आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा हमारा अधिकार, सहयोगियों से भी सख्त रुख की अपेक्षा : विदेश मंत्री जयशंकर

मुंबई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा ताज होटल के 26/11 स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने की सराहना की। इस दौरान विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ खुद की रक्षा करने के अपने अधिकार को लेकर स्पष्ट है और अपने सहयोगियों से भी आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस दिखाने की उम्मीद करता है। मुंबई में रुबियो और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘फ्रीडम 250’ रिसेप्शन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विश्व व्यवस्था स्पष्ट रूप से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और देश उसी के अनुसार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “विदेश मंत्री रुबियो, आपका ताज होटल स्थित 26/11 स्मारक पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करना, पूरे मुंबई और समूचे भारत के लिए सराहनीय है। तहव्वुर हुसैन राणा, जो इस जघन्य कांड के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक है, उसके प्रत्यर्पण के आपके प्रशासन के निर्णय का भारत स्वागत करता है। आतंकवाद के विरुद्ध आत्मरक्षा हमारा अधिकार है, इस पर हमारी नीति सुस्पष्ट है और हम अपने मित्र राष्ट्रों से भी आतंकवाद के प्रति कठोर असहिष्णुता की अपेक्षा रखते हैं।” उन्होंने कहा, “इस ऐतिहासिक वर्षगांठ को हम साथ मना रहे हैं, ऐसे में भविष्य की दिशा पर चिंतन स्वाभाविक है। वैश्विक व्यवस्था निस्संदेह एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है और सभी राष्ट्र उसी के अनुरूप अपनी नीतियां तय कर रहे हैं। हर राष्ट्र अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा, यह स्वाभाविक है। ऐसे समय में आपसी साझा हितों का दायरा बढ़ाना ही हमारे संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की कुंजी है।” विदेश मंत्री ने भारत-अमेरिका साझेदारी में व्यापार, निवेश, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में मौजूद नए अवसरों का जिक्र किया, जो दोनों देशों के लिए उपलब्ध हैं और नियमित संवाद व साझा हितों की पहचान निश्चित रूप से एक मार्ग प्रशस्त करने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मजबूत करने में भी साझा हिस्सेदारी है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमारे संबंधों ने वास्तव में एक लंबा सफर तय किया है। इतिहास गवाह है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई अमेरिकियों ने समर्थन दिया था। उसके बाद चाहे बुनियादी ढांचा और शिक्षा हो या खाद्य, कृषि और प्रौद्योगिकी, हमारी साझेदारी ने भारत के विकास में वास्तविक बदलाव लाया है। इसके विपरीत भारतीय प्रतिभा और भारतीय कौशल ने अमेरिका में तकनीक के युग को आकार देने में मदद की है।” उन्होंने कहा कि बेशक हमारे बीच कुछ मुद्दे भी रहे हैं, जिनमें दुनिया और उसकी चुनौतियों के प्रति हमारा नजरिया भी शामिल है। लेकिन पिछले कुछ दशकों में, हमारी साझेदारी लगातार बढ़ी है, नए आयाम और नए पहलू हासिल किए हैं। क्वाड, मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज इनिशिएटिव इसके कुछ उल्लेखनीय उदाहरण हैं। ऊर्जा, रक्षा और नागरिक उड्डयन के क्षेत्रों में विकास वास्तव में उल्लेखनीय रहा है।

वाराणसी : 64 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर लौटी गंगा आरती, जलस्तर घटने से 84 घाटों का संपर्क बहाल

वाराणसी। जल स्तर कम होने के बाद काशी के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर 64 दिनों के अंतराल के बाद गंगा आरती फिर से अपने निर्धारित स्थान पर शुरू हो गई है। इससे काशी के लगभग 84 घाटों के बीच आवाजाही भी फिर से बहाल हो गई है। छठ पूजा और देव दीपावली को देखते हुए घाटों की साफ-सफाई और सजावट का काम तेजी से चल रहा है। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने आईएएनएस से बात करते हुए इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “हर वर्ष की भांति इस साल भी मां गंगा के जलस्तर में वृद्धि हुई थी। अभी वर्तमान में जलस्तर बहुत कम हो चुका है। लेकिन अभी भी वह अपने निर्धारित स्थान से 10-15 फीट ऊपर है। दशाश्वमेध घाट के साथ-साथ काशी के 84 घाट जो अर्धचंद्राकार में हैं। उन सभी घाटों का संपर्क पूरी तरह से खुल गया है। लोग एक घाट से दूसरे घाट पर जा सकते हैं। बाढ़ के बाद जो मिट्टी आती है, उसकी पूरी साफ-सफाई चल रही है।” उन्होंने आगे बताया कि आने वाले त्योहारों को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुशांत मिश्रा ने कहा, “नवरात्रि के बाद आने वाले पर्व जैसे देव दीपावली और छठ हैं, उनको लेकर भी तेजी से तैयारी चल रही है। दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा मां गंगा की जो दैनिक आरती होती है, वह बाढ़ के दिनों में करीब 64 दिनों तक गंगा सेवा निधि के कार्यालय की छत पर हुई और आज 64 दिनों बाद आरती का जो निर्धारित स्थान है, वहां पर आरती हो रही है, जहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल हुए। 17 अगस्त को आरती कार्यालय की छत पर हुई थी। आज 65वें दिन गंगा आरती अपने भव्य स्वरूप में हुई। सजावट के कार्य धीरे-धीरे होते रहेंगे।” बाढ़ के कारण पिछले दो महीनों से गंगा आरती घाट पर नहीं हो पा रही थी और उसे गंगा सेवा निधि के कार्यालय की छत पर आयोजित किया जा रहा था। अब जलस्तर घटने के बाद आरती अपने मूल स्वरूप में लौट आई है, जिससे श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है। हजारों श्रद्धालु आरती में शामिल होने के लिए घाट पर पहुंचे।

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन: राजस्थान के कोटा में नाव पलटी, चार बच्चों के डूबने की आशंका

जयपुर। मंगलवार शाम को राजस्थान के कोटा जिले में चंबल नदी की दाहिनी मुख्य नहर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक नाव पलट गई, जिसमें चार बच्चों के डूबने की आशंका है। नाविक समेत तीन लोगों को बचा लिया गया है, जबकि लापता बच्चों की तलाश के लिए व्यापक तलाशी अभियान जारी है। यह घटना बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में हुई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), नगर निगम और स्थानीय गोताखोरों की टीमें नहर में तलाशी के लिए तैनात की गई हैं। बचाव अभियान में तीन नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह समूह विज्ञान नगर के संजय नगर इलाके से दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए आया था। वे एक छोटी लकड़ी की नाव में सवार हुए थे, जिसके बीच में प्रतिमा रखी हुई थी। नहर के बीचोंबीच नाव पलट गई, जिससे उसमें सवार लोग पानी में गिर गए। लापता हुए चारों बच्चों की पहचान केशू, गोलू, सुरेश और राहुल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि माला कंवर, दीपक और नाविक तैरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंच गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और प्रशासन को खोज एवं बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से अत्यंत तत्परता से कार्रवाई करने का आग्रह किया और लापता बच्चों के सुरक्षित मिलने की आशा व्यक्त की। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और इस कठिन समय में उन्हें शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। घटना के बाद, जिला कलेक्टर पीयूष समरिया, नगर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम, मंत्रिमंडल मंत्री मदन दिलावर और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट रवि वर्मा, अन्य पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बचाव अभियान की निगरानी के लिए घटनास्थल पर पहुंचे। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान, नगर निगम की बचाव टीमें और गोताखोर नहर में व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं। अभियान जारी रहने के दौरान अधिकारी बचाव टीमों के साथ समन्वय कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छोटी नाव में सात लोग सवार थे, जिनमें से तीन-तीन दोनों तरफ बैठे थे और दुर्गा प्रतिमा बीच में रखी थी। नाव चालक ही नाव चला रहा था जब वह पलट गई। बताया जा रहा है कि माला कंवर, दीपक और नाविक तैरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में कामयाब रहे, जबकि चारों बच्चे तेज धारा में बह गए। इस घटना से परिवारों में गहरा सदमा लगा है। दुर्घटना की खबर मिलते ही रिश्तेदार घटनास्थल पर पहुंच गए और अपने प्रियजनों को बेसब्री से खोजते नजर आए। बचाव कर्मियों के प्रयासों के दौरान नहर के पास भारी भीड़ जमा हो गई। प्रशासन की तत्काल प्राथमिकता चारों लापता बच्चों का पता लगाना है। खोज अभियान अभी भी जारी है।

शिलांग के पास कैमरा ट्रैप में दिखा दुर्लभ चीनी पैंगोलिन, संरक्षण को मिली नई उम्मीद

कोलकाता। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के शोधकर्ताओं को मेघालय की राजधानी शिलांग के निकट लगाए गए कैमरा ट्रैप में गंभीर रूप से संकटग्रस्त चीनी पैंगोलिन की मौजूदगी दर्ज करने में सफलता मिली है। संस्थान के अनुसार, उसके अध्ययन क्षेत्र में इस प्रजाति के दर्ज होने का यह पहला मामला है। डब्ल्यूआईआई ने कहा, “यह दुर्लभ रिकॉर्ड हमारे जारी प्रोजेक्ट ‘मेघालय में स्तनधारी जीवों के समूहों का आकलन’ के तहत सामने आया है, जो शिलांग के शहरी क्षेत्र की सीमा से लगे रियात लाबान और लैतकोर आरक्षित वनों पर केंद्रित है।” शहर के बाहरी हिस्सों में स्थित ये वन क्षेत्र जैव विविधता से बेहद समृद्ध हैं। चीनी पैंगोलिन के अलावा कैमरा ट्रैप में लार्ज इंडियन सिवेट, लेपर्ड कैट, मास्क्ड पाम सिवेट, येलो-थ्रोटेड मार्टेन, इंडियन क्रेस्टेड पोरक्यूपाइन और कालीज तीतर जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां भी दर्ज की गईं। शोधकर्ताओं ने कहा कि शहरों के समीप स्थित वन क्षेत्रों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि ये आवास विखंडन और शहरीकरण से प्रभावित वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण शरणस्थली का काम करते हैं। डब्ल्यूआईआई ने कहा, “चीनी पैंगोलिन जैसी गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति का अनेक मांसाहारी और छोटे स्तनधारी जीवों के साथ इन वनों में पाया जाना इस बात का प्रमाण है कि ये वन जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका सख्ती से संरक्षण और संरक्षण किया जाना चाहिए।” चीनी पैंगोलिन भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी हिस्सों, दक्षिण-पूर्व एशिया के उत्तरी क्षेत्रों और दक्षिणी चीन में पाया जाता है। वर्ष 2014 से इसे आईयूसीएन रेड लिस्ट में गंभीर रूप से संकटग्रस्त (क्रिटिकली एंडेंजर्ड) श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रजाति के लिए सबसे बड़ा खतरा अवैध शिकार है। पिछले कुछ दशकों में इसके मांस और शल्क (स्केल्स) के लिए लाखों पैंगोलिन मारे गए हैं। इनके शल्कों का उपयोग पारंपरिक चीनी चिकित्सा पद्धति में किया जाता है, हालांकि किसी भी बीमारी के इलाज में इनके प्रभावी होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। एक समय भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में भी चीनी पैंगोलिन की अच्छी-खासी आबादी मौजूद थी, लेकिन शिकार और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में इनके शल्कों की तस्करी के कारण इनकी संख्या में भारी गिरावट आई। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि कानून सख्त होने के बावजूद उनके प्रभावी क्रियान्वयन में चुनौतियां बनी हुई हैं। एक वन अधिकारी ने बताया कि अक्सर तस्करी में पकड़े जाने वाले लोग केवल कूरियर होते हैं, जबकि अवैध नेटवर्क चलाने वाले सरगना शायद ही कभी कानून के शिकंजे में आते हैं। करोड़ों रुपए के इन नेटवर्कों को वे प्रभावी ढंग से बचाने में सफल रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डब्ल्यूआईआई जैसी सरकारी संस्थाओं द्वारा कैमरा ट्रैप में इन दुर्लभ जीवों का दर्ज किया जाना संरक्षण प्रयासों को मजबूत करेगा और विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को बचाने में मददगार साबित हो सकता है।

बिहार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अस्पताल पहुंचकर नीरज कुमार का जाना हाल, बेहतर इलाज का दिया निर्देश

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार की शाम पटना स्थित जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचकर जदयू नेता और विधान परिषद चुनाव में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए प्रत्याशी नीरज कुमार के स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से उनके इलाज के संबंध में बातचीत की और नीरज कुमार के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती नीरज कुमार से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की अद्यतन स्थिति के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को नीरज कुमार का बेहतर उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया। मुख्यमंत्री ने उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी प्राप्त करते हुए इलाज में किसी तरह की कमी नहीं रहने देने पर जोर दिया। उन्होंने नीरज कुमार के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और वरिष्ठ चिकित्सक भी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीरज कुमार को एनडीए ने अपना प्रत्याशी बनाया हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मी बनी हुई है। दरअसल, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज ने अनुज सिंह को प्रत्याशी बनाया है, जिसके प्रचार की कमान जदयू के विधायक अनंत सिंह संभाल रहे हैं। इससे पहले नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई थी। जानकारी के अनुसार उन्हें सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए पटना के जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने की सूचना के बाद उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों के बीच चिंता का माहौल है।

पंजाब: लुधियाना विजयदशमी उत्सव में शामिल हुए गृह मंत्री अमित शाह, ‘चिट्टे’ के रावण का किया दहन

लुधियाना। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लुधियाना पंजाब में विजयदशमी उत्सव में भाग लिया और ‘चिट्टे के प्रतीकात्मक रावण’ का दहन किया। अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमारी परंपरा में रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। विजयदशमी का दिन हर व्यक्ति को अपने अंदर के अहंकार, मद, लोभ और अन्य बुराईयों को समाप्त करने का दिन है। आज ही के दिन हजारों साल पहले प्रभु श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी और तब से पूरी दुनिया बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में प्रभु श्री राम की विजय को मनाती है। उन्होंने कहा कि वह बचपन से सुनते आए थे कि रावण दहन देखना है तो लुधियाना में जाकर देखो, 200 साल से यहां पर रामलीला कमेटी रावण दहन का कार्यक्रम करती है। अमित शाह ने कहा कि उन्होंने पंजाब के तीन स्थानों पर नशे के खिलाफ लड़ाई में अपने बेटों को खोने वाले परिवारों से आज मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उन परिजनों की आंखों के आंसू, उनके सवाल और वेदना किसी भी व्यक्ति को झंझोड़ कर रख देने वाली है। गृह मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने एक हत्या की जांच सीबीआई को सौंपी है। उन्होंने पंजाब सरकार से कहा कि बाकी दो हत्याओं की जांच भी सीबीआई को सौंप दे। गृह मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन मामलों में न्याय होकर रहेगा। एक बार सीबीआई को जांच सौंपने के बाद इन हत्याओं में कितना भी बड़ा व्यक्ति संलिप्त हो, मोदी सरकार उसे ढूंढकर जेल की सलाखों के पीछे डाल देगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज विजयदशमी के दिन ही यह संकल्प लेते हैं कि 31 दिसंबर 2029 तक हम पूरे पंजाब को नशे के कारोबार से मुक्त कर एक नशामुक्त पंजाब बनाएंगे। उन्होंने कहा कि अपनी जान गंवाने वाले तीनों बहादुरों को इससे बड़ी श्रद्धांजलि कोई नहीं हो सकती। गृह मंत्री शाह ने कहा कि पंजाब की जनता एनसीबी की टोल फ्री हेल्पलाइन पर नशे के कारोबार की सूचना देगी तो मोदी सरकार उस पर कार्रवाई करेगी। अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का रिकॉर्ड है कि हमने जो कहा है, वह करके दिखाया है। धारा 370 और 35 ए चली गई, आतंकवाद समाप्ति की कगार पर है, और नक्सलवाद को हमने समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब हम नशे के कारोबार को भी समाप्त कर देंगे।

लद्दाख का पहला मेडिकल कॉलेज शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से शुरू होगा

लेह। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने लद्दाख के पहले मेडिकल कॉलेज की स्थापना को मंजूरी दे दी है, जो शैक्षणिक वर्ष 2027-38 से शुरू होगा। उपराज्यपाल सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “लद्दाख के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि!” उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से मेडिकल कॉलेज के संचालन को मंजूरी दिए जाने के बाद लेह में लद्दाख का पहला मेडिकल कॉलेज साकार होने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जी का तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मेरे अनुरोध पर ध्यान दिया और संकाय एवं सहायक कर्मचारियों की भर्ती शुरू करने से पहले बुनियादी ढांचे के 80 प्रतिशत पूर्ण होने की आवश्यकता से एक बार की छूट प्रदान की। इस महत्वपूर्ण हस्तक्षेप से हमें 103 स्वीकृत नियमित पदों के लिए चरणबद्ध, प्रारंभिक भर्ती प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की अनुमति मिलती है, जबकि हमारे समर्पित शैक्षणिक बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उपराज्यपाल सक्सेना ने कहा कि यह मंजूरी लद्दाख के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा को पूरा करती है। इससे हमारे युवाओं को घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे और पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलेगा। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन चिकित्सा छात्रों के हमारे पहले बैच के स्वागत के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा। जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की लेह बेंच का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 18 अक्टूबर को किया। उद्घाटन समारोह में सुप्रीम कोर्ट और जम्मू एवं कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के न्यायाधीशों के साथ-साथ लद्दाख के उपराज्यपाल और वरिष्ठ नागरिक एवं पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे। केंद्र सरकार पहले ही लेह में आईआईटी और आईआईएम जम्मू के परिसरों की स्थापना को मंजूरी दे चुकी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्र के युवाओं को केंद्र शासित प्रदेश से बाहर जाए बिना ही सर्वोत्तम तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त हो सके।

दिल्ली में रावण के साथ कॉक्रोच के पुतले का भी दहन, दशहरा में दिखी अनोखी परंपरा

नई दिल्ली। दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस में दशहरा समारोह के दौरान केशव रामलीला समिति ने रावण के पुतले के साथ कॉक्रोच के पुतले का भी दहन किया। दशहरा उत्सव के दौरान कॉक्रोच के पुतले का दहन आकर्षण का केंद्र रहा। देशभर में दशहरा के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया गया। वहीं, दिल्ली के पीतमपुरा में कॉक्रोच का 30 फुट ऊंचा पुतला जलाने की अनोखी परंपरा भी देखने को मिली। दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड में दशहरा समारोह की तैयारियां पूरी की गई थीं। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राजेंद्र निवास रामलीला समिति ने रावण का 32 फुट ऊंचा पुतला तैयार किया था। इसके दहन का कार्यक्रम रात 10 बजे निर्धारित किया गया था। समिति के संरक्षक प्रभाकर मिश्रा के अनुसार, इस वर्ष पुतला बनाने की जिम्मेदारी मुस्लिम कारीगरों को दी गई थी। लखनऊ के रामलीला मैदान में 75 फुट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया था, जिसमें यांत्रिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। आयोजकों के अनुसार, पुतले के माध्यम से कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी और सनातन विरोधी तत्वों तथा बौद्धिक नक्सलवाद के खिलाफ संदेश देने का प्रयास किया गया। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लक्ष्मण चौक स्थित हिंदू नेशनल इंटर कॉलेज में रावण दहन का आयोजन किया गया। लक्ष्मण चौक वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शामिल होने का कार्यक्रम था। वहीं, काशीपुर में 55 फुट ऊंचे रावण और 50 फुट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतलों का शाम 7.30 बजे दहन किया जाना था। इसके बाद आतिशबाजी का आयोजन निर्धारित था। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भी इस वर्ष दशहरा समारोह विशेष रहा। वहां पहली बार ऐतिहासिक दशहरा आयोजन के तहत 50 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाना था। रामलीला मैदान में कुंभकर्ण का 45 फुट और मेघनाद का 35 फुट ऊंचा पुतला भी तैयार किया गया था। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के भाटखेड़ी (रावण वाली) गांव में दशहरा मनाने की परंपरा देश के अन्य हिस्सों से अलग है। यहां ग्रामीण रावण और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करने के बजाय उनकी पूजा करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि रावण उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। दशहरे से पहले रावण और कुंभकर्ण की प्रतिमाओं की रंगाई-पुताई की जाती है। दशहरे के दिन भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले कलाकार प्रतिमाओं को भाले से स्पर्श करते हैं, जबकि ग्रामीण समृद्धि की कामना करते हैं। झारखंड की राजधानी रांची में पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से मोरहाबादी मैदान में पारंपरिक रावण दहन का आयोजन किया जाना था। इस कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित था। यहां रावण का 70 फुट, कुंभकर्ण का 65 फुट और मेघनाद का 60 फुट ऊंचा पुतला तैयार किया गया था। आयोजन में रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी भी प्रमुख आकर्षण रहने वाले थे।

विजयादशमी पर उपराष्ट्रपति का संदेश, अंततः सत्य की ही होती है जीत

नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को दिल्ली के लाल किला मैदान में लव कुश रामलीला समिति द्वारा आयोजित दशहरा समारोह में भाग लिया। सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने दशहरा के शुभ अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह त्योहार बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभु श्री राम का जीवन मर्यादा, त्याग, प्रेम, भाईचारा, माता-पिता के प्रति आदर और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों से लोगों को प्रेरित करता रहता है। उन्होंने कहा कि इन आदर्शों को दैनिक जीवन में अपनाने से मजबूत परिवार, एक सामंजस्यपूर्ण समाज और एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण होगा। रावण का पुतला जलाने का जिक्र करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि यह अवसर अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करके अपने भीतर के रावण को नष्ट करने का गहरा संदेश भी देता है। उन्होंने लोगों से समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता के बंधन को मजबूत करने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने मादक पदार्थों के दुरुपयोग की चुनौती पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मादक पदार्थों का सेवन देश के युवाओं के स्वास्थ्य, क्षमता और भविष्य के लिए खतरा है। उन्होंने युवाओं से मादक पदार्थों से दूर रहने का आग्रह किया और भारत से मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खतरे को खत्म करने के लिए सामूहिक संकल्प का आह्वान किया। उपराष्ट्रति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आज दिल्ली के लाल किले के मैदान में दशहरा समारोह में भाग लिया। दशहरा हमें याद दिलाता है कि सत्य और धर्म हमेशा बुराई पर विजय प्राप्त करते हैं। आइए हम अपने भीतर के रावण को जीतने का संकल्प लें और अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के आदर्श हमें एक सामंजस्यपूर्ण समाज और एक विकसित भारत की ओर मार्गदर्शन करते रहें।

सीजेपी नेताओं की रिहाई की मांग, नवीन पटनायक बोले- राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर लंबी हिरासत उचित नहीं

भुवनेश्वर। ओडिशा के नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) और बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने मंगलवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास का समर्थन किया। उन्होंने उन्हें न्यायिक हिरासत से तुरंत रिहा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करें और कानून के शासन पर युवाओं का भरोसा बनाए रखें। पटनायक ने मंगलवार को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा, “आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत की तुरंत समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें बिना देरी के रिहा किया जाना चाहिए। प्रतिबंधित इलाके में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए इतनी लंबी हिरासत नहीं होनी चाहिए। न्यायपालिका और कार्यपालिका को यह सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए कि देश के युवाओं का कानून के शासन और संवैधानिक अधिकारों से भरोसा न उठे।” 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर (जो अब विरोध-प्रदर्शन के लिए अधिकृत जगह नहीं है) में निजी परिसर के रास्ते से प्रवेश करने और पुलिसकर्मियों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के आरोप में हिरासत में लिए गए 14 लोगों में रांका और दास भी शामिल थे। इस मामले के सिलसिले में, 14 अक्टूबर को सीजेपी के दो नेताओं को शुरुआती तौर पर पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। वे मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) में अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए थे। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) ऋतु राज ने सोमवार को दास और रांका की न्यायिक हिरासत को दो दिन और बढ़ाकर 21 अक्टूबर तक कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके बर्ताव से “कानून के प्रति कोई सम्मान” नहीं दिखता और इससे पता चलता है कि “प्रतिबंधित (डी-नोटिफाइड) इलाकों में विरोध प्रदर्शन करना उनकी आदत” बन गई है। अपने आदेश में, मजिस्ट्रेट ने कहा कि इन दोनों व्यक्तियों ने जानबूझकर उन बॉन्ड का उल्लंघन किया है, जो उन्होंने 11 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम जिले के एसईएम के समक्ष भरे थे। इसके बाद, उन्होंने मौजूदा मामले में शांति भंग की है। मजिस्ट्रेट ने कहा कि सीजेपी के दोनों नेताओं ने बहस के दौरान यह भरोसा दिलाया था कि वे अपराध को नहीं दोहराएंगे, लेकिन उनके पिछले बर्ताव और जांच अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों को देखते हुए, उनके इस आश्वासन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।