राजस्थान निकाय चुनाव: पहले चरण में अर्नोद में पड़े सबसे अधिक वोट, दूसरे चरण की वोटिंग कल

जयपुर। राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए दूसरे चरण का मतदान शुक्रवार को होगा। राज्य चुनाव आयोग ‘एक राज्य, एक चुनाव’ पहल के तहत चुनावों के अगले चरण को आगे बढ़ा रहा है। 9 सितंबर को हुए पहले चरण का मतदान 162 शहरी स्थानीय निकायों में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें कुल मतदान प्रतिशत 76.41 प्रतिशत रहा। राजस्थान में 309 शहरी स्थानीय निकायों – जिनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं – के चुनाव दो चरणों में कराए जा रहे हैं। पहले चरण में कुल 5,393 वार्डों में मतदान हुआ। कुल 57,52,280 पंजीकृत मतदाताओं में से 43,95,488 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पहले चरण में 4 नगर निगम, 27 नगर परिषद और 131 नगरपालिकाएं शामिल थीं। पहले चरण के लिए कुल 7,683 मतदान केंद्र बनाए गए थे और चुनावी मैदान में 20,623 उम्मीदवार थे। राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि सभी 162 शहरी स्थानीय निकायों में सदस्य पदों के लिए मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। पहले चरण में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत प्रतापगढ़ की अर्नोद नगरपालिका में दर्ज किया गया, जहां मतदान प्रतिशत 91.98 प्रतिशत तक पहुंच गया। सबसे कम मतदान प्रतिशत भीलवाड़ा नगर निगम में दर्ज किया गया। नगर निगम में 70 वार्ड और कुल 2,96,682 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से 1,89,390 मतदाताओं ने वोट डाला, जिससे मतदान प्रतिशत 63.84 प्रतिशत रहा। पहले चरण में 73 नए गठित शहरी स्थानीय निकाय भी शामिल थे, जहां पहली बार चुनाव हो रहे थे। बाकी 89 शहरी स्थानीय निकायों में पहले भी आम चुनाव हो चुके थे। इन 89 निकायों में हुए पिछले आम चुनावों में मतदान प्रतिशत 74.76 प्रतिशत था। 2026 के चुनावों के पहले चरण में 76.41 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो इन 89 शहरी स्थानीय निकायों में पिछले आम चुनावों में हुए मतदान से अधिक है। पहले चरण में मतदान संपन्न होने के बाद अब 11 सितंबर को होनी वाली वोटिंग पर चुनाव आयोग का फोकस है। राज्य चुनाव आयोग ने दूसरे चरण की तैयारियां पूरी कर ली हैं और जिन शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव होने हैं, वहां मतदान के इंतजाम किए जा रहे हैं।

समरकंद में राघव चड्ढा ने उठाया महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों का मुद्दा, बोले-सिर्फ वोट नहीं, शासन में भी मिले अधिकार

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित 12वें इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (आईपीयू) सम्मेलन में भारत की ओर से महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सम्मेलन के एक सत्र में उन्होंने “महिलाओं के राजनीतिक अधिकार सुनिश्चित करना” विषय पर भारत का पक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल चुनाव में मतदान करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें निर्णय लेने और शासन चलाने की वास्तविक शक्ति भी मिलनी चाहिए। राघव चड्ढा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत महिलाओं के विकास से आगे बढ़कर ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगातार मजबूत हुई है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका पहले के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावी हुई है। उन्होंने भारत में महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में महिला मतदाताओं की भागीदारी ने रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है। इसके साथ ही, जमीनी स्तर पर करीब 14.5 लाख महिलाएं निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने इसे भारत के लोकतंत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। चड्ढा ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे संवैधानिक प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में विधायिकाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की संवैधानिक दिशा तय की गई है। उनके मुताबिक, महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति भी मिलनी चाहिए। उन्होंने सम्मेलन में भारत का संदेश स्पष्ट शब्दों में रखते हुए कहा कि महिलाओं से केवल वोट देने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें शासन करने में सक्षम बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी महिला को सिर्फ राजनीतिक सीट देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पद से जुड़े अधिकार और निर्णय लेने की शक्ति भी उन्हें मिलनी चाहिए। राघव चड्ढा ने कहा कि महिला सशक्तीकरण को केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व को स्थायी तथा मजबूत आधार मिले। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को लोकतांत्रिक संस्थाओं में स्थान देने के साथ-साथ उन्हें अधिकार, जिम्मेदारी और निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी सुनिश्चित करनी होगी। समरकंद में आयोजित आईपीयू सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि राजनीतिक और संसदीय मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में भारत की ओर से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाते हुए चड्ढा ने महिला नेतृत्व को लोकतांत्रिक विकास का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करना लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें शासन और नीति निर्माण की प्रक्रिया में प्रभावी नेतृत्व की भूमिका दी जानी चाहिए।

एप्पल का पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन ‘आईफोन डुओ’ 2.99 लाख रुपए की कीमत पर भारत में हुआ लॉन्च

नई दिल्ली। अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल ने ‘आईफोन डुओ’ लॉन्च करके फोल्डेबल स्मार्टफोन मार्केट में एंट्री कर दी और भारत में इसकी कीमत 2,99,900 रुपए निर्धारित की गई है। इसके जरिए कंपनी का मकसद अपने प्रीमियम आईफोन इकोसिस्टम के साथ बड़ी डिस्प्ले देना और ऐसे यूजर्स को आकर्षित करना है जो कंटेंट देखने, मल्टीटास्किंग करने और कुछ नया बनाने के लिए नए तरीके तलाश रहे हैं। 23 अक्टूबर से उपलब्ध होने वाले इस डिवाइस में 7.6-इंच की इनर डिस्प्ले और 5.4-इंच की आउटर डिस्प्ले दी गई है। इसके अलावा, दोनों स्क्रीन का आस्पेक्ट रेश्यो एक जैसा है, जिससे कंटेंट को दोनों के बीच सही अनुपात में एडजस्ट किया जा सकता है। कंपनी के अनुसार, अंदर वाली डिस्प्ले में नैनो-टेक्सचर फिनिश है, जो चमक को कम करती है और क्रीज को कम दिखने देती है। साथ ही, आईफोन डुओ में एप्पल की ए20 प्रो चिप लगी है और इसमें एडवांस्ड थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम, डुअल-बैटरी आर्किटेक्चर और नया कैमरा सिस्टम भी शामिल है। हालांकि, कंपनी का दावा है कि इनर डिस्प्ले पर 31 घंटे तक और आउटर डिस्प्ले पर 44 घंटे तक वीडियो प्लेबैक किया जा सकता है। इस डिवाइस में फोल्डेबल के लिए खास कैमरा अनुभव भी दिए गए हैं, जैसे स्मार्ट टेक, डुओ प्रीव्यू और डुओ फेसटाइम। वहीं, आईओएस 27 में स्प्लिट व्यू और ऐप्स के पेयर को सेव करने जैसे मल्टीटास्किंग फीचर्स जोड़े गए हैं। एप्पल के सीईओ जॉन टर्नस ने कहा, “आईफोन डुओ, ओरिजिनल आईफोन के बाद से आईफोन में सबसे बड़ा बदलाव है। पूरी तरह से नए डिजाइन और आसान अनुभव के साथ, यह दिखाता है कि जब हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को एक साथ बनाया जाता है तो क्या-क्या मुमकिन है। साथ ही, यह फोल्डेबल फोन के इस्तेमाल के तरीके को भी नए सिरे से परिभाषित करता है।” साइबरमीडिया रिसर्च (सीएमआर) के इंडस्ट्री इंटेलिजेंस ग्रुप के प्रमुख प्रभु राम ने कहा कि इस डिवाइस से शॉर्ट-टर्म में ज्यादा बिक्री होने के बजाय, प्रो सीरीज से ऊपर एक ‘अल्ट्रा-प्रीमियम’ कैटेगरी बनने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यूएस की कीमत के मुकाबले भारत में ज्यादा कीमत की वजह मेमोरी की लागत में बढ़ोतरी, रुपए की गिरती कीमत, कस्टम ड्यूटी, लोकल टैक्स स्ट्रक्चर और चैनल मार्जिन है। उन्होंने कहा, “हालांकि शॉर्ट-टर्म में शिपमेंट कम रहेगी और सप्लाई की दिक्कतें होंगी, लेकिन डुओ, प्रो मैक्स के मौजूदा यूजर्स को अपनी ओर खींचने के लिए अच्छी स्थिति में है।” आईफोन डुओ ‘स्टार व्हाइट’ और ‘नाइट स्काई’ रंगों में उपलब्ध होगा और इसमें 256जीबी से लेकर 2टीबी तक के स्टोरेज ऑप्शन होंगे। प्री-ऑर्डर 16 अक्टूबर से शुरू होंगे।

रक्षा साझेदारी का अहम पड़ाव’: जापानी लड़ाकू विमान के भारत पहुंचने पर बोले राजनाथ सिंह

कोलंबो। जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (जेएएसडीएफ) का फाइटर एयरक्राफ्ट पहली बार भारत पहुंचा है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने खुशी जताते हुए इसे दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी के लिए एक “महत्वपूर्ण मील का पत्थर” बताया। सिंह ने कहा कि ‘एक्सरसाइज वीर गार्डियन’ भारत और जापान के बीच तालमेल को और मजबूत करते हैं। रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भारत-जापान रक्षा साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर! जेएएसडीएफ फाइटर एयरक्राफ्ट की भारत की पहली यात्रा इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता के प्रति हमारे बढ़ते भरोसे और साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। पिछले महीने नई दिल्ली में हमारी बहुत ही सार्थक बातचीत के बाद, ‘एक्सरसाइज वीर गार्डियन’ जैसी आपसी यात्राओं का आदान-प्रदान इस तालमेल को और बल प्रदान करता है।” उन्होंने यह बयान जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी द्वारा साझा की गई एक पोस्ट के जवाब में दिया, जिसमें उन्होंने जेएएसडीएफ फाइटर एयरक्राफ्ट की भारत की पहली यात्रा का जिक्र किया था। कोइजुमी ने कहा कि भारतीय फाइटर एयरक्राफ्ट की जापान यात्रा के तीन साल बाद जेएएसडीएफ फाइटर एयरक्राफ्ट की भारत की पहली यात्रा, फाइटर एयरक्राफ्ट की आपसी यात्राओं के साकार होने का प्रतीक है। एक्स पर एक पोस्ट में कोइजुमी ने लिखा, “एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट ने पहली बार भारत का दौरा किया। तीन साल पहले भारतीय वायु सेना के अपने फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ जापान की पहली यात्रा के बाद, यह फाइटर एयरक्राफ्ट की आपसी यात्राओं के साकार होने का प्रतीक है।” उन्होंने आगे कहा, “पिछले महीने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ हुई बैठक में भी, हमने इस बात पर सहमति जताई थी कि यह ट्रेनिंग जापान-भारत रक्षा सहयोग को गहरा करने का प्रतीक है। मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि फ्रंटलाइन यूनिट्स के बीच आदान-प्रदान और संयुक्त ट्रेनिंग के माध्यम से जापान-भारत रक्षा सहयोग लगातार विकसित हो रहा है।” ‘एक्सरसाइज वीर गार्डियन 2026’ भारतीय वायु सेना और जापानी एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स (जेएएसडीएफ) के बीच 9-22 सितंबर तक जोधपुर में आयोजित की जा रही है। जेएएसडीएफ का एफ-2 ‘एक्सरसाइज वीर गार्डियन 2026’ में भाग लेने के लिए जोधपुर पहुंचा। भारतीय वायुसेना इस अभ्यास में कई फ्रंटलाइन कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के साथ भाग ले रही है, जिनमें स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस, एसयू-30 एमकेI और राफेल शामिल हैं। 14 दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास के दौरान, इसमें शामिल वायु सेना के जवान एडवांस्ड ऑपरेशनल मिशन को अंजाम देंगे और बड़े पैमाने पर पेशेवर बातचीत करेंगे। रक्षा मंत्रालय के बयान के मुताबिक, इस कार्यक्रम में मिशन की योजना बनाने से जुड़ी बैठकें, विषय के जानकारों का आदान-प्रदान और इंजीनियरिंग व एयरोस्पेस सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर कर्मियों के बीच बातचीत शामिल है, जिससे दोनों वायु सेनाओं के बीच गहरा ऑपरेशनल तालमेल बनेगा। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “अभ्यास ‘वीर गार्डियन-26’ टैक्टिकल कुशलता और एयरोस्पेस ऑपरेशनल तालमेल को बेहतर बनाकर भारत और जापान के बीच गहरी होती रणनीतिक साझेदारी को दिखाता है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच दोस्ती और रणनीतिक सहयोग के पुराने रिश्तों को और मजबूत करता है।

‘आकाश आनंद अब बसपा से पूरी तरह आजाद’, मायावती ने अपने भतीजे को किया पार्टी से निष्कासित

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के बाद अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर घोषणा की कि आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह से मुक्त किया गया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “आकाश आनंद को पार्टी और मूवमेंट के वास्तविक हित व इससे जुड़े अपने करियर की परवाह कम, जबकि रिश्ते-नातों आदि का मोह अधिक है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आकाश आनंद डबल माइंड होकर फिर बीएसपी पार्टी और मूवमेंट का भला कैसे कर सकते हैं?” मायावती ने लिखा, “पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें (आकाश आनंद) पहले दिनांक 3 सितंबर को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था। उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से आजाद कर दिया जाए। अतः आकाश आनंद पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं। अब इनको पार्टी से पूरे तौर से मुक्त कर दिया गया है।” मायावती ने लिखा, “आकाश आनंद की ओर से भी अपने करियर से अधिक अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव कायम है कि उन्होंने बीएसपी प्रमुख के सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा। हालांकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिए था।” उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “वह (आकाश आनंद) बीएसपी प्रमुख के ‘एक्स’ पर पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद दोनों को पार्टी और मूवमेंट की सफलता में कम व अपने निजी और पारिवारिक स्वार्थ का अधिक मोह है।” इसके साथ ही, मायावती ने आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के फैसले को सही कदम बताया। उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “अगर यह फैसला वह (अशोक सिद्धार्थ) काफी पहले ही ले लेते तो बीएसपी, बहुजन समाज व बहुजन मूवमेंट व उनके दामाद आकाश आनंद को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता। और न ही मुझे विधानसभा आम चुनाव और खासकर उत्तर प्रदेश में 5वीं बार सरकार बनाने की जबरदस्त तैयारियों के बीच पार्टी व मूवमेंट के व्यापक हित के मद्देनजर इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की जरूरत पड़ती।” बसपा सुप्रीमो ने आगे लिखा, “अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ‘देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है। किंतु अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद आकाश आनंद के उज्जवल भविष्य के साथ ही बीएसपी पार्टी और इसके अंबेडकरवादी बहुजन मूवमेंट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिंता होती, तो वे बिना देरी किए फौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते। इससे आकाश आनंद की पार्टी और मूवमेंट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किंतु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट और अभिलाषा कम नहीं हुई है, बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरकरार है।” पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के नाम संदेश में मायावती ने कहा, “बीएसपी के सभी लोगों को विरोधियों के ‘साम, दाम, दंड, भेद’ आदि सभी प्रकार के हथकंडों का डट कर सामना करते हुए, खासकर उत्तर प्रदेश में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की जबरदस्त कानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहना है, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।

दिल्ली-एनसीआर में 11 से 16 सितंबर तक बारिश के आसार, तापमान में आएगी गिरावट

नई दिल्ली। मानसून की गतिविधियों में लगातार हो रहे बदलाव के बीच दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक एनसीआर में बादल छाए रह सकते हैं। वही, 11 से 16 सितंबर के बीच हल्की से मध्यम बारिश की संभावना भी है। फिलहाल 10 सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है, जबकि इसके बाद बारिश का दौर सक्रिय हो सकता है। इस बदलाव का असर तापमान के साथ-साथ हवा की गुणवत्ता पर भी देखने को मिल सकता है। स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 10 सितंबर को अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहेगा और फिलहाल मौसम विभाग की ओर से कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। 11 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम 26 डिग्री रहने की संभावना है। इस दिन आमतौर पर बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 12 सितंबर को तापमान और नीचे आ सकता है। अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन आमतौर पर बादल छाए रहने के साथ मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। 13 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 26 डिग्री रह सकता है। आसमान में सामान्य तौर पर बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना है। वहीं 14 सितंबर को अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम 26 डिग्री रह सकता है। इस दिन भी बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश के आसार हैं और आर्द्रता 90 से 75 प्रतिशत के बीच रह सकती है। 15 सितंबर को तापमान 31 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। आसमान सामान्य तौर पर बादलों से घिरा रह सकता है। बारिश की गतिविधियां कम होने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता पर भी असर दिखाई देने लगा है। स्क्रीन पर उपलब्ध केंद्रीय प्रदूषण निगरानी आंकड़ों में दिल्ली के कई इलाकों में एक्यूआई 100 से ऊपर दर्ज किया गया है। अलीपुर में एक्यूआई 142, आनंद विहार में 91, अशोक विहार में 143, आया नगर में 109, बवाना में 247, बुराड़ी क्रॉसिंग में 125, कैंटोनमेंट एरिया में 92, चांदनी चौक में 151 और कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 112 दर्ज है। इन आंकड़ों में सबसे खराब स्थिति बवाना की रही, जहां एक्यूआई 247 दर्ज किया गया। वहीं आनंद विहार और कैंटोनमेंट एरिया में हवा अपेक्षाकृत बेहतर रही, जहां एक्यूआई क्रमशः 91 और 92 दर्ज किया गया। नोएडा के उपलब्ध स्टेशनों के आंकड़े भी प्रदूषण की बढ़ती स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। सेक्टर-125 में एक्यूआई 218, सेक्टर-62 में 133 और सेक्टर-116 में 198 दर्ज किया गया। यानी नोएडा के इन तीनों प्रमुख मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता में अंतर देखने को मिला, लेकिन सेक्टर-125 और सेक्टर-116 में स्थिति खास तौर पर खराब रही। गाजियाबाद के मॉनिटरिंग स्टेशनों पर स्थिति मिश्रित रही। गोविंदपुरम में एक्यूआई 64, इंदिरापुरम में 65 और लोनी में 96 दर्ज किया गया, जो अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति दर्शाता है। इसके मुकाबले संजय नगर में एक्यूआई 172, वसुंधरा में 166 और वेद विहार-लोनी में 170 दर्ज किया गया। इससे साफ है कि एक ही शहर के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता में काफी अंतर बना हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि बारिश के बाद कुछ दिनों तक हवा साफ रहने के बावजूद जैसे-जैसे बारिश का असर कम होता है, प्रदूषक तत्वों का स्तर दोबारा बढ़ने लगता है। ऐसे में 11 से 16 सितंबर के बीच संभावित बारिश एनसीआर के लिए राहत लेकर आ सकती है। बारिश होने पर वातावरण में मौजूद धूल और कुछ प्रदूषक कण नीचे बैठ सकते हैं, जिससे अस्थायी रूप से वायु गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है।

‘मुंबई एयरपोर्ट पर बनी मस्जिद को हटाने के निर्देश’, किरीट सोमैया बोले- ‘बर्दाश्त नहीं करेंगे लैंड जिहाद

मुंबई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता किरीट सोमैया ने जानकारी दी है कि मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 के पास बनी मस्जिद को हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि एक व्यवस्थित तरीके से ‘मराठी मुंबई’ को ‘मुस्लिम मुंबई’ बनाया जा रहा है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए भाजपा नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया कि एक व्यवस्थित तरीके से ‘मराठी मुंबई’ को ‘मुस्लिम मुंबई’ बनाया जा रहा है। पहले बांद्रा रेलवे टर्मिनस के पास भी बांग्लादेशी मुस्लिम आकर बस चुके थे। अब मुंबई एयरपोर्ट के वीआईपी गेट के नजदीक मस्जिद बना दी गई। उसमें 12 एयर कंडीशन और 30 पानी के नल हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उसके खिलाफ आवाज उठाई है। इस पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मुंबई एयरपोर्ट कंपनी को चेतावनी दी है। एमएमआरडीए ने मस्जिद को अवैध बताया है और कहा कि इसको कोई अनुमति नहीं दी गई थी। एमएमआरडीए ने इसे हटाने के आदेश दिए हैं।” किरीट सोमैया ने यह भी कहा कि हमने इस विषय पर कठोर कदम उठाए हैं। इस तरह की मस्जिद, कब्र या दरगाह के नाम पर संवेदनशील इलाकों में ‘लैंड जिहाद’ किया जाता है। इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैंने मांग की है कि इसकी पुलिस जांच होनी चाहिए। इसी बीच, भाजपा नेता ने विपक्षी दलों पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और उद्धव ठाकरे वोट के लिए देश की सुरक्षा को भी बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं।” वहीं, किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पत्र शेयर किया। उन्होंने कहा, “एमएमआरडीए का कहना है कि यह एक अवैध मस्जिद है। इसके लिए कोई मंजूरी नहीं दी गई थी। एमएमआरडीए ने मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड से कहा है कि वे इस अवैध ढांचे (मस्जिद) को तुरंत गिरा दें। मैंने मुंबई एयरपोर्ट और एमएमआरडीए से अनुरोध किया है कि वे इस ‘लैंड जिहाद’ के पीछे शामिल ट्रस्टियों और लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने की भारत के स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ, बोले-आशा कार्यकर्ता इन सेवाओं की मजबूत कड़ी

नई दिल्ली। । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की है। उन्होंने खास तौर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की तारीफ की। टेड्रोस ने एशियाई देश तिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में आयोजित डब्‍ल्‍यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत की स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों और डब्‍ल्‍यूएचओ के साथ उसके जारी सहयोग पर चर्चा की। गुरुवार को सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टेड्रोस ने लिखा, “मैंने भारत के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और उन्हें देश की स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रभावशाली प्रगति के लिए बधाई दी। खास तौर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों के खिलाफ लड़ाई में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।” उन्होंने ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ पहल की भी सराहना की, जिसके जरिए देशभर में लोगों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और जांच सुविधाओं तक पहुंच बढ़ी है। टेड्रोस ने कहा कि लगभग 1.6 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से भारत हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और आम प्रकार के कैंसर की जांच की सुविधा लोगों के घरों के करीब पहुंचा रहा है। साथ ही जिन मरीजों को आगे इलाज की जरूरत होती है, उनके लिए रेफरल की व्यवस्था भी उपलब्ध है। डब्‍ल्‍यूएचओ प्रमुख ने भारत की आशा कार्यकर्ताओं के विशाल नेटवर्क की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ये कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे लोगों तक पहुंचाने में, खासकर महिलाओं, माताओं और बच्चों की विभिन्न चरणों में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। टेड्रोस ने कहा, “भारत की आशा कार्यकर्ता इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं लोगों तक उनके समुदायों में कैसे पहुंचाई जा सकती हैं। वे गर्भधारण से लेकर किशोरावस्था तक माताओं और बच्चों को सहयोग देती हैं।” उन्होंने कहा कि टीकाकरण के दायरे के विस्तार और अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसव की दर 78 से बढ़कर 93 प्रतिशत होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में लगातार सुधार देखने को मिला है। बैठक के दौरान टेड्रोस और नड्डा ने भारत के टीबी उन्मूलन के प्रयासों पर भी चर्चा की। इस क्षेत्र में भारत व्यापक जांच, बेहतर पहचान, उपचार और जनस्वास्थ्य संबंधी कदमों के जरिए प्रयासों को तेज कर रहा है। दोनों नेताओं ने चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए उनके नियमन को और मजबूत बनाने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही डब्‍ल्‍यूएचओ के साथ वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर भारत के लगातार सहयोग की भी समीक्षा की गई। टेड्रोस ने डब्‍ल्‍यूएचओ को भारत की ओर से दिए जा रहे महत्वपूर्ण सहयोग और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों में उसकी भूमिका की भी सराहना की। इसमें पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ डब्‍ल्‍यूएचओ महामारी समझौते के तहत पैथोजन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग प्रणाली पर चल रही बातचीत भी शामिल है। टेड्रोस और नड्डा की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब डब्‍ल्‍यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के देशों के स्वास्थ्य मंत्री और प्रतिनिधि द‍िली में क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए एकत्र हुए हैं। इस बातचीत के दौरान भारत की स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति, उसकी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत व्यवस्था और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग में उसकी भूमिका प्रमुख विषयों में शामिल रहे।

संजय सरावगी ने दिग्विजय सिंह पर साधा निशाना, सनातन स्वाभिमान यात्रा’ से पहले राहुल गांधी का रुख स्पष्ट करें

पटना। बिहार में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह को पहले राहुल गांधी से इस यात्रा को लेकर बात करनी चाहिए। चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने के ऐलान पर संजय सरावगी ने कांग्रेस को घेरा। सरावगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब तक राम मंदिर नहीं गए हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस नेता सनातन और राम मंदिर के नाम पर यात्रा निकालने की बात कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ राहुल गांधी के अयोध्या नहीं जाने को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी और वोट बैंक की राजनीति के तहत ऐसे मुद्दे उठा रही है। सरावगी ने कहा कि जनता इस तरह की राजनीति को देख रही है और कांग्रेस नेताओं को इसका जवाब देना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भाजपा की ओर से आयोजित किए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ का भी सरावगी ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और 7 अक्टूबर 2026 को उनके सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक पद पर सेवा के 25 वर्ष पूरे हुए। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर भाजपा की ओर से एक महीने तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरावगी के अनुसार, 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक करीब 12-13 कार्यक्रमों की घोषणा की गई है। इन कार्यक्रमों के जरिए प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और सेवा कार्यों को जनता के बीच पहुंचाने की तैयारी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा वंदे मातरम् को लेकर राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी का समर्थन करते हुए सरावगी ने कहा कि राहुल गांधी राष्ट्रगीत के महत्व को नहीं समझ सकते। उन्होंने कांग्रेस पर वंदे मातरम को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक रवैया अपनाने का आरोप लगाया। सरावगी ने कहा कि वंदे मातरम को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आजादी के दीवानों और शहीदों ने गाया था। उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के मामले में कांग्रेस का रवैया जनता के सामने है। हालांकि, उनके ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं और कांग्रेस का पक्ष इस बयान के संदर्भ में सामने आना बाकी है। पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा के इस्तीफे की राहुल गांधी की मांग पर जेडीयू नेता श्याम रजक ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा दलितों के मुद्दे उठाए जाने पर सवाल खड़े किए और कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए बाबासाहेब अंबेडकर और जगजीवन राम जैसे नेताओं का उल्लेख किया। रजक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं और उनके परिवार का इतिहास दलित नेताओं के साथ उचित व्यवहार नहीं करने का रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में राहुल गांधी का दलित अधिकारों की बात करना अपने आप में सवाल खड़े करता है। बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ किए जाने के प्रस्ताव पर मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए उल्लेखनीय काम किया है, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। सुमन ने कहा कि मुख्यमंत्री का जन्मस्थान और वह क्षेत्र जहां उनका बचपन बीता, उसका नाम उनके नाम पर रखने की इच्छा इसी सम्मान की भावना से जुड़ी है। वहीं ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम की टिप्पणी पर संतोष सुमन ने कहा कि कांग्रेस संभवतः अपने कार्यकाल में इस तरह के सम्मेलन आयोजित नहीं कर पाने की वजह से निराशा में बयान दे रही है। उन्होंने चिदंबरम की टिप्पणी को राजनीतिक हताशा से जोड़ते हुए कांग्रेस पर कटाक्ष किया।

अरुणाचल में तेज बहाव के बीच बीआरओ ने पुल को किया बहाल, वाहनों की आवाजाही शुरू

नई दिल्ली। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन ने तेज बहाव वाली लोहित नदी पर बने 800 फीट लंबे करोटी पुल को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बहाल किया है। अरुणाचल प्रदेश में एक ओवरलोडेड टिपर से पुल के नुकसान पहुंचने के बाद बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) यह कार्य किया है। बीआरओ के मुताबिक यह घटना 116 रोड कंस्ट्रक्शन कंपनी, 48 टास्क फोर्स और परियोजना उदयक के दल के लिए बड़ी चुनौती थी। टीम ने सबसे पहले क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थिति को स्थिर किया और पुल पर फंसे टिपर को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला। इसके बाद बीआरओ ने कठिन परिस्थितियों के बीच पुल पर जरूरी मरम्मत और बहाली का काम किया गया। इससे क्षेत्र में सड़क संपर्क बनाए रखने और स्थानीय आवागमन को सुचारु करने में मदद मिली। तेज बहाव वाली नदी और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद दल ने सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ काम जारी रखा। आवश्यक बहाली कार्य पूरे होने के बाद करोटी पुल को हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। बीआरओ के कर्मयोगियों ने इस दौरान इंजीनियरिंग कौशल, अनुभव और सटीकता का परिचय दिया। क्षतिग्रस्त पुल को जल्द से जल्द उपयोग के योग्य बनाना इस अभियान की प्रमुख उपलब्धि रही। संगठन के अनुसार, चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में सड़क और पुलों का रखरखाव सामरिक तथा स्थानीय संपर्क, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गुरुवार को संगठन ने बताया कि इन प्रयासों के बाद करोटी पुल को हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक ने इस चुनौतीपूर्ण अभियान में समर्पण और पेशेवर प्रतिबद्धता के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल एपीएस नेगी, कैप्टन मयंक जोशी, कैप्टन शुभम एम नेसरागी, उपकरण एवं मैकेनिकल विशेषज्ञ देवेंद्र कुमार और मोटर परिवहन चालक सुखजीत सिंह की सराहना की है। बीआरओ ने इस अभियान को विषम परिस्थितियों में इंजीनियरिंग की मिसाल बताया है। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन का कहना है कि यह कार्रवाई दर्शाती है कि कौशल, अनुभव और सटीकता के साथ कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी काम को पूरा किया जा सकता है। इसी के साथ संगठन ने अपने मूलमंत्र श्रमेन सर्वं साध्यम को भी दोहराया।