आंध्र प्रदेश में जलाशय में डूबी पांच महिलाएं

अमरावती। शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले में एक जलाशय में पांच महिलाएं डूब गईं। यह घटना पेनुकोंडा के पास स्थित गोल्लापल्ली जलाशय में हुई। पुलिस के अनुसार, दरगापेट निवासी 50 वर्षीय गायत्री अपनी बेटी अश्विनी और पड़ोसियों पुष्पा, हसीना और महीन के साथ जलाशय देखने गई थीं। महिलाओं का यह समूह गलती से जलाशय में डूब गया। स्थानीय लोगों ने उनके शव निकाले। अश्विनी की हाल ही में शादी हुई थी, और वह अपने पति के साथ मुंबई में रह रही थीं। वह दशहरा की छुट्टियों के लिए अपने माता-पिता के घर गई थीं। पेनुकोंडा के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) शिव प्रसाद ने बताया कि पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पांच महिलाओं की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से घटना के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि महिलाएं गोल्लापल्ली जलाशय घूमने गई थीं, जहां वे फिसलकर पानी में गिर गईं। स्थानीय मछुआरों ने उनके शव बरामद किए। उन्होंने यह भी बताया कि सभी पीड़ित पेनुकोंडा मंडल के दुर्गापेट की निवासी थीं। उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने जिला कलेक्टर को दुर्घटना के कारणों की जांच करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि एक पर्यटन यात्रा के दौरान पांच लोगों की जान जाने से गहरा दुख हुआ है। उन्होंने इस घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। पवन कल्याण ने आश्वासन दिया कि तेलुगु देशम पार्टी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पर्यटन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और जलाशयों और गहरे पानी वाले क्षेत्रों में लाइफगार्ड की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआरसीपी अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने पांच महिलाओं की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ सैर पर गई महिलाओं का इस तरह दुखद अंत होना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से प्रार्थना की कि उन्हें इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें। वाईएसआरसीपी अध्यक्ष ने राज्य सरकार से मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता और पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।
नितिन नवीन नवरात्रि के पावन अवसर पर दो दिवसीय बिहार प्रवास पर रहेंगे

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 17-18 अक्टूबर 2026 को पटना, बिहार के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना के इस पावन अवसर पर उनका यह प्रवास अत्यंत विशेष है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन विभिन्न मां दुर्गा पंडालों का दर्शन करेंगे और मां का आशीर्वाद लेंगे। महाशक्ति की इस आराधना के साथ-साथ वे इस प्रवास के दौरान प्रदेश की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठकों और संवाद सत्रों में भी शामिल होकर कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करेंगे। प्रवास के पहले दिन 17 अक्टूबर को अपराह्न 3:00 बजे नितिन नवीन पटना के ऐतिहासिक और सबसे भव्य ‘डाक बंगला चौराहा’ पंडाल पहुंचेंगे, जहां वे मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर उनके चरणों में शीश नवाएंगे। इसके पश्चात, प्रवास के दूसरे दिन, 18 अक्टूबर को प्रातः 9:00 बजे से सायं 5:40 बजे तक राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने अन्य निर्धारित कार्यक्रमों में भाग लेंगे और जन-जन के कल्याण के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना करेंगे। बता दें कि पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा था कि पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या किया जाना राज्य में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के तहत कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को उजागर करता है। उन्होंने इसे शासन की गंभीर विफलता बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या बेहद चौंकाने वाली है। यह पंजाब में आप सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति को उजागर करती है।” उन्होंने कहा, “आम आदमी पार्टी नशामुक्त पंजाब का वादा करके सत्ता में आई थी। आज हालात यह हैं कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग ही सुरक्षित नहीं हैं। यह प्रशासन की गंभीर विफलता है। अगर ड्रग माफिया के खिलाफ लड़ने वाले लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो पंजाब में कौन सुरक्षित है?
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित, व्यापारियों ने रोजाना 100 करोड़ के नुकसान का किया दावा

नई दिल्ली। दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शन का असर बाजारों के कारोबार पर पड़ने का दावा करते हुए व्यापारियों ने चिंता जताई है। खान मार्केट, कनॉट प्लेस और बंगाली मार्केट से जुड़े व्यापारियों के मुताबिक प्रदर्शन के कारण ग्राहक बाजारों में आने से कतरा रहे हैं, जिससे बिक्री प्रभावित हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के इस मौसम में कारोबार में गिरावट उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकती है। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहता और नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने प्रदर्शन के कारण कारोबार पर पड़ रहे असर को लेकर अपनी बात रखी। वहीं, बंगाली मार्केट एसोसिएशन के महासचिव प्रमोद गुप्ता ने कारोबारियों की आजीविका को लेकर चिंता जताई। संजीव मेहता ने बाजार की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मुश्किल से चार ग्राहक घूमते दिखाई दे रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन के कारण ग्राहक बाजार आने से डर रहे हैं और दुकानदारों की बिक्री प्रभावित हो रही है। दुकानों में सामान पड़ा है और व्यापारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कारोबार के लिहाज से अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का महीना बेहद महत्वपूर्ण है। इन्हीं महीनों की बिक्री से व्यापारी सालभर का खर्च चलाते हैं और अपने कारोबार से जुड़े परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। प्रदर्शनों के समय पर सवाल उठाते हुए मेहता का आरोप है कि हिंदू त्योहारों के दौरान बिना वजह प्रदर्शन किए जा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों से व्यापारियों की आजीविका पर असर पड़ रहा है। नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने दावा किया कि कारोबारियों को प्रतिदिन करीब 100 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। कनॉट प्लेस, जनपथ, पालिका बाजार, मोहन सिंह प्लेस, म्युनिसिपल मार्केट और शंकर मार्केट सहित आसपास के क्षेत्रों के व्यापार पर इसका असर पड़ा है। यह नुकसान कई दिनों से जारी है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने त्योहारों को ध्यान में रखकर पहले ही बड़ी मात्रा में सामान खरीद लिया है और उसमें निवेश किया है, लेकिन बिक्री प्रभावित होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति सामान्य नहीं होती है तो कारोबारियों का नुकसान और बढ़ सकता है। भार्गव ने कहा कि हालात सामान्य होने पर व्यापारियों की पहली प्राथमिकता अपने नुकसान की भरपाई करना होगी। इसी वजह से वे कनॉट प्लेस में विरोध-प्रदर्शन नहीं चाहते। व्यापारी कुलदीप कुमार ने कहा कि सीजेपी और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के कारण त्योहारी सीजन में व्यापार को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के व्यापारियों को रोजाना 2,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। बंगाली मार्केट एसोसिएशन के महासचिव प्रमोद गुप्ता ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी फंडिंग मिलने से जुड़ी रिपोर्टों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन करने वालों को ऐसी फंडिंग मिल रही है तो उनकी गतिविधियां जारी रह सकती हैं, लेकिन व्यापारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनका कारोबार कैसे चलेगा।
तिरंगा फहराने से दिक्कत सिर्फ राष्ट्रविरोधियों को होती है, सुप्रिया श्रीनेत का भाजपा-आरएसएस पर हमला

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कॉकरोच जनता पार्टी की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तिरंगा फहराने से दिक्कत सिर्फ राष्ट्रविरोधियों को होती है और 53 साल तक आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराने वालों से और क्या उम्मीद की जा सकती है। सीजेपी की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि जिन्होंने 53 साल तक आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया और वहां तिरंगा फहराने की कोशिश करने वाले युवाओं को ही गिरफ्तार करवा दिया, वे अब तिरंगे का विरोध करेंगे। आज तक वही तिरंगा नागपुर के एक थाने में रखा हुआ है।” उन्होंने कहा कि 53 साल तक ये लोग तिरंगे के विरोध में रहे, इसे ‘अशुभ’ तक बताया तो वे भला किसी और को इसे फहराने कैसे देंगे? जो लोग शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा फहराने का विरोध करते हैं, वे कितने राष्ट्रविरोधी हैं, इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं। जदयू विधायक अनंत सिंह के नौ हत्याओं में शामिल होने वाले बयान पर कांग्रेस नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हो या कोई और अदालत, उसे इस मामले का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। इनकी सत्ता ऐसे हत्यारों के सहारे टिकी है, जिन पर हत्या समेत गंभीर आरोप हैं। वे हत्याएं करने की बात ऐसे करते हैं जैसे यह कोई सम्मान की बात हो। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि अगर कल कोई सामने आकर कहे कि उसने कई बलात्कार किए हैं, तो क्या आप उसे भी अपनी सरकार में शामिल कर लेंगे? यही भाजपा का असली चरित्र है, इनकी सत्ता ऐसे ही लोगों के सहारे चल रही है। पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं की हत्या पर उन्होंने कहा कि जब आप सत्ता में होते हैं तो सवाल आपसे ही पूछे जाते हैं। सत्ता आपके पास है, संसाधन आपके पास हैं, संस्थाएं आपके पास हैं और सारी नशा विरोधी एजेंसियां, जिसमें पंजाब पुलिस भी शामिल है, आपके पास हैं। पंजाब में नशा बढ़ रहा है और आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल इसे रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं, तो सवाल आपसे ही पूछा जाना लाजिमी है। आप इन सवालों से बच नहीं सकते। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आप शिकायत करते थे कि पुलिस आपके नियंत्रण में नहीं है, लेकिन पंजाब में तो पूरी पुलिस आपके अधीन थी तो फिर आपने पूरे पंजाब को नशे की गिरफ्त में कैसे जाने दिया? वहीं, काग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि भाजपा को ‘गांधी’ शब्द से डर लगता है। भाजपा अब यह भी तय करना चाहती है कि किसका क्या उपनाम होना चाहिए। किसी का उपनाम क्या होना चाहिए? हर नागरिक को अपने उपनाम का अधिकार है। यह सब दिखाता है कि वे हिले हुए हैं और डरे हुए हैं। उन्हें गांधी से डर लगता है, गांधी उपनाम से डर लगता है और राहुल गांधी से डर लगता है। राहुल गांधी को जनता से, खासकर युवाओं और छात्रों से जो समर्थन मिल रहा है, उससे वे डरते हैं। राहुल गांधी की लोकप्रियता उन्हें हिला रही है। सीजेपी की ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध मार्च पर सीजेपी प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने कहा कि हमारा आज मुख्य लक्ष्य यह बताना है कि राष्ट्रीय ध्वज कहां फहराना है, यह तय करना हमारा अधिकार है। कोई यह तय न करे कि हम अपना झंडा कहां लहरा सकते हैं, हम खुद यह करेंगे। झंडा लंबे समय से देशभक्ति का प्रतीक रहा है, इसलिए हमारे रास्ते में कोई रोक-टोक या बाधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे दो साथियों को जंतर-मंतर से सिर्फ झंडा लहराने के कारण हिरासत में लेकर जेल में डाल दिया गया था, लेकिन हम पीछे नहीं हट रहे हैं। कई सीजेपी स्वयंसेवक, विभिन्न छात्र संगठन और आम लोग यहां इकट्ठा हुए हैं, क्योंकि उनका मानना है कि कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हम क्या कर सकते हैं और क्या नहीं। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके की हिरासत पर सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि इससे पता चलता है कि सरकार कितनी डरी हुई है। वह अभिजीत से, सीजेपी से और असहमति की आवाजों से कितनी डरती है। उन्हें डर है कि अगर अभिजीत अपने मार्च के दौरान लोगों तक पहुंचता है, तो लोग उसकी बात सुनने के लिए उत्सुक होंगे। सरकार सच्चाई से डरती है, क्योंकि अभिजीत लोगों को सच्चाई बताता है।
‘रिजीम चेंज’ शब्द षड्यंत्र का प्रतीक, कांग्रेस-‘इंडी’ गठबंधन को जनसमर्थन नहीं: सुधांशु त्रिवेदी

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस, ‘इंडी’ गठबंधन और वामपंथी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए कथित आंदोलन को फ्लॉप बताते हुए इसे विदेशी साजिश और ‘रिजीम चेंज’ की राजनीति करार दिया। सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, “कांग्रेस, ‘इंडी’ गठबंधन के दलों और विलुप्त होते हुए वामपंथी दलों के निरंतर समाप्त होते जनसमर्थन और निरंतर नैतिक पतन से जब उन्हें अब राजनीतिक दृष्टि से सफलता की कोई संभावना नहीं दिख रही है, तब हिंसक संघर्ष और षड्यंत्र के द्वारा विदेशी शक्तियों के साथ हाथ मिलाकर तख्तापलट किए जाने वाले ‘रिजीम चेंज’ जैसे शब्दों का प्रयोग अब भारत की राजनीति में दिखाई पड़ रहा है। इसके नए व्याकरणकर्ता आकर यह समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि नहीं, यह तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।” उन्होंने ‘गवर्मेंट चेंज’ और ‘रिजीम चेंज’ में अंतर समझाते हुए कहा, “हम लोकतांत्रिक प्रक्रिया स्थापित करना चाहते हैं। चुनाव के द्वारा ‘गर्वेंमेंट चेंज’ शब्द होता है और जो ‘रिजीम चेंज’ शब्द होता है, वह षड्यंत्र और हिंसक संघर्ष के द्वारा तख्तापलट करने के प्रयास को होता है।” कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन पर तंज कसते हुए त्रिवेदी ने कहा, “कांग्रेस, ‘इंडी’ गठबंधन, वामपंथी दलों और कुछ अन्य संगठनों के द्वारा कनॉट प्लेस में जो तथाकथित विराट आंदोलन करने की घोषणा की गई थी, मुझे लगता है कि वहां चंद मुट्ठी भर लोग ही आए। चूंकि कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल को इंदिरा चौक कहते हैं और इनर सर्किल को राजीव चौक कहते हैं तो निश्चित रूप से स्वर्गीय इंदिरा और स्वर्गीय राजीव वहां से बैठकर उनका सिर शर्म से झुक गया होगा कि आज क्या स्थिति हो गई है कि आप चंद मुट्ठी भर लोग भी यहां एकत्र नहीं कर पाए।” भाजपा सांसद ने युवाओं से अपील करते हुए कहा, “मैं देश के सभी युवाओं, किशोरों और नौजवानों से कहना चाहता हूं कि वे बहुत समझदारी से काम लें। सभी युवाओं से, चाहे वे इस आंदोलन में शामिल हों या बाहर से देख रहे हों, मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि किसी और के खेल में मोहरा न बनें। ये बड़े स्तर की अंतरराष्ट्रीय साजिशें और मिलीभगत हैं।” त्रिवेदी ने कहा कि परीक्षा सुधार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर युवाओं की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा, “एक उदाहरण देखिए कि परीक्षा सुधार जैसे मुद्दे पर, जो सच में सभी के दिल के करीब था, आपकी भावनाओं का फायदा उठाया गया। और चार महीने के भीतर ही पूरा ध्यान उस तरफ चला गया जो मेरे हिसाब से उनका असली मकसद था।” उन्होंने कनॉट प्लेस में भीड़ को लेकर भी सवाल उठाए। त्रिवेदी ने कहा, “हालांकि, मैं यह कहूंगा कि जो प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में अपना प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें जरूर राहत मिली होगी। उनकी इस राहत को तीन शब्दों में समेटा जा सकता है: टीजीआईएफ — यानी थैंक्स गॉड्स इट्स फ्राइडे (‘शुक्र है कि आज शुक्रवार है।)’” उन्होंने कहा कि शुक्रवार की शाम और वीकेंड पर कनॉट प्लेस में स्वाभाविक रूप से भारी भीड़ होती है। “वीकेंड की शाम को, लगभग 6, 7 या 8 बजे कोई भी वहां जाकर देख सकता है कि इनर सर्कल में अक्सर काफी भीड़ होती है। इससे यह सवाल उठता है कि इस भीड़ को किस तरह पेश किया जा रहा है।” त्रिवेदी ने हिंदी कहावत का जिक्र करते हुए कहा, “हींग लगे न फिटकरी, रंग चोखा आए — जिसका मतलब है कि बहुत कम मेहनत में भी कोई चीज एक बड़ी उपलब्धि जैसी लग सकती है। अगर वहां सिर्फ 100 या 200 लोग भी इकट्ठा हों तो भी उस जगह पर पहले से मौजूद भारी भीड़ की वजह से यह जमावड़ा बहुत बड़ा लग सकता है।” अंत में उन्होंने गंभीर सवाल उठाया कि यह प्रदर्शन इसी खास समय पर और खासकर कनॉट प्लेस और सेंट्रल दिल्ली के इलाके में ही क्यों आयोजित किया गया।
पहले सिर पर ढोते थे घड़े, अब घर-घर नल से जल: तुमकुरु में जल जीवन मिशन बना वरदान, लाभार्थियों ने जताया आभार

तुमकुरु। केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना के तहत तुमकुरु जिले के अधिकांश गांवों के घरों में पेयजल नल कनेक्शन लगाए गए हैं, जिससे स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। इस प्रगति का स्पष्ट उदाहरण तुमकुरु तालुक की मैदाला ग्राम पंचायत में देखा जा सकता है, जहां परियोजना के कार्यान्वयन के बाद निवासी अब पेयजल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे वे दूषित पानी के खतरों से बचे हुए हैं। गांव में एक ओवरहेड पानी की टंकी के निर्माण के साथ स्वच्छ पेयजल हर घर तक सीधे नल कनेक्शन के माध्यम से पहुंच रहा है, जो आपूर्ति नेटवर्क को नियंत्रित और संचालित करता है। स्थानीय जीवन पर केंद्रीय योजना के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए तुमकुरु जिले के मैदाला गांव की जल जीवन मिशन की लाभार्थी प्रमिला ने अपना अनुभव साझा किया। लाभार्थी प्रमिला ने कहा, “हमारे गांव में जल जीवन मिशन लागू होने से पहले हमें मीठा पीने का पानी लाने के लिए बोरवेल या खुले कुओं तक पैदल जाना पड़ता था। बाद में गांव में एक ओवरहेड टंकी लगाई गई और उसके बाद केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन शुरू किया गया। आज नल कनेक्शन के जरिए पानी सीधे हमारे दरवाजे तक पहुंच रहा है। कम से कम दिन में एक बार, या तो सुबह या शाम को आता है।” उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लागू होने से पहले हमें कपड़े धोने के लिए झील के पानी पर निर्भर रहना पड़ता था। वह पानी अक्सर दूषित होता था, जिससे हमें काफी परेशानी होती थी। अब जल जीवन मिशन के जरिए हमारे घर के नलों से साफ और सुरक्षित पानी आ रहा है। लाभार्थी प्रमिला ने कहा कि पहले हमें खुले कुओं तक जाना पड़ता था, सिर पर भारी बर्तन ढोने पड़ते थे और पानी खींचकर लाना पड़ता था। समय के साथ एक सिस्टम टैंक लगाया गया। बाद में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन शुरू किया। ओवरहेड टैंक सिस्टम बनाए गए और हर घर में नल के पानी के कनेक्शन लगाए गए। उन्होंने कहा कि अब हमें सुबह या शाम को नियमित रूप से पानी मिलता है, जो सभी के लिए बहुत मददगार रहा है। पहले हमें गंदे कपड़ों को धोने के लिए झीलों और तालाबों में ले जाना पड़ता था और रुके हुए पानी में धोना पड़ता था। केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के माध्यम से हर घर में सीधे पानी पहुंचाकर वास्तव में चीजों को सुविधाजनक बना दिया है। बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए आभार व्यक्त करते हुए, तुमकुरु जिले के मैदाला गांव के एक अन्य निवासी नरसिम्हमूर्ति ने कहा, “अब हमें जल जीवन मिशन के तहत सीधे घर पर नल का पानी मिल रहा है। पहले हमें घर की जरूरतों के लिए हाथ से चलने वाले बोरवेल, झीलों और खुले कुओं से पानी लाना पड़ता था। जब से हमारे गांव में यह योजना लागू हुई है, तब से यह हमारे लिए बेहद फायदेमंद रही है। मोदी सरकार की इस पहल ने हमारे जीवन में बड़ी सुविधा ला दी है।” जल जीवन मिशन के तहत घर में पानी के कनेक्शन को लेकर नंजुंडामूर्ति ने कहा कि हमें लाइन दे दी गई है। पाइपलाइन बिछा दी गई है और अब हमारे घर में पानी आ रहा है। अब हमें कोई परेशानी नहीं है। ये पानी जल जीवन मिशन के तहत पानी आ रहा है। पहले हम झीलों और तालाबों से पानी खींचते थे। हम खुले कुओं से पानी खींचते थे और शुरू में हम हाथ के बोरवेल का इस्तेमाल करते थे। हाथ के बोरवेल के बाद हमें पानी की टंकी मिली। अब जल जीवन मिशन लागू होने के बाद यह हमारे लिए बहुत उपयोगी हो गया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के प्रशासन में केंद्र सरकार की इस योजना से हमें लाभ हुआ है। आसानी से पानी मिलने का मतलब है कि हम सीधे ओवरहेड टंकी से अपने घर के स्टोरेज में पानी खींचते हैं। पहले बोरवेल से पानी लाना पड़ता था।
हरियाणा सरकार धान और बाजरा की खरीद में तेजी लाने में विफल रही: भूपिंदर हुड्डा

चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर हुड्डा ने शुक्रवार को किसानों की दुर्दशा के लिए राज्य भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, सरकार न केवल धान और बाजरा की खरीद में तेजी लाने में विफल रही, बल्कि खरीद केंद्रों से खरीदे गए उत्पादों की समय पर ढुलाई सुनिश्चित करने में भी नाकाम रही। विपक्ष के नेता ने एक बयान में कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण दो दिनों की बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत को बर्बाद कर दिया है। राज्य भर की मंडियों में लाखों मीट्रिक टन धान पानी में डूब गया है, जिससे किसानों और कमीशन एजेंटों दोनों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने के अपने वादे को पूरा करने की मांग की और सरकार से इन नुकसानों की भरपाई के लिए बोनस देने का आग्रह किया। पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने राज्य भर की कई मंडियों का दौरा किया और किसानों तथा कमीशन एजेंटों से बात की, लेकिन उन्हें सरकार की व्यवस्थाओं से कोई भी संतुष्ट नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हर जगह शिकायत एक ही थी: खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं चल रही है। किसान कई समस्याओं में फंसे हुए हैं, जिनमें गेट पास, सत्यापन प्रक्रिया, खरीद सीमा, लंबे ट्रैफिक जाम और अत्यधिक प्रतीक्षा समय जैसी समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जानबूझकर अनदेखी इस हद तक पहुंच गई है कि नमी मापने वाली मशीनों में भी छेड़छाड़ पाई गई है। जब एक ही बैच की उपज को तीन अलग-अलग मशीनों से जांचा गया, तो दर्ज की गई नमी का स्तर एक जैसा नहीं था। हुड्डा ने कहा कि यह सब सरकार की सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि सरकार जानबूझकर किसानों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने से बचने की कोशिश कर रही है, जिससे किसान अपनी फसलें निजी एजेंसियों को कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। सरकार के इस रवैये के कारण किसान धान को एमएसपी से 400 रुपए प्रति क्विंटल कम और बाजरा को एमएसपी से 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर हैं।
सीजेपी के तिरंगा कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संभालने पर दिल्ली पुलिस की तारीफ में भाजपा

नई दिल्ली। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने शुक्रवार को सीजेपी द्वारा तिरंगा फहराने के नाम पर कनॉट प्लेस में अराजकता फैलाने के प्रयास से सफलतापूर्वक और सुचारू रूप से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस की प्रशंसा की। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत देने के बावजूद सौरभ दास और आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का प्रयास किया। इसलिए, केवल तीन दिन पहले दी गई जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने के लिए दिल्ली पुलिस ने दोनों को फिर से मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जिन्होंने उन्हें पांच दिन के लिए जेल भेज दिया। उन्होंने कहा कि सौरभ और आशुतोष को जेल भेजने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने विदेशी प्रायोजकों और नए राजनीतिक संरक्षकों के दबाव में शुक्रवार को युवाओं को कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने के लिए आमंत्रित किया। इससे लोकप्रिय बाजार में उत्सव के माहौल को खराब करने का प्रयास किया गया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने स्थिति को बड़ी सहजता से संभाला, जबकि युवाओं ने भी उनकी अपील पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सीजेपी, उसके विदेशी प्रायोजकों और विपक्षी दलों के राजनीतिक संरक्षकों की अपील के बावजूद, बहुत कम संख्या में युवा कनॉट प्लेस पहुंचे, जिसके परिणामस्वरूप सीजेपी का सरकार-विरोधी भ्रम धराशायी हो गया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल से लेकर प्रशांत भूषण और प्रकाश राज तक गुरुवार देर रात तक युवाओं को कनॉट प्लेस पर तिरंगा फहराने के लिए उकसाने वाले नेताओं में से एक भी नेता शाम 5 बजे युवाओं के समर्थन में वहां नहीं पहुंचा। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि संभव है कि दिल्ली पुलिस सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दिपके को रिहा कर दे या शनिवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश करे। इसलिए, हमें उम्मीद करनी चाहिए कि दिल्ली के लोगों को अगले कुछ दिनों में अपने काम और कारोबार में व्यवधान का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सीजेपी अध्यक्ष, राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल ने मिलकर कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में हजारों छोटे-बड़े व्यापारियों का दिवाली का कारोबार बर्बाद कर दिया है, साथ ही केंद्रीय व्यापारिक जिले में रेस्तरां, दुकानों और कार्यालयों के मालिकों को युवा दिहाड़ी मजदूरों को हटाने के लिए मजबूर कर दिया है।
कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन पर सियासी बवाल, कुमारस्वामी ने 15 करोड़ के मामले में ईडी जांच की मांग की

रामनगर। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को मांग की कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाकर किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन के पीछे बड़ी रकम के कथित लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग से कराई जाए। रामनगर जिले के बिदादी में मीडिया से बात करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि यह स्टिंग ऑपरेशन कर्नाटक में एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। विपक्ष के नेता आर. अशोक के इस बयान का जिक्र करते हुए कि इस ऑपरेशन पर 10 से 15 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, उन्होंने कहा कि वित्तीय लेन-देन की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सिर्फ इसमें शामिल पैसों का हिसाब क्यों लगा रहे हैं? अगर सब कुछ सामने आ गया तो हमारे राज्य की गरिमा और प्रतिष्ठा पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इसमें 15 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन हुआ है। अगर ईडी इसमें दखल देती है, तो सच सामने आ जाएगा और यह भी पता चल जाएगा कि पैसों का लेन-देन कैसे हुआ।” इससे पहले, कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा की गई भर्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर उम्मीदवारों के साथ एक खुली चर्चा के दौरान कुमारस्वामी ने सरकारी कर्मचारियों के कार्यकाल को मौजूदा 35 साल से घटाकर 10, 15 या 20 साल करने का प्रस्ताव रखा, ताकि ज्यादा उम्मीदवारों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकें। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी पाने वाला व्यक्ति आमतौर पर लगभग 35 साल तक काम करता है और अगर इस कार्यकाल को कम कर दिया जाए, तो दूसरों के लिए जगह खाली हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस नए, छोटे कार्यकाल के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों को पेंशन और रिटायरमेंट के अन्य लाभ मिलते रहने चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर आने वाले दिनों में मुझे मौका मिलता है तो मैं इस योजना को लागू करना चाहूंगा। मैं सोच रहा हूं कि युवाओं को रोजगार देने के लिए इस विचार को कैसे अमल में लाया जा सकता है। मेरी नजर में, हर परिवार में कम से कम एक सरकारी नौकरी होनी चाहिए। मैंने अपना यह विचार जनता के सामने रखा है और इस पर चर्चा होनी चाहिए।” नवरात्रि के त्योहार का जिक्र करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि वह युवाओं के भविष्य के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं। उन्होंने जनता से इस प्रस्ताव पर चर्चा करने और अपनी राय साझा करने की अपील की। उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताई और आरोप लगाया कि सरकार योग्य उम्मीदवारों को नौकरी देने में विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि केपीएससी, जो एक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिए सरकारी नौकरियों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन करने के लिए जिम्मेदार है, अब भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि नौकरियों को पैसों के बदले बेचा जा रहा था और आयोग के अध्यक्ष, सदस्य तथा अधिकारी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार में शामिल थे।
बीएसएफ ने हिरासत में लिए गए दो बांग्लादेशी पुलिसकर्मियों को बीजीबी को सौंपा, गलती से सीमा पार कर गए थे

अगरतला। त्रिपुरा के सिपाहीजला जिले के आशाबाड़ी सीमा क्षेत्र के पास गुरुवार रात भारतीय सीमा में प्रवेश करने वाले बांग्लादेश पुलिस के दो कर्मियों को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के बीच हुई फ्लैग मीटिंग के बाद शुक्रवार को बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंप दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि दोनों पुलिसकर्मियों की पहचान सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) इमरान हुसैन और कांस्टेबल रोहित दीवान के रूप में की गई, जो बांग्लादेश के कोमिला जिले के एक पुलिस स्टेशन में तैनात हैं। अधिकारियों के अनुसार, दोनों कर्मी अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास मादक द्रव्य विरोधी अभियान चला रहे थे, तभी कांस्टेबल दीवान ने एक संदिग्ध मादक पदार्थ तस्कर का पीछा किया और अनजाने में भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर गया। स्थानीय निवासियों ने उसे हिरासत में लिया और बाद में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दिया। एएसआई हुसैन को भी उस समय हिरासत में लिया गया था, जब वह अपने सहयोगी को वापस लाने के लिए भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे। एक अधिकारी ने कहा कि दोनों पुलिसकर्मियों को बाद में बीएसएफ की हिरासत में ले लिया गया और आशाबाड़ी सीमा चौकी (बीओपी) पर रात भर पूछताछ की गई। सीमा सुरक्षा बलों और दोनों देशों के अन्य संबंधित अधिकारियों के बीच संचार के बाद उन्हें सौंपने के लिए शुक्रवार को एक फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई। यह बैठक अंतरराष्ट्रीय सीमा की शून्य रेखा के पास आयोजित की गई थी, जिसमें दोनों पक्षों के बीएसएफ कर्मियों और बीजीबी, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने चर्चा में भाग लिया था। अधिकारियों ने बताया कि विचार-विमर्श के बाद दोनों बांग्लादेश पुलिसकर्मियों को बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंप दिया गया। हालांकि, घटना की परिस्थितियों को समझाने या हैंडओवर के सभी विवरणों की पुष्टि करने वाला कोई विस्तृत आधिकारिक बयान तुरंत उपलब्ध नहीं था। त्रिपुरा, जिसकी बांग्लादेश के साथ 856 किमी लंबी सीमा है, तीन तरफ से पड़ोसी देश से घिरा हुआ है, जिससे पूर्वोत्तर राज्य सीमा पार प्रवास के मुद्दों और विभिन्न प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी के प्रति बहुत संवेदनशील और संवेदनशील है। 50 किमी के हिस्से को छोड़कर अधिकांश सीमा पर तस्करी, सीमा पार अपराध, घुसपैठियों और शत्रु तत्वों द्वारा सीमा पार अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए बाड़ लगा दी गई थी।