नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट की तैयारियां पूरी; भारत मंडपम तैयार

नई दिल्ली। 18वां ब्रिक्स समिट नजदीक है और नई दिल्ली का भारत मंडपम इस बड़े इवेंट की मेजबानी के लिए तैयार हो रहा है। 12 से 13 सितंबर तक चलने वाले इस समिट में दुनिया भर के नेता और प्रतिनिधि एक साथ जुटेंगे।18वें ब्रिक्स समिट के आधिकारिक X हैंडल ने गुरुवार को कहा, “यह दिल्ली है। यह खास पल है। अपनी विरासत की चमक और भारत मंडपम की तैयारियों के साथ, राजधानी 18वें ब्रिक्स समिट के लिए आखिरी तैयारियां पूरी कर रही है।”इससे पहले X पर एक पोस्ट में कहा गया था, “दिल्ली 18वें ब्रिक्स समिट के लिए तैयार हो रही है। जल्द ही दुनिया एक मंच पर होगी।”वीकेंड पर होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स समिट की मेजबानी के लिए नई दिल्ली तैयार हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत इस बड़े इवेंट के लिए पूरी तरह तैयार है।पीएम मोदी ने X पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें ब्रिक्स समिट की जगह ‘भारत मंडपम’ को विश्व नेताओं के स्वागत के लिए सजा-धजा दिखाया गया। वीडियो के आखिर में लिखा था, “भारत ब्रिक्स 2026 के लिए तैयार हो रहा है”।ब्रिक्स के 2026 के अध्यक्ष के तौर पर, भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी करेगा। इसमें ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के नेताओं के साथ-साथ आउटरीच आमंत्रित सदस्य भी शामिल होंगे।X पर वीडियो शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, “ब्रिक्स 2026 के लिए सब तैयार है!”समिट में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और कई अन्य नेता भारतीय राजधानी आएंगे।भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम पर आधारित है। यह “मानवता सर्वोपरि” (Humanity First) की भावना पर आधारित पीएम मोदी के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इन क्षेत्रों के अलावा, नेता आम प्राथमिकताओं पर ब्रिक्स (BRICS) के अंदर सहयोग को मज़बूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे और आपसी महत्व के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने नज़रिए साझा करेंगे।ब्रिक्स में ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ब्रिक्स के सहयोगी देश हैं: बेलारूस, क्यूबा, ​​बोलीविया, कज़ाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम।भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। साल 2026 भी एक अहम पड़ाव होगा क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर लेगा।

दिग्विजय सिंह की ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर अयोध्या के संतों का विरोध, बोले-यह राजनीतिक यात्रा

अयोध्या। कांग्रेस सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर अयोध्या में सियासी और धार्मिक बयानबाजी तेज हो गई है। हनुमानगढ़ी और तपस्वी छावनी से जुड़े संतों ने यात्रा के ऐलान पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कदम बताया है। संतों का आरोप है कि कांग्रेस और दिग्विजय सिंह अब सनातन धर्म की बात करके राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने दिग्विजय सिंह की यात्रा पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक कहावत का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस और उसकी विचारधारा हमेशा से सनातन संस्कृति, हिंदू धर्म और हिंदुत्व की विरोधी रही है। ऐसे में अब ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालना उनकी राजनीति में बदलाव का संकेत नहीं, बल्कि जनता को भ्रमित करने की कोशिश है। वहीं, तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राम मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों राम मंदिर से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के मामले को इंडी अलायंस ने जिस तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, उस पर कानूनी कार्रवाई हो चुकी है। उनके मुताबिक, मामले में दोषी लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है और मंदिर का पैसा वापस लाकर जमा कराया गया है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस मुद्दे को लेकर सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य महाराज ने भी यात्रा को लेकर दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का अपना स्वाभिमान ही नहीं बचा है, उनके द्वारा ‘स्वाभिमान यात्रा’ निकाला जाना समाज के साथ धोखा है। स्वामी नरेंद्रचार्य जी महाराज ने यात्रा को सीधे तौर पर राजनीतिक मुद्दा करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर यह यात्रा राम जन्मभूमि के उद्घाटन या धार्मिक आयोजन के सिलसिले में होती, तो अयोध्या के लोग इसका स्वागत करते। लेकिन दान की कथित चोरी के मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाकर यात्रा निकालने को संत समाज स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह की यात्रा का उद्देश्य 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर राजनीतिक जमीन तैयार करना है। स्वामी नरेंद्रचार्य ने कहा कि दिग्विजय सिंह अपने राजनीतिक हितों के लिए प्रचार कर रहे हैं और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सफलता की संभावनाएं बेहद सीमित हैं। बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने धर्म के नाम पर कथित लूट और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ के खिलाफ ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। यह यात्रा 20 अक्टूबर से उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी।

बिहार बाढ़ पर छलका अक्षरा सिंह का दर्द, कहा- जितना हो सके मदद के लिए आगे आइए

मुंबई। बिहार में लगातार भारी बारिश और नदियों के उफान ने हालात को गंभीर बना दिया है। राज्य के कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह की आपदा को देखते हुए अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने चिंता जताई है। अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने सभी से बाढ़ प्रभावितों की मदद की अपील की है। उनका मानना है कि अगर ऐसी विपत्ति के समय सभी लोग बिहार के साथ खड़े होंगे तो उन्हें हौसला और मदद मिलेगी। अभिनेत्री ने अपनी बात शुरू करने से पहले नेपाल और असम त्रासदी को याद किया। वीडियो में वे कहती हैं, “नमस्कार, मैं हूं आप सबकी अक्षरा सिंह। पहले असम, फिर नेपाल और अब हमारी बिहार। लगातार बाढ़ की तस्वीरें देखकर मन बहुत व्यथित होता है। कई घर डूबे और परिवार बेघर हो गए है। कई लोग आज भी सुरक्षित जगह और मदद का इंतजार कर रहे हैं। मैं बिहार की बेटी जितनी संभव हो सके, उतनी मदद करने के लिए आगे आना चाहती हूं और ये मेरी जिम्मेदारी भी है।” अक्षरा सिंह ने कहा, “कई घरों में पानी है, तो कई परिवार सुरक्षित जगह पर पहुंचने के लिए अभी कोशिश कर रहे हैं। मैं आप सभी से भी निवेदन करना चाहती हूं कि आप भी आगे आइए और अपने स्तर पर जितना हो सके मदद करें, लेकिन वेरिफाइड जानकारी साझा कीजिए और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाइए असम, नेपाल और बिहार के हर प्रभावित परिवार के लिए मेरी प्रार्थना है। अक्षरा सिंह ने हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हम साथ रहेंगे तो इस मुश्किल घड़ी से भी निकल जाएंगे। मुश्किल बड़ी है, लेकिन बिहार का हौसला उससे भी बड़ा है।

अमेरिका ने चीन जाने वाले नागर‍िकों को जारी की चेतावनी, मनमानी गिरफ्तारी और एग्जिट बैन का खतरा

वॉशिंगटन। अमेरिका ने चीन के लिए अपनी यात्रा सलाह (ट्रैवल एडवाइजरी) को अपडेट किया है। इसमें अमेरिकी नागरिकों को मनमानी कानूनी कार्रवाई, निगरानी, देश छोड़ने पर रोक और बिना उचित कारण गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने के जोखिम को लेकर चेतावनी दी गई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चीन के लिए अपनी ‘लेवल-2’ एडवाइजरी बरकरार रखी है और अमेरिकी नागरिकों से अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है। यह एडवाइजरी चार सितंबर को जारी की गई थी और इस सप्ताह बंधक मामलों के लिए राष्ट्रपति के विशेष दूत के कार्यालय की ओर से सार्वजनिक की गई। एडवाइजरी में कहा गया है कि अमेरिकी नागरिकों को ‘स्थानीय कानूनों के मनमाने इस्तेमाल, कानून के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के बिना लगाए जाने वाले एग्जिट बैन तथा अनुचित गिरफ्तारी या हिरासत के जोखिम’ के कारण अधिक सतर्क रहना चाहिए। विदेश विभाग ने कहा कि चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा, जासूसी-रोधी और डेटा सुरक्षा से जुड़े कानून अधिकारियों को विदेशी नागरिकों से पूछताछ करने या उन्हें हिरासत में लेने के व्यापक अधिकार देते हैं। विभाग के अनुसार, इससे सामान्य कारोबारी कामकाज, शोध कार्य या सार्वजनिक रूप से अपनी राय व्यक्त करने वाले अमेरिकी नागरिक भी जोखिम में पड़ सकते हैं। एडवाइजरी में कहा गया है कि कुछ लोगों पर विशेष रूप से ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। इनमें चीनी मूल के अमेरिकी नागरिक, व्यापारिक विवादों में शामिल लोग और चीन में विवादों का सामना कर रही अमेरिकी कंपनियों से जुड़े लोग शामिल हैं। चेतावनी में उन यात्रियों का भी जिक्र किया गया है जिनका वर्तमान या पूर्व संबंध अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों, सेना, खुफिया एजेंसियों या संघीय सरकार से रहा हो। अमेरिकी सरकार की ओर से वित्तपोषित कार्यक्रमों के तहत यात्रा करने वाले लोगों को भी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी नागरिकों को आरोपों की जानकारी दिए बिना भी हिरासत में लिया जा सकता है और उन्हें तुरंत वाणिज्य दूतावास सहायता भी नहीं मिल सकती। विभाग ने कहा कि पत्रकारों, शिक्षाविदों, कारोबारी लोगों और पूर्व सरकारी अधिकारियों से पूछताछ, हिरासत या निष्कासन के मामले सामने आए हैं। एडवाइजरी के अनुसार, चीन ने कुछ मामलों में एग्जिट बैन का इस्तेमाल लोगों को जांच में सहयोग करने, नागरिक विवादों को चीनी नागरिकों के पक्ष में सुलझाने या उनके रिश्तेदारों और परिचितों पर चीन लौटने का दबाव बनाने के लिए किया है। इसमें कहा गया है कि कुछ मामलों में ऐसे प्रतिबंधों का इस्तेमाल विदेशी सरकारों पर दबाव बनाने के लिए भी किया गया है। यात्रियों को अक्सर तब तक पता नहीं चलता कि उन पर ‘एग्जिट बैन’ लगा है, जब तक वे चीन छोड़ने की कोशिश नहीं करते। एडवाइजरी में कहा गया है, “एग्जिट बैन को अदालत में चुनौती देने के लिए कोई प्रभावी कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध नहीं भी हो सकती।” अमेरिकी विदेश विभाग ने डिजिटल निगरानी को लेकर भी चेतावनी दी है। विभाग ने कहा कि अमेरिकी नागरिकों को यह मानकर चलना चाहिए कि चीन की सुरक्षा एजेंसियां चीन से भेजे या प्राप्त किए जाने वाले ईमेल, टेक्स्ट संदेश और सोशल मीडिया पोस्ट पढ़ सकती हैं।

दिल्ली में बनेगी खुद की आपदा राहत फोर्स एसडीईआरएफ, सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली। दिल्ली में किसी भी आपदा से निपटने के लिए अब अपना खुद का त्वरित और सक्षम तंत्र होगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली में राज्य आपदा आपातकालीन राहत बल (एसडीईआरएफ) के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सीएमओ दिल्ली ने ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि दिल्ली सचिवालय में एनडीआरएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात हुई। इस दौरान अत्याधुनिक एसडीईआरएफ टीम को लेकर जरूरी इनपुट लिए गए। सरकार का कहना है कि किसी भी आपदा की स्थिति में दिल्ली के पास अपना प्रशिक्षित, सक्षम और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र हो, इस दिशा में सरकार निर्णायक रूप से आगे बढ़ रही है। साथ ही मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद चलाए गए राहत और बचाव अभियान के दौरान एनडीआरएफ की टीम ने जिस तत्परता और समन्वय के साथ काम किया, उसके लिए समस्त दिल्लीवासियों की ओर से पूरी टीम का आभार भी व्यक्त किया। बता दें कि इससे पहले 8 सितंबर को भी सीएमओ दिल्ली ने सत्य निकेतन हादसे को लेकर पोस्ट किया था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर एमसीडी को हादसा स्थल से सटी जर्जर इमारत को जन सुरक्षा के हित में गिराने के निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया था कि इमारत के अंदर छात्रों का सामान दिल्ली फायर सर्विस के कर्मियों द्वारा व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित निकाला जा रहा है। सभी छात्रों और स्थानीय निवासियों से अधिकारियों का सहयोग करने का अनुरोध किया गया था। उसी दिन 8 सितंबर को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एम्स जाकर सत्य निकेतन हादसे में घायल छात्रों से मिली थीं और उनके इलाज की स्थिति की जानकारी ली थी। सीएम रेखा गुप्ता ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा था, “एम्स जाकर सत्य निकेतन हादसे में घायल छात्रों से मिली और उनके उपचार की स्थिति की जानकारी ली। उनके परिजनों से भी बातचीत कर उन्हें आश्वस्त किया कि एम्स के चिकित्सकों द्वारा सभी घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार, दुर्घटना में घायल हुए सभी छात्रों के उपचार का पूरा खर्च वहन करेगी और उन्हें हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।” अब इसी कड़ी में दिल्ली सरकार ने अपनी खुद की आपदा राहत फोर्स बनाने की तैयारी तेज कर दी है ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

मतदाता सूची में 3 अफगान नागरिकों के नाम पर झामुमो ने केंद्र को घेरा, कहा-गृह मंत्रालय दे जवाब

रांची। झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान वोटर लिस्ट में तीन अफगान नागरिकों के नाम सामने आने के बाद सियासत तेज हो गई है। सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय को कटघरे में खड़ा किया है। रांची में झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने वोटर लिस्ट में तीन अफगान नागरिकों के नाम शामिल होने के मामले पर कहा, “सबसे पहले, गृह मंत्रालय से यह पूछा जाना चाहिए कि अफगान नागरिक यहां कैसे रह रहे थे, किसकी इजाजत से रह रहे थे और क्या उनके वीजा वैध थे या नहीं। इसकी जांच कौन करेगा? क्या हेमंत सोरेन इसकी जांच करेंगे? कौन देखेगा कि कोई विदेशी नागरिक कहां से आ रहा है, कहां जा रहा है, किसकी इजाजत से जा रहा है और उनकी गतिविधियों का मकसद क्या है? इन सभी चीजों पर नजर रखने के लिए एक विभाग है- गृह विभाग, जो विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर काम करता है। यह कैसे हुआ? सबसे पहले गृह मंत्रालय को यह साफ करना चाहिए कि वे लोग किसकी इजाजत से आए थे।” जेपीएससी और एएसएससी मामले को लेकर मनोज पांडे ने पूर्व की भाजपा सरकारों पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “उस समय, 2000 से 2023 के बीच जो रिपोर्टें आईं—जब बाबूलाल मरांडी और फिर अर्जुन मुंडा सत्ता में थे- उनसे यह साबित हो चुका था कि नियुक्तियां पैसे और रसूख के आधार पर की गई थीं। कितना पैसा लिया गया था? उस समय ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि 1 करोड़ रुपये लिए गए थे। आज, कम से कम हमारी राज्य एजेंसी ने इन बातों का खुलासा किया है। अब सब कुछ सामने आ रहा है। ये तथ्य सार्वजनिक हो रहे हैं और पता चल रहा है कि इसमें कौन-कौन शामिल था। उस समय राजनीतिक दखलंदाजी थी और ऊंचे पदों पर बैठे लोग इसमें शामिल थे। आज इसमें किसी राजनेता का नाम सामने नहीं आया है। किसी राजनेता ने अपने भाई या भतीजे को नियुक्त नहीं करवाया है।” गुजरात की शेल पार्टियों को मिल रहे हजारों करोड़ के चंदे पर जेएमएम प्रवक्ता ने कहा, “सिर्फ जांच से ही पता चलेगा कि वे क्या कर रहे हैं। सीबीआई क्या कर रही है? आयकर विभाग क्या कर रहा है? यह पैसा कहां से आता है? इसे किस मकसद से भेजा जाता है? इसका स्रोत क्या है? यह बात सार्वजनिक होनी चाहिए। इस पर एक श्वेत पत्र जारी किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार क्या कर रही है? चुनाव आयोग क्या कर रहा है? क्या चुनाव आयोग सिर्फ झारखंड में आदिवासियों के नाम हटाने के लिए ही आगे आएगा?” मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने के ऐलान पर उन्होंने कहा, “सनातन को मजबूत करना है तो इस तरह की कवायद करनी होगी और जो सनातन विरोधी लोग हैं उनको एक्सपोज करना होगा। जो भी राजनीतिक दल खास करके यूपी में जो सक्रिय राजनीतिक दल हैं उनको इस तरह के कार्यक्रम करने चाहिए जिससे यह चोर लोग जिन लोगों ने भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी नहीं बख्शा, उनके घर में भी चोरी कर ली, उनके चरण पादुका लेकर भाग गए, वैसे लोगों को जनता के बीच एक्सपोज करने की आवश्यकता है। इस तरह के कार्यक्रम और दलों को भी करना चाहिए।

दिल्ली की कोर्ट ने निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड कोल ब्लॉक मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को दी मंजूरी

नई दिल्ली। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड कोल ब्लॉक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित और सांसद मणिक्कम टैगोर ने विरोध याचिकाओं के जरिए इस क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी थी। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने एक सितंबर को कांग्रेस नेताओं संदीप दीक्षित और मणिक्कम टैगोर की ओर से दायर विरोध याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया। साथ ही, सीबीआई की क्लोजर के खिलाफ दायर विरोध याचिका को खारिज कर दिया गया। संदीप दीक्षित ने सीबीआई की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि जांच में अवैधता के प्रमुख पहलुओं की जांच पर सीबीआई ने ध्यान नहीं दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में सीबीआई की ओर से एडिशनल लीगल एडवाइजर संजय कुमार पेश हुए। याचिकाकर्ताओं के वकील भी व्यक्तिगत रूप से और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद थे। बता दें कि सितंबर 2012 में, तत्कालीन सांसद संदीप दीक्षित और छह अन्य सांसदों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें 1993 और 2005 के बीच किए गए कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। बाद में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने मामले को सीबीआई को सौंप दिया, जिसके परिणामस्वरूप प्रारंभिक जांच हुई और बाद में निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड और आरपीजी इंडस्ट्रीज से संबंधित मामलों सहित कई कंपनियों और आवंटनों से जुड़े एफआईआर दर्ज किए गए।

पाकिस्तान जूनियर टीम को इंग्लैंड में एंटी-इमिग्रेंट प्रोटेस्टर्स ने समझ लिया ‘शरण मांगने वाला’ ग्रुप

नई दिल्ली। इंग्लैंड के पोर्ट्समाउथ के एक होटल के बाहर एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। पाकिस्तान अंडर-19 टीम इंग्लैंड के अपने मल्टी-फॉर्मेट टूर के दौरान होटल में रुकी थी। मास्क पहने एंटी-इमिग्रेंट प्रोटेस्टर्स (आप्रवासी-विरोधी प्रदर्शनकारी) के एक ग्रुप ने टीम को ‘आश्रय की तलाश’ वाला ग्रुप समझ लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, मास्क पहने प्रदर्शनकारियों का एक ग्रुप पोर्ट्समाउथ के एक फोर-स्टार होटल के बाहर इकट्ठा हो गया, जब खबर आई कि असाइलम सीकर्स (आश्रय की तलाश) के एक ग्रुप को वहां ले जाया गया है। रिफॉर्म काउंसलर जॉर्ज मैडविक, जिन्हें स्टाफ और जमा हुई भीड़ के बीच-बचाव करने के लिए होटल बुलाया गया था, ने कहा कि यह एक बहुत बुरी घटना थी। यह घटना रविवार शाम को पोर्ट्समाउथ में सैकड़ों लोगों, जिनमें से कई ने मास्क पहना हुआ था, और पुलिस के बीच झड़प के बाद हुई। इस समय फ्रांस से असाइलम सीकर्स को ले जा रही एक छोटी नाव यूके के कोस्टलाइन पर पहुंची थी। मैडविक ने कहा कि ग्रुप होटल के बाहर तब इकट्ठा हुआ जब ऐसी खबरें आईं कि होटल में करीब 40 आदमी आए थे, जो अंग्रेज नहीं लग रहे थे, और उन्हें ले जाने वाली कोच उसी कंपनी की थी, जो नाव से आए शरणार्थियों को ले गई थी। यह बहुत बुरी घटना तब काबू में आई जब मैडविक ने होटल मैनेजर से बात की, जिन्होंने बताया कि होटल पाकिस्तान की एक अंडर-21 क्रिकेट टीम के सदस्यों की मेजबानी कर रहा था, जो साउथ कोस्ट का टूर कर रही थी और मैरियट को अपने बेस के तौर पर इस्तेमाल कर रही थी। रिपोर्ट में मैडविक के हवाले से कहा गया, “मैंने टीम के कोच से भी बात की, जो बहुत समझदार थे। मैं विरोध करने वालों के पास गया और उनसे कहा, ‘तुम गलत समझ रहे हो दोस्तों, यह एक क्रिकेट क्लब है।’ वे कुछ ही मिनटों में चले गए।” इस घटना के बाद से, इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने टूर करने वाले ग्रुप के बारे में जानने के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड से संपर्क साधा है। टीम के बाकी टूर के सुरक्षा इंतजाम की समीक्षा की जा रही है।

एनसीडब्ल्यू वर्कशॉप में हिंदी थोपने का आरोप, सीएम सतीशन ने कहा-यह निंदनीय

नई दिल्ली। हरियाणा के फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की तरफ से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप में भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। केरल से आई महिला विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हिंदी के इस्तेमाल और अनुवाद की सुविधा न होने के विरोध में वर्कशॉप से वॉकआउट कर दिया था। इस घटना पर केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गुरुवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि एनसीडब्ल्यू वर्कशॉप में केरल की महिला विधायकों के साथ किया गया व्यवहार बेहद निंदनीय है। सीएम सतीशन ने लिखा, “राष्ट्रीय सम्मेलन में हिंदी थोपना और गैर-हिंदी भाषी राज्यों के प्रतिनिधियों को डराना हमारे संवैधानिक समझौते की जड़ पर हमला है। हमारे संस्थापकों ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जिसकी ताकत एकरूपता से नहीं, बल्कि विविधता की एकता से आएगी। एक ऐसा संघ जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और पहचान राष्ट्रीय ताने-बाने को कमजोर नहीं, बल्कि समृद्ध करती हैं।” उन्होंने कहा कि भारत विविध भाषाई परंपराओं का संघ है, न कि एक एकल इकाई। आपसी सम्मान, समायोजन और संवैधानिक समानता, न कि भाषाई थोपना, हमारे राष्ट्रीय मंचों को परिभाषित करना चाहिए। हमारी विविधता भारतीय एकता के लिए चुनौती नहीं है बल्कि यही इसकी नींव है। इससे पहले 8 सितंबर को कांग्रेस ने भी एनसीडब्ल्यू को लेकर सवाल उठाए थे। कांग्रेस ने केरल सरकार के मंत्री बिंदु कृष्णा का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था कि हमें 73वें और 74वें संशोधन के जरिए स्थानीय निकायों में आरक्षण मिला। अब हम राज्य विधानसभाओं और संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण का इंतजार कर रहे हैं। कानून पास हो चुका है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुआ है। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने क्या हस्तक्षेप किया है? कांग्रेस ने कहा था कि राष्ट्रीय महिला आयोग भाजपा का प्रॉक्सी नहीं है। इसे पूरे भारत में महिलाओं के उत्थान के लिए खड़ा होना चाहिए। बिंदु कृष्णा केरल सरकार में महिला एवं बाल विकास, पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री हैं।

गृह मंत्री के रूप में गोविंद बल्लभ पंत ने भाषाई संघर्ष का समाधान कर हिंदी को दिलाया सम्मान : सीएम योगी

लखनऊ। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देश के पूर्व गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास में योगदान का उल्लेख करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन किया। सीएम योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत जी की पावन जयंती है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता की ओर से वह पंत जी की स्मृतियों को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत महान अधिवक्ता होने के साथ-साथ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वर्ष 1925 में काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों के खिलाफ जो अभियोग दर्ज किया था, उसके खिलाफ क्रांतिकारियों की पैरवी मजबूती के साथ करने वाले महान नेताओं में पंडित गोविंद बल्लभ पंत प्रमुख थे। उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1937 में पंत जी को यूपी के प्रीमियर के रूप में चुना गया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने पद से इस्तीफा देकर स्वाधीनता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखी। भारत छोड़ो आंदोलन समेत समय-समय पर हुए स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न बड़े आंदोलनों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश की आजादी के साथ पंडित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। ऐसे में इतने बड़े राज्य की व्यवस्था को सुशासन के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने के साथ ही आर्थिक उन्नयन और समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए उन्होंने काम किया। पंत जी ने अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए। उनके द्वारा प्रस्तुत लैंड रिफॉर्म मॉडल भी महत्वपूर्ण रहा। सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1954 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत देश के गृह मंत्री बने। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश के भीतर चल रहे भाषाई संघर्ष और समाज में नए विभाजन की नींव डालने के प्रयासों का सूझ-बूझ के साथ समाधान निकाला। हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।