अब पलायन नहीं, अपनी माटी में हुनर दिखा रहे कारीगर : मुख्यमंत्री योगी

भदोही। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश में कभी कारीगर और हस्तशिल्पी रोजी-रोजगार के लिए पलायन को मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही माटी में हुनर दिखाने का मंच मिल रहा है। तकनीक, डिजाइन और बाजार के साथ बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षा मिली है। भदोही का कालीन आज दुनिया के बाजार में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री रविवार को संत रविदास नगर, भदोही के कारपेट एक्सपो मार्ट में 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने फीता काटकर एक्सपो का शुभारंभ किया और स्टॉलों पर जाकर कारीगरों व हस्तशिल्पियों के उत्पाद देखे। एक्सपो में 227 से अधिक एग्जीबिटर्स और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी बायर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 बायर्स हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हताशा और निराशा थी। दंगा, कर्फ्यू, उपद्रव और माफियागिरी के कारण कारोबार का माहौल नहीं था। कारीगर को काम नहीं मिलता था और देशी-विदेशी खरीदार भी नहीं आते थे। सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में भदोही के कालीन को शामिल कर कारीगरों को तकनीक, डिजाइन और बाजार से जोड़ा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से 6,100 करोड़ रुपए का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मिर्जापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर में 2,500 एमएसएमई यूनिट हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 10 हजार करोड़ रुपए है। इस उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि जनपद में निर्मित 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत विभिन्न देशों को निर्यात किए जाते हैं। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग भी मिला है। कारपेट और टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी में तकनीकी शिक्षा, डिजाइनिंग और डाइंग के प्रशिक्षण के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी स्थापित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ कालीन उद्योग को मिल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में विस्तार होने पर संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट छह घंटे में पहुंचा जा सकेगा। वहां की कार्गो सुविधा से भदोही की कालीन दुनिया के बाजार तक आसानी से पहुंच सकेगी। साथ ही वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वाटरवे और वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी कार्गो सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में उपद्रव, कर्फ्यू और दंगा नहीं होते। कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर किसी को धमका नहीं सकता और बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। 15 लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और साढ़े सात लाख करोड़ रुपए के उद्योग बहुत जल्द धरातल पर उतरने जा रहे हैं। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिट हैं और प्रत्येक यूनिट को पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में करीब 14 हजार कारखाने थे, जिनकी संख्या अब 35 हजार से अधिक हो गई है। देश के 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड पर काम चल रहा है और प्रदेश में 12 निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसी व्यवस्थाओं के जरिये निवेशकों को सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही के हुनरमंद हाथों से तैयार कालीन आज दुनिया के बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। देश के नए संसद भवन में बिछा कालीन भी संत रविदास नगर में तैयार हुआ है। जिले के पास जीआई टैग, ओडीओपी का प्लेटफार्म, कारपेट एक्सपो मार्ट और मजबूत निर्यात तंत्र है। उन्होंने बताया कि लखनऊ और हरदोई के बीच एक हजार एकड़ में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एंप्लॉयमेंट एंड स्किलिंग जोन बनाने की तैयारी है। यहां उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल मैनपावर तैयार की जाएगी। सीएम योगी ने कहा कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में छह लाख से अधिक विजिटर पहुंचे। डेढ़ लाख से अधिक बी2बी बैठकें हुईं। इसमें 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हुए।
उत्तराखंड में सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में की गई बढ़ोतरी : सीएम धामी

बनबसा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में राज्य कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता की। चंपावत जिले में राज्य कैबिनेट की बैठक पहली बार आयोजित की गई। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, स्वास्थ्य, चारधाम यात्रा, यातायात व्यवस्था और विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में करीब 25 से 26 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि राज्य सरकार ने सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की है। पहले यह राशि करीब 75 हजार रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर एक लाख रुपये से अधिक कर दिया गया है। इसके अलावा देहरादून, लालकुआं और बिंदुखत्ता समेत अन्य क्षेत्रों में ‘क्लास बी’ भूमि के नियमितीकरण की समय-सीमा को एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचे। बनबसा और टनकपुर क्षेत्र चंपावत जिले का हिस्सा हैं और यहां ‘आदर्श चंपावत’ के विजन के तहत विकास कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में सभी विभाग सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। कैबिनेट के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के यहां पहुंचने से विकास कार्यों को नई गति मिलेगी। चारधाम यात्रा को लेकर भी बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा सुचारू रूप से संचालित हो और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें, इसके लिए सड़कों की स्थिति और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि बैठक में ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के देशसेवा और समर्पण के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 7 तारीख को सभी जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। धामी ने कहा कि बनबसा और टनकपुर नेपाल सीमा से सटे क्षेत्र हैं और दोनों देशों के लोगों के बीच लंबे समय से सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां की संस्कृति और परंपराओं में काफी समानता है तथा दोनों ओर के लोगों के बीच ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते भी हैं। सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और यहां के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगे भी महत्वपूर्ण फैसले लेती रहेगी।
एफएसएसएआई का बड़ा एक्शन: गंभीर स्वच्छता खामियों के चलते क्रिएटिव बेकर्स का लाइसेंस निलंबित, एवरेस्ट मसालों का जीरा पाउडर वापस मंगाया

नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों के उल्लंघन पर दो बड़ी कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल स्थित क्रिएटिव बेकर्स एंड कन्फेक्शनर्स प्राइवेट लिमिटेड का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को अपने जीरा पाउडर के एक बैच को बाजार से वापस मंगाने का निर्देश दिया गया है। एफएसएसएआई ने बयान में कहा कि क्रिएटिव बेकर्स एंड कन्फेक्शनर्स की विनिर्माण इकाई के निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी कमियां सामने आईं। जांच में खाद्य उत्पादन और हैंडलिंग क्षेत्रों में गंदगी, चिकनाई, धूल, मकड़ी के जाले और मक्खियों की मौजूदगी पाई गई। नियामक के अनुसार, नष्ट होने वाले कच्चे माल को खुले में रखा जा रहा था, जबकि कच्चे माल और अर्ध-निर्मित उत्पादों के भंडारण के लिए जंग लगे और ठीक से साफ न किए गए कंटेनरों का उपयोग किया जा रहा था। ऐसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों के दूषित होने का जोखिम बढ़ाती हैं। निरीक्षण के दौरान खाद्य हैंडलिंग क्षेत्रों में कचरा, पुराना स्टॉक, अस्वीकृत सामग्री और स्क्रैप भी जमा मिला। इसके अलावा परिसर में जंग लगी मशीनें, उखड़ता पेंट, नमी वाली दीवारें और क्षतिग्रस्त फर्श टाइलें भी पाई गईं। एफएसएसएआई ने यह भी पाया कि कंपनी कई अनिवार्य खाद्य सुरक्षा रिकॉर्ड और निगरानी प्रणालियों का उचित रखरखाव नहीं कर रही थी। इनमें पानी और तैयार उत्पादों की परीक्षण रिपोर्ट, तापमान निगरानी रिकॉर्ड, उपकरणों की कैलिब्रेशन जानकारी, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस रिकॉर्ड, मॉक रिकॉल दस्तावेज, उपभोक्ता शिकायत रजिस्टर, प्रशिक्षण रिकॉर्ड और ऑडिट रिपोर्ट शामिल हैं। इन गंभीर कमियों को देखते हुए एफएसएसएआई ने कंपनी का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसे निलंबन अवधि के दौरान सभी खाद्य संबंधी गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया है। दूसरी ओर, नियामक ने एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को अपने प्री-पैक्ड जीरा पाउडर के एक बैच को वापस मंगाने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई प्रयोगशाला परीक्षण में उत्पाद में अनुमत सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष पाए जाने के बाद की गई। एफएसएसएआई के अनुसार, गोवा स्थित रिवरसाइड रिसॉर्ट्स एंड हॉलिडे होम्स परिसर से लिए गए नमूने की जांच की गई थी। खाद्य विश्लेषक ने इसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत “असुरक्षित” घोषित किया। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि उत्पाद में एजोक्सीस्ट्रोबिन और थायमेथोक्साम नामक कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक मात्रा में मौजूद थे। एफएसएसएआई ने कहा कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि खाद्य उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप हों। नियामक खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त निगरानी और कार्रवाई जारी रखेगा, ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें।
अदाणी ग्रुप और कच्छ यूनिवर्सिटी ने लॉन्च किया ग्रीन एनर्जी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, हर साल 10,000 से अधिक छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण

भुज । अदाणी समूह की कौशल विकास और क्षमता निर्माण इकाई अदाणी स्किल्स एंड एजुकेशन (एएसई) ने रविवार को कच्छ यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर भुज में ग्रीन एनर्जी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। इस केंद्र का उद्घाटन गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किया। संस्थान के माध्यम से हर वर्ष 10,000 से अधिक छात्रों को नवीकरणीय ऊर्जा और औद्योगिक ऑटोमेशन से जुड़े विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ मिलने की उम्मीद है। यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है जब देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार के साथ प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। अदाणी ग्रुप के अनुसार, पिछले दो वर्षों में गुजरात के कच्छ जिले में कंपनी की हरित ऊर्जा परियोजनाओं के कारण 21,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं, जिससे ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए प्रशिक्षित कार्यबल की आवश्यकता भी बढ़ी है। ग्रीन एनर्जी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में सोलर पीवी टेक्नोलॉजी, विंड एनर्जी सिस्टम, हाइब्रिड एनर्जी सिस्टम, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) तथा डिजिटल एवं इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, यह केंद्र हरित ऊर्जा क्षेत्र में अनुप्रयुक्त अनुसंधान और उद्यमिता को भी प्रोत्साहित करेगा। अदाणी ग्रुप के निदेशक करण अदाणी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र भारत के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र छात्रों को न केवल वर्तमान रोजगार अवसरों के लिए तैयार करेगा, बल्कि भारत और वैश्विक स्तर पर उभर रही नई संभावनाओं का लाभ उठाने में भी सक्षम बनाएगा। उन्होंने आगे कहा कि यह वैश्विक स्तर का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस युवाओं को भविष्य के कौशल और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करेगा। अदाणी स्किल्स एंड एजुकेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रॉबिन भौमिक ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन आवश्यक विशेषज्ञ प्रतिभाओं की उपलब्धता उसी गति से नहीं बढ़ पाई है। उन्होंने कहा कि कच्छ यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी के माध्यम से उद्योग की जरूरतों को सीधे कक्षा तक पहुंचाया जा सकेगा और छात्रों को वास्तविक तकनीकों से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसकी वजह से सौर, पवन, ऊर्जा भंडारण और अन्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। इस परिवर्तन में कच्छ एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। अदाणी समूह यहां खावड़ा में 30 गीगावाट क्षमता वाले नवीकरणीय ऊर्जा पार्क का विकास कर रहा है, जो लगभग 538 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं में से एक माना जाता है। विश्वविद्यालय आधारित यह केंद्र एक संरचित शिक्षण मॉडल पर काम करेगा, जिसमें कक्षा-आधारित अध्ययन, सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव का संयोजन होगा। पाठ्यक्रम में सौर और पवन ऊर्जा तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, बैटरी स्टोरेज सिस्टम, माइक्रोग्रिड, एससीएडीए सिस्टम, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित ऊर्जा अनुप्रयोग और स्मार्ट ग्रिड तकनीकें शामिल होंगी।
भव्य क्लोजिंग सेरेमनी के साथ हुआ एशियन गेम्स 2026 का समापन, 341 मेडल के साथ अंक तालिका में पहले स्थान पर रहा चीन

नागोया। शानदार क्लोजिंग सेरेमनी के साथ एशियन गेम्स 2026 का रविवार को समापान हो गया। क्लोजिंग सेरेमनी में भारत की ओर से शूटिंग में दो गोल्ड समेत तीन मेडल जीतने वालीं नीरू ढांडा ध्वजवाहक रहीं। नागोया के मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में हुई एशियन गेम्स 2026 की क्लोजिंग सेरेमनी का आगाज जापान के नेशनल एंथम के साथ हुआ। इसके बाद खिलाड़ियों की परेड शुरू हुई, जिसमें हर देश का प्रतिनिधित्व उनके ध्वजवाहक ने किया। भारतीय तिरंगे को शान से नीरू ढांडा ने लहराया। ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (ओसीए) का झंडा कतर को सौंपा गया, जो एशियन गेम्स के 21वें संस्करण की मेजबानी करेगा। भारत का प्रदर्शन एशियन गेम्स 2026 में शानदार रहा। देश ने कुल 85 मेडल जीते, जिसमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। भारत ने एशियन गेम्स का अंत अंक तालिका में चौथे स्थान पर रहते हुए किया। पहले स्थान पर चीन का कब्जा रहा, जिन्होंने कुल 341 मेडल अपने नाम किए। इसमें 169 गोल्ड, 89 सिल्वर और 83 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। मेजबान जापान कुल 269 मेडल के साथ दूसरे स्थान पर रहा। जापान ने 83 गोल्ड, 95 सिल्वर और 91 ब्रॉन्ज मेडल जीते। साउथ कोरिया ने 150 मेडल जीते, जिसमें 39 गोल्ड, 43 सिल्वर और 68 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। भारत 85 मेडल के साथ चौथे स्थान पर रहा। वहीं, उज्बेकिस्तान 70 मेडल लेकर अंक तालिका में पांचवें नंबर पर रहा। भारत ने आर्चरी में शानदार पांच गोल्ड मेडल मिले। बॉक्सिंग में तीन और रेसलिंग में दो गोल्ड मेडल जीते गए। हॉकी और कबड्डी में टीम की जीत का वही पुराना जोश देखने को मिला, जिसमें पुरुषों और महिलाओं, दोनों टीमों ने गोल्ड मेडल जीते। भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीम दोनों ने ही बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। एथलेटिक्स में भी रोमांच देखने को मिला, जहां भारत के धावकों और फील्ड एथलीट्स ने दबाव और मौसम की चुनौतियों का सामना करते हुए कीमती मेडल जीते। गोल्फ में भी इतिहास रचा गया, जब प्रणवी उर्स ने इस खेल में भारत के लिए महिलाओं का पहला व्यक्तिगत एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीता। शूटिंग भारत के लिए मेडल दिलाने वाले सबसे मजबूत खेलों में से एक रही, जबकि वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन, स्क्वैश, रोइंग, टेबल टेनिस, सेलिंग, वुशु, कुराश, एमएमए, सॉफ्ट टेनिस और दूसरे खेलों ने भी कुल मेडल की संख्या बढ़ाने में योगदान दिया।
पिछले दशक के आर्थिक सुधारों ने वैश्विक झटकों के बीच भारत को बनाया अधिक मजबूत और लचीला: शक्तिकांत दास

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने रविवार को कहा कि पिछले एक दशक में लागू किए गए व्यापक आर्थिक सुधारों ने भारत को वैश्विक झटकों के बीच अधिक मजबूत, स्थिर और लचीली अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने में मदद की है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने मजबूत संस्थाओं का निर्माण किया, व्यापक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की और उत्पादक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए पूर्व आरबीआई गवर्नर और वित्त मंत्रालय के पूर्व आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में लागू किए गए सुधार किसी एक समय के लिए किए गए कदम नहीं थे, बल्कि उन्हें इस तरह डिजाइन किया गया था कि वे अर्थव्यवस्था को झटकों को सहने और तेजी से उबरने की क्षमता प्रदान करें। उन्होंने कहा कि लचीला महंगाई लक्ष्यीकरण, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), डिजिटल भुगतान का विस्तार और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार ऐसे प्रमुख कदम रहे हैं, जिन्होंने भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाया है। दास ने कहा कि भारत का प्रदर्शन ऐसे समय में विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है, जब दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार विखंडन, तकनीकी प्रतिबंध, ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और विकसित देशों में बढ़ते सार्वजनिक ऋण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जिसे मजबूत घरेलू मांग और निवेश का समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि भारत अब 8 प्रतिशत वृद्धि दर के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने जुलाई-सितंबर 2025 से अप्रैल-जून 2026-27 तक लगातार चार तिमाहियों में 8 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की आर्थिक क्षमता को दर्शाता है। शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती का दूसरा बड़ा आधार व्यापक आर्थिक स्थिरता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में लागू लचीले महंगाई लक्ष्यीकरण ढांचे ने भारत को कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष जैसे कई वैश्विक झटकों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा विकास को समर्थन देने वाले खर्च को जारी रखते हुए राजकोषीय संतुलन बनाए रखने की नीति ने अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जीएसटी को एक महत्वपूर्ण कर सुधार बताते हुए दास ने कहा कि इसने पूरे देश को एक एकीकृत बाजार में बदलने, करों के दोहरे प्रभाव को कम करने और अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण को बढ़ावा देने में मदद की है। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र के पुनरुद्धार को भारत की आर्थिक मजबूती की एक और “परिभाषित विशेषता” बताया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली की बेहतर वित्तीय स्थिति ने निवेश और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया है। दास ने कहा कि परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर किए गए निवेश ने भी अर्थव्यवस्था की क्षमता को मजबूत किया है। पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, सागरमाला और उड़ान जैसी पहलों ने आर्थिक गतिविधियों में आने वाली बाधाओं को कम किया और निवेश आधारित विकास की मजबूत नींव तैयार की। ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की है। उन्होंने कहा कि देश ने जीवाश्म ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ईंधन और परमाणु ऊर्जा के बीच संतुलित ऊर्जा आधार विकसित किया है, जिससे बाहरी ऊर्जा झटकों का असर कम करने में मदद मिली है। शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत विनिर्माण क्षेत्र के पुनरुत्थान का भी साक्षी बन रहा है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाओं, सेमीकंडक्टर निवेश, ऑटोमेशन और इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों ने विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी है। भविष्य की विकास यात्रा पर बोलते हुए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गहरे और विकसित वित्तीय बाजार, रणनीतिक आत्मनिर्भरता, सतत विकास और मानव पूंजी को भारत की अगली आर्थिक छलांग के पांच प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि सुधारों की गति बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि भारत का लक्ष्य केवल तेजी से विकास करना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक, टिकाऊ और लचीला विकास हासिल करना है। उन्होंने बताया कि भारत की आने वाली आर्थिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश सुधारों, निवेश, नवाचार और मानव संसाधन विकास को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाता है।
हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में कांग्रेस पर बरसे सीएम धामी, बोले-विपक्ष गढ़ता है मनगढ़ंत मुद्दे

बनबसा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को पहली बार बनबसा में कैबिनेट बैठक की। इसके बाद समाचार एजेंसी आईएएनएस को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी), सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, महिला सशक्तीकरण और पलायन जैसे मुद्दों पर सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। सवाल: बनबसा में कैबिनेट बैठक आज यहां की गई। साथ ही साथ कई योजनाओं की भी सौगात दी गई है। इसको आप किस तरह से देखते हैं। जवाब: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रों को विकास की मुख्य धारा में लाने का संकल्प लिया है। हमारे राज्य का माणा गांव, जो भारत का अंतिम गांव कहा जाता था, उस गांव से उन्होंने घोषणा की थी कि कि माणा गांव और माणा गांव जैसे अब सभी सीमांत के गांव पहले गांव होंगे और उनका विकास प्राथमिकता से किया जाएगा। हर प्रकार से उनकी स्थापना की जाएगी। वहां योजनाएं लाई जाएंगी और भविष्य में वहां जो भी संभावना है, उन संभावनाओं पर काम करके आगे की चीजों को प्रस्तावित किया जाएगा। उसी क्रम में यहां पर यह बनबसा टनकपुर का जो क्षेत्र है, यह मां पूर्णागिरी का धाम है। गुलजू महाराज का स्थान है। शारदा मैया का भी यह तट है। शारदा मैया बहुत पौराणिक है। यहां पर भारत-नेपाल सीमा भी है। यहां पर छावनी परिषद भी है। अर्धसैनिक बल्कि बड़ी संख्या में यहां काम करते हैं, कैलाश मानसरोवर यात्रा का रूप भी है। आदि कैलाश यात्रा का भी रूप है। इसके साथ ही अनेक धार्मिक स्थल यहां हैं और उत्तर प्रदेश सीमा से भी लगा हुआ है तो इस क्षेत्र से सरकार यहां आई। यहां पर मंत्रिमंडल के फैसले यहां से हुए हैं और एक अच्छा अनुभव है। यह अच्छा लोगों ने इसको अच्छा माना है। इसको हम लोग आगे भी बढ़ाएंगे कि सरकार कहीं से भी राज्य के महत्वपूर्ण फैसले ले सकती है। वह आज यहां बनबसा में यहां के स्थानीय स्तर पर भी और राज्य के स्तर पर भी इसकी शुरुआत हुई। सवाल: एक बड़ा मैसेज प्रदेश और देश में गया है कि दूरस्थ गांव में कैमरा के साथ बैठक करना बड़ी बात है, इस बारे में पहले की सरकार ने कभी सोचा भी नहीं था। जवाब: हमारा मानना है कि सरकार को हर छोटे-बड़े स्थान पर जाना चाहिए और सरकार का कार्य विकेंद्रित होना चाहिए। राज्य के बहुत सारे ऐसे स्थान हैं, जहां पहले कभी कोई नहीं गया। मैं उन स्थानों पर पहुंचा हूं और यह कोशिश हमारी या पूरी सरकार के स्तर पर है और आगे भी हम इसको आगे भी बढ़ाएंगे। सवाल: इस पर भी विपक्ष कटाक्ष करने से नहीं चूक रहा है। इतनी दूर बैठक कराई जा रही है, कई मुद्दों को लेकर विपक्ष सामने आता है कि उत्तराखंड इस तरह की चीज कर रहा है। जवाब: देखिए, युवराज भारत की संस्कृति और भारत के संस्कार से अनभिज्ञ हैं, उनके व्यवहार में नहीं है, उनके संस्कार में नहीं है। नहीं तो जब प्रधानमंत्री बुजुर्ग माता को कुर्सी देते हैं तो वे उसकी कॉमेडी करते हैं। वह लीडर नहीं रह गए, कॉमेडियन बनना चाह रहे हैं और कॉमेडी बन गए हैं। मंचों पर वे निम्नतर स्तर की चीजें कर रहे हैं। निम्नतर स्तर का व्यवहार कर रहे हैं। अजीत डोभाल साहब हमारेदेश के गौरव हैं, उत्तराखंड के लाल हैं। उन्होंने पूरा जीवन भारत की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और भाई सुरक्षा में लगाया है। हमें गर्व हैं उन पर, उनके बारे में जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं, मैं समझता हूं देशवासी तो देशवासी, लेकिन उत्तराखंड वासी इनको कभी माफ नहीं करेंगे। वह दिल पर गहरा आघात पहुंचाने वाली हैं। उन पर इस प्रकार से टिप्पणी करना, इस प्रकार से बोलना और उससे पहले हमारे राज्य के जनरल बिपिन रावत, जो पहले सीडीएस थे, उनके बारे में गली के गुंडे जैसा शब्द का प्रयोग करना, उनकी पार्टी के लोग करते थे, उनके नेता करते थे। तो इनकी मानसिकता दर्शाता है। हम यहां पर तेरह हजारों एकड़ जमीन खाली कराते हैं, उस पर कभी एक शब्द नहीं बोलते हैं। हल्द्वानी में अनुसूचित समाज के शिल्पकार भाई, वाल्मीकि भाई शुद्धि हवन करते हैं क्योंकि वहां पर जिहादी नारे लगते हैं। रैली में गंदगी होती है, शराब की बोतलें फेंकी जाती हैं और अन्य कूड़ा कचरा किया जाता है, उस इस मुद्दे कोराजनीतिक रूप दिया जाता है। हम किसी भी जाति और धर्म अपमान नहीं करते विपक्ष ने कार्यक्रम से पहले न कोई प्रेस विज्ञप्ति और न कोई वीडियो जारी किया था। दलित समाज के लोग उसमें शामिल थे। जब उसकी सच्चाई सामने आई, तो कांग्रेस पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। उनके पास कोई मुद्दे नहीं है, इसलिए मनगढ़ंत मुद्दे बनाते हैं। दो चार दिन बाद उनको मुंह की खानी पड़ती है। इस बार गलत लोगों का नाम हटाए जा रहे हैं, घुसपैठियों के वोट हटाए जा रहे हैं और जिनके तीन-चार जगह पर वोट हैं, उनको हटाया जा रहा है। ये लोग वोटों के चुनाव को प्रभावित करते थे। चुनाव में धांधली होती थी, फर्जी मतदान होता था। अब जिन बेटियों का विवाह हो चुका है और दूसरे स्थान पर चली गई है तो उनका वोट क्यों होगा वहां पर, दूसरी जगह होगा। कोई हमारे बीच से दिवंगत हो गए, उनका वोट क्यों होना चाहिए? तीन-तीन, चार-चार जगह वाले लोगों का वोट क्यों होना चाहिए? इनका काम हो गया है कि हर चीज का विरोध करना, कभी चुनाव आयोग का विरोध करेंगे, कभी ईवीएम मशीन का विरोध करेंगे, कभी प्रशासन का विरोध करेंगे, मशीनरी का विरोध करेंगे कोई ऐसी संस्था बची नहीं है जिस पर इनकी टिप्पणी न होती हों तो पूरा देश देख रहा है, पूरा उत्तराखंड देख रहा है, तो सब संस्थाएं चलेंगी, तो वह अपने नीति से, नियम से, कानून से, भारत के संविधान से चलेंगी, व्यवस्था से चलेंगी, यह अराजकता फैलाना कि ठीक नहीं है और लोग इसको अच्छा नहीं मानते। सवाल: आप यूसीसी लाए थे, आज कई राज्यों में है और अभी गुजरात में स्वीकृति दी गई है और आपके ही द्वारा जो चीजें बनाई थीं, कई राज्य लागू नहीं कर रहे हैं। जवाब: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम लोग चुनाव में
एशियन गेम्स की स्वर्ण विजेता झारखंड की हॉकी खिलाड़ियों से मिले सीएम हेमंत सोरेन, किया सम्मानित

रांची। एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल झारखंड की चार खिलाड़ियों ने रविवार को सीएम हेमंत सोरेन से मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय पर मुलाकात की। सीएम हेमंत सोरेन ने टीम की कप्तान सलीमा टेटे, ओलंपियन निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी और मिठाई खिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने चारों खिलाड़ियों से एशियन गेम्स की तैयारियों, प्रतियोगिता के अनुभव और फाइनल मुकाबले सहित टीम के प्रदर्शन के बारे में जानकारी ली। उन्होंने खिलाड़ियों के अनुभव सुने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रदर्शन की सराहना की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भारतीय महिला हॉकी टीम की स्वर्णिम सफलता में झारखंड की चार खिलाड़ियों की महत्वपूर्ण भूमिका राज्य और देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों की सफलता झारखंड के खेल इतिहास में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ती है। उन्होंने कहा कि राज्य की बेटियों की यह उपलब्धि विशेष रूप से युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा देगी और उन्हें खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने चारों खिलाड़ियों से आगे भी इसी उत्साह और समर्पण के साथ देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सलीमा टेटे, निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार झारखंड में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खिलाड़ियों को आवश्यक अवसर एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान देश में हॉकी की प्रतिभाओं के लिए रही है और राज्य के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता साबित की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में झारखंड से और भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। मुख्यमंत्री की पत्नी कल्पना सोरेन ने भी चारों खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुलाकात के दौरान हॉकी झारखंड के डीजी विजय शंकर सिंह, इंटरनेशनल रेसलिंग कोच सह सीईओ झारखंड रजनीश कुमार और महासचिव मनोज कुमार प्रसाद भी मौजूद रहे।
योगाभ्यास के कितनी देर बाद नहाना और खाना चाहिए?, जानें आयुष मंत्रालय की सलाह

नई दिल्ली। आजकल खुद को फिट और स्वस्थ रखने के लिए बड़ी संख्या में लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। सुबह उठकर योग करना न सिर्फ शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है, बल्कि मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक माना जाता है। अक्सर लोग योगाभ्यास पूरा होते ही अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लग जाते हैं। ऐसे में आयुष मंत्रालय ने योग के बाद शरीर को आराम देने और नहाने व भोजन के बीच उचित अंतर रखने की सलाह दी है। आयुष मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि योगाभ्यास के बाद शरीर को आराम करने और सामान्य स्थिति में लौटने का समय देना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, योग करने के बाद नहाने या भोजन करने से पहले 20 से 30 मिनट का इंतजार करना बेहतर है। इस दौरान व्यक्ति को कुछ समय शांत रहना चाहिए और शरीर को सहज होने देना चाहिए। इससे योगाभ्यास के बाद दिनचर्या में लौटने के लिए एक अच्छा अंतराल मिल जाता है। दरअसल, योग के दौरान शरीर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और सांस लेने की गति में भी बदलाव आता है। ऐसे में अभ्यास पूरा होने के बाद कुछ समय आराम करना उपयोगी माना जाता है। योग के बाद जल्दबाजी करने के बजाय शांत बैठना, सामान्य तरीके से सांस लेना और शरीर को सहज होने देना चाहिए। आयुष मंत्रालय ने योगाभ्यास के लिए खानपान से जुड़ी कुछ जरूरी बातें भी साझा की हैं। मंत्रालय के मुताबिक, संतुलित और पौष्टिक भोजन शरीर और मन को योग के लिए तैयार रखने में मदद करता है। आमतौर पर योगाभ्यास करने वालों के लिए शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा 30 वर्ष से अधिक उम्र के स्वस्थ व्यक्ति के लिए दिन में दो बार भोजन पर्याप्त हो सकता है। हालांकि, बीमारी, अधिक शारीरिक गतिविधि या मेहनत वाला काम करने वाले लोगों की जरूरतें अलग हो सकती हैं। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर और मन के बीच संतुलन बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। विभिन्न शोधों में योग को शारीरिक फिटनेस, मांसपेशियों और हड्डियों के बेहतर कामकाज तथा हृदय संबंधी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी पाया गया है। नियमित योगाभ्यास डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, सांस संबंधी समस्याओं और जीवनशैली से जुड़ी परेशानियों के प्रबंधन में भी मदद कर सकता है। इसके अलावा योग तनाव, चिंता, थकान और अवसाद के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। महिलाओं में मासिक धर्म और मेनोपॉज से जुड़ी कुछ परेशानियों के प्रबंधन में भी योग लाभकारी माना जाता है।
जिस फिल्ममेकर की फिल्मों ने एनएसडी के दिनों में बदली सोच, अंजलि पाटिल ने अब उन्हीं से की ‘सेल्वी’ देखने की अपील

मुंबई। नेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेत्री अंजलि पाटिल की फिल्म ‘सेल्वी’ ने बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर के बाद अब 50वें साओ पाउलो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जगह बनाई है। फिल्म यहां न्यू फिल्ममेकर्स कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेगी। यह ‘सेल्वी’ का दूसरा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सेलेक्शन है। अंजलि पाटिल ने फिल्म को लेकर खुशी जाहिर करते हुए कहा, ”साओ पाउलो फिल्म फेस्टिवल के 50 साल पूरे होने के मौके पर फिल्म का हिस्सा बनना वाकई खास है। यह दक्षिण अमेरिका के सबसे चर्चित और बड़े फिल्म फेस्टिवल्स में से एक है और इसके गोल्डन जुबली एडिशन में ‘सेल्वी’ का चुना जाना पूरी टीम के लिए गर्व की बात है।” अंजलि ने कहा, ”ब्राजील मेरे लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि वहां के फिल्ममेकर वाल्टर सेल्स की फिल्मों से मेरा पुराना जुड़ाव रहा है। उनकी खास तौर पर ‘द मोटरसाइकिल डायरीज’ और ‘आई एम स्टिल हियर’ जैसी फिल्मों ने एनएसडी के दिनों से मेरी सोच और फिल्म देखने के नजरिए पर काफी असर डाला है। मैंने सेल्स को बताया है कि मेरी फिल्म साओ पाउलो फिल्म फेस्टिवल में पहुंच रही है। अगर वह वहां ‘सेल्वी’ देख पाएं तो यह मेरे लिए सम्मान की बात होगी।” अंजलि ने कहा, ”मशहूर फिल्ममेकर एस.एस. राजामौली भी साओ पाउलो फिल्म फेस्टिवल में मौजूद रहेंगे और इस दौरान ‘सेल्वी’ देखेंगे। उन्होंने कहा, ”बुसान और साओ पाउलो फिल्म फेस्टिवल की तारीखों में आपसी टकराव के कारण फिल्म की टीम का कोई सदस्य साओ पाउलो में ‘सेल्वी’ को रिप्रजेंट नहीं कर पाएगा। ऐसे में अगर एस.एस. राजामौली फिल्म देख पाते हैं तो यह टीम के लिए बेहद खास होगा। ‘सेल्वी’ का बुसान से साओ पाउलो तक पहुंचना पूरी टीम के लिए एक खास सफर है।” फिल्म में अंजलि पाटिल सेल्वी एक मिडिल क्लास परिवार की लड़की ‘सेल्वी’ के किरदार में है। फिल्म में सेल्वी की नौकरी में आने वाली मुश्किलों को दिखाया गया है। उसके काम में कभी 12 घंटे तो कभी इससे बहुत लंबी शिफ्ट चलती हैं। ऐसे में उसके पास न आराम के लिए वक्त बचता है, न अपनी मर्जी से जीने की आजादी होती है। फिल्म धीरे-धीरे एक रहस्यमयी मोड़ लेती है। फिल्म का निर्देशन शेलैश रत्नाकुमार ने किया है।