इंडोनेशिया में खुले कुछ एयरपोर्ट, ज्वालामुखी से अभी भी निकल रहा लावा

जकार्ता। अनाक क्राकाटाओ ज्वालामुखी विस्फोट के कारण प्रतिबंधित हवाई सेवाओं को कुछ हद तक शुरू कर दिया है। देश ने राजधानी जकार्ता में अपना मुख्य एयरपोर्ट और चार अन्य एयरपोर्ट फिर से खोल दिए हैं, जिन्हें ज्वालामुखी से निकलती राख के कारण बंद कर दिया गया था। अधिकारियों द्वारा जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर से ज्वालामुखी की राख हटाने के बाद मंगलवार को ये पांचों एयरपोर्ट फिर से खोल दिए गए। हालांकि मंगलवार को अनाक क्राकाटाओ ज्वालामुखी से लावा निकल ही रहा है। इसके कारण अधिकारी अलर्ट पर हैं। दो एयरपोर्ट अभी भी बंद हैं और ज्वालामुखी को लेकर चेतावनी दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर बरकरार है। बता दें कि इंडोनेशिया में ज्वालामुखी को लेकर चेतावनी के कुल चार स्तर होते हैं। दूसरे सबसे ऊंचे स्तर की चेतावनी में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। हवाई सेवाओं पर लगे ब्रेक का असर 3,40,000 से ज्यादा यात्रियों और लगभग 2,900 उड़ानों पर पड़ा। जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर से सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में फायरफाइटर और फायरट्रक रनवे और दूसरी जगहों से राख हटाते हुए दिखे। परिवहन मंत्री डुडी पुरवागांधी ने कहा कि फ्लाइट शेड्यूल को सामान्य होने में “थोड़ा” और समय लग सकता है। डुडी ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हम यात्रियों और आम जनता से थोड़ा धैर्य रखने की अपील करते हैं, क्योंकि हम यह पक्का करने के लिए जांच करेंगे कि ये विमान उड़ान भरने के लिए सुरक्षित हैं या नहीं।” डुडी ने कहा, “उड़ान भरने वाला पहला विमान एक कार्गो प्लेन था। हम इन विमानों का संचालन करेंगे, लेकिन ऐसा करने से पहले हम उनकी उड़ान भरने की क्षमता (एयरवर्दीनेस) को पक्का करना चाहते हैं। इसलिए, इसमें थोड़ा अतिरिक्त समय लग सकता है।” अनाक क्राकाटाओ, में शनिवार को जबरदस्त विस्फोट हुआ था। ये जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच एक जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में स्थित है। नेशनल जियोलॉजी एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया के अनुसार, ज्वालामुखी में मंगलवार सुबह ही करीब तीन बार विस्फोट हुआ। जियोलॉजी एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया, “इसका असर पिछले विस्फोटों जितना बड़ा नहीं है, लेकिन हम निगरानी जारी रखेंगे।” अनाक क्राकाटाओ इंडोनेशिया के लगभग 130 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यह देश “पैसिफिक रिंग ऑफ फायर” में स्थित है, जो भूकंप की दृष्टि से बहुत सक्रिय क्षेत्र है। यहां पृथ्वी के क्रस्ट की अलग-अलग प्लेटें आपस में मिलती हैं, जिससे काफी भूकंप आते हैं और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।
एक्जिम बैंक में मैनेजर सहित कई पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, उम्मीदवार 15 सितंबर से करें आवेदन

नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर में नौकरी करने के इच्छुक लोगों के लिए एक खास मौका सामने आया है। दरअसल, इंडिया एक्जिम बैंक ने बैकलॉग रिक्तियों के लिए विशेष भर्ती अभियान (एसआरडी) के तहत मैनेजर सहित विभिन्न कई पदों पर पात्र और इच्छुक उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करके उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। एक्जिम बैंक की ओर से जारी रिक्तियों में डिप्टी मैनेजर (ग्रेड/स्केल जेएम I) के 6 और मैनेजर (एम)-(ग्रेड/स्केल एमएम II) के 2 पद शामिल हैं। वहीं, श्रेणी के आधार पर एससी के 2, एसटी के 3 और ओबीसी के 3 पद शामिल हैं। इन सभी पोस्ट के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू हो जाएगी और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर तक तय की गई है। ऐसे में इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार एक्जिम बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन लिंक सक्रिय होने के बाद से तय अंतिम तिथि तक उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से कम से कम 50 प्रतिशत अंक या सीजीपीए के साथ 3 वर्ष का फुल-टाइम कोर्स वाला ग्रेजुएशन की डिग्री और कम से कम 2 वर्ष का फुल-टाइम कोर्स वाला पोस्ट ग्रेजुएशन (एमबीए/पीजीडीबीए/पीजीडीबीएम/एमएमएस), जिसमें फाइनेंस/इंटरनेशनल बिजनेस/फॉरेन ट्रेड में स्पेशलाइजेशन या चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) हों, होना चाहिए। इसके अलावा, कैंडिडेट्स के पास प्रासंगिक क्षेत्र में पद के अनुसार निर्धारित एक से तीन वर्षों का अनुभव होना भी अनिवार्य है। आवेदकों की अधिकतम आयु श्रेणी के अनुसार डिप्टी मैनेजर पद के लिए 31 से 33 वर्ष और मैनेजर पोस्ट के लिए 33 से 35 वर्ष के बीच तय की गई है, जिसकी गणना 31 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी। वहीं, सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूबीडी) के लिए अधिकतम आयु सीमा में 10 वर्ष और पूर्व-सैनिकों के लिए 5 वर्ष की छूट दी जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच, लिखित परीक्षा, पर्सनल इंटरव्यू और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी डिप्टी मैनेजर पद के लिए 48,480 से 85,920 रुपए के बीच और मैनेजर पोस्ट के लिए 64,820 से 93,960 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वहीं, लिखित परीक्षा नवंबर में आयोजित होने की संभावना है। आवेदन पत्र भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो ओबीसी के लिए 600 रुपए और एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी एवं महिला उम्मीदवारों के लिए 100 रुपए तय किया गया है।
राम मंदिर की व्यवस्थाओं को नई धार देने अयोध्या पहुंचे पहले सीईओ जितेंद्र मिश्र, संभाली कमान

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने मंगलवार को अयोध्या पहुंचकर अपनी नई जिम्मेदारी संभाल ली। पदभार संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले राम मंदिर पहुंचकर रामलला के दर्शन किए और इसके बाद तीर्थ क्षेत्र भवन पहुंचकर मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं और अधिकारियों के साथ कामकाज शुरू किया। ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्र के लिए मंदिर के समीप ही अपने एक भवन में आवास की व्यवस्था की है। अब वह अयोध्या में रहकर मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्थाओं, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं की निगरानी करेंगे। मंगलवार को मंदिर परिसर पहुंचने के बाद वह ग्रीन हाउस गए, जहां उन्होंने मंदिर से जुड़े अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। मिश्रा की नियुक्ति इसी महीने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में की गई थी। मंदिर के पहले सीईओ के चयन के लिए गठित खोज समिति की सिफारिशों के आधार पर पांच हजार से अधिक संभावित उम्मीदवारों में से उनका चयन किया गया। ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना में 39 वर्षों से अधिक के उनके विशिष्ट सेवाकाल और व्यापक प्रशासनिक एवं नेतृत्व अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। मिश्रा इससे पहले नियुक्ति के बाद अयोध्या की अपनी पहली यात्रा पर आए थे। उस दौरान उन्होंने ट्रस्टियों के साथ बैठक कर सीईओ के रूप में अपनी जिम्मेदारियों, कार्यक्षेत्र और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को समझा था। इसके बाद वह दिल्ली लौट गए थे। मंगलवार को अयोध्या पहुंचने के बाद अब वह स्थायी रूप से यहीं रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। सीईओ के रूप में मिश्रा के सामने मंदिर की बढ़ती गतिविधियों और श्रद्धालुओं की संख्या के बीच प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की चुनौती होगी। मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा, कर्मचारियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, वित्तीय प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं। मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में कमीशन मिला था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र हैं और पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया था। मिश्रा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे की तैयारियों को लेकर भी मंदिर से जुड़े अधिकारियों के साथ समन्वय किया। मुख्यमंत्री अयोध्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के सम्मान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद हनुमानगढ़ी और श्री राम मंदिर में दर्शन करने वाले हैं। ट्रस्ट के सीईओ के रूप में मिश्रा की नियुक्ति को मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर, व्यवस्थित और जवाबदेह स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सैन्य सेवा में लंबे प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव के बाद अब उनके सामने दुनिया के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो चुके राम मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं को संस्थागत रूप देने की जिम्मेदारी है।
हनी-ट्रैप के लिए आईएसआई की नई चाल, अधिकारियों की फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिकों का कर रही इस्तेमाल

नई दिल्ली। भारत में पिछले कुछ सालों में हनी-ट्रैप के मामले बढ़े हैं। चेतावनियों और सलाहों के बावजूद कई अधिकारी इन नेटवर्क का शिकार बन रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान की आईएसआई, जो ये नेटवर्क चलाती है, ने ऐसे अधिकारियों की पहचान करने के लिए कई मनोवैज्ञानिकों को काम पर रखा है जिनके पास संवेदनशील जानकारी होती है। मकसद ऐसे लोगों का अध्ययन करना, उनकी निजी समस्याओं को समझना और फिर उनसे जानकारी निकलवाना है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि आईएसआई इस काम के लिए मनोवैज्ञानिकों को नियुक्त कर रही है और उन्हें टारगेट खोजने से पहले महिलाओं के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट बनाने का निर्देश देती है। ये बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित लोग होते हैं जो निजी समस्याओं वाले अधिकारियों को फंसाने में माहिर होते हैं। ये मनोवैज्ञानिक पहले सोशल मीडिया पर अधिकारियों की पहचान करते हैं और फिर उनके द्वारा पोस्ट किए गए संदेशों का गहराई से अध्ययन करते हैं। अधिकारी ने कहा कि चूंकि वे प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक होते हैं, इसलिए वे आसानी से ऐसे अधिकारियों की मानसिकता को समझ लेते हैं। एक बार पहचान हो जाने के बाद, आईएसआई द्वारा नियुक्त ये मनोवैज्ञानिक उन अधिकारियों से बातचीत शुरू करते हैं और उनके प्रति बहुत सहानुभूति दिखाते हैं। वे इन लोगों की कमजोरियों का पता लगाने में महीनों बिताते हैं। इन अधिकारियों का भरोसा जीतने में उन्हें लगभग दो से तीन महीने लगते हैं। जब भरोसा बन जाता है, तो इन लोगों को अपने सिस्टम पर कुछ एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। इनमें से ज्यादातर एप्लिकेशन में चुपके से काम करने वाले स्पाइवेयर और मैलवेयर होते हैं, जो चीन में बने होते हैं। अधिकारियों का कहना है कि हनी-ट्रैप नेटवर्क अब पैसे और डराने-धमकाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके बजाय कमजोरियों का फायदा उठाया जाता है, और करीबीपन व आकर्षण का इस्तेमाल करके संवेदनशील जानकारी रखने वाले अधिकारियों को फंसाया जाता है। मनोवैज्ञानिक इन तरीकों का सबसे बेहतर इस्तेमाल करते हैं। फंसने वाले व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और वह डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों के ज़रिए संवेदनशील जानकारी दे बैठता है। हाल के मामलों में यह पाया गया है कि अधिकारियों की निजी समस्याओं का फायदा उठाना आईएसआई के लिए कारगर रहा है। ये अधिकारी कमजोर स्थिति में होते हैं और अपनी निराशा निकालने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि यह तरीका आईएसआई के लिए अच्छा काम कर रहा है, इसलिए पाकिस्तान में मनोवैज्ञानिकों की मांग बढ़ गई है। हाल ही में हनी-ट्रैप नेटवर्क में मनोवैज्ञानिकों को शामिल करने के मामलों में हुई बढ़ोतरी ने भारतीय एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। एक अधिकारी ने बताया कि यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि नियमित रूप से एडवाइजरी जारी किए जाने के बावजूद, कई अधिकारी इस जाल में फंसते जा रहे हैं और अपने सिस्टम में डेटा लीक करने वाला या मैलवेयर साफ्टवेयर तक इंस्टॉल कर लेते हैं।
पीठ की अकड़न और कब्ज से हैं परेशान, सुप्त मत्स्येंद्रासन है रामबाण उपाय

नई दिल्ली। दफ्तर में घंटों बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधि कम होने की वजह से कमर दर्द, कब्ज और पीठ में अकड़न की समस्या आम हो गई हैं। इन शारीरिक समस्याओं से निजात पाने के व्यक्ति योग का सहारा ले सकता है। सही खानपान और योग से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। योग के इन्हीं आसनों में ‘सुप्त मत्स्येंद्रासन’ बेहद लाभदायक है, जो न सिर्फ कमर दर्द और जकड़न दूर करता है बल्कि मन को शांति मिलती है। सुप्त मत्येंद्रासन को अंग्रेजी में सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट या रिक्लाइंड ट्विस्ट कहा जाता है। यह आसन संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है, सुप्त (लेटना), मत्स्येंद्र (पौराणिक योगी मत्स्येंद्रनाथ) और आसन (मुद्रा)। यह अर्ध मत्स्येंद्रासन का लेटा हुआ, पुनर्स्थापनात्मक रूप है, जो निष्क्रिय, गुरुत्वाकर्षण-सहायता प्राप्त स्थिति में रीढ़ की हड्डी के घुमाव के समान आवश्यक लाभ प्रदान करता है और इसके लिए किसी बल की आवश्यकता नहीं होती है। यह आसन योग की शास्त्रीय परंपरा में गहराई से जुड़ा हुआ है, जिससे विश्राम, स्थिरता और रीढ़ की हड्डी में हल्का तनाव कम होता है। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन, पीठ दर्द से राहत और पाचन तंत्र को सुधारने के लिए एक उत्कृष्ट अभ्यास माना है। सुप्त मत्स्येंद्रासन, एक लेटने की मुद्रा है जिसमें एक घुटना शरीर के आर-पार मुड़ा होता है और उसी तरफ का हाथ बाहर की ओर फैला होता है। इसे करने के दौरान रीढ़ की हड्डी कमर से गर्दन तक धीरे-धीरे घूमती है। नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी की गतिशीलता बढ़ती है, कूल्हों का तनाव कम होता है, पाचन क्रिया बेहतर होती है और पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र सक्रिय होता है, जिससे यह हठ योग और पारंपरिक योग दोनों में सबसे अधिक चिकित्सकीय रूप से उपयोगी आसनों में से एक बन जाता है। यदि आप पहली बार योग कर रहे हैं या किसी चिकित्सीय स्थिति से गुजर रहे हैं, तो इसे हमेशा किसी प्रमाणित योग शिक्षक की देखरेख में ही शुरू करें। इसके साथ ही, रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, घुटने या कंधों में हाल ही में कोई चोट लगी हो या सर्जरी हुई हो, तो इसे न करें।
भारत के बाद अफगानिस्तान मल्टी-फॉर्मेट सीरीज के लिए इन दो देशों की मेजबानी करेगा

नई दिल्ली। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम भारत के खिलाफ नई दिल्ली में 3 टी20 मैचों की सीरीज के लिए भारतीय टीम की मेजबानी कर रही है। इस सीरीज के बाद अफगानिस्तान यूएई में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज के लिए बांग्लादेश और जिम्बाब्वे की मेजबानी करेगी। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इसकी पुष्टि की है। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा है कि अफगानिस्तान क्रिकेट टीम अक्टूबर और नवंबर (9 अक्टूबर से 17 नवंबर) के दौरान यूएई में बांग्लादेश के खिलाफ एक टेस्ट खेलेगी। इसके बाद एक वनडे त्रिकोणीय सीरीज खेली जाएगी जिसकी दो अन्य टीमें बांग्लादेश और जिम्बाब्वे हैं। इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ 3 टी20 मैच और 2 टेस्ट खेले जाएंगे। अफगानिस्तान सबसे पहले 9 से 13 अक्टूबर तक बांग्लादेश के साथ एक टेस्ट खेलेगा। इसके बाद 17-23 अक्टूबर तक अफगानिस्तान, बांग्लादेश और जिम्बाब्वे के साथ वनडे त्रिकोणीय सीरीज खेलेगी। सीरीज में हर टीम एक-दूसरे से एक बार खेलेगी। टॉप दो टीमें 23 अक्टूबर को फाइनल खेलेंगी। त्रिकोणीय सीरीज के बाद अफगानिस्तान और जिम्बाब्वे 27 अक्टूबर, 29 अक्टूबर और 1 नवंबर को तीन टी20 मैच खेलेंगे। इसके बाद दोनों टीमें दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलेंगी। पहला टेस्ट 5 नवंबर से और दूसरा टेस्ट 13 नवंबर से खेला जाएगा। एसीबी के सीईओ नसीब खान ने कहा, “हमें अफगानिस्तान राष्ट्रीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इस अहम दौर को कन्फर्म करते हुए खुशी हो रही है। अलग-अलग फॉर्मेट में बांग्लादेश और जिम्बाब्वे के साथ खेलने से हमारे खिलाड़ियों को कीमती कॉम्पिटिटिव मौके मिलेंगे और हमारे समर्थकों को इंटरनेशनल क्रिकेट का एक रोमांचक दौर मिलेगा। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड हमारी नेशनल टीम को नियमित, हाई-क्वालिटी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट देने के लिए प्रतिबद्ध है। हम बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और जिम्बाब्वे क्रिकेट के साथ अपने रिश्तों को बहुत महत्व देते हैं।” बीसीबी के सीईओ निजामउद्दीन चौधरी ने कहा, “टेस्ट मैच और त्रिकोणीय सीरीज बांग्लादेश और अफगानिस्तान दोनों के फैन्स के लिए क्रिकेट का एक रोमांचक दौर होने का वादा करते हैं। हम टेस्ट को बहुत महत्व देते हैं, और यह हमारे खिलाड़ियों के लिए यूएई में पहली बार रेड-बॉल क्रिकेट का अनुभव करने और एक मजबूत अफगानिस्तान टीम के खिलाफ खुद को चुनौती देने का एक शानदार मौका होगा, जिसने पारंपरिक रूप से इन हालातों में अच्छा प्रदर्शन किया है। हम इस टूर और ट्राई-नेशन सीरीज को आयोजित करने के लिए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को धन्यवाद देते हैं, जिसमें जिम्बाब्वे भी शामिल है। हम इंटरनेशनल क्रिकेट के कुछ रोमांचक हफ्तों का इंतजार कर रहे हैं।” जिम्बाब्वे क्रिकेट के मैनेजिंग डायरेक्टर गिवमोर माकोनी ने कहा, “यह जिम्बाब्वे के लिए एक जरूरी टूर है, जो हमारे खिलाड़ियों को तीनों फॉर्मेट में हाई-क्वालिटी कॉम्पिटिशन देगा। वनडे त्रिकोणीय सीरीज दो मजबूत टीमों के खिलाफ हमारी परीक्षा लेगी, जबकि दो टेस्ट मैच खास तौर पर कीमती हैं क्योंकि हम सबसे लंबे फॉर्मेट में और नियमित मौके ढूंढ रहे हैं। हम टूर की मेजबानी के लिए अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड और उनके सहयोग के लिए बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) का दिल से धन्यवाद करते हैं।
कोयला गैसीकरण योजना को मिला उद्योग जगत का मजबूत समर्थन, 37,500 करोड़ रुपए की योजना के पहले चरण में आए 7 आवेदन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि योजना के पहले चरण में बड़े कॉर्पोरेट समूहों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से कुल सात आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र में बढ़ते निवेश विश्वास को दर्शाते हैं। कोयला मंत्रालय के अनुसार, अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने यूरिया उत्पादन से जुड़ी तीन परियोजनाओं के लिए आवेदन किया है। वहीं गैलेंट इस्पात लिमिटेड ने डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) और सिंथेसिस गैस (सिंगैस) उत्पादन परियोजना के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इसके अलावा, एनटीपीसी लिमिटेड ने सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (एसएनजी) परियोजना के लिए आवेदन दिया है, जबकि श्याम सेल एंड पावर लिमिटेड ने सिंगैस उत्पादन तथा तालचेर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (टीएफएल) ने यूरिया उत्पादन परियोजना के लिए प्रस्ताव जमा किया है। कोयला मंत्रालय का कहना है कि यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि उद्योग जगत कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और औद्योगिक विकास को गति देने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रहा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “जब हमने कहा था कि योजना में किसी की रुचि नहीं होने की खबरें समय से पहले थीं, तब हमें विश्वास था कि उद्योग जगत सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा। पहले ही चरण में सात आवेदन प्राप्त होना, जिनमें देश के कुछ सबसे बड़े औद्योगिक समूह और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं, इस योजना और भारत के कोयला गैसीकरण मिशन में विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है।” केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई 2026 में इस योजना को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य घरेलू कोयला और लिग्नाइट को उच्च मूल्य वाले उत्पादों जैसे सिंगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन में परिवर्तित करने को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश की एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। वित्त वर्ष 2024-25 में इन उत्पादों का कुल आयात मूल्य लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपए रहा था। यह योजना भारत के 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने के लक्ष्य का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें से 75 मिलियन टन क्षमता इसी योजना के माध्यम से विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार, इससे देश में 3 लाख करोड़ रुपए तक के निवेश को आकर्षित करने और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। वर्तमान योजना जनवरी 2024 में मंजूर की गई 8,500 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन योजना का विस्तार है। उस योजना के तहत फिलहाल 8 कोयला गैसीकरण परियोजनाएं विभिन्न चरणों में लागू की जा रही हैं। कोयला मंत्रालय ने यह भी घोषणा की कि योजना का दूसरा चरण मंगलवार से खोल दिया गया है। प्रस्ताव अनुरोध (आरएफपी) के अनुसार, आवेदन जमा करने की नई अवधि हर दो महीने के अंतराल पर खोली जाएगी, जिससे पात्र कंपनियों को परियोजनाओं के लिए आवेदन करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। सरकार के अनुसार, निविदा जारी होने के बाद 7 जुलाई को पहले दौर के आवेदन जमा किए गए थे।
‘आपको न्याय मिलेगा’, गौरव गोगोई ने मणिपुर के म्यूजिशियन की हत्या पर जाहिर किया दुख

गुवाहाटी। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने मंगलवार को मणिपुर के म्यूजिशियन चोंगथम विक्रम सिंह की मृत्यु पर दुख जाहिर किया। विक्रम सिंह ने दक्षिण दिल्ली स्थित अपने आवास के बाहर तेज आवाज में म्यूजिक चलाने पर आपत्ति जताई, तो कथित तौर उन्हें पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया गया। गोगोई ने अपने सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर पोस्ट करके सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि पूरा पूर्वोत्तर भारत दुख की इस घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा है। सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए गोगोई ने अपने पोस्ट में लिखा, “चोंगथम विक्रम सिंह एक विनम्र व्यक्ति थे। उनमें कोई अहंकार नहीं था, उनका किसी के साथ बैर भी नहीं था। वह एक शांतिप्रिय व्यक्ति थे, जो सिर्फ संगीत से प्रेम करते थे। उन्हें हर कोई पसंद करता था।” गोगोई ने कहा, “दिवंगत आत्मा को शांति मिले। आपको न्याय मिलेगा। पूरा पूर्वोत्तर भारत आपके परिवार के लिए प्रार्थना कर रहा है।” प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सिंह ने दक्षिण दिल्ली स्थित अपने आवास के बाहर तेज शोर पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद बात हाथापाई तक पहुंच गई। इसके बाद उन्हें पीटा गया, जिसके बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। कांग्रेस नेता की टिप्पणी ने सिंह के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए संगीत के क्षेत्र में दिए उनके योगदान को भी सराहा। गोगोई ने उन्हें एक शांतिपूर्ण व्यक्ति बताया और कहा कि वो बैर-भाव से दूर रहते थे और सिर्फ कला के लिए जीते थे। इस हादसे के बाद मणिपुर समुदाय के साथ पूरे पूर्वोत्तर भारत के लोगों में शोक है। लोग म्यूजिशियन के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की सही से जांच होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर किन परिस्थितियों में म्यूजिशियन की मौत हुई थी? पुलिस अब अपनी जांच के तहत यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस हमले के पीछे पूरा घटनाक्रम क्या रहा है। इसमें सिंह के घर के बाहर संगीत को लेकर विवाद भी शामिल है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जो लोग भी इस हमले में शामिल थे, उनकी भूमिका क्या थी? इस हादसे के बाद से सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ रही है। लोग सिंह के परिजनों के प्रति सांत्वना व्यक्त करते हुए नजर आ रहे हैं और इस मामले में जवाबदेही भी तय करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, इस मामले में जांच के संबंध में अतिरिक्त जानकारियों का इंतजार किया जा रहा है, जिसमें आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करना शामिल है।
‘वाह… मेरा वडोदरा’: पीएम मोदी ने शहर की स्वच्छता मुहिम की तारीफ की, बोले- इसे त्योहारों तक बनाए रखें

वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात के वडोदरा के लोगों की जमकर तारीफ की। उन्होंने शहर में चलाए गए स्वच्छता अभियान को जन-भागीदारी का उदाहरण बताया और लोगों से इसे आने वाले गणेश उत्सव, नवरात्रि और दिवाली तक बनाए रखने की अपील की। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा में ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने इस अभियान के वीडियो देखे और शहर भर में लोगों की भागीदारी देखकर प्रभावित हुए। पीए मोदी ने कहा, “मैं कल एक वीडियो देख रहा था। मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया- वाह, मेरा वडोदरा!” उन्होंने शहर में उनके आगमन से पहले ‘स्वच्छता से स्वागत’ के तहत किए गए सफाई कार्य का जिक्र करते हुए यह बात कही। उन्होंने इस ‘सेवाभाव’ भरे स्वागत के लिए लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने पिछले एक हफ्ते के दौरान वडोदरा के हर परिवार में स्वच्छता का माहौल बना दिया था। उन्होंने इस पहल को शहर के त्योहारी कैलेंडर से भी जोड़ा। पीएम ने कहा कि वडोदरा जल्द ही गणेशोत्सव और नवरात्रि की तैयारी करेगा, जिसके बाद दिवाली आएगी। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि जब इस बार गणेश जी आएंगे तो सारे आशीर्वाद वडोदरा पर बरसेंगे।” पीएम मोदी ने बाद में लोगों से इस अस्थायी स्वच्छता अभियान को स्थायी नागरिक प्रतिबद्धता में बदलने का आह्वान किया। गुजराती में उन्होंने वडोदरा के लोगों से कहा कि उनके दौरे से पहले किए गए काम के बाद अब शहर को फिर से गंदा न होने दें। उन्होंने कहा, “अब हम संकल्प लें कि हम वडोदरा को गंदा नहीं होने देंगे।” यह अभियान 8 सितंबर को पीएम मोदी के कार्यक्रम से पहले चलाया गया था, जिसके दौरान उन्होंने 35,000 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास किया। वडोदरा नगर निगम ने सार्वजनिक स्थानों, झीलों, उद्यानों, स्वास्थ्य और बाल देखभाल सुविधाओं, विरासत स्थलों और जल निकायों को कवर करते हुए शहर-व्यापी स्वच्छता और पर्यावरण अभियान चलाया था। इसमें सफाई कर्मचारियों, नागरिकों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शैक्षणिक संस्थानों और गैर सरकारी संगठनों ने भाग लिया था। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा था कि सफाई कर्मचारियों और निवासियों ने सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और आसपास के क्षेत्रों की सफाई में भाग लिया था। उन्होंने बताया कि “पर्यावरण गतिविधियों के तहत पौधारोपण के लिए 20 लाख पौधे वितरित किए गए थे।” पीएम मोदी ने सफाई कर्मचारियों और नागरिकों के काम को सराहा और कहा कि उनकी भागीदारी ने दिखाया है कि स्वच्छता खुद ही स्वागत का एक रूप बन सकती है। इस स्वच्छता अभियान ने बड़े बुनियादी ढांचे की घोषणाओं वाले कार्यक्रम में नागरिक भागीदारी का एक नया पहलू जोड़ दिया। इस कार्यक्रम में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) के पूरा होने का उद्घाटन, नई रेल सेवाएं, रेल क्षमता विस्तार, हाईवे परियोजनाएं और आवास, जल आपूर्ति, शहरी विकास और नवीकरणीय ऊर्जा में गुजरात सरकार की पहल शामिल थी। वडोदरा के लिए, इस अभियान के साथ-साथ प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए डिजिटल रूप से प्रबंधित सार्वजनिक प्रवेश प्रणाली भी शुरू की गई थी। बुकमाईशो पर मुफ्त रजिस्ट्रेशन खोला गया था और एक घंटे के भीतर सभी उपलब्ध सीटें बुक हो गईं, जिसके बाद 42,000 से अधिक आवेदकों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया था।
मध्य पूर्व में तनाव का असर, भारत की क्रूड ऑयल बास्केट 100 डॉलर प्रति बैरल के पार

मुंबई। मध्य पूर्व में तनाव का असर भारत की क्रूड ऑयल बास्केट पर भी देखा जा रहा है और इसकी औसत कीमत अब चार महीने के उच्चतम स्तर 100.75 डॉलर पर पहुंच गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर को भारत की क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल थी। यह दिखाता है कि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ-साथ भारत के लिए कच्चा तेल आयात करना महंगा होता जा रहा है। इससे पहले भारत के कच्चे तेल के बास्केट की औसत कीमत अगस्त में 90.19 डॉलर प्रति बैरल, जुलाई में 82.04 डॉलर प्रति बैरल और जून में 83.22 डॉलर प्रति बैरल थी। वहीं, मई में अमेरिका-ईरान में युद्ध के चरम पर भारत के कच्चे तेल की बास्केट की औसत कीमत 106.23 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कच्चे तेल का दाम भी 100 डॉलर प्रति बैरल की तरफ पहुंच रहा है। दोपहर 2:20 पर बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.75 प्रतिशत बढ़कर 97.73 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.78 प्रतिशत की तेजी के साथ 93.11 डॉलर प्रति बैरल पर था। मध्य पूर्व में लगातार तनाव के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट बंद है, जिससे दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का आवागमन होता है। अमेरिका-ईरान के युद्ध के बीच में यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले करने के कारण स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है और युद्ध के बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई रणनीतिक और आर्थिक ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर दिया है। इन हमलों में अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अभा व जिजान स्थित साऊदी अरामको की तेल सुविधाएं शामिल थीं।