उत्तरकाशी में महसूस हुए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.2 दर्ज

उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में शनिवार रात भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 4.2 दर्ज की गई। रात 8 बजकर 7 मिनट 30 सेकंड पर आए झटकों से जिले के कई हिस्सों में कुछ देर के लिए हलचल मच गई। जिला प्रशासन के अनुसार, भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी शहर से करीब दो किलोमीटर उत्तर पश्चिम दिशा में स्थित था। भूकंप की गहराई लगभग 11 किलोमीटर दर्ज की गई। झटके महसूस होते ही प्रशासन ने सभी तहसीलों और पुलिस थाना-चौकियों से स्थिति की जानकारी जुटाई। प्रशासन द्वारा किए गए प्रारंभिक आकलन में जिले में कहीं से भी किसी प्रकार के जन-धन के नुकसान की सूचना नहीं मिली है। मोरी और पुरोला तहसील क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस नहीं किए गए, जबकि अन्य क्षेत्रों से भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। भूकंप के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा और संभावित नुकसान की स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल पूरे जिले में स्थिति सामान्य है और सभी क्षेत्रों से कुशलता की सूचना प्राप्त हुई है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 6 अक्टूबर यानी मंगलवार की रात उत्तराखंड में भूकंप के झटकों से दहशत फैल गई थी। सबसे ज्यादा असर चमोली जिले में रहा, जहां रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.9 मापी गई। झटके इतने तेज थे कि पौड़ी गढ़वाल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल समेत कई जिलों में लोगों ने इसे महसूस किया। 8 अक्टूबर की शाम को महाराष्ट्र के पालघर जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर यह जानकारी दी। इसके मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 मापी गई, जो कम तीव्रता की श्रेणी में आती है। एनसीएस के अनुसार, भूकंप का समय 8 अक्टूबर, शाम 7 बजकर 16 मिनट 20 सेकेंड (आईएसटी) रहा। भूकंप का केंद्र अक्षांश 20.109 और देशांतर 72.948 पर स्थित था। जमीन से इसकी गहराई 7 किलोमीटर दर्ज की गई है। एजेंसी के अनुसार भूकंप का स्थान नासिक (महाराष्ट्र) से 88 किलोमीटर पश्चिम में था।
दिल्ली में सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा, 3,000 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए

नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच शनिवार को 3,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में सीजेपी नेता अभिजीत दिपके, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेता शामिल हैं। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जंतर-मंतर के आसपास अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा बना दिया, जिसके कारण प्रस्तावित प्रदर्शन छोटे-छोटे समूहों में बंट गया। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए राजधानी के कई हिस्सों में बैरिकेडिंग, ट्रैफिक डायवर्जन और अन्य प्रतिबंध लगाए गए। सीजेपी नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया। वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे थे। सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने कहा कि प्रदर्शनकारी रविवार को एक बार फिर जंतर-मंतर की ओर मार्च करेंगे और तब तक आंदोलन जारी रखेंगे, जब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त इस्तीफा नहीं दे देते। प्रशासन ने पहले ही इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिकारियों ने जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए हिंसक प्रदर्शन की पुनरावृत्ति रोकने के लिए इंटरनेट प्रतिबंध, सड़क अवरोध और यातायात डायवर्जन लागू किए थे। पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों को छत्रसाल स्टेडियम और विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया, जहां से शाम को उन्हें रिहा कर दिया गया। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया गया। सीजेपी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 8 बजे सादे कपड़ों में पहुंचे लगभग 50 पुलिसकर्मियों ने उन्हें अपने साथ ले लिया। शहर के कुछ इलाकों में हल्की झड़पों की भी सूचना मिली। झंडेवालान क्षेत्र में हिरासत में लिए गए लोगों को ले जा रही एक बस पर पथराव किया गया। वहीं आकाशवाणी भवन के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में 30,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए थे। जंतर-मंतर के आसपास के 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया। मध्य दिल्ली में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया तथा कई प्रमुख मार्गों पर यातायात नियंत्रण लागू किया गया। स्थिति को देखते हुए कई स्कूल, कॉलेज और अदालतों ने दिनभर के लिए ऑनलाइन मोड अपनाया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत महत्वपूर्ण स्थानों पर ड्रोन से निगरानी की गई। सुप्रीम कोर्ट और मंडी हाउस सहित कई मेट्रो स्टेशन बंद रहे। दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों की जांच की गई और बॉडी कैमरों से लैस पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर नजर रखी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट रविवार को एक विशेष सुनवाई कर सकता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली मेट्रो स्टेशनों और ट्रेन सेवाओं को व्यापक रूप से बंद करना न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। बताया जा रहा है कि न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर सकती है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आप नेता अरविंद केजरीवाल और सीजेपी पर राजनीतिक हितों के लिए राजधानी की शांति और सुरक्षा को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “दिल्ली को बंधक नहीं बनने दिया जाएगा और किसी को भी अराजकता फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का प्रयोग कर रहे युवाओं को हिरासत में लिए जाने की आलोचना की। उनका कहना था कि सरकार इस मुद्दे के उजागर होने से घबराई हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर कहा कि युवा, छात्र, वकील, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, किसान संगठनों के नेता, यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर सहित सरकार से सवाल पूछने वाले लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि देश की राजधानी को किले में तब्दील कर दिया गया है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। ममता बनर्जी को उनकी पार्टी के कई सांसदों के साथ साउथ एवेन्यू क्षेत्र से हिरासत में लिया गया, जबकि अरविंद केजरीवाल को उनके घर से बाहर निकलते ही हिरासत में ले लिया गया। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार वोट चोरी के मुद्दे को दबाना चाहती है, लेकिन देश की जनता ऐसा नहीं होने देगी।
सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई से भड़के अरविंद सावंत, बोले-ये अघोषित इमरजेंसी है

नई दिल्ली। सीजेपी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान नेताओं को डिटेन किए जाने पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने केंद्र सरकार और पुलिस पर तीखा हमला बोला। सावंत ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन संविधान का अधिकार है। हवाई जहाज से लोगों को पकड़कर डिटेन करना आतंकवादियों जैसा व्यवहार है और यह अघोषित इमरजेंसी है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा, ” ये कौन सा कानून है? हवाई जहाज में पकड़ के अंदर जाके डिटेन किया, समझ में नहीं आ रहा है, कोई आतंकवादी है क्या? इस देश में संविधान के तहत आंदोलन करने का अधिकार, अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने का अधिकार सभी को है। जब तक शांतिपूर्ण है तो आपको तकलीफ क्या है?” उन्होंने कहा, “जिस तरह से दो दिन पहले जब राहुल गांधी और सारे सांसद चुनाव आयोग के ऑफिस पर जा रहे थे हम लोग, उस वक्त भी पूरे दिल्ली में सारे रास्तों पर बैरिकेड लगा रखे थे और मेट्रो के सारे स्टेशन बंद थे। ये क्या है? ये इमरजेंसी के अलावा दूसरा कुछ नहीं है, अघोषित इमरजेंसी है। जो मर्जी आए करो।” शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता ने कहा कि जिस तरह से पुलिस बर्बरता कर रही है। पुलिस को भी ध्यान रखना चाहिए, ऊपर वाला है और किसी पर भरोसा नहीं है तो वो तुम्हारा सर्वोच्च न्यायालय है। इस देश की ताकत मतलब जनता है और जनता के मन में संविधान है, उस संविधान के तहत अगर कोई ऐसा करता है, जो बर्बरता आप कर रहे हैं, तो उसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे, इतना ध्यान में रखना। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने इतना भ्रष्टाचार किया, उसके ऊपर कार्रवाई नहीं, ये कौन सा कानून है, जबकि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने परसों तमाचा लगाया है कि एसआईआर के बारे में हमसे अनुमति नहीं ली थी। भ्रष्टाचार के कौन से सबूत चाहिए आपको? इस देश में जनतंत्र नहीं है अभी, सावधान। उन्होंने कहा कि यह अटल बिहारी की भाजपा नहीं है, न तो लालकृष्ण आडवाणी की भाजपा है, ये रंगा-बिल्ला की भाजपा है। इस बीजेपी से कानूनन कोई काम होगा? उनके दिमाग में पंजाब-हरियाणा का चुनाव है। उनके दिमाग में यूपी का चुनाव है, वो चुनाव को देखकर अपना ढोंग रचाते हैं।
पनामा में भूकंप के दो बड़े झटकों से दहशत का माहौल, भारत ने दिखाई एकजुटता

नई दिल्ली। मध्य अमेरिकी देश पनामा में शुक्रवार देर रात और शनिवार तड़के भूकंप के दो जबरदस्त झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इनकी तीव्रता 7.7 और 6.6 मापी गई। अचानक आए तेज झटकों से पूरे देश में दहशत फैल गई और लोग घरों से निकल आए। इस बीच भारत ने पनामा के प्रति एकजुटता दिखाई है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भूकंप के बाद भारत पनामा की सरकार और जनता के साथ खड़ा है। हमारी गहरी संवेदनाएं और प्रार्थनाएं सभी घायल और प्रभावित लोगों के साथ हैं, विशेष रूप से उन परिवारों के साथ जिन्होंने नुकसान और कठिनाइयों का सामना किया है।” वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भूकंप के बाद भारत पनामा की सरकार और लोगों के साथ एकजुटता दिखाता है। मध्य अमेरिकी देश पनामा में शुक्रवार देर रात लोगों ने शक्तिशाली भूकंप का सामना किया। इसका केंद्र जमीन से दस किलोमीटर की गहराई पर था। झटके महसूस होने के बाद हर तरफ दहशत का माहौल बन गया। डर के चलते लोग घरों से निकल आए। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.7 दर्ज की गई। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक स्थानीय समयानुसार शुक्रवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार शनिवार दोपहर 1 बजे ) तक, पनामा की राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा प्रणाली (एसआईएनएपीआरओसी) ने अपने दूसरे बुलेटिन में कहा कि 27 लोग घायल हुए हैं। शनिवार सुबह भी लोगों ने एक और खतरनाक भूकंप के झटके महसूस किए। दूसरे झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.6 मापी गई। भूकंप का केंद्र जमीन से दस किलोमीटर की गहराई पर ही था। भूकंप के असर से देश के मध्य भाग में इमारतें ढह गईं और सड़कों को भारी नुकसान हुआ है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, सीबीएस न्यूज ने रिपोर्ट किया कि शुक्रवार की सुबह पनामा के दक्षिणी छोर के पास 7.7 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया, जिससे राजधानी में 100 मील से अधिक दूर तक इमारतें हिल गईं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसके बाद 6.6 तीव्रता का एक और शक्तिशाली भूकंप आया। दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद पनामा के लोगों में दहशत का माहौल है। भूकंप का असर पनामा की राजधानी पनामा सिटी तक महसूस किया गया। भूकंप से कई इमारतों को नुकसान हुआ है। लोगों के घरों की दीवारों पर दरारें पड़ गईं। लोग डर के कारण घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। रात भर लोग खुले स्थानों पर खड़े रहे। दहशत के चलते लोगों में घरों के अंदर जाने की हिम्मत नहीं हुई। लोग सुबह तक घरों के बाहर ही रहे और हालात की जानकारी का इंतजार करते रहे। सीबीएस न्यूज ने रिपोर्ट के अनुसार, पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने कहा, “कोई भी तैयार नहीं था और इस तरह की आपदा के लिए कोई कभी तैयार नहीं होता।” राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने कहा कि शुक्रवार शाम तक अधिकारियों को किसी के मारे जाने या घायल होने की कोई जानकारी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि आने वाले घंटों में स्थिति बदल सकती है। सीबीएस न्यूज के अनुसार, यूएस पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने पहले पनामा के तट पर सुनामी की लहरें आने की चेतावनी दी थी, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी।
सभी मेट्रो और रेल सुविधाएं बहाल, स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार खुले

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन को लेकर लागू किए गए मेट्रो और रेल प्रतिबंधों को हटा लिया गया है। ये जानकारी दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने शनिवार रात को दी। डीएमआरसी ने ये जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दी। डीएमआरसी ने बताया कि दिल्ली मेट्रो नेटवर्क के सभी मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अब खुल गए हैं। सभी संबंधित मेट्रो स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं, भारतीय रेलवे की तरफ से बताया गया कि 11 अक्टूबर रात 12 बजे से सभी ट्रेन सेवाएं सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलेंगी। इससे पहले डीएमआरसी ने अपने अपडेट में बताया था कि सुरक्षा कारणों से शुक्रवार रात 9:00 बजे से बंद किए गए 45 मेट्रो स्टेशन आज रात 10:00 बजे (10 अक्टूबर) तक बंद रहेंगे। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति की समीक्षा करेंगी और आवश्यकतानुसार अपडेट साझा किए जाएंगे। बता दें कि दिल्ली प्रशासन ने घोषणा की थी कि प्रदर्शन को देखते हुए 57 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाएंगे। हालांकि, शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि मेट्रो और अन्य रेलवे सेवाओं का संचालन नियंत्रित और व्यवस्थित तरीके से जारी रखा जाए, ताकि आम जनता को कम से कम असुविधा हो। इसके बाद संशोधित एडवाइजरी में डीएमआरसी ने कहा था कि सुरक्षा कारणों से 45 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार निर्धारित अवधि के लिए बंद रहेंगे। सीजेपी प्रदर्शन के चलते जो मेट्रो स्टेशन सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, उनमें जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, लोक कल्याण मार्ग, राजीव चौक, नई दिल्ली, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, बाराखंबा रोड, आईटीओ, दिल्ली गेट, खान मार्केट, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, झंडेवालान, सुप्रीम कोर्ट, इंद्रप्रस्थ, शिवाजी स्टेडियम, दिल्ली हाट-आईएनए, हौज खास, जोर बाग, लाजपत नगर, जंगपुरा, आश्रम, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, चावड़ी बाजार, जामा मस्जिद, करोल बाग, राजेंद्र प्लेस, विश्वविद्यालय, कश्मीरी गेट, इंद्रलोक, गुरु तेग बहादुर नगर, नेताजी सुभाष प्लेस, आजादपुर, जहांगीरपुरी, हैदरपुर बादली मोड़, मजलिस पार्क, सीलमपुर, मौजपुर-बाबरपुर, जाफराबाद, वेलकम, यमुना विहार, खजूरी खास, शाहदरा और रिठाला स्टेशन शामिल हैं।