने 2024 में भी चुनाव लड़ा था। हश्र देखा क्या हुआ? भगवान राम सबके हैं। भगवान राम न्याय के प्रतीक हैं। राम तो इस देश के कण-कण में हैं। संभल को लेकर इमरान मसूद ने कहा कि सौहार्द्र बनाए रखने के लिए सहारनपुर के लोगों का धन्यवाद। अष्टमी के दिन शराब की दुकानों को बंद करने के बंगाल सरकार के फैसले पर इमरान मसूद ने कहा कि न तो मैं शराब पीता हूं और न तो मांस खाता हूं। सबको बंद कर दो, मुझे फर्क नहीं पड़ता। इस देश 82 प्रतिशत लोग मांसाहारी हैं। नॉर्थ ईस्ट में पूरी राजनीति इस पर निर्भर है। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने कहा कि ये लोग हिंदू-मुस्लिम करके चुनाव जीतना चाहते हैं। इनको विकास से कोई मतलब नहीं है। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत ही खराब है। धर्म के नाम पर बांट कर राजनीति कर रहे हैं। हम लोगों की ओर से इसका खुला विरोध किया जा रहा है। मौलाना तौकीर रजा को जमानत न मिलने पर उन्होंने कहा कि यह बहुत अफसोस की बात है, कोर्ट में इंसाफ नहीं मिलेगा तो लोग कहां जाएंगे।

ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होंगे राष्ट्रपति पुतिन, पीएम मोदी से करेंगे द्विपक्षीय बैठक : क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव

नई दिल्ली। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात तय है। क्रेमलिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि करते हुए भारत को रूस का “रणनीतिक साझेदार” बताया है। रूसी राष्ट्रपति के दिल्ली पहुंचने से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता और राष्ट्रपति पुतिन के प्रेस सचिव दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को मीडिया से वर्चुअल बातचीत की। उनके बयानों में भारत-रूस रिश्तों की गर्माहट के साथ-साथ बदलती वैश्विक व्यवस्था की झलक भी दिखाई दी। पेस्कोव ने कहा, “दोनों देशों के बीच आपसी संपर्क बहुत अहम होंगे, खासकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक। जैसा कि आप जानते हैं, भारत और रूस के नेताओं के बीच बहुत करीबी संबंध हैं। उनके संबंध बहुत व्यावहारिक हैं और वे एक-दूसरे के साथ इतने ईमानदार हैं कि वैश्विक एजेंडे और हमारे आपसी संबंधों से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुले और रचनात्मक तरीके से चर्चा कर सकते हैं।” यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ने, पश्चिमी प्रतिबंधों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई बड़े सवालों से जूझ रही है। ब्रिक्स की अहमियत पर पेस्कोव ने प्रकाश डालते हुए कहा,” मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ब्रिक्स कोई संगठन नहीं है; यह एक क्लब है। हमारे पास कोई चार्टर, नियम या स्थायी कार्यालय नहीं है। बल्कि, यह उन देशों का एक क्लब है जो इस बात पर एक जैसी सोच रखते हैं कि दुनिया में काम कैसे होने चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कैसे किया जाना चाहिए।” उन्होंने ब्रिक्स के तीन प्रमुख स्तंभों का जिक्र करते हुए कहा, “रूस ब्रिक्स सहयोग के तीन मुख्य स्तंभों – राजनीति और सुरक्षा; अर्थव्यवस्था और वित्त; और सांस्कृतिक व मानवीय संपर्क – के और विकास में योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बेशक, हमारी अपनी कई पहल हैं जिन्हें हम इस समूह के भीतर बढ़ावा दे रहे हैं। हम ब्रिक्स के भीतर सहयोग के अलग-अलग तरीकों में ज्यादा से ज्यादा देशों को शामिल करने के विचार का समर्थन करते हैं।” पार्टनर कंट्री के कॉन्सेप्ट की प्रशंसा करते हुए पेस्कोव बोले, ” 2024 में, पार्टनर देशों की एक नई श्रेणी – ‘ब्रिक्स पार्टनर कंट्री’ श्रेणी – बनाई गई थी, और अब यह बहुत अच्छी तरह से विकसित हो रही है। बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​नाइजीरिया, मलेशिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को पार्टनर का दर्जा दिया गया है। इन देशों के प्रतिनिधियों को धीरे-धीरे अलग-अलग वर्किंग ग्रुप और फॉर्मेट में शामिल किया जा रहा है, और हम इसे एक बहुत ही सकारात्मक विकास मानते हैं।” उन्होंने बताया कि रियो डी जनेरियो में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एक्सपर्ट लेवल पर बातचीत शुरू करने की पहल की। बोले, “हम इस पहल को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, और ब्रिक्स के भीतर कई देशों ने इसका समर्थन किया।” पेस्कोव ने बताया कि रूस और ब्रिक्स देशों के बीच अब करीब 90 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब डॉलर के प्रभुत्व और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को लेकर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा तेज है। भारत के रूसी ऊर्जा आयात पर अमेरिका की ओर से प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव पर पेस्कोव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक को “अवैध” करार दिया। पीएम मोदी-राष्ट्रपति पुतिन बातचीत के दौरान यूक्रेन युद्ध और शांति की कोशिशें भी अहम मुद्दा हो सकती हैं। भारत ने शुरुआत से ही युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने पर जोर दिया है। भारत की इसी भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर पेस्कोव ने कहा, “हम भारतीय प्रयासों का स्वागत करते हैं।” पेस्कोव ने ब्रिक्स को सिर्फ आर्थिक समूह के रूप में देखने से आगे बढ़ते हुए इसे बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता में काफी निवेश किया है और संगठन की विचारधारा बहुध्रुवीय दुनिया की विचारधारा है। उनके अनुसार एकध्रुवीय दुनिया ढह रही है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है। उनके मुताबिक, दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन केवल सदस्य देशों की बैठक नहीं है। इसके पीछे दुनिया की उस नई व्यवस्था की बहस भी है जिसमें रूस, भारत, चीन और दूसरे उभरते देश वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभाव की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही पेस्कोव ने भारत-रूस संबंधों को काफी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “कहानी केवल तेल और रक्षा तक सीमित नहीं है।” पेस्कोव ने भारत में नए परमाणु संयंत्र के विकास में आगे प्रगति की उम्मीद जताई। उन्होंने रूस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का भी स्वागत किया।

यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव में सीएम योगी बोले- उत्तर प्रदेश अब माफिया नहीं, निवेश और रोजगार की पहचान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टेक्सटाइल कॉन्क्लेव के मंच से प्रदेश की बदली तस्वीर और सरकार की आर्थिक नीति का सियासी खाका पेश किया। लखनऊ में मंगलवार को यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 का उद्घाटन करते हुए सीएम योगी ने एक ओर उत्तर प्रदेश की हजारों वर्ष पुरानी वस्त्र परंपरा को वैश्विक बाजार से जोड़ने का संकल्प जताया, तो दूसरी ओर 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल पर विपक्ष को घेरा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान अब दंगा, माफिया और वसूली से नहीं, बल्कि निवेश, रोजगार और विकास से हो रही है। प्रदेश में आज कानून का राज है और अपराध तथा अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है। पहले निवेशक कारोबार की उम्मीद लेकर आते थे और वसूली की पर्ची लेकर लौटते थे, लेकिन अब व्यापारी और निवेशक सुरक्षित माहौल में कारोबार कर सकते हैं। सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आए दिन दंगे होते थे और माफिया सत्ता के समानांतर अपनी व्यवस्था चलाते थे। यूपी के नागरिकों को दूसरे राज्यों में किराए का मकान और होटल में कमरा तक मिलने में दिक्कत होती थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में उद्योग लगाने की कल्पना करना भी मुश्किल था, जबकि आज यूपी दंगा और कर्फ्यू मुक्त प्रदेश है। उन्होंने टेक्सटाइल क्षेत्र को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार का बड़ा आधार बताते हुए कहा कि प्रदेश के पास विरासत, हुनर, मानव संसाधन और देश का बड़ा बाजार मौजूद है। बनारस के रेशम से लेकर भदोही के कालीन और कानपुर के औद्योगिक आधार तक प्रदेश की अपनी मजबूत टेक्सटाइल पहचान है। वैदिक साहित्य, रामायण और महाभारत में भी काशी के वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई पहचान मिल चुकी है और करीब पांच लाख बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं। देश के कुल फैब्रिक उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य फाइबर से लेकर तैयार उत्पाद और वैश्विक बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला प्रदेश में विकसित करना है। उत्तर प्रदेश को केवल उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक टेक्सटाइल हब बनाना है। उन्होंने एमएसएमई को उप-ठेकेदार से निर्यातक और बुनकरों को सप्लायर से ब्रांड मालिक बनाने पर जोर दिया। प्रदेश में 36 सेक्टर आधारित नीतियां और करीब 75 हजार एकड़ का लैंड बैंक उपलब्ध होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि निवेशकों के लिए ऑनलाइन प्रोत्साहन वितरण और योजनाओं की मुख्यमंत्री कार्यालय से निगरानी की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में प्रदेश में एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक्स और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी का मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ है। टेक्सटाइल क्षेत्र में करीब 5,354 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। संत कबीर टेक्सटाइल पार्क के तहत 10 पार्क विकसित करने की योजना है, जिनमें पांच पर काम शुरू हो चुका है। कॉन्क्लेव में उद्योग जगत ने भी यूपी में निवेश की संभावनाओं को स्वीकार किया। साथ ही कुशल श्रमशक्ति, प्रसंस्करण इकाइयों, टेक्सटाइल मशीनरी और तकनीकी वस्त्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया गया। इस तरह टेक्सटाइल कॉन्क्लेव के जरिए योगी सरकार ने विकास और निवेश के साथ अपनी कानून-व्यवस्था की उपलब्धियों को भी चुनावी विमर्श के केंद्र में रखने का संकेत दिया।

जब प्यार जताने गए थे अक्षय कुमार, सरेआम पिट कर आ गए थे वापस

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार आज भले ही करोड़ों दिलों की धड़कन हों, लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब किसी लड़की को प्रभावित करने की कोशिश उन्हें भारी पड़ गई। कॉलेज के दिनों में उन्हें एक लड़की पसंद थी और उसे इंप्रेस करने के लिए गाना भी गाया, जिसके बाद लड़की के पड़ोसियों ने उन्हें और उनके दोस्त को पीट दिया था। उन्होंने कहा कि उस घटना ने उन्हें यह सिखाया कि किसी को प्रभावित करने के लिए बनावटीपन नहीं, बल्कि सादगी और आत्मविश्वास ज्यादा मायने रखता है। अभिनेता का यह पुराना किस्सा उनके संघर्ष, मासूमियत और युवावस्था की यादों की एक दिलचस्प झलक पेश करता है, जिसे सुनकर दर्शक भी खूब मुस्कुराए थे। अक्षय कुमार का जन्म 9 सितंबर 1967 को हुआ था और उनका बचपन दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में बीता। उनका असली नाम राजीव हरिओम भाटिया है। उनके पिता सेना में थे और बचपन से ही अक्षय को खेल-कूद और कुश्ती में दिलचस्पी थी। उन्होंने मुंबई के खालसा कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन पढ़ाई बीच में छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने मार्शल आर्ट सीखने का फैसला किया और पिता की मदद से बैंकॉक चले गए। बैंकॉक में अक्षय ने मार्शल आर्ट सीखा। साथ ही, उन्होंने अपना खर्च चलाने के लिए एक रेस्टोरेंट में वेटर और कुक के तौर पर काम किया। दिन में काम और खाली समय में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग उनका रोज का जीवन बन गया था। अक्षय कई इंटरव्यू में बता चुके हैं कि उनके पिता ने उन्हें बैंकॉक भेजने के लिए पैसे जुटाए थे और इस सफर ने उनकी जिंदगी को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। भारत लौटने के बाद भी अक्षय के लिए बॉलीवुड का रास्ता तुरंत नहीं खुला। उन्होंने कुछ समय दिल्ली में आर्टिफिशियल ज्वेलरी बेचने का काम किया। मुंबई लौटकर वह मार्शल आर्ट सिखाने लगे। इसी दौरान उनके एक छात्र के पिता ने उन्हें मॉडलिंग करने की सलाह दी। अक्षय ने यह मौका आजमाया और एक फर्नीचर स्टोर के लिए मॉडलिंग की। उन्होंने बताया कि उस एक काम के लिए उन्हें 21 हजार रुपए मिले, जबकि वह पूरे महीने मार्शल आर्ट सिखाकर करीब 5 हजार रुपए कमाते थे। यहीं से उन्हें लगा कि मॉडलिंग के रास्ते से वह आगे बढ़ सकते हैं। फिल्मों में आने से पहले अक्षय ने फोटोग्राफर जयेश सेठ के साथ लाइट असिस्टेंट के तौर पर भी काम किया। इस दौरान उन्हें गोविंदा, रेखा, जैकी श्रॉफ और संगीता बिजलानी जैसे बड़े सितारों के फोटोशूट देखने का मौका मिला। अक्षय ने अनुपम खेर के शो में बताया था कि गोविंदा ने एक दिन उन्हें देखकर पूछा था कि वह खुद हीरो क्यों नहीं बनते। इसके बाद अक्षय ने फिल्मों की तरफ कदम बढ़ाया और 1987 की फिल्म ‘आज’ में छोटे रोल से उनकी स्क्रीन पर शुरुआत हुई। इसके कुछ साल बाद अक्षय को वह पहचान मिली, जिसने उन्हें ‘खिलाड़ी कुमार’ बना दिया। 1991 में ‘सौगंध’ से बतौर लीड एक्टर करियर शुरू करने के बाद 1992 में आई ‘खिलाड़ी’ ने उनकी एक्शन हीरो वाली पहचान मजबूत कर दी। इसके बाद ‘मोहरा’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ और ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें एक्शन फिल्मों का बड़ा चेहरा बना दिया, लेकिन अक्षय सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रहे। ‘ये दिल्लगी’, ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’, ‘भूल भुलैया’ और ‘नमस्ते लंदन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर खुद को साबित तिया। दिखाई। अक्षय ने इस साल एक टीवी शो में एक किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया कि करीब 40 साल पहले कॉलेज में उन्हें एक लड़की बहुत पसंद थी। वह उसे इंप्रेस करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने उसके लिए गाना सीखा। उनका एक दोस्त गिटार बजाना जानता था। दोनों मिलकर लड़की के घर के बाहर पहुंचे। अक्षय ने गाना गाया और दोस्त गिटार बजाता रहा। उन्हें लगा होगा कि यह कोशिश लड़की को पसंद आएगी, लेकिन कहानी में आगे कुछ और ही हुआ। गाना खत्म होने के बाद उन्हें और उनके दोस्त को लड़की के पड़ोसियों ने पीट दिया। अक्षय ने कई बड़े सम्मान अपने नाम किए। उन्हें 2009 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। ‘रुस्तम’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला और ‘पैडमैन’ के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। फिल्मफेयर समेत कई बड़े पुरस्कार उनके नाम हैं। तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में वह 100 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं।

बिहार: मोकामा-बख्तियारपुर हाईवे पर हादसा, तेज रफ्तार कार के डिवाइडर से टकराने से तीन की मौत

पटना। बिहार के मोकामा-बख्तियारपुर राजमार्ग पर हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई। पटना से खगड़िया की ओर जा रही तेज रफ्तार कार संतुलन बिगड़ने से सड़क किनारे डिवाइडर से टकरा गई, जिससे यह हादसा हुआ। जानकारी के मुताबिक, तेज रफ्तार की वजह से ड्राइवर का गाड़ी से कंट्रोल हट गया और गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार में सवार तीनों लोग अंदर ही फंस गए। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। गाड़ी के दरवाजे जाम हो गए थे, इसलिए स्थानीय लोगों ने कार के क्षतिग्रस्त हिस्से को कटर से काटकर कार सवारों को बाहर निकाला। हादसे की सूचना मिलने पर मोकामा पुलिस स्टेशन की एक टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से तीनों घायलों को मोकामा ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान पवन गुप्ता, सुलोचना देवी और ड्राइवर सलमान के तौर पर हुई; ये सभी खगड़िया के रहने वाले थे। पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पहचान होने के बाद मृतकों के परिवारों को सूचना दी गई। शुरुआती जांच से पता चलता है कि तेज रफ्तार और उसके बाद गाड़ी से कंट्रोल खो देना ही हादसे की मुख्य वजह हो सकती है। पुलिस घटना के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। तीन लोगों की मौत की खबर सुनकर परिवार गहरे सदमे में डूब गए। परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस दुखद हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है। वहीं, एक और हादसे में मंगलवार सुबह पश्चिम चंपारण जिले में एक यात्री बस के बेकाबू होकर सड़क किनारे पलटने से दो महिलाएं घायल हो गईं। यह हादसा पुरुषोत्तमपुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मैनाटांड ब्लॉक के तिलंघी बहुअरवा गांव के पास हुआ।

पीएम-सेतु योजना के तहत राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के आईटीआई क्लस्टरों को मिली 735.70 करोड़ रुपए की मंजूरी

नई दिल्ली। कौशल विकास और रोजगार क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने मंगलवार को एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एंप्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई (पीएम-सेतु) योजना के तहत 735.70 करोड़ रुपए की सामरिक निवेश योजनाओं (एसआईपी) को मंजूरी दी है। यह निवेश राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) क्लस्टरों के आधुनिकीकरण और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण विकसित करने के लिए किया जाएगा। पीएम-सेतु की राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) की पांचवीं बैठक कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में मंत्रालय और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, बहुपक्षीय विकास बैंकों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के साझेदार, प्रशिक्षण महानिदेशक दिलीप कुमार तथा मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार जी. मधुमिता दास भी उपस्थित रहे। इन नई मंजूरियों के साथ पीएम-सेतु योजना के तहत स्वीकृत कुल निवेश बढ़कर 2,171 करोड़ रुपए हो गया है, जो देशभर के नौ आईटीआई क्लस्टरों में लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य आईटीआई संस्थानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर अवसंरचना और उद्योग-आधारित प्रशिक्षण से लैस करना है। राष्ट्रीय संचालन समिति ने एच.जी. इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत 241 करोड़ रुपए की सामरिक निवेश योजना को मंजूरी दी। इस क्लस्टर में राजस्थान के सरकारी आईटीआई भिवाड़ी को हब संस्थान बनाया जाएगा, जबकि अलवर, नीमराना, तिजारा और किशनगढ़ बास स्थित सरकारी आईटीआई स्पोक संस्थानों के रूप में कार्य करेंगे। जेन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 254.30 करोड़ रुपए की योजना को भी मंजूरी मिल गई है। इस क्लस्टर में तेलंगाना के सरकारी आईटीआई मेडचल को हब बनाया जाएगा, जबकि अलवाल, शमीरपेट, कुकुनूरपल्ली और सिद्धिपेट स्थित आईटीआई स्पोक संस्थानों की भूमिका निभाएंगे। मेडचल प्रस्ताव को पहले एनएससी की चौथी बैठक में कुछ परिचालन और वित्तीय स्पष्टीकरण लंबित रहने के कारण स्थगित किया गया था। बाद में उद्योग भागीदार द्वारा पाठ्यक्रम संरचना, वित्तीय गणना, पात्रता, दस्तावेजीकरण और सिविल कार्यों से जुड़े विस्तृत जवाब प्रस्तुत किए गए, जिन्हें संतोषजनक मानते हुए समिति ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। उत्तर प्रदेश में नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) द्वारा प्रस्तुत 240.40 करोड़ रुपए की योजना को भी स्वीकृति मिल गई। इस मॉडल में सरकारी आईटीआई, साकेत (मेरठ) को हब संस्थान बनाया जाएगा, जबकि गाजियाबाद, हापुड़, गौतम बुद्ध नगर और बागपत के सरकारी आईटीआई स्पोक संस्थानों के रूप में जुड़े रहेंगे। सरकार द्वारा स्वीकृत योजनाओं का उद्देश्य उद्योग-नेतृत्व वाले हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से सरकारी आईटीआई संस्थानों को परिवर्तित करना है। इन निवेशों के जरिए आईटीआई परिसरों के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण, मौजूदा ट्रेडों का उन्नयन, नए दीर्घकालिक और अल्पकालिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत तथा संस्थानों की परिचालन क्षमता को मजबूत किया जाएगा।

नवसारी में पीएम मोदी का स्वागत करने पहुंची बच्चियां, जन्मदिन की दी एडवांस बधाई

नवसारी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को गुजरात दौरे पर हैं। इस दौरान नवसारी में वह ‘नमो कमलम’ का उद्घाटन करेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इस मौके पर छोटी-छोटी बच्चियां भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंची जो हाथ में खास तौर पर बनाया गया प्लेकार्ड लेकर प्रधानमंत्री को जन्मदिन की अग्रिम बधाई देती नजर आईं। प्रधानमंत्री का जन्मदिन 17 सितंबर को है लेकिन नवसारी में बच्चियां एडवांस में ही उन्हें शुभकामनाएं देने पहुंची। बच्चियां हाथ में प्लेकार्ड लेकर पहुंची, जिस पर पीएम मोदी के लिए खास बधाई संदेश लिखा है। नवसारी की रहने वाली आरवी मिस्त्री नाम की एक बच्ची ने आईएएनएस से कहा, “प्रधानमंत्री मोदी हमारे शहर नवसारी आ रहे हैं, इसलिए मैं बहुत खुश हूं। पीएम मोदी का मानना है कि ‘महिलाएं ही असली शक्ति हैं’। उन्होंने महिलाओं और लड़कियों के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। जैसे, महिलाओं को मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए।” बच्ची ने कहा, “पहले माना जाता था कि सिर्फ पुरुष या लड़के ही आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन आज के समय में महिलाएं भी आगे बढ़ रही हैं। मैं उन्हें जन्मदिन की अग्रिम बधाई देना चाहती हूं क्योंकि उनका जन्मदिन 17 सितंबर को है।” वहीं कार्यक्रम स्थल पर मौजुद एक युवक ने कहा, “आज देश की उम्मीदों और ताकत का प्रतिनिधित्व करने वाले सम्मानित प्रधानमंत्री मोदी साहब यहां आ रहे हैं। हम सभी युवा और जेन जी के सबसे पसंदीदा नेता, प्रधानमंत्री मोदी का नवसारी में पूरे जोश और गर्मजोशी के साथ स्वागत करने के लिए बहुत उत्साहित हैं।” बता दें कि इससे पहले वडोदरा में पीएम मोदी का कार्यक्रम हुआ, जहां उन्होंने करीब 25 मिनट जेन-जी से संवाद किया। इस दौरान पीएम मोदी ने युवाओं से झूठे दावों और भ्रामक बातों से सावधान रहने को कहा। इसके बाद अब वह नवसारी पहुंचेंगे, जहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

भारत की पहली बुलेट ट्रेन का ट्रायल अगले साल मई-जून में शुरू होने की उम्मीद : अश्विनी वैष्णव

मुंबई। भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल अगले साल मई और जून में शुरू होने की उम्मीद है। यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को दी। साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ट्रायल शुरू होने के दो से चार महीनों के बाद इसे आम यात्रियों के लिए खोला जाएगा। वडोदरा में ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाई-स्पीड ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम हाल ही में बनकर तैयार हुआ है और उसे स्क्वीज टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। वैष्णव ने कहा, “अगले साल मई या जून तक, भारत की अपनी बुलेट ट्रेन टेस्टिंग के लिए पटरियों पर होगी। 2-4 महीने की टेस्टिंग के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुलेट ट्रेन का उद्घाटन करेंगे।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह प्रोजेक्ट ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के तहत तैयार किया जा रहा है और इससे वडोदरा और मुंबई के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। उन्होंने कहा, “जब आप वडोदरा से बुलेट ट्रेन में सफर करेंगे, तो आप सिर्फ डेढ़ घंटे में मुंबई पहुंच जाएंगे।” वैष्णव ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और सूरत-वापी सेक्शन के इस साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। रेलवे सेक्टर में बड़े सुधारों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे के ऑपरेटिंग सिस्टम, रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म और निर्माण से जुड़े नियमों को आधुनिक बना रही है। उन्होंने कहा, “हम ऑपरेटिंग सिस्टम और रिजर्वेशन सिस्टम से लेकर पुराने कंस्ट्रक्शन प्रोटोकॉल तक, हर चीज में सुधार और आधुनिकीकरण कर रहे हैं।” वैष्णव ने बताया कि हाल के वर्षों में रेलवे के कई लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं। उन्होंने चेनाब ब्रिज और मिजोरम को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाले रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का जिक्र किया। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, 280 रेलवे स्टेशनों को फिर से विकसित किया गया है और 36,000 किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वंदे भारत टेक्नोलॉजी वाली कार्गो ट्रेनें भी विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की रफ्तार तेज हुई है। उन्होंने बताया कि 2020 में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का पहला सेक्शन पूरा होने के बाद, अगले सेक्शन पर काम में तेजी आई। वैष्णव ने कहा, “भारतीय रेलवे का जो आधुनिक स्वरूप उभर रहा है, उससे आने वाली कई पीढ़ियों को फायदा होगा।

आईसीसी टी20 रैंकिंग: श्री चरणी शीर्ष पर बरकरार, दीप्ति शर्मा को फायदा

दुबई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद द्वारा मंगलवार को जारी टी20 गेंदबाजों की सूची में भारत की बाएं हाथ की स्पिनर शीर्ष क्रम पर बरकरार हैं। वहीं, अनुभवी दीप्ति शर्मा को फायदा हुआ है। ताजा रैंकिंग में श्री चरणी पहले, इंग्लैंड की सोफी एक्लेस्टन दूसरे, इंग्लैंड की चार्ली डीन तीसरे, दक्षिण अफ्रीका की एन मल्बा चौथे और इंग्लैंड की लॉरेन बेल पांचवें स्थान पर हैं। भारत की अनुभवी स्पिनर दीप्ति शर्मा को दो स्थान का फायदा हुआ है। दीप्ति अब छठे स्थान पर चली गई हैं। दीप्ति मौजूदा एशिया कप में शानदार फॉर्म में हैं, उन्होंने तीन मैचों में आठ विकेट लिए हैं और भारतीय टीम को सेमीफाइनल में भारत की बढ़त में अहम भूमिका निभाई है। इंग्लैंड की लिंसे स्मिथ एक स्थान के नुकसान के साथ सातवें है, और पाकिस्तान की नशरा संधु एक स्थान की नुकसान के साथ आठवें नंबर पर हैं। दक्षिण अफ्रीका की मारिजेन कैप को एक स्थान का फायदा हुआ है। वह नौवें नंबर पर हैं। पाकिस्तान की सादिया इकबाल एक स्थान के नुकसान के साथ दसवें स्थान पर हैं। इसके अलावा, एशिया कप में शानदार प्रदर्शन कर रही कुछ अन्य गेंदबाजों को भी आईसीसी रैंकिंग में फायदा मिला है। बांग्लादेश की मारूफा अख्तर ने 19 स्थान की छलांग लगाते हुए 18वें स्थान पर पहुंच गई हैं। श्रीलंका की कप्तान चमारी अथापट्टू पांच जगह ऊपर चढ़कर 28वीं रैंक पर हैं, और सुल्ताना खातून नौ जगह ऊपर चढ़कर 37वीं रैंक पर हैं। थाईलैंड की थिपाचा पुथावोंग चार जगह ऊपर चढ़कर 47वीं रैंक पर हैं, और उनकी टीम की साथी सुलीपोर्न लाओमी 10 जगह ऊपर चढ़कर 53वीं रैंक पर हैं। महिला टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग पर नजर डालें तो, ऑस्ट्रेलिया की बेथ मूनी पहले, ऑस्ट्रेलिया की जॉर्जिया वॉल दूसरे, दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट तीसरे, वेस्टइंडीज की हिली मैथ्यूज चौथे, भारत की स्मृति मंधाना पांचवें, श्रीलंका की चमारी अथापट्टू छठे, भारत की शफाली वर्मा सातवें, न्यूजीलैंड की अमेलिया केर आठवें, ऑस्ट्रेलिया की ताहिला मैक्ग्रा नौवें और भारत की हरमनप्रीत कौर दसवें स्थान पर हैं।