रिग्ड’ चुनाव का आरोप लोकतांत्रिक भरोसे को पहुंचाता है चोट, पूर्व नौकरशाहों का खुला पत्र

नई दिल्ली। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल, पूर्व राजदूतों और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों सहित पूर्व सिविल सेवकों के एक समूह ने भारत की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का बचाव करते हुए संयुक्त खुला पत्र जारी किया है। पत्र में चुनावों में धांधली के आरोपों को बिना सबूत लगाए जाने पर सवाल उठाते हुए नागरिकों से चुनावी व्यवस्था में स्थापित बहुदलीय सुरक्षा उपायों पर भरोसा करने, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सम्मान करने और मतदाता सूची की जांच करने की अपील की गई है। पत्र में कहा गया है कि चुनावों को ‘रिग्ड’ यानी धांधली से प्रभावित बताने के लिए बिना सबूत इस शब्द का बार-बार इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के भरोसे को नुकसान पहुंचाता है। पत्र लिखने वाले अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में भारत के चुनावों का संचालन किया है या उनका अध्ययन किया है। उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने, मतदान कर्मियों को प्रशिक्षित करने, स्ट्रॉन्ग रूम सील करने और मतगणना की निगरानी जैसे कार्य किए हैं। पत्र के मुताबिक, इन अधिकारियों का किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है और वे अपने अनुभव के आधार पर चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा व्यवस्था को सामने रखना चाहते हैं। पूर्व अधिकारियों ने पुराने चुनावों में बूथों पर हथियारबंद लोगों की मौजूदगी, बाहुबलियों के समर्थकों की गतिविधियों, मतपेटियों में अवैध तरीके से मतपत्र डालने, मतपेटियां चुराने और मतदाताओं को मतदान से रोकने जैसी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बूथ कैप्चरिंग की समस्या इतनी गंभीर थी कि संसद ने 1989 में इसे अपराध घोषित किया। पत्र में दावा किया गया कि कभी बूथ कैप्चरिंग के लिए पहचाने जाने वाले बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव बिना किसी पुनर्मतदान के संपन्न हुआ, जो राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ। इसमें यह भी कहा गया कि 1951 के बाद बिहार में सबसे अधिक मतदान हुआ और महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया। पत्र में कहा गया है कि चुनावी प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी और सुरक्षा के इंतजाम हैं। प्रत्येक उम्मीदवार का एजेंट मतदान केंद्र पर मौजूद रह सकता है और मतदान में पड़े मतों की हस्ताक्षरित गणना प्रति अपने साथ ले जाता है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को एजेंटों के हस्ताक्षर के साथ सील किया जाता है और स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाता है, जहां उम्मीदवारों के एजेंट निगरानी कर सकते हैं। मशीनों की गिनती और कागजी पर्चियों के मिलान की व्यवस्था भी सुरक्षा उपायों का हिस्सा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में बरकरार रखा था। पूर्व अधिकारियों ने तर्क दिया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली करने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों के अधीन काम करने वाले हजारों अधिकारियों और हारने वाले दलों के एजेंटों की मिलीभगत जरूरी होगी। पत्र में कहा गया कि ऐसी किसी साजिश को अब तक साबित नहीं किया गया है। पत्र में चुनाव आयोग की संरचना का उल्लेख करते हुए कहा गया कि आयोग को बहुसदस्यीय निकाय बनाया गया था, ताकि चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की शक्ति किसी एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रित न रहे। सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में इस व्यवस्था को बरकरार रखा था। पत्र के अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्त विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हैं। पूर्व अधिकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची को दुरुस्त करना और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने माना कि इस तरह की बड़ी प्रक्रिया में कुछ असुविधाएं हो सकती हैं, लेकिन इसे राजनीतिक संबद्धता के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। पत्र में कहा गया कि इसी चुनाव आयोग के कार्यकाल में केंद्र में सत्तारूढ़ दल हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में चुनाव हार चुका है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उसे अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। पत्र के अनुसार, जीत के समय चुनावी व्यवस्था को निष्पक्ष और हार के बाद धांधलीपूर्ण बताना उचित नहीं है। पत्र में कहा गया कि बिहार की मतदाता सूची का पिछला गहन पुनरीक्षण 2003 में हुआ था। वर्ष 2025 के पुनरीक्षण के दौरान लगभग 22 लाख मृत मतदाताओं, सात लाख दोहराव वाली प्रविष्टियों और स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके लाखों लोगों के नाम सामने आए। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि मतदाता सूची में ऐसे नाम बने रहने से फर्जी मतदान की आशंका पैदा होती है। उनके अनुसार, मतदाता सूची को दुरुस्त करने का उद्देश्य मतदाताओं को बाहर करना नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाना है। पत्र में स्पष्ट किया गया कि मसौदा मतदाता सूची अस्थायी होती है और उसमें किसी नाम का नहीं होना अपने आप में उस नाम को अंतिम रूप से हटाया जाना नहीं है। किसी मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई के नहीं हटाया जा सकता। इसके बाद अपील के दो स्तर भी उपलब्ध हैं। प्रत्येक राजनीतिक दल बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ अपने एजेंट तैनात कर सकता है। पत्र के मुताबिक, पुनरीक्षण के दौरान मृत और दोहराव वाले नाम हटाए जाने के साथ लगभग 21.5 लाख नए मतदाताओं को भी जोड़ा गया। पत्र में एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की भूमिका का भी जिक्र किया गया। पूर्व अधिकारियों के अनुसार, अदालत ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया, लेकिन इसके प्रत्येक चरण की निगरानी की। अदालत ने मसौदा मतदाता सूची से बाहर रखे गए सभी 65 लाख लोगों के नाम और उन्हें बाहर रखने के कारण प्रकाशित करने का निर्देश दिया। पत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन दावे दाखिल करने की अनुमति दी, पहचान के प्रमाण के रूप में आधार को स्वीकार करने का निर्देश दिया और कहा कि यदि किसी भी चरण में अवैधता पाई जाती है तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है। अपील के लिए मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था भी की गई। पत्र के अनुसार, 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव आयोग के अधिकार को बरकरार रखा और गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जोड़े। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि गलतियों को सुधारा जाना चाहिए, लेकिन एसआईआर की वैधता को लेकर अदालत के फैसले का सम्मान करना
अदाणी डिफेंस को निर्यात प्रदर्शन के लिए मिला ‘एसआईडीएम चैंपियन अवॉर्ड 2026

नई दिल्ली। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने शनिवार को बताया कि उसे यहां सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के आठवें वार्षिक सत्र में रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में निर्यात प्रदर्शन के लिए एसआईडीएम चैंपियन अवॉर्ड 2026 मिला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अनबरासु की मौजूदगी में यह पुरस्कार प्रदान किया। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी विकास, उत्पाद नवाचार, डिजाइन, आयात प्रतिस्थापन, विनिर्माण उत्कृष्टता और निर्यात के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए 15 पुरस्कार दिए गए। कंपनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित उसके विनिर्माण परिसर की सालाना उत्पादन क्षमता 30 करोड़ राउंड है। यहां नाटो मानकों के अनुरूप गोला-बारूद का उत्पादन किया जाता है, जिससे सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल को समर्थन मिलता है। सत्र को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी, अनुसंधान एवं विकास में बढ़ते निवेश और विनिर्माण क्षमता के विस्तार का आह्वान किया। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा, “हमें गर्व है कि भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को विकसित करने के हमारे प्रयासों को मान्यता मिली है। हमारा ध्यान भारत में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने और उन्हें वैश्विक बाजारों में ग्राहकों तक पहुंचाने पर है।” उन्होंने आगे कहा कि कंपनी रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र के ग्राहकों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी और स्वदेशी विनिर्माण में निवेश जारी रखेगी। हालांकि, यह सम्मान अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के कानपुर एम्युनिशन कॉम्प्लेक्स को वर्ष 2025 में डिजाइन, विनिर्माण और परीक्षण में उत्कृष्टता के लिए दिए गए अलग एसआईडीएम चैंपियन अवॉर्ड के बाद मिला है। कंपनी के अनुसार, कानपुर स्थित इस इकाई में स्वचालित विनिर्माण, एआई आधारित गुणवत्ता निरीक्षण, रियल टाइम डेटा विश्लेषण और उत्पादन प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी डिजिटल उत्पादन प्रणाली खतरनाक सामग्रियों को हाथ से संभालने की जरूरत खत्म करती है। कंपनी के मुताबिक, इस इकाई में डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों की मदद से विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में 100 प्रतिशत डिजिटल ट्रेसेबिलिटी यानी उत्पादों और प्रक्रियाओं का पता लगाने की सुविधा भी है। इसके अलावा, इस परिसर में एक बैलिस्टिक परीक्षण रेंज है, जो इलेक्ट्रॉनिक प्रेशर, वेलोसिटी एंड एक्शन टाइम प्रणाली से लैस है। यह परीक्षण रेंज भारत की शीर्ष मान्यता संस्था, नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त है। वहीं, भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, सरकार ने वर्ष 2029 तक सालाना रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
सोनम वांगचुक ने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, रिहाई नहीं होने पर अनशन की चेतावनी

नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। वांगचुक ने कहा कि यदि हिरासत में लिए गए लोगों को रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो वह अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार करने के लिए मजबूर होंगे। वांगचुक ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में एकजुटता और शांति की अपील की। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने शुक्रवार को एक संदेश पोस्ट किया था, तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि प्रदर्शन के दौरान इतनी बड़ी संख्या में नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “भारत अघोषित आपातकाल की स्थिति में है। कल जब मैंने आज के प्रदर्शन में एकता और शांति की अपील करते हुए संदेश पोस्ट किया था, तब मैंने कभी कल्पना नहीं की थी कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अघोषित आपातकाल की स्थिति में होगा।” वांगचुक ने कहा कि उन्हें खुशी थी कि आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए कई नेता मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें जानकारी मिली है कि उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिरासत में लिए गए नेताओं को जल्द रिहा किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि यदि रविवार तक प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो उन्हें अनशन या पदयात्रा शुरू करने पर विचार करना पड़ेगा। इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने शनिवार को प्रदर्शन के दौरान करीब 3,500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी थी। वहीं, पुलिस के एक बयान के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जा रहे करीब 3,500 लोगों को हिरासत में लिया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। दिल्ली की सीमाओं पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कई कदम उठाए। इसी बीच, भारतीय रेलवे ने नई दिल्ली आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया और कुछ के समय में बदलाव किया। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने भी सुरक्षा कारणों से 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए। पुलिस ने शुक्रवार को कहा था कि सीजेपी के प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस के अनुसार, आयोजकों ने पिछले प्रदर्शन के दौरान दिए गए आश्वासनों और कानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था। शनिवार को सीजेपी के नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया। तीनों नेता एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे थे। इसके अलावा, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। सीजेपी के एक्स अकाउंट पर किए गए पोस्ट के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब आठ बजे सादे कपड़ों में लगभग 50 पुलिसकर्मी ध्रुव राठी के आवास पर पहुंचे और उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया।
राहुल गांधी ने युवाओं से विरोध प्रदर्शन जारी रखने का किया आह्वान, बोले- हम पीछे हटने वाले नहीं

चेन्नई। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को युवा प्रदर्शनकारियों के समर्थन का भरोसा देते हुए कहा कि विपक्ष संविधान की रक्षा और उस पर हमला करने वालों को हराने के लिए अपना अभियान जारी रखेगा। चेन्नई दौरे के दौरान आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि अगर सरकार चाहे तो विपक्षी नेताओं और युवाओं को गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई। राहुल गांधी ने इस सरकार को डरपोक बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से वह एनडीए सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं और उनकी कार्यशैली को अच्छी तरह समझते हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि इन लोगों के लिए राजनीतिक और वैचारिक जगह लगातार कम हो रही है क्योंकि उनके विरोधी अपनी लड़ाई तेज कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा, “आप जितनी पुलिस तैनात करना चाहते हैं करिए, जितने नेताओं, युवाओं या विपक्षी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करना चाहते हैं करिए, लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।” उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जरूरी जानकारी मौजूद है, हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। राहुल गांधी ने जनता की आवाज की रक्षा करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि पिछले 10 से 15 वर्षों में देश के साथ जो हुआ, उसे दोहराने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने देश के युवाओं पर गर्व जताते हुए उनसे प्रदर्शन जारी रखने की अपील की और भरोसा दिलाया कि विपक्ष हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा। इस संबंध में राहुल गांधी ने अपने संबोधन का एक वीडियो भी साझा किया। बता दें कि दिल्ली में जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन का आह्वान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने किया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे 3,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा एहतियाती कार्रवाई के तहत 600 से अधिक ऐसे लोगों को भी हिरासत में लिया गया, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और नई दिल्ली क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू थी। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों को संदेश देते हुए कहा कि कांग्रेस और विपक्ष उनके साथ खड़ा रहेगा।
‘जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं’, राहुल गांधी का केंद्र पर हमला

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और चुनाव आयोग को लेकर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि वह पिछले एक दशक से अधिक समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ लड़ रहे हैं और उनके तौर-तरीकों को अच्छी तरह समझते हैं। राहुल गांधी ने कहा, “मैं नरेंद्र मोदी, आरएसएस और इनसे जुड़े लोगों के खिलाफ एक दशक से भी ज्यादा समय से लड़ रहा हूं। मैं अपने विरोधियों को उतनी अच्छी तरह समझता हूं, जितना कोई भी अपने प्रतिद्वंद्वी को समझता है। मैं इन्हें अंदर तक जानता हूं, इनकी हर चाल से वाकिफ हूं।” उन्होंने आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक विरोधियों की सबसे बड़ी पहचान ‘कायरता’ है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम लेते हुए कहा कि अब धीरे-धीरे उनके चारों तरफ का दायरा सिमट रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि गिरफ्तारी और सुरक्षा बलों के इस्तेमाल से विपक्ष की आवाज नहीं दबाई जा सकती। उन्होंने कहा, “जो करना है, कर लीजिए। जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए। सारे नेताओं को गिरफ्तार कर लीजिए, सारे युवाओं को गिरफ्तार कर लीजिए, हम सबको गिरफ्तार कर लीजिए। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।” राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके पास जरूरी जानकारी मौजूद है और उनकी लड़ाई संविधान तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने युवाओं से विरोध जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासन की आलोचना की है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी को ‘किले’ में बदल दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि युवाओं और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को उनके संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने से रोका जा रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश देश के हितों के खिलाफ हैं और सरकार आलोचनाओं से घबराई हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था यह दिखाती है कि सरकार विरोध प्रदर्शनों से परेशान है। उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। कांग्रेस का कहना है कि युवाओं, छात्रों और मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को लेकर उसका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
सीजेपी के आंदोलन पर रामदास आठवले बोले, ये प्रदर्शन बाबा साहब के संविधान के खिलाफ

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने राहुल गांधी और अभिजीत दिपके पर निशाना साधा। आठवले ने कहा कि यह आंदोलन संविधान के खिलाफ है और अराजकता को निमंत्रण दे रहा है, पुलिस का एक्शन सही है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा, “ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने का इनको अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने जो संविधान दिया है, उस संविधान के मुताबिक वो चीफ कमिश्नर बने हैं और चीफ कमिश्नर का सरकार से कोई संबंध नहीं होता है, उनको स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार होता है। चुनाव की लिस्ट ठीक से बनाना, चुनाव में जो गलत नाम हैं, उनको हटाना और हर एक को वोटिंग करने का अधिकार देना चुनाव आयोग का काम होता है।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कह रहे हैं कि 13 करोड़ लोगों के वोट काटे गए हैं। उनसे मेरा कहना है कि जहां आपके लोग हार गए हैं, वहां आप हम पर आरोप लगाते हैं कि हमारा वोट चोरी हो गया है, हमारा वोट आप लोगों ने चुरा लिया है। तो मुझे लगता है कि जब आप जहां चुन कर आते हैं तो चुनाव ठीक है, लेकिन जहां हमको सत्ता मिलती है तो आप आरोप लगाते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी से मेरा एक सवाल है कि जिस तरह आपने विरोध किया, आप राष्ट्रपति को भी जाकर मिले। राष्ट्रपति ने भी कहा कि वोट चोरी के जो साक्ष्य हैं, वो हमें दे दीजिए। तो मतलब वोट की चोरी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए और चुनाव आयोग को लिस्ट ठीक से बनाने की आवश्यकता है और इसलिए जो 13 करोड़ वोट काटे गए थे, उनमें से 6 करोड़ लोग ऐसे हैं जो स्थानांतरित हो चुके हैं। एक जगह से दूसरी जगह चले गए हैं, वहां उनका घर है, वहां उनकी नौकरी है, वहां उनका धंधा-पानी है तो ऐसे 6 करोड़ लोगों के नाम काट दिए गए। जहां वो रहते हैं, वहां तो उनका नाम है ही, वहां वो वोटिंग करते हैं। उन्होंने कहा कि तीन करोड़ लोग लापता हैं, मतलब उनके नाम तो वहां हैं, लेकिन उन्होंने कभी वोटिंग ही नहीं की, इसका मतलब वो गलत तरीके से नाम उस लिस्ट में हैं, वो नाम हटाए गए हैं। दो करोड़ लोग ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके वोट काटे गए हैं और एक करोड़ लोग ऐसे हैं जो गांव से शहर में आ गए हैं और शहर में भी उनका नाम है और गांव में भी नाम है। आठवले ने कहा कि वो एक करोड़ लोगों को काटा है तो इसलिए मुझे लगता है कि इस आरोप में तथ्य नहीं है। आप आंदोलन करके अराजकता को निमंत्रण दे रहे हैं, हिंसा को निमंत्रण दे रहे हैं। रोज हंगामा करके लोगों को तकलीफ दे रहे हैं। जब कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, हमें भी हिरासत में लिया जाता था, हमारे लोगों को पकड़ते थे, जेल में डालते थे, दस-पंद्रह दिन हम जेल में रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इसलिए आंदोलन शांति से करना चाहिए, लेकिन गलत मुद्दे पर आंदोलन करना बिल्कुल ठीक नहीं है। संविधान के विरोध में आंदोलन करना बिल्कुल ठीक नहीं है। यह आंदोलन, राहुल गांधी का और अभिजीत दिपके का आंदोलन जो है। यह बाबा साहब के संविधान के खिलाफ है। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा आप मांग रहे हैं, क्यों मांग रहे हैं इस्तीफा। केंद्रीय मंत्री आठवले ने कहा कि इसलिए मुझे लगता है कि जब हमारी सत्ता आती है तो इनको लगता है कि हमने वोट चोरी किया है। हम कैसे वोट चोरी कर सकते हैं, वहां लोग जाकर मतदान केंद्र पर अपना-अपना मतदान करते हैं। इसलिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे सामने विकास का एजेंडा है, हम विकास करते रहेंगे, आपको जो करना है आप करते रहें, लेकिन हमारी भूमिका यह है कि देश में अस्थिरता नहीं होनी चाहिए, देश में स्थिरता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम आदमी को किसी को तकलीफ बिल्कुल नहीं होनी चाहिए और उसके लिए पुलिस अपना एक्शन ले रही है और इसलिए आज जो सीजेपी का आंदोलन है, वो मतलब फेल हो चुका है, पुलिस ने उनको कई जगह रोक लिया है। मुझे लगता है कि सीजेपी नीट एग्जाम के पेपर लीक के मामले में स्थापित हुई थी, अभी हर विषय पर इस्तीफा मांग रही है। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रही है। पीएम के बारे में अभिजीत दिपके उल्टी-सीधी बातें करते हैं, तो यह अच्छी बात नहीं है।
हिमाचल कैबिनेट का बड़ा फैसला, 4090 पैरा कर्मचारियों की होगी नियुक्ति

शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शनिवार को हुई हिमाचल प्रदेश कैबिनेट बैठक में विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर भर्तियों और नई नियुक्तियों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने जल शक्ति विभाग में 4090 पैरा कर्मचारियों की नियुक्ति को मंजूरी दी। इनमें पैरा पंप ऑपरेटर, पैरा फिटर और मल्टीपर्पज वर्कर शामिल हैं। बैठक में 100 और स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए नई योजना तैयार की जाएगी। इन स्कूलों में नई योजना आधारित भर्ती के तहत 3,900 शिक्षकों और 900 गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों के पद भरे जाएंगे। इसके अलावा छूटे हुए एसएमसी शिक्षकों (पीजीटी और टीजीटी सहित) के लिए लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट (एलडीआर) परीक्षा आयोजित करने को भी मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने सरकारी स्कूलों में आउटसोर्स आधार पर कार्यरत शिक्षकों में से कंप्यूटर शिक्षकों के पद एलडीआर के माध्यम से भरने का फैसला किया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग में 500 असिस्टेंट स्टाफ नर्स के पद भरने की मंजूरी भी दी गई। शिक्षा विभाग में बैकलॉग कोटे के तहत 320 असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉलेज कैडर) पदों को भरने का निर्णय लिया गया। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में 172 मल्टी टास्क वर्कर नियुक्त किए जाएंगे। मेडिकल एजुकेशन विभाग में 30 रेडियोलॉजिस्ट, 13 क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और 6 परफ्यूजनिस्ट के पद भरने को मंजूरी दी गई। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण के तहत विभिन्न श्रेणियों के 27 पदों के साथ 11 मल्टी टास्क वर्कर पदों को भरने की मंजूरी भी दी गई। कैबिनेट ने डॉ. आरपीजीएमसी टांडा में 24 मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट/सुपर स्पेशलिस्ट) पदों को भरने का फैसला किया। इसके अलावा पशुपालन विभाग में 116 विभिन्न पद, बागवानी विभाग में 40 हॉर्टिकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर और 5 वरिष्ठ सहायक पदों को भरने की मंजूरी दी गई। दुर्गाशरण्य कांगड़ा अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान के लिए विभिन्न श्रेणियों के 26 नए पद सृजित कर उन्हें भरने का निर्णय लिया गया। स्वास्थ्य विभाग के आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में 10 रेडियोग्राफर तथा कोषागार, लेखा एवं लॉटरी विभाग में 18 सहायक कोषागार अधिकारियों की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई। कैबिनेट के इन फैसलों से राज्य में रोजगार के नए अवसर बढ़ने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण विभागों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
भारत में सेवादल का ‘एक्स’ अकाउंट बैन, कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

नई दिल्ली। भारत में कांग्रेस सेवादल के आधिकारिक एक्स अकाउंट को बैन कर दिया गया है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने ये जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दी। कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में बताया कि कांग्रेस सेवादल के आधिकारिक एक्स अकाउंट को भारत में बैन करा दिया गया है। सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। अब बहुत हुआ… सरकार का यह खेल ज्यादा दिन नहीं चलेगा। जनता सबक सिखाएगी। वहीं, राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने भारत के लोकतंत्र की बुनियाद को तबाह कर दिया है, चुनाव चोरी और जनता की आवाज कुचल कर। आज नई दिल्ली में यही तस्वीर दिखी, पूरा शहर बंद, इंटरनेट बंद, छात्रों को पुलिस भी पीट रही थी और भाजपा के गुंडे भी। उन्होंने कहा कि डराने की जितनी भी कोशिश कर लें, सरकार समझ नहीं पा रही कि 10-15 साल से चल रहा उनका खेल अब खत्म हो गया है। विपक्ष ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया है। आज जिन युवाओं और छात्रों पर हमला हुआ है, उन्हें इंसाफ मिलेगा, और हमलावरों को करारा जवाब मिलेगा। भारत के लोकतंत्र और संविधान को तबाह करने वाली सरकार और उनके साथी बच नहीं पाएंगे। इससे पहले लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक पोस्ट में कहा कि मैं इस सरकार जुड़े लोगों के खिलाफ एक दशक से भी ज्यादा समय से लड़ रहा हूं। मैं अपने विरोधियों को उतनी अच्छी तरह समझता हूं, जितना कोई भी अपने प्रतिद्वंद्वी को समझता है। मैं इन्हें अंदर तक जानता हूं, इनकी हर चाल से वाकिफ हूं। इन लोगों की सबसे बड़ी पहचान है कायरता। उन्होंने कहा कि इस कहानी के खलनायक अब धीरे-धीरे घिरते जा रहे हैं। इनके चारों तरफ से दायरा सिमट रहा है। जो करना है, कर लीजिए। जितनी पुलिस बुलानी है, बुला लीजिए, 10 हजार, 20 हजार, 50 हजार, जितनी चाहें बुला लीजिए। सारे नेताओं को गिरफ्तार कर लीजिए। सारे युवाओं को गिरफ्तार कर लीजिए। हम सबको गिरफ्तार कर लीजिए। राहुल गांधी ने कहा कि घबराइये मत—हम आपको चारों तरफ से घेर रहे हैं, और हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। मेरी बात याद रखिए—हमें जो जानकारी चाहिए, वह हमारे पास पहले से है। हम अपने संविधान की रक्षा करेंगे। हम हिंदुस्तान की जनता की आवाज की हिफाजत करेंगे और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पिछले 10-15 सालों में हिंदुस्तान के साथ जो हुआ है, वह दोबारा कभी, किसी भी सूरत में न हो। हिंदुस्तान के युवाओं, मुझे आप पर गर्व है। अपना विरोध जारी रखिए। हम आपके साथ खड़े हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस सरकार और हमारे संविधान पर हमला करने वालों को शिकस्त मिले।
ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा, हम पीछे नहीं हटेंगे: केसी वेणुगोपाल

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शनिवार को यहां कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने का प्रयास उनके पतन को और तेज करेगा। कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि हम भारतीय लोकतंत्र के अस्तित्व को लेकर चिंतित प्रत्येक भारतीय से अपील करते हैं कि वे सोमवार को दिल्ली में होने वाले विशाल विरोध प्रदर्शन में हमारे साथ शामिल हों, यह प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा रची गई राष्ट्रव्यापी वोट चोरी के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कल हमने इस प्रदर्शन की तैयारी के लिए विभिन्न नेताओं के साथ एक व्यापक बैठक की। भारत के सांसद, नेता, कार्यकर्ता और सभी जागरूक नागरिक ज्ञानेश एंड कंपनी के खिलाफ एक विशाल विरोध प्रदर्शन करेंगे, और हमारे वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल इस संकट में हस्तक्षेप के लिए मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञानेश को जाना ही होगा। हम पीछे नहीं हटेंगे। इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों से घबरा जाने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार प्रदर्शनकारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने से रोकने के लिए मेट्रो स्टेशनों को बंद करने जैसे कदम उठा रही है। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक तब तक जनता के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे जब तक कि चुनावी प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं हो जाती। इंडिया ब्लॉक ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से भी मिलने का फैसला किया है। वेणुगोपाल ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक चुनावी प्रणाली को खामियों से मुक्त किए जाने तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया के संचालन को लेकर उठ रही चिंताओं को दूर करने के बजाय केंद्र सरकार पर कुमार को बचाने का आरोप लगाया।
इजरायल के राष्ट्रपति ने कैप्टन स्मित मच्छार को प्रशंसा पत्र भेजा, यरुशलम आने का दिया न्योता

तेल अवीव। इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने शनिवार को भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को एक पत्र भेजा है। राष्ट्रपति हर्जोग ने 30 सितंबर, 2026 को फ्लाईदुबई के विमान को सुरक्षित उतारने और उस उड़ान में सवार यात्रियों के लिए बड़ी तबाही को टालने में उनकी असाधारण बहादुरी और दृढ़ संकल्प के लिए इजरायल की गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। अपने पत्र में राष्ट्रपति हर्जोग ने कैप्टन मच्छार के शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें यरूशलम आने का निमंत्रण दिया। कैप्टन मच्छार को राष्ट्रपति का यह पत्र अस्पताल में रिकवरी के दौरान मिला। इस हफ्ते की शुरुआत में उड़ान में सवार छह इजरायली नागरिकों की वीरता को सम्मानित करने और उन्हें असैन्य वीरता के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित करने के एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति हर्जोग ने अपनी चोटों से उबरने के बाद कैप्टन मच्छार को राष्ट्रपति पुरस्कार प्रदान करने के अपने इरादे की घोषणा की थी। पत्र में राष्ट्रपति हर्जोग ने गंभीर खतरे के सामने कैप्टन मच्छार के संयम की प्रशंसा की और लिखा “दर्द से ऊपर उठने, अपने जीवन के लिए तत्काल खतरे से लड़ने और सही निर्णय लेने की ताकत खोजने की आपकी क्षमता आपके चरित्र की मजबूती और आपके अंदर मौजूद महान शौर्य को दर्शाती है।” राष्ट्रपति हर्जोग ने कैप्टन मच्छार की बहादुरी को भारत और इजरायल के बीच ऐतिहासिक बंधन के संदर्भ में भी रखा और एक सदी से भी अधिक समय पहले पवित्र भूमि में लड़े भारतीय सैनिकों को याद किया। उन्होंने कहा, “आपकी वीरता आपको भारतीय सैनिकों की प्रतिष्ठित पंक्ति में रखती है, जिन्होंने 100 साल से भी अधिक समय पहले पवित्र भूमि के शहरों को आजाद कराने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी और हमेशा के लिए इजरायल के इतिहास का हिस्सा बन गए। आप भी कैप्टन , मच्छार अब से हमारे लोगों के इतिहास का एक अनमोल हिस्सा रहेंगे, जो भारत गणराज्य और इजरायल के बीच गर्मजोशी और जुड़ाव को और बढ़ाएगा।” पत्र के आखिर में, राष्ट्रपति हर्जोग ने लिखा, “जैसे-जैसे आप धीरे-धीरे ठीक होने की अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं, मुझे पता है कि आप संयुक्त अरब अमीरात में हमारे प्रिय मित्रों और साझेदारों के बेहतरीन हाथों में हैं। हम सभी आपके पूर्ण और शीघ्र स्वस्थ होने के लिए दिल से प्रार्थना करते हैं और मैं ताकत हासिल करने के बाद यरूशलम में आपका स्वागत करने और हमारे कृतज्ञ राष्ट्र के आभार और प्रेम को व्यक्त करने के लिए उत्सुक हूं।