समाज को नहीं शासन को है खतरा, जंतर-मंतर पर धारा 163 लगाने पर भड़के कपिल सिब्बल

नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में बीएनएसएस की धारा 163 लागू करने और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर केंद्र सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने पूछा कि समाज के किसी वर्ग ने कोई शिकायत नहीं की, फिर खतरा किसे था? सिब्बल ने आरोप लगाया कि लोगों को गुप्त जगहों पर ले जाकर बेरहमी से पीटा जा रहा है। सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, “एक सवाल उठता है कि धारा 144 या बीएनएसएस की धारा 163 किसलिए लगाई जाती है। यह इसलिए लगाई जाती है ताकि समाज में कोई ऐसी घटना न हो जाए जिससे सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ जाए, मतलब सामाजिक व्यवस्था में इतनी गिरावट आ जाए कि लोगों की जान को खतरा हो। पुलिस को जानकारी होती है कि अगर ऐसा हुआ तो हिंसा होगी, हिंसा होगी तो हमें धारा 144 या 163 लगानी पड़ेगी और बात भी सही है, लगानी भी चाहिए।” उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि कई दिनों से ऐलान हुआ था कि हम 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेंगे और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध करेंगे, तो मुझे नहीं पता कि किसको खतरा था। अगर कोई भी व्यक्ति या समाज के लोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना चाहते हैं तो खतरा किसको है, समाज को तो नहीं है। लगता है शासन को खतरा है। उनके खतरे के लिए तो धारा 163 नहीं लगती है। सांसद ने कहा कि समाज के किसी वर्ग ने या किसी ने यह रिपोर्ट की हो कि भैया आप इनको मत आने दो, हमें खतरा है। किसी ने तो कुछ नहीं कहा। यह जम्मू-कश्मीर तो है नहीं कि वहां बाहर से लोग आ जाएंगे और समाज को खतरा हो जाएगा। धारा 144 या 163 लगाकर यह तो कह रहे हैं कि आप विरोध नहीं करेंगे। कपिल सिब्बल ने कहा कि दूसरी बात मैं पूछना चाहता हूं कि अगर कोई जंतर-मंतर आ भी गया तो आपने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब यह भी पता नहीं कि किस धारा के तहत गिरफ्तार किया कि धारा 144 या 163 का उल्लंघन हुआ है। आप उसे ऐसी जगह ले जाते हैं, जो किसी को पता ही नहीं है। कपिल सिब्बल ने कहा कि कानून में तो ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। आप किसी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार करो, आप ले जाओ, कोई बात नहीं, बता दीजिए कि कहां ले जा रहे हो। मुझे ऐसा लगता है कि यह सरकार समझती है कि हमें बड़ा खतरा है कि हिंदुस्तान की हर जगह से लोग आएंगे और फिर वह नारे लगाएंगे, चाहे वह शांतिपूर्ण नारे ही क्यों न हों। उन्होंने आगे कहा कि सारे देश के लोग देखेंगे कि जनता यहां इकट्ठा हो गई है तो हमें और खतरा होगा। ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना पड़ेगा और उसके बाद पता नहीं किसी और को इस्तीफा देना पड़े तो ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा के लिए ही नहीं, सरकार की अपनी सुरक्षा के लिए यह सब हो रहा है, यह अच्छी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि आप धारा 163 कैसे लगा सकते हैं? धारा 163 कहां से लगती है, यह बताइए मुझे। वहां तो धारा 163 लगा दी। अभिजीत दिपके हवाई जहाज में आ रहा था, आशुतोष राणा उनके साथ हैं, हवाई जहाज में जब आ रहे हैं तो उनको हवाई जहाज के अंदर जाकर गिरफ्तार कर लिया, वहां क्या खतरा है? वहां तो धारा 163 नहीं है, क्योंकि ये शांतिपूर्ण विरोध करना चाहते हैं। सांसद ने कहा कि आपको इसके लिए 28 बटालियन चाहिए, सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस चाहिए आपके लिए, हजारों-हजारों पुलिसकर्मी चाहिए। जिस तरह से बेरहमी से मारा जा रहा है और साथ ही उनको ले जाकर जहां भी हिरासत में रखा गया है, वहां भी पीटा जा रहा है, बेरहमी से पीटा जा रहा है। इनकी जो भी थोड़ी-बहुत इज्जत बची हुई है, वो भी खो देंगे।

मैं तैयार, आप भी अयोध्या से लड़िए चुनाव’, सीएम योगी को अखिलेश यादव का चैलेंज स्वीकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को बलरामपुर में विकास परियोजनाओं के बहाने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा कि वह भी वहां से चुनाव लड़कर अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 से पहले प्रदेश के इस क्षेत्र में पहचान का संकट, तस्करी और अपराधियों की अराजकता थी, जबकि अब विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। सीएम योगी ने बलरामपुर में 803 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 78 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एक वोट ने क्षेत्र की तस्वीर बदलने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जो वोट पहले पहचान के संकट और तस्करी से जोड़कर देखा जाता था, वहीं आज क्षेत्र की तरक्की और बदलाव का आधार बन रहा है। उनके मुताबिक, बलरामपुर जैसे आकांक्षात्मक जनपद को संभावनाओं वाले जिले के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव की ओर से अयोध्या को लेकर की गई राजनीतिक टिप्पणियों का जवाब दिया। सीएम योगी ने कहा, “मुझसे कहते हैं कि मुख्यमंत्री अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखा दें। अरे अखिलेश! अयोध्या हमारा पावन धाम है। मैं वहां इसलिए जाता हूं, ताकि अयोध्या के विकास में कोई कोताही न हो और उत्तर प्रदेश की पहचान पर कोई कलंक न लगे।” उन्होंने पिछली सपा सरकार पर अयोध्या में बिजली और स्वच्छता की स्थिति को लेकर भी आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस अयोध्या में पहले कुछ घंटे ही बिजली मिलने का दावा किया जाता था और जहां गंदगी का अंबार था, वहीं आज रामराज्य की अवधारणा का उदाहरण बनकर त्रेतायुग का स्मरण करा रही है। सीएम योगी ने अखिलेश यादव को सीधी चुनौती देते हुए कहा, “मैं आपको ऑफर करता हूं, आप भी अयोध्या से नामांकन करिए, मैं भी करता हूं। चलिए, एक बार किस्मत आजमा लिया जाए।” उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुकाबला सीधे होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि लड़ाई चेलों से क्यों हो, मुकाबला सामने होना चाहिए। उन्होंने सपा नेताओं पर माफिया के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जनता पहले भी ऐसे लोगों को जवाब दे चुकी है। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 2017 से पहले प्रदेश में अराजकता का माहौल था। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर माफिया पैर रख देता था, उस पर कब्जा हो जाता था। व्यापारियों को फोन करके धमकाया जाता था और उनकी संपत्तियों पर कब्जे किए जाते थे। सीएम योगी ने कहा कि उस समय बलरामपुर की सड़कें भी बेहद खराब थीं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में कानून-व्यवस्था और विकास को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में हो रहे बदलाव को विकास परियोजनाओं और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से देखा जा सकता है। विकास परियोजनाओं के जरिए बदलाव का दावा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाकर उन जिलों को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्हें पहले पिछड़ेपन और सीमित सुविधाओं के कारण जाना जाता था। उन्होंने बलरामपुर में 78 परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया। सीएम योगी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास को गांवों और आम लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने क्षेत्र में बदलाव का श्रेय जनता के समर्थन और सरकार की नीतियों को देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब अपराध और अराजकता के बजाय विकास तथा संभावनाओं की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ममता बनर्जी ने दिल्ली पुलिस पर लगाया ‘अपहरण’ का आरोप, थाने में धरने पर बैठीं

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके साथ मौजूद चार सांसदों को हिरासत में लेकर दो घंटे तक जेल वैन में घुमाया गया। ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि वह शनिवार रात कोलकाता नहीं लौटेंगी और विरोधस्वरूप सोमवार को विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के मार्च में शामिल होंगी। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “हमारे चार सांसदों के साथ हमने द्वारका नॉर्थ पुलिस स्टेशन में धरना शुरू कर दिया है, जहां हमें लाया गया है। हमारा अपहरण किया गया और दो घंटे तक जेल वैन में घुमाया गया।” उन्होंने कहा कि वह आज रात कोलकाता नहीं लौटेंगी। उन्होंने युवाओं और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई के विरोध में सोमवार को आईएनडीआईए के मार्च में शामिल होने की घोषणा की। इससे पहले टीएमसी की ओर से जानकारी दी गई थी कि ममता बनर्जी को दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ ने हिरासत में लिया है। वह मुंह पर बैंड-ऐड लगाकर विरोध-प्रदर्शन कर रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, मुंह पर बैंड-ऐड लगाना उनकी आवाज दबाए जाने के खिलाफ सांकेतिक विरोध था। प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी के बस में मौजूद होने के वीडियो भी सामने आए। बस के अंदर वह महिषासुर मर्दिनी का पाठ करती नजर आईं। उन्होंने ‘जागो दुर्गा, जागो दशप्रहरणधारिणी’ और ‘अभया शक्ति बलप्रदायिनी’ जैसी पंक्तियां गाईं। यह स्तोत्र बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान शक्ति और न्याय के प्रतीक के रूप में विशेष महत्व रखता है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले 254 सांसदों के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें कथित तौर पर अवैध तरीके से हिरासत में लिया गया, जिससे उनके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी की घेराबंदी कर दी गई, जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और शहर के सभी रास्तों पर पाबंदियां लगाई गईं। उन्होंने दावा किया कि ट्रेनें और मेट्रो रोकी गईं, इंटरनेट बंद किया गया और जगह-जगह चेक पोस्ट बनाए गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संवैधानिक अधिकार के तहत प्रदर्शन कर रहे युवक-युवतियों के साथ मारपीट की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि यदि यह सब इस बात का सबूत नहीं है कि चुनाव आयोग की मिलीभगत से चुनावों में धांधली की गई और सरकार अपनी वैधता पर उठ रहे सवालों तथा जवाबदेही की मांग से डरी हुई है, तो फिर क्या है? उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अब लोकतंत्र नहीं रह गया है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में तानाशाही चल रही है। प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने में सरकार के साथ सहयोग करने वाले सभी लोग राष्ट्र के खिलाफ देशद्रोह कर रहे हैं। इससे पहले शनिवार सुबह कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रवक्ता सौरव दास तथा आशुतोष रांका को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। ये तीनों प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस: सात में से एक व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से जूझ रहा

नई दिल्ली। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्लूएचओ) ने बताया है कि लगभग हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) की समस्या से जूझ रहा है। डब्लूएचओ ने एक्स पोस्ट में कहा, “जिन लोगों को खुद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव रहा है, वे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को हर स्तर पर बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, चाहे वह सेवाओं को डिज़ाइन करना हो, उन्हें लोगों तक पहुंचाना हो या उनमें सुधार करना हो। साथ मिलकर काम करके, अनुभव रखने वाले लोग और मानसिक स्वास्थ्य सिस्टम, पॉलिसी और रिसर्च में काम करने वाले विशेषज्ञ ऐसी देखभाल व्यवस्था बना सकते हैं जो व्यक्ति-केंद्रित हो, अधिकारों पर आधारित हो और जिसमें सम्मान को प्राथमिकता दी जाए। समुदाय-आधारित सेवाओं को मजबूत बनाएं, देखभाल की निरंतरता को बनाए रखें और हर बातचीत को सार्थक बनाएं।” वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे से पहले वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने एक नई गाइड जारी की है। इसका मकसद देशों की मदद करना है ताकि वे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के ऐसे मॉडल से हट सकें जिनमें मरीज़ों को लंबे समय तक मनोरोग अस्पतालों में रखा जाता है, और इसके बजाय समुदाय में ऐसी देखभाल अपना सकें जो लोगों के अधिकारों और पसंद का सम्मान करती हो। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे कई लोग अभी बड़े मनोरोग अस्पतालों और सोशल केयर संस्थानों में रह रहे हैं। इनमें से लगभग आधे लोगों को महीनों, सालों या दशकों तक बिना उनकी मर्जी के इन जगहों पर रखा जाता है, जिससे वे बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। इस प्रक्रिया को ‘डी-इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन’ (डीआई) कहा जाता है। इसमें उन लोगों की मदद की जाती है जिन्होंने मनोरोग अस्पतालों में लंबा समय (छह महीने या उससे ज़्यादा) बिताया है, ताकि वे अपने समुदाय में वापस लौट सकें और अच्छी जिंदगी जीने के लिए ज़रूरी देखभाल, मदद और मौके पा सकें। डब्लूएचओ के डायरेक्टर-जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा, “लगातार मानसिक स्वास्थ्य सहायता पाने के लिए लोगों को अपनी आजादी, सम्मान या समुदाय में अपनी जगह नहीं छोड़नी चाहिए। देशों को लंबे समय तक चलने वाली संस्थागत देखभाल पर निर्भरता कम करनी चाहिए और संस्थानों से निवेश हटाकर समुदाय में अधिकारों पर आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और सहायता की ओर तेज़ी से बढ़ना चाहिए।” कई देश समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन प्रगति एक जैसी नहीं है। डब्लूएचओ के ‘मेंटल हेल्थ एटलस’ से पता चला है कि रिपोर्ट करने वाले देशों में से केवल 9 फीसदी ही पूरी तरह से समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की ओर बढ़े हैं, जबकि आधे से ज्यादा (53 फीसदी) देश अभी भी सुधार के शुरुआती चरण में हैं। मनोरोग अस्पतालों में भर्ती होने वाले चार में से एक से ज़्यादा (28 फीसदी) लोग छह महीने से अधिक समय तक वहां रहे। स्वतंत्र ‘लिव्ड एक्सपीरियंस कंसल्टेंट’ और एडवोकेट ग्रेस गटेरा ने कहा, “कम्युनिटी-बेस्ड मेंटल हेल्थ केयर की ओर बढ़ने का काम उन लोगों के साथ मिलकर किया जाना चाहिए जो जानते हैं कि इंस्टीट्यूशनल केयर से गुजरने का क्या मतलब होता है, न कि सिर्फ उनके लिए। उनकी विशेषज्ञता, दूसरों की विशेषज्ञता के साथ मिलकर, ऐसी सेवाएं बनाने के लिए जरूरी है जो पसंद, रिकवरी और कम्युनिटी लाइफ में भागीदारी को बढ़ावा दें।” वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर डब्ल्यूएचओ सरकारों और सेवा प्रदाताओं से अपील की है कि वे इंस्टीट्यूशनल केयर से कम्युनिटी-बेस्ड मेंटल हेल्थ केयर की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करें और मेंटल हेल्थ सिस्टम को उन लोगों के साथ मिलकर बनाएं जिन्हें इसका निजी अनुभव है, न कि सिर्फ उनके लिए।

कांगो में इबोला पर आंशिक नियंत्रण, लेकिन खतरा अभी बरकरार: डब्ल्यूएचओ प्रमुख

जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने शनिवार को कहा कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला के खिलाफ लड़ाई में मजबूत प्रगति हुई है, और इसिरो के एक उपचार केंद्र से 25 ठीक हुए मरीजों को छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ क्षेत्रों में महामारी धीमी हो रही है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह अभी भी बढ़ रही है। टेड्रोस ने एक्स पर कहा कि डीआरसी में इबोला के खिलाफ लड़ाई में लगातार मजबूत प्रगति हो रही है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि बुंडीबुग्यो वायरस रोग (बीवीडी) से ठीक हुए 25 मरीज (13 महिलाएं और 12 पुरुष) को शुक्रवार को हौत-उएले प्रांत की राजधानी इसिरो में डब्ल्यूएचओ समर्थित इबोला उपचार केंद्र में उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से और मेडिसिन्स सैन्स फ्रंटियर्स (एमएसएफ) के साथ मिलकर उद्घाटन किए गए इस केंद्र में 10 बेड का विस्तार किया गया है, जिससे इसकी क्षमता बढ़कर 50 बेड हो गई है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र मरीजों की देखभाल को मजबूत करता है, साथ ही इसिरो जनरल रेफरल अस्पताल को अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते रहने में सक्षम बनाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसिरो अस्पताल को एक टन से अधिक चिकित्सा सामग्री भी प्रदान की, जिसमें ऑक्सीजन सामग्री, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए दस्ताने और मास्क, साथ ही बिस्तर और गद्दे शामिल हैं। टेड्रोस ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया में स्थित अपने नैदानिक ​​प्रशिक्षण केंद्र में अब तक 211 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया है और जल्द ही उत्तरी किवू में एक नया केंद्र खोलेगा। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों के टीकाकरण पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कल ही, दक्षिण कैरोलिना सरकार के नेतृत्व वाले टीकाकरण कार्यक्रम के तहत, हौत-उएले प्रांत के पहले 100 अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को एर्वेबो का टीका लगाया गया, जो इबोला जैरे स्ट्रेन से सुरक्षा प्रदान करने में सिद्ध हो चुका है, और वर्तमान प्रकोप का कारण बन रहे बुंडीबुग्यो वायरस रोग (बीवीडी) के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता का अध्ययन भी किया जा रहा है। इस प्रयास के तहत अब तक 9000 से अधिक अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को एर्वेबो का टीका लगाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि एमएसएफ और उसके साझेदारों ने बुंडीबुग्यो से होने वाली गंभीर बीमारी और मृत्यु को रोकने पर इसके प्रभाव का आकलन करने वाले ‘ब्रावो’ अध्ययन के हिस्से के रूप में कम से कम 870 अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को एर्वेबो का टीका लगाया है, जबकि डब्ल्यूएचओ एर्वेबो और बीवीडी-विशिष्ट टीकों दोनों के लिए एक वैक्सीन प्रभावकारिता मंच परीक्षण का समर्थन कर रहा है, जिसके आने वाले हफ्तों में शुरू होने की उम्मीद है। टेड्रोस ने कहा कि हालांकि कुछ क्षेत्रों में महामारी की रफ्तार धीमी होने के स्पष्ट संकेत हैं, लेकिन अन्य क्षेत्रों में यह अभी भी बढ़ रही है। इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि राहत कार्य को और बढ़ाया जाए और उन क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए जहाँ प्रकोप पहले से मौजूद है और जहाँ यह आगे बढ़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि डब्ल्यूएचओ डीआरसी सरकार और सभी साझेदारों को प्रकोप को यथाशीघ्र नियंत्रण में लाने के लिए सहयोग दे रहा है, साथ ही भविष्य में क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है ताकि समुदायों को भविष्य में होने वाले प्रकोपों ​​के खतरे से बचाया जा सके।

विजय एंटनी की ‘अप्पा कुट्टी’ 6 नवंबर को होगी रिलीज

चेन्नई। एक्टर, कंपोजर, एडिटर और फिल्ममेकर विजय एंटनी की अगली इमोशनल और कंटेंट-बेस्ड फिल्म ‘अप्पा कुट्टी’ दीपावली के मौके पर 6 नवंबर को रिलीज होगी। फिल्म के मेकर्स ने शनिवार को यह घोषणा की। मु. मारन द्वारा निर्देशित फिल्म पहले 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी। रिलीज की तारीख का पोस्टर शेयर करते हुए एक्टर विजय एंटनी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दीपावली पक्की हो गई है। ‘अप्पा कुट्टी’ 6 नवंबर से दुनियाभर के सिनेमाघरों में आ रही है। फिल्म की टीम से जुड़े सूत्रों ने पहले आईएएनएस को बताया था कि यह फिल्म एक एक्शन-फैमिली ड्रामा होगी, जिसमें इमोशन्स, रिश्तों और जबरदस्त पलों का बेहतरीन तालमेल होगा और साथ ही पिता और बेटी के गहरे रिश्ते को दिखाया जाएगा। विजय एंटनी ने कुछ दिन पहले ही सोशल मीडिया पर फिल्म का पहला पोस्टर शेयर किया था, तब उन्होंने कहा था कि एक जख्मी चेहरा, एक सुरक्षित कंधा, कभी-कभी प्यार ऐसा ही दिखता है। पेश है ‘अप्पा कुट्टी’ का पहला लुक। सूत्रों का कहना है कि डायरेक्टर मु. मारन ने ‘अप्पा कुट्टी’ को एक जबरदस्त एंटरटेनर के तौर पर बनाया है। इसमें एक्शन, इमोशन्स, पारिवारिक भावनाएं और दमदार ड्रामैटिक पल हैं जो दर्शकों को बहुत पसंद आएंगे। उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों के दिलों को छुएगी और साथ ही पूरी कहानी में रोमांचक और दिलचस्प सिनेमैटिक पल भी दिखाएगी। मेकर्स शुरू में इस फिल्म को इसी साल अगस्त में सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बना रहे थे। हालांकि उन्होंने पहले रिलीज की तारीख बढ़ाकर 16 अक्टूबर कर दी। अब उन्होंने फिल्म को 6 नवंबर को दिवाली पर रिलीज करने का फैसला किया है। विजय एंटनी के अलावा फिल्म में प्रीति असरानी, ​​लिथान्या, बागावती पेरुमल (बक्स), हरिप्रिया इसाई, अरुवी मधन, चित्रा लक्ष्मणन, श्रीजा रवि, वेट्टई मुथुकुमार, जेन्सन दिवाकर, मुरुगनाथम, मुन्नर रमेश, लिसी एंटनी, कुमार नटराजन, विजयन, प्रवीणा, हरिता और हरिप्रिया सहित कई मजबूत कलाकार नजर आएंगे। फिल्म के लिए संगीत अभिनेता विजय एंटनी ने दिया है, जिन्होंने फिल्म के संपादन का काम भी अपने ऊपर लिया है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी राजीव राजेंद्रन की है, जबकि प्रोडक्शन डिजाइन ए. राजा का है।

अनुष्का यादव ने हैमर थ्रो मीट रिकॉर्ड बेहतर किया; इलांगोवन ने पोल वॉल्ट में जीता गोल्ड

नई दिल्ली। 65वीं नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शनिवार को 18 वर्षीय हैमर थ्रोअर अनुष्का यादव ने मीट रिकॉर्ड तोड़ा। अनुष्का ने लोहे की गेंद को 66.53 मीटर की दूरी तक फेंकते हुए मंजू बाला के पांच साल पुराने रिकॉर्ड (64.42) को तोड़ दिया। अनुष्का यादव ने 62.21 मीटर, 65.75 मीटर, 66.47 मीटर, फाउल, 66.53 मीटर, 65.25 मीटर दूर थ्रो कीं। उनका पर्सनल बेस्ट 67.02 मीटर है और वह एशियन गेम्स 2026 में चौथे स्थान पर रही थीं। वहीं, महिलाओं के पोल वॉल्ट में एशियन गेम्स 2026 की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट बारानिका इलांगोवन (रेलवे) ने शनिवार को आसानी से जीत हासिल की। ​​उनकी बेस्ट जंप 4.10 मीटर थी। तीसरा दिन का परिणाम: मेंस: 5,000 मीटर दौड़: सुनील डावर (मध्य प्रदेश) 14:01.64 सेकंड, शिवाजी एम (रेलवे) 14:02.81, अजय बिंद (रेलवे) 14:03.86 ऊंची कूद: रोहित (रेलवे) 2.19 मीटर, जेसी संदेश (रेलवे) 2.16 मीटर, आदित्य रघुवंशी (मध्य प्रदेश) 2.16 मीटर गोला फेंक: करणवीर सिंह (पंजाब) 19.63 मीटर, संयम (रेलवे) 18.32 मीटर, अनुराग कलेर (रेलवे) 18.32 मीटर 4×100 मीटर रिले: एसएससीबी 39.76 सेकेंड, रेलवे 40.75 सेकेंड, हरियाणा 41.37 सेकेंड विमेंस: 10,000 मीटर: शंपा गेन (पश्चिम बंगाल) 35:33.90, सोनिया (उत्तराखंड) 35:35.36, ममता (अखिल भारतीय पुलिस) 35:38.25 लंबी कूद: मुबस्सिना मोहम्मद (ओएनजीसी) 6.38 मीटर, शैली सिंह (उत्तर प्रदेश) 6.37 मीटर, निधि (उत्तर प्रदेश) 6.28 मीटर पोल वॉल्ट: बरानिका एलंगोवन (रेलवे) 4.10 मीटर, मारिया जैसन (रेलवे) 3.90 मीटर, सिंधुश्री जी (कर्नाटक) 3.80 मीटर हैमर थ्रो: अनुष्का यादव (ओएनजीसी) 66.53 मीटर (रिकॉर्ड पूरा), हकीकत ग्रेवाल (पंजाब) 56.14 मीटर, कुलविंदर (रेलवे) 55.22 मीटर भाला फेंक: राम्याश्री जैन (रेलवे) 56.63 मीटर, संजना चौधरी (राजस्थान) 56.12 मीटर, दीपिका (हरियाणा) 54.07 मीटर 4×100 मीटर रिले: रेलवे 45.56 सेकंड, ओडिशा 45.57 सेकंड, तमिलनाडु 46.03 सेकंड मिक्स्ड 4×400 मीटर रिले: रेलवे 3:21.60 सेकंड, हरियाणा 3:22.43 सेकंड, राजस्थान 3:25.54 सेकंड ।

वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में सांस्कृतिक कूटनीति की शाम, कई देशों के राजदूतों ने लिया हिस्सा

वडोदरा। गुजरात के वडोदरा स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में कला, विरासत और सांस्कृतिक कूटनीति के संगम का एक खास आयोजन हुआ। इस मौके पर दुनिया भर के देशों के हेड्स ऑफ मिशन एक साथ नजर आए। इस पहल का मकसद भारतीय कला और वैश्विक संवाद को एक मंच पर लाना था। अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “गुजरात के वडोदरा में ऐतिहासिक लक्ष्मी विलास पैलेस में राजदूत के दौरे के दौरान दुनिया भर के सहयोगी मिशन प्रमुखों के साथ। इस शानदार पहल के लिए राजदूत मोनिका कपिल और सिद्धांत मोहता का आभारी हूं।” वहीं भारत में स्विट्जरलैंड की राजदूत माया तिस्साफी ने भी इस शाम का अनुभव साझा किया और एक्स पर लिखा, “गुजरात के वडोदरा में भव्य लक्ष्मी विलास पैलेस में कला, विरासत और सांस्कृतिक कूटनीति की एक शाम, दुनिया भर के साथी मिशन प्रमुखों की मौजूदगी में।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम में राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध कृतियों की नाटकीय प्रस्तुति की गई, जहां भारतीय विषयों और यूरोपीय यथार्थवाद का मंच पर सुंदर संगम देखने को मिला। यह प्रस्तुति ऐक्यम 2026 की थीम ‘रस और यथार्थवाद’ का सजीव प्रतिबिंब थी। तिस्साफी ने इस पहल के लिए एंबेसडर सिद्धांत मोहता और उनकी टीम के साथ-साथ महारानी राधिकराजे गायकवाड़ और महाराजा समरजीत सिंह गायकवाड़ का गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद किया। बता दें कि लक्ष्मी विलास पैलेस भारत के सबसे बड़े निजी आवासों में से एक है और इंडो-सरसेनिक वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है। गायकवाड़ राजवंश का यह पैलेस वडोदरा की सांस्कृतिक पहचान है। यहां विदेशी राजनयिकों का दौरा भारतीय सॉफ्ट पावर और विरासत कूटनीति को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में मौजूद राजदूतों की तस्वीर में पैलेस की रोशनी से जगमगाती भव्यता साफ दिखाई दे रही है, जिसके सामने सभी राजदूत एक साथ पोज देते नजर आए। ‘ऐक्यम 2026’ पहल के तहत इस तरह के आयोजन भारत की कला परंपरा को वैश्विक मंच पर पेश करने और भारत-विश्व के बीच सांस्कृतिक समझ को गहरा करने का काम कर रहे हैं। राजा रवि वर्मा, जिन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं को पश्चिमी चित्रकला तकनीक से जोड़ा था, उनकी कृतियों पर आधारित यह प्रस्तुति इसी सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक बनी।

गुरुद्वारा बंगला साहिब में प्रदर्शन को लेकर एचएस फूलका ने जताई साजिश की आशंका, आप पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। भाजपा नेता एचएस फुल्का ने 10 अक्टूबर को गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में हुए कथित विरोध प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम अचानक नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर जांच हो जाए तो गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में घुसे प्रदर्शनकारी आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता निकलेंगे। एचएस फुल्का ने कहा कि लंबे समय से जंतर-मंतर, बोट क्लब और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले लोग गुरुद्वारा बंगला साहिब में ठहरते रहे हैं, जहां उन्हें शरण और लंगर जैसी सुविधाएं मिलती रही हैं लेकिन इस बार स्थिति अलग रही और कुछ प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारा परिसर के भीतर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ लोग बैनर लेकर बैठे दिखाई दे रहे हैं और परिसर के भीतर भाषण दिए जा रहे हैं। फुल्का के अनुसार, सेवादारों द्वारा रोकने के बावजूद उनकी बात नहीं मानी गई और गुरुद्वारे के अंदर प्रदर्शन जारी रखा गया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है, जिसके तहत पुलिस को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर किया जाए और बाद में यह प्रचार किया जाए कि पुलिस गुरुद्वारे के अंदर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। एचएस फुल्का ने दावा किया कि इस घटनाक्रम के पीछे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की भूमिका हो सकती है, हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया और जांच की मांग की। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन समिति से भी आग्रह किया कि गुरुद्वारे की मर्यादा के उल्लंघन के मामले में उचित कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार, सेवादारों के मना करने के बावजूद परिसर में राजनीतिक भाषण देना और पोस्टर प्रदर्शित करना धार्मिक स्थल की मर्यादा के खिलाफ है। एचएस फुल्का ने कहा कि इस मामले से जुड़े वीडियो उपलब्ध हैं और पुलिस को संबंधित लोगों की पहचान कर पूरे घटनाक्रम की जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले हुए सीजेपी के आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा परिसर में गए थे, लेकिन उस समय इस प्रकार की गतिविधियां देखने को नहीं मिली थीं। भाजपा नेता ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

उत्तर प्रदेश: सपा के बबुआ अभी से बौखला गए हैं: सीएम योगी

बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अयोध्या से नामांकन करें, वह भी वहीं से चुनाव मैदान में उतरेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘लड़ाई चेलों से क्यों? लड़ाई तो आमने-सामने होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि अयोध्या उनकी आस्था की स्थली है और वहां हो रहे विकास कार्यों की निगरानी के लिए वह लगातार जाते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि अब अयोध्या में चुनावी मुकाबला भी आमने-सामने हो जाए। मुख्यमंत्री बलरामपुर के रेहरा बाजार विकासखंड के बिलरिया गांव में 803 करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने सपा अध्यक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सपा के बबुआ अभी से बौखला गए हैं। अभी तो विकास की शुरुआत हुई है, आगे बहुत कुछ होना बाकी है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में अयोध्या को तीन-चार घंटे बिजली मिलती थी। विकास में बाधाएं खड़ी की जाती थीं। आज वही अयोध्या रामराज्य के नए उदाहरण के रूप में त्रेतायुग का स्मरण करा रही है। उन्होंने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में 80 प्रतिशत सीटों पर भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए जीतेगा। विपक्ष के हिस्से अधिकतम 20 प्रतिशत सीटें ही आएंगी। मुख्यमंत्री योगी ने सीमावर्ती क्षेत्र में तस्करी और अवैध गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां किसी छांगुर जैसे व्यक्ति को पनपने नहीं दिया जाएगा। किसी को डेमोग्राफी बदलने की छूट नहीं मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सपा सरकार में यह क्षेत्र तस्करी और अपराधियों की गतिविधियों का केंद्र बन गया था। अब वही क्षेत्र विकास की नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारों में माफिया और अपराधियों को संरक्षण मिलता था। अपराधियों के हौसले बुलंद थे और आम नागरिक भय के माहौल में रहते थे। अब प्रदेश में कानून का राज है। उन्होंने कहा कि सरकार अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। किसी माफिया को कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जाएगी। बेटियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के लिए जेल या जहन्नुम के अलावा तीसरा रास्ता नहीं है। सपा पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उसका पीडीए वास्तव में ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है। इसका दूसरा अर्थ ‘प्रदेश डुबाऊ अलायंस’ भी है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने दलितों, पिछड़ों और अन्य वर्गों की उपेक्षा की। एक सीट परिवार के सदस्य को दी गई, जबकि दूसरी धनबल के आधार पर बांटी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के एजेंडे में परिवार के बाहर किसी के लिए स्थान नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस और सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव जीतने पर ये दल इसे अपना पुरुषार्थ बताते हैं, जबकि हारने पर ईवीएम को दोष देते हैं। चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करते हैं और न्यायालय पर टिप्पणी करते हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर भ्रष्टाचार, दंगों और अपराधियों को संरक्षण देने के आरोप लगाए। कहा कि प्रदेश में अब कोई दंगा नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आपदा में जनहानि होने पर पीड़ित परिवार को 24 घंटे के भीतर मुआवजा देने का निर्णय लिया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि अथवा पशुहानि होने पर भी अगले 24 घंटे में मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश के साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में बलरामपुर के लिए दस हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की धनराशि भेजी गई है। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय का सत्र शुरू हो चुका है। भवन तैयार होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है। रिंग रोड, चीनी मिल विस्तार, थारू संग्रहालय और मथुरा घाट पुल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बलरामपुर को विकास के मामले में पिछड़ने नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी ने विभागीय प्रदर्शनियां देखीं और छात्रा के विज्ञान मॉडल की सराहना की। एक बच्चे का अन्नप्राशन कराया। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना में विकास यादव और मोहम्मद शादाब को लैपटॉप दिए। किरण वर्मा और हिमांश यादव को कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए चार-चार लाख रुपये की सहायता से संबंधित चाबियां सौंपीं। अजय कुमार पाल, हसन रजा और गुफरान अंसारी को युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत पांच-पांच लाख रुपये के चेक दिए। किसना देवी और ननका देवी को आवास स्वीकृति पत्र तथा गुड़िया वर्मा और पिंकी को आजीविका मिशन के तहत 45 लाख रुपये का चेक दिया। बलरामपुर विधायक पल्टूराम ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश विकास के रास्ते पर है। उन्होंने 2027 में सभी 403 विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत का दावा करते हुए लोगों से योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने का आह्वान किया। उतरौला विधायक रामप्रताप वर्मा ने कहा कि 2017 से पहले व्यापारी और महिलाएं भय के माहौल में रहते थे। योगी सरकार ने अपराधियों और माफिया के खिलाफ कार्रवाई कर प्रदेश में शिक्षा और विकास को गति दी है।