एआई बैंकिंग सेक्टर की बढ़ा सकता है दक्षता, एआई एजेंट्स के लिए स्पष्ट ढांचा बनाना आवश्यक :एसबीआई चेयरमैन

मुंबई। एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बैंकों को हजारों ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है। हालांकि, जैसे-जैसे यह तकनीक सिफारिशें देने से आगे बढ़कर फैसलों को लागू करने की दिशा में बढ़ रही है, वित्तीय संस्थानों को एआई एजेंट्स के लिए स्पष्ट ढांचा तैयार करना होगा। यह बयान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने गुरुवार को दिया। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में बोलते हुए शेट्टी ने कहा कि बैंक एआई अपनाने के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं। वित्तीय सेवाओं में एआई एजेंट्स की तैनाती एक बड़ा अवसर प्रदान करती है। शेट्टी ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हमेशा मानव संसाधनों की क्षमता बढ़ाने का काम करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि एजेंटिक एआई को लागू करने की शुरुआती स्थिर लागत अधिक हो सकती है, लेकिन इसके बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के साथ अतिरिक्त लागत कम हो सकती है, जिससे बैंकों के लिए आर्थिक दक्षता बढ़ सकती है। शेट्टी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में रणनीतिक क्षमताएं विकसित करने के लिए बुनियादी एआई मॉडल तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एजेंटिक एआई बैंकों को बड़े पैमाने पर ग्राहकों के लिए अधिक व्यक्तिगत सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम बना सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि बैंक इस तकनीक को एक ऐसे बाजार में अपना रहे हैं, जो काफी विविध और जटिल है। इससे वित्तीय संस्थानों के सामने कई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। शेट्टी ने कहा कि बैंक पिछले कई वर्षों से मशीन लर्निंग (एमएल) मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अगला बड़ा अवसर वित्तीय सेवाओं में एआई एजेंट्स की तैनाती में है। उन्होंने कहा कि एसबीआई बैंकिंग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को शुरुआती दौर में अपनाने वाले संस्थानों में रहा है। बैंक पहले से ही क्रेडिट आकलन और कैश फ्लो आधारित ऋण देने के लिए पारंपरिक एआई आधारित तरीकों का इस्तेमाल करता है। शेट्टी ने तकनीक को अपनाने में भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सफलतापूर्वक भरोसे में बदला और फिर उस भरोसे को बड़े पैमाने पर विस्तार में बदला है।” उनके अनुसार, जैसे-जैसे एजेंटिक एआई बैंकिंग का अधिक अभिन्न हिस्सा बनता जाएगा, वित्तीय संस्थानों को एआई एजेंट्स की पहचान और प्रमाणीकरण, ग्राहकों की सहमति तथा लेनदेन की सीमाओं को नियंत्रित करने वाले स्पष्ट नियम बनाने होंगे। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई सिस्टम केवल सिफारिशें देने से आगे बढ़कर फैसलों को लागू करना शुरू करेंगे, जवाबदेही का महत्व भी लगातार बढ़ता जाएगा।

गरबा में धर्म के आधार पर रोक गलत, भाईचारा मजबूत करने की जरूरत : रामदास आठवले

मुंबई। नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की गाइडलाइंस और मुस्लिमों की एंट्री को लेकर शुरू हुए विवाद पर केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान ने सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने त्योहार मनाने का अधिकार दिया है। रामदास आठवले ने कहा, “मुझे लगता है कि हमारे देश में बाबासाहेब अंबेडकर का दिया संविधान सभी धर्मों के लोगों को अपना त्योहार मनाने का हक देता है। एक धर्म के लोगों को दूसरे धर्म का सम्मान करना चाहिए और एक-दूसरे के कार्यक्रमों में भी शामिल होना चाहिए। जैसे अजमेर दरगाह जो मुस्लिमों का तीर्थ स्थल है, वहां कई हिंदू भी जाते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि ऐसे विवादित मुद्दे नहीं उठाने चाहिए। भाईचारा मजबूत करने की जरूरत है।” महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने गरबा आयोजनों में आडी चेक और मुस्लिमों की एंट्री पर टिप्पणी की थी। इस पर रामदास आठवले ने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से आईडी चेक हो सकता है लेकिन धर्म के आधार पर रोक लगाना गलत है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा, “आईडी चेक की बात है तो अगर कोई अपराधी है या सुरक्षा का मामला है तो पुलिस या संबंधित अधिकारी पहचान की जांच कर सकते हैं। हालांकि सिर्फ धर्म के आधार पर किसी को रोकना गलत है बल्कि अच्छी बात है अगर मुस्लिम गरबा में शामिल होते हैं, हिंदू ईद मनाते हैं या दोनों बुद्ध जयंती पर साथ आते हैं।” बता दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने कहा था कि गरबा एक सर्वसमावेशी उत्सव है और अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति शांतिपूर्वक इसमें शामिल होकर आनंद लेता है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा के लिए आईडी कार्ड की जांच करना अच्छी बात है लेकिन धर्म के आधार पर लोगों की जांच करना या भेदभाव करना सही नहीं है। पंजाब में गुलजार सिंह की आत्महत्या से मौत के मामले में उठे विवाद पर भी रामदास आठवले ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जो कहते हैं, बोलने का हक सबको है लेकिन नशा एक गंभीर मुद्दा है, खासकर पंजाब में। यह उनके मंत्रालय के तहत आता है और उन्होंने ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ शुरू किया है। रामदास आठवले ने कहा, “जब भी मैं पंजाब जाता हूं और अधिकारियों से बात करता हूं तो साफ है कि नशे की लत का स्तर बहुत ज्यादा है। एनडीए और भारत सरकार पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए सभी प्रयास जारी रखेगी।” दरअसल, राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पोस्ट कर कहा था कि पंजाब की ‘आप’ सरकार में एक खतरनाक तबाही दिख रही है कि नाकामी पर सवाल करोगे, तो जवाब धमकी और टॉर्चर से मिलेगा। बता दें कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के संगरूर जिले में रहने वाले 50 साल के गुलजार सिंह ने जहर खा लिया था। बताया जा रहा है कि वह सरकार द्वारा ड्रग्स की समस्या रोकने के लिए पर्याप्त कदम न उठाने से परेशान थे। जहर खाने के बाद उन्हें काफी दर्द हुआ लेकिन मरने से पहले उन्होंने लोगों से बात की। मरने से पहले गुलजार सिंह ने कहा था, “हरपाल सिंह चीमा भी मेरी मौत के लिए जिम्मेदार हैं।” वह पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर इशारा कर रहे थे, जिनसे उन्होंने गांव के दौरे के दौरान राज्य की ड्रग्स समस्या को लेकर सवाल किया था। गुलजार सिंह ने आरोप लगाया था कि ‘आप’ सरकार के मंत्री से सवाल करने के बाद पुलिस उन्हें अलग ले गई और माफी मांगने के लिए काफी दबाव डाला। अपने आखिरी बयान में उन्होंने कहा था, “सरपंच भी मेरी मौत के लिए जिम्मेदार है। मैंने हरपाल सिंह चीमा से ड्रग्स के बारे में सवाल किया था। मेरा बेटा ड्रग्स लेता है। मेरा घर बिक गया। मेरे पास कुछ नहीं है और आखिरकार अब मैंने जहर खा लिया है। पंजाब में कहीं भी ड्रग्स की समस्या हल नहीं हुई है।

संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार पर नगमा बोलीं, भाषा सीखना व्यक्ति की जरूरत और परिस्थिति पर करता है निर्भर

मुंबई। एक्ट्रेस नगमा ने एक्टर संजय दत्त के मराठी भाषा को लेकर दिए गए हालिया बयान पर अपनी राय रखी। संजय दत्त ने हाल ही में महाराष्ट्र के ठाणे में आयोजित एक दही हांडी कार्यक्रम में मराठी में बात करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई। अब नगमा ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा है कि किसी भाषा को सीखना या बोलना पूरी तरह व्यक्ति की परिस्थितियों और जरूरत पर निर्भर करता है। आईएएनएस से बात करते हुए नगमा ने कहा, ”जब हम स्कूल में थे, तब सिलेबस में एक भाषा जोड़ी गई थी। इसलिए महाराष्ट्र में रहते हुए हमें मराठी सीखनी पड़ी। हमें स्कूल में मराठी पढ़ाई जाती थी। मेरी मां भी महाराष्ट्र से हैं, इसलिए मुझे मराठी आती है। मेरे आसपास के लोगों से बातचीत के कारण भी मेरी मराठी बेहतर हुई। मेरे घर में काम करने वाली महिला भी महाराष्ट्र से थीं और हम उनसे मराठी में ही बात करते थे। मैंने एक मराठी फिल्म भी की है। मुझे नहीं लगता कि हमें अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर कुछ कहना चाहिए।” नगमा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब संजय दत्त अपने एक बयान को लेकर चर्चा में है। हाल ही में वह ठाणे में एक दही हांडी कार्यक्रम में पहुंचे थे, जिसे शिवसेना की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में संजय दत्त ने लोगों को हिंदी में संबोधित करना शुरू किया। इसी दौरान शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बोलने का अनुरोध किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संजय दत्त ने इस अनुरोध पर हंसते हुए मराठी में बोलने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, ”मैंने यरवदा जेल में छह साल बिताए, लेकिन फिर भी मराठी नहीं सीख पाया।” संजय दत्त के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनके बयान पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने इसे उनकी व्यक्तिगत पसंद से जोड़कर देखा। इसी पूरे विवाद के बीच नगमा की बात इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि उनका संजय दत्त के साथ पुराना फिल्मी कनेक्शन रहा है। दोनों कलाकारों ने एक साथ कई फिल्मों में काम किया है। नगमा और संजय दत्त पहली बार 1992 में आई फिल्म ‘यलगार’ में साथ नजर आए थे। फिरोज खान के निर्देशन में बनी इस एक्शन फिल्म में संजय दत्त ने विशाल सिंघल का किरदार निभाया था, जबकि नगमा उनकी पत्नी अनु सिंघल के रोल में थीं। फिल्म का गाना ‘आखिर तुम्हें आना है’ भी काफी लोकप्रिय हुआ था। इसके बाद दोनों कलाकार 2000 में आई डेविड धवन की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘चल मेरे भाई’ में भी साथ दिखाई दिए। हालांकि इस फिल्म में नगमा का स्पेशल अपीयरेंस था और उन्होंने सोनिया का किरदार निभाया था।

मिडटर्म चुनाव को ट्रंप ने बताया निर्णायक, रिपब्लिकन को बहुमत दिलाने की अपील, तय किया एजेंडा

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनावों को एक अहम फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव तय करेगा कि उनकी सरकार का एजेंडा आगे बढ़ेगा या सत्ता फिर से डेमोक्रेट्स के हाथ में जाएगी। उन्होंने टैक्स, स्वास्थ्य सेवा, सीमा सुरक्षा और अपराध जैसे मुद्दों पर आगे भी काम करने का वादा किया। डलास में रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के विशेष मिडटर्म सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “55 दिनों में अमेरिकी लोग हमारे इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण चुनावों में से एक में वोट डालने जा रहे हैं।” उन्होंने कहा, “आपका वोट तय करेगा कि हमारे देश के अगले 250 साल की शुरुआत में ही हम लड़खड़ा जाएंगे या तेजी से आगे बढ़ेंगे और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे।” ट्रंप ने अमेरिकी जनता से प्रतिनिधि सभा और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के उम्‍मीदवारों को बहुमत दिलाने की अपील की। उन्होंने इस चुनाव को राष्ट्रपति पद पर अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 19 महीनों के कामकाज पर जनता के फैसले के तौर पर पेश किया। साथ ही उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी और उसके उम्मीदवारों पर तीखा हमला बोला। ट्रंप ने कहा, “इस चुनाव में फैसला बहुत आसान है। मैं आपसे कह रहा हूं कि हमें वह काम पूरा करने का मौका दें, जिसकी शुरुआत हमने राष्ट्रपति पद के इतिहास के सबसे शानदार दो वर्षों के साथ की थी। साथ मिलकर हम दो साल की वापसी को 250 साल की बढ़त में बदल देंगे।” राष्ट्रपति ने कहा कि रिपब्लिकन सांसदों ने उनकी सरकार के एजेंडे को लागू करने में मदद की है। उन्होंने अवैध प्रवास में कमी, हिंसक अपराधों में गिरावट, निजी क्षेत्र में नौकरियों की बढ़ोतरी, ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि और टैक्स में कटौती को अपनी सरकार की उपलब्धियों के तौर पर गिनाया। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के पास अब ‘देश के इतिहास की सबसे मजबूत और सुरक्षित सीमा’ है और ‘अवैध प्रवास का स्तर अब तक दर्ज सबसे निचले स्तर पर है।’ उन्होंने टिप्स, ओवरटाइम और सोशल सिक्योरिटी से जुड़े टैक्स प्रावधानों का भी जिक्र किया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि अगर डेमोक्रेट्स फिर से कांग्रेस का नियंत्रण हासिल करते हैं तो वे इन नीतियों को खत्म करने की कोशिश करेंगे। ट्रंप ने कहा, “कांग्रेस में हर एक डेमोक्रेट ने हमारे टैक्स कटौती के खिलाफ वोट किया, उन्होंने टिप्स पर टैक्स नहीं लगाने, ओवरटाइम पर टैक्स नहीं लगाने और हमारे महान वरिष्ठ नागरिकों की सोशल सिक्योरिटी पर टैक्स नहीं लगाने के खिलाफ भी वोट किया।” राष्ट्रपति ने अगली कांग्रेस के लिए अपनी सरकार के विधायी एजेंडे की भी जानकारी दी। उन्होंने अपने टैक्स कटौती को स्थायी बनाने और जिसे उन्होंने ‘ग्रेट हेल्थकेयर प्लान’ कहा, उसे आगे बढ़ाने का वादा किया। ट्रंप के बताए प्रस्ताव के तहत बड़ी बीमा कंपनियों को मिलने वाली सरकारी रकम को खत्म किया जाएगा और उसकी जगह लोगों को सीधे पैसा दिया जाएगा, ताकि वे अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बीमा खरीद सकें। ट्रंप ने सरप्राइज मेडिकल बिलिंग को खत्म करने का भी वादा किया। इसके अलावा उन्होंने अस्पतालों और बीमा कंपनियों के लिए कीमतों की जानकारी आसान भाषा में सार्वजनिक करना अनिवार्य करने और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों को लेकर हुए समझौतों को स्थायी बनाने की बात कही। उन्होंने कहा क‍ि हम बेकाबू क्रेडिट कार्ड स्वाइप फीस को कम करेंगे, जिससे एक औसत परिवार को हर साल 1,200 डॉलर की बचत होगी।” ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार कैशलेस बेल व्यवस्था खत्म करने और बड़े स्तर पर ड्रग्स बेचने वालों, मानव तस्करों तथा कानून लागू करने वाले अधिकारियों की हत्या के दोषी लोगों के लिए मौत की सजा लागू करने की दिशा में काम करेगी। तीन नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से यह तय होगा कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट का नियंत्रण किस पार्टी के हाथ में रहेगा। चुनाव के नतीजे यह भी तय करेंगे कि ट्रंप अपने कार्यकाल के बचे हुए दो वर्षों में कांग्रेस के जरिए अपने एजेंडे को कितनी आसानी से आगे बढ़ा पाएंगे।

‘काला हिरण’ की रिलीज पर सलमान खान ने की रोक की मांग, मेकर्स बोले-फिल्म रिलीज के लिए तैयार ही नहीं

नई दिल्ली, । फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ को लेकर सलमान खान और इसके मेकर्स के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। सलमान खान ने इस फिल्म की रिलीज और प्रमोशन पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सलमान का कहना है कि फिल्म में उनके जीवन, उनकी पहचान और 1998 के काले हिरण मामले से जुड़ी चीजों का इस्तेमाल किया गया है। मामले की सुनवाई के दौरान फिल्म के मेकर्स ने कोर्ट को बताया है कि फिल्म अभी रिलीज के लिए तैयार ही नहीं है। फिल्म प्रोड्यूसर अमित जानी की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट में कहा कि फिल्म को अभी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड के पास प्रमाणन के लिए भेजा जाना बाकी है। फिल्म की सामग्री को अभी तक सेंसर बोर्ड से प्रमाणित नहीं किया गया है। इस दलील के बाद कोर्ट ने फिल्म निर्माता को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी। सलमान खान की तरफ से मामला थोड़ा अलग तरीके से देखा जा रहा है। उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि सिर्फ थिएटर में रिलीज की बात नहीं है। फिल्म को बाद में किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी रिलीज किया जा सकता है और इसके लिए सेंसर बोर्ड के प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होती। इसके बाद अदालत ने अपने आदेश में ओटीटी रिलीज को भी शामिल किया है। दरअसल, पूरा विवाद फिल्म का पोस्टर और टीजर सामने आने के बाद शुरू हुआ। सलमान की तरफ से आरोप लगाया गया कि फिल्म में एक ऐसा किरदार दिखाया गया है, जो काफी हद तक उनसे मिलता-जुलता है। उस किरदार के हाथ में सलमान खान जैसा मशहूर ब्रेसलेट भी नजर आया। सलमान का कहना है कि यह सब उनकी पहचान से जोड़कर दिखाया जा रहा है और उनकी अनुमति के बिना फिल्म में उनकी पर्सनैलिटी का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म के टीजर में 1998 के काले हिरण शिकार मामले से जुड़े संदर्भ भी दिखाए गए हैं। यह वही मामला है जिससे सलमान खान का नाम लंबे समय से जुड़ा रहा है। सलमान की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि फिल्म में उनके जीवन से जुड़े विवाद को कहानी का हिस्सा बनाया गया है और इसका इस्तेमाल फिल्म के प्रचार के लिए भी किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है और उनकी पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन हो रहा है। वहीं, फिल्म के डायरेक्टर भरत एस. श्रीनेत का कहना है कि यह फिल्म सलमान खान पर नहीं है। फिल्म का किरदार काल्पनिक है और उसका नाम ‘अयान खान’ रखा गया है। डायरेक्टर ने ब्रेसलेट को लेकर भी कहा था कि ऐसा ब्रेसलेट सिर्फ सलमान खान ही नहीं पहनते। वहीं अभिनेता को सलमान जैसा दिखाने के लिए किसी तरह का प्रोस्थेटिक मेकअप नहीं किया गया है। इस विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट में पहले भी कई बार सुनवाई हो चुकी है। सलमान खान की तरफ से फिल्म की रिलीज के साथ-साथ उसके प्रमोशन, मार्केटिंग और स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की मांग की गई है। वहीं फिल्म मेकर्स अपनी तरफ से इन आरोपों का विरोध कर रहे हैं। एक सुनवाई में हाईकोर्ट ने फिल्म के टीजर और कुछ प्रमोशनल मटीरियल को हटाने का आदेश भी दिया था। इस आदेश के खिलाफ प्रोड्यूसर अमित जानी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

आंध्र प्रदेश के रेल इंफ्रा को एक और बड़ी सौगात, सीएम चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र का जताया आभार

अमरावती। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की कनेक्टिविटी को बड़ी सौगात देने के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया। केंद्रीय कैबिनेट ने रेनिगुंटा-अरक्कोणम सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन को मंजूरी दी है, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने यह प्रतिक्रिया दी। रेनिगुंटा-अरक्कोणम सेक्शन भारतीय रेलवे का एक महत्वपूर्ण 77 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग है जो आंध्र प्रदेश के रेनिगुंटा और तमिलनाडु के अरक्कोणम जंक्शन को जोड़ता है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को आंध्र प्रदेश के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को यह बड़ी मजबूती देने के लिए धन्यवाद कहा। एन. चंद्रबाबू नायडू ‘एक्स’ में लिखा, “एनडीए की डबल इंजन, बुलेट-ट्रेन सरकार के तहत आंध्र प्रदेश की कनेक्टिविटी को एक और बड़ा बढ़ावा। केंद्रीय कैबिनेट ने रेनिगुंटा-अरक्कोणम सेक्शन पर तीसरी और चौथी रेलवे लाइन को मंजूरी दी है, जिसमें आंध्र प्रदेश में 46 किलोमीटर का हिस्सा तिरुपति और चित्तूर जिलों को कवर करता है, जिसकी लागत 1,157 करोड़ रुपए है। इससे भीड़भाड़ कम होगी, ट्रेनों की समय पर आवाजाही बेहतर होगी और तिरुपति की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे तीर्थयात्रियों और यात्रियों दोनों को फायदा होगा और माल ढुलाई भी बढ़ेगी।” इससे पहले डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने भी प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को आंध्र प्रदेश को लगातार समर्थन देने और राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया था। पवन कल्याण ने पोस्ट में लिखा, “भारतीय रेलवे नेटवर्क में 10,021 करोड़ रुपए की पांच मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं के साथ बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिससे लगभग 540 किलोमीटर की नई क्षमता जुड़ेगी। इसका मतलब होगा तेज यात्री आवाजाही, सुचारू संचालन, मजबूत माल ढुलाई कनेक्टिविटी और विकास की नई संभावनाएं। आंध्र प्रदेश के लिए अरक्कोणम-रेनिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह तिरुपति और रायलसीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, भीड़भाड़ को कम करेगी और पर्यटन, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को बड़ा बढ़ावा देगी।” उन्होंने लिखा कि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना में ये परियोजनाएं 17 जिलों, 2,121 गांवों और लगभग 52 लाख लोगों को जोड़ेगी जबकि 47 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बनाएगी। हर नया ट्रैक सिर्फ बुनियादी ढांचा नहीं है। यह लोगों को अवसरों से, व्यवसायों को बाजारों से और समुदायों को एक तेज, मजबूत भविष्य से जोड़ता है। मजबूत रेलवे, मजबूत कनेक्टिविटी, मजबूत भारत।

तमिलनाडु: मदुरंतकम और धरपुरम सीटों पर उपचुनाव के लिए टीवीके ने प्रत्याशियों की घोषणा की

चेन्नई। तमिलनाडु की सुरक्षित सीटें मदुरंतकम और धरपुरम पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) की ओर से उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गई है। ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ के तहत, टीवीके की ओर से मदुरंतकम (सुरक्षित) से पूर्व विधायक और पार्टी की डिप्टी जनरल सेक्रेटरी के. मरगथम कुमारवेल और धरपुरम (सुरक्षित) से पूर्व विधायक और तिरुप्पुर दक्षिण-पूर्व जिला सचिव पी. सत्यभामा को उम्मीदवार बनाया गया है। टीवीके की ओर से अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील की गई कि वे जीत को ही अपना एकमात्र लक्ष्य बनाएं और उपचुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के लिए दोनों उम्मीदवारों के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार करें। मदुरंतकम और धरपुरम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। मदुरंतकम और धरपुरम सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 9 सितंबर से 16 सितंबर तक नामांकन दाखिल किया जा सकेगा। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी जबकि उम्मीदवार 19 सितंबर तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। एआईएडीएमके के विधायक मरगथम कुमारवेल और सत्यभामा की ओर से विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल होने के बाद मदुरंतकम और धरपुरम की सीटें खाली हुई थी। टीवीके के लिए यह उपचुनाव काफी अहम है क्योंकि दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर पार्टी की स्थिति को मजबूत करना है। बीते दिन चुनाव आयोग की ओर से तमिलनाडु, पुडुचेरी और बंगाल में खाली विधानसभा की पांच सीटों पर चुनाव कराने का ऐलान किया गया था। उपचुनाव में सूबे में सत्तारूढ़ दलों को बढ़त मिलती रही है। टीवीके के चुनाव में उतरने के साथ ही उसे गठबंधन में मतभेद का सामना करना पड़ रहा है। अन्नाद्रमुक के 22 विधायकों की ओर से की गई क्रॉस वोटिंग की वजह से विजय को कुल 144 विधायकों का समर्थन मिला था, तब टीवीके बहुमत साबित कर पाई थी।

जम्मू-कश्मीर: एनसीबी ने हिरासत से फरार हुए ड्रग तस्कर को फिर से किया गिरफ्तार

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के जम्मू शहर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने दो दिन पहले हिरासत से फरार हुए ड्रग तस्कर को फिर से गिरफ्तार कर लिया है। एनसीबी अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि एनसीबी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और पंजाब पुलिस के साथ मिलकर आरोपी को फिर से गिरफ्तार किया है, जो 7 सितंबर को जम्मू में हिरासत से भाग गया था। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी जम्मू से भागकर पठानकोट रास्ते से जालंधर की ओर गया था। उसने कथित तौर पर नरवाल फ्रूट मंडी के पास एक जंगली इलाके में शरण ली। इस दौरान, उसने अपना हुलिया बदल लिया था। जम्मू-कश्मीर और पंजाब में तीन दिन तक चले तलाशी और ट्रैकिंग ऑपरेशन के बाद एनसीबी की अलग-अलग इकाइयों ने पंजाब पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए आरोपी को जालंधर में ढूंढ निकाला और पकड़ लिया। आरोपी की पहचान आकिब बशीर के तौर पर हुई है। अधिकारियों के अनुसार, पकड़े जाने के समय आरोपी दिल्ली या किसी अन्य राज्य की ओर जाने की तैयारी कर रहा था। उसकी शुरुआती गिरफ्तारी एनसीबी की ओर से जम्मू डिवीजन में चलाए गए एक महीने लंबे ऑपरेशन का हिस्सा थी, जिसमें नशीले पदार्थों के तस्करों की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले दो अलग-अलग रास्तों का खुलासा हुआ था। इन रास्तों से पाकिस्तान से उरी सेक्टर और अप्रत्यक्ष रूप से पंजाब के रास्ते केंद्र शासित प्रदेश में हेरोइन पहुंचाई जाती थी। अधिकारियों ने बताया कि एनसीबी ने उसे पहले 3 सितंबर को सांबा जिले में एक यात्री बस से 522 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया था। अधिकारियों ने कहा कि आरोपी के भागने की परिस्थितियों का पता लगाने और उन लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है, जिन्होंने कथित तौर पर उसे शरण दी और उसके भागने में मदद की। खुफिया एजेंसियों का मानना ​​है कि पाकिस्तान से देश में तस्करी कर लाए गए नशीले पदार्थों का एक बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

ब्रिक्स से भारत को क्या मिला? चिदंबरम के सवाल पर भाजपा का जवाब

नई दिल्ली। कांग्रेस के नेता पी. चिदंबरम के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा ने पूछा कि कांग्रेस ने आजादी के बाद से कूटनीति के क्षेत्र में क्या हासिल किया है। दरअसल, पी. चिदंबरम ने हाल ही में एक इंटरव्यू में सवाल उठाया था कि ब्रिक्स समूह से भारत को क्या फायदा मिलता है। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस समूह की हाल की बैठकों से कोई बड़ा नतीजा निकलता नहीं दिखा। उनके इस बयान पर भाजपा नेता और प्रवक्ता नलिन कोहली ने प्रतिक्रिया दी। नलिन कोहली ने कहा, “यह देखकर हैरानी होती है कि मिस्टर चिदंबरम और कांग्रेस पार्टी ने ऐसा बयान दिया है, खासकर तब जब भारत ब्रिक्स समिट जैसे महत्वपूर्ण आयोजन की मेजबानी कर रहा है, जहां कई राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रमुख आएंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी वन-टू-वन बैठकें भी होंगी।” भाजपा नेता ने कांग्रेस के कूटनीति को देखने के नजरिए पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सिर्फ तुरंत होने वाले फायदे के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “क्या कूटनीति को कांग्रेस पार्टी की तरह एक लेन-देन के रूप में देखा जाना चाहिए कि आपने मेरे लिए क्या किया? आप मेरे लिए क्या करेंगे? नलिन कोहली ने 1947 से 2014 तक कांग्रेस के कूटनीतिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अगर हम ठोस नतीजों की बात करें तो हम सवाल पूछ सकते हैं कि 1947 से लेकर 2014 तक कूटनीति पर कांग्रेस पार्टी का पूरा रवैया क्या था, जिसमें शर्म अल-शेख भी शामिल है, जहां पाकिस्तान को आतंक का पीड़ित बताया गया, जबकि वह आतंक फैलाने वाला है।” शर्म अल-शेख संयुक्त बयान 16 जुलाई 2009 को भारत और पाकिस्तान द्वारा जारी किया गया एक द्विपक्षीय दस्तावेज था। यह मिस्र में गुटनिरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बीच बैठक के बाद जारी किया गया था। भाजपा नेता ने कांग्रेस नेताओं पर पाकिस्तान जाकर राजनीतिक बयानबाजी करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी के नेता पाकिस्तान जाते हैं और कहते हैं, इनको हटाइए, हमको लाइए। इसलिए कांग्रेस पार्टी निश्चित रूप से खुद पर सवाल खड़े करती है जब वह तथाकथित ठोस नतीजों पर सवाल उठाती है और दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस पार्टी को बहुत कुछ जवाब देना है।” पी. चिदंबरम पर तंज कसते हुए नलिन कोहली ने कहा, “मिस्टर चिदंबरम का अजीब तर्क है। हमें कोई फायदा नहीं दिखता। कल को अगर कोई कहे कि उन्हें कांग्रेस पार्टी से कोई फायदा नहीं दिखता, तो क्या कांग्रेस पार्टी बंद हो जाएगी?” नलिन कोहली ने कहा, “मुझे लगता है कि मिस्टर चिदंबरम राजनीतिक अंक हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कोई मुद्दा ही नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार जो कुछ भी करती है, कांग्रेस उसकी आलोचना करती है, भले ही आलोचना करने का कोई आधार या कारण न हो।” ब्रिक्स में फिलहाल 11 प्रमुख उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, भारत, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। पूर्ण सदस्यों के अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम ब्रिक्स पार्टनर देशों के रूप में समूह में भाग लेते हैं।

गांधीनगर में निर्माणाधीन साइट पर स्लैब गिरने के बाद अमित शाह ने की गुजरात के सीएम से बात, कहा- ‘सभी मजदूर सुरक्षित’

गांधीनगर। केंद्रीय गृह मंत्री और गांधीनगर के सांसद अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि कुडासन इलाके में निर्माणाधीन साइट पर स्लैब गिरने की घटना में सभी घायल कर्मचारी सुरक्षित हैं और उनका इलाज चल रहा है। साथ ही, अमित शाह ने सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र में हुई इस घटना पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी से बात की। साथ ही, उन्होंने स्थानीय प्रशासन की ओर से शुरू किए गए बचाव और राहत कार्यों के बारे में जानकारी ली। शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मैंने गांधीनगर के कुडासन में एक निर्माणाधीन साइट पर स्लैब गिरने की घटना के बारे में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से बात की। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। सभी घायल मजदूर सुरक्षित हैं और उन्हें हर संभव इलाज दिया जा रहा है। मैं सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।” यह घटना बुधवार रात करीब 9.15 बजे कुडासन में बन रही कमर्शियल बिल्डिंग ‘बोस्की द एम्पायर’ में हुई, जहां निर्माण कार्य के दौरान स्लैब का एक हिस्सा गिर गया। स्लैब गिरने के बाद स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं व बचाव अभियान शुरू किया। उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने दुर्घटना स्थल और गांधीनगर सिविल अस्पताल का दौरा किया। बाद में उन्होंने बताया कि करीब 15 मजदूर घायल हुए थे, जिनमें से दो को छुट्टी दे दी गई और बाकी मजदूरों का इलाज चल रहा है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया भी सिविल अस्पताल पहुंचे और घायलों का हालचाल जाना। भाजपा विधायक रीता पटेल ने कहा कि स्थानीय निवासियों ने उन्हें बताया था कि साइट पर हर दिन आमतौर पर 20 से 22 मजदूर काम करते थे। उन्होंने कहा, “करीब 13 मजदूरों को बचाकर सिविल अस्पताल पहुंचाया गया और किसी की भी हालत गंभीर नहीं है।” अधिकारियों ने स्लैब गिरने की घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि जांच के नतीजों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।