प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग तेज, संत समाज ने किया समर्थन

नई दिल्ली। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने को लेकर संत समाज की मांग तेज हो गई है। दिनेश फलाहारी महाराज द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सुरक्षा बढ़ाने की मांग के बाद कई बड़े संतों ने इसका समर्थन किया है। संतों का कहना है कि प्रेमानंद महाराज वृंदावन और पूरे संत समुदाय का गौरव हैं और हाल में आश्रम से जुड़ी गुटबाजी की खबरों के बीच उनकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। दिनेश फलाहारी महाराज के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा बढ़ाने की मांग वाले लेटर पर आर्य संत वरुण दास जी महाराज ने कहा, “मैं दिनेश फलाहारी की प्रेमानंद महाराज जी की सुरक्षा बढ़ाने की मांग का समर्थन करता हूं। प्रेमानंद महाराज के आश्रम में हुई एक घटना के संबंध में कई तरह की गुटबाजी की खबरें आई हैं। असलियत क्या है, यह जांच का विषय है, लेकिन लोगों के बीच जो खबरें आ रही हैं और यह देखते हुए कि प्रेमानंद महाराज वृंदावन धाम और पूरे देश के संत समुदाय के लिए गर्व का विषय हैं, उनकी सुरक्षा निश्चित रूप से बढ़ाई जानी चाहिए।” महंत सीताराम दास ने कहा कि निश्चित रूप से, हमारे प्रेमानंद महाराज के लिए सुरक्षा बढ़ाने की मांग करते हुए फलाहारी द्वारा लिखा गया पत्र सराहनीय है। मैं इस पत्र का समर्थन करता हूं। वे निश्चित रूप से संत समुदाय के लिए गर्व का स्रोत हैं। इस गौरव को बनाए रखना सनातनियों का नैतिक कर्तव्य है और सरकार को उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। महंत राजू दास ने कहा कि समय-समय पर ऐसे तत्व अलग-अलग रूपों में सामने आते रहते हैं। जैसा कि आपने देखा होगा, पूज्य प्रेमानंद के खिलाफ लगातार बयान आते रहे हैं और कट्टरपंथी और विकृत मानसिकता वाले लोग सक्रिय रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए फलाहारी जी ने यह पत्र लिखा है। उत्तर प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था हमेशा अच्छी रही है। हमें सीएम योगी पर भरोसा है और सीएम योगी की सरकार में ऐसा कुछ नहीं हो सकता। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि प्रेमानंद महाराज को सुरक्षा की जरूरत नहीं है। राधा रानी का आशीर्वाद उन पर है, लेकिन कुछ लोग प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनके भजन में कोई रुकावट न आए और उन्हें कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद कोई राजनीतिक संत नहीं हैं, न ही उन्होंने कोई विवादित बयान दिया है, इसलिए उन्हें किसी से कोई खतरा नहीं है। जहां तक उनके आसपास के लैंड माफिया टाइप के लोगों की बात है जो उनके चेले बन गए हैं, उनके लिए सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं है। बस आसपास के उन चेलों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

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