महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार पुस्तक का लोकार्पण

नई दिल्ली ।अधिवक्ता, शोधकर्ता एवं लेखक डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना द्वारा रचित ” महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार ” पुस्तक का भव्य लोकार्पण नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन स्वर संसार वेलफेयर एंड कल्चर सोसायटी, नई दिल्ली द्वारा सोशल ट्रांसफॉर्मेशन फाउंडेशन, लखनऊ के सहयोग से किया गया।पुस्तक का लॉन्च मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त)-सैयद अता हसनैन- बिहार के माननीय राज्यपाल, द्वारा किया जाएगा तथा इसका अनावरण भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं नई दिल्ली स्थित NCLAT के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण, जो वैश्विक पुस्तक विमोचन एवं महाकुंभ अमृत सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि हैं, द्वारा किया जाएगा। इस गरिमामय अवसर पर पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह, जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) के प्रोफेसर डॉ. शुभ्रांशु सिंह, प्रख्यात इतिहासकार डॉ. राजीव श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल, जिन्होंने इस पुस्तक का अंग्रेज़ी अनुवाद किया है, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त आध्यात्मिक गुरु अशोक महाराज (जम्मू महाराज) तथा बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल भी विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएँगे।इस अवसर पर बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने कहा: “मुझे ‘महाकुंभ-2025’ पर आधारित इस शुभ पुस्तक का लोकार्पण करके अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह पुस्तक उत्सव के दौरान प्राप्त सफलताओं और अनुभवों का सजीव वर्णन करती है। यह एक ऐसा ऐतिहासिक आयोजन था, जहाँ 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त किया। सरकार द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं और सुदृढ़ सुरक्षा प्रबंधन ने इस आयोजन को अभूतपूर्व सफलता दिलाई। मैं डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना जी को इस पुस्तक के लेखन के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। उन्होंने महाकुंभ-2025 की कहानी को अत्यंत रोचक एवं प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे लोग इस महान आयोजन को और गहराई से समझ सकेंगे। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक भविष्य में महाकुंभ के प्रबंधन और आयोजन से जुड़े संस्थानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी।इस भव्य लोकार्पण समारोह में विधि, शिक्षा, पत्रकारिता, अध्यात्म, साहित्य तथा सार्वजनिक जीवन से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने सहभागिता की और उन्होंने ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 का दस्तावेजीकरण करने वाली इस महत्वपूर्ण कृति के प्रकाशन का उत्सवपूर्वक स्वागत किया।पुस्तक के बारे में अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. गोविन्द कुमार सक्सेना ने कहा, “‘ महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार’ ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 का एक वस्तुनिष्ठ, संतुलित तथा व्यापक शोध पर आधारित प्रामाणिक वृत्तांत प्रस्तुत करती है।” यह पुस्तक आठ खंडों और अठारह अध्यायों में विभाजित है। इसमें महाकुंभ के प्रत्येक प्रमुख पक्ष का विस्तृत एवं प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया गया है—सूक्ष्म योजना एवं सफल आयोजन से लेकर संतों, अखाड़ों और कल्पवासियों की परंपराओं तक। साथ ही, यह विश्व के सबसे बड़े धार्मिक समागम के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को भी प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती है।कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘महाकुंभ अमृत सम्मान–2025’ का अलंकरण होगा, जिसके अंतर्गत समाज के प्रति अपने उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।यह पुस्तक वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ का मात्र एक विवरण नहीं है, बल्कि मानव इतिहास के सबसे विशाल समागमों में से एक का संतुलित, तथ्यपरक एवं गहन शोध पर आधारित प्रामाणिक वृत्तांत प्रस्तुत करती है। इतिहास, पौराणिक परंपराओं, अध्यात्म, संस्कृति और समकालीन यथार्थ का समन्वय करते हुए डॉ. सक्सेना ने इस पुस्तक में महाकुंभ के शाश्वत महत्व का गहन विवेचन किया है, साथ ही इसके अभूतपूर्व विराट स्वरूप और उत्कृष्ट आयोजन का प्रामाणिक दस्तावेजीकरण भी प्रस्तुत किया है।आठ खंडों और अठारह अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक प्रयागराज के धार्मिक महत्व, कुंभ परंपरा के विकास, संतों, अखाड़ों एवं कल्पवासियों की भूमिका तथा महाकुंभ-2025 के आयोजन हेतु की गई व्यापक तैयारियों का विस्तृत एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह पुस्तक भीड़ प्रबंधन, परिवहन व्यवस्था, डिजिटल प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय संरक्षण, सुरक्षा प्रबंध, महिला सशक्तिकरण, क्षेत्रीय विकास तथा इस आयोजन के व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विशेष प्रकाश डालती है। यह कृति अनुभवजन्य आँकड़ों, प्रत्यक्ष अवलोकनों तथा प्रामाणिक संदर्भों से समृद्ध है, जो पाठकों को तथ्यपरक गहराई के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और अनुभवों की भी सशक्त एवं सार्थक समझ प्रदान करती है।इस पुस्तक की एक विशिष्ट विशेषता यह है कि इसमें आध्यात्मिक परंपराओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ संतुलित रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि यह कृति श्रद्धालुओं, विद्वानों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं तथा सामान्य पाठकों—सभी के लिए समान रूप से उपयोगी और महत्त्वपूर्ण सिद्ध होती है। महत्वपूर्ण सरकारी अधिसूचनाओं, विधिक संदर्भों तथा महाकुंभ से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों को समाहित करने वाले एक विशेष परिशिष्ट का समावेश इस पुस्तक के प्रलेखीय एवं संदर्भात्मक महत्व को और अधिक समृद्ध एवं मूल्यवान बनाता है।अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति शैली, वस्तुनिष्ठ विश्लेषण और गहन शोध के आधार पर ” महाकुंभ-2025- श्रद्धालु 66 करोड़ के पार” भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत पर उपलब्ध साहित्य में एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान योगदान के रूप में उभरकर सामने आती है। यह पुस्तक न केवल ऐतिहासिक महाकुंभ-2025 की अमूल्य स्मृतियों को संरक्षित करती है, बल्कि इस अद्वितीय आयोजन के महत्व को समझने की इच्छा रखने वाली भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थायी, प्रामाणिक और महत्वपूर्ण संदर्भ-ग्रंथ के रूप में भी स्थापित होती है।

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